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नियम संख्या. 225

धारा 413 और धारा 475 के प्रयोजनों के लिए कर वसूली की प्रक्रिया

नियम संख्या.

225

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

08/01/2026

धारा 413 और धारा 475 के प्रयोजनों के लिए कर वसूली की प्रक्रिया ।

225. (1) परिभाषाएँ: इस नियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,

(क)   "प्रमाणपत्र", उप-नियम (7), (44), (65) और 66(ख) में उल्लिखित को छोड़कर, से धारा 413 में विनिर्दिष्ट किसी निर्धारिती के संबंध में कर वसूली अधिकारी द्वारा उक्त धारा के अधीन तैयार किया गया प्रमाणपत्र अभिप्रेत है;
(ख)   "व्यतिक्रमी" से प्रमाणपत्र में उल्लिखित निर्धारिती अभिप्रेत है;
(ग)   "निष्पादन", किसी प्रमाणपत्र के संबंध में, से प्रमाणपत्र के अनुसरण में बकाया राशि की वसूली अभिप्रेत है;
(घ)   "चल संपत्ति" में खड़ी फसलें भी शामिल है;
(ङ)   "अधिकारी" से इस नियम के अधीन कुर्की या बिक्री करने के लिए प्राधिकृतव्यक्ति अभिप्रेत है; और
(च)   "निगम में अंश" में स्टॉक, डिबेंचर-स्टॉक, डिबेंचर या बांड भी शामिल हैं।

(2) नोटिस जारी करना: जब कर वसूली अधिकारी द्वारा इस नियम के अधीन बकाया राशि की वसूली के लिए प्रमाणपत्र तैयार किया गया हो, तो कर वसूली अधिकारी व्यतिक्रमी को एक नोटिस तामील करवाएगा जिसमें व्यतिक्रमी को नोटिस तामील की तारीख से पंद्रह दिनों के भीतर प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट रकम का संदाय करने के लिए कहा जाएगा और यह सूचित किया जाएगा कि डिफ़ॉल्ट की स्थिति में इस नियम के अधीन राशि की वसूली के लिए कदम उठाए जाएंगे।

(3) प्रमाणपत्र कब निष्पादित किया जा सकेगा: (क) खंड(ख) और (ग) के उपबंधों के अध्यधीन, उप- नियम (2) द्वारा अपेक्षित नोटिस की तामील की तारीख से पंद्रह दिन की अवधि बीत जाने तक प्रमाणपत्र के निष्पादन की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी;

(ख) यदि कर वसूली अधिकारी समाधान है कि व्यतिक्रमी अपनी ऐसी चल संपत्ति के पूरे या किसी भाग को छिपाने, हटाने या निपटाने की संभावना रखता है जो किसी सिविल न्यायालय के निर्णय के निष्पादन में कुर्की के योग्य हो और परिणामस्वरूप प्रमाणपत्र की राशि की वसूली में देरी या बाधा उत्पन्न होगी, तो वह किसी भी समय, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के साथ, ऐसी संपत्ति के पूरे या किसी भाग की कुर्की का निदेश दे सकेगा; और

(ग) यदि व्यतिक्रमी, जिसकी संपत्ति इस प्रकार कुर्क की गई है, कर वसूली अधिकारी के समाधान के अनुसार प्रतिभूति प्रस्तुत करता है, तो ऐसी कुर्की उस तारीख से रद्द कर दी जाएगी जिस तारीख से कर वसूली अधिकारी द्वारा ऐसी प्रतिभूति स्वीकार की जाती है।

(4) वसूली का तरीका: यदि नोटिस में उल्लिखित रकम उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर या कर वसूली अधिकारी द्वारा अपने विवेक से दिए गए अतिरिक्त समय के भीतर संदाय नहीं की जाती है, तो कर वसूली अधिकारी निम्नलिखित में से एक या अधिक तरीकों से राशि की वसूली के लिए कार्यवाही करेगा:

(क)   व्यतिक्रमी की चल संपत्ति की कुर्की और बिक्री द्वारा;
(ख)   व्यतिक्रमी की अचल संपत्ति की कुर्की और बिक्री द्वारा;
(ग)   1[***];
(घ)   चल और अचल संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक रिसीवर नियुक्त करके ।

(5) वसूल की जा सकने वाली ब्याज, लागत और प्रभार: प्रत्येक प्रमाणपत्र के निष्पादन की कार्यवाही में निम्नलिखित वसूल किए जा सकेंगे:

(क)   कर या शास्ति या अन्य राशि पर, जिससे प्रमाणपत्र संबंधित है, धारा 411(3) के अनुसार देय ब्याज और
(ख)   निम्नलिखित के संबंध में किए गए सभी प्रभार:
(i)   बकाया संदाय के लिए व्यतिक्रमी को नोटिस की तामील, और वारंट और अन्य आदेशिकाओं की तामील; और
(ii)   बकाया राशि की वसूली के लिए की गई अन्य सभी कार्यवाहियां ।

(6) क्रेता का हक: (क) जहाँ किसी प्रमाणपत्र के निष्पादन में संपत्ति बेची जाती है, वहाँ क्रेता को केवल बिक्री के समय व्यतिक्रमी का अधिकार, हक और हित प्राप्त होगा, भले ही संपत्ति स्वयं विनिर्दिष्ट हो ।

(ख) जहाँ अचल संपत्ति किसी प्रमाणपत्र के निष्पादन में बेची जाती है, और ऐसी बिक्री पूर्ण हो गई है, तो क्रेता का अधिकार, हक और हित संपत्ति की बिक्री के समय से उसमें निहित माना जाएगा, न कि बिक्री के पूर्ण होने के समय से।

(7) क्रेता के विरुद्ध वादी की ओर से की गई खरीद के आधार पर वाद नहीं चलाया जा सकेगा: (क) इस नियम में अधिकथित रीति से कर वसूली अधिकारी द्वारा प्रमाणित खरीद के अधीन स्वत्वाधिकार का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध इस आधार पर कोई वाद नहीं चलाया जा सकेगा कि खरीद वादी की ओर से या किसी ऐसे व्यक्ति की ओर से की गई थी जिसके माध्यम से वादी दावा करता है।

(ख) इस नियम में अंतर्विष्ट कोई भी बात यह घोषणा प्राप्त करने के लिए वाद चलाने से नहीं रोकेगी कि उपर्युक्त प्रमाणित क्रेता का नाम प्रमाणपत्र में कपट से या वास्तविक क्रेता की सहमति के बिना दर्ज किया गया था, या किसी तीसरे व्यक्ति के उस संपत्ति के विरुद्ध कार्यवाही करने के अधिकार में, इस आधार पर कि वह संपत्ति वास्तविक स्वामी के विरुद्ध ऐसे तीसरे व्यक्ति के दावे को पूरा करने के लिए उत्तरदायी है, हस्तक्षेप नहीं करेगी, यद्यपि वह संपत्ति स्पष्ट रूप से प्रमाणित क्रेता को बेची गई हो ।

(8) निष्पादन से प्राप्त आगमों का निपटान : (क) जब भी किसी प्रमाणपत्र के निष्पादन में बिक्री या अन्य किसी रीति से आस्तियों की वसूली की जाती है, तो प्राप्त आगमों का निपटान निम्नलिखित रीति से किया जाएगा, अर्थात्:—

(i)   उन्हें पहले उस प्रमाणपत्र के अधीन देय रकम और ऐसे निष्पादन के दौरान हुए खर्ची के लिए समायोजित किया जाएगा जिसके निष्पादन में आस्तियों की वसूली की गई थी;
(ii)   यदि मद (i) में विनिर्दिष्ट समायोजन के पश्चात कोई शेष राशि बचती हैं, तो उसका उपयोग अधिनियम के अधीन निर्धारिती से वसूली योग्य किसी अन्य राशि की पूर्ति के लिए किया जाएगा जो आस्तियों की वसूली की तारीख पर देय हो; और
(iii)   उप-खंड (i) और (ii) के अधीन समायोजन के पश्चात यदि कोई शेष राशि बचती है, तो वह व्यतिक्रमी को संदाय की जाएगी।

(ख) यदि व्यतिक्रमी उप-नियम 8(क)(ii) के अधीन किसी समायोजन पर विवाद करता है, तो कर वसूली अधिकारी विवाद का अवधारण करेगा।

(9) कपट के आरोप को छोड़कर, सिविल न्यायालयों की अधिकारिता पर सामान्य रोक: (क) खंड (ख) के उपबंधों के अध्यधीन और अधिनियम में अन्यथा स्पष्ट रूप से दिए गए उपबंधों को छोड़कर, कर वसूली अधिकारी और व्यतिक्रमी या उनके प्रतिनिधियों के बीच किसी प्रमाणपत्र के निष्पादन, निर्वहन या समाधान से संबंधित, या ऐसे प्रमाणपत्र के निष्पादन में आयोजित बिक्री की अधिनियम के अधीन किसी आदेश द्वारा पुष्टि या निरस्तीकरण से संबंधित, प्रत्येक प्रश्न का निपटारा वाद द्वारा नहीं, बल्कि उस कर वसूली अधिकारी के आदेश द्वारा किया जाएगा जिसके समक्ष ऐसा प्रश्न उठता है; और (ख) धोखाधड़ी के आधार पर ऐसे किसी प्रश्न के संबंध में सिविल न्यायालय में वाद लाया जा सकेगा।

