विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की प्रतिभूतियों से अथवा उनके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से आय पर कर
विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की प्रतिभूतियों से अथवा उनके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से आय पर कर
115कघ. (1) जहां किसी 11क[विनिर्दिष्ट निधि या विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता] की कुल आय में,–
(क) 11कक[***] जो (धारा 115कख में निर्दिष्ट यूनिटों से भिन्न) प्रतिभूतियों की बाबत प्राप्त हुई हो; या
(अ) विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता की दशा में बीस प्रतिशत की दर पर;
सम्मिलित है वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा, अर्थात् :–
11ककक[(i) खंड (क) में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों के संबंध में आय पर संगणित आयकर की रकम, यदि कोई हों, जिसे कुल आय में सम्मिलित किया गया है,-
(अ) विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता की दशा में बीस प्रतिशत की दर पर;
(आ) विनिर्दिष्ट निधि की दशा में दस प्रतिशत की दर परः
परंतु धारा 194ठघ में निर्दिष्ट ब्याज के माध्यम से आय पर संगणित आय-कर की रकम पांच प्रतिशत की दर पर होगी;]
(ii) खंड(ख) में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर, यदि कोई हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, तीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम :
परंतु धारा 111क में उल्लिखित अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर परिकलित आय-कर की रकम पंद्रह प्रतिशत की दर से होगी;
(iii) खंड(ख) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर, यदि कोई हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम; 12[***]
12क[परंतु धारा 112क में निर्दिष्ट किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से होने वाली आय की दशा में, एक लाख रुपए से अधिक की ऐसी आय पर दस प्रतिशत की दर से आय-कर की संगणना की जाएगी; ।]
(iv) आय-कर की वह रकम जो 11कख[विनिर्दिष्ट निधि या विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता] की दशा में प्रभार्य होती है यदि उसकी कुल आय में से खंड (क) और (ख) में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी गई होती।
11कखक[(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, विनिर्दिष्ट निधि की दशा में इस धारा का उपबंध केवल आय की उस सीमा तक लागू होगा, जो विहित रीति में संगणित अनिवासी (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन नहीं है) द्वारा धारित यूनिटें मानी जा सकती है।]
11खख[(1ख) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां विनिर्दिष्ट निधि अपतट बैंककारी यूनिट का विनिधान प्रभाग है इस धारा के उपबंध केवल आय की उस सीमा तक लागू होंगे, जो धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) के उपखंड (आ) में निर्दिष्ट ऐसी बैंककारी यूनिटों के विनिधान प्रभाग के कारण हुई है और जो भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (विदेशी पोर्टफोलियों विनिधान कर्ता विनियम, 2019) के अधीन प्रवर्ग 1 पोर्टफोलियों वाला विनिधानकर्ता है और जिसे विहित रीति में संगणित किया गया है।]
(2) जहां 11कख[विनिर्दिष्ट निधि या विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता] की,–
(क) सकल कुल आय केवल उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों की बाबत आय से मिलकर बनती है वहां उसे धारा 28 से धारा 44ग या धारा 57 के खंड (i) या खंड (iii) के अधीन या अध्याय 6क के अधीन कोई कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी;
(ख) सकल कुल आय में उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट कोई आय सम्मिलित है वहां सकल कुल आय में से ऐसी आय की रकम घटा दी जाएगी और अध्याय 6क के अधीन कटौती अनुज्ञात की जाएगी मानो इस प्रकार घटाकर आई सकल कुल आय 11कख[विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता] की सकल कुल आय हो।
(3) धारा 48 के पहले और दूसरे परंतुकों की कोई बात उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों के अंतरण से उत्पन्न पूंजी अभिलाभों की संगणना करने के लिए लागू नहीं होगी।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजन के लिए,–
(क) ''विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता'' पद से ऐसा विनिधानकर्ता अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;
1[(कक) "अपतट बैंककारी यूनिट का विनिधान प्रभाग" पद का वही अर्थ होगा, जो धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (कक) में उसका है।]
11ख[(ख) "स्थायी स्थापन" का वही अर्थ होगा, जो उसका धारा 92च के खंड (iiiक) में है ;
(ग) "प्रतिभूतियां" पद का वही अर्थ होगा, जो उसका प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 4), की धारा 2 के खंड (ज) में है ;
(घ) "विनिर्दिष्ट निधि" पद का वही अर्थ होगा, जो उसका धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में है।]
[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

