पहचान विहीन निर्धारण
कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से धारा 144क के पश्चात् धारा 144ख अंत:स्थापित की जाएगी
पहचान विहीन निर्धारण.
144ख. (1) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों में, तत्प्रतिकूल में अंतर्विष्ट प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी उपधारा (2) में निर्दिष्ट मामलों का धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 144 के अधीन निर्धारण निम्नलिखित प्रक्रिया के अनुसार पहचान विहीन रीति में किया जाएगा, अर्थात् :—
(i) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र, धारा 143 की उपधारा (2) के अधीन निर्धारिती पर सूचना की तामील करेगा ;
(ii) निर्धारिती, खंड (i) में निर्दिष्ट सूचना प्राप्त होने की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर, राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र को अपना प्रत्युत्तर फाइल कर सकेगा ;
(iii) जहां निर्धारिती ने—
(क) धारा 139 के अधीन या धारा 142 की उपधारा (1) या धारा 148 की उपधारा (1) के अधीन जारी किसी सूचना के प्रत्युत्तर में अपनी आय की विवरणी दी है और धारा 143 की उपधारा (2) के अधीन सूचना, यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या विहित आय-कर प्राधिकारी द्वारा जारी की गई है ; या
(ख) निर्धारण अधिकारी द्वारा धारा 142 की उपधारा (1) के अधीन जारी किसी सूचना के प्रत्युत्तर में अपनी आय की विवरणी नहीं दी है ; या
(ग) धारा 148 की उपधारा (1) के अधीन अपनी आय की विवरणी नहीं दी है और निर्धारण अधिकारी द्वारा धारा 142 की उपधारा (1) के अधीन सूचना जारी की गई है,
वहां राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र, निर्धारिती को यह सूचित करेगा कि उसके मामले में निर्धारण इस धारा के अधीन अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा ।
(iv) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र, इस धारा के अधीन पहचान विहीन निर्धारण के प्रयोजनों के लिए चयनित मामलों को, स्वचालित आबंटन प्रक्रिया के माध्यम से किसी एक क्षेत्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र में विनिर्दिष्ट निर्धारण इकाई को सौंपेगा ;
(v) जहां कोई मामला निर्धारण इकाई को सौंपा जाता है, वहां वह राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र से, —
(क) निर्धारिती या किसी अन्य व्यक्ति से, ऐसी और जानकारी, दस्तावेज या साक्ष्य, जो विनिर्दिष्ट किए जाएं, अभिप्राप्त करने का ;
(ख) सत्यापन इकाई द्वारा कतिपय जांच या सत्यापन करने का ;
(ग) तकनीकी इकाई से तकनीकी सहायता प्राप्त करने का,
अनुरोध कर सकेगी ।
(vi) जहां निर्धारण इकाई द्वारा निर्धारिती या किसी अन्य व्यक्ति से और जानकारी, दस्तावेज या साक्ष्य के लिए अनुरोध किया गया है, वहां राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र, निर्धारिती या किसी अन्य व्यक्ति को अध्यापेक्षित जानकारी, दस्तावेज या साक्ष्य अभिप्राप्त करने के लिए समुचित सूचना या अध्यपेक्षा जारी करेगा ;
(vii) यथास्थिति, निर्धारिती या कोई अन्य व्यक्ति, खंड (vi) में निर्दिष्ट सूचना के प्रति अपना प्रत्युत्तर, उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर या ऐसे समय के भीतर, जो इस संबंध में आवेदन के आधार पर विस्तारित किया जाए, राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र को फाइल करेगा ;
(viii) जहां मूल्यांकन इकाई द्वारा कतिपय जांच या सत्यापन करने का अनुरोध निर्धारण इकाई द्वारा किया गया है, वहां अनुरोध राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र द्वारा स्वचालित आबंटन प्रणाली के माध्यम से किसी एक क्षेत्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र में किसी सत्यापन इकाई को सौंपा जाएगा ।
(ix) जब निर्धारण यूनिट द्वारा तकनीकी यूनिट द्वारा तकनीकी सहायता के लिए किया गया कोई अनुरोध प्राप्त होता है तो अनुरोध को राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र द्वारा स्व:चालित आबंटन प्रणाली के माध्यम से किसी एक प्रादेशिक पहचान विहीन निर्धारण केंद्र में तकनीकी यूनिट को समनुदेशित किया जाएगा ;
