परिपत्र सं. 04/2022 : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान वेतन से आयकर कटौती
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 04/2022
परिपत्र की तिथि
15/03/2022
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
15/03/2022
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 के अंतर्गत
वेतन से स्रोत पर आयकर कटौती पर कर की कटौती
परिपत्र सं. 04/2022
नई दिल्ली, 15 मार्च, 2022
विषय सूची
| 1. "वेतन", "रियायत" और "वेतन के स्थान पर लाभ" की परिभाषा (धारा 17)......................................................................................... | 2 |
| 1.1 वेतन क्या है?......................................................................................... | 2 |
| 1.2 रियायत क्या है?......................................................................................... | 3 |
| 1.3 वेतन के स्थान पर लाभ क्या है?......................................................................................... | 5 |
| 2. वित्त अधिनियम, 2021 के अनुसार आयकर की दरें......................................................................................... | 5 |
| 2.1 कर की दरें......................................................................................... | 5 |
| 2.2 आयकर का अधिभार......................................................................................... | 6 |
| 2.3 स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर......................................................................................... | 8 |
| 2.4 धारा 115खकग के अंतर्गत कर की रियायत दरें......................................................................................... | 8 |
| 3- आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 : "वेतन"से स्रोत पर कर कटौती की विस्तृत योजना......................................................................................... | 10 |
| 3.1 कर गणना की विधि ......................................................................................... | 10 |
| 3.2 नियोक्ता द्वारा रियायतों पर कर का भुगतान ......................................................................................... | 11 |
| 3.3 औसत आयकर की गणना ......................................................................................... | 11 |
| 3.4 एक से अधिक नियोक्ता से वेतन......................................................................................... | 12 |
| 3.5 राहत जब वेतन का भुगतान बकाए या उधार के रूप में हो ......................................................................................... | 12 |
| 3.6 किसी अन्य शीर्षक के अंतर्गत आय से संबंधित सूचना......................................................................................... | 13 |
| 3.7 शीर्षक "गृह संपत्ति से आय"के अंतर्गत आय की गणना......................................................................................... | 13 |
3.7.1. गृह संपत्ति से आय की गणना के लिए उधार ली गई पूंजी पर ब्याज की कटौती का दावा करने की शर्तें धारा [24(ख)]...................................................... |
14 |
| 3.8 अतिरिक्त या अल्प कटौती का समायोजन......................................................................................... | 15 |
| 3.9 विदेशी मुद्रा में वेतन भुगतान......................................................................................... | 15 |
| 4- कर की कटौती और अपने कर्तव्यों के लिए जिम्मेदार व्यक्ति......................................................................................... | 15 |
| 4.1 स्रोत पर कर कटौती......................................................................................... | 16 |
4.1.2 स्रोत पर कर कटौती की दरें......................................................................................... |
16 |
| 4.2 कम या शून्य दर पर कर की कटौती......................................................................................... | 16 |
| 4.3 काटे गए कर को जमा करना......................................................................................... | 16 |
4.3.1 टीडीएस के भुगतान की अंतिम तिथि......................................................................................... |
17 |
| 4.4 टीडीएस के भुगतान की विधि......................................................................................... | 17 |
4.4.1 धारा 200(2क) के अंतर्गत बुक एंट्री द्वारा टीडीएस के भुगतान के मामले में पीएओ, फंड अधिकारी आदि द्वारा ब्यौरे की अनिवार्य प्रस्तुति....................................... |
17 |
4.4.2 आयकर चालान द्वारा भुगतान......................................................................................... |
18 |
| 4.5 कर कटौती को जमा करने में असफल होने पर ब्याज, शुल्क, जुर्माना व अभियोजन......................................................................................... | 19 |
| 4.6 कर कटौती के लिए प्रमाणपत्र की प्रस्तुति (धारा 203)......................................................................................... | 19 |
| 4.7 रियायत आदि से संबंधित ब्यौरे की प्रस्तुति-धारा 192(2ग)......................................................................................... | 23 |
| 4.8 पैन या आधार संख्या, जो भी हो और टैन का अनिवार्य उद्धृतीकरण......................................................................................... | 24 |
| 4.9 कर्मचारी द्वारा पैन या आधार की प्रस्तुति की अनिवार्य आवश्यकता (धारा 206कक)......................................................................................... | 25 |
| 4.10 धारा 200(3) के अंतर्गत कर की कटौती का विवरण (टीडीएस का त्रैमासिक विवरण)......................................................................................... | 26 |
| 4.11 अधिनियम की धारा 200(3) के अंतर्गत प्रस्तुत वितरणों में गलती के लिए शुल्क......................................................................................... | 27 |
| 4.12 टीडीएस ब्यौरे की प्रस्तुति में गलती दर्शाना......................................................................................... | 27 |
| 4.13 गलत सूचना की प्रस्तुति या ब्यौरा प्रस्तुति न कर पाने के लिए जुर्माना (धारा 271ज)......................................................................................... | 27 |
| 4.14 पेंशन से आय पर टीडीएस......................................................................................... | 28 |
4.15 अनिवासी के मामले में किए गए टीडीएस से संबंधित मामले......................................................................................... |
29 |
| 5- शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत आय की गणना......................................................................................... | 29 |
| 5.1 शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूलनीय आय......................................................................................... | 29 |
| 5.2 नियम 3 के अनुसार रियायत की कीमत......................................................................................... | 30 |
| 5.3 शीर्षक "वेतन" (छूट) के अंतर्गत शामिल न होने वाली आय......................................................................................... | 41 |
| 5.4 अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत कटौती......................................................................................... | 50 |
| 5.5 अधिनियम के अध्याय VI-क के अंतर्गत कटौती......................................................................................... | 51 |
5.5.1 जीवन बीमा प्रीमियम, विलंबित वार्षिकी, भविष्य निधि हेतु अंशदान, कुछ ईक्विटी शेयर या डिबेंचर आदि हेतु अंशदान के संदर्भ में कटौती (धारा 80ग).............. |
51 |
5.5.2 कुछ पेंशन निधि हेतु अंशदान के संबंध में कटौती (धारा 80गगग)......................................................................................... |
56 |
5.5.3 केंद्र सरकार की पेंशन योजना हेतु अंशदान के संबंध में कटौती (धारा 80गगघ) ......................................................................................... |
57 |
5.5.4 स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भुगतान के संबंध में कटौती (धारा 80घ)......................................................................................... |
58 |
5.5.5 विकलांग व्यक्ति या आश्रितों पर व्यय के संबंध में कटौती......................................................................................... |
59 |
5.5.6 चिकित्सा उपचार आदि के संबंध में कटौती (धारा 80घघघख)......................................................................................... |
62 |
5.5.7 उच्च शिक्षा के लिए लिए गए ऋण पर ब्याज के संबंध में कटौती (धारा 80ड़)......................................................................................... |
63 |
5.5.8 कुछ गृह संपत्ति के लिए लिए गए ऋण पर ब्याज के संबंध में कटौती (धारा 80ड़ड़क)......................................................................................... |
63 |
5.5.9 एक इलैक्ट्रिक वाहन की खरीद के लिए लिए गए ऋण पर देययोग्य ब्याज के संदर्भ में कटौती (धारा 80ड़ड़ख)............................................................ |
64 |
5.5.10 कुछ फंड, धर्मांर्थ संस्थान आदि की दान के संदर्भ में कटौती (धारा 80छ)......................................................................................... |
65 |
5.5.11 दिए गए किराये के संदर्भ में कटौती (धारा 80छछ)......................................................................................... |
65 |
5.5.12 वैज्ञानिक अनुसंधान या ग्रामीण विकास के लिए कुछ दान के संदर्भ में कटौती (धारा 80छछक)......................................................................................... |
66 |
5.5.13 बचत खाते में जमा ब्याज के संदर्भ में कटौती (धारा 80टटक)......................................................................................... |
67 |
5.5.14 वरिष्ठ नागरिकों के मामले में जमा पर ब्याज के संदर्भ में कटौती (धारा 87टटख......................................................................................... |
68 |
| 6. रू. 5 लाख तक की कुल आय वाले व्यक्तियों के लिए रू. 12,500 की छूट(धारा 87क)......................................................................................... | 69 |
| 7. मान्यताप्राप्त भविष्य निधि और अनुमोदित पेंशन फंड से अंशदान के अंतर्गत संचित फंड के भुगतान पर टीडीएस........................................................... | 69 |
| 8. दावों का प्रमाण/सबूत प्राप्त करने के लिए डीडीओ......................................................................................... | 70 |
| 9. काटे जाने वाले आयकर की गणना......................................................................................... | 71 |
| 10. विविध......................................................................................... | 72 |
अनुलग्नक
I कुछ उदाहरण
II प्रपत्र सं. 12खक
IIक प्रपत्र सं. 12खख
III टीआईएन-सुविधा केंद्रों (टीआईएन-एफसी) पर प्रपत्र 24छ को तैयार और प्रस्तुत करने की प्रक्रिया
IV प्रपत्र 24छ को प्रस्तुत करने की प्रक्रिया
V राज्य सरकार विभाग/केंद्र सरकार विभाग के प्रपत्र स्थिति में 24छ को दाखिल करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति
VI धारा 200(3) के अंतर्गत कर की कटौती के त्रैमासिक विवरण को तैयार करने की प्रक्रिया
VII आर्थिक मामला विभाग अधिसूचना दिनांक 22.12.2013
VIII बोर्ड की अधिसूचना दिनांक 24.11.2000
IX बोर्ड की अधिसूचना दिनांक 29.01.2001
X प्रपत्र सं. 10खक
अनुलग्नक ख
अनुलग्नक ग
परिपत्र सं. 04/2022
एफ.नं. 275/192/2020-आईटी(ख)
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
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नार्थ ब्लॉक, नई दिल्ली
दिनांक : 15 मार्च, 2022
विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान वेतन से आयकर कटौती
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परिपत्र सं. 20/2020 दिनांक 03.12.2020 के लिए संदर्भ आमंत्रित है जिसके द्वारा वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूलनीय आय के भुगतान से वित्त वर्ष के दौरान आयकर अधिनियम, 1961 (तत्पश्चात् 'अधिनियम') की धारा 192 के अंतर्गत शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत आय के भुगतान से आयकर की कटौती की दरों की सूचना दी गई थी। वर्तमान परिपत्र में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूलनीय आय के भुगातन से आयकर की कटौती की दरें शामिल हैं और अधिनियम के कुछ संबंधित प्रावधानों और आयकर नियम, 1962 (तत्पश्चात् नियम) की व्याख्या करती है। सभी धाराएं और संदर्भित नियम क्रमश: आयकर अधिनियम, 1961 और आयकर नियम, 1962 की है जबतक अन्यथा निर्दिष्ट न हो। प्रासंगिक अधिनियम, प्रपत्र और अधिसूचना आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.inपर उपलब्ध हैं।
अधिनियम की धारा 192(1) के अनुसार, शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूले जाने वाली किसी आय के भुगतान के लिए उत्तरदायी कोई व्यक्ति भुगतान के समय उस वित्त वर्ष के लिए प्रभावी दरों पर गिने गए आयकर की औसत दर पर देययोग्य राशि पर आयकर की कटौती करेगा जिसमें भुगतान उस वित्त वर्ष के लिए मुख्य वेतन आय के अंतर्गत निर्धारिती की अनुमानित आय पर किया गया।
यह धारा यह भी बताती है कि शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूले जाने वाली किसी आय का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी एक व्यक्ति उस व्यक्ति, जिसे ऐसा भुगतान किया गया है, को उसे दिए गए वेतन और उसकी कीमत के स्थान पर रियायत या लाभ का सही और पूर्ण विवरण देते हुए ब्यौरा प्रस्तुत करेगा।
1. "वेतन" "रियायत" और "वेतन के स्थान पर लाभ" की परिभाषा (धारा 17)
1. 1 वेतन क्या है ?
अधिनियम की धारा 15 के अनुसार, निम्नलिखित आय शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत आयकर हेतु वसूलनीय है —
(क) पिछले वर्षों, चाहे भुगतान किया हो अथवा नहीं, के दौरान निर्धारिती की नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता से आदेय कोई वेतन;
(ख) नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता द्वारा अथवा उसकी ओर से पिछले वर्षों के दौरान दिया हुआ या मंजूर किया गया वेतन हालांकि यदि उसके लिए नियत न होने अथवा नियत हो जाता हो ;
(ग) नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता के द्वारा अथवा उसकी ओर से पिछले सालो के दौरान वेतन का किया गया कोई बकाया भुगतान अथवा भुगतान के लिए स्वीकृत किया हुआ, यदि पिछले सालों के लिए आयकर न वसूला गया हो तो।
अधिनियम की धारा 17 के अनुसार, वेतन में निम्नलिखित शामिल है :
(i) मेहनताना;
(ii) कोई वार्षिकी या पेंशन;
(iii) कोई ग्रेचुएटी;
(iv) कोई शुल्क, कमीशन, रियायत, वेतन या पारिश्रमिक के स्थान पर या उसके अतिरिक्त लाभ ;
(v) कोई अग्रिम वेतन ;
(vi) कर्मचारी द्वारा न ली गई छुट्टी के संबंध में उसके द्वारा प्राप्त कोई भुगतान ;
(vii) एक मान्यताप्राप्त भविष्यनिधि में भाग लेने वाले एक कर्मचारी के क्रेडिट बैंलेंस के वार्षिक वृद्धि का हिस्सा उस सीमा तक जहां यह चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 6 के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय हो ;
(क) कर्मचारी के वेतन के 12 प्रतिशत के अतिरिक्त मान्यताप्राप्त भविष्यनिधि में कर्मचारी के खाते में नियोक्ता द्वारा किया गया अंशदान, और ;
(ख) कर्मचारी के क्रेडिट बैलेंस पर जमा ब्याज जहां तक यह ऐसी दर से अधिक दर पर स्वीकार्य हो जिसे आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा केंद्र सरकार द्वारा निश्चित किया जा सकता हो ;
(viii) नई पेंशन योजना के अंतर्गत कर्मचारी के खाते में केंद्र सरकार या किसी अन्य नियोक्ता द्वारा किया गया अंशदान जैसा धारा 80गगघ(इस परिपत्र का पैरा 5.5) में संदर्भित अधिसूचना एफ.नं. 5/7/2003-ईसीबीएंडपीआर दिनांक 22.12.2003 (अनुलग्नक VII के तौर पर संलग्न) द्वारा अधिसूचित है :
(ix) सभी राशियों का जोड़ जिसे स्थानांतरित किए गए बैलेंस में शामिल किया जाता है जैसा अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 11 के उप-नियम (2) में संदर्भित है, एक मान्यताप्राप्त भविष्य निधि में भाग लेने वाले कर्मचारी के मामले में, उस सीमा तक जहां यह उसके उप-नियम (4) के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय है।
यह ध्यान दिया जा सकता है कि चूंकि वेतन में पेंशन शामिल है, स्रोत पर कर को भी पेंशन से काटा जाना है जबतक अन्यथा आवश्यक न हो। हालांकि, धारा 10(10क) के अंतर्गत छूट की सीमा तक पेंशन के परिवर्तित हिस्से से कोई कर काटा जाना आवश्यक नहीं है।
परिवारिक पेंशन शीर्षक "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय है और नाकि शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत है। इसलिए, अधिनियम की धारा 192 के प्रावधान लागू नही होते। अत: डीडीओ को व्यक्ति को दी गई पारिवारिक पेंशन पर टीडीएस कटौती करने की आवश्यकता नहीं है।
1. 2 रियायत क्या है ?
