रबर, कॉफी और चाय के विनिर्माण से आय ।
271. (1) धारा 533 (2) (ख) (1) के संदर्भ में, निम्नलिखित सारणी के स्तंभ ख में विनिर्दिष्ट आय की संगणना इस प्रकार की जाएगी मानो यह कारबार से व्युत्पन्न आय हो और उसके स्तंभ ग में विनिर्दिष्ट ऐसी आय के प्रतिशत को कर योग्य आय माना जाएगा।
| क्रमांक | आय की प्रकृति | प्रतिशत |
| क | ख | ग |
| 1. | भारत में विक्रेता द्वारा उगाए गए रबर के पौधों से प्राप्त फील्ड लेटेक्स या कोगुलम से निर्मित या संसाधित अपकेंद्रित लेटेक्स या सेनेक्स या लेटेक्स-आधारित क्रेप (जैसे पीला लेटेक्स क्रेप) या भूरे क्रेप (जैसे एस्टेट ब्राउन क्रेप, रिमिल्ड क्रेप, स्मोक्ड ब्लॅकेट क्रेप या फ्लैट बार्क क्रेप) या तकनीकी रूप से निर्दिष्ट ब्लॉक रबर की बिक्री से प्राप्त आय। | 35% |
| 2. | भारत में विक्रेता दवारा उगायी और संसाधित कॉफी के विक्रय से व्युत्पन्न आय | 25% |
| 3. | भारत में विक्रेता द्वारा चकोरी या अन्य वासक अवयवो के साथ या उसके बिना उगाए गए, ठीक किए गए, भुने गए और पीसी हुई कॉफी के विक्रय से व्युत्पन्न आय, | 40% |
| 4. | भारत में विक्रेता द्वारा उगाई गई और विनिर्मित की गई चाय के विक्रय से व्युत्पन्न आय | 40% |
(2) उपनियम (1) में निर्दिष्ट आय की संगणना करते समय, यथास्थिति, रबर के पौधों, कॉफी के पौधों और चाय की झाड़ियों को लगाने की लागत के संबंध में, पौधों या झाड़ियों के प्रतिस्थापन में जो पहले से ही लगाए गए क्षेत्र में मृत हो गए हैं या स्थायी रूप से अनुपयोगी हो गए हैं, यदि ऐसा क्षेत्र पूर्व में परित्यक्त नहीं किया गया है।
(3) उपनियम (2) में निर्दिष्ट ऐसी लागत के अवधारण के प्रयोजनों के लिए, किसी ऐसी सहायिकी की रकम के संबंध में कोई भी कटौती नहीं की जाएगी, जो अधिनियम की अनुसूची 3 [सारणी क्रमांक 21] में उल्लिखित उपबंधों के अधीन कुल आय में सम्मिलित नहीं है।
(4) इस नियम के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति "संसाधन का वही अर्थ होगा जो कॉफी अधिनियम, 1942 (1942 का 7) की धारा 3(घ) में उसका है।

