अद्यतन विवरणी पर कर
1[अद्यतन विवरणी पर कर।
140ख. (1) जहां धारा 139 की उपधारा (1) या उपधारा (4) के अधीन निर्धारिती द्वारा कोई विवरणी प्रस्तुत नहीं की गई है और निम्नलिखित को गणना में लेने के पश्चात्, धारा 139 की उपधारा (8क) के अधीन ऐसे निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत विवरणी के आधार पर, कर संदेय है,-
(i) कर की रकम, यदि कोई हो, जो अग्रिम कर के रूप में पहले से ही संदत्त है;
(ii) स्रोत पर कटौती किया गया या संगृहीत कोई कर;
(iii) धारा 89 के अधीन दावा की गई कोई कर राहत;
(iv) भारत से बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे धारा 90 या धारा 91 के अधीन दावा की गई कोई कर राहत या कर कटौती;
(v) भारत से बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में उस धारा में विनिर्दिष्ट संदत्त कर के मद्दे धारा 90क के अधीन दावा की गई कोई कर राहत; और
(vi) धारा 115ञकक या धारा 115ञघ के उपबंधों के अनुसार, मुजरा किए जाने के लिए दावा किया गया कोई कर प्रत्यय,
ऐसा निर्धारिती, विवरणी प्रस्तुत करने से पूर्व विवरणी प्रस्तुत करने में किसी विलंब के लिए इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन संदेय ब्याज और फीस या अग्रिम कर के संदाय में किसी व्यतिक्रम या विलंब के लिए ऐसे कर के साथ, उपधारा (3) के अनुसार संगणित अतिरिक्त आय-कर के संदाय का दायी होगा और विवरणी के साथ ऐसे कर, अतिरिक्त आय-कर, ब्याज और फीस के संदाय का सबूत संलग्न होगा।
(2) जहां निर्धारिती द्वारा धारा 139 की उपधारा (1) या उपधारा (4) या उपधारा (5) में निर्दिष्ट आय-कर की विवरणी (जिसे पहले की विवरणी के रूप में निर्दिष्ट किया गया है) प्रस्तुत की गई है और ऐसे निर्धारिती द्वारा धारा 139की उपधारा (8क) के अधीन प्रस्तुत विवरणी के आधार पर कर संदेय है,-
(क) निम्नलिखित को गणना में लेने के पश्चात्-
(i) धारा 140क की उपधारा (1) में निर्दिष्ट राहत या कर की रकम, जिसके लिए पूर्ववर्ती विवरणी में प्रत्यय लिया गया है;
(ii) अध्याय 17ख के उपबंधों के अनुसार, किसी आय पर स्रोत पर कटौती किया गया या संगृहीत कर, जो ऐसी कटौती या संग्रहण के अधीन है तथा जिसको कुल आय की संगणना करने में गणना में लिया गया है तथा जिसको पूर्ववर्ती विवरणी में सम्मिलित नहीं किया गया है;
(iii) भारत से बाहर किसी देश में ऐसी आय पर संदत्त कर के लेखे धारा 90 या धारा 91 में दावा की गई कर राहत या कर कटौती, जिसको पूर्ववर्ती विवरणी में सम्मिलित नहीं किया गया है;
(iv) ऐसी आय पर उस धारा में निर्दिष्ट भारत से बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के लेखे धारा 90क के अधीन दावा की गई कोई कर राहत, जिसको पूर्ववर्ती विवरणी में सम्मिलित नहीं किया गया है;
(v) धारा 115ञकक या धारा 115ञघ के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए दावा किया गया कोई कर प्रत्यय, जिसके संबंध में पूर्ववर्ती विवरणी में कोई दावा नहीं किया गया है, और
(ख) जिसमें ऐसी पूर्ववर्ती विवरणी के संबंध में जारी प्रतिदाय, यदि कोई हो, की रकम को जोड़ दिया गया हो,
ऐसा निर्धारिती, विवरणी प्रस्तुत करने से पूर्व पूर्वतन विवरणी इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन संदेय ब्याज की रकम द्वारा घटाई गई, उपधारा (3) के अनुसार यथा संगणित अतिरिक्त आय-कर के संदाय, अग्रिम कर के संदाय में किसी व्यतिक्रम या विलंब के लिए इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन संदत्त ब्याज की रकम के साथ संदाय का दायी होगा और ऐसी विवरणी के साथ ऐसे कर, अतिरिक्त आय-कर, ब्याज और फीस के संदाय का सबूत संलग्न होगा।
(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, धारा 139 की उपधारा (8क) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करते समय संदेय अतिरिक्त आय-कर निम्नलिखित के बराबर होगा,-
(i) यदि ऐसी विवरणी धारा 139 की उपधारा (4) या उपधारा (5) के अधीन उपलब्ध समय के अवसान के पश्चात् और सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से बारह मास की अवधि के पूरा हो जाने से पूर्व प्रस्तुत की जाती है तो, यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2) में यथा अवधारित संदेय कर और ब्याज के कुल योग के पच्चीस प्रतिशत; या