अधिनियम की धारा 17(2) के अनुसार, रियायत में शामिल है :
(i) कर्मचारी को उसके नियोक्ता द्वारा मुहैया कराया गया किराया मुक्त आवास की कीमत ;
(ii) कर्मचारी को उसके नियोक्ता द्वारा दिए गए आवास के संबंध में किराये के मामले में किसी राहत की राशि ;
(iii) निम्नलिखित मामलों में निशुल्क या रियायती दरों पर दी गई या मुहैया कराए गए किसी लाभ या सुविधा की कीमत :
(क) एक कर्मचारी जो ऐसी कंपनी का निदेशक है, को एक कंपनी द्वारा ;
(ख) एक कर्मचारी जिसका कंपनी में महत्वपूर्ण हित है, को एक कंपनी द्वारा ;
(ग) एक नियोक्ता (एक कंपनी सहित) द्वारा एक ऐसे कर्मचारी को जो उक्त (क) या (ख) के अंतर्गत शामिल नहीं है और शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत जिसकी आय (चाहे एक या एक से अधिक नियोक्ताओं की ओर से देय हो या भुगतान किया गया हो या अनुमति दी गई हो), सभी लाभ या सुविधाओं की विशेष कीमत मौद्रिक भुगतान के रूप में न दी गई हो, रू. 50,000 से अधिक हो
[किराये के मामले में रियायत का हिस्सा क्या है उसे नीचे अधिनियम की धारा 17(2)(ii) स्पष्टीकरण 1 से 4 में निर्धारित किया गया है]
(iv) किसी बाध्यता के संदर्भ में नियोक्ता द्वारा दी गई कोई राशि जिसे निर्धारिती द्वारा अन्यथा तौर पर दिया जा सकता हो।
(v) निर्धारिती के जीवन बीमा को प्रभावी करने या वार्षिकी के लिए अनुबंध को प्रभावी करने के लिए नियोक्ता, चाहे प्रत्यक्ष तौर पर हो या फंड के माध्यम से, मान्यताप्राप्त भविष्य निधि या मान्यताप्राप्त सेवानिवृत्ति फंड या धारा 17 के अंतर्गत निर्दिष्ट फंड को छोड़कर, द्वारा देययोग्य कोई राशि
(vi) नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता द्वारा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कर्मचारी को निशुल्क अथवा मामूली दर पर हस्तांतरित अथवा आवंटित निर्दिष्ट प्रतिभूति अथवा स्वैट इक्विटी शेयर की राशि। इसके लिए,
(क) "निर्दिष्ट प्रतिभूति" अर्थात् प्रतिभूति जैसा प्रतिभूति संविदा (नियामक) अधिनियम, 1956 की धारा 2(ज) में निर्दिष्ट है तथा जहां कर्मचारी को स्टॉक का विकल्प इसलिए किसी योजना अथवा नीति के अंतर्गत दिया गया हो, ऐसी योजना तथा नीति के अंतर्गत दी गई प्रतिभूति शामिल है।
(ख) "स्वैट इक्विटी शेयर" अर्थात् राशि योग अथवा बौद्धिक संपदा, जो भी नाम हो, के रूप में उपलब्ध अधिकारों के प्रयोग अथवा तकनीकी जानकारी को उपलब्ध करने के लिए एक कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों अथवा निदेशकों को रियायती दर पर या नकदी के अलावा राशि हेतु जारी किए गए इक्विटी शेयर।
(ग) कोई निर्दिष्ट प्रतिभूति अथवा स्वैट ईक्विटी शेयर की कीमत उस तिथि पर निर्दिष्ट प्रतिभूति या स्वैट ईक्विटी शेयर, जो भी हो, की बाजार कीमत के अनुसार होगी जिस पर निर्धारिती की ओर से विकल्प का प्रयोग किया गया जिसे ऐसी प्रतिभूति या शेयर के संबंध में निर्धारिती द्वारा वास्तविक दी गई राशि या वसूली गई राशि से कम किया गया है
(घ) "उचित बाजार कीमत" अर्थात् विधि के अनुसार निर्धारित राशि जिसे निर्दिष्ट किया जा सके (आयकर नियम के नियम 3(9) को संदर्भित करें)
(ड) "विकल्प" अर्थात् अधिकार लेकिन पूर्व-निर्धारित मूल्य पर स्वैट इक्विटी शेयर अथवा निर्दिष्ट प्रतिभूति के आवेदन के लिए नियोक्ता द्वारा दी गई बाध्यता नहीं।
(vii) . नियोक्ता द्वारा निर्धारिती के खाते में किए गए किसी अंशदान की कुल राशि की कीमत —
(क) एक प्राधिकृत भविष्य निधि में ;
(ख) धारा 80गगघ की उप-धारा (1) में संदर्भित योजना में और ;
(ग) एक अनुमोदित पेंशन फंड में
उस सीमा तक जहां यह एक पिछले वर्ष में सात लाख और पचास हजार रूपए से अधिक हो
(viiक) उस सीमा तक उक्त वाक्यांश (vii) में संदर्भित फंड या योजना के क्रेडिट पर बैलेंस हेतु पिछले वर्ष के दौरान ब्याज, लाभांश या इसी प्रकार की अन्य राशि द्वारा वार्षिक वृद्धि जहां तक यह उक्त वाक्यांश जो कुल आय में शामिल है, में संदर्भित अंशदान से संबंधित है; और
(viii) अन्य कोई अनुषंगी लाभ की राशि अथवा सुविधा जैसा नियम 3 में निर्धारित है।
1. 3 वेतन के बदले लाभ क्या है?
अधिनियम की धारा 17(2) के अनुसार, "वेतन के बदले लाभ" में शामिल है :
I अपनी नौकरी की समाप्ति के संबंध में अथवा इससे संबंधित नियम व शर्तों के बदलाव की स्थिति में अपने नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता द्वारा निर्धारिती शेष अथवा प्राप्त किसी भी प्रकार के मुआवजे की राशि;
II एक नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता अथवा भविष्य निधि अथवा अन्य निधि से उस सीमा तक निर्धारिती द्वारा प्राप्त अथवा को देय कोई भुगतान (धारा 10 के वाक्यांश (10), (10क), (10ख), (11), (12), (13) अथवा (13क) में सदर्भित भुगतान को छोड़कर), जहां तक ऐसी पॉलिसी पर बोनस के माध्यम से आवंटित कुल राशि सहित प्रमुख बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त कोई राशि अथवा ऐसा किसी अंशदान पर निर्धारिती द्वारा अंशदान को शामिल न करती हो।
"प्रमुख बीमा पॉलिसी" का अर्थ वही होगा जैसा धारा 10(10घ) में निर्धारित किया गया है।
III किसी व्यक्ति द्वारा निर्धारिती की ओर से देय अथवा प्राप्त कोई राशि, चाहे एकमुश्त अथवा किसी अन्य तरीके से,
(क) उस व्यक्ति के साथ अपनी नौकरी की नियुक्ति से पहले; अथवा
(ख) उस व्यक्ति के साथ अपनी नियुक्ति के छोड़ने के बाद।
2. वित्त अधिनियम, 2021 के अनुसार आयकर की दरें :
वित्त अधिनियम, 2021 के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 (यानी निर्धारण वर्ष 2022-23) के लिए आयकर की दरें निम्नलिखित हैं :
2.1 कर की दरें
क. कर की सामान्य दरें : नीचे पैरा (ख) और (ग) में संदर्भित व्यक्ति को छोड़कर प्रत्येक व्यक्ति के मामले में :
| क्र.सं. | कुल आय | कर की दर |
| 1 | जहां कुल आय रू. 2,50,000/- से अधिक नहीं है | शून्य |
| 2 | जहां कुल आय रू. 2,50,000 से अधिक होती है लेकिन रू. 5,00,000 से अधिक नहीं हैं | राशि का 5 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 2,50,000/- से अधिक है |
| 3 | जहां कुल आय रू. 5,00,000 से अधिक होती है लेकिन रू. 10,00,000 से अधिक नहीं है | रू. 12,500/- साथ ही राशि का 20 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक है |
| 4 | जहां कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक है | रू. 1,12,500/- साथ ही राशि का 30 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक है |
ख. प्रत्येक व्यक्ति, भारत में निवासी के तौर पर, जो वित्त वर्ष के दौरान किसी भी समय साठ वर्ष या उससे अधिक की आयु लेकिन साठ वर्ष से कम है
| क्र.सं. | कुल आय | कर की दर |
| 1 | जहां कुल आय रू. 3,00,000/- से अधिक नहीं है | शून्य |
| 2 | जहां कुल आय रू. 3,00,000 से अधिक है लेकिन रू. 5,00,000 से अधिक नहीं है | राशि का 5 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 3,00,000/- से अधिक हो |
| 3 | जहां कुल आय रू. 5,00,000 से अधिक होती है लेकिन रू. 10,00,000 से अधिक नहीं है | रू. 10,000/- साथ ही राशि का 20 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो |
| 4 | जहां कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक है | रू. 1,10,000/- साथ ही राशि का 30 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक है |
ग. भारत में घरेलू निवासी के तौर पर प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति में जो वित्त वर्ष के दौरान किसी भी समय अस्सी वर्ष या उससे अधिक आयु का है :
| क्र.सं. | कुल आय | कर की दर |
| 1 | जहां कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक नहीं है | शून्य |
| 2 | जहां कुल आय रू. 5,00,000 से अधिक होती है लेकिन रू. 10,00,000 से अधिक नहीं है | राशि का 20 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो |
| 3 | जहां कुल आय रू. 10,00,000 से अधिक है | रू. 1,00,000/- साथ ही राशि का 20 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक हो |
2.2 आयकर पर अधिभार :
आयकर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क या धारा 115खकग के प्रावधानों के अनुसार गिने गए आयकर की राशि को प्रत्येक व्यक्ति या हिंदु अविभाजित परिवार या व्यक्तियों के संघ या व्यक्तियों की निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं या आयकर अधिनियम 1961 की धारा 2 के वाक्यांश (31) के उप-वाक्यांश (vii) में बताए गए प्रत्येक कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के मामले में आंके गए संघ के लिए अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा —
(क) "जिसकी कुल आय (आयकर अधिनियम की धारा 111क और धारा 112क के प्रावधानों के अंतर्गत आय या लाभांश के रूप में आय सहित) " पचास लाख से अधिक हो लेकिन एक करोड़ से कम हो ऐसे आयकर के दस प्रतिशत की दर पर; और
(ख) "जिसकी कुल आय (आयकर अधिनियम की धारा 111क और धारा 112क के प्रावधानों के अंतर्गत आय या लाभांश के रूप में आय सहित) " एक करोड़ से अधिक हो लेकिन दो करोड़ से कम हो ऐसे आयकर के पंद्रह प्रतिशत की दर पर; और
(ग) "जिसकी कुल आय (आयकर अधिनियम की धारा 111क और धारा 112क के प्रावधानों के अंतर्गत आय या लाभांश के रूप में आय सहित) " दो करोड़ से अधिक हो लेकिन पांच करोड़ से कम हो ऐसे आयकर के पच्चीस प्रतिशत की दर पर; और
(घ) "जिसकी कुल आय (आयकर अधिनियम की धारा 111क और धारा 112क के प्रावधानों के अंतर्गत आय या लाभांश के रूप में आय सहित) " पांच करोड़ से अधिक हो ऐसे आयकर के सैंतीस प्रतिशत की दर पर; और
(ड़) "जिसकी कुल आय (आयकर अधिनियम की धारा 111क और धारा 112क के प्रावधानों के अंतर्गत आय या लाभांश के रूप में आय सहित) " दो करोड़ से अधिक हो लेकिन वाक्यांश (ग) और (घ) के अंतर्गत कवर न हो, ऐसे आयकर के पंद्रह प्रतिशत की दर पर लागू होगी।
बशर्ते कि यदि जहां कुल आय में आयकर अधिनियम की धारा 111क और धारा 112क के अंतर्गत वसूले जाने वाली आय या लाभांश के रूप में आय शामिल हो, आय के उस हिस्से के संदर्भ में आंके गए आयकर की राशि पर अधिभार की दर पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी :
आगे बशर्ते कि उक्त निर्दिष्ट व्यक्तियों की स्थिति में कुल आय निम्न से अधिक हो :—
(क) पचास लाख रूपए लेकिन एक करोड़ रूपए से कम, ऐसी आय पर आयकर और अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि, आय की राशि, जो पचास लाख से अधिक है, की तुलना में पचास लाख की कुल राशि पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी ;
(ख) एक करोड़ रूपए लेकिन दो करोड़ से कम, ऐसी आय पर आयकर और अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय की राशि, जो एक करोड़ से अधिक है, की तुलना में एक करोड़ की कुल राशि पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी ;
(ग) दो करोड़ रूपए लेकिन पांच करोड़ से कम, ऐसी आय पर आयकर और अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय की राशि, जो दो करोड़ से अधिक है, की तुलना में दो करोड़ की कुल राशि पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी ;
(घ) पांच करोड़ रूपए, ऐसी आय पर आयकर और अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि, आय की राशि, जो पांच करोड़ से अधिक है, की तुलना में पांच करोड़ की कुल राशि पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी।
2.3 स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर
आयकर की राशि जिसे लागू होने वाले अधिभार द्वारा बढ़ाई गई है उसे यूनियन के लिए जिसे आयकर पर स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर कहा गया है, द्वारा और बढ़ाया जाएगा