(x) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्रखंड (viii) खंड (ix) में निर्दिष्ट अनुरोध के आधार पर सत्यापन यूनिट या तकनीकी यूनिट से प्राप्त रिपोर्ट को संबंधित निर्धारण यूनिट को भेजेगा ;
(xi) जब निर्धारिती खंड (vi) में निर्दिष्ट नोटिस या धारा 142 की उपधारा (1) के अधीन जारी नोटिस या धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन जारी निदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है तब राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र ऐसे निर्धारिती पर धारा 144 के अधीन एक नोटिस की उसे नोटिस में विनिर्दिष्ट तारीख और समय पर हेतुक उपदर्शित करने का अवसर देते हुए तामील करेगा कि क्यों न उसकी दशा में निर्धारण को उसकी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार पूरा किया जाना चाहिए ;
(xii) निर्धारिती खंड (xi) में निर्दिष्ट नोटिस में विनिर्दिष्ट समय के भीतर या ऐसे समय के भीतर, जिसका इस निमित्त किए गए आवेदन के आधार पर विस्तार किया जाए, अपना प्रत्युत्तर राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र को फाइल करेगा ;
(xiii) जब निर्धारिती खंड (xi) में निर्दिष्ट नोटिस का प्रत्युत्तर उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर या विस्तारित समय के भीतर, यदि कोई हो, प्रत्युत्तर फाइल करने में असफल रहता है, राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र ऐसी असफलता से निर्धारण यूनिट को संसूचित करेगा ;
(xiv) निर्धारण यूनिट अभिलेख पर उपलब्ध सभी सुसंगत सामग्री को गणना में लेते हुए, यथास्थिति, एक प्रारूप निर्धारण आदेश करेगा या जहां खंड (xiii) निर्दिष्ट संसूचना राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र से प्राप्त होती है, अपने सर्वोत्तम निर्णय के अनुसारएक लिखित प्रारूप निर्धारण आदेश द्वारा उक्त आय या राशि में परिवर्तन करते हुए या तो निर्धारिती द्वारा उसकी विवरणी के अनुसार आय या संदेय राशिया प्रतिदेय को स्वीकार करेगा और ऐसे आदेश की एक प्रति राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र को भेजेगा ;
(xv) निर्धारण यूनिट प्रारूप निर्धारण आदेश करते समय उसमें संस्थित की जाने वाली शास्ति कार्यवाहियों, यदि कोई हो, के ब्यौरे उपलब्ध कराएगी ;
(xvi) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट जोखिमप्रबंधन रणनीति, जिसके अंतर्गत स्वचालित जांच टूल हैं, के अनुसार प्रारूप निर्धारण आदेश की जांच करेगा । तत्पश्चात् वह—
(क) प्रारूप निर्धारण आदेश के अनुसार निर्धारिती के हित में किसी प्रतिकूल फेरफार का प्रस्ताव न किए जाने की दशा में ऐसे आदेश और नोटिस की शास्ति कार्यवाहियां, यदि कोई हो, संस्थित करने के लिएऐसे निर्धारण के आधार पर निर्धारिती द्वारा संदेय राशि या उसको प्रतिदेय किसी रकम को विनिर्दिष्ट करते हुए,मांग सूचना के साथ निर्धारिती को तामील करेगा ;
(ख) निर्धारिती के हित में किसी प्रतिकूल फेरफार का प्रस्ताव किए जाने की दशा में निर्धारिती को यह उपदर्शित करने के लिए कि क्यों न प्रस्तावित फेरकार किया जाना चाहिए, हेतुक उपदर्शित करने के नोटिस की तामील करके एक अवसर प्रदान करेगा ;
(ग) प्रारूप निर्धारण आदेश कोपुनर्विलोकन के लिए स्वचालित आबंटन प्रणाली के माध्यम से ऐसे आदेश का पुनर्विलोकन संचालित करने के लिए प्रादेशिक पहचान विहीन निर्धारण केंद्र को समनुदेशित करेगा ;
(xvii) पुनर्विलोकन यूनिट उसे राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र द्वारा निर्दिष्ट प्रारूप निर्धारण आदेश का पुनर्विलोकन संचालित करेगी, तत्पश्चात् वह—
(क) प्रारूप निर्धारण आदेश से सहमति का विनिश्चय कर सकेगा और राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र ऐसी सहमति से संसूचित करेगा ; या
(ख) प्रारूप निर्धारण आदेश में ऐसे फेरफार का सुझाव देने का विनिश्चय करेगा, जो वह ठीक समझे और सुझावों को राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र भेजेगा ;
(xviii) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र पुनर्विलोकन यूनिट से सहमति प्राप्त होने पर निम्नलिखित में अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करेगा—
(क) खंड (xvi) के उपखंड (क) में ; या
(ख) खंड (xvi) के उपखंड (ख) में ;