(10) कुर्की से छूट प्राप्त संपत्ति (क) ऐसी सभी संपत्ति जो दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) द्वारा सिविल न्यायालय के किसी निर्णय के निष्पादन में कुर्की और बिक्री से मुक्त है, इस नियम के अधीन कुर्की और बिक्री से मुक्त होगी, और

(ख) कर वसूली अधिकारी का यह विनिश्चय कि कौन सी संपत्ति इस प्रकार छूट की हकदार है, अंतिम होगा।

(11) कर वसूली अधिकारी द्वारा अन्वेषण: (क) यदि किसी प्रमाणपत्र के निष्पादन में किसी संपत्ति की कुर्की या बिक्री के विरुद्ध इस आधार पर कोई दावा किया जाता है या कोई आपत्ति उठाई जाती है कि ऐसी संपत्ति कुर्की या बिक्री के योग्य नहीं है, तो कर वसूली अधिकारी दावे या आपत्ति का अन्वेषण करेगा, किंतु ऐसा कोई अन्वेषण नहीं किया जाएगा यदि कर वसूली अधिकारी यह विचार है कि दावा या आपत्ति जानबूझकर या अनावश्यक रूप से विलंबित की गई थी;

(ख) यदि दावा या आपत्ति से संबंधित संपत्ति को बिक्री के लिए विज्ञापित किया गया है, तो बिक्री का आदेश देने वाला कर वसूली अधिकारी दावे या आपत्ति का अन्वेषण लंबित रहने तक प्रतिभूति या अन्य ऐसी अपेक्षाओं पर जैसा कर वसूली अधिकारी ठीक समझे, बिक्री को स्थगित कर सकेगा;

(ग) दावाकर्ता या आपत्तिकर्ता को यह दर्शाने के लिए —

i.   अचल संपत्ति के मामले में, इस नियम के अधीन बकाया संदाय के लिए जारी किए गए नोटिस की तामील की तारीख को; या
ii.   चल संपत्ति के मामले में, कुर्की की तारीख को,

साक्ष्य प्रस्तुत करना होगा कि उसका प्रश्नगत संपत्ति में कोई हित था, या वह उस संपत्ति पर कब्ज़ा रखता था।

(घ) जहां उक्त जांच के पश्चात, कर वसूली अधिकारी का समाधान हो जाता है कि दावे या आपत्ति में बताए गए कारण से, उक्त संपत्ति उक्त तारीख को व्यतिक्रमी या उसके लिए विश्वासपात्र के रूप में किसी व्यक्ति के कब्जे में नहीं थी, या किसी किरायेदार या उसे किराया देने वाले किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में नहीं थी, या उक्त तारीख को व्यतिक्रमी के कब्जे में होने पर वह संपत्ति उसके अपने खाते पर या उसकी अपनी संपत्ति के रूप में नहीं, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति के खाते पर या उसके लिए विश्वासपात्र के रूप में, या आंशिक रूप से उसके अपने खाते पर और आंशिक रूप से किसी अन्य व्यक्ति के खाते पर उसके कब्जे में थी, तो कर वसूली अधिकारी संपत्ति को पूरी तरह से या अपनी इच्छानुसार किसी सीमा तक कुर्की या बिक्री से मुक्त करने का आदेश देगा;

(ङ) यदि कर वसूली अधिकारी का समाधान हो जाता है कि उक्त तारीख को संपत्ति व्यतिक्रमी की अपनी संपत्ति के रूप में स्वयं के कब्जे में थी, न कि किसी अन्य व्यक्ति के कारण, या उसके विश्वासपात्र किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में थी, या किसी किरायेदार या उसे किराया देने वाले किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में थी, तो कर वसूली अधिकारी दावे को अस्वीकार कर देगा; और

(च) जहां कोई दावा या आपत्ति प्रस्तुत की जाती है, तो जिस पक्ष के विरुद्ध आदेश दिया गया है, वह विवादित संपत्ति पर अपने अधिकार को स्थापित करने के लिए सिविल न्यायालय में वाद दायर कर सकेगा, परन्तु ऐसे वाद के परिणाम (यदि कोई हो) के अध्यधीन कर वसूली अधिकारी का आदेश अंतिम होगा।

(12) समाधान होने या प्रमाणपत्र रद्द होने पर कुर्की हटाना: जहां —

(क)   देय राशि, लागत और किसी संपत्ति की कुर्की से उत्पन्न सभी प्रभार और व्यय, या बिक्री आयोजित करने के लिए किए गए व्यय सहित कर वसूली अधिकारी को संदाय कर दी जाती हैं; या
(ख)   यदि प्रमाणपत्र रद्द कर दिया जाता है,

तो कुर्की वापस ली गई मानी जाएगी और अचल संपत्ति के मामले में, यदि व्यतिक्रमी चाहे तो उसके खर्च पर कुर्की की वापसी की घोषणा की जाएगी और घोषणा की एक प्रति इस नियम में अचल संपत्ति की बिक्री की घोषणा के लिए निर्धारित रीति से चिपकाई जाएगी।

(13) कुर्की एवं बिक्री के लिए हकप्राप्त अधिकारी: चल संपत्ति की कुर्की एवं बिक्री और अचल संपत्ति की कुर्की एवं बिक्री ऐसे व्यक्तियों द्वारा की जा सकती है, जिन्हें कर वसूली अधिकारी समय-समय पर निदेशित करे।

(14) पुनर्विक्रय पर होने वाले नुकसान के लिए व्यतिक्रमी क्रेता का उत्तरदायी होना: क्रेता की व्यतिक्रम के कारण पुनर्विक्रय पर मूल्य में हुई किसी भी कमी और ऐसे पुनर्विक्रय से संबंधित सभी व्ययों की जानकारी विक्रय करने वाले अधिकारी द्वारा कर वसूली अधिकारी को दी जाएगी, और कर वसूली अधिकारी या व्यतिक्रमी के अनुरोध पर इस नियम में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार व्यतिक्रमी क्रेता से वसूल की जाएगी, लेकिन ऐसा कोई भी आवेदन पुनर्विक्रय की तारीख से पंद्रह दिनों के भीतर फाइल न किए जाने पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

(15) बिक्री का स्थगन या रोक: (क) कर वसूली अधिकारी अपने विवेक से इस नियम के अधीन किसी भी बिक्री को किसी विनिर्दिष्ट दिन और समय तक स्थगित कर सकेगा, और ऐसी किसी भी बिक्री का संचालन करने वाला अधिकारी, अपने विवेक से, स्थगन के कारणों को दर्ज करते हुए बिक्री को स्थगित कर सकेगा, तथापि, जहां बिक्री कर वसूली अधिकारी के कार्यालय में या उसके परिसर के भीतर की जाती है, वहां कर वसूली अधिकारी की अनुमति के बिना ऐसा कोई स्थगन नहीं किया जाएगा।

(ख) यदि अचल संपत्ति की बिक्री खंड (क) के अधीन एक कैलेंडर माह से अधिक अवधि के लिए स्थगित कर दी जाती है, तो इस नियम में उल्लिखित बिक्री की नई घोषणा की जाएगी, जब तक कि व्यतिक्रमी इसकी छूट देने के लिए सहमत न हो जाए,

(ग) प्रत्येक बिक्री रोक दी जाएगी यदि, नीलामी से पहले, बकाया और लागत (बिक्री की लागत सहित) बिक्री करने वाले अधिकारी को प्रस्तुत कर दी जाती है, या उसके समाधान के लिए यह प्रमाण दिया जाता है कि ऐसी बकाया और लागत की राशि उस कर वसूली अधिकारी को संदाय कर दी गई है, जिसने बिक्री का आदेश दिया था।

(16) कतिपय मामलों में निजी अन्यसंक्रामण शून्य होना: (क) जहां उप-नियम (2) के अधीन किसी व्यतिक्रमी को नोटिस तामील किया गया है, वहां व्यतिक्रमी या उसका हित प्रतिनिधि कर वसूली अधिकारी की अनुमति के बिना अपनी किसी संपत्ति को गिरवी रखने, प्रभारित करने, पट्टे पर देने या अन्यथा उससे संबंधित कोई भी कार्य करने के लिए सक्षम नहीं होगा, और न ही कोई सिविल न्यायालय धन के संदाय के लिए किसी डिक्री के निष्पादन में ऐसी संपत्ति के विरुद्ध कोई प्रक्रिया जारी करेगा; और

(ख) जहां इस नियम के अधीन कुर्की की गई है, वहां कुर्क की गई संपत्ति या उसमें किसी हित का कोई निजी अंतरण या सुपुर्दगी तथा व्यतिक्रमी को किसी ऋण, लाभांश या अन्य धन का कुर्की के विपरीत किया गया कोई भी संदाय कुर्की के अधीन लागू होने योग्य सभी दावों के विरुद्ध शून्य होगा।

(17) अधिकारी द्वारा बोली लगाने या खरीद पर प्रतिबंध: इस नियम के अधीन किसी बिक्री के संबंध में कोई कर्तव्य निभाने वाला कोई भी अधिकारी या अन्य व्यक्ति, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, बेची गई संपत्ति में किसी भी हित के लिए बोली नहीं लगाएगा, उसे प्राप्त नहीं करेगा या प्राप्त करने का प्रयास नहीं करेगा।