आयकर पर स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर अधिभार जहां भी लागू हो, सहित आयकर के चार प्रतिशत की दर पर लगाया जाएगा। ऐसे उपकर के संदर्भ में कोई मामूली राहत नहीं दी जाएगी।
2.4 धारा 115खकग के अंतर्गत कर की रियायती दर
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115खकग को वित्त अधिनियम, 2020 प्रभावी निर्धारण वर्ष 2021-22 द्वारा शामिल किया गया था। नई धारा 115खकग मुहैया कराती है कि 1 अप्रैल, 2021 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के किसी प्रांसगिक पिछले वर्ष के लिए एक व्यक्ति, एक व्यक्ति या एक एचयूएफ के तौर पर, की कुल आय के सदंर्भ में देययोग्य आयकर ऐसे व्यक्ति की इच्छा पर नीचे दी गई तालिका में दी गई रियायती दरों पर गिना जाएगा :
| क्र.सं. | कुल आय | कर की दरें |
| 1 | रू. 2,50,000 तक | शून्य |
| 2 | रू. 2,50,001 से रू. 5,00,000 तक | 5 प्रतिशत |
| 3 | रू. 5,00,001 से रू. 7,50,000 तक | 10 प्रतिशत |
| 4 | रू. 7,50,001 से रू. 10,00,000 तक | 15 प्रतिशत |
| 5 | रू. 10,00,001 से रू. 12,50,000 तक | 20 प्रतिशत |
| 6 | रू. 12,50,001 से रू. 15,00,000 तक | 25 प्रतिशत |
| 7 | रू. 15,00,000 से अधिक | 30 प्रतिशत |
ऐसे व्यक्ति को निर्धारण वर्ष के प्रासंगिक पिछले वर्ष के लिए अधिनियम की धारा 139(1) के अंतर्गत प्रस्तुत की जाने वाली आय की विवरणी के साथ निर्धारिती तरीके में विकल्प चुनना आवश्यक है। धारा 115खकग के अंतर्गत दी गई कर की रियायती दरें इन शर्तों के अनुसार हैं कि व्यक्ति या एचयूएफ की कुल आय को निम्न प्रकार से गिना जाएगा :—
(क) धारा 115खकग की उप-धारा (2) के वाक्यांश (i) के अंतर्गत निर्दिष्ट कटौती या किसी प्रकार की छूट के बिना
(ख) धारा 115खकग की उप-धारा (2) के वाक्यांश (ii) में निर्दिष्ट किसी हानि को समायोजित किए बिना
(ग) वर्तमान के लिए किसी अन्य कानून के अंतर्गत दिए गए भत्ते या रियायत, चाहे जिस भी नाम से जाना जाए, के लिए किसी छूट या कटौती के बिना जैसा धारा 115खकग की उप-धारा (2) के वाक्यांश (iv) में निर्दिष्ट है।
आगे, पैरा 2.2 में शामिल आयकर पर अधिभार उस मामले में लागू होगा जहां व्यक्ति रियायती कर संबंधी दर को चुनता है। जहां व्यक्ति किसी पिछले वर्ष में उप-धारा (2) में शामिल शर्तों को पूरा नही कर पाता तो उस पिछले वर्ष के प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के संदर्भ में विकल्प अमान्य होगा और अधिनियम के अन्य प्रावधान लागू होंगे, ऐसे कि मानो उस पिछले वर्ष के प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए विकल्प को नहीं चुना गया था। आगे, जहां विकल्प का प्रयोग उप-धारा (5) के वाक्यांश (i) अंतर्गत प्रयोग किया जाता है, उप-धारा (2) में शामिल शर्तों को पूरा न कर पाने की स्थिति में, यह बाद के निर्धारण वर्षों के लिए भी अमान्य हो जाएगा और अधिनियम के अन्य प्रावधान तद्नुसार उन वर्षों के लिए लागू होंगे।
धारा 115खकग की उपधारा (2) में निर्दिष्ट शर्तें इस प्रकार से हैं :
उप-धारा (1) के लिए, व्यक्ति या हिंदु अविभाजित परिवार की कुल आय को गिना जाएगा —
(i) धारा 10 या धारा 10कक या धारा 16 के वाक्यांश (5) या वाक्यांश (13क) या वाक्यांश (14) (उनको छोड़कर जिसे इसके लिए निर्धारित किया जा सकता है) के अंतर्गत निर्धारित या वाक्यांश (17) या वाक्यांश (32) या धारा 24 (संपत्ति जो धारा 23 की उप-धारा (2) में संदर्भित है, के संबंध में) के वाक्यांश (ख) या धारा 32 या धारा 32कघ या धारा 33कख या धारा 33कखक की उप-धारा (1) के वाक्यांश (iiक) या धारा 35 या धारा 35कघ या धारा 35गगग की उप-धारा (1) या उप-धारा (2कक) के उप-वाक्यांश (ii) या (iiक) या (iii) या धारा 57 के वाक्यांश (iiक) या धारा 80गगघ या धारा 80ञञ कक की उप-धारा (2) के प्रावधानों को छोड़कर अध्याय VI-क के किसी भी प्रावधान के अंतर्गत किसी प्रकार की छूट या कटौती के बिना ;
(ii) किसी हानि को समायोजित किए बिना;
(क) किसी पहले के निर्धारण वर्ष से अग्रेषित या मूल्यहास, यदि ऐसी हानि या मूल्यहास वाक्यांश (i) में संदर्भित किसी प्रकार की कटौती से निर्दिष्ट न हो
(ख) किसी अन्य आय के शीर्षक के साथ शीर्षक "गृह संपत्ति से आय" के अंतर्गत
(iii) धारा 32 के किसी भी प्रावधान के अंतर्गत मूल्यहास, यदि हो, का दावा करते हुए केवल कथित धारा की उप-धारा (1) के वाक्यांश (iiक) को छोड़कर, ऐसे तरीके में निर्धारित जिसे निर्धारित किया जा सके; और
(iv) वर्तमान में प्रभावी किसी अन्य कानून के अंतर्गत दी गई भत्ते या रियायत, चाहे जिस भी नाम से जाना जाए, के लिए किसी प्रकार की छूट या रियायत के बिना।
आगे, व्यापार या पेशे से आय वाले एक व्यक्ति के मामले में, ऐसे व्यक्ति को 01.04.2021 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के प्रासंगिक किसी पिछले वर्ष के लिए अधिनियम की धारा 139 (1) की उप-धारा (1) के अंतर्गत निर्दिष्ट देय तिथि को या उससे पहले निर्धारिती तरीके में विकल्प को चुनना आवश्यक है और ऐसे विकल्प को एक बार चुनना बाद के निर्धारण वर्षों के लिए लागू होगा। हालांकि, ऐसे व्यक्तियों के मामले में, एक बार ऐसे चुने गए विकल्प को केवल एक बार ही निरस्त किया जा सकता है और ऐसे व्यक्ति विकल्प को दुबारा चुनने के योग्य नहीं होंगे बशर्ते ऐसे व्यक्ति की व्यापार या पेशे से आय समाप्त हो चुकी हो।
3. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 : "वेतन" से स्रोत पर कर कटौती की विस्तृत योजना
3.1 कर गणना की विधि :
प्रत्येक व्यक्ति जो शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूलनीय किसी आय को देने के लिए जिम्मेदार है वह वित्त वर्ष 2021-22 के लिए शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत निर्धारिती की अनुमानित आय पर आयकर काटेगा। आयकर उक्त पैरा 2 में दी गई दरों के आधार पर आंका जाना आवश्यक है, अधिनियम की धारा 206कक के अनुसार पैन या आधार नंबर, जो भी मामला हो, को प्रस्तुत करने की अनिवार्यता से संबंधित प्रावधानों के अनुसार और टीडीएस धरा 192 के अंतर्गत प्रत्येक भुगतान के समय काटा जाएगा।
अधिनियम की धारा 192(1ग) के अनुसार, एक व्यक्ति जो, धारा 80-झकग में संदर्भित योग्य स्टार्ट-अप के तौर पर, निर्धारण वर्ष 2021-22 और उसके बाद के प्रासंगिक किसी पिछले वर्ष में धारा 17 के वाक्यांश (2) के उप-वाक्यांश (vi) में संदर्भित प्रकार की रियायत के तौर पर निर्धारिती की किसी आय को देने के लिए उत्तरदायी है, वह निम्न से 14 दिनों के अंदर ऐसी आय पर कर कटौती या भुगतान, जो भी हो, करेगा —
(क) प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 48 महीनों की समाप्ति के बाद; या
(ख) निर्धारिती द्वारा ऐसी निर्दिष्ट प्रतिभूति या स्वैट इक्विटी शेयर की बिक्री की तिथि से; या
(ग) निर्धारिती के व्यक्ति का कर्मचारी न होने की तिथि से, जो भी पहले हो वित्त वर्ष जिसमें कथित निर्दिष्ट प्रतिभूति या स्वैट इक्विटी शेयर आवंटित या हस्तांतरित हुए, के लिए प्रभावी दरों के आधार पर।
अधिनियम की धारा 115खकग के अंतर्गत कर की रियायती दरों को चुनने की इच्छा रखने वाला एक कर्मचारी प्रत्येक पिछले वर्ष के लिए ऐसी इच्छा की सूचना डिडक्टर, उसके नियोक्ता के तौर पर, को दे सकता है और ऐसी सूचना पर डिडक्टर उसकी कुल आय की गणना करेगा और धारा 115खकग के प्रावधानों के अनुसार उसपर टीडीएस कटेगा। यदि कर्मचारी द्वारा ऐसी सूचना नहीं दी जाती तो नियोक्ता अधिनियम की धारा 115खकग के प्रावधानों पर विचार किए बिना टीडीएस काटेगा। डिडक्टर को की गई ऐसी सूचना केवल पिछले वर्ष के दौरान ही टीडीएस उद्देश्य के लिए होगी और उस वर्ष के दौरान संशोधित नहीं की जा सकती (2020 की सीबीडीटी परिपत्र सं. ग1, दिनांक 13.04.2020)।
हालांकि, उस एक मामले में कोई कर कटौती की जाने की आवश्यकता नहीं है जबतक अनुलाभ की कीमत सहित अनुमानित वेतन आय छूट, कटौती और राहत जो लागू हो, को प्रभावी करने के बाद करयोग्य होती है (कर की गणना के कुछ प्ररूपी उदाहरण अनुलग्नक-I में दिए गए हैं)
3.2 नियोक्ता द्वारा रियायत पर कर का भुगतान
रियायतें दो भागो यानी मौद्रिक रियायत और गैर-मौद्रिक रियायत में विभाजित है। मौद्रिक रियायत सभी कर्मचारियों के लिए करयोग्य है और गैर-मौद्रिक रियायत निर्दिष्ट कर्मचारियों के लिए करयोग्य है। निम्नलिखित कर्मचारियों को निर्दिष्ट प्रकार का कर्मचारी समझा जाएगा :
(1) एक निदेशक - कर्मचारी
(2) एक ऐसा कर्मचारी जिसका नियोक्ता - कंपनी में महत्वपूर्ण हित हो (यानी वोटिंग पॉवर के 20 या उससे अधिक के इक्विटी शेयर के लाभार्थी मालिक)
(3) एक कर्मचारी जिसकी वेतन के अंतर्गत मौद्रिक आय रू. 50,000 से अधिक है।
रियायत की करयोग्य कीमत को कुछ रियायतों के मूल्यांकन के लिए निर्दिष्ट नियमों के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है जैसा आयकर नियमों के नियम 3 में निर्दिष्ट है।
कर्मचारी को दिए गए गैर-मौद्रिक रियायतों पर कर का भुगतान करने के लिए नियोक्ता को एक विकल्प दिया गया है। नियोक्ता, अपनी इच्छा के अनुसार, कर्मचारी के वेतन से किसी टीडीएस को काटे बिना खुद ऐसी रियायत पर कर का भुगतान कर सकता है। अधिनियम की धारा 10(10गग) के अनुसार, नियोक्ता द्वारा ऐसी गैर-मौद्रिक रियायत पर दिया गया कर कर्मचारी की ओर से कर मुक्त है। हालांकि, नियोक्ता को उस समय कर का भुगतान करना होगा जब ऐसा कर अन्यथा काटा गया था यानी कर्मचारी को शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूले जाने वाले भुगतान के समय।
3.3 औसत आय कर की गणना :
उक्त पैरा 3.2 में निर्दिष्ट गैर-मौद्रिक रियायत के रूप में किसी प्रकार की आय के भुगतान पर कर के भुगतान के लिए, देययोग्य कर को शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूले जाने वाली आय पर कर की औसत दर को गिनते हुए निर्धारित किया जाना है जिसमें उस रियायत की कीमत शामिल है जिसके लिए खुद नियोक्ता की ओर से कर का भुगतान किया गया है।
उदाहरण :
वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान साठ वर्ष की आयु से कम के एक कर्मचारी की शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूलनीय आय रू. 6,00,000/- है (सभी रियायतों सहित), जिसमें से रू. 50,000/- गैर-मौद्रिक रियायत के कारण है और नियोक्ता को उक्त पैरा 3.2 में चर्चित प्रावधानों के अनुसार ऐसे रियायत पर कर देने को चुन सकता है।
चरण :
| सभी रियायतों सहित शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूले जाने वाली आय | रू. 6,00,000/- |
| कुल वेतन पर सामान्य दरों के अनुसार कर (अधिभार सहित) | रू. 33,800/- |
| कर की औसत दर (33,800/6,00,000)x100 | 5.63 प्रतिशत |
| रू. 50,000/- पर देययोग्य कर (50,000 का 5.63 प्रतिशत ) | रू. 2815/- |
| प्रत्येक महीने जमा किए जाने वाली आवश्यक राशि | रू. 235 = 2815/12 |
नियोक्ता द्वारा दिया गया ऐसा कर कर्मचारी के वेतन से किए गए टीडीएस होने के तौर समझा जाएगा
3.4 एक से अधिक नियोक्ता द्वारा वेतन
धारा 192(2) उस स्थिति के साथ व्यवहार करता है जहां एक व्यक्ति एक से अधिक नियोक्ता के अंतर्गत कार्य करता हो या एक नियोक्ता से दूसरे नियोक्ता में परिवर्तित हो जाता हो। यह कर्मचारी, जो एक से अधिक नियोक्ता से वेतन प्राप्त करता हो या करता रहा हो, के कुल वेतन से ऐसे नियोक्ता (जैसा करदाता चुने) द्वारा स्रोत पर कर की कटौती मुहैया कराता है। कर्मचारी को अब पूर्व/अन्य नियोक्ता से प्राप्त या शेष प्रमुख "वेतन" के अंतर्गत आय के वर्तमान/चुने हुए नियोक्ता विवरणों को प्रस्तुत करना और पूर्व/अन्य नियोक्ता द्वारा और उसके द्वारा विधिवत रूप से सत्यापित और लिखित में वहां से स्रोत पर कर कटौती भी आवश्यक है। वर्तमान/चुना हुआ नियोक्ता को वेतन की कुल राशि (पूर्व या अन्य नियोक्ता से प्राप्त वेतन सहित) पर स्रोत पर कर कटौती आवश्यक होगी।
3.5 राहत जब वेतन बकाए या उधार में दिया जाता है