(xix) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र पुनर्विलोकन यूनिट से फेरफार के सुझाव प्राप्त होने पर मामले को उस निर्धारण यूनिट,जिसने प्रारूप निर्धारण आदेश किया था, से भिन्न किसी अन्य निर्धारण यूनिट को स्व:चालित आबंटन प्रणाली के माध्यम से समनुदेशित करेगा ;
(xx) निर्धारण यूनिट, पुनर्विलोकन यूनिट द्वारा सुझाए गए फेरफार पर विचार करने के पश्चात् अंतिम प्रारूप निर्धारण आदेश को राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र भेजेगा ;
(xxi) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र अंतिम प्रारूप निर्धारण आदेश प्राप्त होने पर निम्नलिखित में अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करेगा—
(क) खंड (xvi) के उपखंड (क) में ; या
(ख) खंड (xvi) के उपखंड (ख) में ;
(xxii) निर्धारिती उस दशा में, जहां उस पर खंड (xvi) के उपखंड (ख) में अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार हेतुक उपदर्शित करने के नोटिस की तामील की गई थी अपने प्रत्युत्तर को राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र को नोटिस में विनिर्दिष्ट तारीख और समय या विस्तारित समय, यदि कोई हो, को या उससे पूर्व प्रस्तुत करेगा ;
(xxiii) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र,—
(क) जब खंड (xxii) के अनुसार हेतुक उपदर्शित करने के नोटिस का कोई प्रत्युत्तर प्राप्त नहीं होता है,—
(अ) उस दशा में, जहां प्रारूप निर्धारण आदेश या अंतिम प्रारूप निर्धारण आदेश किसी पात्र निर्धारिती के संबंध में है और कोई फेरफार करने का प्रस्ताव करता है, जो कि उक्त निर्धारिती के हित के प्रतिकूल है, प्रारूप निर्धारण आदेश या अंतिम प्रारूप निर्धारण आदेश को ऐसे निर्धारिती को अग्रेषित करेगा ; या
(आ) किसी अन्य दशा में, प्रारूप निर्धारण आदेश या अंतिम निर्धारण आदेश के अनुसार निर्धारण को अंतिम रूप देगा और शास्ति कार्यवाहियां, यदि कोई हों, संस्थित करने के लिए ऐसे आदेश और नोटिस की प्रति की मांग सूचना के साथ निर्धारिती द्वारा संदेय राशिया ऐसे निर्धारण के आधार पर निर्धारिती को देय किसी रकम के प्रतिदाय को विनिर्दिष्ट करते हुए तामील करेगा ;
(ख) किसी अन्य दशा में निर्धारिती से प्राप्त प्रत्युत्तर को निर्धारण यूनिट को भेजेगा ;
(xxiv) निर्धारण यूनिट निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत प्रत्युत्तर को गणना के लेते हुए एक पुनरीक्षित प्रारूप निर्धारण आदेश करेगा और उसे राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र को भेजेगा ;
(xxv) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र पुनरीक्षित प्रारूप निर्धारण आदेश प्राप्त करने पर,—
(क) पुनरीक्षित प्रारूप निर्धारण आदेश में प्रस्तावित फेरफार के प्रारूप निर्धारण आदेश या अंतिम प्रारूप निर्धारण आदेशकी तुलना में निर्धारिती के हित में प्रतिकूल न होने की दशा में, और—
(अ) यदि पुनरीक्षित प्रारूप निर्धारण आदेश किसी पात्र निर्धारिती के संबंध में है और प्रारूप निर्धारण आदेश या अंतिम प्रारूप निर्धारण आदेश में निर्धारिती के हित में किसी प्रतिकूल फेरफार का प्रस्ताव किया गया है तो उक्त पुनरीक्षित प्रारूप निर्धारण आदेश को ऐसे निर्धारिती को अग्रेषित करेगा ;
(आ) किसी अन्य दशा में, निर्धारण को पुनरीक्षित प्रारूप निर्धारण आदेश के अनुसार अंतिम रूप देगा और ऐसे आदेश और सूचना की शास्ति कार्यवाहियां, यदि कोई हों, संस्थित करने के लिए ऐसे आदेश और नोटिस की प्रति की मांग सूचना के साथ निर्धारिती द्वारा संदेय राशिया ऐसे निर्धारण के आधार पर निर्धारिती को देय किसी रकम के प्रतिदाय को विनिर्दिष्ट करते हुए तामील करेगा ;
(ख) प्रारूप निर्धारण आदेश में फेरफार के पुनरीक्षित प्रारूप निर्धारण आदेश में या अंतिम प्रारूप निर्धारण आदेशकी तुलना में निर्धारिती के हित के प्रतिकूल होने की दशा में निर्धारिती को उसे यह हेतुक उपदर्शित करने के नोटिस की क्यों न प्रस्तावित फेरफार किया जाना चाहिए, एक अवसर प्रदान करेगा ;
(xxvi) खंड (xxiii), खंड (xxiv) और खंड (xxv) में अधिकथित प्रक्रिया आवश्यक उपांतरणों सहित खंड (xxv) के उपखंड (ख) में निर्दिष्ट नोटिस को लागू होगी ;
