आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 8/2018

परिपत्र की तिथि

26/12/2018

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

26/12/2018

 परिपत्र सं. 8/2018

परिपत्र सं. 8/2018

एफ.नं. 370142/07/2018-टीपीएल

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

(केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड)

*****

 

दिनांक 26 दिसंबर, 2018

 

 

वित्त अधिनियम, 2018

के प्रावधानों के लिए

व्याख्यात्मक टिप्पणी

 

 

 

परिपत्र

आयकर अधिनियम

वित्त अधिनियम, 2018 - वित्त अधिनियम, 2018 के प्रावधानों हेतु व्याख्यात्मक टिप्पणी

परिपत्र सं. - /2018, दिनांक 26 दिसंबर, 2018

एक नजर में संशोधन

धारा/अनुसूची ब्यौरा/पैराग्राफ सं.
  वित्त अधिनियम, 2018
प्रथम अनुसूची दर का ढाचा, 3.1-3.4
अध्याय III आयकर अधिनियम, 1961
2 लाभांश के लिए संचित लाभ के कार्यक्षेत्र का विस्तृतीकरण, 4.1-4.5 पूंजीगत परिसंपत्ति में करोबारी माल के रूपांतरण से संबंधित प्रावधान का युक्तिकरण, 14.1-14.4 व्यापार या रोजगार के संबंध में मुआवजे की करदेयता, 13.1-13.3 इक्विटी शेयर आदि की बिक्री पर दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति के कराधान के लिए नर्इ व्यवस्था 29.1-29.13
9 बहुपक्षीय साधन (एमएलआर्इ) के अनुसार संशोधित पीर्इ नियमों के साथ "व्यापारिक संबंधों" के कार्यक्षेत्र का पंक्तिकरण, 5.1-5.5 "महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति" को शामिल करने के लिए "व्यापारिक संबंध" 6.1-6.9
10 एनटीआरओ को एक अनिवासी द्वारा कर की छूट के लिए रायल्टी और एफटीएस भुगतान, 7.1-7.4 गैर-कर्मचारी अंशदाता को एनपीएस से कर मुक्त निकासी के लाभ का विस्तारण, 8.1-8.3 स्त्रोत पर कर कटौती और कुछ में मुक्त उद्यमों के संबंध में भुगतान के तरीके 11.1-11.5 इक्विटी शेयर आदि की बिक्री पर दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति के कराधान की नर्इ व्यवस्था 29.1-29.13 निकाय, प्राधिकारी, बोर्ड, न्यास या कुछ मामलों में आयोग की श्रेणी की निर्दिष्ट आय हेतु छूट, 9.1-9.4 समझौते या व्यवस्था की समाप्ति पर कच्चे तेल के बचे हुए भंडार की बिक्री से विदेशी कंपनी की आय की छूट, 10.1-10.4
11 स्त्रोत पर कर कटौती और कुछ मुक्त उद्यमों के संबंध में भुगतान का तरीका 11.1-11.5
16 आय वेतन पर मानक कटौती, 12.1-12.4
17 आय वेतन पर मानक कटौती, 12.1-12.4
28 व्यापार या रोजगार के संबंध में मुआवजे की करदेयता, 13.1-13.3 पूंजी परिसंपत्ति में कारोबारी माल के रूपांतरण से संबंधित प्रावधान का युक्तिकरण 14.1-14.4
36 अधिसूचित आय गणना और प्रकटीकरण मानक के संबंध में संशोधन 39.1-39.3
40क अधिसूचित आय गणना और प्रकटीकरण मानक के संबंध में संशोधन 39.1-39.3
43 कारोबारी माल के पूंजीगत परिसंपत्ति में रूपांतरण के संबंध में प्रावधान का युक्तिकरण, 14.1-14.4 कृषि उत्पाद डेरिवटिव में व्यापार के संबंध में लेनदेन का कर उपचार 15.1-15.4
43कक अधिसूचित आय गणना और प्रकटीकरण मानक के संबंध में संशोधन 39.1-39.3
43गक धारा 43गक, धारा 50ग और धारा 56 का युक्तिकरण 16.1-16.4
43गख अधिसूचित आय गणना और प्रकटीकरण मानक के संबंध में संशोधन 39.1-39.3
43कड़ माल वाहक के मामले में धारा 44कड़ के अंतर्गत प्रकल्पित आय 17.1-17.6
47 अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र (आर्इएफएससी) को बढ़ावा देने के लिए उपाय 18.1-18.6
48 इक्विटी शेयरों आदि की बिक्री पर दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियों के काराधान की नर्इ व्यवस्था 29.1-29.13
49 पूंजीगत परिसंपत्ति में कारोबारी माल के रूपांतरण से संबंधित प्रावधान का युक्तिकरण 14.1-14.4
50ग धारा 43गक, धारा 50ग और धारा 56 का युक्तिकरण 16.1-16.4
50ड़ग धारा 54ड़ग के प्रावधान का युक्तिकरण 19.1-19.5
55 इक्विटी शेयर आदि की बिक्री पर दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति के कराधान की नर्इ व्यवस्था 29.1-29.13
56 धारा 43गक, धारा 50ग और धारा 56 का युक्तिकरण 16.1-16.4, कर तटस्थ स्थानांतरण 20.1-20.3 व्यापार या रोजगार के संबंध में मुआवजे की करदेयता 13.1-13.3
79 दिवालियापन समाधान को सुविधाजनक बनाने के लिए हानि के अग्रेषण और समायोजन का लाभ 21.1-21.6
80कग कुछ आय के संबंध में कटौतियां स्वीकृत नहीं है जबतक विवरणी नियत तिथि द्वारा दाखिल की जाती है 22.1-22.3
80घ स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और चिकित्सा उपचार के संबंध में वरिष्ठ नागरिक हेतु उपलब्ध कटौतियां 23.1-23.3
80घघख निर्दिष्ट बीमारियों के चिकित्सा उपचार के संबंध में वरिष्ठ नागरिक हेतु संवृद्ध कटौतियां 24.1-24.3
80-झकग स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने के लिए उपाय 25.1-25.3
80ञञकक रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहन 26.1-26.4
80पक प्रोड्यूसर कंपनियों के संबंध में कटौती 27.1-27.3
80ननक वरिष्ठ नागरिकों को ब्याज आय के संदर्भ में कटौती 28.1-28.5
80ननख वरिष्ठ नागरिकों को ब्याज आय के संदर्भ में कटौती 28.1-28.5
112क इक्विटी शेयरों की बिक्री पर दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्तियों का कराधान 29.1-29.13
115कघ विदेशी संस्थागत निवेशकों के मामले में दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियों का कराधान 30.1-30.3
115खक कुछ घरेलू कंपनियों के संबंध में धारा 115खक के प्रावधान का युक्तिकरण 31.1-31.4
115खखड़ धारा 115खखड़ के प्रावधानों का युक्तिकरण 32.1-32.4
115ञख कुछ कंपनियों के लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) की देयता से राहत 33.1-33.6
115ञग अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र (आर्इएफएससी) को बढ़ावा देने के लिए उपाय 18.1-18.6
115ञच अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र (आर्इएफएससी) को बढ़ावा देने के लिए उपाय 18.1-18.6
115-ण डीम्ड लाभांश हेतु लाभांश वितरित कर को लागू करना 34.1-34.4
115थ डीम्ड लाभांश हेतु लाभांश वितरित कर को लागू करना 34.1-34.4
115द एक इक्विटी ओरिएंटिड फंड में यूनिट धारक को लाभांश अदायगी पर लाभांश वितरित कर 35.1-35.4
115न एक इक्विटी ओरिएंटिड फंड में यूनिट धारक को लाभांश अदायगी पर लाभांश वितरित कर 35.1-35.4
139क कुछ मामलों में स्थार्इ खाता संख्या के लिए लागू करने हेतु उद्यम 36.1-36.5
140 दिवालियापन समाधान को सुविधाजनक बनाने के लिए हानि के अग्रेषण और समायोजन का लाभ 21.1-21.6
143 आय विवरणी के प्रसंस्करण के दौरान प्राथमिक समायोजनओं का युक्तिकरण 37.1-37.4, संवीक्षा मूल्यांकन के लिए नर्इ योजना 38.1-38.4
145क अधिसूचित आय गणना और प्रकटीकरण मानक के संबंध में संशोधन 39.1-39.3
145ख अधिसूचित आय गणना और प्रकटीकरण मानक के संबंध में संशोधन 39.1-39.3
193 7.75 प्रतिशत भारत सरकार के बचत (करयोग्य) बांड, 2018 स्त्रोत पर कर कटौती 40.1-40.3
194क वरिष्ठ नागरिकों को ब्याज आय के संबंध में कटौती 28.1-28.5
245 ण अग्रिम निर्णय के लिए प्राधिकारी के ढांचें हेतु संशोधन 41.1-41.5
245थ अग्रिम निर्णय के लिए प्राधिकारी के ढांचें हेतु संशोधन 41.1-41.5
253 धारा 271ञ के अन्तर्गत आयुक्त (अपील) द्वारा अधिरोपित जुर्माने के विरूद्ध अपील 42.1-42.3
271चक वित्तीय लेनदेन या प्रतिवेदी खाते के विवरण को प्रस्तुत न कर पाने के लिए जुर्माना 43.1-43.4
276गग विवरणी को प्रस्तुत न कर पाने के लिए अभियोजन से संबंधित धारा 276गग का युक्तिकरण 44.1-44.4
286 राष्ट्र-दर-राष्ट्र रिपोर्ट के संबंध में प्रावधानों का युक्तिकरण, 45.1-45.4
अध्याय VIII विविध
भाग XVI वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004
97 इक्विटी शेयरों आदि की बिक्री पर दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति के कराधान के लिए नर्इ व्यवस्था 29.1-29.13
भाग XVII वित्त अधिनियम, 2013
116 उत्पाद लेनदेन कर से संबंधित प्रावधानों का युक्तिकरण 46.1-46.9
117 उत्पाद लेनदेन कर से संबंधित प्रावधानों का युक्तिकरण 46.1-46.9
118 उत्पाद लेनदेन कर से संबंधित प्रावधानों का युक्तिकरण 46.1-46.9
128 उत्पाद लेनदेन कर से संबंधित प्रावधानों का युक्तिकरण 46.1-46.9
भाग XVIII काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015
46 काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 का युक्तिकरण 47.1-47.10
55 काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 का युक्तिकरण 47.1-47.10

1. प्रस्तावना

1-1 वित्त अधिनियम, 2018 (तत्पश्चात् "अधिनियम" के तौर पर संदर्भित), संसद द्वारा पारितानुसार, 29 मार्च, 2018 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हुर्इ तथा 2018 की अधिनियम सं. 13 के तौर पर अधिनियमित किया गया हैं। यह परिपत्र प्रत्यक्ष करों से संबंधित अधिनियम के प्रावधानों के अवयवों को स्पष्ट करता है।

2. अधिनियम द्वारा किए गए परिवर्तन

2.1 अधिनियम में शामिल हैं

  (i) निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए आयकर की दरें तथा उसके आधार पर आयकर की दरें जो कर को स्त्रोत पर काटा जाना हैं तथा अग्रिम कर को भुगतान वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान किया जाना हैं, निर्दिष्ट करें

 (ii) आयकर अधिनियम, 1961 ('आयकर अधिनियम') की संशोधित धाराये 2, 9, 10, 11, 16, 17, 28, 36, 40क, 43गक, 44कड., 47, 48, 49, 50ग, 54ड़ग, 55, 56, 79, 80कग, 80घ, 80घघख, 80झकग, 880´´कक, 80ननक, 115कघ, 115 खक, 115खखड़, 115´ञख, 115´ञग, 115´ञच, 115-ण, 115थ, 115 द, 115 न, 139क, 140, 143, 145क, 193, 194क, 245ण, 245थ, 253, 271चक, 276गग, 286

(iii) आयकर अधिनियम, में शामिल नर्इ धाराएं 43कक, 43गख, 80पक, 80ननख, 112क, 145ख

(iv) वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 की संशोधित धारा 97

 (v) वित्त अधिनियम, 2013 की संशोधित धाराएं 116, 117, 118, 128

(vi) काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्ति) और अधिरोपण अधिनियम कर, 2015 की संशोधित धाराए 46, 55

3. दर ढ़ांचा

3.1 निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए कर हेतु देय आय के संबंध में आयकर की दरें

3.1.1 निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए कर हेतु देयता की समस्त निर्धारिती श्रेणियों की आय के संबंध में आयकर की दरें अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I में निर्दिष्ट की गर्इ हैं। यह वही दरें जैसा वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान कुछ मामलों में देययोग्य कर की वसूली तथा "वेतन" से स्त्रोत पर कर कटौती, "अग्रिम कर" की गणना के प्रयोजन के लिए वित्त अधिनियम, 2017 की प्रथम अनुसूची के भाग III में निर्धारित हैं।

कथित भाग I में निर्दिष्ट दरों के प्रमुख विशेषताएं निम्नानुसार हैं :

3.1.2 व्यक्ति, हिंदु अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्ति अथवा कृत्रिम विधिक व्यक्ति की निकाय :-

प्रथम अनुसूची के भाग I के पैराग्राफ क निम्नानुसार व्यक्ति, हिंदु अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्ति अथवा कृत्रिम विधिक व्यक्ति की निकाय (सहकारी सोसाइटी, फर्म, स्थानीय प्राधिकारी तथा कंपनी को छोड़कर) को निर्दिष्ट करता हैं

कर हेतु प्रभारित आय आयकर की दरें
  व्यक्ति (भारत में वरिष्ठ नागरिक और अति वरिष्ठ नागरिक को छोड़कर), एचयूएफ, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों की निकाय तथा कृत्रिम विधिक व्यक्ति व्यक्ति, भारत में निवासी, जिसकी आय साठ वर्ष अथवा उससे अधिक की हैं लेकिन अस्सी वर्षों से कम हैं (वरिष्ठ नागरिक) भारत में निवासी, व्यक्ति जो अस्सी वर्ष अथवा उससे अधिक आयु के हैं (अति वरिष्ठ नागरिक)
रू. 2,50,000 तक शून्य शून्य शून्य
रू. 2,50,001 - रू. 3,00,000 5 प्रतिशत
रू. 3,00,001 - रू. 5,00,000 5 प्रतिशत
रू. 5,00,001 - रू. 10,00,000 20 प्रतिशत 20 प्रतिशत 20 प्रतिशत
10,00,000 से अधिक 30 प्रतिशत 30 प्रतिशत 30 प्रतिशत

ऐसी आंके गए आयकर की राशि पचास लाख रूपए से अधिक की कुल आय लेकिन एक करोड़ से कम वाले व्यक्ति की स्थिति में ऐसे आयकर के दस प्रतिशत की दर पर और एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाले व्यक्ति की स्थिति में ऐसे आयकर के पंद्रह प्रतिशत के अधिभार द्वारा बढ़ार्इ जाएगी।

हालांकि, सीमांत राहत उपलब्ध होगी जिससे कुल आय पर आयकर और अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि

  (i) पचास लाख से अधिक लेकिन एक करोड़ से कम राशि आय, जो पचास लाख रूपए से अधिक है, से अधिक राशि से पचास लाख की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी,

 (ii) एक करोड़ से अधिक राशि आय, जो एक करोड़ रूपए से अधिक है, से अधिक राशि से एक करोड़ की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी,

आयकर पर शिक्षा उपकर अधिभार सहित आंके गए कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर पर लगाया जाना जारी रहेगा। इसके अतिरिक्त, आंके गए कर की राशि को अतिरिक्त अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जिसे अधिभार सहित ऐसे आयकर के एक प्रतिशत की दर पर आयकर पर माध्यमिक तथा उच्चतर शिक्षा उपकर कहा जाता हैं

शिक्षा उपकर तथा माध्यमिक तथा उच्चतर शिक्षा उपकर के संबंध में कोर्इ सीमांत राहत उपलब्ध नही होगी

3.1.3 सहकारी संस्थाएं

प्रत्येक सहकारी संस्था की स्थिति में, आयकर की दरों को अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैराग्राफ ख में निर्दिष्ट किया गया हैं। दरें निम्नानुसार हैं :-

कर हेतु वसूलनीय आय दर
रू. 10,000 तक 10 प्रतिशत
रू. 10,001- रू. 20,000 20 प्रतिशत
रू. 20,000 से अधिक 30 प्रतिशत

ऐसी आंकी गर्इ राशि को एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाली सहकारी संस्था की स्थिति में ऐसे आयकर के बारह प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा। हालांकि, सीमांत राहत उपलब्ध होगी जिससे एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य राशि जो एक करोड़ रूपए से अधिक हैं, की राशि की तुलना में एक करोड़ रूपए की कुल राशि पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नही होगी।

आयकर पर शिक्षा उपकर अधिभार सहित आंके गए कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर पर लगाया जाना जारी रहेगा। इसके अतिरिक्त, आंके गए कर की राशि को अधिभार सहित ऐसे आयकर के एक प्रतिशत की दर पर आयकर पर माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक शिक्षा उपकर के तौर पर पहचाने जाने वाले अतिरिक्त अधिभार द्वारा और बढ़ाया जाएगा।

शिक्षा उपकर तथा माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर के संबंध में कोर्इ सीमांत राहत उपलब्ध नही होगी।

3.1.4 फर्म

प्रत्येक फर्म की स्थिति में, तीस प्रतिशत आयकर की दर को अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I पैराग्राफ ग में निर्दिष्ट किया गया हैं।

ऐसी आंके गए आयकर की राशि एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाली एक स्थानीय प्राधिकारी की स्थिति में ऐसे आयकर के बारह प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ार्इ जाएगी। हालांकि, सीमांत राहत उपलब्ध होगी जिससे एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि जो एक करोड़ रूपए से अधिक हैं की राशि की तुलना में एक करोड़ रूपए की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नही होगी