(18) अवकाश के दिन बिक्री पर प्रतिबंध: इस नियम के अधीन कोई भी बिक्री रविवार या राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी अन्य सामान्य अवकाश के दिन या किसी ऐसे दिन नहीं होगी जिसे राज्य सरकार द्वारा उस क्षेत्र के लिए स्थानीय अवकाश घोषित किया गया हो जहां बिक्री होनी है;

(19) पुलिस द्वारा सहायता: किसी संपत्ति को कुर्क करने या बेचने या व्यतिक्रमी 2[का] के लिए प्राधिकृत कोई अधिकारी, या इस नियम में उल्लिखित किसी कर्तव्य के निर्वहन के लिए नियुक्त अधिकारी, अपने कर्तव्यों के निर्वहन में अपेक्षित सहायता के लिए निकटतम पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी से आवेदन कर सकेगा, और जिस प्राधिकारी को ऐसा आवेदन प्राप्त होता है, वह ऐसी सहायता प्रदान करने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस अधिकारियों को प्रतिनियुक्त करेगा।

(20) कर वसूली अधिकारी द्वारा कतिपय कार्यों को न्यस्त करना : एक कर वसूली अधिकारी, संयुक्त आयुक्त की पूर्व स्वीकृति से अपने से निचले पद के किसी अन्य अधिकारी (आयकर निरीक्षक से निचले पद का न हो) को कर वसूली अधिकारी के रूप में अपने कुछ कार्य न्यस्त कर सकेगा, और ऐसे अधिकारी को सौंपे गए कार्यों के संबंध में कर वसूली अधिकारी माना जाएगा।

(21) वारंट और वारंट की प्रति की तामील: इस नियम में अन्यथा उपबंध न होने पर, जब किसी चल संपत्ति की कुर्की की जानी हो, तो अधिकारी को कर वसूली अधिकारी (या उसके द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत अन्य अधिकारी) द्वारा लिखित और उसके नाम से हस्ताक्षरित एक वारंट दिया जाएगा, जिसमें व्यतिक्रमी का नाम और वसूली की जाने वाली रकम विनिर्दिष्ट होगी, और अधिकारी वारंट की एक प्रति व्यतिक्रमी को तामील करवाएगा।

(22) कुर्की: यदि वारंट की प्रति तामील होने के पश्चात भी राशि का संदाय तुरंत नहीं किया जाता है, तो अधिकारी व्यतिक्रमी की चल संपत्ति को कुर्क करने की कार्यवाही करेगा।

(23) व्यतिक्रमी के कब्जे में संपत्तिः यदि कुर्क की जाने वाली संपत्ति व्यतिक्रमी के कब्जे में स्थित चल संपत्ति (कृषि उपज को छोड़कर) है, तो कुर्की वास्तविक ज़ब्ती द्वारा की जाएगी, और अधिकारी संपत्ति को स्वयं या अपने किसी अधीनस्थ की अभिरक्षा में रखेगा और उसकी उचित अभिरक्षा के लिए उत्तरदायी होगा, लेकिन जब जब्त की गई संपत्ति शीघ्र और स्वाभाविक रूप से खराब होने वाली हो या जब उसे अभिरक्षा में रखने का खर्च उसके मूल्य से अधिक होने की संभावना हो, तो अधिकारी उसे तुरंत बेच सकेगा।

(24) कृषि उपजः (क) जहां कुर्क की जाने वाली संपत्ति कृषि उपज है, वहां कुर्की वारंट की एक प्रति निम्नलिखित प्रकार से चिपकाई जाएगी:

(i)   यदि ऐसी उपज उगने वाली फसल है, तो उस भूमि पर जिस पर ऐसी फसल उगी है, या
(ii)   यदि ऐसी उपज काटी या एकत्र की गई है, तो खलिहान या अनाज निकालने के स्थान या इसी प्रकार के स्थान, या चारे के ढेर पर, या जहां इसे रखा जाता है,

और दूसरी प्रति उस घर के बाहरी द्वार या किसी अन्य प्रमुख भाग पर चिपकाई जाएगी जिसमें व्यतिक्रमी सामान्यतः रहता है, या कर वसूली अधिकारी की अनुमति से उस घर के बाहरी द्वार या किसी अन्य प्रमुख भाग पर चिपकाई जाएगी जिसमें वह कारबार करता है या व्यक्तिगत रूप से लाभ के लिए काम करता है, या जिसमें वह अंतिम बार रहा हो या कारबार किया हो या व्यक्तिगत रूप से लाभ के लिए काम किया हो; और

(ख) इसके तदुपरी, उपज कर वसूली अधिकारी के कब्जे में आ गई मानी जाएगी।

(25) कुर्की के अधीन कृषि उपज के संबंध में उपबंध: (क) जहाँ कृषि उपज कुर्क की जाती है, वहाँ कर वसूली अधिकारी उसकी अभिरक्षा, निगरानी, देखभाल, कटाई और संग्रहण के लिए ऐसी व्यवस्था करेगा, जिसे वह पर्याप्त समझे और उसे ऐसी व्यवस्था की लागत चुकाने का अधिकार होगा;

(ख) कर वसूली अधिकारी द्वारा कुर्की आदेश या किसी पश्चातवर्ती आदेश में लगाई गई अपेक्षाओं के अध्यधीन, व्यतिक्रमी उपज की देखभाल, कटाई, एकत्र और भंडारण कर सकेगा तथा उसे परिपक्व करने या संरक्षित करने के लिए अपेक्षित कोई अन्य कार्य कर सकेगा, और यदि व्यतिक्रमी ऐसे सभी या इनमें से कोई भी कार्य करने में विफल रहता है, तो कर वसूली अधिकारी द्वारा इस संबंध में नियुक्त कोई भी व्यक्ति, समान अपेक्षाओं के अध्यधीन ऐसे सभी या इनमें से कोई भी कार्य कर सकेगा, और ऐसे व्यक्ति द्वारा किए गए खर्च व्यतिक्रमी से इस प्रकार वसूल किए जा सकते हैं मानो वे प्रमाणपत्र में शामिल हों;

(ग) बढ़ती फसल के रूप में कुर्क की गई कृषि उपज को केवल इसलिए कुर्की से मुक्त नहीं माना जाएगा या पुनः कुर्की की अपेक्षा नहीं होगी क्योंकि उसे मिट्टी से अलग कर दिया गया है;

(घ) यदि किसी बढ़ती हुई फसल की कुर्की का आदेश फसल के कटाई या संग्रहण के लिए उपयुक्त होने से काफी पहले दिया गया हो, तो कर वसूली अधिकारी आदेश के निष्पादन को उचित समय तक निलंबित कर सकेगा, और अपने विवेक से कुर्की आदेश के निष्पादन तक फसल को हटाने पर रोक लगाने का एक और आदेश दे सकेगा; और

(ङ) ऐसी बढ़ती हुई फसल जिसे उसकी प्रकृति के कारण भंडारित नहीं किया जा सकता, इस नियम के अधीन उसकी कटाई या एकत्र करने के लिए उपयुक्त होने से बीस दिन पहले कुर्क नहीं की जाएगी।

(26) ऋण और शेयर आदिः (क) निम्नलिखित मामलों में —

(i)   परक्राम्य लिखत द्वारा प्रतिभूत न किया गया ऋण; या
(ii)   किसी निगम में शेयर; या
(iii)   अन्य चल संपत्ति जो व्यतिक्रमी के कब्जे में नहीं है, सिवाय उस संपत्ति के जो किसी न्यायालय में जमा है या उसकी अभिरक्षा में है,

कुर्की लिखित आदेश द्वारा की जाएगी जिसमें निम्नलिखित को प्रतिबंधित किया जाएगा:

(क)   ऋण के मामले में, कर वसूली अधिकारी के अगले आदेश तक लेनदार को ऋण वसूलने से और देनदार को उसका संदाय करने से;
(ख)   शेयर के मामले में, जिस व्यक्ति के नाम पर शेयर है, उसे हस्तांतरण करने या उस पर कोई लाभांश प्राप्त करने से; और
(ग)   किसी अन्य चल संपत्ति के मामले में, उस पर कब्जा रखने वाले व्यक्ति को उसे व्यतिक्रमी को सौंपने से;

(ख) ऐसे आदेश की एक प्रति कर वसूली अधिकारी के कार्यालय के किसी प्रमुख स्थान पर चिपकाई जाएगी, और दूसरी प्रति ऋण के मामले में देनदार को, शेयर के मामले में निगम के उचित अधिकारी को, और किसी अन्य चल संपत्ति के मामले में उसके कब्जेदार को भेजी जाएगी; और

(ग) उप-नियम 26(क)(iii)(क) के अधीन प्रतिबंधित देनदार अपने ऋण की रकम कर वसूली अधिकारी को संदाय कर सकेगा, और ऐसा संदाय उसे उसी प्रकार ऋणमुक्त करेगा जैसे कि उसे प्राप्त करने के हकदार पक्ष को किया गया संदाय हो ।