(xxvii) जब प्रारूप निर्धारण आदेश या अंतिम प्रारूप निर्धारण आदेश या पुनरीक्षित प्रारूप निर्धारण आदेश खंड (xxiii) के खंड (क) की मद (अ) या खंड (xxv) के उपखंड (क) की मद (अ) के अनुसार पात्र निर्धारिती को अग्रेषित किया जाता है तो ऐसा निर्धारिती धारा 144ग की उपधारा (2) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर फेरफार की अपनी स्वीकृति को राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र को फाइल करेगा ;
(xxviii) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र,—
(क) खंड (xxvii) के अनुसार स्वीकृति की प्राप्ति पर ; या
(ख) यदि पात्र निर्धारिती से धारा 144ग की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर कोई आक्षेप प्राप्त नहीं होता है,
तो धारा 144ग की उपधारा (4) के अधीन अनुज्ञात समय के भीतर निर्धारण को अंतिम रूप देगा और ऐसे आदेश और नोटिस की प्रति की शास्ति कार्यवाहियां, यदि कोई हों, संस्थित करने के लिएऐसे आदेश और नोटिस की प्रति की मांग सूचना के साथ निर्धारिती द्वारा संदेय राशिया ऐसे निर्धारण के आधार पर निर्धारिती को देय किसी रकम के प्रतिदाय को विनिर्दिष्ट करते हुए तामील करेगा ;
(xxix) जब पात्र निर्धारिती अपने आक्षेपों को विवाद समाधान पैनल के पास फाइल करता है तो राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र विवाद समाधान पैनल द्वारा धारा 144ग की उपधारा (5) के अधीन जारी निदेशों की प्राप्ति पर ऐसे निदेशों को संबंधित निर्धारण यूनिट को अग्रेषित करेगा ;
(xxx) निर्धारण यूनिट धारा 144ग की उपधारा (5) के अधीन विवाद समाधान पैनल द्वारा जारी निदेशों के अनुसार धारा 144ग की उपधारा (13) के अनुसार एक प्रारूप निर्धारण आदेश तैयार करेगा और ऐसे आदेश की प्रति को राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र भेजेगा ;
(xxxi) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र खंड (xxx) में निर्दिष्ट प्रारूप निर्धारण आदेश की प्राप्ति पर धारा 144ग की उपधारा (13) के अधीन अनुज्ञात समय के भीतर निर्धारण को अंतिम रूप देगा और नोटिस की प्रति की शास्ति कार्यवाहियां, यदि कोई हों, संस्थित करने के लिए ऐसे आदेश और नोटिस की प्रति की मांग सूचना के साथ निर्धारिती द्वारा संदेय राशिया ऐसे निर्धारण के आधार पर निर्धारिती को देय किसी रकम के प्रतिदाय को विनिर्दिष्ट करते हुए तामील करेगा ;
(xxxii) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र निर्धारण पूरा करने के पश्चात् मामले के सभी इलैक्ट्रानिक अभिलेखों को उक्त मामले पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को ऐसी कार्रवाई के लिए, जो अधिनियम के अधीन अपेक्षित हो, अग्रेषित करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन पहचान विहीन निर्धारण ऐसे राज्य क्षेत्र या व्यक्तियों या व्यक्तियों के वर्ग या आय या आय के वर्ग या मामलों या मामलों के वर्ग, जैसा कि बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, के संबंध में किया जाएगा ।
(3) बोर्ड, निर्धारिती की कुल आय या नुकसान के पहचान विहीन निर्धारण के लिए,—
(i) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र केंद्रीयकृत रूप से पहचान विहीन निर्धारण कार्यवाहियां संचालित करना सुकर करेगा, उसे पहचान विहीन निर्धारण करने की अधिकारिता होगी ;
(ii) प्रादेशिक पहचान विहीन निर्धारण केंद्रों, जैसा कि वह प्रधान मुख्य आयुक्त के कैडर नियंत्रण क्षेत्र में पहचान विहीन निर्धारण कार्यवाहियां संचालित करने के लिए आवश्यक समझे, का गठन करेगा ;
(iii) निर्धारण यूनिट, जैसा कि वह पहचान विहीन निर्धारण संचालित करने को सुकर करने के लिए, निर्धारण करने के कृत्यों का निष्पादन करने के लिए, जिसके अंतर्गत अधिनियम के अधीन किसी दायित्व (जिसके अंतर्गत प्रतिदाय है) का अवधारण करने के लिए बिन्दुओं या तात्विक सामग्री की पहचान सम्मिलित है, इस प्रकार पहचाने गए बिन्दुओं या मुद्दों पर सूचना या स्पष्टीकरण की वांछा करना, निर्धारिती या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री का विश्लेषण और ऐसे अन्य कृत्य, जैसा कि पहचान विहीन निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए अपेक्षित हो, का गठन करना ;