3.5.1 अधिनियम की धारा 89 को उस निर्धारिती को राहत देने के लिए मुहैया कराया गया है जिसको वेतन उधार या बकाया राशि में किया जा रहा हो जिसके परिणामस्वरूप उसकी आय उस दर से अधिक दर पर मूल्यांकित होती हो जिसे अन्यथा मूल्यांकित किया गया होता। ऐसा निर्धारिती उस निर्धारण अधिकारी को आवेदन कर सकता है जो निर्धारित तरीके में राहत देगा। नियमों के नियम 21क ऐसी राहत की गणना का तरीका बताती है।
3.5.2 धारा 192(2क) के अंतर्गत जहां निर्धारिती, एक सरकारी कर्मचारी, एक कंपनी में कर्मचारी, सहकारी संस्था, स्थानीय प्राधिकारी, विश्वविद्यालय, संस्थान, संघ या निकाय के तौर पर, धारा 89 के अंतर्गत राहत का हकदार है, वह पैरा (3.1) में संदर्भित भुगतान करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को प्रस्तुत कर सकता है, प्रपत्र सं. 10ड़ (आयकर नियमों के नियम 21कक) में ऐसे विवरण विधिवत रूप से उसके द्वारा सत्यापित होते है और इसके बाद जिम्मेदार व्यक्ति, उक्तकथितानुसार, ऐसे विवरणों के आधार पर राहत देगा और उक्त पैरा (3.1) के अंतर्गत कटौती करने में विचारनीय होगा। आगे, प्रत्येक निर्धारिती को आय की विवरणी के साथ ई-दाखिलीकरण पोर्टल में इलैक्ट्रानिक रूप से उक्तकथित प्रपत्र 10ड़ को अपलोड करना होगा।
3.5.3 यहा "विश्विद्यालय" का अर्थ एक केंद्र, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा संस्थापित या निगमित विश्वविद्यालय से है और उस अधिनियम हेतु विश्वविद्यालय होने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, 1956 की धारा 3 के अंतर्गत घोषित संस्थान शामिल है।
3.5.4 : 1/04/2010 (निर्धारण वर्ष 2010-11) से एक निर्धारिती के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की किसी योजना या योजनाओं के अनुसार उसकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर या उसके सेवा की समाप्ति पर प्राप्त या प्राप्त होने वाली किसी राशि के संबंध में ऐसी राहत नहीं दी जाएगी या धारा 10(10ग)(i) (नियम 2खक के साथ पठित) में संदर्भ की गई एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी की स्थिति में, स्वेच्छा से अलग होने की योजना, यदि उसकी सेवा की ऐसी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या समाप्ति पर प्राप्त या प्राप्त होने वाली किसी राशि के संबंध में छूट या ऐसे या अन्य किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में धारा 10(10ग) के अंतर्गत निर्धारिती द्वारा स्वैच्छिक पृथकीकरण का दावा किया गया हो।
3.6 किसी अन्य शीर्षक के अंतर्गत आय से संबंधित सूचना :
धारा 192 (2ख) ऐसे करदाता को उसी वित्त वर्ष तथा उस पर स्रोत पर कर कटौती के लिए करदाता द्वारा प्राप्त "वेतन" (शीर्षक "गृह संपत्ति से वेतन के अंतर्गत नुकसान को छोड़कर ऐसे विषय के अंतर्गत नुकसान के तौर पर नहीं) को छोड़कर अन्य किसी विषय के अंतर्गत वेतन का विवरण को प्रस्तुत करने में सक्षम करती है। विवरण साधारण विवरण में भी प्रस्तुत किया जा सकता है जो नियम के नियम 26ख (2) के अंतर्गत निर्धारित तरीके से करदाता द्वारा उचित तरह से हस्ताक्षरित अथवा सत्यापित हो और साधारण विवरण के अनुसार संबंद्ध किया जाएगा। सत्यापन का प्रपत्र निम्नानुसार पुन:प्रस्तुत किया जाना है :
मैं, (निर्धारिती का नाम), घोषणा करता हूं कि उक्त कथन मेरी जानकारी और विश्वास के अनुसार सही है
इस बात को दोहराया जाता है कि डीडीओ केवल "गृह संपत्ति से आय" विषय के अंतर्गत ही किसी भी नुकसान पर विचार कर सकते हैं। अन्य किसी भी विषय के अंतर्गत हुए नुकसान पर वसूले जाने वाले कर की राशि की गणना के लिए डीडीओ द्वारा विचार नहीं किया जाएगा। यह ध्यान दिया जा सकता है कि शीर्षक "गृह संपत्ति से आय" के अंतर्गत हानि को वित्त अधिनियम, 2017 के अधिनियम की धारा 71 के लिए संशोधन को देखते हुए आय के किसी अन्य शीर्षक के अंतर्गत आय के साथ रू. 2.00 लाख तक ही समायोजित किया जा सकता है। इसलिए, रू. 2 लाख के अतिरिक्त शीर्षक "गृह संपत्ति से आय" के अंतर्गत हानि को कर कटौती की राशि की गणना के लिए नजरअंदाज किया जाना है।
3.7 शीर्षक "गृह संपत्ति से आय" के अंतर्गत आय की गणना
धारा 192(2घ) भुगतान करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को हानि को समायोजित करने के दावे सहित निर्धारित दावों के प्रमाण या सबूत को प्राप्त करने में सक्षम करता है। गृह संपत्ति से हानि पर विचार करते हुए, डीडीओ को सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी ऊपर की गई घोषणा को फाइल करें, तथा गृह संपत्ति से ऐसे नुकसान के आंकलन को उसके साथ संलग्न करें। प्रत्येक गृह संपित्त के लिए अलग-अलग शीर्षक "गृह संपत्ति से आय" के अंतर्गत हानि संबंधी दावों के संदर्भ में नियोक्ता की ओर से निम्नलिखित ब्यौरा प्राप्त किया जाएगा और सुरक्षित रखा जाएगा :
(क) सकल वार्षिक किराया/मूल्य
(ख) नगरपालिका कर भुगतान, यदि हो
(ग) ब्याज भुगतान, यदि हो, हेतु दावे में कटौती
(घ) अन्य दावों का भुगतान
(ड़) संपत्ति का पता
डीडीओ धारा 192 (2घ) के साथ पठित नियम 26ग में निर्दिष्टानुसार ब्याज की कटौती के संबंध में प्रपत्र 12खख में प्रमाण या विवरणों की प्रस्तुति को भी सुनिश्चित करेगा।
3.7.1 भवन संपत्ति से आय की गणना के लिए उधार ली गई पूंजी पर ब्याज की कटौती के दावे के लिए शर्तें :
अधिनियम की धारा 24 (ख) निम्नानुसार उधार ली गई पूंजी पर ब्याज पर भवन संपत्ति से प्राप्त आय से कटौती की स्वीकृति देता है :
i. कटौती उस स्थिति में लागू होगी जब भवन संपत्ति उसके द्वारा खरीदी जाए तथा कर्मचारी स्वयं के रहने के लिए उसका प्रयोग करें। हालांकि, रोजगार के अन्य स्थान पर होने के कारण को देखते हुए संबंधित संपत्ति वास्तविक तौर पर कर्मचारी द्वारा प्रयोग नहीं की जाती।
ii. कटौती का भाग निम्न तालिका के अनुसार स्वीकार्य होगा
| क्र.सं. | उधार ली गई पूंजी का उद्देश्य | उधार ली गई पूंजी की तिथि | अधिकतम स्वीकार्य कटौती |
| 1 | भवन की मरम्मत अथवा नवीकरण अथवा पुन:निर्माण | किसी भी समय | रू. 30,000/- |
| 2 | भवन का अर्जन अथवा निर्माण | 01.04.1999 से पहले | रू. 30,000/- |
| 3 | भवन का अर्जन अथवा निर्माण | 01.04.1999 को अथवा इससे पूर्व | रू. 1,50,000/— (निर्धारण वर्ष 2014-15 तक) |
| रू. 2,00,000/— (निर्धारण वर्ष 2015-16 से प्रभावी) | |||
| 4 | उक्त तालिका की क्र.सं. 1 और 3 की कुल कटौती वित्त वर्ष 2019-20 से रू. 2,00,000/- से अधिक नहीं होगी | ||
उक्त क्रम सं. 3 की स्थिति में :
(क) भवन का अर्जन अथवा निर्माण उस वित्त वर्ष के समाप्त होने के 5 वर्षों के भीतर होना चाहिए जिसमें पूंजी उधार ली गई है। अत: डीडीओ के लिए यह आवश्यक है कि वह उस संपत्ति का समाप्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करे जिसके लिए कर्मचारी द्वारा स्व: घोषणा आधार पर अथवा निर्माणकर्ता द्वारा कटौती का दावा किया गया हैं या तो बिल्डर के माध्यम से अथवा कर्मचारी द्वारा स्व: सत्यापन के माध्यम से।
(ख) इसके आगे वित्त वर्ष से वित्त वर्ष, जिसमें संपत्ति अर्जित अथवा निर्माण (अधिनियम की अन्य कोई धारा के अंतर्गत कटौती के तौर पर स्वीकार्य ब्याज के किसी भी भाग द्वारा कम) किया गया है, के लिए अग्रिम अवधि ब्याज उस साल तथा आगामी चार वित्त वर्षों में वित्त वर्ष के लिए समान किस्तों में काटी जाएगी।
(ग) कर्मचारी को डीडीओं के समक्ष उस व्यक्ति द्वारा एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा जिसमें उसे देययोग्य ब्याज की राशि को निर्दिष्ट करते हुए उधार ली गई राशि पर कोई ब्याज देय हैं। यदि पुराने ऋण को चुकाने के लिए नया ऋण लिया गया है तो ऐसे चुकाए गए मूलधन तथा ब्याज के विवरण को दर्शाते हुए प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना चाहिए।
जैसाकि पैरा 4.7.4 में बताया गया है कि नियम 26ग के साथ पठित धारा 192(2घ) के अंतर्गत कटौतीपूर्ण ब्याज के संदर्भ में निम्नलिखित विवरणों/प्रमाणों को प्राप्त करने करना डीडीओ के लिए अनिवार्य है
(i) देययोग्य या दिया गया ब्याज
(ii) ऋणदाता का नाम
(iii) ऋणदाता का पता
(iv) ऋणदाता का पैन या आधार नंबर जो भी मामला हो
ऋणदाता, वित्तीय संस्थान या नियोक्ता के तौर पर, का पैन या आधार नंबर, जो भी हो, अनिवार्य है यदि कर्मचारी के पास है हालांकि पैन या आधार नंबर, जो भी मामला हो, को प्राप्त करने वाले अन्य ऋणदाता के मामले में डीडीओ द्वारा अनिवार्य है।
3.8 अतिरिक्त या कम कटौती का समायोजन
धारा 192 (3) के प्रावधान कटौती करने वाले को यह अधिकार देते हैं कि वह वित्त वर्ष के दौरान किसी पिछली कटौती या कटौती न करने पर किसी भी प्रकार की अतिरिक्त या कम कर कटौती का समायोजन कर सके।
3.9 विदेशी मुद्रा में दिया गया वेतन
विदेशी मुद्रा में देययोग्य वेतन पर कर की कटौती के लिए ऐसे वेतन की रूपए में कीमत ऐसी तिथि के अनुसार ऐसी मुद्रा के "तार अंतरण क्रय दर" के आधार पर आंकी जाएगी जिस पर स्रोत पर कर कटौती करना आवश्यक है (नियम 26 और नियम 115 देखें)
4. कर तथा अपने अधिभार की कटौती हेतु उत्तरदायी व्यक्ति
अधिनियम की धारा 204 अभिव्यक्ति "भुगतान के लिए जिम्मेदार व्यक्ति" के अर्थ को स्पष्ट करता है।
धारा 204 के वाक्यांश (i) के अनुसार, वेतन के भुगतान के मामले में, केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा भुगतान को छोड़कर, धारा 192 के लिए "भुगतान हेतु जिम्मेदार व्यक्ति" का अर्थ स्वयं नियोक्ता अथवा यदि नियोक्ता कंपनी हो तो, उसके प्रधान अधिकारी सहित स्वंय कंपनी होगी।
धारा 204 (iv) के वाक्यांश के अनुसार, ऋण के संबंध में, अथवा जो भी स्थिति हो, अधिनियम के अंतर्गत वसूले जाने वाली किसी राशि का भुगतान ऐसी राशि का भुगतान केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा या उसकी ओर से किया जाता है, ऐसी राशि को क्रेडिट, या जो भी मामला हो, भुगतान के लिए जिम्मेदार डीडीओ अथवा अन्य किसी व्यक्ति, जो भी नाम हो, धारा 192 के लिए "भुगतान के लिए उत्तरदायी व्यक्ति" ऐसी रकम का भुगतान करने वाला है।
धारा 204 के वाक्यांश (iv) के अनुसार, भारत में न रहने वाले व्यक्ति के मामले में, "भुगतान करने वाला व्यक्ति" का अर्थ स्वयं व्यक्ति या ऐसे व्यक्ति द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति या भारत में ऐसे व्यक्ति का एजेंट से है जिसमें धारा 163 के अंतर्गत एक एजेंट के तौर पर समझा गया व्यक्ति भी शामिल है।
4.1 स्रोत पर कर कटौती
स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) को आय के स्रोत से कर एकत्रित करने के लिए प्रस्तुत किया गया था। इस संकल्पना के अनुसार, एक व्यक्ति (डिडक्टर) जो किसी अन्य व्यक्ति (डिडक्टी) को निर्दिष्ट प्रकार के भुगतान करने के लिए जिम्मेदार है वह स्रोत पर कर कटौती करेगा और इसे केंद्र सरकार के खाते में प्रेषित करेगा। डिडक्टी, जिसकी आय से, कर स्रोत पर काटा गया हो तो वह डिडक्टर द्वारा जारी प्रपत्र 26कध या टीडीएस प्रमाणपत्र के आधार पर ऐसी काटी गई राशि को प्राप्त करने का हकदार होगा।
4.1.2 स्रोत पर कर कटौती की दरें
धारा 192 किसी टीडीएस दर को निर्दिष्ट नहीं करता। हालांकि, धारा 192(1) के अनुसार, कर कटौती किया गया, उस वित्त वर्ष के लिए मुख्य आय के अंतर्गत अनुमानित आय पर उस वित्त वर्ष के लिए प्रभावी दरों के आधार पर गिनी गई देययोग्य राशि पर आयकर की औसत दर पर की जाएगी जिसमें भुगतान किया गया है। विभिन्न आय स्लैब के अनुसार दरें वित्त अधिनियम की चौथी अनुसूची में निर्दिष्ट है। अनिवासी व्यक्तियों के भुगतान के मामले में, दोहरा कराधान परिहार समझौते के अंतर्गत निर्दिष्ट कर कटौती दरों पर भी विचार किया जाएगा।
4.2 शून्य या न्यूनतम दर पर कर कटौती