आयकर पर शिक्षा उपकर अधिभार सहित आंके गए कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर पर लगाया जाना जारी रहेगा। इसके अतिरिक्त, आंके गए कर की राशि को अतिरिक्त अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जिसे अधिभार सहित ऐसे आयकर के एक प्रतिशत की दर पर आयकर पर माध्यमिक तथा उच्चतर शिक्षा उपकर कहा जाता हैं

शिक्षा उपकर तथा माध्यमिक तथा उच्चतर शिक्षा उपकर के संबंध में कोर्इ सीमांत राहत उपलब्ध नही होगी

3.1.5 स्थानीय प्राधिकरण

प्रत्येक स्थानीय निकायों के संबंध में, आयकर की दरों को अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैराग्राफ घ में तीस प्रतिशत पर निर्दिष्ट किया गया हैं।

ऐसी आंके गए आयकर की राशि एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाली फर्म की स्थिति में ऐसे आयकर के बारह प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ार्इ जाएगी। हालांकि, सीमांत राहत उपलब्ध होगी जिससे एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि राशि जो एक करोड़ रूपए से अधिक हैं की राशि की तुलना में एक करोड़ रूपए की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नही होगा

आयकर पर शिक्षा उपकर अधिभार सहित आंके गए कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर पर लगाया जाना जारी रहेगा। इसके अतिरिक्त, आंके गए कर की राशि को अतिरिक्त अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जिसे अधिभार सहित ऐसे आयकर के एक प्रतिशत की दर पर आयकर पर माध्यमिक तथा उच्चतर शिक्षा उपकर कहा जाता हैं

शिक्षा उपकर तथा माध्यमिक तथा उच्चतर शिक्षा उपकर के संबंध में कोर्इ सीमांत राहत उपलब्ध नही होगी

3.1.6 कंपनियां

कंपनी की स्थिति में, आयकर की दरों को अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैराग्राफ ड़ में निर्दिष्ट किया गया हैं।

घरेलू कंपनी की स्थिति में, आयकर की दर -

 क) कुल आय का पच्चीस प्रतिशत है यदि पिछले वर्ष 2015-16 में कंपनी की कुल प्राप्तियां या कुल करोबार पचास करोड़ से अधिक नहीं है

 ख) कंपनी के विकल्प पर कुल आय का पच्चीस प्रतिशत, यदि यह आयकर अधिनियम की धारा 115खक के अंतर्गत शामिल शर्तों को पूरा करता हो

 ग) अन्य सभी मामलों में कुल आय का तीस प्रतिशत

आंके गए कर को सात प्रतिशत अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जहां ऐसी घरेलू कंपनी की कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक हो लेकिन दस करोड़ रूपए से अधिक न हो। बारह प्रतिशत पर की दर पर अधिभार लगाया जाएगा यदि कंपनी की कुल आय दस करोड़ रूपए से अधिक हो

घरेलू कंपनी को छोड़कर कंपनी की स्थिति में, 31.03.1961 के पश्चात् किंतु 1.4.1976 से पूर्व किए गए अनुमोदित समझौते के अंतर्गत सरकार अथवा भारतीय कंपनी द्वारा प्राप्त रॉयल्टी पचास प्रतिशत पर कराधान होगी। उसी प्रकार, 29.02.1964 के पश्चात् किंतु 01.04.1976 से पूर्व किए गए अनुमोदित समझौते के अंतर्गत सरकार अथवा भारतीय कंपनी द्वारा ऐसी कंपनी से प्राप्त तकनीकी सेवा के लिए शुल्क पर पचास प्रतिशत का कर लगाया जाएगा। ऐसी कंपनी की कुल आय के शेष पर कर दर चालीस प्रतिशत होगी। आंका गया कर दो प्रतिशत के अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जहां ऐसी कंपनी की कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक है किंतु दस करोड़ से अधिक न हो। पाच प्रतिशत की दर पर अधिभार लगाया जाएगा यदि घरेलू कंपनी कंपनी को छोड़कर कंपनी की कुल आय दस करोड़ रूपए से अधिक होती है

हालांकि, सीमांत राहत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कंपनी की स्थिति में स्वीकृत होगी कि -

  (i) एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि जो एक करोड़ रूपए से अधिक हैं की राशि की तुलना में एक करोड़ रूपए की कुल राशि पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक न हो,

 (ii) दस करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि, राशि जो दस करोड़ रूपए से अधिक हैं की राशि की तुलना में दस करोड़ रूपए की कुल राशि पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक न हो,

आयकर पर शिक्षा उपकर प्रत्येक कंपनी की स्थिति में अधिभार सहित आंके गए कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर पर लगाया जाना जारी रहेगा। साथ ही, ऐसे कर तथा अधिभार की राशि को अतिरिक्त अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जिसे अधिभार सहित आंके गए कर की राशि के एक प्रतिशत की दर पर आयकर पर माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर कहा जाता हैं।

शिक्षा उपकर तथा माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर के संबंध में कोर्इ सीमांत राहत उपलब्ध नही होगी।

3.2 वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान कुछ आय से स्त्रोत पर आयकर की कटौती के लिए दरें

3.2.1 प्रत्येक स्थिति में जिसमें कर को आयकर अधिनियम की धारा 193, 194, 194क, 194ख, 194खख, 194घ, 194ठखक, 194ठखख तथा 195 के प्रावधानों के अंतर्गत प्रभावी दरों पर काटा जाना हैं, वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान स्त्रोत पर आयकर की कटौती के लिए दरें अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग II में निर्दिष्ट किया गया हैं। वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान स्त्रोत पर आयकर की कटौती की दरें वही रहेंगी जैसी वित्त अधिनियम, 2017 की प्रथम अनुसूची के भाग II में निर्दिष्ट हैं। हालांकि, अनिवासी की स्थिति में,, कंपनी या एक विदेशी कंपनी के तौर पर नहीं, कर आयकर अधिनियम की धारा 112क में संदर्भित दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति के रूप में आय पर दस प्रतिशत की दर पर स्त्रोत पर कर कटौती की जाएगी।

3.2.2 अधिभार -

निम्नलिखित मामलों में स्त्रोत पर कर कटौती नीचे दिए गए संभव संकेत के उद्देश्यों के लिए अधिभार द्वारा बढ़ार्इ जाएगी

  (i) व्यक्ति, हिंदु अविभाजित परिवार, व्यक्ति के संघ, व्यक्ति की निकाय या कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति की स्थिति में जहां ऐसी आय या कुल आय दी गर्इ हो या दिए जाने की संभावना हो और कटौती के अनुसार निम्न से अधिक हो

 (क) पचास लाख रूपए लेकिन एक करोड़ से कम, अधिभार की दर ऐसे आयकर का दस प्रतिशत है

 (ख) एक करोड़ रूपए, अधिभार की दर ऐसे आयकर का पद्रंह प्रतिशत है

 (ii) फर्म या सहकारी संस्था के मामले में, जहां आय या ऐसी कुल आय दी गर्इ हो या दिए जाने की संभावना हो और कटौती के अनुसार एक करोड़ रूपए से अधिक हो तो अधिभार की दर ऐसे आयकर का बारह प्रतिशत है

(iii) विदेशी कंपनियों को किए गए भुगतान की स्थिति में, अधिभार की दर ऐसे आयकर का दो प्रतिशत हैं जहां ऐसी दी गर्इ अथवा दी जाने वाली आय तथा कटौती के अनुसार कुल राशि एक करोड़ रूपए से अधिक हो किंतु दस करोड़ रूपए से अधिक न हो। यदि जहां ऐसी आय अथवा ऐसी आय की कुल राशि का भुगतान विदेशी कंपनी को किया हो अथवा किया जाना हो तथा कटौती के अनुसार दस करोड़ रूपए से अधिक हो, तो अधिभार की दर पांच प्रतिशत हैं

(iv) स्त्रोत पर कर कटौती पर कोर्इ अधिभार एक व्यक्तिी, हिंदु अविभाजित परिवार, व्यक्तियों के संघ, व्यक्तियों की निकाय, कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति, सहकारी संस्था, स्थानीय प्राधिकारी, अथवा एक व्यक्ति के तौर पर फर्म अथवा एक घरेलू कंपनी की स्थिति में नही लगाया जाएगा।

3.2.3 स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर -

"आयकर पर शिक्षा उपकर" और "आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर" हटा दिया जाएगा। हालांकि, "स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर" के नाम से एक नया उपकर अधिभार, जहां भी लागू हो, सहित आयकर के चार प्रतिशत की दर पर लगाया जाएगा, यदि व्यक्ति हो नाकि एक घरेलू कंपनी को छोड़कर कंपनी सहित भारत में निवासी। उदाहरण के लिए, यदि विदेशी कंपनी की आय रू. 1,20,00,000 हो तथा ऐसी विदेशी कंपनी के भुगतान से काटे जाने वाला कर दस प्रतिशत की दर पर रू. 12,00,000/- हो तो ऐसे काटे गए कर पर दो प्रतिशत की दर पर अधिभार रू. 2,40,000 और काटे गए कर की राशि पर शिक्षा उपकर और अधिभार (रू. 12,00,000/- + रू. 24,000/- = रू. 12,24,000) रू. 48,960/- (रू. 12,24,000/- का 4 प्रतिशत) होगी

3.3 वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान विशेष परिस्थतियो में आयकर वसूली तथा "अग्रिम कर" की गणना, "वेतन" से स्त्रोत पर आयकर कटौती के लिए दरें

3.3.1 वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान अग्रिम कर की गणना तथा 'वेतन' द्वारा स्त्रोत पर आयकर कटौती के लिए दरें अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III में निर्दिष्ट की गर्इ हैं। ये दरें उन मामलों में वर्तमान आय पर वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान आयकर वसूली के लिए भी प्रयोज्नीय हैं जहां त्वरित मूल्याकंन किया जाना हैं, उदाहरण गैर-निवासियों हेतु भारत में उत्पन्न शिपिंग लाभ का अनंतिम मूल्यांकन, उस वित्त वर्ष के दौरान अनुकूलता के लिए भारत छोड़ने वाले व्यक्तियों को मूल्यांकन, व्यक्तियों का मूल्यांकन जिसके कर परिहार के लिए उचित स्थानांतरण करना आपेक्षित हो, अल्प अवधि आदि के लिए बनार्इ गर्इ निकाय का मूल्यांकन आदि। दरें निम्नानुसार हैं :

3.3.2 व्यक्ति, हिंदु अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों का निकाय अथवा कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति -

प्रथम अनुसूची के भाग III का पैराग्राफ क प्रत्येक व्यक्ति, हिंदु अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों की निकाय अथवा कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति (सहकारी संस्था, फर्म, स्थानीय प्राधिकारी तथा कंपनी को छोड़कर) को निर्दिष्ट करता हैं। मूल छूट की सीमा, कर की दरें तथा विभिन्न श्रेणियों के लिए आय की विभिन्न स्लैब वही रहेंगे जैसा वित्त वर्ष 2017-18 में हैं।

वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान कर की दरें निम्नानुसार हैं :-

कर हेतु प्रभारित आय आयकर की दरें
  व्यक्ति (भारत में वरिष्ठ नागरिक अति वरिष्ठ नागरिक को छोड़कर), एचयूएफ, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों की निकाय तथा कृत्रिम विधिक व्यक्ति व्यक्ति, भारत में निवासी, जिसकी आय साठ वर्ष अथवा उससे अधिक की हैं लेकिन अस्सी वर्षों से कम हैं (वरिष्ठ नागरिक) निवासी व्यक्ति, भारत में निवासी, जो अस्सी वर्ष अथवा उससे अधिक आयु के हैं (अति वरिष्ठ नागरिक)
रू. 2,50,000 तक शून्य शून्य शून्य
रू. 2,50,001 - रू. 3,00,000 5 प्रतिशत
रू. 3,00,001 - रू. 5,00,000 5 प्रतिशत
रू. 5,00,001 - रू. 10,00,000 20 प्रतिशत 20 प्रतिशत 20 प्रतिशत
10,00,000 से अधिक 30 प्रतिशत 30 प्रतिशत 30 प्रतिशत

ऐसी आंके गए आयकर की राशि पचास लाख रूपए से अधिक की कुल आय लेकिन एक करोड़ से कम वाले व्यक्ति की स्थिति में ऐसे आयकर के दस प्रतिशत की दर पर और एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाले व्यक्ति की स्थिति में ऐसे आयकर के पंद्रह प्रतिशत के अधिभार द्वारा बढ़ार्इ जाएगी। हालांकि, सीमांत राहत उपलब्ध होगी जिससे कुल आय पर आयकर और अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि

  (i) पचास लाख से अधिक लेकिन एक करोड़ से कम राशि आय, जो पचास लाख रूपए से अधिक है, से अधिक राशि से पचास लाख की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी,

 (ii) एक करोड़ से अधिक राशि आय, जो एक करोड़ रूपए से अधिक है, से अधिक राशि से एक करोड़ की कुल आय पर आयकर और अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी,

आयकर की राशि जिसे लागू होने वाले अधिभार द्वारा बढ़ाया गया है, को अधिभार सहित ऐसी राशि के चार प्रतिशत की दर पर 'स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर' पर आगे बढ़ाया जाएगा। स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर के संबंध में कोर्इ सीमांत राहत उपलब्ध नहीं होगी

3.3.3 सहकारी संस्थाएं

प्रत्येक सहकारी संस्था की स्थिति में, आयकर की दरों को अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के पैराग्राफ ख में निर्दिष्ट किया गया हैं। दरें निम्नानुसार हैं

कर हेतु वसूलनीय आय दर
रू. 10,000 तक 10 प्रतिशत
रू. 10,001- रू. 20,000 20 प्रतिशत
रू. 20,000 से अधिक 30 प्रतिशत

ऐसी आंकी गर्इ राशि को एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाली सहकारी संस्था की स्थिति में ऐसे आयकर के बारह प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा। हालांकि, सीमांत राहत उपलब्ध होगी जिससे एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य राशि जो एक करोड़ रूपए से अधिक हैं, की राशि की तुलना में एक करोड़ रूपए की कुल राशि पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नही होगी।

आयकर की राशि जिसे लागू होने वाले अधिभार द्वारा बढ़ाया गया है, को अतिरिक्त अधिभार सहित ऐसी राशि के चार प्रतिशत की दर पर 'स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर' पर आगे बढ़ाया जाएगा। स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर के संबंध में कोर्इ सीमांत राहत उपलब्ध नहीं होगी

3.3.4 फर्म

प्रत्येक फर्म की स्थिति में, तीस प्रतिशत आयकर की दर को अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III पैराग्राफ ग में निर्दिष्ट किया गया हैं।

ऐसी आंकी गर्इ राशि को एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाली फर्म की स्थिति में ऐसे आयकर के बारह प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा। हालांकि, सीमांत राहत उपलब्ध होगी जिससे एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य राशि राशि जो एक करोड़ रूपए से अधिक हैं, की राशि की तुलना में एक करोड़ रूपए की कुल राशि पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नही होगी।

आयकर की राशि जिसे लागू होने वाले अधिभार द्वारा बढ़ाया गया है, को अधिभार सहित ऐसी राशि के चार प्रतिशत की दर पर 'स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर' पर आगे बढ़ाया जाएगा। स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर के संबंध में कोर्इ सीमांत राहत उपलब्ध नहीं होगी

3.3.5 स्थानीय प्राधिकरण -

प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी के संबंध में, आयकर की दर को अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के पैराग्राफ घ में तीस प्रतिशत पर निर्दिष्ट किया गया हैं।

ऐसी आंकी गर्इ राशि को एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाले स्थानीय प्राधिकारी की स्थिति में ऐसे आयकर के बारह प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा। हालांकि, सीमांत राहत उपलब्ध होगी जिससे एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य राशि जो एक करोड़ रूपए से अधिक हैं, की राशि की तुलना में एक करोड़ रूपए की कुल राशि पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नही होगी।

आयकर की राशि जिसे लागू होने वाले अधिभार द्वारा बढ़ाया गया है, को अतिरिक्त अधिभार सहित ऐसी राशि के चार प्रतिशत की दर पर 'स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर' पर आगे बढ़ाया जाएगा। स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर के संबंध में कोर्इ सीमांत राहत उपलब्ध नहीं होगी।

3.3.6 कंपनियां

कंपनीं की स्थिति में, आयकर की दर को अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के पैराग्राफ ड़ में निर्दिष्ट किया गया हैं।

एक घरेलू कंपनी की स्थिति में

(क) आयकर की दर कुल आय का पच्चीस प्रतिशत है, यदि पिछले वर्ष 2016-17 में कंपनी का कारोबार या कुल प्राप्तियां दो सौ पचास करोड़ से अधिक न हो

(ख) आयकर की दर कंपनी के विकल्प पर कुल आय का पच्चीस प्रतिशत है यदि यह आयकर अधिनियम की धारा 115खक के अंतर्गत शामिल शर्तों को पूरा करता है

(ग) आयकर की दर अन्य सभी मामलों में कुल आय का पच्चीस प्रतिशत है

ऐसा आंका गया कर अधिभार द्वारा सात प्रतिशत बढ़ाया जाना जारी रहेगा जहां घरेलू कंपनी की कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक हे लेकिन दस करोड़ से कम। बारह प्रतिशत की दर पर अधिभार लगाया जाएगा यदि कंपनी की कुल आय दस करोड़ से कम होती है

घरेलू कंपनी को छोड़कर कंपनी की स्थिति में, 31.03.1961 के पश्चात् किंतु 1.4.1976 से पूर्व किए गए अनुमोदित समझौते के अंतर्गत सरकार अथवा भारतीय कंपनी से प्राप्त रॉयल्टी पचास प्रतिशत पर कराधान होगी। उसी प्रकार, 29.02.1964 के पश्चात् किंतु 01.04.1976 से पूर्व किए गए अनुमोदित समझौते के अंतर्गत सरकार अथवा भारतीय कंपनी से ऐसी कंपनी से प्राप्त तकनीकी सेवा के लिए शुल्क पर पचास प्रतिशत का कर लगाया जाएगा। ऐसी कंपनी की कुल आय के शेष पर कर दर चालीस प्रतिशत होगी। आंका गया कर दो प्रतिशत के अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जहां ऐसी कंपनी की कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक है किंतु दस करोड़ से अधिक न हो। पाच प्रतिशत की दर पर अधिभार लगाया जाएगा यदि ऐसी कंपनी की कुल आय दस करोड़ रूपए से अधिक होती हैं

