वेतन
क. वेतन
वेतन
3215. 33निम्नलिखित आय ''वेतन'' शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य होगी—
(क) पूर्ववर्ष में किसी निर्धारिती को नियोजक या पूर्व नियोजक द्वारा देय34 कोर्इ वेतन, चाहे संदत्त34 हो या नहीं;
(ख) नियोजक या पूर्व नियोजक द्वारा या उसकी ओर से पूर्ववर्ष में उसे देय न होते हुए भी या उसे देय होने से पूर्व उसे संदत्त34 या अनुज्ञात34 कोर्इ वेतन;
(ग) नियोजक या पूर्व नियोजक द्वारा या उसकी ओर से पूर्ववर्ष में उसे संदत्त या अनुज्ञात वेतन का बकाया, यदि किसी पूर्वतर पूर्ववर्ष में आय-कर से प्रभारित न हुर्इ हो।
35[स्पष्टीकरण 1].–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां अग्रिम रूप से संदत्त वेतन किसी पूर्ववर्ष के लिए किसी व्यक्ति की कुल आय में सम्मिलित किया जाता है वहां उसे वेतन देय हो जाने पर उस व्यक्ति की कुल आय में पुन: सम्मिलित नहीं किया जाएगा।
36[स्पष्टीकरण 2.–किसी फर्म के भागीदार को उस फर्म द्वारा देय या प्राप्त कोर्इ वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक, चाहे वह किसी भी नाम से जाना जाता हो, इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ''वेतन'' नहीं समझा जाएगा।]
32. परिपत्र सं. 2(LVIII-32)-डी/1966, तारीख 21.2.1966, परिपत्र सं. 293, तारीख 10.2.1981, पत्र [फा.सं. 45/118/66-आर्इ.टी.जे.], तारीख 21.8.1967, परिपत्र सं. 309, तारीख 3.7.1981, पत्र सं. 35/1/65-आर्इ.टी.(बी.), तारीख 5.11.1965, परिपत्र सं. 312, तारीख 31.8.1981 और पत्र फा.सं. 40/29/67-आर्इ.टी.(ए-I), तारीख 22.5.1967 भी देखिये। ब्यौरे के लिए, देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
33. सुसंगत केस लाज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
34. ''देय'', ''संदत्त'' और ''अनुज्ञात'' पदों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.
35. वर्तमान स्पष्टीकरण वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से स्पष्टीकरण 1 के रूप में पुन:संख्यांकित।
36. यथोक्त द्वारा अन्त:स्थापित। इससे पहले, स्पष्टीकरण 2 प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987/1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित तथा उसका लोप किया गया था।
[वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