करदाता के क्षेत्राधिकार के टीडीएस अधिकारी करदाता द्वारा प्रपत्र सं. 13 में उनके समक्ष परिपूरित आवेदन की प्रतिक्रिया में अधिनियम की धारा 197 के अंतर्गत कर की कोई कटौती न होने अथवा न्यूनतम कटौती का प्रमाणपत्र जारी करें तो डीडीओ को ऐसे प्रमाणपत्र पर विचार करना चाहिए तथा यहां निर्दिष्ट दरों पर देययोग्य वेतन पर कर वसूलना चाहिए। (नियम 28 कक देखें)। प्रमाणपत्र की विशिष्ट पहचान संख्या टीडीएस के त्रैमासिक विवरण में सूचना देना आपेक्षित हैं। (प्रपत्र 27 थ)
4.3 काटे गए कर को जमा करना
अधिनियम की धारा 200 के अनुसार, किसी राशि की कटौती के लिए जिम्मेदार किसी व्यक्ति को निर्धारित समय के अंदर केंद्र सरकार का जमा करने हेतु ऐसी काटी गई राशि का भुगतान करना होगा।
केंद्र सरकार खाते के स्रोत पर कर कटौती के भुगतान की विधि तथा समय के लिए नियम 30 को संदर्भित करें
4.3.1 टीडीएस के भुगतान हेतु नियत तिथि
केंद्र सरकार के खाते में टीडीएस जमा कराने हेतु भुगतान/जमा करने का समय निम्नानुसार हैं:—
सरकारी कार्यालय द्वारा कटौती के मामले में :
| क्र.सं. | विवरण | समय जब तक काटे गए कर को जमा किया जाना है |
| 1 | बिना चालान कर भुगतान (पुस्तक प्रविष्टि) | उसी दिन |
| 2 | चालान सहित कर भुगतान | अगले महीने का 7वां दिन |
| 3 | नियोक्ता द्वारा जमा किये जाने हेतु चुने गए आधार पर कर भुगतान | अगले महीने का 7वां दिन |
सरकारी कार्यालय को छोड़कर डिडक्टर द्वारा कटौती की स्थिति में
| क्र.सं. | विवरण | समय जब तक जमा किया जाना है |
| 1 | मार्च में कर कटौती | अगले वित्त वर्ष की 30 अप्रैल |
| 2 | किसी अन्य माह में कर कटौती | अगले महीने का 7वां दिन |
| 3 | नियोक्ता द्वारा जमा किए जाने हेतु चुने गए अनुलाभ पर कर | अगले महीने का 7वां दिन |
नियम 30(3) के अनुसार, संयुक्त आयकर आयुक्त की पूर्व अनुमति से एक निर्धारण अधिकारी नीचे दी गई तालिका में निर्दिष्ट तिथियों पर वित्त वर्ष की तिमाही के लिए धारा 192 के अंतर्गत टीडीएस के त्रैमासिक भुगतान की अनुमति दे सकता है :
| क्र.सं. | निम्न को समाप्त वित्त वर्ष की तिमाही | त्रैमासिक भुगतान के लिए तिथि |
| 1 | 30 जून | 7 जुलाई |
| 2 | 30 सितम्बर | 7 अक्टूबर |
| 3 | 31 दिसंबर | 7 जनवरी |
| 4 | 31 मार्च | अगले वित्त वर्ष को 30 अप्रैल |
4.4 टीडीएस के भुगतान की विधि
4.4.1 धारा 200 (2क) के अंतर्गत पुस्तक प्रविष्टि द्वारा टीडीएस के भुगतान की स्थिति में पीएओ, निधि अधिकारी द्वारा अनिवार्य विवरण का ब्यौरा
सरकारी कार्यलय, जहां चालान (पुस्तक प्रविष्टि) की प्रस्तुति के बिना केद्र सरकार को ऋण के तौर पर कर का भुगतान किया जाना है, की स्थिति में वेतन और लेखा अधिकारी अथवा निधि अधिकारी अथवा अर्हरित चेक तथा संवितरण अधिकारी अथवा अन्य किसी नाम का कोई व्यक्ति जिसे ऋण काटने वाला कर कटौती के बारे में सूचित करता है अथवा केंद्र सरकार के ऋण में ऐसी राशि को डालने वाला —
(क) 30 अप्रैल को या उससे पहले धारा 200(2क) के अंतर्गत प्रपत्र सं. 24छ में विवरण को जमा करेगा जहां विवरण मार्च महीने से संबंधित हो और अन्य किसी स्थिति में, कर कटौती करने वाले के द्वारा कर कटौती के संबंध में प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) (टिन सुविधा सेवा केंद्र वर्तमान में मैसर्स राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लि. द्वारा व्यवस्थित की जाती है) द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसी में प्रासंगिक महीने के अंत में 15 दिनों में या उससे पहले; और
(ख) कटौती की राशि के ऋण के संबंध में प्रत्येक कटौती करने वाले को एजेंसी द्वारा जनित संख्या (पुस्तक पहचान संख्या अथवा बिन के अनुसार) को सूचित करना चाहिए। बिन में प्रपत्र 24छ की पावती संख्या, प्रपत्र संत्र 24छ में डीडीओ अनुक्रम संख्या तथा कर के भुगतान की तिथि शामिल हैं।
प्रपत्र 24छ में ब्यौरा प्रपत्र 27क में सत्यापन के साथ डिजिटल हस्ताक्षर या इलैक्ट्रानिक तौर पर प्रस्तुत किया जाएगा।
यदि वेतन और लेखा अधिकारी या फंड अधिकारी या आहरण और संवितरण अधिकारी या अन्य कोई व्यक्ति, चाहे जिस भी नाम से जाना जाए, जैसाकि ऊपर निर्दिष्ट है, धारा 200(2क) के अंतर्गत आवश्यक समय के अंदर ब्यौरा प्रस्तुत नही कर पाता तो वह धारा 272क(2)(ढ) के अंतर्गत जबतक विफलता जारी रहती है तब तक प्रतिदिन रू. 100/- का जुर्माना देगा। हालांकि, ऐसे जुर्माने की राशि उस राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए जो स्रोत पर कर कटौती हेतु कटौतीपूर्ण हैं।
प्रपत्र 24छ की प्रस्तुति की प्रक्रिया अनुलग्नक III में दी गई है। पीएओ/डीडीओ को अनुसरित की जाने वाली सही प्रक्रिया को समझने के लिए अनुलग्नक IV में एफएक्यू को देखना चाहिए। केंद्र सरकार के मंत्रालयों के जीएओ/पीएओ मासिक आधार पर प्रपत्र सं. 24छ को प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेदार है। राज्य सरकार के विभाग के मामले में प्रपत्र सं. 24छ को प्रस्तुत करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को अनुलग्नक V में दिखाया गया है।
(नोट : मई 2021 के लिए प्रपत्र 24छ में टीडीएस बही खाता समायोजन ब्यौरे जिसे 2021 के परिपत्र सं. 9, दिनांक 20 मई, 2021 के अनुसार 30 जून या उससे पहले प्रस्तुत किया जाना था उसे नियम 30 के अंतर्गत 15 जून 2021 को या उससे पहले प्रस्तुत किया जाना है)
4.4.2. आयकर चालान द्वारा भुगतान
(i) आयकर चालान द्वारा भुगतान किए जाने की स्थिति में ऐसे कटौतीयोग्य कर की राशि को भारतीय रिजर्व बैंक के किसी कार्यालय अथवा भारतीय स्टेट बैंक की किसी शाखा अथवा अन्य किसी प्राधिकृत बैंक में उक्त पैरा 4.4.1 की तालिका में निर्दिष्ट समय के भीतर प्रेषण द्वारा केंद्र सरकार के ऋण को जमा किया जा सकता है।
(ii) कंपनी तथा व्यक्ति (कंपनी को छोड़कर) जिस पर धारा 44कख कें प्रावधान लागू हो, कटौती की गई राशि की स्थिति में, इलैक्ट्रानिक आयकर चालान सहित भारतीय रिजर्व बैंक अथवा भारतीय स्टेट बैंक अथवा अन्य प्राधिकृत बैंक में इलैक्ट्रानिक प्रेषण किया जाएगा। (नियम 125)
राशि भारतीय रिजर्व बैंक अथवा भारतीय स्टेट बैंक अथवा अन्य प्राधिकृत बैंक में इलैक्ट्रानिक प्रेषण के तौर पर समझी जाएगी यदि राशि निम्न प्रकार से प्रेषित की जाए
(क) भारतीय रिजर्व बैंक अथवा भारतीय स्टेट बैंक अथवा अन्य प्राधिकृत बैंक की इंटरनेट सुविधा : अथवा
(ख) डेबिट कार्ड (नियम 30(7))
4.5 कर कटौती जमा करने के विफल रहने पर ब्याज, जुर्माना व अभियोजन
यदि व्यक्ति किसी भी स्रोत से कर का संपूर्ण अथवा कुछ भाग देने में असमर्थ रहता है तो अथवा कटौती के बाद निर्धारित समय में केंद्र सरकार के क्रेटिड में कर का संपूर्ण अथवा कुछ भाग देने में असमर्थ रहता हैं तो धारा 201 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होगा तथा ऐसे कर के संबंध में निर्धारिती-दोषी के तौर पर समझा जाएगा तथा अधिनियम की धारा 221 के अंतर्गत कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा। आगामी धारा 201(1क) यह बताती है कि ऐसे व्यक्ति कर के वसूले जाने वाली तिथि से ऐसे कर की राशि पर प्रत्येक माह अथवा माह के किसी अंश के लिए 1 प्रतिशत की दर पर तथा प्रत्येक माह अथवा तिथि, जिस पर ऐसे कर का वास्तविक भुगतान किया गया था, से ऐसे कर की राशि वाले माह के किसी अंश पर एक तथा डेढ़ प्रतिशत साधारण ब्याज के लिए उत्तरदायी होगा ऐसा ब्याज धारा 200 की उप-धारा (3) के प्रावधानों के अनुसार ब्यौरे की प्रस्तुति से पहले दिया जाएगा।
धारा 271ग साथ-साथ नीचे दर्शाती है कि यदि कोई व्यक्ति धारा 194 ख के दूसरे प्रावधानों के अनुसार संपूर्ण कर अथवा कर के किसी अंश अथवा सभी स्रोत से संपूर्ण कर अथवा कुछ अंश के भुगतान में असमर्थ रहता है तो कर की राशि के समान कुल राशि को जुर्माने के तौर पर देना होगा जो जिसका उसने भुगतान अथवा कटौती न की हो।
आगे, धारा 276ख यह दर्शाती है कि यदि कोई व्यक्ति, धारा 194ख के दूसरे प्रावधान के अंतर्गत सभी स्रोतों से कर की कटौती अथवा स्वयं के कर भुगतान, उपरोक्तानुसार निर्धारित समय के भीतर केंद्र सरकार को केटिड का भुगतान करने में असफल रहता है तो वह एक अवधि, जो जुर्माने सहित कम से कम 3 महीने हो सकती है लेकिन उसे 7 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है, सश्रम कारावास के साथ दंडित किया जाएगा।
4.6 कर कटौती हेतु प्रमाण पत्र की प्रस्तुति (धारा 203)
4.6.1 धारा 203 के अनुसार डीडीओ द्वारा कर्मचारी को टीडीएस की राशि के ब्यौरे तथा अन्य विवरण वाले प्रपत्र 16 में एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आपेक्षित है। नियम 31 का प्रावधान है कि प्रपत्र 16 कर्मचारी को उस वित्त वर्ष जिसमें वेतन का भुगतान तथा कर कटौती की गई थी, की समाप्ति के बाद 15 जून तक दिया जाना चाहिए। साथ ही साथ बैंक को पेंशन के भुगतान के समय काटे गए कर के लिए ऐसे प्रमाणपत्र को जारी करना चाहिए। 2021 की परिपत्र सं. 12 दिनांक 25 जून, 2021 के माध्यम से, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने कर्मचारियों के लिए वित्त वर्ष 2020-21 के लिए प्रपत्र 16 की प्रस्तुति की देय तिथि को 31 जुलाई, 2021 तक बढ़ाई गई है।
4.6.2 प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र निम्नलिखित को निर्दिष्ट करेगा :
(क) डिडक्टी की वैध स्थाई खाता संख्या (पैन) या आधार नंबर, जो भी हो
(ख) डिडक्टर की वैध कर कटौती और संग्रहण खाता संख्या
(ग) (i) पुस्तक पहचान संख्या अथवा संख्या (बिन) जहां सरकारी कार्यालय की स्थिति में कर कटौती का जमा चालान की बिना प्रस्तुति पर हुआ।
(ii) बैंक द्वारा भुगतान की स्थिति में पुस्तक पहचान संख्या अथवा संख्या (सीआईएन)
(* सीआईएन का अर्थ है ऐसा नंबर जिसमें बैंक शाखा, जहां कर का भुगतान किया गया है, जिस तिथि को कर का भुगतान किया गया है तथा बैंक द्वारा दिए गए चालान सिरियल नंबर, का बीएसआर कोड शामिल है)
(घ) टीडीएस का सभी प्रासंगिक त्रैमासिक ब्यौरा की प्राप्ति संख्या (24थ)। त्रैमासिक ब्यौरे की संख्या की प्राप्ति 8 अंकों की होती है।
4.6.3 आगे परिपत्र 04/2013 दिनांक 17.04.2013 के अनुसार सभी कटैतीदाता (सरकारी कटौतीदाता, जो पुस्तक प्रविष्टि के द्वारा केंद्र सरकार के खाते में टीडीएस जमा करते है, सहित) अध्याय XVII-ख की धारा 192 के प्रावधानों के तहत 1 अप्रैल 2012 को अथवा के बाद कुल कटौती के संबंध में टीआरएसीईएस पोर्टल के माध्यम से जनरेट तथा तद्नुसार डाउनलोड करके तथा विधिवत सत्यापन और पुष्टि के बाद प्रपत्र 16 के भाग क को जारी करेगें। प्रपत्र सं. 16 के भाग क के पास विशिष्ट टीडीएस प्रमाणपत्र संख्या होनी चाहिए। प्रपत्र सं. 16 के भाग ख (अनुलग्नक) हाथ से कटौतीदाता द्वारा तैयार किया जाएगा तथा प्रपत्र 16 के भाग क सहित उचित सत्यापन तथा प्रमाणीकरण के बाद कटौतीदाता को जारी किए जाऐंगे।
4.6.4 यह ध्यान दिया जा सकता है कि नई टीडीएस प्रक्रिया के अंतर्गत, कटौतीदाता द्वारा दाखिल टीडीएस विवरण की प्राप्ति संख्या तथा कटौतीकर्ता का टैन/कटौतीकर्ता का पैन कटौतीकर्ता को टीडीएस के ऑनलाइन ऋण की स्वीकृति के लिए विशिष्ट पहचान के तौर पर व्यवहार कर सकता हैं। इसलिए इन ब्यौरों को दाखिल करने में उचित सावधानी रखी जानी चाहिए। टीडीएस विवरण में सही सिन/बिन नंबर को इंगित करने में भी विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।
4.6.5 यदि डीडीओ धारा 203 के अनुसार आपेक्षित संबंधित व्यक्ति को यह प्रमाणपत्र जारी करने में असफल रहता हैं तो धारा 272क(2)(छ) के अंतर्गत जुर्माने के तौर पर रू. 100/- प्रतिदिन जब तक यह प्रक्रिया जारी रहती है, भरने के लिए बाध्य होंगे। हालांकि, ऐसे जुर्माने की राशि कर की उस राशि से अधिक नहीं होगी जो स्रोत पर कटौतीपूर्ण है।
हालांकि यह स्पष्ट किया जाता है कि टीडीएस प्रमाणपत्र जारी करने के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है यदि सभी स्रोतों से कर छूट तथा कटैातियों के दावे के आधार पर काटनेयोग्य/काटा नही गया हो।