(iv) सत्यापन यूनिटों, जैसा कि वह पहचान विहीन निर्धारण संचालित करने को सुकर बनाने के लिए, सत्यापन कृत्यों का निष्पादन करने के लिए, जिसके अंतर्गत प्रति सत्यापन, लेखा बहियों की जांच, साक्षियों की जांच और कथनों का अभिलेखन तथा ऐसे अन्य कृत्य, जो सत्यापन के प्रयोजनों के लिए अपेक्षित हों, सम्मिलित हैं, की स्थापना करना ;
(v) तकनीकी यूनिटों, जैसा पहचान विहीन निर्धारण संचालित करने को सुकर बनाने के लिए, तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के कृत्यों का निष्पादन करने के लिए आवश्यक हों, जिसके अंतर्गत विधिक, लेखांकन, न्यायालयीन सूचना प्रौद्योगिकी, मूल्यांकन, अंतरण कीमत निर्धारण, डाटा विश्लेषण विज्ञान, प्रबंधन या कोई अन्य तकनीकी विषय, जो इस धारा के अधीन किसी विशिष्ट मामले या मामलों के वर्ग के लिए अपेक्षित हो, सम्मिलित है, का गठन ; और
(vi) पुनर्विलोकन यूनिटों, जैसे कि पहचान विहीन निर्धारण संचालित करने को सुकर बनाने के लिए, प्रारूप निर्धारण आदेश का पुनर्विलोकन के कृत्य का निष्पादन करने के लिए आवश्यक हों, जिसके अंतर्गत इस बात की जांच करना कि क्या अभिलेख पर सुसंगत और तात्विक साक्ष्य रखा गया है, क्या सुसंगत तथ्य बिन्दु और विधि को प्रारूप आदेश में सम्मिलित किया गया है, क्या वह मुद्दे जिन पर वर्धन या वर्धन न करना किया जाना चाहिए, पर प्रारूप आदेश में चर्चा की गई है, क्या प्रारूप आदेश में लागू न्यायिक विनिश्चयों पर विचार और व्यवहार किया गया है, प्रस्तावितफेरफार में अंकगणितीय शुद्धियों की जांच कर ली गई है, यदि कोई हो और ऐसे अन्य कृत्य, जो पुनर्विलोकन के प्रयोजन के लिए आवश्यक हों, का गठन करना,
और उनकी संबंधित अधिकारिता को विनिर्दिष्ट करना ।
(4) निर्धारण यूनिट, सत्यापन यूनिट, तकनीकी यूनिट और पुनर्विलोकन यूनिट के निम्नलिखित प्राधिकारी होंगे, अर्थात् : —
(क) यथास्थिति, अपर आयुक्त या अपर निदेशक या संयुक्त आयुक्त या संयुक्त निदेशक ;
(ख) यथास्थिति, उपायुक्त या उप निदेशक या सहायक आयुक्त या सहायक निदेशक या आय-कर अधिकारी ;
(ग) ऐसे अन्य आय-कर प्राधिकारी, सचिवीय कर्मचारिवृंद, कार्यपालक या सलाहकार जैसा कि बोर्ड द्वारा आवश्यक समझे जाएं ।
(5) निर्धारण यूनिट, पुनर्विलोकन यूनिट, सत्यापन यूनिट यातकनीकी यूनिट या निर्धारिती या किसी अन्य व्यक्ति के बीच सूचना या दस्तावेजों या साक्ष्य या किसी अन्य ब्यौरों के संबंध में सभी संचार, जैसा कि पहचान विहीन निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए आवश्यक हो, राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र के माध्यम से होगा ;
(6) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र और निर्धारिती या उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि या किसी अन्य व्यक्ति के बीच सभी संचार अनन्य रूप से इलैक्ट्रानिकी ढंग से होंगे ; और राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र प्रादेशिक पहचान विहीन निर्धारण केंद्र तथा विभिन्न यूनिटों के बीच आंतरिक संचार अन्यय रूप से इलैक्ट्रानिकी ढंग से होगा :
परंतु इस उपधारा के उपबंध सत्यापन यूनिट द्वारा उपधारा (7) के खंड (xii) के उपखंड (छ) में निर्दिष्ट परिस्थितियों में संचालित जांच या सत्यापन को लागू नहीं होंगे ।
(7) पहचान विहीन निर्धारण के प्रयोजन के लिए—
(i) किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख का अधिप्रमाणन—
(क) राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र द्वारा डिजीटल हस्ताक्षर चस्पा करके ;
(ख) निर्धारिती या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसके डिजीटल हस्ताक्षर चस्पा करके यदि उससे डिजीटल हस्ताक्षर के अधीन आय-कर की विवरणी प्रस्तुत करना अपेक्षित हो और किसी अन्य दशा में उसके डिजीटल हस्ताक्षर चस्पा करके विहित रीति में इलैक्ट्रानिक सत्यापन कूट के अधीन;
(ii) प्रत्येक नोटिस या आदेश या किसी अन्य इलैक्ट्रानिकी संचार का परिदान पारेषिती को निर्धारिती द्वारा—
(क) निर्धारिती के रजिस्ट्रीकृत पते पर उसकी अधिप्रमाणित प्रति को रखकर ; या
(ख) उसकी अधिप्रमाणित प्रति को निर्धारिती के या उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि के रजिस्ट्रीकृत ई--मेल पते पर ;
(ग) निर्धारिती की मोबाइल ऐप पर अधिप्रमाणित प्रति को अपलोड करके ; और
उसके वास्तविक समय पर चेतावनी द्वारा अनुसरण किया जाएगा ;