(27) डिक्री की कुर्की: (क) किसी सिविल न्यायालय के धन संदाय या बंधक या प्रभार के प्रवर्तन में बिक्री के लिए डिक्री की कुर्की, सिविल न्यायालय को लिखित में एक अनुरोध जारी करके की जाएगी कि डिक्री के निष्पादन को तब तक रोक दिया जाए जब तक कि —

i.   कर वसूली अधिकारी ऐसा अनुरोध वापस न ले ले; या
ii.   कर वसूली अधिकारी या व्यतिक्रमी डिक्री को निष्पादित करने के लिए ऐसे अनुरोध प्राप्त करने वाले न्यायालय में आवेदन न करे;

(ख) जहां किसी सिविल न्यायालय को खंड (क)(ii) के अधीन कोई आवेदन प्राप्त होता है, तो वह कर वसूली अधिकारी या व्यतिक्रमी के आवेदन पर तथा सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के उपबंधों के अध्यधीन, कुर्क किए गए डिक्री को निष्पादित करने की कार्यवाही करेगा तथा प्रमाणपत्र की संतुष्टि के लिए निवल आय को लागू करेगा।

(ग) कर वसूली अधिकारी को कुर्क किए गए डिक्री के धारक का प्रतिनिधि माना जाएगा और वह ऐसे कुर्क किए गए डिक्री को उसके धारक के लिए वैध किसी भी रीति से निष्पादित करने का हकदार होगा।

28. चल संपत्ति में हिस्सा: जहां कुर्क की जाने वाली संपत्ति में व्यतिक्रमी का उसके और किसी अन्य व्यक्ति के सह स्वामित्व वाली चल संपत्ति में हिस्सा या हित शामिल हैं, वहां व्यतिक्रमी को नोटिस जारी करके कुर्की की जाएगी, जिसमें उसे हिस्से या हित को हस्तांतरित करने या किसी भी प्रकार से उस पर प्रभार डालने से प्रतिबंधित किया जाएगा।

29. सरकारी कर्मचारियों का वेतन: सरकार या स्थानीय प्राधिकरण के कर्मचारियों के वेतन या भत्तों की कुर्की सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की प्रथम अनुसूची के आदेश 21 के नियम 48 में दी गए रीति से की जा सकती है, और उक्त नियम के उपबंध इस नियम के प्रयोजनों के लिए यथाअपेक्षित संशोधनों के अध्यधीन लागू होंगे।

30. परक्राम्य लिखत की कुर्की: जहां संपत्ति एक परक्राम्य लिखत है जो न तो न्यायालय में जमा और न ही किसी लोक अधिकारी की अभिरक्षा में है, वहां कुर्की वास्तविक जब्ती द्वारा की जाएगी, और लिखत को कर वसूली अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और उसके आदेशों के अधीन रखा जाएगा।

31. न्यायालय या लोक अधिकारी की अभिरक्षा में संपति की कुर्की: यदि कुर्क की जाने वाली संपत्ति किसी न्यायालय या लोक अधिकारी की अभिरक्षा में है, तो कुर्की ऐसे न्यायालय या अधिकारी को एक नोटिस जारी करके की जाएगी, जिसमें यह अनुरोध किया जाएगा कि ऐसी संपत्ति और उस पर देय कोई भी ब्याज या लाभांश, नोटिस जारी करने वाले कर वसूली अधिकारी के आगे के आदेशों के अधीन रखा जाए। लेकिन यदि ऐसी संपत्ति किसी न्यायालय की अभिरक्षा में है, तो कर वसूली अधिकारी और किसी अन्य व्यक्ति जो दोषी न हो और किसी आवंटन, कुर्की या अन्य किसी कारण से ऐसी संपत्ति में अपना हित होने का दावा करता हो के बीच उत्पन्न होने वाले स्वामित्व या प्राथमिकता के किसी भी प्रश्न का निर्णय ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

32. भागीदारी संपत्ति की कुर्की: (क) जहां कुर्क की जाने वाली संपत्ति में साझेदार के रूप में व्यतिक्रमी का हिस्सा शामिल है, वहां कर वसूली अधिकारी भागीदारी संपत्ति और लाभ में ऐसे भागीदार के हिस्से पर प्रमाणपत्र के अधीन देय राशि के संदाय का प्रभार लगाने का आदेश दे सकेगा, और उसी या पश्चात के आदेश द्वारा पहले से घोषित या अर्जित लाभ में ऐसे साझेदार के हिस्से और साझेदारी के संबंध में उसे देय किसी अन्य धन के लिए एक रिसीवर नियुक्त कर सकेगा, और लेखा-जोखा और जांच का निदेश दे सकेगा और ऐसे हिस्से की बिक्री का आदेश या ऐसा कोई अन्य आदेश दे सकेगा जैसा मामले की परिस्थितियों के अनुसार अपेक्षित हो; और

(ख) अन्य व्यक्ति किसी भी समय प्रभारित हिस्से को छुड़ाने या बिक्री का निदेश दिए जाने की स्थिति में उसे खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे।

33. सूची: चल संपत्ति की कुर्की के मामले में, अधिकारी कुर्क की गई संपत्ति की कुर्की के पश्चात, कुर्क की गई सभी संपत्ति की सूची तैयार करेगा, जिसमें संपत्ति के रखे जाने का स्थान भी विनिर्दिष्ट होगा, और इसे कर वसूली अधिकारी को अग्रेषित करेगा। अधिकारी द्वारा सूची की एक प्रति व्यतिक्रमी को दी जाएगी।

34. कुर्की का अत्यधिक नहीं होना : कुर्की अत्यधिक नहीं होनी चाहिए, अर्थात् कुर्क की गई संपत्ति वारंट में विनिर्दिष्ट राशि के लगभग समानुपातिक होनी चाहिए।

35. सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच जब्ती: जब्ती द्वारा कुर्की सूर्योदय के पश्चात और सूर्यास्त से पहले की जाएगी, अन्यथा नहीं।

36. दरवाजे आदि तोड़ने की शक्ति: (क) यदि प्रवेश नहीं दिया जाता है, तो अधिकारी किसी भी भवन का भीतरी या बाहरी दरवाजा या खिड़की तोड़कर उसमें प्रवेश कर सकेगा ताकि चल संपत्ति जब्त की जा सके, यदि अधिकारी के पास यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि ऐसे भवन में वारंट के अधीन जब्त की जा सकने वाली चल संपत्ति है और अधिकारी ने दरवाजा तोड़ने के अपने प्राधिकार और आशय की सूचना दे दी है; और

(ख) अधिकारी महिलाओं को हटने का पूरा उचित अवसर देगा।

37. बिक्री: कर वसूली अधिकारी यह निदेश दे सकेगा कि इस नियम के अधीन कुर्क की गई कोई भी चल संपत्ति या उसका ऐसा भाग जो प्रमाणपत्र में उल्लिखित राशि को पूरा करने के लिए अपेक्षित प्रतीत हो, बेचा जाए।

38. घोषणा जारी करना: जब कर वसूली अधिकारी द्वारा चल संपत्ति की बिक्री का आदेश दिया जाता है, तो कर वसूली अधिकारी जिले की भाषा में प्रस्तावित बिक्री की घोषणा जारी करेगा, जिसमें बिक्री का समय और स्थान विनिर्दिष्ट होगा और यह भी कि बिक्री पुष्टि के अधीन है या नहीं।

39. घोषणा कैसे की जाएगी: (क) घोषणा किसी भी प्रथागत रीति से की जाएगी, —

(i) वास्तविक ज़ब्ती द्वारा कुर्क की गई संपत्ति के मामले में —

(क)   उस गाँव में जहाँ संपत्ति कुर्क की गई थी, या यदि संपत्ति किसी कस्बे या शहर में कुर्क की गई थी, तो उस इलाके में जहाँ वह कुर्क की गई थी, और
(ख)   ऐसे अन्य स्थानों पर जहाँ कर वसूली अधिकारी निदेश दे,

(ii) वास्तविक ज़ब्ती के अलावा अन्य तरीकों से कुर्क की गई संपत्ति के मामले में, ऐसे स्थानों पर, यदि कोई हो, जहाँ कर वसूली अधिकारी निदेश दे; और

(ख) घोषणा की एक प्रति कर वसूली अधिकारी के कार्यालय के किसी प्रमुख स्थान पर भी चिपकाई

जाएगी।

40. पंद्रह दिनों के पश्चात बिक्री: सिवाय उन मामलों के जहाँ संपत्ति शीघ्र और प्राकृतिक रूप से क्षय होने वाली हो, या जब उसे अभिरक्षा में रखने का व्यय उसके मूल्य से अधिक होने की संभावना हो, इस नियम के अधीन चल संपत्ति की कोई भी बिक्री, व्यतिक्रमी की लिखित सहमति के बिना, कर वसूली अधिकारी के कार्यालय में बिक्री घोषणा की प्रति चिपकाए जाने की तारीख से कम से कम पंद्रह दिनों की अवधि समाप्त होने तक नहीं होगी।

41. कृषि उपज की बिक्री: (क) खंड (ख) के उपबंधों के अध्यधीन, जहाँ बेची जाने वाली संपत्ति कृषि उपज है, वहाँ बिक्री निम्नलिखित स्थानों पर की जाएगी:

(i)   यदि ऐसी उपज बढ़ने वाली फसल है, तो उस भूमि पर या उसके निकट जिस पर ऐसी फसल उगी है; या
(ii)   यदि ऐसी उपज काटी या एकत्रित की गई है, तो उस खलिहान या अनाज निकालने के स्थान या इसी प्रकार के स्थान, या चारे के ढेर पर या उसमें, जहाँ उसे रखा जाता है,