हालांकि, सीमांत राहत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कंपनी की स्थिति में स्वीकृत होगी कि -

  (i) एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि राशि जो एक करोड़ रूपए से अधिक हैं की राशि की तुलना में एक करोड़ रूपए की कुल राशि पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक न हो,

 (ii) दस करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि, राशि जो दस करोड़ रूपए से अधिक हैं की राशि की तुलना में दस करोड़ रूपए की कुल राशि पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक न हो,

आयकर की राशि जिसे लागू होने वाले अधिभार द्वारा बढ़ाया गया है, को अधिभार सहित ऐसी राशि के चार प्रतिशत की दर पर 'स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर' पर आगे बढ़ाया जाएगा। स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर के संबंध में कोर्इ सीमांत राहत उपलब्ध नहीं होगी

3.4 अतिरिक्त आयकर पर अधिभार

जहां आयकर अधिनियम की धारा 115ण अथवा धारा 115धक अथवा धारा 115द अथवा धारा 115नक या धारा 115नघ की उप-धारा (2) के अंतर्गत अतिरिक्त आयकर दिया जाना हैं, अर्थात् प्रतिभूतिकरण न्यास द्वारा अपने निवेशक को आय के वितरण पर या कुछ न्यासों और संस्थानों की अभिवृद्धि आय म्यूचुअल फंड द्वारा अपने इकार्इ धारक को आय के वितरण पर अथवा शेयरधारक द्वारा शेयरों की पुन: खरीद पर कंपनी द्वारा आय के वितरण अथवा घरेलू कंपनियों द्वारा लाभांश पर ऐसा देययोग्य अतिरिक्त कर ऐसे आयकर के बारह प्रतिशत के अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा।

4 लाभांश के लिए संचित लाभ के कार्यक्षेत्र का विस्तृतीकरण

4.1 आयकर अधिनियम की धारा 2 अधिनियम में प्रयुक्त विभिन्न शब्दों को परिभाषित करती है। कथित धारा का वाक्यांश (22) एक कंपनी द्वारा अपने शेयरधारकों को संचित लाभ (चाहे पूंजीकृत हो या नहीं) के वितरण को शामिल करने के लिए "लाभांश" को परिभाषित करती है, चाहे वह निम्न रूप में हो

(क) इसकी सभी या किसी परिसंपत्तियों का निर्गमन

(ख) अपने पसंदीदा शेयरधारकों को बोनस का वितरण या किसी भी रूप में (बिन और बिना ब्याज) में डिबेंचर का निर्गमन

(ग) परिसमापन पर प्राप्ति का वितरण

(घ) पूंजी की कमी पर या

(ड़) एक असूचीबद्ध कंपनी के मामले में, 10 प्रतिशत या उससे अधिक के शेयरधारण को रखने वाले शेयरधारक को दिया गया कोर्इ ऋण या उधार या एक कंपनी जिसमें ऐसा शेयरधारक वास्तविक हित रखता हो (शेयरधारण या ब्याज के 20 प्रतिशत से अधिक) या ऐसे शेयरधार के व्यक्तिगत लाभ के लिए या की उसकी ओर से ऐसी कंपनी द्वारा कोर्इ भुगतान

4.2 कथित वाक्यांश के स्पष्टीकरण 2 के मौजूदा प्रावधान कथित वाक्यांश के लिए शब्द 'संचित लाभ' को परिभाषित करते है, चूंकि कंपनी के सभी लाभ वितरण या भुगतान या परिसमापन की तिथि तक अद्यतन है, कुछ शर्तों के अनुसार

4.3 ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां कंपनियां वितरित लाभ पर कर देने की जिम्मेदार से बचने के लिए गलत व्यवस्था को अपना रहे हैं। ऐसी व्यवस्था के अंतर्गत बड़े संचित लाभ वाली कंपनियों को पूंजी को कम करने के लिए एकीकरण का रास्ता अपनाना चाहिए और आयकर अधिनियम की धारा 2 के वाक्यांश (22) के उप-वाक्यांश (घ) के प्रावधानों को हटाना चाहिए।

4.4 ऐसी गलत व्यवस्था और समकक्ष अन्य गलत व्यवस्था को रोकने के लिए एक नए स्पष्टीकरण को शब्द 'संचित लाभ' के कार्यक्षेत्र को विस्तृत करने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 2 के वाक्यांश (22) में शामिल किया गया है जिससे यह बताया जा सके कि एकीकरण कंपनी के मामले में, संचित लाभ, चाहे पूंजीकृत हो या नहीं, या हानियां, जो भी मामला हो, एकीकरण की तिथि पर एकीकरण कंपनी के संचित लाभ द्वारा बढ़ाया जाएगा चाहे पूंजीकृत हो या नहीं,

4.5 प्रयोज्यता : यह एकीकरण 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2018-19 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

5. बहुपक्षीय साधन (एमएलआई) के अनुसार संशोधित पीर्इ नियम के साथ "व्यापारिक संबंध" के कार्यक्षेत्र का सूचीकरण

5.1 अधिनियम के संशोधन से पहले, आयकर अधिनियम की धारा 9 के उप-धारा (1) के वाक्यांश(i) के स्पष्टीकरण 2 के प्रावधान निर्दिष्ट करता है कि "व्यापारिक संबंध" में आश्रित एजेंट के माध्यम से अनिवासी द्वारा की गर्इ व्यापारिक गतिविधि शामिल है। आयकर अधिनियम के अंतर्गत "व्यापारिक संबंध" का कार्यक्षेत्र भारत के दोहरे कराधान परिहार समझौते (डीटीएए) में आश्रित एजेट स्थार्इ संस्थापन (डीएपीर्इ) के संबंध में प्रावधान के समान है। कर संधियों में डीएपीर्इ नियमों के संबंध में यदि कोर्इ व्यक्ति अनिवासी की ओर से अनिवासी के लिए अनुबंध करने के लिए प्राधिकृत किया गया है तो ऐसे एजेंट राष्ट्र में स्थार्इ संस्थापन (पीर्इ) को संस्थापित करेगा। हालांकि, कर्इ मामलों में डीटीएए के अनुच्छेद 5 के पैराग्राफ 5 अंतर्गत पीर्इ को बनाने से बचने को देखते हुए अनिवासी की ओर से व्यवहार करने वाले व्यक्ति अनुबंध पर बातचीत करेगा लेकिन अनुबंध को अंतिम रूप नहीं देगा

5.2 बीर्इपीएस कार्य योजना 7 के अंतर्गत ओर्इसीडी शुरूआती व्यवस्था या विखंडन व्यापार के रूप् में मौजूदा पीर्इ परिभाषा को गतिरोध पैदा कर कर के भुगतान से बचने पीर्र्इ की परिभाषा को मूल्यांकित किया। ऐसी कर परिहार योजना को नियंत्रित करने के लिए, बीर्इपीएस योजना 7 ने यह मुहैया कराने के लिए अनुच्छेद 5 के पैराग्राफ 5 हेतु संशोधन की सिफारिश की कि एक एजेंट में न केवल वह व्यक्ति शामिल होगा जो अनिवासी की ओर से आदतन अनुबंध करता है बल्कि वह व्यक्ति भी शामिल है जो अनुबंध को निष्कर्ष देने में अहम भूमिका निभाता है।

5.3 आगे, मूल कटौती और लाभ स्थानांतरण को रोकने के लिए, बीर्इपीएस कार्य योजना 7 के अंतर्गत सिफारिशों को कर संधि संबंधी उपायों (एमएलआर्इ) जिसका भारत भी एक हस्ताक्षरी है, को कार्यान्वित करने के लिए बहुपक्षीय समझौते के अनुच्छेद 12 में शामिल किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, इस परिणाम ने अपने आप एलएआर्इ के अंतर्गत आने वाली भारत की बहुपक्षीय कर संधियों को संशोधित कर दिया था, जहां इसके संधि सहभागियों को अनुच्छेद 12 के लिए भी चुना गया था। परिणामस्वरूप, भारत के डीटीएए के अनुच्छेद 5 के पैराग्राफ 5 में डीएपीर्इ प्रावधान, जैसा एमएलआर्इ द्वारा संशोधित है, आयकर अधिनियम की धारा 9 की उप-धारा (1) के वाक्यांश (झ) के स्पष्टीकरण 2 में वर्तमान प्रावधानों की तुलना में विस्तृत हो चुका है। हालांकि, आयकर अधिनियम की धारा 90 की उप-धारा (2) मुहैया कराती है कि घरेलू कानून उस सीमा तक डीटीएए के तत्स्थानी प्रावधानों पर प्रबल होंगे जो लाभकारी हो। चूंकि, वर्तमान स्थिति में, कार्यक्षेत्र में संकुचित होने के तौर पर घरेलू कानून के प्रावधान डीटीएए में प्रावधानों की तुलना में अधिक लाभकारी थे, एमएलआर्इ द्वारा संशोधित डीटीएए में ऐसे विस्तृत प्रावधान अप्रभावी थे।

5.4 उक्त को देखते हुए, आयकर अधिनियम की धारा 9 के प्रावधान संशोधित किए गए है जिससे डीटीएए में प्रावधानों के साथ उनको संरेखित किया जा सके, एमएलआर्इ द्वारा संशोधित, जिससे प्रभावी संधि में प्रावधान बनाए जा सके, तद्नुसार, आयकर अधिनियम की धारा 9 की उप-धारा (1) के वाक्यांश (i) यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किए गए हैं कि 'व्यापारिक संबंध' उस व्यक्ति के माध्यम से की गर्इ व्यापारिक गतिविधि को भी शामिल करेगा जो अनिवासी की ओर से व्यवहार करता है आदतन अनुबंध करता है या अनिवासी द्वारा अनुबंध को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आगे यह संशोधित किया जाता है कि अनुबंध -

  (i) अनिवासी के नाम पर या

 (ii) उस अनिवासी द्वारा स्वामित्व संपत्ति के स्वामित्व के स्थानांतरण के लिए, या प्रयोग के अधिकार के स्थानांतरण के लिए या उस अनिवासी के पास उसके इस्तेमाल का अधिकार हो या

(iii) उस अनिवासी द्वारा सेवाओं के प्रावधान के लिए

5.5 प्रयोज्यता : यह एकीकरण 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

6. 'महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति' को शामिल करने के लिए "व्यापारिक संबंध"

"कैलिर्फोनिया में पेड़ों पर संतरे प्राप्त की गर्इ संपत्ति नहीं है जबतक वह संतरे लिए ना जाएं, उस स्तर पर भी नहीं जब तक पैक किए जाते हैं और उस स्तर पर भी नहीं जहां मांग होने के अनुसार भेजें जाते हैं और तब भी नहीं जब ग्राहक उनको प्रयोग कर सके। यह स्तर उस बिंदु तक होगा जहां संपत्ति उपयोग लायक न हो, जिसे विभिन्न प्रादेशिक प्राधिकारियों द्वारा सांझा किया जा सके (1920 की पूर्वाध में राष्ट्र संघों को जमा की गर्इ दोहरे कराधान पर दोहरे कराधान रिपोर्ट का हिस्सा)"

6.1 आर्थिक अनुपालन के आधार पर व्यापारिक लाभ के कराधान मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय कराधान नियमों के आधार पर हमेशा आधारभूत रहे हैं। अर्थशास्त्रियों ने वास्तविक स्थान को महत्वपूर्ण बताने की बजाय आर्थिक अनुपालन को महत्वपूर्ण बताया और स्पष्ट किया है कि वास्तविक स्थिति केवल उस हद तक ही महत्वपूर्ण थी जब वह आर्थिक स्थिति को बताती हो।

6.2 सामान्य तौर पर, डीटीएए के अनुच्छेद 7 के अंतर्गत कर नियमों के आवंटन के अनुसार, एक उद्यम के व्यापारिक लाभ उस देश में करयोग्य है जिसमें करदाता एक निवासी है। यदि एक उद्यम वहां स्थित एक 'स्थार्इ संस्थापन' के माध्यम से दूसरे राष्ट्र में अपना व्यापार करता है तो ऐसे अन्य राष्ट्र स्थार्इ संस्थापन हेतु आरोप्य व्यापारिक लाभ पर भी कर लगा सकते है। इसके लिए, 'स्थार्इ संस्थान' का अर्थ है एक 'व्यापार का निश्चित स्थान' जिसके द्वारा एक उद्यम का व्यापार पूर्णता या आंशिक रूप से किया जाता हो बशर्ते कि व्यापारिक गतिविधियां प्रारंभिक या सहायक प्रकार की न हो और ऐसी व्यापारिक गतिविधियां एक आश्रित एजेंट द्वारा नहीं की जाती।

6.3 लंबे समय के लिए, वास्तविक उपस्थिति पर आधारित संपर्क को अनिवासी के नियमित आर्थिक अनुपालन के परोक्ष के तौर पर प्रयोग किया जाता था। हालांकि, सूचना और संचार तकनीक के आधुनिक होने के साथ पिछले कुछ दशकों में, डिजिटल माध्यम के जरिए दूर के स्थान से संचालित होने वाले व्यापारिक मॉड्यूल उभर चुके हैं। इस नए व्यापारिक मॉड्यूल के अंतर्गत, विदेशी उद्यम अन्य देश में अपनी उपस्थिति के बावजूद उस देश के साथ वार्ता कर सकते हैं। इसलिए, वास्तविक मौजूदगी के आधार पर मौजूदा संपर्क स्त्रोत राष्ट्र में व्यापारिक लाभ के कराधान के लिए और अधिक अच्छा नहीं रहा। परिणामस्वरूप, कर व्यापारिक लाभों के लिए स्त्रोत राष्ट्र के अधिकार जो इसकी अर्थव्यवस्था से प्राप्त होते हें अनुचित है और बिना किसी कारण खत्म होते हैं।

6.4 ओर्इसीडी अपने बीर्इपीएस योजना 1 के अंतर्गत डिजिटल अर्थव्यवस्था में कर चुनौतियों को संबोधित किया है जिसमें यह डिजिटल व्यापार में आने वाली प्रत्यक्ष कर चुनौतियों को संभालने के कर्इ विकल्पों पर चर्चा की जा चुकी है। ऐक ऐसा ही विकल्प "महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति" पर आधारित नए संबंध है। कार्य योजना 1 के अनुसार एक अनिवासी उद्यम एक राष्ट्र में करयोग्य उपस्थिति दर्ज कराएगी यदि उसकी इन तथ्यों के आधार पर उस राष्ट्र में महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति हो जिसका तकनीकी और अन्य स्वचालित साधनों की सहायता से अर्थव्यवस्था के साथ उद्देश्यपूर्ण और निरंतर संपर्क हो। यह आगे सिफारिश करता है कि राजस्व पहलू 'महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति' को निर्धारित करने के लिए उक्तकथित पहलुओं के साथ प्रयोग किए जा सकते हैं।

6.5 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, आयकर अधिनियम की धारा 9 की उप-धारा (1) के वाक्यांश (i) के मौजूदा प्रावधानों का कार्यक्षेत्र प्रतिबंधक प्रकार का था चूंकि यह भारत में अनिवासी की व्यापारिक आय के कराधान के लिए वास्तविक मौजूदगी संपर्क नियम के लिए आवश्यक रूप से मुहैया कराया गया है। कथित धारा का स्पष्टीकरण 2 जो 'व्यापारिक संबंध' को भी परिभाषित करता है वह भी अपने कार्यक्षेत्र में सीमित था चूंकि यह यह अनिवासी की कुछ गतिविधियों या लेनदेनों हेतु लागू होता है यानी एक आश्रित एजेंट के माध्यम से की गर्इ गतिविधियां। इसलिए उभरते हुए व्यापारिक मॉडल जैसे डिजीटल व्यापार, जिसमें भारत में वास्तविक उपस्थिति (चाहे खुद के द्वारा या किसी एजेंट के द्वारा) आवश्यक नहीं है, कथित धारा के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत स्पष्ट रूप से कवर नहीं थे

6.6 उक्त को देखते हुए, एक नया स्पष्टीकरण 2क यह मुहैया कराने के लिए अधिनियम की धारा 9 की उप-धारा (1) के वाक्यांश (i) में शामिल किया गया है कि भारत में 'महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति' 'व्यापारिक संबंध' को संस्थापित करेगी और इस उद्देश्य के लिए "महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति" का अर्थ होगा

  (i) भारत में डाटा या सॉफ्टवेयर के डाउनलोड के प्रावधान सहित भारत में अनिवासी द्वारा किसी वस्तु, सेवा या संपत्ति के संबंध में किया गया लेनदेन यदि पिछले वर्ष के दौरान ऐसे लेनदेन या लेनदेनों से उत्पन्न कुल भुगतान ऐसी राशि से अधिक हो जिसे निर्धारित किया जा सके; या

 (ii) डिजिटल रास्तों के माध्यम से भारत में ऐसे प्रयोगकर्ताओं के साथ बातचीत में संलग्न या व्यापारिक गतिविधियों के प्रणालीगत और निरंतर आग्रह

6.7 आगे यह मुहैया कराया जाता है कि ऐसी आय जो उक्त (i) या (ii) में निर्दिष्ट है भारत में अर्जित या उपार्जित समझी जाएगी। यह भी मुहैया कराया जाता है कि लेनदेन या गतिविधियां भारत में महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति को संस्थापित करेगा चाहे या ना चाहे -