(iii) प्रत्येक नोटिस या आदेश के किसी अन्य इलैक्ट्रानिकी संचार का परिदान पारेषिती को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा, उसकी एक अधिप्रमाणित प्रति को ऐसे व्यक्ति के रजिस्ट्रीकृत ई-मेल पते पर भेजकर किया जाएगा, जिसके पश्चात् परिदान के वास्तविक समय की चेतावनी दी जाएगी ;
(iv) निर्धारिती किसी नोटिस या आदेश या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक संचार का प्रत्युत्तर अपने रजिस्ट्रीकृत अकाउंट के माध्यम से देगा और राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र को उसकी एक बार अभिस्वीकृति भेजे जाने पर, जिसमें प्रत्युत्तर के सफलतापूर्वक प्रस्तुत किए जाने पर एक हैश परिणाम सृजित होगा, प्रत्युत्तर को अधिप्रमाणित किया गया समझा जाएगा ;
(v) इलैक्ट्रानिकी अभिलेख के पारेषण और प्राप्ति के समय और स्थान का अवधारण सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21), की धारा 13 के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा ;
(vi) किसी व्यक्ति से या तो व्यक्तिगत रूप से या किसी प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आय-कर प्राधिकारी के समक्ष कार्यवाहियों के संबंध में राष्ट्रीय पहचान विहीन निर्धारण केंद्र या प्रादेशिक पहचान विहीन निर्धारण केंद्र या इस उपधारा के अधीन गठित किसी यूनिट के समक्ष उपस्थित होने की अपेक्षा नहीं होगी ;
(vii) ऐसी दशा में, जहां प्रारूप निर्धारण आदेश या अंतिम प्रारूप निर्धारण आदेश या पुनरीक्षित प्रारूप निर्धारण आदेश में फेरफार का प्रस्ताव किया जाता है, निर्धारिती को उस पर हेतुक उपदर्शित करने के नोटिस की तामील द्वारा अवसर प्रदान किया जाएगा कि ऐसे प्रारूप या अंतिम प्रारूप या पुनरीक्षित प्रारूप निर्धारण आदेश के अनुसार निर्धारण क्यों नहीं पूरा किया जाना चाहिए, यथास्थिति, निर्धारिती या उसका प्राधिकृत प्रतिनिधि व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध कर सकेगा, जिससे वह आय-कर प्राधिकारी या किसी यूनिट के समक्ष अपनी मौखिक दलील दे सके या अपने मामले को प्रस्तुत कर सके ;
(viii) मुख्य आयुक्त या प्रादेशिक पहचान विहीन निर्धारण केंद्र का भारसाधक महानिदेशक, जिसके अधीन संबंधित यूनिट स्थापित की गई है, खंड (vii) में निर्दिष्ट व्यक्तिगत सुनवाई के अनुरोध का अनुमोदन कर सकेगा, यदि उसकी यह राय है कि अनुरोध खंड (xii) के उपखंड (ज) में निर्दिष्ट परिस्थितियों के अधीन आता है ;
(ix) जहां व्यक्तिगत सुनवाई के अनुरोध का अनुमोदन मुख्य आयुक्त या प्रादेशिक पहचान विहीन निर्धारण केंद्र का भारसाधक महानिदेशक द्वारा किया जाता है, ऐसी सुनवाई का संचालन अनन्य रूप से वीडियो संगोष्ठी या वीडियो दूरभाष के माध्यम से किया जाएगा, जिसके अंतर्गत किसी दूरसंचार अनुप्रयोग साफ्टवेयर का उपयोग भी है, जो बोर्ड द्वारा अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार वीडियो संगोष्ठी या वीडियो दूरसंचार प्रदान करता है ;
(x) उपधारा (6) के परंतुक के अधीन रहते हुए निर्धारिती या किसी अन्य व्यक्ति की कोई जांच या कथन का अभिलेखन (अधिनियम की धारा 133क के अधीन सर्वेक्षण के अनुक्रम में अभिलिखित विवरण से भिन्न) का संचालन आय-कर प्राधिकारी द्वारा किसी यूनिट में अनन्य रूप से वीडियो संगोष्ठी या वीडियो दूरभाष के माध्यम से किया जाएगा, जिसके अंतर्गत किसी दूरसंचार अनुप्रयोग साफ्टवेयर का उपयोग भी है, जो बोर्ड द्वारा अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार वीडियो संगोष्ठी या वीडियो दूरसंचार प्रदान करता है ;
(xi) बोर्ड वीडियो संगोष्ठी या वीडियो दूरभाष, जिसके अंतर्गत किसी दूरसंचार अनुप्रयोग साफ्टवेयर का उपयोग भी है, जो बोर्ड द्वारा अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार वीडियो संगोष्ठी या वीडियो दूरसंचार प्रदान करता है, के लिए समुचित सुविधाएं ऐसे स्थानों पर, जो आवश्यक हों, स्थापित करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्धारिती या उसका प्राधिकृत प्रतिनिधि या किसी अन्य व्यक्ति को पहचान विहीन निर्धारण के फायदों से केवल इस कारण से इंकार नहीं किया जा सकेकि ऐसा निर्धारिती या उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि या किसी अन्य व्यक्ति की वीडियो संगोष्ठी या वीडियो दूरसंचार तक पहुंच नहीं है;