4.6.6 सीबीडीटी अधिसूचना सं. 36/2019 दिनांक 12.04.2019 के द्वारा आयकर (तीसरा संशोधन नियम) 2019 को अधिसूचित किया गया था जिसमें आयकर नियम के अनुलग्नक-II के अंतगत प्रपत्र 16 के भाग-ख (अनुलग्नक) में अधिसूचित किया गया था, को संशोधित किया गया था। प्रपत्र 16 को आगे 02.09.2021 को अधिसूचित किए गए आयकर (26वें संशोधन) नियम, 2021 के द्वारा संशोधित किया गया है। प्रपत्र 16 के संशोधित प्रपत्र को इस टीडीएस परिपत्र के अनुलग्नक ख पर चस्पा किया गया है।
4.6.7 संशोधित किए गए प्रपत्र 16 को भरते समय निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए :
1. सरकारी डिडक्टरों को भाग क की मद I में सूचना प्रस्तुत करना आवश्यक है यदि कर का भुगतान आयकर चालान की प्रस्तुति के बिना किया जाता है और भाग क की मद II में करना आवश्यक है यदि कर के भुगतान में एक आयकर चालान शामिल है।
2. गैर-सरकारी डिडक्टरों को भाग क की मद II में सूचना भरना है।
3. डिडक्टर निर्धारिती के टीडीएस ब्यौरे के संबंध में क्षेत्राधिकार रखने वाले आयकर आयुक्त (टीडीएस) का पता प्रस्तुत करेगा।
4. यदि एक निर्धारिती को वर्ष के दौरान ही एक नियोक्ता के अंतर्गत नियोजित किया जाता है तो वित्त वर्ष के 31 मार्च को समाप्त होने वाली तिमाही के लिए जारी किए गए प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र में वित्त वर्ष की सभी तिमाहियों के लिए कर कटौती और जमा संबंधी ब्यौरे शामिल होंगे।
5. (i) यदि एक निर्धारिती को वर्ष के दौरान एक से अधिक नियोक्ता के अंतर्गत नियोजित किया जाता है तो प्रत्येक नियोक्ता ऐसी अवधि से संबंधित प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र के भाग क को जारी करेगा जिसके लिए ऐसे निर्धारिती को प्रत्येक नियोक्ता के पास नियोजित किया गया था।
(ii) प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र के भाग ख (अनुलग्नक-I) को प्रत्येक नियोक्ता या निर्धारिती के विकल्प पर अंतिम नियोक्ता द्वारा जारी किया जा सकता है।
(iii) प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र के भाग ख (अनुलग्नक-II) को निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक को निर्दिष्ट बैंक द्वारा जारी किया जा सकता है (अधिनियम की धारा 194ध को संदर्भित करें)
6. भाग क में, मद I और II में, डिडक्टी के संदर्भ में जमा किए गए कर हेतु कॉलम में, कर, अधिभार और स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर की कुल राशि को प्रस्तुत करता है।
7. डिडक्टर कर्मचारी को भाग ख (अनुलग्नक) की प्रस्तुति से पहले मद संख्या 2(च) और 10(ट) में विधिवत तौर पर ब्यौरा, जहां उपलब्ध हो, प्रस्तुत करेगा।
8. यदि एक निर्धारिती को वर्ष के दौरान एक से अधिक नियोक्ता के अंतर्गत नियोजित किया जाता है तो प्रत्येक नियोक्ता ऐसी अवधि से संबंधित प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र के भाग क को जारी करेगा जिसके लिए ऐसे निर्धारिती को प्रत्येक नियोक्ता के पास नियोजित किया गया था और भाग ख को प्रत्येक नियोक्ता या निर्धारिती के विकल्प पर अंतिम नियोक्ता द्वारा जारी किया जा सकता है।
9. टीडीएस प्रमाणपत्र (प्रपत्र 16) तभी डिडक्टी के लिए जनरेट किया जाएगा यदि वैध पैन या आधार नंबर जो भी हो को डिडक्टर द्वारा दाखिल तिमाही 4 में प्रपत्र 24थ के अनुलग्नक II में सही से निर्दिष्ट किया गया हो। इसके अलावा, नियोक्ता को प्रपत्र 16 में यह सुनिश्चित करने की सलाह दी जाती हैं कि प्रपत्र 24छ/ओएलटीएएस के संबंध में "मैचिंग" की स्थिति "एफ" हो। यदि मैचिंग की स्थिति "एफ" से अलग हो तो इसे सुधारने के लिए तुरंत आवश्यक कदम उठाएं। यहां यह निर्दिष्ट करना उचित होगा कि कटौतीदाताओं के लिए ब्यौरे के ऑनलाइन सुधार सहित कुछ सुविधाएं वेबसाइट www.idscpc.gov.in पर उपलब्ध कराई गई हैं।
[नोट : ट्रेसेज आयकर विभाग का वेब आधारित एप्लीकेशन हैं जो टीडीएस प्रबंधन से जुडे़ हुए सभी हितधारकों को इंटरफेस होने का मौका मुहैया कराता है। इसके द्वारा चालान की स्थिति को देखा, राष्ट्रीय प्रतिभूति नीक्षेपागार लिमिटेड की डाउनलोडिंग, कोन्सों फाइल, दोषमुक्त रिपोर्ट तथा प्रपत्र 16/16क के साथ-साथ वार्षिक कर साख ब्यौरा (प्रपत्र 26धध) को देखा जा सकता है। प्रत्येक कटौतीदाता को ट्रेस पोर्टल पर स्वयं को पंजीकृत कराना अनिवार्य हैं। कटौतीदाताओं को जारी किए गए प्रपत्र 16/16क को ट्रेस पोर्टल से उत्सर्जित तथा डाउनलोड करना चाहिए]
4.6.8 प्रपत्र 24थ में विवरण को भरने से संबंधित कुछ आवश्यक बिंदु नीचे निर्दिष्ट किए गए हैं :
क. नियोक्ता को राष्ट्रीय प्रतिभूति निपेक्षागार लिमिटेड आरपीयू (इसके पश्चात विवरणी निर्मित निति) के अनुसार प्रपत्र 24थ के अनुलग्नक I के स्तंभ 321 (भुगतान राशि/ऋण) में वेतन की सकल राशि (धारा 10 के अंतर्गत किसी राशि की छूट तथा अध्याय VI क के अंतर्गत कटौती सहित) उद्धृत करना चाहिए।
ख. नियोक्ता को राष्ट्रीय प्रतिभूति निपेक्षागार लिमिटेड आरपीयू के अनुसार प्रपत्र 24थ के अनुलग्नक II के स्तंभ 338 में धारा 10 के अंतर्गत किसी छूट को छोड़कर वेतन राशि को उद्धृत करना चाहिए।
ग. कटौती न करने, कटौती की कम दर (जैसा धारा 197 के अंतर्गत दिया गया है) या कटौती की अधिक दर (डिडक्टी द्वारा पैन की प्रस्तुति न करने के कारण) के कारण को प्रपत्र 24थ के अनुलग्नक I के कॉलम 328 में निर्दिष्ट किया जाना चाहिए।
घ. अन्य नियोक्ताओं की ओर से प्राप्त वेतन की कुल राशि को प्रपत्र सं. 24थ के अनुलग्नक II के कॉलम 337 में निर्दिष्ट किया जाना चाहिए।
ड़ नियोक्ता को सलाह दी जाती है कि वह पूर्णांकित किए बिना अनुलग्नक II में कुल करयोग्य आय (कॉलम 346) को उद्धृत करे और टीडीएस की कटौती की जानी चाहिए और उसे तद्नुसार रिपोर्ट किया जाना चाहिए यानी टीडीएस को पूर्णांकित किए बिना।
च. गैर-सरकारी डिडक्टरों के लिए पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है। सरकारी डिडक्टरों के मामले में "PANNOTREQD" को निर्दिष्ट किया जाना चाहिए।
छ. टीडीएस ब्यौरे को देरी से दाखिल करने के लिए धारा 234ड़ के अंतर्गत दिए गए शुल्क को शुल्क के अलग कॉलम (कॉलम 306) में निर्दिष्ट किया जाना चाहिए।
ज. कॉलम 308 में, सरकारी डीडीओ को पीएओ/टीओ/सीडीडीओ द्वारा प्रेषित टीडीएस की राशि को निर्दिष्ट करना है। अन्य डिडक्टरों को चालान के माध्यम से जमा किए गए टीडीएस की एकदम सही राशि को लिखना है।
झ. कॉलम 309 में, सरकारी डिडक्टर को "ख" लिखना है जहां टीडीएस को बही खाते के समायोजन के माध्यम से केंद्र सरकार के प्रेषित किया जाना है। अन्य डिडक्टरों को "ग" लिखना है।
ञ. चालान/स्थानांतरण वाउचर (सीआईएन/बीआईएन) ब्यौरे यानी 310,311,312 एकदम वैसे ही होने चाहिए जैसा कर सूचना नेटवर्क में उपलब्ध है।
ट. कॉलम 313 में, गैर-महत्वपूर्ण शीर्षक को चालान पर चिन्हित करें।
ठ. जहां एक नियोक्ता एक कर्मचारी को दिए गए वेतन से कटौती करता है या अपनी ओर से उस कर्मचारी का किसी अंशदान किसी अनुमोदित पेंशन फंड में कोई अंशदान करता है तो ऐसी सभी कटौतियां या भुगतान ब्यौरे में शामिल होने चाहिए।
4.6.9 डिजिटल हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणीकरण
(i) जहां प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र जारी किया जाना है वहां निर्धारिती की पंसद के अनुसार ऐसे प्रमाणपत्रों के प्रमाणीकरण के लिए डिजिटल हस्ताक्षरों का प्रयोग किया जा सकता है।
(ii) वाक्यांश (i) के अंतर्गत प्रमाणपत्र की स्थिति में कटौतीकर्ता को सुनिश्चित करना चाहिए कि —
(क) उक्त पैरा 4.6.1 में निर्दिष्ट शर्तें अनुपालन में है;
(ख) एक बार प्रमाणपत्र के डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित हो जाने के पश्चात् प्रमाणपत्र की सामग्री परिवर्तनयोग्य नहीं होगी; तथा
(ग) ऐसे प्रमाणपत्रों का लाग तथा नियंत्रण संख्या निर्धारिती द्वारा नियंत्रित की जाएगी।
डिजिटल हस्ताक्षरों का प्रयोग इंटरनेट पर अधिकतर ई-हस्तांतरण के प्रमाणीकरण के लिए किया जा सकता है क्योंकि डिजिटल हस्ताक्षर का प्रयोग कर जानकारी का हस्तांतरण असुरक्षित हैं। यह समय की बचत करता है विशेषकर ऐसे संगठनों में जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद हैं क्योंकि हस्तरूपी कर कटौती वाले प्रमाणपत्र को जारी करने में काफी समय लगता है। (परिपत्र सं. 2, 2007 दिनांक 21.05.2007)
4.7 आवश्यक वस्तुओं आदि से संबंधित विवरणों का प्रस्तुतीकरण (धारा 192 (2ग) :
4.7.1 धारा 192(2ग) के अनुसार, शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूले जाने वाली आय को देने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति कर्मचारी को वेतन के स्थान पर रियायत या लाभ का सही और पूर्ण ब्यौरा देने के लिए जिम्मेदार होगा। ऐसे विवरणों का रूप और प्रारूप के नियम 26क, यानी प्रपत्र 12खक (अनुलग्नक II के तौर पर स्थापित) तथा प्रपत्र 16 में निर्दिष्ट किए गए हैं। रियायत, अन्य मामूली राहत या रियायत और वेतन के स्थान पर लाभ से संबंधित प्रक्रिया तथा मूल्य की जानकारी प्रपत्र 12खक में नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी यदि दी गई अथवा दिए जाने वाला वेतन रू. 1,50,000/- से अधिक हो तो। अन्य मामलों में, जानकारी नियोक्ता द्वारा स्वयं प्रपत्र 16 (भाग ख) में नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।
यह ध्यान दिया जा सकता है कि प्रपत्र 12खक को उस कर्मचारी को प्रपत्र 16 के अतिरिक्त प्रस्तुत किया जाना है जिसका वेतन एक लाख पचार हजार रूपए से अधिक हो।
4.7.2 नियोक्ता, जो इस परिपत्र के पैरा 3.2 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार कर्मचारी की ओर से पूर्वाकांक्षित पर कर अदा करता है, को ऐसे संबंधित कर्मचारी को प्रमाणपत्र जारी करना होगा जो केंद्र सरकार को कर का भुगतान करता हो तथा भुगतान की गई राशि, ऐसी दर पर भुगतान किया गया हो तथा जिस पर संशोधित प्रपत्र 16 में कुछ अन्य विवरण हो, को निर्दिष्ट किया हो।
4.7.3 कर्मचारी को मुहैया कराए जाने वाली रियायत की राशि को दर्शाते हुए ब्यौरे के प्रस्तुतीकरण के लिए धारा 192 (2ग) के अंतर्गत नियोक्ता को दी गई जिम्मेदारी को निभाना नियोक्ता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है जो उनके तहत बनाए गए कानून तथा नियमों के मूल्यांकन के अनुसार निवर्हनीय है। कोई भी असत्य जानकारी, जाली दस्तावेज अथवा पूर्वाकांक्षित संबंधित जानकारी छिपाने की स्थिति में कानून के तहत अपरिहार्य परिणामों के लिए उत्तरदायी होगा। प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्रों को उस वित्त वर्ष के तुरंत बाद के वित्त वर्ष के 15 जून तक कर्मचारी को प्रस्तुत किया जाएगा जिसमें आय का भुगतान किया गया और कर कटौती की गई। 2021 के परिपत्र सं. 12 दिनांक 25 जून, 2021 के माध्यम से कर्मचारी को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए प्रपत्र 16 की प्रस्तुति की अंतिम तिथि को 31.07.2021 तक बढ़ा दी गई है। कर्मचारी को प्रपत्र 12खक निर्धारण वर्ष के 30 अप्रैल तक प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यदि शीर्षक वेतन के अंतर्गत वसूले जाने वाली किसी आय को देने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति और उसके बाद प्रपत्र 12खक और प्रपत्र 16 के अंतर्गत ब्यौरा देने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति, जो भी हो, संबंधित व्यक्ति को इन प्रमाणपत्रों को जारी करने में विफल रहता है, जैसा धारा 192(2ग) द्वारा आवश्यक है, तो वह धारा 272क(2)(i) के अंतर्गत जुर्माने के तौर पर प्रतिदिन जबतक विफलता जारी रहती है, के लिए रू. 100/- देगा।