  (i) भारत में किए गए ऐसे लेनदेन या गतिवाधियों के लिए समझौता

 (ii) अनिवासी का भारत में निवास या स्थान हो या

(iii) अनिवासी भारत में सेवाएं प्रतिपादित करता हो

इसलिए यदि भारत में अनिवासी द्वारा किए गए लेनदेन या गतिविधियां सीमा, जिसे निर्धारित किया जा सके, से अधिक होने पर ऐसा अनिवासी करदाता अपनी वास्तविक मौजूदगी के बावजूद भारत में कर हेतु उत्तरदायी होगा। इस सबंध में, यह भी स्पष्ट किया जाता है कि जबतक पीर्इ नियम हेतु तत्स्थानी संशोधन डीटीएए में किए जाते हैं, तो क्रास बॉर्डर व्यापार लाभ मौजूदा संधि नियमों के अनुसार करारोपित होने जारी रहेंगे।

6.9 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

7. अनिवासी को एनआरटीओ द्वारा रॉयल्टी और एफटीएस भुगतान कर से मुक्त है

7.1 आयकर अधिनियम की धारा 195 व्यक्ति द्वारा अनिवासी को भुगतान या जमा के समय कर कटौती करवाने की अपेक्षा करता है

7.2 राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) के रणनीतिक प्रकार और व्यापारिक मौजूदगी को देखते हुए, आयकर अधिनियम की धारा 10 में एक नए वाक्यांश (6घ) को शामिल किया गया है जिससे मुहैया कराया जा सके कि अनिवासी, एक कंपनी के तौर पर नहीं, या एक अनिवासी कंपनी हेतु उत्पन्न आय, एनटीआरओ को भारत में या उसके बाहर प्रतिपादित तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क या रॉयल्टी के रूप में, आय कर से करमुक्त होगा

7.3 तद्नुसार, एनटीआरओ को ऐसे भुगतान पर स्त्रोत से कर कटौती करना आवश्यक नहीं होगा

7.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2018-19 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

8. अनिवासी अंशदाताओं को एनपीएस की कर मुक्त निकासी के लाभ का विस्तार

8.1 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, आयकर अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (12क) मुहैया कराते हैं कि आयकर अधिनियम (एनपीएस) की धारा 80गगघ में संदर्भित पेंशन योजना हेतु अंशदान करने वाला एक कर्मचारी को अपने खाते को बंद करने या बाहर निकलने पर उसे देययोग्य कुल राशि के 40 प्रतिशत के संबंध में छूट की स्वीकृति होगी। हालांकि यह छूट गैर कर्मचारी अंशदाताओं के लिए उपलब्ध नहीं होगी।

8.2 स्तरीय अर्थगत फील्ड मुहैया कराने के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (12क) एनपीएस के सभी अंशदाताओं को कथित लाभ देने के लिए संशोधित किया गया है

8.3 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

9. निकाय, प्राधिकारी, बोर्ड, न्यास या कुछ मामलों में आयोग की श्रेणी की निर्दिष्ट आय हेतु छूट

9.1 आयकर अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (46) केंद्र सरकार को अधिसूचना द्वारा एक निकाय या प्राधिकारी या बोर्ड या न्यास या आयोग हेतु उत्पन्न निर्दिष्ट आय की छूट का अधिकार देती है यदि -

(क) जो किसी वाणिज्यिक गतिविधि न करता हो

(ख) जन सामान्य के लाभ के लिए किसी गतिविधि को प्रबंध करने वाले या नियमित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार या राज्य या सरकार द्वारा संस्थापित या केंद्र, राज्य प्रांतीय अधिनियम के अंतर्गत या उसके द्वारा संस्थापित या स्थापित है

9.2 अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, केंद्र सरकार को प्रत्येक निकाय, प्राधिकारी, न्यास या आयोग को अलग से अधिसूचित करने की जरूरत है भले ही वह मामलों की एक ही श्रेणी से संबंधित हो, अनुमोदन की पूर्ण प्रक्रिया काफी हद तक देर हुर्इ थी

9.3 तद्नुसार, आयकर अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (46) को संशोधित किया गया है ताकि केंद्र सरकार को ऐसे निकाय या प्राधिकारी या बोर्ड या न्यास या आयोग (जिस भी नाम से जाना जाए) की श्रेणी, अधिसूचना द्वारा, मुक्त करने के लिए सक्षम किया जा सके

9.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुआ

10. समझौते या व्यवस्था पर कच्चे तेल के बचे हुए भंडार की बिक्री से विदेशी कंपनी की आय की छूट

10.1 आयकर अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (48क) मुहैया कराती है कि भारत में एक स्टोर में कच्चे तेल के भंडारण के कारण विदेशी कंपनी हेतु उत्पन्न या अर्जित कोर्इ आय और भारत में रहने वाले किसी व्यक्ति को वहां से कच्चे तेल की बिक्री करमुक्त होगी यदि-

  (i) भंडारण और बिक्री केंद्र सरकार द्वारा किए गए समझौते या व्यवस्था के अनुसार है

 (ii) राष्ट्रीय ब्याज के संबंध में, विदेशी कम्पनी और समझौता या व्यवस्था केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित है

10.2 अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, कथित धारा का वाक्यांश (48ख) मुहैया कराती है कि समझौते या व्यवस्था के समाप्त होने के बाद कच्चे तेल के बचे हुए भंडार की बिक्री के कारण एक विदेशी कंपनी हेतु उत्पन्न या अर्जित कोर्इ आय ऐसी शर्तों के अनुसार करमुक्त होगी जिसे केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है। हालांकि, छूट के लाभ कथित समझौते या व्यवस्था की समाप्ति की स्थिति में कच्चे तेल के बचे हुए भंडार की बिक्री पर उपलब्ध नहीं थी।

10.3 अपने रणनीतिक पेट्रोलियम आरक्षित निधि को बढ़ानें में भारत को लाभ करते हुए परियोजना का रणनीतिक रूप देते हुए, आयकर अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (48ख) को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि बचे हुए भंडार से आय के संदर्भ में कर छूट का लाभ उन मामलों में उपलब्ध होगा जहां समझौता या व्यवस्था उसमें निर्दिष्ट शर्तों के अनुसार समाप्त होती है

10.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

11. स्त्रोत पर कर कटौती और कुछ छूट प्राप्त उद्यमों के संबंध में भुगतान का तरीका

11.1 आयकर अधिनियम की धारा 11 को धर्मांर्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिए संघटित संपत्ति से आय के संदर्भ में छूट के लिए मुहैया कराया गया है, जहां आय की प्राप्ति वाला व्यक्ति प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार पिछले वर्ष के दौरान ऐसी आय को संचय या प्रयोग करता है। इसी प्रकार, आयकर अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के तीसरे प्रावधान को कुछ ऐसी आय के संदर्भ में छूट के लिए मुहैया कराया गया है जहां ऐसी आय प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार विशेष उद्देश्य के लिए पिछले वर्ष के दौरान संचय या प्रयोग होती है

11.2 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, कथित व्यक्तियों द्वारा नकद में किए गए भुगतान पर कोर्इ प्रतिबंध नहीं था। ऐसी कोर्इ जांच भीनहीं थी कि जिससे यह जान सके कि क्या ऐसा व्यक्ति आयकर अधिनियम के अध्याय XVII-ख के अंतर्गत स्त्रोत पर कर कटौती के प्रावधानों का अनुसरण करता है या नहीं। तद्नुसार, आय को प्रयोग करने के सत्यापन के लिए अंकेक्षण प्रभाव की कमी थी।

11.3 कैश लैश अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने और काले धन की उत्पत्ति और प्रयोग को कम करने के लिए एक नए स्पष्टीकरण 3 को आयकर अधिनियम की धारा 11 की उप-धारा (1) में शामिल किया गया है जिससे मुहैया कराया जा सके कि कथित धारा की उप-धारा (1) के प्रावधानों के अंतर्गत आय के प्रयो को निर्धारित करने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 40 के वाक्यांश (क) के उप-वाक्यांश (झक) के प्रावधान और आयकर अधिनियम की धारा 40क की उप-धारा (3) और (3क), यथोचित परिवर्तन सहित, लागू होगा जैसे शीर्षक "व्यापार या पेशे के लाभ और प्राप्ति" के अंतर्गत वसूलनीय आय की गणना में लागू होता है

11.4 एक प्रावधान को आयकर अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) में शामिल किया जा सकता है ताकि एक समान प्रतिबंध मुहैया कराया जा सके जैसा ऊपर आय के प्रयोग के संबंध में कथित वाक्यांश के उप-वाक्यांश (iv),(v),(vi), या (viक) के अंतर्गत छूट प्राप्त व्यक्तियों को दिया गया है

11.5 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

12. वेतन आय पर मानक कटौती

12.1 आयकर अधिनियम की धारा 16, अन्य बातों के साथ-साथ, शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूलनीय आय की गणना में कुछ कटौतियों के लिए मुहैया करार्इ गर्इ है

12.2 वेतनभोगी करदाताओं के लिए राहत देने के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 16 को संशोधित किया गया है ताकि रू. 40,000 तक या प्राप्त वेतन, जो भी कम हो, की मानक कटौती की अनुमति दी जा सके

12.3 तद्नुसार, आयकर अधिनियम की धारा 17 को कुछ चिकित्सा व्ययों की प्रतिपूर्ति के संदर्भ में छूट को हटाने के लिए संशोधित किया गया है। आगे, आयकर नियम, 1962 के अंतर्गत परिवहन भत्ता (विकलांग व्यक्तियों के मामले को छोड़कर) के संदर्भ में छूट को अधिसूचना सं. 17/2018 दिनांक 06.04.2018 के द्वारा निरस्त कर दिया गया है

12.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

13. व्यापार या रोजगार के संबंध में मुआवजे की करदेयता

13.1 अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, आयकर अधिनियम की धारा 28 के प्रावधान मुहैया कराते हैं कि कुछ प्रकार के मुआवजा प्राप्तियां शीर्षक "व्यापार या पेशे के लाभ और प्राप्ति" के अंतर्गत करयोग्य होगा। हालांकि, इस धारा का कार्यक्षेत्र प्रतिबंधित था चूंकि मूल कटौती और राजस्व हानि के परिणामस्वरूप वह व्यापार और रोजगार के संबंध में मुआवजे की प्राप्तियों के विस्तृत खंड को कवर नहीं करता

13.2 तद्नुसार, आयकर अधिनियम की धारा 28 को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि उस व्यक्ति के व्यापार के संबंध में किसी अनुबंध की नियम और शर्तों के संशोधन या समाप्ति के संबंध में किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त या प्राप्त होने वाला कोर्इ मुआवजा, चाहे राजस्व हो या पूंजी हो, व्यापार या पेशे के लाभ और प्राप्ति के अंतर्गत करयोग्य है। आगे, आयकर अधिनियम की धारा 56 को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि व्यक्ति के रोजगार से संबंधित किसी अनुबंध की नियम और शर्तों की समाप्ति या संशोधनों के संबंध में किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त या प्राप्त होने वाले मुआवजे, चाहे राजस्व के प्रकार के हो या पूंजी के रूप में शीर्षक अन्य स्त्रोत से आय के अंतर्गत करयोग्य होगा। परिणामी संशोधन आयकर अधिनियम की धारा 2 के वाक्यांश (24) में भी किए गए हैं।

13.3 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

14. कारोबारी माल के पूंजीगत परिसम्पत्ति में रूपांतरण से संबंधित प्रावधानों का युक्तिकरण

14.1 आयकर अधिनियम की धारा 45, अन्य विषयों के साथ-साथ, मुहैया कराती है कि पूंजीगत परिसम्पत्ति के कारोबारी माल में रूपांतरित करने से उत्पन्न पूंजीगत परिसम्पत्ति कर हेतु वसूलनीय होगी। हालांकि, अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, कानून ने उन मामलों में करदेयता मुहैया नहीं करार्इ थी जहां करोबार माल को पूंजीगत परिसम्पत्ति में रूपांतरित किया गया हो या समझा गया हो

14.2 सममित उपचार देने के लिए और इनवेंटरी के पूंजीगत परिसम्पत्ति में रूपांतरण द्वारा आस्थगित कर भुगतान के अभ्यास को प्रोत्साहित न करने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 28 को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि इनवेंटरी के पूंजीगत परिसंपत्ति में रूपांतरण से उत्पन्न किसी लाभ या प्राप्ति या पूंजीगत परिसम्पत्ति के तौर पर इसके उपचार कर हेतु वसूलनीय होंगे जैसा शीर्षक "व्यापार या पेशे से लाभ और प्राप्ति" के अंतर्गत है। यह भी मुहैया कराया जाता है कि निर्धारित तरीके में निर्धारित रूपांतरण या उपचार की तिथि पर इनवेंटरी की उचित बाजार कीमत ऐसे रूपांतरण या उपचार के परिणामस्वरूप प्राप्त या उपार्जित प्रतिफल की पूर्ण राशि होने के तौर पर समझी जाएगी।

14.3 तद्नुसार, निम्नलिखित संशोधन आयकर अधिनियम के प्रावधानों में किया गया है -

  (i) धारा 2 के वाक्यांश (24) को "आय" की परिभाषा में कथित उचित बाजार कीमत को शामिल करने के लिए मुहैया किया गया है

 (ii) धारा 2 के वाक्यांश (42क) को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि ऐसी पूंजी परिसंपत्ति के संघटन की अवधि रूपांतरण या उपचार की तिथि से संगणित होगी

(iii) धारा 43 को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि जहां रूपांतरित पूंजी परिसंपत्ति निर्धारिती के व्यापार या पेशे के लिए प्रयोग होती है, कथित उचित बाजार कीमत इसकी वास्तविक लागत के तौर पर समझी जाएगी

(iv) धारा 49 को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि ऐसी पूंजी परिसंपत्तियों के स्थानांतरण पर उत्पन्न पूंजी प्राप्तियों की गणना के लिए कथित उचित बाजार कीमत अधिग्रहण की इसकी लागत के तौर पर समझी जाएगी

14.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

15 कृषि उत्पाद व्युत्पन्न में व्यापार के संबंध में लेनदेन का कर उपचार

15.1 आयकर अधिनियम की धारा 43 के वाक्यांश (5) "सट्टा लेनदेन" को परिभाषित करता है। हालांकि आयकर अधिनियम की धारा 43 के वाक्यांश (5) के परंतुक के वाक्यांश (ड़) निर्दिष्ट करते हैं कि एक प्राधिकृत संघ में किए गए वस्तु व्युत्पन्न में योग्य लेनदेन जो वित्त अधिनियम, 2013 (2013 की 17) के अध्याय VII के अंतर्गत वस्तु लेनदेन कर हेतु वसूलनीय है, एक गैर-काल्पनिक लेनदेन है

15.2 वस्तु लेनदेन कर (सीटीटी) को सीटीटी से छूट देने के लिए कृषि उत्पाद व्युत्पन्न को रखने के दौरान शुद्ध कर के अंतर्गत गैर-कृषि वस्तु व्युत्पन्न से संबंधित लेनदेन लाने के लिए वित्त अधिनियम, 2013 के द्वारा प्रस्तुत किया गया था। चूंकि कोर्इ सीटीटी नहीं दिया गया है, धारा 43 के वाक्यांश (5) के परंतुक के वाक्यांश (ड़) के लाभ कृषि उत्पाद व्युत्पन्न के व्यापार के संबंध में लेनदेन हेतु उपलब्ध नहीं थे और तद्नुसार ऐसे लेनदेनों को काल्पनिक लेनदेनों को अधिकार में रखा गया था

15.3 कृषि उत्पाद व्युत्पन्नों के व्यापार में भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 43 के वाक्यांश (5) में नए परंतुक को यह मुहैया कराने के लिए शामिल किया गया है कि कृषि उत्पाद व्युत्पन्नों के व्यापार के संदर्भ में एक लेनदेन, जो सीटीटी हेतु वसूलनीय नहीं है, एक पंजीकृत संघ या पंजीकृत शेयर बाजार में, गैर-काल्पनिक व्यापार के तौर पर समझे जाऐंगे

15.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

16. धारा 43गक, धारा 50ग और धारा 56 का युक्तिकरण

16.1 अचल संपत्ति में लेनदेन में से उत्पन्न व्यापारिक लाभ (धारा 43गक), पूंजी प्राप्तियां (धारा 50ग) और अन्य स्त्रोतों (धारा 56) से आय की गणना के लिए अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व बिक्री प्रतिफल या स्टांप ड्यूटी राशि का अधिकतम अपनाया गया था। आय के अंतर को दोनों खरीदार और विक्रेता के हाथों करारोपित किया गया था

16.2 यह बताया गया है कि प्राप्त वास्तविक प्रतिफल और स्टांप ड्यूटी राशि के बीच का अंतर प्लाट या स्थान के आकार सहित कर्इ प्रकार के तथ्यों के कारण उसी क्षेत्र में समकक्ष संपत्तियों के संबंध में हो सकता है

16.3 रियल एस्टेट क्षेत्र में वास्तविक लेनदेनों की स्थिति में कठिनार्इ को कम करने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 43गक, धारा 50ग और धारा 56 को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि उन मामलों में कोर्इ समायोजन नहीं किया जाएगा जहां स्टांप ड्यूटी राशि और बिक्री प्रतिफल के बीच का अंतर बिक्री प्रतिफल के पांच प्रतिशत से अधिक न हो

16.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

17. माल गाड़ी के मामले में धारा 44कड़ के अंतर्गत प्रकल्पित आय

17.1 आयकर अधिनियम की धारा 44कड़ मुहैया कराती है कि एक निर्धारिती, जिसके पास पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय 10 से अधिक माल वाहन न हो और जो ऐसे माल वाहन के पट्टे, किराये या भाड़े का व्यापार करता है, के संदर्भ में शीर्षक "व्यापार या पेशे के लाभ और प्राप्तियां" के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय ऐसा व्यापार कथित धारा के प्रावधानों के अनुसार आंके गए पिछले वर्ष में उसके अधिकार में सभी माल वाहन से कुल लाभ और प्राप्तियां होने के तौर पर समझा जाएगा

