आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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नियम संख्या. 249

नियम संख्या.

249

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

08/01/2026

मूल्यांकक के नामों को रजिस्टर से हटाना और उन्हें पुनः बहाल करना ।

249. (1) प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त या मुख्य आयकर आयुक्त या प्रधान आयकर महानिदेशक या आयकर महानिदेशक किसी व्यक्ति का नाम मूल्यांककों के रजिस्टर से हटा सकते हैं, यदि उनका उस व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात् और ऐसी आगे की जांच, यदि आवश्यक हो, करने के पश्चात् यह समाधान हो जाए, —

(i)  कि उसका नाम रजिस्टर में त्रुटिपूर्वक या किसी महत्वपूर्ण तथ्य की मिथ्याबयानी या छिपाव के कारण दर्ज किया गया है;
(ii)  कि उसे किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो और कारावास की सजा सुनाई गई हो या वह अपनी पेशेवर क्षमता में किसी कदाचार या दुराचार का दोषी हो, जो प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त या मुख्य आयकर आयुक्त या प्रधान महानिदेशक आयकर या महानिदेशक आयकर की राय में, उसे रजिस्टर में रखे जाने के लिए अयोग्य बनाता हो ।

(2) प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त या मुख्य आयकर आयुक्त या प्रधान आयकर महानिदेशक या आयकर महानिदेशक आवेदन पर और पर्याप्त कारण बताए जाने पर रजिस्टर से हटाए गए किसी व्यक्ति का नाम रजिस्टर में बहाल कर सकते हैं।

(3) उप-नियम (1) और (2) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त या मुख्य आयकर आयुक्त या प्रधान आयकर महानिदेशक या आयकर महानिदेशक, पांच वर्ष में एक बार सभी पंजीकृत मूल्यांककों के कार्य-निष्पादन की समीक्षा करेंगे और किसी भी व्यक्ति का नाम मूल्यांककों के रजिस्टर से हटा सकते हैं, यदि उनका उस व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात् और ऐसी आगे की जांच, यदि आवश्यक हो, करने के पश्चात् यह समाधान, जैसा वे उचित समझें, हो कि उसका कार्य-निष्पादन ऐसा है कि उसका नाम मूल्यांककों के रजिस्टर में नहीं रहना चाहिए।

(4) प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त या मुख्य आयकर आयुक्त या प्रधान महानिदेशक आयकर या महानिदेशक आयकर उप-नियम (1) या (3) में निर्दिष्ट अन्वेषण स्वयं कर सकता है या ऐसी जांच करने के लिए कम-से-कम संयुक्त आयकर आयुक्त की रैंक का कोई अन्वेषण अधिकारी नियुक्त कर सकता है, और ऐसे अन्वेषण के प्रयोजनों के लिए, प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त या मुख्य आयकर आयुक्त या प्रधान महानिदेशक आयकर या महानिदेशक आयकर और इस प्रकार नियुक्त अन्वेषण अधिकारी को वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) के अधीन किसी न्यायालय को निम्नलिखित मामलों के संबंध में किसी मुकदमे की सुनवाई करते समय प्राप्त होती हैं, अर्थात्:-

(क)  खोज और निरीक्षण;
(ख)  किसी भी व्यक्ति, जिसमें बैंकिंग कंपनी का कोई अधिकारी भी शामिल हो, की उपस्थिति सुनिश्चित करना और उससे शपथ पर पूछताछ करना;
(ग)  लेखा - बहियों और अन्य दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करना;
(घ)  कमीशन जारी करना।

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