(ख) कर वसूली अधिकारी बिक्री को निकटतम सार्वजनिक स्थल पर आयोजित करने का निदेश दे सकेगा, यदि उसकी राय में उपज की बिक्री वहां अधिक लाभप्रद रूप से होने की संभावना है,:

(ग) यदि उपज को बिक्री के लिए रखा जाता है, तो —

(i)   बिक्री आयोजित करने वाले व्यक्ति के अनुमान के अनुसार, उसके लिए उचित मूल्य की प्रस्थापना नहीं की जाती है, और
(ii)   उपज का स्वामी, या उसकी ओर से कार्य करने के लिए प्राधिकृतव्यक्ति, बिक्री को अगले दिन तक स्थगित करने के लिए आवेदन करता है, या यदि बिक्री स्थल पर बाजार लगता है, तो अगले बाजार दिवस तक स्थगित करने के लिए आवेदन करता है,

तो बिक्री तदनुसार स्थगित कर दी जाएगी, और फिर उपज के लिए जो भी मूल्य प्रस्तावित किया जाए, उस पर बेच दिया जाएगा;

42. बढ़ती फसलों से संबंधित विशेष उपबंध: (क) जहां बिक्री की जाने वाली संपत्ति बढ़ती फसल है और फसल अपनी प्रकृति के अनुसार भंडारण योग्य है लेकिन अभी तक उसका भंडारण नहीं किया गया है, तो बिक्री का दिन इस प्रकार निर्धारित किया जाएगा कि फसल को उस दिन के आने से पहले भंडारण के लिए तैयार किया जा सके, और बिक्री तब तक आयोजित नहीं की जाएगी जब तक कि फसल की कटाई या इकट्ठी न हो जाए और वह भंडारण के लिए तैयार न हो; और

(ख) जहाँ फसल अपनी प्रकृति के कारण भंडारण योग्य न हो, या कच्ची अवस्था में, जैसे कि हरी गेहूँ, जो अधिक लाभप्रद रूप से बेची जा सकती हो, तो उसे काटने और इकट्ठा करने से पहले बेचा जा सकेगा, और क्रेता को भूमि पर प्रवेश करने और फसल की देखभाल, कटाई या इकट्ठा करने के लिए अपेक्षित सभी कार्य करने का हक होगा।

43. नीलामी द्वारा बिक्री: संपत्ति को एक या एक से अधिक लॉट में सार्वजनिक नीलामी द्वारा बेचा जाएगा, जैसा कि अधिकारी उचित समझे, और यदि बिक्री से प्राप्त होने वाली राशि संपत्ति के एक हिस्से की बिक्री से पूरी हो जाती है, तो शेष लॉट के संबंध में बिक्री तुरंत रोक दी जाएगी।

44. सार्वजनिक नीलामी द्वारा बिक्री: (क) जहाँ चल संपत्ति सार्वजनिक नीलामी द्वारा बेची जाती है, प्रत्येक लॉट की कीमत बिक्री के समय या उसके तुरंत पश्चात, जैसा कि नीलामी आयोजित करने वाला अधिकारी निदेश दे, संदाय की जाएगी, और संदाय न होने की स्थिति में, संपत्ति को तुरंत पुनः बेचा जाएगा:

(ख) क्रय मूल्य के संदाय के पश्चात नीलामी आयोजित करने वाला अधिकारी खरीदी गई संपत्ति, संदाय की गई कीमत और क्रेता का नाम विनिर्दिष्ट करते हुए एक प्रमाणपत्र जारी करेगा, और बिक्री पूर्ण हो जाएगी; और

(ग) जहां बेची जाने वाली चल संपत्ति व्यतिक्रमी और सह स्वामी के माल में हिस्सा है और दो या दो से अधिक व्यक्ति, जिनमें से एक ऐसा सह- स्वामी है, ऐसी संपत्ति या किसी लॉट के लिए समान राशि की बोली लगाते हैं, तो बोली सह- स्वामी की बोली मानी जाएगी।

45. अनियमितता के आधार पर बिक्री अमान्य नहीं होगी, लेकिन कोई भी क्षतिग्रस्त व्यक्ति वाद कर सकेगा: चल संपत्ति की बिक्री के प्रकाशन या संचालन में किसी अनियमितता के आधार पर बिक्री अमान्य नहीं होगी, लेकिन किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ऐसी अनियमितता के कारण पर्याप्त क्षति प्राप्त करने वाला कोई भी व्यक्ति मुआवजे के लिए ऐसे अन्य व्यक्ति के विरुद्ध सिविल न्यायालय में वाद दायर कर सकेगा, या (यदि ऐसा अन्य व्यक्ति क्रेता है) तो विशिष्ट संपत्ति की वसूली और ऐसी वसूली न होने पर मुआवजे के लिए वाद दायर कर सकेगा।

46. परक्राम्य लिखत और निगम के शेयर: इस नियम में किसी भी बात के होते हुए भी, यदि बेची जाने वाली संपत्ति परक्राम्य लिखत या निगम का शेयर है, तो कर वसूली अधिकारी सार्वजनिक नीलामी द्वारा बिक्री का निदेश देने के बजाय, ब्रोकर के माध्यम से ऐसे लिखत या शेयर की बिक्री प्राधिकृत कर सकेगा;

47. निर्धारण अधिकारी को सिक्के या करेंसी नोटों के संदाय का आदेश: यदि कुर्क की गई संपत्ति प्रचलित सिक्के या करेंसी नोट हैं, तो कर वसूली अधिकारी कुर्की की अवधि के दौरान किसी भी समय यह निदेश दे सकेगा कि ऐसे सिक्के या नोट केन्द्रीय सरकार के खाते में जमा किए जाएं और जमा की गई राशि का निपटान उप-नियम 8 में विनिर्दिष्ट रीति से किया जाए।

48. कुर्की: व्यतिक्रमी की अचल संपत्ति की कुर्की एक आदेश द्वारा की जाएगी, जिसमें व्यतिक्रमी को संपत्ति को किसी भी प्रकार से हस्तांतरित या गिरवी से प्रतिबंधित किया जाएगा और सभी व्यक्तियों को ऐसे हस्तांतरण या गिरवी के अधीन कोई भी लाभ लेने से प्रतिबंधित किया जाएगा।

49. कुर्की के नोटिस की तामील: कुर्की के आदेश की एक प्रति व्यतिक्रमी को दी जाएगी।

50. कुर्की की घोषणा: कुर्की के आदेश की घोषणा कुर्क की गई संपत्ति पर या उसके आस- पास किसी स्थान पर प्रथागत रीति से की जाएगी, और आदेश की एक प्रति संपत्ति के किसी प्रमुख स्थान पर तथा कर वसूली अधिकारी के कार्यालय के सूचना बोर्ड पर चिपकाई जाएगी।

51. नोटिस की तामील की तारीख से कुर्की का प्रभावी होना: यदि इस नियम के अधीन किसी अचल संपत्ति की कुर्की की जाती है, तो कुर्की उस तारीख से प्रभावी होगी जिस तारीख को इस नियम के अधीन जारी बकाया संदाय का नोटिस व्यतिक्रमी को तामील किया गया था।

52. बिक्री एवं बिक्री की घोषणा: (क) कर वसूली अधिकारी यह निदेश दे सकेगा कि कुर्क की गई किसी अचल संपत्ति या उसके ऐसे भाग की, जो प्रमाणपत्र को चुकता करने के लिए अपेक्षित प्रतीत हो, बिक्री की जाए; और

(ख) यदि किसी अचल संपत्ति को बेचने का आदेश दिया जाता है, तो कर वसूली अधिकारी उस जिले, जहां अचल संपत्ति स्थित है, की भाषा में इच्छित बिक्री की घोषणा करवाएगा।

53. घोषणा की विषयवस्तुः अचल संपत्ति की बिक्री की घोषणा व्यतिक्रमी को सूचना देने के पश्चात तैयार की जाएगी, जिसमें बिक्री का समय और स्थान बताया जाएगा, और यथासंभव निष्पक्ष और सटीक रूप से निम्नलिखित का उल्लेख किया जाएगा:

(क)   बेची जाने वाली संपत्ति:
(ख)   संपत्ति या उसके किसी भाग पर निर्धारित राजस्व, यदि कोई हो;
(ग)   वह रकम जिसकी वसूली के लिए बिक्री का आदेश दिया गया है;
(घ)   आरक्षित कीमत, यदि कोई हो, जिससे कम पर संपत्ति नहीं बेची जा सकती; और
(ङ)   कोई अन्य बात जिसे कर वसूली अधिकारी क्रेता के लिए संपत्ति की प्रकृति और मूल्य का आकलन करने हेतु जानना अपेक्षित समझता है।

54. घोषणा करने का तरीका: (क) अचल संपत्ति की बिक्री के लिए प्रत्येक घोषणा ऐसी संपत्ति पर या उसके पास किसी स्थान पर ढोल बजाकर या अन्य प्रथागत रीति से की जाएगी, और घोषणा की एक प्रति संपत्ति के किसी प्रमुख भाग पर तथा कर वसूली अधिकारी के कार्यालय के किसी प्रमुख भाग पर चिपकाई जाएगी,