17.2 अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, कथित धारा की उप-धारा (2) मुहैया कराती है कि लाभ और प्राप्तियां प्रत्येक माल वाहन के लिए प्रति महीने या आंशिक महीने हजार सात पांच सौ रुपये दावा की जाने वाली राशि जो निर्धारिती द्वारा वास्तविक रूप से अर्जित की गर्इ हो, जो भी अधिक हो, के बराबर राशि होने के तौर पर समझी जाएगी

17.3 आयकर अधिनियम की धारा 44कड़ के अंतर्गत प्रकल्पित आय योजना सभी माल वाहकों पर उनकी टन क्षमता के बावजूद सभी श्रेणियों पर समान रूप से लागू होती है। केवल एक शर्त जिसे पूरा किया जाना जरूरी है वह है कि निर्धारिती को पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय 10 से अधिक माल वाहकों का स्वामित्व नहीं रखना चाहिए। तद्नुसार, एक परिवाहक बड़ी क्षमता/आकार के माल वाहनों का स्वामित्व रखता है वह तब तक धारा 44ड़ के लाभ का फायदा ले सकता है जबतक उसके पास 10 से कम माल वाहन है। यहां यह निर्दिष्ट करना आवश्यक है कि इस प्रावधान को प्रस्तुत करने के कानूनी प्रयोजन उनके अनुपालन बोझ को कम करने के लिए छोटे परिवाहकों को लाभ देना था। हालांकि, इस मामले में, यह प्रमाणित है कि भले ही बड़ी क्षमता के माल वाहन का लाभ का अंतर छोटी क्षमता के माल वाहकों से कम हो कर परिणाम समकक्ष थे जो कर इक्विटी के सिद्धांतों के विरूद्ध है।

17.4 उक्त को देखते हुए, आयकर अधिनियम की धारा 44कड़ को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि भारी माल वाहनों (12एमटी कुल वाहन भार से अधिक) के मामले में इस धारा के अंतर्गत लाभ और प्राप्तियां प्रत्येक माल वाहन के लिए प्रति महीने या आंशिक महीने के लिए या राशि जो निर्धारिती द्वारा वास्तविक रूप से अर्जित की गर्इ हो, जो भी अधिक हो, के लिए कुल माल वाहन भार या भार के बिना प्रति टन एक हजार रूपए के बराबर राशि होने के तौर पर समझी जाएगी। भारी वाहन को छोड़कर वाहन मौजूदा दरों के अनुसार करारोपित होना जारी रहेगा ।

17.5 तदानुसार, कथित धारा हेतु स्पष्टीकरण शब्द 'कुल माल वाहन', 'लोड के बिना भार' और "भारी माल वाहन" को परिभाषित करने के लिए संशोधित किया गया है

17.6 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

18. अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र (आर्इएफएससी) को प्रोत्साहित करने के उपाय

18.1 आयकर अधिनियम की धारा 47 को कुछ स्थानांतरण से संबंधित कर तटस्थता के लिए मुहैया कराया गया है

18.2 भारत में विश्वस्तरीय वित्त अवसंरचना के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए, उक्त कथित धारा को संशोधित किया गया है जिससे मुहैया किया जा सके कि निम्नलिखित परिसंपत्तियों में लेनदेन, किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार पर अनिवासी द्वारा किया गया, स्थानांतरण के तौर पर नही समझा जाएगा यदि प्रतिफल विदेशी मुद्रा में दिया गया हो या देययोग्य हो

  (i) बांड या वैश्विक निक्षेपागार प्राप्ति, जैसा आयकर अधिनियम की धारा 115कग की उप-धारा (1) में संदर्भित है

 (ii) भारतीय कंपनी के रूपए नामित बांड; या

(iii) डेरेवेटिव

18.3 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, आयकर अधिनियम की धारा 115ञग को सभी गैर-निगमित व्यक्तियों के मामले में समायोजित कुल आय के 18.5 प्रतिशत की दर पर वैकल्पिक न्यूनतम कर के लिए मुहैया करार्इ गर्इ है

18.4 भारत में विश्वस्तरीय वित्त अवसंरचना के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 115ञग को यह मुहैया कराने के लिए भी संशोधित किया गया है कि एक अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र में स्थित एक इकार्इ के मामले में धारा 115ञग के अंतर्गत वैकल्पिक न्यूनतम कर 9 प्रतिशत की दर पर वसूला जाएगा

18.5 आयकर अधिनियम की धारा 115ञच हेतु अहम संशोधन किए गए हैं

18.6 प्रयोज्यता : ये संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होंगे और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होंगे

19. धारा 54ड़ग के प्रावधानों का युक्तिकरण

19.1 आयकर अधिनियम की धारा 54ड़ग मुहैया कराती है कि दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्ति से उत्पन्न पूंजी प्राप्ति ऐसे स्थानांतरण की तिथि के बाद के छह महीनों के अंदर किसी भी समय दीर्घकालीन निर्दिष्ट परिसंपत्ति में निवेश किए कथित प्राप्ति के अनुसार और कथित धारा में निर्दिष्टानुसार ऐसी अन्य शर्तों हेतु कर हेतु वसूलनीय नहीं होगी

19.2 कथित धारा यह भी मुहैया कराती है कि 1 अप्रैल 2007 को या उसके बाद धारा के अंतर्गत कोर्इ निवेश करने के लिए "दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत" का अर्थ है कोर्इ बांड, तीन वर्षों के बाद प्रतिदेय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा या ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड द्वारा या इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य बांड 1 अप्रैल 2007 को या उसके बाद जारी किए गए हो

19.3 आयकर अधिनियम की धारा 54ड़ग के प्रावधानों के युक्तिकरण के लिए और दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्तियों, भूमि या भवन या दोनों के तौर पर, से उत्पन्न पूंजी प्राप्तियों हेतु धारा के कार्यक्षेत्र का सीमित करने के लिए धारा 54ड़ग को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि ऐसे स्थानांतरण की तिथि के बाद के छह महीनों की अवधि के अंदर किसी भी समय दीर्घकालीन निर्दिष्ट परिसंपत्ति में निवेशित दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्ति, भूमि या भवन या दोनों के तौर पर, के स्थानांतरण से उत्पन्न पूंजी परिसंपत्ति, कथित धारा में निर्दिष्ट कुछ शर्तों के अनुसार कर हेतु वसूलनीय नहीं होगी

19.4 आगे, तीन वर्षों से अधिक के लिए बांड जारी करने वाली योग्य कंपनी के निपटान पर कोष को उपलब्ध कराने के लिए यह भी मुहैया कराया गया है कि 1 अप्रैल 2018 को या उसके बाद कथित धारा के अंतर्गत कोर्इ निवेश करने के लिए दीर्घकालीन निर्दिष्ट परिसंपत्ति का अर्थ होगा कोर्इ बांड, पांच वर्षों के बाद प्रतिदेय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा या ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड द्वारा या इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य बांड 1 अप्रैल 2018 को या उसके बाद जारी बांड

19.5 प्रयोज्यता : ये संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होंगे और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होंगे

20. कर तटस्थ स्थानांतरण

20.1 आयकर अधिनियम की धारा 47 को कुछ तटस्थ कर स्थानांतरण के लिए मुहैया कराया गया है। आयकर अधिनियम की धारा 56 की उप-धारा (2) के वाक्यांश (x) अपनी सीमा से कुछ तटस्थ कर स्थानांतरण में से उत्पन्न आय को बाहर रखता है। हालांकि, अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, धारा 47 के वाक्यांश (iv) और वाक्यांश (v) हेतु संदर्भित स्थानांतरण को धारा 56 की उप-धारा (2) के वाक्यांश (x) के कार्यक्षेत्र से बाहर नहीं रखा गया था।

20.2 पूर्णता स्वामित्व सहायक कंपनी और इसकी घटक कंपनी के बीच राशि या संपत्ति के लेनदेन को आगे सुविधाजनक करने के लिए धारा 56 को धारा 56 की उप-धारा (2) के वाक्यांश (x) के कार्यक्षेत्र से ऐसे स्थानांतरण को बाहर रखने के लिए संशोधित किया गया है

20.3 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, 1 अप्रैल 2018 को या उसके बाद किए गए लेनदेन के संबंध में लागू होगा

21. दिवालियापन समाधान को सुविधाजनक बनाने के लिए हानियों के अग्रेषण और समायोजित करने के लाभ

21.1 आयकर अधिनियम की धारा 79 अन्य विषयों के साथ-साथ मुहैया कराती है कि एकाधिकारावत कंपनी में हानियों का अग्रेषण और समायोजन केवल तभी स्वीकार्य होगा यदि वर्ष या वर्षों, जिसमें हानि हुर्इ, के अंतिम दिन पर वोटिंग अधिकार के कम से कम इक्यावन प्रतिशत शेयर रखने वाले लाभार्थी मालिक में निरंतरता है।

21.2 सामान्य रूप से, दिवालियापन और शोधअक्षमता कोड, 2016 के अंतर्गत दिवालियापन समाधान की मांग करने वाली कंपनी के मामले में धारा 79 के अंतर्गत स्वीकार्य सीमा के परे शेयरों के लाभार्थी मालिकों में परिवर्तन शामिल है। यह अधिनियम ऐसी कंपनियों के पुर्नगठन और पुर्नवास के लिए बाधा के तौर पर है

21.3 इस समस्या के समाधान के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 79 को संशोधित किया गया है और कथित धारा की कठिनता को ऐसी कंपनियों के मामले में आसान बनाया गया है जिसकी समाधान योजना क्षेत्राधिकारी प्रधान आयुक्त या आयुक्त को सुनवार्इ का उपयुक्त अवसर दिए जाने के बाद दिवालियापन और शोध-अक्षमता के अंतर्गत अनुमोदित किया गया हो

21.4 प्रयोज्यता :यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

21.5 आयकर अधिनियम की धारा 140 को संशोधित किया गया है ताकि मुहैया कराया जा सके कि दिवालियापन और शोध अक्षमता कोड, 2016 के अंतर्गत एक कंपनी की समाधान प्रक्रिया के दौरान इसकी विवरणी कथित कोड के अंतर्गत निर्णयन प्राधिकारी द्वारा नियुक्त किए गए दिवालियापन पेशेवर द्वारा सत्यापित होगी

21.6 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुआ और तद्नुसार, 1 अप्रैल 2018, कथित तिथि को या उसके बाद दाखिल किए गए विवरणी लागू होगा

22. स्वीकृत न होने वाली कुछ आय के संदर्भ में कटौतियां जबतक विवरणी नियत तिथि तक दाखिल न की जाए

22.1 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, आयकर अधिनियम की धारा 80कग बताती है कि धारा 80-झक या धारा 80-झकख या धारा 80-झख या धारा 80-झग या धारा 80-झघ या धारा 80-झड़ के अंतर्गत कोर्इ कटौती स्वीकृत नहीं होगी जबतक निर्धारिती द्वारा आय की विवरणी आयकर अधिनियम की धारा 139 की उप-धारा (1) के अंतर्गत निर्दिष्ट नियत तिथि को या उससे पहले प्रस्तुत न की जाए। हालांकि यह कठिनार्इ शीर्षक "ग-कुछ आय के संदर्भ में कटौती" के अंतर्गत आयकर अधिनियम के अध्याय VIक में शामिल अन्य प्रावधानों के अंतर्गत कटौती का दावा करने वाले निर्धारिती पर लागू नहीं था

22.2 शीर्षक "ग-कुछ आय के संदर्भ में कटौतियां" के अंतर्गत आयकर के अध्याय VIक में शामिल प्रावधान के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए निर्धारिती द्वारा विवरणी को समय से दाखिलीकरण को सुनिश्चित करने के लिए, धारा 80कग को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि आयकर अधिनियम के अध्याय VIक में शीर्षक "ग-कुछ आय के संदर्भ में कटौतियां" के अंतर्गत कटौतियों की पूर्ण श्रेणी के अंतर्गत कटौती के लाभ स्वीकृत नहीं होंगे जबतक आय की विवरणी देय तिथि को या उससे पहले नहीं दी जाती।

22.3 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुआ और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2018-19 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होंगे।

23. स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और चिकित्सा उपचार के संदर्भ में वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध कटौतियां

23.1 अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, आयकर अधिनियम की धारा 80घ अन्य विषयों के साथ-साथ मुहैया कराती है कि रू. 30,000 तक की कटौती वरिष्ठ नागरिक के संबंध में स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी या निवारक स्वास्थ्य जांच या अति वरिष्ठ नागरिक के संबंध में चिकित्सा व्यय पर वार्षिक प्रीमियम के लिए भुगतान के संबंध में एक निर्धारिती, एक व्यक्ति या एक हिंदु अविभाजित परिवार के लिए स्वीकृत होगी।

23.2 चिकित्सा की अधिकतम लागत को कवर करने के लिए राहत देने हेतु आयकर अधिनियम की धारा 80घ को संशोधित किया गया है और कथित कटौती की मौद्रिक सीमा को रू. 30,000 से रू. 50,000 तक बढ़ाया गया है

23.3 कथित धारा को आगे यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि एक या उससे अधिक वर्ष के कवर के साथ स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के एक प्रीमियम की स्थिति में कटौती वर्षों जिसके लिए बीमा कवर मुहैया कराया गया है, की संख्या के लिए अनुपातिक आधार पर स्वीकृत होगी, निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा के अनुसार

23.4 प्रयोज्यता : ये संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होंगे और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होंगे

24. निर्दिष्ट बीमारियों के चिकित्सा उपचार के लिए वरिष्ठ नागरिकों को वर्धित कटौती

24.1 अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, आयकर अधिनियम की धारा 80घघख को कुछ निर्दिष्ट शर्तों के अनुसार एक अति वरिष्ठ नागरिक या एक वरिष्ठ नागरिक के संदर्भ में निर्दिष्ट बीमारी के चिकित्सा उपचार के लिए दी गर्इ राशि के संदर्भ में एक व्यक्ति और हिंदु अविभाजित परिवार को रू. 80,000 (एक अति वरिष्ठ नागरिक की स्थिति में) और रू. 60,000 (एक वरिष्ठ नागरिक की स्थिति में) तक की कटौती के लिए मुहैया करार्इ गर्इ है

24.2 निर्दिष्ट बीमारियों के चिकित्सा उपचार के लिए वरिष्ठ नागरिक को राहत देने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 80घघख के प्रावधानों को संशोधित किया गया है और कटौती की मौद्रिक सीमा को दोनों वरिष्ठ नागरिक और अति वरिष्ठ नागरिक के लिए रू. 1,00,000 तक बढ़ाया गया है।

24.3 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

25. स्टार्ट अप को प्रोत्साहित करने के लिए उपाय

25.1 अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, आयकर अधिनियम की धारा 80झकग मुहैया कराती है कि इस धारा के अंतर्गत कटौती निर्धारिती के विकल्प पर सात वर्षों में से तीन निरंतर निर्धारण वर्षों के लिए योग्य स्टार्ट अप के लिए उपलब्ध होगी यदि -

  (i) यह 1 अप्रैल 2016 को या उसके बाद लेकिन 1 अप्रैल 2019 से पहले निगमित हुर्इ हो

 (ii) इसके व्यापार का कुल कारोबार 1 अप्रैल 2016 को या उसके बाद प्रारंभ लेकिन 31 मार्च 2021 के बाद समाप्त होने वाले पिछले वर्ष में पच्चीस करोड़ से अधिक न हो

(iii) योग्य व्यापार जिसमें नए उत्पाद का अन्वेषण, विकास, परिनियोजन या, प्रसंस्करण, प्रक्रिया या तकनीकी या बौद्धिक संपदा द्वारा चलित सेवा शामिल है

25.2 भारत में स्टार्ट अप को प्रोत्साहित करने की योजना के प्रभाव को बढ़ानें के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 80-झकग को संशोधित किया गया है ताकि स्टार्ट अप के लिए कराधान व्यवस्था में निम्नलिखित परिवर्तन किये जा सके

  (i) लाभ 1 अप्रैल 2019 को या उसके बाद लेकिन 1 अप्रैल 2021 के पहले निगमित स्टार्ट अप के लिए उलब्ध होगा

 (ii) रू. 25 करोड़ से कम करोबार की अनिवार्यता निर्धारण वर्ष जिसके लिए कटौती धारा 80-झकग के अंतर्गत की गर्इ है, के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष हेतु लागू होगा

 (iii) योग्य व्यापार की परिभाषा को यह मुहैया कराने के लिए संवृद्ध किया गया है कि लाभ तभी उपलब्ध होंगे यदि यह रोजगार के सृजन या संपत्ति के सृजन अति संभावना के साथ एक मापनीय व्यापारिक मॉडल या उत्पाद या प्रक्रियाओं या सेवाओं के उन्नयन, विकास या सुधार में संलग्न हो

25.3 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

26. रोजगार उत्तपत्ति के लिए प्रोत्साहन

26.1 आयकर अधिनियम की धारा 80ञञकक को नए योग्य कर्मचारी जिसे वर्ष के दौरान 240 दिनों की न्यूनतम अवधि के लिए नियोजित किया गया है, को दिए गए वेतन के संदर्भ में 100 प्रतिशत की सामान्य कटौती के अतिरिक्त 30 प्रतिशत की कटौती के लिए मुहैया कराया गया है। हालांकि रोजगार की न्यूनतम अवधि परिधान उद्योग के मामले में 150 दिनों की छूट दी गर्इ है

26.2 फुटवेयर और चमड़े से बने उत्पादों के विनिर्माण में संलग्न निर्धारितीयों द्वारा नए रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 80ञञकक को फुटवेयर और चमड़ा उत्पाद उद्योग को 150 दिनों की राहत देने के लिए संशोधित किया गया है

26.3 आगे, धारा 80ञञकक के अंतर्गत कटौती को उस नए कर्मचारी के लिए कटौती के लाभ की स्वीकृति द्वारा सिद्ध किया गया है जो पहले वर्ष के दौरान न्यूनतम अवधि से कम है लेकिन बाद के वर्षों में न्यूनतम अवधि के लिए नियोजित रहती है