(xii) राष्ट्रीय पहचान विहीन केंद्र का भारसाधक प्रधान मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक, बोर्ड की पूर्व अनुमति से, राष्ट्रीय पहचान विहीन केंद्र, क्षेत्रीय पहचान विहीन केंद्र और स्वचालित और यांत्रिक पर्यावरण में स्थापित इकाई, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित के संबंध में रूप--विधान, ढंग, प्रक्रिया और प्रसंस्करण सम्मिलित है, की प्रभावी कार्य पद्धति के लिए मानक, प्रक्रियाएं और प्रसंस्करण अधिकथित करेगा, अर्थात् :—
(क) सूचना, आदेश और किसी अन्य संसूचना की तामील ;
(ख) सूचना, आदेश या किसी अन्य संसूचना के उत्तर में किसी व्यक्ति से किसी सूचना या दस्तावेजों की प्राप्ति ;
(ग) व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत उत्तर की पावती जारी किया जाना ;
(घ) "ई--कार्यवाही" सुविधा के उपबंध, जिसके अंतर्गत लॉग--इन खाता सुविधा, निर्धारण की प्रास्थिति का पता लगाना, सुसंगत ब्यौरों का प्रदर्शन और डाउनलोड की सुविधा भी है ;
(ङ) सूचना और उत्तर का अभिगम, सत्यापन और अधिप्रमाणन जिसके अंतर्गत निर्धारण कार्यवाहियों के दौरान प्रस्तुत दस्तावेज भी है ;
(च) केन्द्रीयकृत रीति में सूचना या दस्तावेजों की प्राप्ति, भंडारण और पुन: प्राप्ति ;
(छ) वह परिस्थितियां, जिनमें उपधारा (6) का परंतुक लागू होगा ;
(ज) वह परिस्थितियां, जिनमें खंड (viii) में निर्दिष्ट व्यक्तिगत सुनवाई अनुमोदित की जाएगी ;
(झ) संबंधित केन्द्रों और इकाइयों में साधारण प्रशासन और शिकायत अनुतोष क्रियाविधि ।
(8) उपधारा (1) या उपधारा (2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रीय पहचान विहीन केन्द्र का प्रधान मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक निर्धारण के किसी स्तर पर यदि आवश्यक समझे, बोर्ड के पूर्ण अनुमोदन से मामले को किसी निर्धारण अधिकारी को, जो ऐसे मामले में अधिकारिता रखता है, अंतरित कर सकेगा ।
(9) इस अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, 1 अप्रैल, 2021 को या उसके पश्चात् उपधारा 8 के अधीन अंतरित किए गए मामलों से भिन्न, उपधारा (2) में निर्दिष्ट मामलों में धारा 143 की उपधारा (3) के अधीन या धारा 144 के अधीन किया गया निर्धारण गैर-स्थापित होगा़, यदि ऐसा निर्धारण इस धारा में अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार नहीं किया जाता है ।
स्पष्टीकरण—इस धारा में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो—
(क) "प्रेषिती" का वही अर्थ होगा जो उसका सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21), की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में उसका है ;
(ख) "प्राधिकृत प्रतिनिधित्व" का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 288 की उपधारा (2) में उसका है ;
(ग) "स्वचालित आबंटन प्रणाली" से विवेक के क्षेत्र का अधिकतम उपयोग करने की दृष्टि से उपयुक्त प्रौद्योगिक औजारों का जिसके अन्तर्गत कृत्रिम बुद्धिमता और यंत्र विद्वता भी है, प्रयोग करके प्ररूप आदेशों की या यादृच्छिक आबंटन लिए एक एल्गोरिथ्म अभिप्रेत है ;
(घ) "स्वचालित परीक्षण औजार" से विवेक के क्षेत्र को कम करने की दृष्टी से उपयुक्त प्रौद्योगिक औजारों का जिसके अन्तर्गत कृत्रिम बुद्धिमता और यंत्र विद्वता भी है, प्रयोग करके प्ररूप आदेशों की मानकित परीक्षा के लिए एक एल्गोरिथ्म अभिप्रेत है ;
(ङ) "कंप्यूटर साधन" का वही अर्थ होगा जो उसका सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21), की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ट) में उसका है ;
(च) "कंप्यूटर प्रणाली" का वही अर्थ होगा जो उसका सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21), की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ठ) में उसका है ;
(छ) "निर्धारिती का कंप्यूटर स्रोत" में आय-कर विभाग के पदाभिहित पोर्टल में निर्धारिती का रजिस्ट्रीकृत खाता, निर्धारिती की रजिस्ट्रीकृत मोबाईल संख्या से संयुक्त मोबाईल एप्प या निर्धारिती का उसके ई--मेल सेवा प्रदाता के साथ ई--मेल खाता सम्मिलित होगा ;
(ज) "अंकीय चिन्ह" का वही अर्थ होगा जो उसका सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21), की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (त) में उसका है ;