4.7.4 डीडीओ को धारा 192 (2घ) के अंतर्गत निर्धारित दावे (हानि के निर्धारण के लिए दावे सहित) के प्रमाण अथवा ब्यौरे के सबूत को प्राप्त करने में सक्षम है
डीडीओ को कथित धारा के अंतर्गत कटौतीयोग्य कर की राशि की गणना अथवा निर्धारिती की आय के अनुमान के उद्देश्य के लिए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कुछ हानि को निर्धारित अथवा कुछ कटौती, छूट अथवा भत्तों को स्वीकृत करने हेतु धारा 192 के अंतर्गत प्राधिकृत किया गया है। कर्मचारी द्वारा दावा किए गए कुछ कटौतियां/छूट/भत्ते/हानि निर्धारण के लिए प्रमाण/सबूत/ब्यौरे जैसे एचआरए में कटौती के दावे के लिए किराया प्राप्ति, स्व: अधिकृत गृह संपत्ति आदि, से हानि का दावा डीडीओ हेतु उपलब्ध नहीं है। इस मामले में निश्चितता तथा एकरूपता लाने के लिए, धारा 192(2घ) मुहैया कराती है कि भुगतान (डीडीओ) के लिए उत्तदायी व्यक्ति निर्धारिती प्रमाण या प्रमाण या विशेष दावों के शीर्षक "गृह संपत्ति से आय" के अंतर्गत जैसे गृह किराया भत्ता (जहां कुल वार्षिक किराया एक लाख रूपए से अधिक है) अवकाश यात्रा रियायत या सहायता के प्रमाण को प्राप्त करेगा और नियमों के नियम 26ग द्वारा निर्धारित निर्धारित प्रपत्र 12खख के अनुसार अध्याय VI-क के अंतर्गत कटौती होगी। प्रपत्र 12खख अनुलग्नक IIक के अनुसार संलग्न है।
4.8 पैन या आधार नंबर, जो भी हो, और टैन का अनिवार्य उद्धृतीकरण
4.8.1 अधिनियम की धारा 203क स्रोतों से कर कटौती के लिए सभी उत्तरदायी व्यक्तियों के लिए यह अनिवार्य करता हैं कि वह चालान, टीडीएस-प्रमाणपत्र, ब्यौरे तथा अन्य दस्तावेजों में कर कटौती और संग्रहण खाता सं. (टैन) को प्राप्त और उद्धृत करें। इस संबंध में ब्यौरेवार निर्देश इस विभाग के परिपत्र सं. 497 (एफ. सं. 275/118/87-आईटी(ख) दिनांक 9.10.1987) में उपलब्ध है। यदि कोई व्यक्ति धारा 203क के अंतर्गत इसका अनुपालन नहीं करता है तो वह धारा 272 खख के अंतर्गत कुल दस हजार रूपए के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा। इसी प्रकार धारा 139क(5ख) के अनुसार स्रोतों से कर देने वाले सभी व्यक्तियों के लिए यह अनिवार्य है कि उन व्यक्तियों, जिनका आयकर धारा 192(2ग) के अंतर्गत प्रस्तुत ब्यौरे, धारा 203 कें अंतर्गत प्रस्तुत प्रमाणपत्रों तथा अधिनियम की धारा 200(3) के प्रावधानों के अनुसार तैयार तथा प्रेषित सभी ब्यौरों, में कटौती की गई हैं।
4.8.2 सभी करदाताओं को प्रपत्र सं. 24थ (वेतन से की गई कर कटौती) में टीडीएस ब्यौरे को दाखिल करना होगा। क्योंकि आय की विवरणी सहित टीडीएस प्रमाणपत्रों को भरने की आवश्यकता को पूरी तरह साथ किया गया है इसलिए कटौतीदाताओं के पैन या आधार नंबर, जो भी हो, की कमी कर देने वालों के लिए ऋण देते समय समस्या उत्पन्न करते हैं। इसलिए कर कटौतीदाताओं को सलाह दी जाती है कि वह प्रपत्र 24थ में वेतन के लिए टीडीएस ब्यौरे में सभी डिडिक्टी के पैन या आधार नंबर, जो भी हो, प्राप्त तथा उद्धृत करें। करदाताओं को अपने कटौतीदाताओं अपने सही पैन या आधार नंबर, जो भी हो को प्रस्तुत करना अनिवार्य है। कटौतीदाता (नियोक्ता) को कटौती करवाने वाले (कर्मचारी) द्वारा पैन या आधार नंबर, जो भी हो न प्रस्तुत करने पर नीचे दिए गए पैरा 4.8 में निर्दिष्ट अधिनियम की धारा 206कक के अनुसार उच्च दर पर टीडीएस काटने का अधिकार है।
4.9 कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुति की अनिवार्यता (धारा 206कक) :
4.9.1 अधिनियम में धारा 206कक के अनुसार आय अथवा राशि जिस पर कर कटौतीयोग्य है, की किसी भी कुल प्राप्ति की स्थिति में कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यदि कर्मचारी (कटौती कराने वाला) कटौतीदाता को अपना पैन प्रस्तुत करने में असफल होता है तो कारदाता को निम्न उच्च दरों के हिसाब से टीडीएस कटाने का अधिकार होगा :—
(i) इस अधिनियम के प्रसांगिक प्रावधानों में निर्दिष्ट दरों पर; अथवा
(ii) प्रवृत्त दर अथवा दरों पर; अथवा
(iii) बीस प्रतिशत की दर पर
4.9.2 कटौतीदाता को समस्त तीन शर्तों में कर राशि को निर्धारित करना है तथा टीडीएस की उच्चतम दर को लागू करना है। हालांकि, जहां धारा 192 के अंतर्गत टीडीएस के लिए आंकी गई कर्मचारी की आय करयोग्य सीमा से कम होती है तो किसी कर की कटौती नहीं की जाएगी। लेकिन जहां धारा 192 के अंतर्गत टीडीएस के लिए आंकी गई कर्मचारी की आय कराधान से अधिक होती है तो कटौतीदाता धारा 192 में मुहैया कराए गए अनुसार प्रवृत्त दरों पर आधारित कर की आय की औसत दर की गणना करेगा। यदि ऐसा आंका गया कर 20 प्रतिशत से कम होता है तो कर की कटौती 20 प्रतिशत की दर पर की जाएगी तथा यदि औसत दर 20 प्रतिशत से अधिक होता है तो कर औसत दर पर आंका जाना है।
4.10 धारा 200(3) कें अंतर्गत कर कटौती का विवरण (टीडीएस का त्रैमासिक ब्यौरा)
4.10.1 कर कटौती (वेतनमान की स्थिति में नियोक्ता) करने वाले व्यक्ति को प्रत्येक वित्त वर्ष की अवधि (विवरण नीचे तालिका में) के लिए प्रपत्र 24थ में टीडीएस के त्रैमासिक ब्यौरे के विधिवत सत्यापन को प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) द्वारा प्राधिकृत टिन सुविधा केद्रों पर जो वर्तमान में मैसर्स राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लि. (राष्ट्रीय प्रतिभूति निपेक्षागार लिमिटेड) द्वारा संचालित की जा रही है या कटौती करने वाले के तौर पर पंजीकरण के बाद www.incometaxindiaefiling.gov.in पर जमा करना आपेक्षित है। किसी भी टिन सुविधा केद्रों पर ई-टीडीएस मध्यस्त का ब्यौरा http://www.incometaxindia.gov.in तथा http://tin-nsdl.com पोर्टल पर उपलब्ध है। टीडीएस कीे वार्षिक विवरणी को भरने की अनिवार्यता पूरी तरह से प्रभावी तिथि 1.4.2006 तक हो जानी चाहिए। प्रपत्र 24थ (अधिसूचना सं. एस.ओ. 704(ई) दिनांक 12.5.2006) अंतिम तिमाही हेतु भरा हुए तिमाही ब्यौरा टीडीएस की वार्षिक विवरणी के तौर पर समझाा जाएगा। त्रैमासिक आधार पर इस ब्यौरे को भरने की नियत तिथि तालिका में निम्नानुसार हैं :—
तलिका : त्रैमासिक ई-टीडीएस विवरणी प्रपत्र 24थ के ब्यौरे को भरने की तिथि
| क्र.सं. | वित्त वर्ष की तिमाही की समाप्ति की तिथि | नियत तिथि |
| 1 | 30 जून | वित्त वर्ष की 31 जुलाई |
| 2 | 30 सितंबर | वित्त वर्ष का 31 अक्टूबर |
| 3 | 31 दिसंबर | वित्त वर्ष की 31 जनवरी |
| 4 | 31 मार्च | वित्त वर्ष जिसमें कटौती होती है के तुरंत बाद के वित्त वर्ष की 31 मई |
(टिप्पणी : आयकर नियमों के नियम 31क के अंतर्गत 31 मई 2021 को या उससे पहले प्रस्तुत की जाने के लिए वित्त वर्ष 2020-21 की अंतिम तिमाही के लिए कर कटौती का ब्यौरे को 2021 की परिपत्र सं. 9 दिनांक 20 मई, 2021 के द्वारा 30 जून, 2021 तक बढ़ाई गई थी जिसे 2021 के परिपत्र सं. 12 दिनांक 25 जून, 2021 के द्वारा 15 जुलाई, 2021 तक और आगे बढ़ाई गई थी)
4.10.2 प्रपत्र 24थ में ब्यौरे को आयकर महानिदेशक (पद्धति) द्वारा निर्दिष्ट प्रक्रियाओं, प्रारूप तथा मानदंडों के अनुसार इलैक्ट्रानिक प्रक्रिया के माध्यम सत्यापित के प्रपत्र 27क में ब्यौरे के सत्यापन सहित अथवा डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक अथवा प्रपत्र रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। ई-टीडीएस/डीसीएस ब्यौरे को प्रस्तुत करने के लिए प्रक्रिया अनुलग्नक VI में ब्यौरेवार दी गई है।
4.10.3 जहां डिडक्टर सरकारी कार्यालय हो या एक कंपनी का प्रधान अधिकारी या वह व्यक्ति हो जिसे तुरंत पहले के वित्त वर्ष में धारा 44कख के अंतर्गत अपने खातों को अंकेक्षित किया जाना आवश्यक है या वित्त वर्ष की किसी तिमाही के लिए ब्यौरे में कई डिडक्टी के रिकॉर्ड बीस या बीस से अधिक है तो डिडक्टर एक इलैक्ट्रानिक प्रक्रिया के माध्यम से सत्यापित या प्रपत्र 27क में ब्यौरे के सत्यापन के साथ या डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक तौर पर ब्यौरा प्रस्तुत करेगा [नियम 31क(3)]
4.11 अधिनियम की धारा 200(3) के अंतर्गत ब्यौरे को प्रस्तुत करने में चूक के लिए शुल्क :
अधिनियम की धारा 234ड़ के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति 1.07.2012 को अथवा के पश्चात् स्रोतों से कर के संबंध में धारा 200(3) में निर्दिष्ट समय के भीतर ब्यौरा देने अथवा देने के कारण को बताने में असफल रहता है तो शुल्क के तौर पर रू. 200/- प्रतिदिन जब तक यह प्रक्रिया जारी रहती है, भरने के लिए बाध्य होंगे। हालांकि, ऐसे शुल्क के लिए राशि कर, जिसके लिए स्रोतों से कर वसूला गया था, की राशि से अधिक नहीं होगा। यह शुल्क अनिवार्य होगा तथा ऐसे ब्यौरे की प्रस्तुती से पूर्व देना होगा।
4.12 टीडीएस ब्यौरे को दाखिल करने में होने वाली चूक का सुधार
डीडीओ पहले दिए गए ब्यौरे में प्रस्तुत जानकारी को अद्यतन, जोड़ने, हटाने अथवा किसी त्रुटि को सही करने के लिए सुधार वक्तव्य भी दे सकता है।
4.13 ब्यौरा प्रस्तुत करने में असफल अथवा गलत सूचना प्रस्तुति हेतु जुर्माना (धारा 271ज)
अधिनियम की धारा 271ज के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति 1.07.2012 को अथवा के पश्चात् स्रोतों से कर के संबंध में धारा 200(3) में निर्दिष्ट समय के भीतर अथवा गलत ब्यौरा देने अथवा देने के कारण को बताने में असफल रहता है तो जुर्माने के तौर पर कम से कम रू. 10,000/- जो रू. 1,00,000/- तक बढ़ाई जा सकती है, भरने के लिए बाध्य होगे। हालांकि, यदि व्यक्ति यह साबित कर दे कि उसने केंद्र सरकार के क्रेडिट को शुल्क तथा ब्याज, यदि हो, के साथ टीडीएस को भेजने के बाद ब्यौरा देने के लिए निर्धारित समय से एक वर्ष की अंतिम तिथि से पूर्व ऐसे ब्यौरे को वह भेज चुका था, तो उस पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। कर कटौती के ब्यौरे को तैयार करते समय, कटौतीदाता के लिए जरूरी है कि :
(i) ब्यौरे में खाता संख्या (टैन) का संग्रहण तथा उसका कर कटौती उद्धृत अनिवार्य;
(ii) कटौतीदाता के सरकारी (राज्य सरकार सहित) कार्यालय की स्थिति को छोड़कर ब्यौरे में उसकी स्थाई खाता संख्या (पैन) को उद्धवता अनिवार्य। सरकारी उद्धृता की स्थिति में "PANNOTREQD" को ई-टीडीएस ब्यौरे में उद्धृत किया जाना है।
(iii) सभी कटौतीकारों के पैन या आधार सं जो भी हो को उद्धृत करना अनिवार्य।
(iv) पुस्तक पहचान संख्या अथवा चालान पहचान संख्या जो भी स्थिति हो, सहित केंद्र सरकार को दिए जाने वाले कर के विवरण का प्रस्तुतीकरण।
(v) देय राषि अथवा क्रेटिड जिस पर प्रापक के आंकलन अधिकारी द्वारा धारा 197 के अंतर्गत कोई कटौती नहीं वाले प्रमाणपत्र के निगर्मन के अनुसार कर नहीं काटा गया, के विवरण का प्रस्तुतीकरण
4.14 पेंशन से आय पर टीडीएस
4.14.1 आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 17(1)(ii) के अनुसार, शब्द "वेतन" में पेंशन शामिल है। राष्ट्रीयकृत बैंक से पेंशन प्राप्त करने वाले, जो अपनी पेंशन (जीवनसाथी को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन नहीं) पेंशनकर्ताओ की स्थिति में इस परिपत्र में शामिल निर्देश उसी रूप में लागू होंगे जैसे वह वेतन-आय के मामले में लागू होतें है। जीवन बीमा, भविष्य निधि, एनएससी आदि के कारण धारा 80ग के अंतर्गत पेंशन की राशि से कटौती की स्वीकृति दी जा सकती है यदि पेंशनकर्ताओ बैंक को प्रासंगिक विवरण प्रस्तुत करेंगे। इस संबंध में आरबीआई पेंशन परिपत्र (केंद्रीय श्रृखंला) सं. 7/सी.डी.आर/1992 (संदर्भ सीओ: डीजीबीए: जीए (एनबीएस) सं. 60/जीए.64 (11सीवीएल)-/92) दिनांक 27 अप्रैल 1992 के मार्फत भारतीय रिर्जव बैंक द्वारा भारतीय स्टेट बैंक तथा अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों को आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं तथा सभी बैंकों, जिन्हें पेंशन के भुगतान के सुपुर्द किया गया है, की शाखाओं द्वारा इन निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।