26.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होंगे और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होंगे

उत्पादक कंपनियों की आय के संदर्भ में कटौती

27.1 आयकर अधिनियम की धारा 80प को सहकारी सोसार्इटी के लाभ और प्राप्ति के संदर्भ में 100 प्रतिशत कटौती के लिए मुहैया करार्इ गर्इ है जो प्राथमिक कृषि गतिविधियों में संलग्न इसके सदस्यों को सहायता के लिए मुहैया करार्इ गर्इ है

27.2 एक नर्इ धारा 80पक को उत्पादक कंपनियों, जिसका कुल करोबार रू. 100 करोड़ से कम है, को समान लाभ देने के लिए आयकर अधिनियम में शामिल किया गया है, जिस कुल आय में से किसी आय शामिल है -

  (i) इसके सदस्यों द्वारा उगाए गए कृषि उत्पाद का विपणन; या

 (ii) इसके सदस्यों को आपूर्ति करने के लिए कृषि हेतु कृषि उपकरण, बीज, पशु या अन्य आशयित उत्पाद

(iii) इसके सदस्यों के कृषि उत्पाद के प्रसंस्करण

कटौती निर्धारण वर्ष 2019-2020 से 2024-25 तक पिछले प्रासंगिक वर्ष के लिए उपलब्ध होगा

27.3 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

28. वरिष्ठ नागरिकों हेतु ब्याज आय के संदर्भ में कटौती

28.1 आयकर अधिनियम की धारा 80ननक को बचत खाते से ब्याज आय के संदर्भ में रू. 10,000 तक की कटौती के लिए मुहैया कराया गया है

28.2 वरिष्ठ नागरिक को राहत देने के लिए, एक नर्इ धारा 80ननख को आयकर अधिनियम में शामिल किया गया है ताकि वरिष्ठ नागरिक द्वारा रखे गए जमा से ब्याज आय के संदर्भ में रू. 50,000 तक की कटौती की स्वीकृत कर सके। तद्नुसार, यह मुहैया कराया गया है कि धारा 80ननक के अंतर्गत कटौती इन मामलों में स्वीकृत नहीं है

28.3 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

28.4 परिणामी संशोधन आयकर अधिनियम की धारा 194क में भी किए गए हैं ताकि वरिष्ठ नागरिक के लिए ब्याज आय पर स्त्रोत पर कर कटौती के लिए प्रारंभिक सीमा को रू. 10,000 से रू. 50,000 तक बढ़ाया जा सके

28.5 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल, 2018 से प्रभावी हुए

29. इक्विटी शेयर आदि की बिक्री पर दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियों के कराधान के लिए नर्इ व्यवस्था

29.1 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, एक व्यापारिक न्यास की इकार्इ या इक्विटी ओरिएंटिड फंड की इकार्इ या एक कंपनी के इक्विटी शेयर के तौर पर, दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्ति के स्थानांतरण से उत्पन्न दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियां आयकर अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (38) के अंतर्गत आयकर से करमुक्त थी। हालांकि, एक प्राधिकृत शेयर बाजार पर किए गए दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्ति में लेनदेन प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) हेतु उत्तरदायी हैं

29.2 वर्षों के दौरान, यह महसूस किया गया कि यह व्यवस्था विनिर्माण के समक्ष स्वभाविक रूप से झुकी हुर्इ है और वित्त परिसंपत्ति में निवेश के परिवर्तन को प्रोत्साहित किया है। यह राजस्व हानि के परिणामस्वरूप कर आधार में महत्वपूर्ण कटौती का कारण भी है। समस्या इन छूट द्वारा सृजित कर मध्यस्ता अवसरों के दुरूपयोग द्वारा आगे मिश्रित की गर्इ है।

29.3 आर्थिक विरूपण को कम करने और कर कटौती को नियंत्रित करने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (38) के प्रावधान कथित धारा के अंतर्गत उपलब्ध छूट को निरस्त कर सकते हैं और आयकर अधिनियम में एक नर्इ धारा 112क को यह मुहैया कराने के लिए शामिल किया गया है कि एक दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्ति, एक कंपनी में इक्विटी शेयर या एक इक्विटी ओरिएंटिड फंड की इकार्इ या एक व्यापारिक न्यास की इकार्इ के तौर पर, के स्थानांतरण से उत्पन्न दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति एक लाख रूपए से अधिक की ऐसी पूंजी प्राप्ति के 10 प्रतिशत पर करारोपित होगी। शेष कुल आय पर कर कुल आय से कथित पूंजी प्राप्तियों की कुल राशि को कम करने के बाद आंका जाएगा।

29.4 10 प्रतिशत की रियायती दर कथित दीर्घकालीन प्राप्तियों हेतु लागू होगी यदि -

  (i) यदि जहां दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्ति एक कंपनी में एक इक्विटी शेयर के रूप में हो तो एसटीटी ऐसी पूंजी परिसंपत्तियों के स्थानांतरण और अधिग्रहण दोनों पर दिया गया हो

 (ii) यदि जहां दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्ति एक इक्विटी ओरिएंटिड फंड की इकार्इ या एक व्यापारिक न्यास की इकार्इ के रूप में हो तो एसटीटी ऐसी पूंजी परिसंपत्तियों के स्थानांतरण पर दिया गया हो

29.5 आगे, धारा 112क की उप-धारा (4) केंद्र सरकार को अधिग्रहण जिसके संदर्भ में एसटीटी के भुगतान की अनिवार्यता एक कंपनी के इक्विटी शेयर के मामले में लागू नहीं होगी, के रूप को अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करने का अधिकार देती है। इसी प्रकार, एसटीटी के भुगातन की अनिवार्यता लागू नहीं होगी यदि स्थानांतरण किसी वित्त सेवा केंद्र (आर्इएफएससी) में स्थित किसी प्राधिकृत शेयर बाजार पर की जाती हो और ऐसे स्थानांतरण का प्रतिफल विदेशी मुद्रा में प्राप्त हुआ हो या प्राप्त होने वाला हो

29.6 धारा 112क के प्रावधान निम्नलिखित के लिए भी लागू होते हैं -

  (i) अध्याय VIक के अंतर्गत कटौती का लाभ कुल आय से स्वीकृत होगी जिसे ऐसी पूंजी प्राप्तियों द्वारा कम किया गया हो

 (ii) इसी प्रकार धारा 87क के अंतर्गत छूट कुल आय पर आयकर से स्वीकृत होगी जिसे ऐसी पूंजी प्राप्तियों पर देययोग्य कर द्वारा कम किया गया हो

(iii) "इक्विटी ओरिएंटिड फंड" को धारा 10 के वाक्यांश (23घ) के अंतर्गत निर्दिष्ट एक म्युचुयल फंड की योजना के अंतर्गत स्थापित एक कोष के अर्थ के लिए परिभाषित किया गया है

 (क) यदि जहां कोष को अन्य कोष जिसे प्राधिकृत शेयर बाजार पर व्यापारिक किया गया हो, की इकार्इयों में निवेशित किया गया हो

  (i) ऐसे कोष की कुल प्राप्तियों का कम से कम 90 प्रतिशत ऐसे अन्य कोष की इकार्इयों में निवेशित हुआ हो और

 (ii) ऐसे अन्य कोष भी प्राधिकृत शेयर बाजार पर सूचित घरेलू कंपनियों के इक्विटी शेयरों में इसकी कुल प्राप्तियों के कम सक कम 90 प्रतिशत में निवेशित हुर्इ हो

 (ख) किसी अन्य मामलें में, ऐसे कोष की कुल प्राप्तियों का कम से कम 65 प्रतिशत प्राधिकृत शेयर बाजार पर सूचित घरेलू कंपनियों के इक्विटी शेयरों में निवेशित हुर्इ हो

29.7 परिणामी संशोधन यह मुहैया कराने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 48 हेतु किया गया है कि धारा 48 के पहले और दूसरे प्रावधान, अनिवासी की स्थिति में विदेशी मुद्रा में पूंजी प्राप्तियों की गणना के संबंध में और अधिग्रहण की लागत और उन्नयन की लागत की मुद्रास्फीति सूचीकरण के संबंध में, धारा 112क हेतु संदर्भित पूंजी प्राप्तियों की गणना के लिए स्वीकृत नहीं होगा

29.8 परिणामी संशोधन यह मुहैया कराने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 55 हेतु भी किए गए है कि दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्ति, एक कंपनी में इक्विटी शेयर या एक इक्विटी ओरिएंटिड म्युचुयल फंड की यूनिट या धारा 112क हेतु संदर्भित व्यापारिक न्यास की इकार्इ के तौर पर, के संबंध में अधिग्रहण की लागत निम्न का अधिकतम होगी

(क) ऐसी परिसंपत्ति के अधिग्रहण की लागत और

(ख) निम्न का कम से कम

   (i) ऐसी परिसंपत्ति की उचित बाजार कीमत; और

  (ii) पूंजी परिसंपत्ति के स्थानांतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या उपार्जित प्रतिलफ की पूर्ण राशि

29.9 आगे यह मुहैया कराया जाता है कि

(क) जहां पूंजी परिसंपत्ति 31 जनवरी,2018 के अनुसार किसी प्राधिकृत शेयर बाजार पर सूचित होता हो तो उचित बाजार कीमत कथित तिथि पर ऐसे विनिमय पर उद्धृत पूंजी परिसंपत्ति का अधिकतम मूल्य होगा। हालांकि, जहां 31 जनवरी, 2018 को ऐसे विनिमय पर ऐसी परिसंपत्ति में कोर्इ व्यापार नहीं होता तो उचित बाजार कीमत 31 जनवरी, 2018 के तुरंत पहले की उस तिथि पर ऐसे विनिमय पर ऐसी परिसंपत्ति का अधिकतम मूल्य होगा जब ऐसी परिसंपत्ति ऐसे विनिमय पर व्यापारित हुर्इ थी

(ख) यदि जहां पूंजी परिसंपत्ति एक इकार्इ हो और 31 जनवरी , 2018 के अनुसार प्राधिकृत शेयर बाजार पर सूचित न हो तो उचित बाजार कीमत कथित तिथि पर ऐसी परिसंपत्ति की शुद्ध परिसंपत्ति लागत होगी और

(ग) पूंजी परिसंपत्ति, एक कंपनी में इक्विटी शेयर के तौर पर, की उचित बाजार कीमत निम्नलिखित मामलों में वित्त वर्ष 2017-18 तक अधिग्रहण की इसकी लागत के मुद्रास्फीति सूचीकरण की स्वीकृति के बाद निर्धारित होगी -

  (i) जहां शेयर 31 जनवरी 2018 के अनुसार प्राधिकृत शेयर बाजार पर सूचित न हो लेकिन स्थानांतरण की तिथि के अनुसार ऐसे शेयरबाजार पर सूचित हो

  (ii) जहां स्थानांतरण की तिथि पर प्राधिकृत शेयर बाजार पर शेयर सूचित हो और जो उन शेयरों के निर्धारण में निर्धारिती की संपत्ति बन जाए जो आयकर अधिनियम की धारा 47 के अंतर्गत स्थानांतरण के तौर पर न समझे जाने वाले लेनदेने के रूप में 31 जनवरी, 2018 के अनुसार ऐसे विनिमय पर सूचित न हो

29.10 परिणामी संशोधन आयकर अधिनियम की धारा 2 के वाक्यांश (42क) में भी किए गए हैं ताकि आयकर अधिनियम की धारा 112क के स्पष्टीकरण के वाक्यांश (क) हेतु संदर्भित कोष के तौर पर 'इक्विटी ओरिएंटिड फंड' को परिभाषित किया जा सके

29.11 प्रयोज्यता : ये संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होंगे और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होंगे

29.12 आगे, परिणामी संशोधन वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 की धारा 97 में किया गया है ताकि आयकर अधिनियम की धारा 112क के स्पष्टीकरण के वाक्यांश (क) हेतु संदर्भित कोष के तौर पर 'इक्विटी ओरिएंटिड फंड' को परिभाषित किया जा सके

29.13 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल, 2018 से प्रभावी हुए

30. विदेशी संस्थागत निवेशक के मामले में दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियों के कराधान

30.1 आयकर अधिनियम की धारा 115कघ के प्रावधान, अन्य विषयों के साथ-साथ, मुहैया कराता है कि जहां विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआर्इआर्इ) की कुल आय में कुछ प्रतिभूतियों के स्थानांतरण से उत्पन्न दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियों के रूप में आय के रूप में आय शामिल है, ऐसी पूंजी प्राप्तियां दस प्रतिशत की दर पर कर हेतु वसूला जाएगा। हालांकि, अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, एक कंपनी के इक्विटी शेयर या एक इक्विटी ओरिएंटिड कोष या व्यापारिक न्यास की इकार्इ के तौर पर दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्ति के स्थानांतरण से उत्पन्न दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति आयकर अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (38) के अंतर्गत आयकर से मुक्त है

30.2 अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (38) के अंतर्गत छूट की निरस्ती के परिणामस्वरूप, ऐसे दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति एफआर्इआर्इएस के हाथों भी करयोग्य होगी। घरेलू निवेशकों के मामले में, एफआर्इआर्इएस एक लाख रूपए से अधिक की ऐसी प्राप्ति की राशि के संदर्भ में ही ऐसी दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियों के लिए उत्तरदायी होगा। तद्नुसार, आयकर अधिनियम की धारा 115कघ के प्रावधान को संशोधित किया गया है

30.3 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2019 को प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

31. कुछ घरेलू कंपनियों के संबंध में धारा 115खक के प्रावधान का युक्तिकरण

31.1 आयकर अधिनियम की धारा 115खक मुहैया कराता है कि किसी उत्पाद या वस्तु के विनिर्माण या उत्पादन का व्यापार और उसके संबंध में अनुसंधान या ऐसे विनिर्मित उत्पाद या वस्तु का वितरण या उसके द्वारा उत्पादन करने वाली नर्इ स्थापित घरेलू कंपनी की कुल आय, अपने विकल्प के आधार पर, उसमें निर्दिष्ट शर्तों क अनुसार पच्चीस प्रतिशत की दर पर करयोग्य होगी। यह लाभ निर्धारण वर्ष 2017-18 से उपलब्ध है।

31.2 हालांकि, कुछ ऐसी आय भी है जो उस दर पर अनुसूचक कर के अनुसार है जो पच्चीस प्रतिशत से कम या अधिक है। तद्नुसार, कर दाता अनायास कठिनार्इ या अनुचित राहत का विषय हो गया हो

31.3 तद्नुसार, आयकर अधिनियम की धारा 115खक को संशोधित किया गया ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि धारा 115खक के प्रावधान विनिर्माण, उत्पादन, अनुसंधान या उसमें संदर्भित वितरण के व्यापार से आय को सीमित करता है और आय जो वर्तमान में अनुसूचक दर पर करारोपित होती है, ऐसे करारोपित होना जारी रहेगा

31.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2017 को प्रभावी हुए और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2017-18 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

32. धारा 115खखड़ के प्रावधानों का युक्तिकरण

32.1 आयकर अधिनियम की धारा 115खखड़ को साठ प्रतिशत की उच्चतम दर पर धारा 68 या धारा 69 या धारा 69क धारा 69ख या धारा 69ग, 69घ में संदर्भित आय पर कर के लिए मुहैया कराया गया है

32.2 अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, कथित धारा की उप-धारा (2) मुहैया कराती है कि किसी व्यय या भत्ते या किसी हानि के स्वीकरण के संबंध में  कटौती उप-धारा (1) के वाक्यांश (क) में संदर्भित उसकी आय की गणना में आयकर अधिनियम के किसी प्रावधान के अंतर्गत निर्धारिती हेतु लागू नहीं होगी

32.3 धारा 115खखड़ के प्रावधानों का युक्तिकरण करने के लिए, एक संशोधन धारा 115खखड़ की उप-धारा (2) में किया गया है ताकि कथित धारा की उप-धारा (2) में धारा 115खखड़ की उप-धारा (1) के वाक्यांश (ख) में संदर्भित आय के सदंर्भ भी शामिल है

32.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2017 को पूर्वव्यापी रूप से प्रभावी हुआ और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2017-18 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू हुआ

33. कुछ कंपनियों के लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) की देयता से राहत

33.1 आयकर अधिनियम की धारा 115ञख को कंपनी के "बही लाभों" पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) के उदग्रहण के लिए मुहैया कराया गया है। बही लाभ की गणना में, आगे अन्य विषयों के साथ-साथ यह मुहैया कराया गया है कि बही खातों के अनु सार अग्रेषित हानि या अनवशोषित मूल्यह्रास की राशि के संबंध में कटौती, जो भी कम हो, स्वीकार्य होगा। तद्नुसार, जहां अग्रेषित हानि या अनवशोषित मूल्यह्रास शून्य हो तो कोर्इ कटौती स्वीकृत नहीं होती।

33.2 दिवालियापन समाधान की मांग करने वाली कंपनियों को राहत देने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 115ञख को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि अनवशोषित मूल्यह्रास और अग्रेषित हानि (अन्वशोषित मूल्यह्रास को छोड़कर) की कुल राशि बही लाभ से कम की जानी स्वीकार्य है यदि दिवालियापन या दिवाला कोड, 2016 के अंतर्गत कार्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया के लिए कंपनी का आवेदन निर्णयन प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत किया गया हो

33.3 तद्नुसार, एक कंपनी जिसका आवेदन स्वीकृत हो गया हो वह धारा 115´ख के अंतर्गत बही लाभ की गणना के लिए अग्रेषित हानि (अन्वशोषित मूल्यह्रास को छोड़कर) और अनवशोषित मूल्यह्रास को कम करने का हकदार होगा।

33.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2018-19 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