(झ) "पदाभिहित पोर्टल" से राष्ट्रीय पहचान विहीन केंद्र के भारसाधक प्रदान मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक द्वारा यथा अभिहित वेब पोर्टल अभिप्रेत है ;
(ञ) "विवाद समाधान पैनल" का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 144ग की उपधारा (15) के खंड (क) में उसका है ;
(ट) "पहचान विहीन निर्धारण" से पदाभिहीत पोर्टल में निर्धारिती के रजिस्ट्रीकरण खाते के माध्यम से 'ई--कार्यवाही' सुविधा में इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित निर्धारण कार्यवाहियां अभिप्रेत है ;
(ठ) "इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख" का वही अर्थ होगा जो उसका सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21), की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (न) में है ;
(ड) ''पात्र निर्धारिती'' का वही अर्थ होगा जो धारा 144ग की उपधारा (15) के खंड (ख) में उसका है ;
(ढ) ''ई--मेल'' या ''इलेक्ट्रानिक--मेल'' से कम्प्यूटर, कम्प्यूटर सिस्टम, कम्प्यूटर संसाधन या संसूचना युक्ति, जिसके अंतर्गत पाठ में संलग्नक, चित्र, श्रव्य, दृश्य और कोई अन्य इलेक्ट्रानिक अभिलेख, जिसे संदेश के साथ संचारित किया जा सकता है, पर सृजित या संचारित या प्राप्त कोई संदेश या सूचना अभिप्रेत है ;
(ण) ''हैस फंक्शन'' और ''हैस रिजल्ट'' के वही अर्थ होंगे, जो उनके सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21), की धारा 3 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण में हैं ;
(त) ''मोबाइल ऐप'' से मोबाइल युक्तियों के लिए विकसित आय-कर विभाग का एप्लीकेशन साफ्टवेयर अभिप्रेत है, जिसे निर्धारिती के रजिस्ट्रीकृत मोबाइल संख्या पर डाउनलोड और इंस्टाल किया जाता है ;
(थ) ''आरंभक'' का वही अर्थ होगा, जो उसका सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21), की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (यक) में हैं ;
(द) ''रियल टाइल अलर्ट'' से कोई संसूचना अभिप्रेत है, जो उसे इलेक्ट्रानिक संसूचना के परिदान के संबंध में सतर्क करने के लिए उसके रजिस्ट्रीकृत मोबाइल संख्या पर शार्ट मैसेजिंग सर्विस द्वारा या उसके मोबाइल ऐप पर अपडेट द्वारा या उसके रजिस्ट्रीकृत ई--मेल पते पर ई--मेल द्वारा भेजा जाता है ;
(ध) निर्धारिती के ''रजिस्ट्रीकृत खाता'' से अभिहित पोर्टल में निर्धारिती द्वारा रजिस्ट्रीकृत इलेक्ट्रानिक फाइलिंग खाता अभिप्रेत है ;
(न) ''रजिस्ट्रीकृत ई--मेल पता'' से वह ई--मेल पता अभिप्रेत है, जिस पर संबोधिती को इलेक्ट्रानिक संसूचना परिदत्त या संचारित की जा सकती है, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित भी है—
(i) अभिहित पोर्टल में रजिस्ट्रीकृत संबोधिती के इलेक्ट्रानिक फाइलिंग खाते में उपलब्ध ई-मेल पता ; या
(ii) संबोधिती द्वारा प्रस्तुत किए गए आय-कर विवरणी में अंतिम उपलब्ध ई-मेल पता ; या
(iii) संबोधिती से संबंधित स्थायी खाता संख्यांक डाटा बेस में उपलब्ध ई-मेल पता ; या
(iv) संबोधिती के कोई व्यष्टि होने की दशा में, जिसके पास आधार संख्या है, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के डाटा बेस में उपलब्ध संबोधिती का ई-मेल पता ; या
(v) संबोधिती के कंपनी होने की दशा में, कंपनी का कारपोरेट कार्य मंत्रालय की सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध ई-मेल पता ; या
(vi) आय-कर प्राधिकारी या ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को संबोधिती द्वारा उपलब्ध कराया गया कोई ई-मेल पता ।
(प) निर्धारिती की ''रजिस्ट्रीकृत मोबाइल संख्या'' से अभिहित पोर्टल में निर्धारिती द्वारा रजिस्ट्रीकृत इलेक्ट्रानिक फाइलिंग खाते के यूजर प्रोफाइल में प्रकट होने वाला निर्धारिती या उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि की मोबाइल संख्या ;
(फ) ''वीडियो कान्फ्रेंसिंग या वीडियो टेलीफोनी'' से रियल टाइम में लोगों के बीच संसूचना हेतु विभिन्न अवस्थानों पर उपयोक्ता द्वारा श्रव्य--दृश्य सिगनलों की प्राप्ति और संचारण के लिए प्रौद्योगिकी समाधान अभिप्रेत है।]
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