(ख) यदि कर वसूली अधिकारी निदेश दे, तो ऐसी घोषणा राजपत्र या स्थानीय समाचार पत्र, या दोनों में भी प्रकाशित की जाएगी, और ऐसे प्रकाशन का खर्च बिक्री के खर्च के रूप में माना जाएगा; और

(ग) यदि संपत्ति को अलग-अलग बेचने के प्रयोजन से भूखंडों में विभाजित किया गया है, तो प्रत्येक भूखंड के लिए अलग घोषणा करना अपेक्षित नहीं होगा, जब तक कि कर वसूली अधिकारी की राय में बिक्री की उचित सूचना अन्यथा न दी जा सके।

55. बिक्री का समय: इस नियम के अधीन अचल संपत्ति की कोई भी बिक्री, व्यतिक्रमी की लिखित सहमति के बिना, बिक्री की घोषणा की प्रति संपत्ति पर या कर वसूली अधिकारी के कार्यालय में चिपकाए जाने की तारीख, जो भी तारीख पश्चात में हो, से कम से कम तीस दिनों की अवधि बीत जाने तक नहीं की जाएगी।

56. नीलामी द्वारा बिक्री: बिक्री सार्वजनिक नीलामी द्वारा उच्चतम बोलीदाता को की जाएगी और कर वसूली अधिकारी द्वारा पुष्टि के अध्यधीन होगी, लेकिन इस नियम के अधीन कोई भी बिक्री तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि उच्चतम बोलीदाता द्वारा लगाई गई बोली की रकम 3[ उप-नियम 53(घ) ] के अधीन विनिर्दिष्ट आरक्षित मूल्य (यदि कोई हो) से कम हो।

57. क्रेता द्वारा रकम जमा करना और व्यतिक्रम करने पर पुनः बिक्री: (क) अचल संपत्ति की प्रत्येक बिक्री पर, क्रेता घोषित व्यक्ति, ऐसी घोषणा के तुरंत पश्चात, अपनी खरीद रकम का 25% जमा रकम बिक्री कराने वाले अधिकारी को जमा करेगा, और, ऐसी रकम जमा के व्यतिक्रम की स्थिति में, संपत्ति की तुरंत पुनः बिक्री कर दी जाएगी; और

(ख) देय खरीद रकम की पूरी रकम क्रेता द्वारा संपत्ति की बिक्री की तारीख से पंद्रहवें दिन या उससे पहले कर वसूली अधिकारी को जमा की जाएगी।

58. संदाय के व्यतिक्रम की स्थिति में प्रक्रिया: उप-नियम (57) में उल्लिखित अवधि के भीतर संदाय न करने की स्थिति में, यदि कर वसूली अधिकारी उचित समझे, तो बिक्री के खर्चों को पूरा करने के पश्चात जमा रकम सरकार द्वारा जब्त की जा सकेगी, और संपत्ति की पुनः बिक्री कर दी जाएगी, और संदाय न करने वाला क्रेता संपत्ति पर या उस रकम के किसी भी हिस्से पर, जिसके लिए इसे पश्चात में बेचा जा सकेगा, अपने सभी दावों को खो देगा।

59. बोली लगाने का प्राधिकारः (क) यदि किसी संपत्ति की बिक्री, जिसके लिए उप-नियम (53)(घ) के अधीन आरक्षित मूल्य विनिर्दिष्ट किया गया है, ऐसे आरक्षित मूल्य से कम रकम की बोली न मिलने के कारण स्थगित कर दी गई है, तो मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा इस संबंध में प्राधिकृतनिर्धारण अधिकारी को केन्द्रीय सरकार की ओर से किसी भी पश्चात की बिक्री में संपत्ति के लिए बोली लगाने का प्राधिकार होगा,

(ख) बिक्री में बोली लगाने वाले सभी व्यक्तियों को यह घोषित करना होगा कि वे अपनी ओर से या अपने स्वामियों की ओर से बोली लगा रहे हैं, और पश्चात वाले मामले में, उन्हें अपना प्राधिकारपत्र जमा करना होगा, और ऐसा न करने पर उनकी बोलियां अस्वीकार कर दी जाएंगी; और

(ग) यदि खंड (क) में विनिर्दिष्ट निर्धारण अधिकारी को किसी भी पश्चात की बिक्री में संपत्ति का क्रेता घोषित किया जाता है, तो उप-नियम (57) में निहित कोई भी बात इस मामले पर लागू नहीं होगी और खरीद मूल्य की रकम प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट रकम में समायोजित की जाएगी।

60. अचल संपत्ति की बिक्री रद्द करने हेतु रकम जमा करके आवेदन करना: (क) जहां अचल संपत्ति किसी प्रमाणपत्र के निष्पादन में बेची गई है, वहां व्यतिक्रमी या कोई भी व्यक्ति जिसके हित बिक्री से प्रभावित हुए हैं, बिक्री की तारीख से तीस दिनों के भीतर किसी भी समय कर वसूली अधिकारी को बिक्री रद्द करने के लिए आवेदन कर सकेगा, यदि वह निम्नलिखित रकम जमा करे:

(i)   बिक्री की घोषणा में विनिर्दिष्ट वह रकम, जिसकी वसूली के लिए बिक्री का आदेश दिया गया था, और उस पर 15% प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित, जिसकी गणना बिक्री की घोषणा की तारीख से रकम जमा करने की तारीख तक की जाएगी; और
(ii)   क्रेता को जुर्माने के रूप में खरीद मूल्य के 5% के बराबर रकम का संदाय, जो Rs.1 से कम नहीं होगी;

(ख) यदि कोई व्यक्ति अपनी अचल संपत्ति की बिक्री रद्द करने के लिए उप-नियम (61) के अधीन आवेदन करता है, तो वह इस नियम के अधीन तब तक आवेदन करने या उस पर वाद लाने का हकदार नहीं होगा जब तक कि उस आवेदन को वापस नहीं लेता है।

61. नोटिस न दिए जाने या अनियमितता के आधार पर अचल संपति की बिक्री रद्द करने हेतु आवेदन: (क) खंड (ख) और (ग) के उपबंधों के अध्यधीन, जहां किसी प्रमाणपत्र के निष्पादन में अचल संपत्ति बेची गई है, वहां मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत आयकर अधिकारी, व्यतिक्रमी, या कोई भी व्यक्ति जिसके हित बिक्री से प्रभावित हुए हैं, बिक्री की तारीख से तीस दिनों के भीतर किसी भी समय कर वसूली अधिकारी को इस आधार पर अचल संपत्ति की बिक्री रद्द करने हेतु आवेदन कर सकेगा कि व्यतिक्रमी को इस नियम के अनुसार बकाया रकम का संदाय करने के लिए नोटिस नहीं दिया गया था या बिक्री के प्रकाशन या संचालन में कोई तात्विक अनियमितता थी;

(ख) किसी भी बिक्री को ऐसे किसी आधार पर रद्द नहीं किया जाएगा जब तक कि कर वसूली अधिकारी का समाधान न हो जाए कि आवेदक को नोटिस न दिए जाने या अनियमितता के कारण पर्याप्त हानि हुई है, और

(ग) इस नियम के अधीन व्यतिक्रमी द्वारा किया गया आवेदन तब तक अस्वीकृत कर दिया जाएगा जब तक कि आवेदक प्रमाणपत्र के निष्पादन में उससे वसूली योग्य रकम जमा नहीं कर देता।

62. यदि व्यतिक्रमी का बिक्री योग्य हित न हो तो बिक्री रद्द करना: क्रेता बिक्री के तीस दिनों के भीतर किसी भी समय कर वसूली अधिकारी से इस आधार पर बिक्री रद्द करने के लिए आवेदन कर सकेगा कि व्यतिक्रमी का बेची गई संपत्ति में कोई बिक्री योग्य हित नहीं था ।

63. बिक्री की पुष्टिः (क) यदि पूर्वोक्त नियमों के अधीन बिक्री रद्द करने के लिए कोई आवेदन नहीं किया जाता है, या यदि ऐसा आवेदन किया जाता है और कर वसूली अधिकारी द्वारा अस्वीकृत कर दिया जाता है, तो कर वसूली अधिकारी (यदि खरीद मूल्य की पूरी रकम का संदाय कर दिया गया है) बिक्री की पुष्टि का आदेश देगा, और इसके पश्चात, बिक्री पूर्ण हो जाएगी; और

(ख) यदि ऐसा आवेदन किया जाता है और स्वीकृत हो जाता है, और यदि रकम, शास्ति और प्रभार जमा करने पर बिक्री रद्द करने के लिए किए गए आवेदन के मामले में, बिक्री की तारीख से तीस दिनों के भीतर रकम जमा की जाती है, तो कर वसूली अधिकारी बिक्री रद्द करने का आदेश देगा, परंतु कोई भी आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि आवेदन की सूचना प्रभावित व्यक्तियों को न दे दी गई हो।

64. कतिपय मामलों में खरीद रकम की वापसी: यदि अचल संपत्ति की बिक्री रद्द कर दी जाती है, तो खरीद के लिए क्रेता दवारा संदाय की गई या जमा की गई कोई भी रकम, क्रेता को संदाय के लिए जमा की गई जुर्माने की रकम, यदि कोई हो और कर वसूली अधिकारी द्वारा अनुमत ब्याज सहित, क्रेता को वापस कर दी जाएगी।