33.5 आगे, आयकर अधिनियम की धारा 115ञख को यह स्पष्ट करने के लिए संशोधित किया गया है कि कथित धारा के प्रावधान लागू नहीं होंगे और निर्धारिती, एक विदेशी कंपनी के तौर पर, के लिए कभी लागू नहीं किए गए के तौर पर समझा जाएगा यदि इसकी कुल आय में आयकर अधिनियम की धारा 44ख या धारा 44खख या धारा 44खखक या धारा 44खखख में संदर्भित व्यापार से लाभ और प्राप्ति ही शामिल है और ऐसी आय कथित धाराओं में निर्दिष्ट दरों पर कर हेतु प्रस्तुत की गर्इ हो।

33.6 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2001 को पूर्वव्यापी रूप से प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2001-02 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

34. समझे गये लाभांश हेतु लाभांश वितरण कर का आवेदन

34.1 एक घरेलू कंपनी द्वारा वितरित लाभांश ऐसी कंपनी द्वारा देययोग्य लाभांश वितरित कर का विषय है। हालांकि, अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, आयकर अधिनियम की धारा 2 के वाक्यांश (22) के उप-वाक्यांश (ड़) के अंतर्गत समझे गये लाभांश लागू होने वाली सीमांत दर पर प्राप्तकर्ता के हाथों करारोपित था। प्राप्तकर्ता के हाथों डीम्ड लाभांश की करदेयता से कर देयता के संग्रहण की गंभीर समस्या हो गर्इ और गंभीर मुकद्मेबाजी का विषय भी बन गया।

34.2 समझे गये लाभांश के कराधान में स्पष्टता और निश्चितता लाने के लिए आयकर अधिनियम के अध्याय XII-घ हेतु स्पष्टीकरण, धारा 115थ के बाद होने उत्पन्न, को हटा दिया गया ताकि आयकर अधिनियम की धारा 115-ण के अंतर्गत लाभांश वितरित कर के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत भी समझे गये लाभांश को लाया जा सके।

34.3 आगे, आयकर अधिनियम की धारा 115-ण को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि ऐसी समझे गये लाभांश ऋण या उधार के विभिन्न तरीकों में लाभांश को छिपाने से रोकने के लिए तीस प्रतिशत (जोड़े बिना) की दर पर करारोपित होगा।

34.4 प्रयोज्यता : समझे गये लाभांश पर लाभांश वितरित कर के अधिग्रहण से संबंधित यह संशोधन 1 अप्रैल, 2018 को या उसके बाद किए गए आयकर अधिनियम की धारा 2 के वाक्यांश (22) के उप-वाक्यांश(ड़) में संदर्भित लेनदेनों के लिए लागू होगा।

35. इक्विटी ओरिएंटिड कोष द्वारा इकार्इ धारक को वितरित आय पर लाभांश वितरित कर

35.1 आयकर अधिनियम की धारा 115द अन्य विषयों के साथ-साथ मुहैया कराती है कि निर्दिष्ट कंपनी द्वारा वितरित आय या अपने इकार्इ धारकों को म्युचुयल फंड की कोर्इ राशि कर हेतु वसूलनीय होगी और ऐसी निर्दिष्ट कंपनी या म्युचुयल फंड धारा में निर्दिष्ट दर पर ऐसे वितरित आय पर अतिरिक्त आयकर को देने के लिए उत्तरदायी होगी। हालांकि, अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले एक इक्विटी ओरिएंटिड फंड के इकार्इ धारक को कोर्इ वितरित आय कथित धारा के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय नहीं थी।

35.2 इक्विटी ओरिएंटिड कोष के इकार्इ धारकों के लिए नर्इ पूंजी प्राप्ति कर व्यवस्था के मद्देनजर ग्रोथ ओरिएंटिड कोष और लाभांश भुगतान कोष के बीच लेवल प्लेयिंग फील्ड को मुहैया कराने को देखते हुए, आयकर अधिनियम की धारा 115द के प्रावधान को संशोधित किया गया है ताकि मुहैया कराया जा सके कि जहां कोर्इ आय म्युचुयल फंड, इक्विटी ओरिएंटिड फंड के तौर पर, द्वारा वितरित होती है तो म्युचुयल फंड ऐसी वितरित आय पर दस प्रतिशत की दर पर अतिरिक्त आयकर देने के लिए उत्तरदायी है।

35.3 आगे, आयकर अधिनियम की धारा 115न को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि एक इक्विटी ओरिएंटिड कोष का वही अर्थ होगा जैसा आयकर अधिनियम की धारा 112क में निर्दिष्ट किया गया है।

35.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल, 2018 को प्रभावी हुए और 1 अप्रैल, 2018 को या उसके बाद अपने इकार्इ धारकों को एक इक्विटी ओरिएंटिड कोष द्वारा वितरित आय हेतु लागू होगा।

36. कुछ मामलों में स्थार्इ खाता संख्या के लिए लागू करने वाले उद्यम

36.1 आयकर अधिनियम की धारा 139क अन्य विषयों के साथ-साथ मुहैया कराती है कि उसमें निर्दिष्ट प्रत्येक व्यक्ति और जिसे स्थार्इ खाता संख्या आवंटित नहीं की गर्इ है स्थार्इ खाता संख्या (पैन) के आवंटन के लिए निर्धारण अधिकारी को आवेदन करेगा।

36.2 गैर-व्यक्ति उद्यमों के लिए विशिष्ट उद्यम संख्या (यूर्इएन) के तौर पर पैन का प्रयोग करने के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 139क के प्रावधान को संशोधित किया गया है ताकि मुहैया कराया जा सके कि प्रत्येक निवासी व्यक्ति के तौर पर नहीं, जो एक वित्त वर्ष में दो लाख पचास हजार रूपए या उससे अधिक की कुल राशि का लेनदेन करता है तो उसे पैन के आवंटन के लिए निर्धारण अधिकारी को आवेदन करना आवश्यक है।

36.3 तटस्थ व्यक्तियों के साथ वित्तीय लेनदेन संबंध स्थापित करने के लिए आगे यह मुहैया कराया जाता है कि प्रबंध निदेशक, निदेशक सहभागी, न्यासी, लेखक, संस्थापक, कर्ता, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रधान अधिकारी या ऑफिस बियरर या अन्य कोर्इ सक्षम व्यक्ति जो ऐसे उद्यमों की ओर से कार्य कर सके, पैन के आवंटन के लिए निर्धारण अधिकारी को भी आवेदन कर सकता है।

36.4 व्यापार को आसान बनाने के लिए र्इ-पैन को जारी करने को सक्रिय करने के लिए यह भी मुहैया कराया जाता है कि लैमिनेटिड कार्ड में पैन जारी करने की आवश्यकता अब अनिवार्य नहीं रही।

36.5 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए

37. आय की विवरणी के प्रसंस्करण के दौरान प्राथमिक समायोजनाओं का युक्तिकरण

37.1 आयकर अधिनियम की धारा 143 की उप-धारा (1) को धारा 139 के अंतर्गत की गर्इ आय की विवरणी के प्रसंस्करण या धारा 142 की उप-धारा (1) के अंतर्गत नोटिस का उत्तर देने के लिए मुहैया करार्इ गर्इ है।

37.2 कथित उप-धारा के वाक्यांश (क) मुहैया कराती है कि विवरणी के प्रसंस्करण के समय कुल आय या हानि उसके उप-वाक्यांश (i) और (vi) में निर्दिष्ट समायोजनाओं को करने के बाद आंकी जाएगी। कथित वाक्यांश के उप-वाक्यांश (vi) को प्रपत्र 26कध या प्रपत्र 16क या प्रपत्र 16 में दिखार्इ देने वाली अतिरिक्त आय के संदर्भ में समायोजना करने के लिए मुहैया कराया गया है जिसे विवरणी में कुल आय की गणना में शामिल न किया गया हो

37.3 समायोजनाओं के कार्यक्षेत्र को प्रतिबंधित करने के लिए, एक परंतुक को यह मुहैया कराने के लिए वाक्यांश के में शामिल किया गया है कि कथित वाक्यांश के उप-वाक्यांश (vi) के अंतर्गत कोर्इ समायोजना 1 अप्रैल, 2018 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष को या उसके बाद प्रस्तुत किसी विवरणी के संदर्भ में नहीं की जाएगी।

37.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए

38. संवीक्षा मूल्यांकन के लिए नर्इ योजना

38.1 आयकर अधिनियम की धारा 143 को मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया हेतु मुहैया कराया गया है। कथित धारा की उप-धारा (3) निर्धारण अधिकारी को निर्धारिती की कुल आय या हानि के मूल्यांकन, लिखित में आदेश द्वारा, करने और ऐसे मूल्यांकन के आधार पर उसके लिए देय किसी राशि या उसके द्वारा देय राशि को निर्धारित करने का अधिकार देती है।

38.2 निर्धारण करने के लिए एक नर्इ योजना को निर्दिष्ट करने के लिए ताकि निर्धारिती और निर्धारण अधिकारी के बीच इंटरफेस को दूर करके बड़ी पारदर्शिता और जवाबदेही को संसाधनों के सर्वोत्तम प्रयोग और समूह-आधारित मूल्यांकन की संकल्पना को प्रस्तुत करने के लिए निर्दिष्ट किया जा सके, आयकर अधिनियम की धारा 143 के प्रावधानों को संशोधित किया गया है और नर्इ उप-धारा (3क), (3ख) और (3ग) को कथित धारा में शामिल किया गया है।

38.3 नर्इ शामिल उप-धारा (3क) केंद्र सरकार को आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से संवीक्षा मूल्यांकन के लिए उक्तनिर्दिष्ट नर्इ योजना को निर्दिष्ट करने का अधिकार देती है। उप-धारा (3ख) केंद्र सरकार को आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्देशित करने का अधिकारी देती है कि निर्धारण से संबंधित आयकर अधिनियम का कोर्इ प्रावधान लागू नहीं होगा या ऐसी छूट, संशोधन और परिवर्तनों के साथ लागू होगा जिसे उसमें निर्दिष्ट किया जा सके। हालांकि, ऐसा कोर्इ भी निर्देश 31 मार्च, 2020 के बाद जारी नही होगा। उप-धारा (3ग) मुहैया कराती है कि उप-धारा (3क) और उप-धारा (3ख) के अंतर्गत जारी प्रत्येक अधिसूचना जल्द से जल्द संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष निर्दिष्ट होगी।

38.4 प्रयोज्यता : ये संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए

39. अधिसूचित आय गणना और प्रकटीकरण मानकों के संबंध में संशोधन

39.1 आयकर अधिनियम की धारा 145 केंद्र सरकार को आय गणना और प्रकटीकण मानक (आर्इसीडीएस) को अधिसूचित करने का अधिकार देती है। उक्त के अनुसार, केंद्र सरकार ने निर्धारण वर्ष 2017-18 से संबंधित 1 अप्रैल, 2017 से प्रभावी ऐसे दस मानकों को अधिसूचित किया है। यह शीर्षक "व्यापार या पेशे के लाभ और प्राप्ति" या "अन्य स्त्रोत से आय" के अंतर्गत आयकर हेतु वसूलनीय आय की गणना के लिए सभी निर्धारितियों (व्यक्ति या हिंदु अविभाजित परिवार जो आयकर अधिनियम की धारा 44कख के अंतर्गत कर अंकेक्षण का विषय नहीं है, को छोड़कर) के लिए लागू होता है।

39.2 आर्इसीडीएस को लागू करने के मुद्दे पर नवीनतम न्यायिक कथन के मद्देनजर निश्चितता लाने के लिए-

  (i) आयकर अधिनियम की धारा 36 को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि बाजार-से-बाजार हानि या अन्य संभावित हानि, धारा 145 की उप-धारा (2) के अंतर्गत अधिसूचित आर्इसीडीएस में मुहैया कराए गए तरीके में गणना के अनुसार, कटौती के तौर पर स्वीकृत होगा

 (ii) आयकर अधिनियम की धारा 40क को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि बाजार-से-बाजार हानि या अन्य संभावित हानि के संदर्भ में कोर्इ कटौती या स्वीकृति स्वीकार्य नहीं होगी केवल धारा 36 की उप-धारा (1) के शामिल किए गए नए वाक्यांश (xviii) के अंतर्गत को छोड़कर

(iii) एक नर्इ धारा 43कक को आयकर अधिनियम में यह शामिल करने के लिए शामिल किया गया है कि, धारा 43क के प्रावधानों के अनुसार, निर्दिष्ट विदेशी मुद्रा लेनदेन के संदर्भ में विदेशी विनिमय दरों में प्रभावी परिवर्तनों के कारण हुर्इ किसी प्राप्ति या हानि आय या हानि के तौर पर समझी जाएगी जिसे आर्इसीडीएस में मुहैया कराए गए तरीके में आंका जाएगा जैसा आयकर अधिनियम की धारा 145 की उप-धारा (2) के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है।

(iv) आयकर अधिनियम में एक नर्इ धारा 43गख को शामिल किया गया है ताकि मुहैया कराया जा सके कि सेवाएं देने के लिए निर्माण अनुबंध या अनुबंध से होने वाले लाभ कुछ अनुबंध सेवाओं को छोड़कर गणना विधि के प्रतिशत के आधार पर निर्धारित होगी और कि अनुबंध राजस्व में प्रतिधारण राशि शामिल होगी और अनुबंध लागत आकस्मिक ब्याज, लाभांश और पूंजी प्राप्तियों से कम किया जाएगा।

 (v) आयकर अधिनियम की धारा 145क को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि शीर्षक "व्यापार या पेशे के लाभ और प्राप्तियां" के अंतर्गत वसूलनीय आय के निर्धारण के लिए-

 (क) इनवेंटरी का मूल्यांकन धारा 145 के उप-धारा (2) के अंतर्गत अधिसूचित आर्इसीडीएस में मुहैया कराए गए तरीके में आंकी गर्इ वास्तविक लागत या शुद्ध प्राप्तनीय राशि के कम से कम होगी

 (ख) क्रय का मूल्यांकन और उत्पाद या सेवा की बिक्री और इनवेटरी को मूल्यांकन की तिथि और इसकी स्थिति के स्थान हेतु उत्पाद या सेवा देने के लिए निर्धारिती द्वारा वास्तविक रूप से दिए गए या अर्जित कोर्इ कर, अधिकर या शुल्क की राशि को शामिल करने के लिए समायोजित की जाएगी

 (ग) प्राधिकृत शेयर बाजार में इनवेटरी, असूचीबद्ध प्रतिभूतियों के तौर पर या सूचित पर उद्धृत नहीं, धारा 145 की उप-धारा (2) के अंतर्गत अधिसूचित आर्इसीडीएस में मुहैया कराए गए तरीके में प्रारंभ में प्राधिकृत वास्तविक लागत पर आंका जाएगा

 (घ) इनवेटरी, सूचीबद्ध प्रतिभूतियों के तौर पर, धारा 145 की उप-धारा (2) के अंतर्गत अधिसूचित आर्इसीडीएस में मुहैया कराए गए तरीके में वास्तविक लागत या शुद्ध प्राप्तनीय राशि के कम से कम पर मूल्यांकित होगी और इसके लिए वास्तविक लागत और शुद्ध प्राप्तनीय राशि श्रेणी के आधार पर की जाएगी

 (ड़) अनुसूचित बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्थान द्वारा संघटित इनवेंटरी, प्रतिभूतियों के तौर पर, भारतीय रिजर्व बैंक के मौजूदा दिशानिर्देशों पर विचार करने के बाद धारा 145 की उप-धारा (2) के अंतर्गत अधिसूचित आर्इसीडीएस के अनुसार आंकी जाएगी।

(vi) एक नर्इ धारा 145ख को यह मुहैया कराने के लिए आयकर अधिनियम में शामिल किया गया है कि -

 (क) संवृद्ध मुआवजे पर या मुआवजे पर एक निर्धारिती द्वारा प्राप्त ब्याज उस वर्ष की आय होने के तौर पर समझी जाएगी जिसमें यह प्राप्त हुर्इ

 (ख) एक अनुबंध या आयात प्रोत्साहन में मूल्य की वृद्धि के लिए दावा पिछले वर्ष जिसमें इसकी प्राप्ति की उचित निश्चितता प्राप्त हुर्इ, की आय होने के तौर पर समझा जाएगा

 (ग) धारा 2 के वाक्यांश (24) के उप-वाक्यांश (xvii) में संदर्भित आय पिछले वर्ष जिसमें यह प्राप्त हुर्इ, यदि किसी पूर्व पिछले वर्ष के लिए आय कर हेतु वसूली न गर्इ हो, की आय होने के तौर पर समझी जाएगी

39.3 प्रयोज्यता : नवीनतम न्यायिक राय से अधिसूचित आर्इसीडीएस की वैधता पर संदेह उत्पन्न हो गया है। हालांकि, कर्इ करदाताओं ने निर्धारण वर्ष 2017-18 के लिए आय की गणना के लिए आर्इसीडीएस के प्रावधानों के साथ पहले ही अनुपालन कर लिया है। कर्इ करदाताओं द्वारा अधिसूचित आर्इसीडीएस के साथ अनुपालन को नियमित किया है ताकि उनको आगे होने वाली किसी असुविधा से बचाया जा सके, यह संशोधन 1 अप्रैल 2017 से पूर्वव्यापी रूप से प्रभावी हुए यानी जिस तिथि पर आर्इसीडीएस को प्रभावी किया गया था और तद्नुसार निर्धारण वर्ष 2017-18 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा।

40. 7.75 प्रतिशत जीओआर्इ बचत (करयोग्य) बांड, 2018 पर स्त्रोत पर कर कटौती

40.1 भारत सरकार ने 2003 में 8 प्रतिशत (करयोग्य) बांड, 2003 प्रस्तुत किए। मौजूदा कर के अंतर्गत, निवेशक द्वारा प्राप्त ब्याज करयोग्य है। आगे, अदाता एक निवासी हेतु दस हजार रूपए के अतिरिक्त ऐसे ब्याज के भुगतान या जमा करने के समय आयकर अधिनियम की धारा 193 केअ अंतर्गत स्त्रोत पर कर कटौती हेतु उत्तरदायी है।