(ii) यदि ऐसी विवरणी सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से बारह मास की अवधि के अवसान के पश्चात्, किन्तु सुसंगत निर्धारण वर्ष क अंत से चौबीस मास की अवधि के पूरा हो जाने से पूर्व प्रस्तुत की जाती है तो, यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2) में यथा अवधारित संदेय कर और ब्याज के कुल योग के पचास प्रतिशत।
स्पष्टीकरण-"अतिरिक्त आय-कर" की संगणना के प्रयोजनों के लिए उसमें ऐसे कर पर अधिभार और उपकर, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो, सम्मिलित होंगे।
(4) धारा 234ख के स्पष्टीकरण 1 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, धारा 234ख के अधीन संदेय ब्याज की संगणना, यथास्थिति, ऐसी रकम पर की जाएगी, जो निर्धारित कर के बराबर है या ऐसी रकम पर की जाएगी, जो निर्धारित कर और संदत्त अग्रिम कर के अंतर के बराबर है, जहां "निर्धारित कर" से धारा 139 की उपधारा (8क) के अधीन प्रस्तुत विवरणी में यथा घोषित कुल आय पर कर अभिप्रेत है,-
(क) निम्नलिखित को गणना में लेने के पश्चात्-
(i) धारा 140क की उपधारा (1) में निर्दिष्ट राहत की रकम या कर की रकम, जिसके लिए पूर्ववर्ती विवरणी में प्रत्यय के लिए दावा किया गया है ;
(ii) किसी ऐसी आय पर, जो ऐसी कटौती या संग्रहण के अध्यधीन है और जिसे ऐसी कुल आय की संगणना करने हेतु गणना में लिया गया है, अध्याय 27ख के उपबंधों के अनुसार स्रोत पर कटौती किया गया या संगृहीत कर, जिसको पूर्ववर्ती विवरणी में सम्मिलित नहीं किया गया है;
(iii) ऐसी आय पर भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे धारा 90 या धारा 91 के अधीन दावा की गई कोई कर राहत या कर की कटौती, जिसको पूर्ववर्ती विवरणी में सम्मिलित नहीं किया गया है;
(iv) ऐसी आय पर, उस धारा में निर्दिष्ट भारत से बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के लेखे धारा 90क के अधीन दावा की गई कोई कर राहत, जिसको पूर्ववर्ती विवरणी में सम्मिलित नहीं किया गया है;
(v) धारा 115ञकक या धारा 115ञघ के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए दावा किया गया कोई कर प्रत्यय, जिसके संबंध में पूर्ववर्ती विवरणी में कोई दावा नहीं किया गया है; और
(ख) जिसमें ऐसी पूर्ववर्ती विवरणी के संबंध में जारी प्रतिदाय, यदि कोई हो, की रकम को जोड़ दिया गया हो।
(5) यदि इस धारा के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो बोर्ड, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, केंद्रीय सरकार के अनुमोदन से कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए दिशानिर्देश जारी कर सकेगी।
(6) उपधारा (5) के अधीन जारी प्रत्येक दिशानिर्देश संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(i) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, धारा 234क के अधीन संदेय ब्याज की संगणना धारा 139 की उपधारा (8क) के अधीन प्रस्तुत की गई विवरणी में यथा घोषित कुल आय पर धारा 140क की उपधारा (1क) के उपबंधों के अनुसार कर की संगणित रकम पर की जाएगी;
(ii) उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, धारा 234ग के अधीन संदेय ब्याज की संगणना धारा 139 की उपधारा (8क) के अधीन प्रस्तुत की गई कुल आय को विवरणी आय के रूप में हिसाब में लेने के पश्चात् की जाएगी;
(iii) उपधारा (3) के प्रयोजनों के लिए, संदेय ब्याज, इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन धारा 139 की उपधारा (8क) के अधीन प्रस्तुत विवरणी के अनुसार आय पर प्रभार्य ब्याज की ऐसी रकम होगी, जिसमें से पूर्ववर्ती विवरणी के अनुसार संदत्त ब्याज, यदि कोई हो, को घटा दिया जाए:
परंतु इस खंड के प्रयोजनों के लिए, पूर्ववर्ती विवरणी में संदत्त ब्याज उस दशा में शून्य होगा, यदि ऐसी विवरणी उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई अद्यतन विवरणी है।]
[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