65. बिक्री प्रमाणपत्र: (क) यदि अचल संपत्ति की बिक्री पूर्ण हो गई है, तो कर वसूली अधिकारी एक प्रमाणपत्र जारी करेगा जिसमें बेची गई संपत्ति और बिक्री के समय क्रेता घोषित किए गए व्यक्ति का नाम विनिर्दिष्ट होगा, और

(ख) ऐसे प्रमाणपत्र में वह तारीख बताई जाएगी जिस तारीख को बिक्री पूर्ण हुई।

66. प्रमाणपत्र के अधीन देय रकम जुटाने के लिए व्यतिक्रमी को सक्षम बनाने हेतु बिक्री का स्थगन: (क) जहां अचल संपत्ति की बिक्री का आदेश दिया गया है, यदि व्यतिक्रमी कर वसूली अधिकारी का समाधान कर सकेगा कि यह मानने का कारण है कि प्रमाणपत्र की रकम ऐसी संपत्ति, या उसके किसी भाग, या व्यतिक्रमी की किसी अन्य अचल संपत्ति के बंधक, पट्टे या निजी बिक्री द्वारा जुटाई जा सकती हैं, तो कर वसूली अधिकारी उसके आवेदन पर, बिक्री के आदेश में शामिल संपत्ति की बिक्री को ऐसी अपेक्षाओं पर और ऐसी अवधि के लिए स्थगित कर सकेगा, जैसा वह उचित समझे, ताकि वह रकम जुटा सके;

(ख) खंड (ग) और (घ) के उपबंधों के अध्यधीन ऐसे मामले में कर वसूली अधिकारी व्यतिक्रमी को एक प्रमाणपत्र जारी करेगा, जिसमें उसे इस नियम में अंतर्विष्ट किसी भी बात के के होते हुए उसमें यथाउल्लिखित अवधि के भीतर प्रस्तावित बंधक, पट्टा या बिक्री करने के लिए प्राधिकृतकिया जाएगा;

(ग) ऐसे बंधक, पट्टा या बिक्री के अधीन देय सभी धनरकम व्यतिक्रमी को नहीं, बल्कि कर वसूली अधिकारी को संदाय की जाएगी; और

(घ) इस नियम के अधीन कोई भी बंधक, पट्टा या बिक्री तब तक पूर्ण नहीं होगा जब तक कि कर वसूली अधिकारी द्वारा इसकी पुष्टि न कर दी जाए।

67. पुनः बिक्री से पहले नई घोषणा: अचल संपत्ति का प्रत्येक पुनः बिक्री, खरीद मूल्य के संदाय में व्यतिक्रम होने पर संदाय के लिए निर्धारित अवधि के भीतर संदाय न होने की स्थिति में, बिक्री के लिए पूर्व निर्धारित रीति और अवधि के लिए एक नई घोषणा जारी करने के पश्चात की जाएगी।

68. सह-भागीदार की बोली को प्राथमिकता: यदि बेची जाने वाली संपत्ति अविभाजित अचल संपत्ति का हिस्सा है, और दो या दो से अधिक व्यक्ति, जिनमें से एक सह-भागीदार है, ऐसी संपत्ति या किसी भी हिस्से के लिए समान रकम की क्रमशः बोली लगाते हैं, तो बोली सह-भागीदार की बोली मानी जाएगी।

69. व्यतिक्रमी से देय रकम की पूर्ति के लिए संपत्ति की स्वीकृति: (क) इस नियम में अंतर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, मुख्य आयकर आयुक्त या आयकर आयुक्त द्वारा इस संबंध में विधिवत प्राधिकृत निर्धारण अधिकारी, उप-नियम (59)(क) में उल्लिखित कारण से जिस संपत्ति की बिक्री स्थगित कर दी गई है, उस संपत्ति को व्यतिक्रमी से देय पूरी या आंशिक रकम की पूर्ति के लिए ऐसी कीमत पर स्वीकार कर सकेगा जो निर्धारण अधिकारी और व्यतिक्रमी के बीच सहमत हो;

(ख) जहां खंड (क) के अधीन कोई संपत्ति स्वीकार की जाती है, वहां व्यतिक्रमी ऐसी संपत्ति का कब्जा निर्धारण अधिकारी को सौंप देगा और जिस तारीख को संपत्ति का कब्जा निर्धारण अधिकारी को सौंपा जाता है, उस तारीख से संपत्ति केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएगी और वह सरकार, जहां अपेक्षित हो, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) के अधीन नियुक्त संबंधित रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को तदनुसार सूचित करेगी; और

(ग) यदि खंड (क) के अधीन तय की गई संपत्ति की कीमत, व्यतिक्रमी से देय रकम से अधिक है, तो निर्धारण अधिकारी संपत्ति का कब्ज़ा सौंपे जाने की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर व्यतिक्रमी को अतिरिक्त रकम का संदाय करेगा। यदि निर्धारण अधिकारी उक्त अवधि के भीतर अतिरिक्त रकम का संदाय करने में विफल रहता हैं, तो केन्द्रीय सरकार उक्त अवधि की समाप्ति से लेकर बकाया रकम के संदाय की तारीख तक की अवधि के लिए व्यतिक्रमी को उस रकम पर प्रत्येक माह या माह के अंश के लिए 0.5% की दर से साधारण ब्याज का संदाय करेगी।

70. कुर्क की गई अचल संपति की बिक्री की समय सीमा: (क) खंड (ख) और (ग) के उपबंधों के अध्यधीन, इस नियम के अधीन अचल संपत्ति की कोई बिक्री उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से सात वर्ष पश्चात नहीं की जाएगी, जिसमें किसी कर, ब्याज, जुर्माना, शास्ति या किसी अन्य रकम की मांग से संबंधित आदेश, जिसकी वसूली के लिए अचल संपत्ति कुर्क की गई है, अधिनियम के अध्याय 18वीं के उपबंधों के अनुसार अंतिम हो गया हो;

(ख) बोर्ड, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, उपर्युक्त अवधि को अधिकतम तीन वर्ष की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा सकेगा;

(ग) जहां उच्चतम बोली की रकम आरक्षित मूल्य से कम होने के कारण या उप-नियम (57) या उप- नियम (58) में उल्लिखित परिस्थितियों के कारण अचल संपत्ति को पुनः बेचना अपेक्षित हो, या जहां उप-नियम (61) के अधीन बिक्री रद्द कर दी गई हो, वहां अचल संपत्ति की बिक्री की परिसीमा अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ा दी जाएगी;

(घ) खंड (ङ) के उपबंधों के अध्यधीन, खंड (क) के अधीन परिसीमा अवधि की गणना करते समय, निम्नलिखित अवधि को बाहर रखा जाएगा—

(i)   वह अवधि जिसके दौरान किसी न्यायालय के आदेश या निषेधाज्ञा द्वारा कर, ब्याज, जुर्माना, शास्ति या किसी अन्य रकम की वसूली पर रोक लगाई गई हो; या
(ii)   वह अवधि जिसके दौरान किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश द्वारा अचल संपत्ति की कुर्की या बिक्री की कार्यवाही पर रोक लगाई गई हो; या
(iii)   इस नियम के अधीन कर वसूली अधिकारी द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध किसी अपील की प्रस्तुति की तारीख से प्रारंभ होकर अपील के निर्णय के दिन समाप्त होने वाली अवधि ।

(ङ) यदि किसी अवधि को बाहर करने के तुरंत पश्चात अचल संपत्ति की बिक्री के लिए परिसीमा अवधि एक सौ अस्सी दिनों से कम है, तो शेष अवधि को एक सौ अस्सी दिनों तक बढ़ा दिया जाएगा और परिसीमा अवधि को तदनुसार बढ़ा हुआ माना जाएगा;

(च) यदि इस नियम के अधीन 1 जून, 1992 से पहले किसी अचल संपत्ति की कुर्की की गई है और किसी कर, ब्याज, जुर्माना, शास्ति या किसी अन्य रकम की मांग से संबंधित आदेश, जिसकी वसूली के लिए अचल संपत्ति की कुर्की की गई है, उक्त तारीख से पहले निर्णायक या अंतिम हो गया है, तो वह तारीख वह तारीख मानी जाएगी जिस दिन उक्त आदेश निर्णायक या, जैसा भी मामला हो, अंतिम हुआ है; और

(छ) यदि अचल संपत्ति की बिक्री खंड (क) के उपबंधों के अनुसार नहीं की जाती है, तो उक्त संपत्ति के संबंध में कुर्की आदेश इस नियम के अधीन विनिर्दिष्ट परिसीमा अवधि की समाप्ति पर निरस्त माना जाएगा।

71. कारवार के लिए रिसीवर की नियुक्तिः (क) यदि किसी व्यतिक्रमी की संपत्ति में कोई कारबार शामिल हैं, तो कर वसूली अधिकारी कारबार को कुर्क कर सकेगा और कारबार के प्रबंधन के लिए किसी व्यक्ति को रिसीवर नियुक्त कर सकेगा; और