40.2 सरकार ने मौजूदा 8 प्रतिशत (करयोग्य) बांड, 2003 को समाप्त कर नए 7.75 प्रतिशत (करयोग्य) बांड, 2018 को आंरभ करने का निर्णय लिया। नए बांड के अंतर्गत प्राप्त ब्याज करारोपित होना जारी रहेंगे जैसा कि पहले के मामलों में था। आयकर अधिनियम की धारा 193 के प्रावधान को निवासी को ऐसे बांड पर ब्याज के भुुगतान करने के समय स्त्रोत पर कर कटौती के लिए स्वीकृति देने के लिए संशेाधित किया गया। हालांकि, कोर्इ टीडीएस नहीं काटा जाएगा यदि ब्याज की राशि वित्त वर्ष के दौरान दस हजार रूपए से कम या उसके बराबर हो।

40.3 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए

41. अग्रिम निर्णय प्राधिकारी के ढ़ांचे का संशोधन

41.1 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, आयकर अधिनियम की धारा 245-ण अन्य विषयों के साथ-साथ अग्रिम निर्णय प्राधिकारी के संविधान के लिए और इसकी पीठ के संविधान के लिए , सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के अध्याय V के अंतर्गत अग्रिम निर्णय देने के लिए मुहैया करार्इ गर्इ है।

41.2 सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 28ड़क के अंतर्गत नए सीमा शुल्क अग्रिम निर्णय प्राधिकारी के संविधान की दृष्टि से धारा 245-ण के प्रावधान को संशोधित किया गया है जिससे मुहैया कराया जा सके कि ऐसे प्राधिकारी अग्रिम निर्णय प्राधिकारी के तौर पर व्यवहार नहीं करेगा और सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 28ड़क के अंतर्गत सीमा शुल्क अग्रिम निर्णय प्राधिकारी की नियुक्ति की तिथि से सीमा शुल्क, अधिनियम 1962 के अध्याय v के लिए अपीलीय प्राधिकारी के तौर पर व्यवहार करेगा। परिणामी संशोधन भी सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 245थ में किए गए हैं।

41.3 आगे यह मुहैया कराया जाता है कि ऐसे प्राधिकारी सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 28ड़क के अंतर्गत सीमाशुल्क अग्रिम निर्णय प्राधिकारी की नियुक्ति की तिथि के बाद अग्रिम निर्णय प्राधिकारी के तौर पर पहले पारित आदेश या अग्रिम निर्णय के विरूद्ध कोर्इ अपील जमा नहीं करेगा।

41.4 अतिव्यापी से बचने के लिए, यह भी मुहैया कराया गया है कि जहां प्राधिकारी आयकर अधिनियम के मामलों में अग्रिम निर्णय की मांग करने वाले आवेदन के साथ व्यवहार करती है, राजस्व सदस्य कथित धारा की उप-धारा (3) के वाक्यांश (ग) के उप-वाक्यांश (i) में संदर्भित सदस्य होंगे।

41.5 प्रयोज्यता : ये संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए

42. धारा 271ञ के अंतर्गत आयुक्त (अपील) द्वारा अधिरोपित जुर्माने के विरुद्ध अपील

42.1 आयकर अधिनियम की धारा 253 अन्य विषयों के साथ-साथ मुहैया कराती है कि कथित धारा की उप-धारा (1) में निर्दिष्ट किसी आदेश से असंतुष्ट कोर्इ निर्धारिती ऐसे आदेश के विरूद्ध अपीलीय न्यायाधिकरण को अपील कर सकता है।

42.2 कथित उप-धारा के वाक्यांश (क) को संशोधित किया गया है कि ताकि अपीलीय न्यायाधिकरण के पहले लागू होने वाली धारा 271ञ के अंतर्गत एक आयुक्त (अपील) द्वारा पारित एक आदेश दिया जा सके

42.3 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए

43. वित्तीय लेनदेन या प्रतिवेदी खाते के विवरण को प्रस्तुत न कर पाने के लिए जुर्माना

43.1 अधिनियम द्वारा संशोधन से पहले, आयकर अधिनियम की धारा 271चक मुहैया कराती है कि यदि एक व्यक्ति, जिसे धारा 285खक की उप-धारा (1) के अंतर्गत प्रतिवेदी खाते या वित्तीय लेनदेन के विवरण को प्रस्तुत करना आवश्यक हो, निर्धारित समय के अंदर ऐसे विवरण को प्रस्तुत नहीं कर पाता तो वह प्रत्येक दिन की गलती के लिए एक सौ रूपए के जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी होगा।

43.2 कथित धारा का परंतुक आगे बताता है कि यदि ऐसा व्यक्ति धारा 285खक की उप-धारा (5) के अंतर्गत जारी नोटिस में निर्दिष्ट अवधि के अंदर वित्तीय लेनदेन या प्रतिवेदी खाते के विवरण को प्रस्तुत करने में विफल होता है तो वह प्रत्येक दिन की गलती के लिए पांच सौ रूपए के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा।

43.3 धारा 285खक के अंतर्गत प्रतिवेदी बाध्यता के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए, धारा 271चक के प्रावधानों को संशोधित किया गया है ताकि जुर्माने को प्रतिदिन एक सौ रूपए से पांच सौ रूपए और पांच सौ रूपए से एक हजार रूपए तक बढ़ाया जा सके अगर गलती जारी रहती है।

43.4 प्रयोज्यता : ये संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए

44. विवरणी को प्रस्तुत न कर पाने के लिए अभियोजन से संबंधित धारा 276गग का युक्तिकरण

44.1 आयकर अधिनियम की धारा 276गग मुहैया कराती है कि यदि एक व्यक्ति जानबूझकर आय की विवरणी को देय समय के अंदर प्रस्तुत नहीं करता जो उसे प्रस्तुत करनी ही है तो वह जुर्माने के साथ उसमें निर्दिष्ट अवधि के लिए अभियोजन के साथ दंड के योग्य होगा।

44.2 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, धारा 276गग के परंतुक के वाक्यांश (ii) के उप-वाक्यांश (ख) मुहैया कराती है कि एक व्यक्ति 1 अप्रैल, 1975 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए विवरणी को प्रस्तुत न कर पाने के लिए कथित धारा के विरुद्ध प्रसंस्कृत नहीं की जाएगी, यदि नियमित निर्धारण पर निर्धारित कुल आय पर उसके द्वारा देययोग्य कर जिसे अग्रिम कर, यदि हो, द्वारा घटाया गया हो और कोर्इ कर स्त्रोत पर काटा जाता हो तो वह तीन हजार रूपए से अधिक नहीं होना चाहिए।

44.3 शैल कंपनियों या बेनामी संपत्तियां रखने वाली कंपनियों द्वारा कथित परंतुक का दुरूपयोग से बचने के लिए वाक्यांश (ii) के उप-वाक्यांश (ख) के प्रावधानों को संशोधित किया गया है ताकि यह मुहैया किया जा सके कि उप-वाक्यांश एक कंपनी के संदर्भ में लागू नहीं होगा।

44.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुआ

45 राष्ट्र-दर-राष्ट्र रिपोर्ट से संबंधित प्रावधानों का युक्तिकरण

45.1 आयकर अधिनियम की धारा 286 को एक अंतर्राष्ट्रीय समूह के संबंध में राष्ट्र-दर-राष्ट्र रिपोर्ट (सीबीसीआर) के रूप में विशिष्ट प्रतिवेदी व्यवस्था के लिए मुहैया कराया गया है।

45.2 आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओर्इसीडी) की मूल कटौती और लाभ स्थानांतरण (बीर्इपीएस) परियोजना की कार्य योजना 13 के आदर्श कानून पर आधारित और ऐसी रिर्पोंटिंग के अनुपालन बोझ को कम करने और प्रभाव को बढ़ानें के लिए आयकर अधिनियम की धारा 286 को निम्नलिखित तरीकों में संशोधित किया गया है :-

  (i) राष्ट्र-दर'-राष्ट्र (सीबीसीआर) की प्रस्तुति के लिए अनुमत समय, यदि मूल उद्यम या वैकल्पिक प्रतिवेदी उद्यम (एआरर्इ) भारत में हो, को प्रतिवेदी लेखांकन वर्ष की समाप्ति से बारह महीनों तक बढ़ाया जाता है

 (ii) भारत में घटक कंपनी, जिसकी अनिवासी मूल कंपनी हो, सीबीसीआर को प्रस्तुत करेगी यदि इसके भारत के बाहर इसके मूल उद्यम को परवर्ती राष्ट्र या क्षेत्र में उप-धारा (2) में संदर्भित प्रकार की रिपोर्ट को दखिल करने की बाध्यता न हो

(iii) कथित धारा की उप-धारा (4) के अंतर्गत सीबीसीआर की प्रस्तुति के लिए अनुमत समय, भारत में मौजूद घटक कम्पनी के मामले में, जिसकी बाहर मूल कंपनी हो, को अलग से निर्धारित किया जाएगा

(iv) एक अंतर्राष्ट्रीय समूह की एआरर्इ द्वारा सीबीसीआर की प्रस्तुति की देय तिथि, उसका मूल उद्यम जो भारत से बाहर है, उस क्षेत्र या राष्ट्र का कर प्राधिकारी के साथ जिसमें वह निवासी है, उस राष्ट्र या क्षेत्र द्वारा निर्दिष्ट देय तिथि होगी

 (v) "समझौता" का अर्थ है निम्नलिखित समझौतों का मिश्रण है :

   (i) धारा 90 की उप-धारा (1) या धारा 90क की उप-धारा (1) के अंतर्गत किए गए समझौते

  (ii) केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित और उप-धारा (2) हेतु संदर्भित रिपोर्ट के विनिमय के लिए समझौते

(vi) "प्रतिवेदी लेखांकन वर्ष" को उसके संबंध में लेखांकन वर्ष के अर्थ को परिभाषित किया गया है जिसके साथ वित्तीय और संचालानात्मक परिणामों को धारा 286 की उप-धारा (2) और (4) में संदर्भित में प्रतिबिंबित किया जाना आवश्यक है।

45.3 यह संशोधन स्पष्ट रूप में है

45.4 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2017 को पूर्वव्यापी रूप से प्रभावी होगा और तद्नुसार, निर्धारण वर्ष 2017-18 और उसके बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होगा

46. वस्तु लेनदेन कर से संबंधित प्रावधानों का युक्तिकरण

46.1 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 2013 की धारा 116 का वाक्यांश (7) मुहैया कराती है कि "करयोग्य वस्तु लेनदेन" का अर्थ प्राधिकृत संघ में व्यापारित कृषि उत्पादों को छोड़कर, वस्तुओं के संबंध में मूल वस्तु की बिक्री का लेनदेन होगा।

46.2 मूल वस्तु में लेनदेन के लिए स्वीकृत साधनों के साथ "करयोग्य वस्तु लेनदेन" की परिभाषा को संरेखित करने के लिए, वित्त अधिनियम, 2013 की धारा 116 के वाक्यांश (7) के प्रावधानों को संशोधित किया गया है ताकि "करयोग्य वस्तु लेनदेन" की परिभाषा में "भावी वस्तु के विकल्प" को शामिल किया जा सके।

46.3 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 2013 की धारा 117 मुहैया कराती है कि दर जिस पर प्रत्येक वस्तु लेनदेन, कमोडिटी डेरेवेटिव की बिक्री के तौर पर, के संबंध में वस्तु लेनदेन कर, विक्रेता द्वारा वसूलनीय और देययोग्य होगा।

46.4 कमोडिटी डेरेवेटिव में विकल्पों के लिए दरों को मुहैया कराने के लिए, वित्त अधिनियम, 2013 की धारा 117 के प्रावधान को संशोधित किया गया है कि ताकि उस दर को निर्धारित किया जा सके जिस पर कमोडिटी डेरेवेटिव पर एक विकल्प की बिक्री विक्रेता द्वारा वसूलनीय और देययोग्य होगा।

46.5 वित्त अधिनियम, 2013 की धारा 117 के प्रावधान को भी संशोधित किया गया है ताकि उस दर को निर्धारित किया जा सके जिस पर कमोडिटी डेरेवेटिव पर एक विकल्प की बिक्री, जहां विकल्प का प्रयोग किया गया हो, विक्रेता द्वारा वसूलनीय और देययोग्य होगा।

46.6 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 2013 की धारा 118 मुहैया कराती है कि करयोग्य वस्तु लेनदेन की राशि, वित्त अधिनियम, 2013 की धारा 117 के अंतर्गत वसूलनीय और कमोडिटी डेरेवेटिव के तौर पर वसूलीनीय हैा।

46.7 वित्त अधिनियम, 2013 की धारा 118 के प्रावधान को संशोधित किया गया है ताकि कथित धारा में वित्त अधिनियम, 2013 की धारा 117 के अंतर्गत वसूलनीय करयोग्य वस्तु लेनदेन, कमोडिटी पर विकल्प के तौर पर, राशि को शामिल किया जा सके

46.8 आगे, वित्त अधिनियम, 2013 की धारा 128 के प्रावधान को संशोधित किया गया है ताकि मुहैया किया जा सके कि आयकर अधिनियम की धारा 119 के प्रावधान वस्तु लेनदेन कर के संबंध में लागू होंगे, जहां तक हो सके, चूंकि यह आयकर के संबंध में लागू होते हैं।

46.9 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए।

47. काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 का युक्तिकरण

47.1 काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 (काला धन अधिनियम) की धारा 46 को जुर्माना लगाने के लिए प्रक्रिया हेतु मुहैया कराया गया है।

47.2 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, कथित धारा की उप-धारा (4) मुहैया कराती है कि एक जुर्माने को अधिरोपित करने का एक आदेश उसमें निर्दिष्ट परिस्थितियों में संयुक्त आयुक्त के अनुमोदन के साथ किया जाएगा।

47.3 सहायक निदेशक या उप निदेशक जो अघोषित विदेशी आय के मामलों की जांच कर रहे हैं, को भी निर्धारण अधिकारी के समवर्ती क्षेत्राधिकारी को भी निर्दिष्ट किया जा सकता है और इसलिए जुर्माने लगा सकते हैं। हालांकि, कथित प्राधिकारी को जुर्माना लगाने के लिए संयुक्त निदेशक या अपर निदेशक के पद के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति आवश्यक है।

47.4 तद्नुसार, उप-धारा (4) के प्रावधान को संशोधित किया गया है ताकि मुहैया कराया जा सके कि संयुक्त निदेशक को जुर्माना लगाने के आदेश की स्वीकृति देने का अधिकार है। कथित उप-धारा के वाक्यांश (ख) को भी उसमें सहायक निदेशक और उप निदेशक को संदर्भ करने को शामिल करने के लिए संशोधित किया गया है।

47.5 आगे, काला धन अधिनियम की धारा 55 को कथित अधिनियम के अंतर्गत उल्लंघन की कार्यवाही की व्यवस्था के लिए मुहैया करार्इ गर्इ है

47.6 कथित धारा की उप-धारा (1) मुहैया कराती है कि एक व्यक्ति को प्रधान आयुक्त या आयुक्त या आयुक्त (अपील) की मंजूरी को छोड़कर धारा 49 से धारा 53 के अंतर्गत उल्लंघन के विरूद्ध आगे नहीं बढ़ाया जाएगा

47.7 अधिनियम द्वारा संशोधन से पूर्व, कथित धारा की उप-धारा (2) मुहैया कराया है कि प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त उप-धारा (1) में संदर्भित कर प्राधिकारियों को ऐसे निर्देश या आदेश दे सकता है जिसे वह कार्यवाही करने के लिए ठीक समझें।

47.8 उप-धारा (2) के प्रावधान को संशोधित किया गया है कि ताकि कथित उप-धारा के अंतर्गत कर प्राधिकारियों को आदेश या निर्देश देने के लिए प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक को सशक्त किया जा सके।

47.9 आगे, कथित धारा का कुछ शीर्षक भी संशेाधित किया गया है ताकि प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक के संदर्भ को भी शामिल किया जा सके।

47.10 प्रयोज्यता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2018 को प्रभावी हुए

 

 

(डा. टी.एस. मपवाल)

अवर सचिव, भारत सरकार

दिनांक 26.12.2018

(एफ नं. 370142/7/2018-टीपीएल)

 

निम्न को प्रति

 1. एफएम हेतु पीएस/एफएम हेतु ओएसडी/एमओएस (आर) हेतु ओएसडी

 2. सचिव (राजस्व) हेतु पीएस/एफएम हेतु सलाहकार का ओएसडी

 3. अध्यक्ष, सदस्य और अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के सीबीडीटी मे अन्य समस्त अधिकारी

 4. समस्त मुख्य आयुक्त/आयकर महानिदेशक - अपने क्षेत्रों/प्रभारों मे समस्त अधिकारियों के बीच वितरित करने के अनुरोध के साथ

 5. आयकर महानिदेशक (अंतर्राष्ट्रीय कराधान)/आयकर महानिदेशक (पद्धति)/आयकर महानिदेशक (सर्तकता)/प्रधान आयकर महानिदेशक (प्रशा.)/आयकर महानिदेशक (राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी)/आयकर महानिदेशक (एलएंडआर)

 6. सीबीडीटी के मीडिया समन्वयक और आधिकारिक प्रवक्ता

 7. आयकर निदेशक (आर्इटी)/आयकर निदेशक (आरएसएंडपीआर)/आयकर निदेशक समीक्षा/आयकर निदेशक (सर्तकता)/आयकर निदेशक (पद्धति)/आयकर निदेशक (ओएंडएमएस)/आयकर निदेशक (विशेष अन्वे.)

 8. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (30 प्रतियां)

 9. संयुक्त सचिव और कानूनी सलाहकार, विधि और न्याय मंत्रालय, नर्इ दिल्ली

10. भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान, आर्इपी एस्टेट, नर्इ दिल्ली

11. सामान्य मेलिंग सूची के अनुसार समस्त चैंबर्स ऑफ कॉमर्स

 

 

(डा. टी.एस. मपवाल)

अवर सचिव, भारत सरकार