काफी के विनिर्माण से आय
7ख. (1) भारत में विक्रेता द्वारा उगार्इ गर्इ और संसाधित काफी के विक्रय से व्युत्पन्न आय इस प्रकार संगणित की जाएगी मानो वह कारबार से व्युत्पन्न आय हो और ऐसी आय का पच्चीस प्रतिशत कर के दायित्वाधीन समझा जाएगा।
(1क) भारत में विक्रेता द्वारा उगार्इ गर्इ, संसाधित, रोस्ट की गर्इ और चूर्णित, चिकोरी या अन्य वासक तत्वों को मिलाकर या उनके बिना, काफी के विक्रय से व्युत्पन्न आय इस प्रकार संगणित की जाएगी मानो वह कारबार से व्युत्पन्न आय हो और ऐसी आय का चालीस प्रतिशत कर के दायित्वाधीन समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण–उपनियम (1) और (1क) के प्रयोजनों के लिए, "संसाधित करना" का वही अर्थ होगा जो उसका काफी अधिनियम, 1942 (1942 का 7) की धारा 3 की खंड (घ) में दिया गया है।
(2) उपनियम (1) और (1क) में निर्दिष्ट आय की संगणना करने में,] ऐसे पौधों के, जो मृत हो गए हैं या ऐसे क्षेत्र में, जिसमें पहले से ही पौधारोपण किया गया है, यदि ऐसे क्षेत्र का पूर्व में परित्याग नहीं किया गया है, स्थायी रूप से अनुपयोगी हो गए हैं, बदले में काफी के पौधों के पौधारोपण की लागत की बाबत मोक दिया जाएगा और ऐसी लागत का अवधारण करने के प्रयोजन के लिए किसी सहायिकी की रकम की बाबत कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी, जो धारा 10 के खंड (31) के उपबंधों के अधीन कुल आय में सम्मिलित किए जाने योग्य नहीं है।