(ख) इस नियम के अधीन कारबार की कुर्की एक आदेश द्वारा की जाएगी जिसमें व्यतिक्रमी को कारबार को किसी भी प्रकार से हस्तांतरित करने या गिरवी रखने से प्रतिबंधित किया जाएगा और सभी व्यक्तियों को ऐसे हस्तांतरण या गिरवी से कोई लाभ लेने से प्रतिबंधित किया जाएगा, और यह सूचित किया जाएगा कि कारबार को इस नियम के अधीन कुर्क कर लिया गया है; और

(ग) कुर्की आदेश की एक प्रति व्यतिक्रमी को दी जाएगी, और दूसरी प्रति उस परिसर के एक प्रमुख भाग पर चिपकाई जाएगी जिसमें कारबार चलाया जाता है और कर वसूली अधिकारी के कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर भी चिपकाई जाएगी।

72. अचल संपति के लिए रिसीवर की नियुक्ति: जहां अचल संपत्ति कुर्क की जाती है, वहां कर वसूली अधिकारी संपत्ति की बिक्री का निदेश देने के बजाय ऐसी संपत्ति के प्रबंधन के लिए किसी व्यक्ति को रिसीवर नियुक्त कर सकेगा;

73. रिसीवर की शक्तियाँ: (क) जहाँ इस नियम के अधीन किसी कारबार या अन्य संपत्ति को कुर्क करके प्रबंधन के अधीन लिया जाता है, वहाँ रिसीवर को कर वसूली अधिकारी के नियंत्रण के अध्यधीन, संपत्ति के उचित प्रबंधन और उसके लाभ, या किराए और लाभ की वसूली के लिए अपेक्षित शक्तियाँ प्राप्त होंगी; और

(ख) ऐसे कारबार या अन्य संपत्ति के लाभ, या किराए और लाभ, प्रबंधन के व्यय को पूरा करने के पश्चात, बकाया रकम के संदाय के लिए समायोजित किए जाएँगे, और यदि कोई शेष रकम बचती है, तो वह व्यतिक्रमी को संदाय की जाएगी।

74. प्रबंधन को वापस लिया जाना: इस नियम के अधीन कुर्की और प्रबंधन को, कर वसूली अधिकारी के विवेक पर, या बकाया रकम का संदाय लाभ और किराए की प्राप्ति द्वारा या अन्यथा कर दिए जाने पर, किसी भी समय वापस लिया जा सकेगा।

75. to 83. 4[***]

84. न्यायिक रूप से कार्य करने वाले अधिकारी: प्रत्येक मुख्य आयकर आयुक्त या आयकर आयुक्त, कर वसूली अधिकारी या इस नियम के अधीन कार्य करने वाला अन्य अधिकारी, अपने कार्यों के निर्वहन में, न्यायिक अधिकारी संरक्षण अधिनियम, 1850 (1850 का 18) या न्यायाधीश संरक्षण अधिनियम, 1985 (1985 का 59) के अर्थ में न्यायिक रूप से कार्य करने वाला माना जाएगा।

85. साक्ष्य लेने की शक्ति: प्रत्येक मुख्य आयकर आयुक्त या आयकर आयुक्त, कर वसूली अधिकारी या इस नियम के उपबंधों के अधीन कार्य करने वाले अन्य अधिकारी को साक्ष्य प्राप्त करने, शपथ दिलाने, साक्षियों की उपस्थिति अनिवार्य करने और दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करने के प्रयोजन से (मुकदमे की सुनवाई करते समय) सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होंगी।

86. प्रमाणपत्र जारी रहना: व्यतिक्रमी की मृत्यु के कारण कोई भी प्रमाणपत्र अमान्य नहीं होगा।

87. व्यतिक्रमी की मृत्यु पर कार्यवाही: यदि कर वसूली अधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र जारी किए जाने के पश्चात किसी भी समय व्यतिक्रमी की मृत्यु हो जाती है, तो इस नियम में उल्लिखित कार्यवाही 5[***] कानूनी प्रतिनिधि के विरुद्ध जारी रखी जा सकती है, और इस नियम के उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो विधिक प्रतिनिधि स्वयं व्यतिक्रमी हो।

88. अपीलें: (क) इस नियम के अधीन कर वसूली अधिकारी द्वारा पारित किसी मूल आदेश के विरुद्ध, जो निर्णायक आदेश न हो, मुख्य आयकर आयुक्त या आयकर आयुक्त के समक्ष अपील की जा सकती है;

(ख) इस नियम के अधीन प्रत्येक अपील, अपील किए गए आदेश की तारीख से तीस दिनों के भीतर प्रस्तुत की जाएगी;

(ग) किसी अपील के निर्णय लंबित रहने के दौरान, यदि अपीलीय प्राधिकारी ऐसा निदेश दे, तो प्रमाणपत्र के निष्पादन पर रोक लगाई जा सकती है, अन्यथा नहीं; और

(घ) खंड (क) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि किसी मुख्य आयकर आयुक्त या आयकर आयुक्त को किसी क्षेत्र के संबंध में ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृतकिया गया है, तो उस क्षेत्र या उस क्षेत्र में शामिल किसी क्षेत्र के संबंध में ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृतकिसी कर वसूली अधिकारी द्वारा ऐसे प्राधिकार की तारीख से पहले पारित आदेशों के विरुद्ध सभी अपीलें ऐसे मुख्य आयकर आयुक्त या आयकर आयुक्त के समक्ष की जा सकती हैं।

89. समीक्षा: इस नियम के अधीन पारित किसी भी आदेश की समीक्षा, सभी संबंधित व्यक्तियों को सूचित करने के पश्चात, मुख्य आयकर आयुक्त या आयकर आयुक्त या कर वसूली अधिकारी या आदेश पारित करने वाले अन्य अधिकारी या उनके उत्तराधिकारी द्वारा अभिलेख में स्पष्ट त्रुटि होने पर की जा सकती है।

90. जमानतदार से वसूली: यदि इस नियम के अधीन कोई व्यक्ति व्यतिक्रमी द्वारा देय रकम के लिए ज़मानतदार बना है, तो उसके विरुद्ध इस नियम के अनुसार उसी प्रकार कार्यवाही की जा सकेगी मानो वह व्यतिक्रमी हो ।

91. 6[***]

92. प्ररूप: बोर्ड इस नियम के अधीन जारी किए जाने वाले किसी भी आदेश, सूचना, वारंट या प्रमाणपत्र के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले प्ररूप विनिर्दिष्ट कर सकेगा।

93. दिशा-निदेश जारी करने की शक्तिः (क) बोर्ड अधिनियम के उपबंधों के अनुरूप दिशा-निदेश जारी कर सकेगा, जो मुख्य आयकर आयुक्त या आयकर आयुक्त, कर वसूली अधिकारियों और इस नियम के अधीन कार्य करने वाले अन्य अधिकारियों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को विनियमित करेंगे;

(ख) विशेष रूप से, और खंड (क) द्वारा प्रदत्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसा आदेश निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले के लिए उपबंध कर सकेगा, अर्थात् :—

(i)   वह क्षेत्र जिसके अधीन मुख्य आयुक्त या आयुक्त या कर वसूली अधिकारी अधिकारिता का प्रयोग कर सकते हैं,
(ii)   इस नियम में बेची गई किसी भी संपत्ति को सौंपने की रीति;
(iii)   कर वसूली अधिकारी द्वारा या उसकी ओर से किसी दस्तावेज़ का निष्पादन या किसी परक्राम्य लिखत या किसी निगम के शेयर का पृष्ठांकन, जहाँ ऐसा निष्पादन या पृष्ठांकन उस परक्राम्य लिखत या शेयर को उस व्यक्ति को हस्तांतरित करने के लिए अपेक्षित है जिसने इस नियम के अधीन बिक्री के द्वारा इसे खरीदा है,
(iv)   इस नियम के अधीन बेची गई किसी अचल संपत्ति के खरीदार को संपत्ति का कब्ज़ा प्राप्त करने में किसी व्यक्ति द्वारा किए गए प्रतिरोध या अवरोध से निपटने की प्रक्रिया;
(v)   इस नियम के अधीन जारी किसी भी प्रक्रिया के लिए प्रभारित की जाने वाली फीस:
(vi)   इस नियम के अधीन की गई किसी अन्य कार्यवाही के संबंध में वसूल किए जाने वाले प्रभारों का पैमाना;
(vii)   पाउंडेज फीस की वसूली;
(viii)   कुर्की के अध्यधीन पशुधन या अन्य चल संपत्ति का भरण-पोषण और अभिरक्षा, ऐसे भरण- पोषण और अभिरक्षा के लिए प्रभारित की जाना वाली फीस, ऐसे पशुधन या संपत्ति की बिक्री और ऐसी बिक्री से प्राप्त आय का निपटान और
(ix)   कारबार की कुर्की का तरीका।

94. प्रभार के बारे में व्यावृत्तिः इस नियम में विनिर्दिष्ट कोई भी बात अधिनियम के किसी भी उपबंध को प्रभावित नहीं करेगी, जिसके अधीन कर किसी आस्ति पर प्रथम प्रभार है।

95. कठिनाइयों को दूर करने की शक्तिः यदि कर वसूली की कार्यवाही को क्रियान्वित करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो बोर्ड कठिनाई को दूर करने के लिए अपेक्षित या समीचीन, सामान्य या विशेष आदेश जारी कर सकेगा।

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