आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 161

प्रतिनिधि निर्धारिती का दायित्व

धारा

धारा संख्या

161

अध्याय शीर्षक

अध्याय XV - विशेष मामले में देयता

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

प्रतिनिधि निर्धारिती का दायित्व

प्रतिनिधि निर्धारिती का दायित्व

प्रतिनिधि निर्धारिती का दायित्व

161. (1) प्रत्येक प्रतिनिधि निर्धारिती उस आय के संबंध में जिसकी बाबत वह प्रतिनिधि निर्धारिती है, वैसे ही कर्त्तव्यों, उत्तरदायित्वों और दायित्वों के अधीन होगा जैसे कि वह होता यदि वह आय फायदाप्रद रूप में उसके द्वारा प्राप्त या उसको या उसके पक्ष में प्रोद्भूत आय होती है और उस आय की बाबत वह स्वयं अपने नाम में निर्धारण के दायित्वाधीन होगा; किंतु ऐसा कोर्इ निर्धारण उस पर उसकी प्रतिनिधिक हैसियत में ही किया गया समझा जाएगा और वह कर, इस अध्याय में अन्तर्विष्ट उन उपबंधों के अंतर्गत रहते हुए, उस पर उद्गृहीत और उससे वसूल उस रीति में और उसी परिमाण तक किया जाएगा जिसमें और जिस तक कि वह उस व्यक्ति पर उद्गृहीत और उससे वसूल किया जाता जिसका वह प्रतिनिधित्व करता है।

(1क) उपधारा (1) में की किसी बात के होते हुए भी, जहां कोर्इ आय जिसकी बाबत धारा 160 की उपधारा (1) के खंड (iv) में उल्लिखित व्यक्ति, प्रतिनिधि निर्धारिती के रूप में दायी है, कारबार के लाभ और अभिलाभ से मिलकर बनती है या जिसमें कारबार के लाभ और अभिलाभ सम्मिलित हैं, वहां उस संपूर्ण आय पर जिसकी बाबत ऐसा व्यक्ति इस प्रकार दायी है, आय कर अधिकतम मार्जिन दर से प्रभारित किया जाएगा :

परन्तु इस उपधारा के उपबंध वहां लागू नहीं होंगे जहां ऐसे लाभ और अभिलाभ किसी व्यक्ति द्वारा उस पर पोषण और भरण पोषण के लिए आश्रित किसी नातेदार के अनन्यत: फायदे के लिए विल द्वारा घोषित न्यास के अधीन प्राप्य है और ऐसा न्यास उसके द्वारा घोषित एकमात्र न्यास है।

(2) जहां कोर्इ व्यक्ति, प्रतिनिधि निर्धारिती की हैसियत में किसी आय की बाबत इस अध्याय के अधीन निर्धार्य है, वहां वह उस आय की बाबत इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन निर्धारित नहीं किया जाएगा।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

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