परिभाषाएं
82[अध्याय 12क
अनिवासियों की कुछ आय के संबंध में विशेष उपबंध
परिभाषाएं
115ग. इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो,–
(क) ‘‘संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा’’ से अभिप्रेत है ऐसी विदेशी मुद्रा जो तत्समय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 82क[विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42)] और तद्धीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा मानी जाती है;
(ख) ‘‘विदेशी मुद्रा आस्ति’’ से वह विनिर्दिष्ट आस्ति अभिप्रेत है जो निर्धारिती ने संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा से अर्जित या क्रय की है या विदेशी मुद्रा में उसका अभिदाय किया है;
(ग) ‘‘विनिधान आय’’ से विदेशी मुद्रा आस्ति से 83[धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न रूप में प्राप्त आय] अभिप्रेत है;
(घ) ‘‘दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ’’ से ‘‘पूंजी अभिलाभ’’ शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय अभिप्रेत है जो ऐसी पूंजी आस्ति से संबंधित है जो विदेशी मुद्रा आस्ति है किंतु अल्पकालिक पूंजी आस्ति नहीं है;
(ड़) ‘‘अनिवासी भारतीय’’ से अभिप्रेत है कोर्इ व्यष्टि जो भारत का ऐसा नागरिक या भारतीय उद्भव का ऐसा व्यक्ति है जो ‘‘निवासी’’ नहीं है।
स्पष्टीकरण.–कोर्इ व्यक्ति भारतीय उद्भव का समझा जाएगा, यदि वह, या उसके माता-पिता या पितामह-पितामही, मातामह-मातामही, में से कोर्इ, अविभाज्य भारत में जन्मा था;
(च) ‘‘विनिर्दिष्ट आस्ति’’ से निम्नलिखित आस्तियों में से कोर्इ आस्ति अभिप्रेत है, अर्थात्:–
(i) किसी भारतीय कंपनी के शेयर;
(ii) भारतीय कंपनी द्वारा, जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में यथा- परिभाषित प्राइवेट कंपनी84 नहीं है, निकाले गए डिबेंचर;
(iii) किसी भारतीय कंपनी में, जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में यथा- परिभाषित प्राइवेट कंपनी84 नहीं है, किए गए निक्षेप;
(iv) लोक ऋण अधिनियम, 1944 (1944 का 18) की धारा 285 के खंड (2) में यथा- परिभाषित केन्द्रीय सरकार की कोर्इ प्रतिभूति;
(v) कोर्इ अन्य ऐसी आस्तियां जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
82. वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.6.1983 से अध्याय 12क, जिसमें धारा 115ग, 115घ, 115ड़, 115च, 115छ, 115ज और 115झ हैं, अंत:स्थापित किया गया।
82क. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2013 से प्रतिस्थापित।
83. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से "प्राप्त आय" के स्थान पर "धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न रूप में प्राप्त आय" शब्द प्रतिस्थापित किए गए। "धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न" शब्द वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से अंत:स्थापित किए गए थे और बाद में वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से उनका लोप कर दिया गया था।
84. कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 3(1) के खंड (iii) में ‘‘प्राइवेट कंपनी’’ की परिभाषा दी गर्इ है। धारा 3 के पाठ के लिए देखिए परिशिष्ट।
85. ‘‘सरकारी प्रतिभूति’’ की परिभाषा देखिए पूर्व पृष्ठ 1.604 पर पाद-टिप्पण 75.
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