4.14.2 अधिनियम की धारा 194प के अंतर्गत, निर्दिष्ट बैंक निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक की कुल आय की गणना करेगा और प्रभावी दरों पर आयकर की कटौती करेगा। धारा 194प के वाक्यांश (2) के अनुसार, धारा 139 के प्रावधान उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक के लिए लागू नही होंगे जिसके लिए कर कटौती की गई है। निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक को भारत में व्यक्तिगत निवासी के तौर पर परिभाषित किया गया है जिसकी वित्त वर्ष के दौरान किसी भी समय 75 वर्ष या उससे अधिक की आयु है और जो पेंशन के तौर पर अपनी आय प्राप्त करता है और उसी निर्दिष्ट बैंक जिसमें वह अपनी पेंशन आय प्राप्त करता हैं, में ऐसे व्यक्ति के किसी भी खाते से प्राप्त हुए या प्राप्त होने वाले ब्याज के तौर पर आय को छोड़कर अन्य कोई न हो। आगे, निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक को निर्दिष्ट बैंक को प्रपत्र 12खखक (नियम 26घ) में घोषणा प्रस्तुत करना आवश्यक है।
4.14.3 प्रपत्र सं. 12खखक में घोषणा विधिवत तौर पर सत्यापित कागजी प्रपत्र में प्रस्तुत की जानी है। निर्दिष्ट बैंक, अध्याय VI-क के अंतर्गत स्वीकार्य कटौती और धारा 87क के अंतर्गत स्वीकार्य छूट को प्रभावी करने के बाद, प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक की कुल आय की गणना करेगा और प्रभावी दरों के आधार पर ऐसी कुल आय पर आयकर की कटौती करेगा। अध्याय VI-क के अंतर्गत कटौती का दावा करने की घोषणा और प्रमाण निर्दिष्ट बैंक द्वारा उचित तौर पर अनुरक्षित हेागा और प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त या मुख्य आयकर आयुक्त के लिए उपलब्ध हेागा जैसा और जब आवश्यक हो।
[अधिसूचना सं. 99/2021/एफ.नं. 370142/11/2021-टीपीएल, दिनांक 02.09.2021]
4.14.4 एक निर्दिष्ट बैंक का अर्थ एक बैंकिंग कंपनी जो अनुसूचित बैंक है और जिसे भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 की 2) की धारा 45 के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बैंक के एजेंट के तौर पर नियुक्त किया गया है।
[अधिसूचना सं. 98/2021/एफ.नं. 370142/11/2021-टीपीएल दिनांक 02.09.2021]
4.15 गैर-निवासियों की स्थिति में किए जाने वाले टीडीएस से संबंधित मामले
4.15.1 अधिनियम की धारा 192 के अंतर्गत, शीर्षक वेतन के अंतर्गत वसूले जाने वाली किसी आय का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार कोई व्यक्ति भुगतान के समय दिए जाने वाली राशि पर आयकर की कटौती करेगा। यह धारा एक निवासी या अनिवासी को दिए गए वेतन के बीच अंतर नहीं करता। इसलिए, मुख्य आय के अंतर्गत करयोग्य सभी प्रकार के भुगतान प्राप्तकर्ता की अवासीय स्थिति के बावजूद टीडीएस की कटौती के लिए उत्तरदायी है।
4.15.2 गैर-निवासियों के संबंध भारत में की गई सेवा हेतु दिए जाने वाला वेतन भारत में कमाई जाने वाली आय के तौर पर मानी जाएगी। अधिनियम की धरा 9(1)(ii) में विशेष रूप से निर्दिष्ट हैं कि विश्राम अवधि अथवा अवकाश अवधि, इसमें भारत में पहली अथवा दूसरी जगह लेना तथा रोजगार के सेवा अनुबंध शामिल है, के लिए किसी भी प्रकार का वेतन भारत में कमाए जाने वाले वेतन के तौर पर समझा जाएगा।
4.15.3 गैर-निवासियों के भारत में काम करने तथा नियोक्ता, यदि पहले ही भारत छोड़ चुके होने की स्थिति में कर्मचारी की देय राशि, द्वारा कर वहन करने तथा आंकलन आदेश के पास होने के समय भारत के बैंक में कोई खाता न होने की स्थिति में प्रतिदाय नियोक्ता को जारी किया जा सकता है क्योंकि कर उसके द्वारा वहन किया गया है। (परिपत्र सं. 707 दिनांक 11.07.1995)
5. शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत आय की गणना
5.1 शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत आदेय आय
(1) निम्नलिखित आय, वेतन विषय के अंतर्गत आयकर के प्रति देययोग्य मानी जाएगी
(क) पिछले वर्षो के दौरान पूर्व नियोक्ता अथवा नियोक्ता की ओर से निर्धारिती को दिए जाने वाला शेष वेतन, चाहे भुगतान किया हो अथवा नहीं
(ख) नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता द्वारा या उनकी ओर से पिछले वर्षों के दौरान दिया गया अथवा उसे स्वीकृत किया गया वेतन जोकि उसके लिए नियत न हुआ हो अथवा नियत होने की स्थिति में हो
(ग) नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता के द्वारा अथवा उनकी ओर से पिछले सालों के दौरान किया गया वेतन का कोई बकाया भुगतान अथवा भुगतान के लिए स्वीकृत किया हुआ, यदि पिछले सालों के लिए आयकर न वसूला गया हो तो।
(2) संदेह को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि पहले से कोई भी दिया गया वेतन किसी भी पिछले साल के लिए किसी व्यक्ति की कुल आय में शामिल होगा तथा इसे उस व्यक्ति की कुल आय में शामिल नहीं किया जाएगा जब उसका वेतन देय होगा।
कोई भी वेतन पारितोषिक, छूट अथवा पारिश्रमिक जो भी नाम हो, कंपनी द्वारा कंपनी के हिस्सेदार द्वारा देय अथवा प्राप्त आय को "वेतन" के तौर पर नहीं समझा जाएगा।
5.2 नियम 3 के अनुसार रियायत की कीमत
उस कर्मचारी के लिए शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूले जाने वाली आय की गणना के लिए नियोक्ता की ओर से रियायत की कीमत कर्मचारी या कर्मचारी के किसी पारिवारिक सदस्य को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर आयकर नियम, 1962 के नियम 3 के आधार पर निर्धारिती की जाएगी। नियम 3 के प्रावधान इस प्रकार हैं :—
क. नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाली आवासीय सुविधा [नियम 3(1)] :—
आयकर नियम, 1962 के नियम 3 के अनुसार "भवन" में आवास, फ्लैट, फार्म हाउस अथवा उसका कोई भाग, होटल परिसर, मोटल, सर्विस अपार्ट्मेंट, अतिथि कक्ष, कारावैन, मोबाइल घर, जहाज अथवा अन्य तैरने वाला ढ़ांचा शामिल हैं। नियोक्ता की विभिन्न श्रेणियों द्वारा दिए गए गैर-सुसज्जित, सुसज्जित या होटल अकोमोडेशन के लिए रियायत की राशि का ब्यौरा नीचे दिया गया है :—
(क) किराया मुक्त असुसज्जित अकोमोडेशन : अकोमोडेशन को दो श्रेणियों में बांटा गया है :
(i) केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा दिया गया अकोमोडेशन :
रियायत की राशि केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की गई लाईसेंस शुल्क के बराबर होगी चूंकि इसे कर्मचारी द्वारा दिए गए वास्तविक किराये द्वारा घटाया गया है।
(ii) अकोमोडेशन किसी अन्य नियोक्ता द्वारा दिया गया हो:
अकोमोडेशन के संबंध में रियायत की कीमत निर्धारित दरों पर होगी, जिसकी चर्चा नीचे की गई है
• जहां कर्मचारी को उपलब्ध किया जाने वाला भवन नियोक्ता द्वारा खरीदा गया है:
| क्र.सं. | 2001 जनगणना के अनुसार जनसंख्या वाले शहर | रियायत | |
| 1 | 25 लाख से अधिक | वेतन का 15 प्रतिशत | |
| 2 | 10 लाख से अधिक किंतु 25 लाख से कम | वेतन का 10 प्रतिशत | |
| 3 | अन्य स्थानों के लिए | वेतन का 7.5 प्रतिशत |
• जहां ऐसा उपलब्ध कराया गया भवन कर्मचारी द्वारा पट्टे/किराये पर लिया जाता है : रियायत की कीमत निम्न का न्यूनतम है :
(i) वेतन का 15 प्रतिशत या
(ii) नियोक्ता द्वारा दिया गया दिए जाने वाले पट्टे की वास्तविक राशि जिसे कर्मचारी द्वारा दिए गए वास्तविक किराये की राशि द्वारा घटाया गया हो।
नियम 3 के अंतर्गत रियायत की कीमत की गणना के लिए, शब्द "वेतन" में एक या एक से अधिक नियोक्ता, जो भी मामला हो, की ओर से वेतन, भत्ते, बोनस या मासिक तौर पर देययोग्य कमीशन या अन्यथा या अन्य कोई मौद्रिक भुगतान, चाहे जिस भी नाम से जाना जाए, शामिल है लेकिन इसमें निम्नलिखित शामिल नहीं है :
(क) मंहगाई भत्ता या मंहगाई वेतन जबतक यह संबंधित कर्मचारी के पेंशन या सेवानिवृत्ति लाभ की गणना करता है:
(ख) कर्मचारी के भविष्य निधि खाते में नियोक्ता का अंशदान;
(ग) भत्ते जो कर के भुगतान से मुक्त है;
(घ) आयकर अधिनियम की धारा 17 के वाक्यांश (2) में निर्दिष्ट रियायत की कीमत;
(ड़) धारा 17 के वाक्यांश (2) के परंतुक या वाक्यांश (2) के उप-वाक्यांश (iii) के परंतुक के अंतगत विशेष तौर पर बाहर रखे गए कोई भुगतान या व्यय
(च) सेवा समाप्ति के समय या सेवानिवृत्ति या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के समय प्राप्त एकमुश्त भुगतान जैसे ग्रेचुएटी, अलगाव वेतन, छुट्टी नकदीकरण, स्वैच्छिक छंटनी लाभ, पेंशन या इसी प्रकार के भुगतान
सभी नियोक्ता द्वारा वेतन अवधि, जिसमें भवन उपलब्ध कराया गया है, के संबंध में विचार किया जाएगा। जहां कर्मचारी के एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण की स्थिति में तैनाती के समय नए स्थान पर भवन सहित उपलब्ध कराया जाएगा जबकि दूसरे स्थान को बनाए रखने की स्थिति में रियायत की राशि ऐसे भवन जिसकी 90 दिनों से कम की अवधि के लिए कम से कम हो, की केवल संदर्भ सहित निर्धारित हो तथा उसके बाद रियायत की राशि ऐसे भवन के लिए वसूली जाएगी।
(ख) सुसज्जित अकोमोडेशन : अकोमोडेशन को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है :
(i) केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया गया अकोमोडेशन
रियायत की कीमत को असुज्जित अकोमोडेशन के लिए निर्धारित किया जाएगा और फर्नीचर (टीवी, रेडियो, फ्रिज अन्य घरेलू उपकरण, एयर कंडीशन प्लांट या उपकरण) की लागत के 10 प्रतिशत प्रति वर्ष से बढ़ाया जाएगा या यदि ऐसा फर्नीचर किसी तीसरी पार्टी से किराये पर लिया जाता है तो इसके लिए देययोग्य वास्तविक किराया शुल्क जिसे कर्मचारी द्वारा इसके लिए दिए गए या दिए जाने वाले किसी शुल्क द्वारा घटाया गया है।
(ii) किसी अन्य नियोक्ता द्वारा मुहैया कराया गया अकोमोडेशन
रियायत की कीमत को असुज्जित अकोमोडेशन के लिए निर्धारित किया जाएगा और फर्नीचर (टीवी, रेडियो, फ्रिज अन्य घरेलू उपकरण, एयर कंडीशन प्लांट या उपकरण या इसी प्रकार के उपकरण या गैजेट) की लागत के 10 प्रतिशत प्रति वर्ष से बढ़ाया जाएगा या यदि ऐसा फर्नीचर किसी तीसरी पार्टी से किराये पर लिया जाता है तो इसके लिए देययोग्य वास्तविक किराया शुल्क जिसे कर्मचारी द्वारा इसके लिए दिए गए या दिए जाने वाले किसी शुल्क द्वारा घटाया गया है।
आगे यह बताया जाता है कि एक कर्मचारी, जो किसी निकाय के साथ या ऐसी सरकार के नियंत्रण के अंतर्गत उपक्रम में प्रतिनियुक्ति पर है, को केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा दिए गए अकोमोडेशन
(i) ऐसे नियोक्ता के कर्मचारी को उस निकाय अथवा उपक्रम जहां वह प्रतिनियुक्ति आधार पर सेवारत हैं, के तौर पर समझा जाएगा।
(ii) ऐसे भवन की रियायत की राशि उक्त तालिका में क(ii)(क) के अनुसार गणना की जाने वाली राशि होगी, जहां तक नियोक्ता द्वारा भवन खरीदा गया है।
(ग) होटल के रूप में भवन प्रस्तुतीकरण: रियायत राशि निम्नलिखित दो के निम्नतर के आधार पर निर्धारित होगी
1. अवधि जिसमें भवन उपलब्ध कराया गया है के संबंध में दी गई अथवा देययोग्य वेतन का 24 प्रतिशत
2. ऐसे होटल हेतु दिया गया अथवा देययोग्य वास्तविक शुल्क
उस अवधि के लिए जिसके दौरान ऐसा अकोमोडेशन मुहैया कराया जाता है जिसे कर्मचारी द्वारा दिए गए या दिए जाने वाले वास्तविक किराये द्वारा घटाया जाता है।
हालांकि, उक्त पैरा ग) में कुछ भी करयोग्य नहीं होगा यदि होटल अकोमोडशन को एक स्थान से दूसरे स्थान के लिए एक कर्मचारी के स्थानांतरण पर अधिक से अधिक कुल 15 दिनों की कुल अवधि के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
यह स्पष्ट किया जाता है कि भवन के संपूर्ण भाग के तौर पर उपलब्घ कराई गई सेवा के दौरान, रियायत के तौर पर पृथक रूप से मूल्यांकित करने की आवश्यकता नहीं, अन्य सेवा के अतिरिक्त जिसके लिए नियोक्ता द्वारा कर्मचारी हेतु भुगतान अथवा प्रतिपूर्ति की गई है, बचत वाक्यांश के अनुसार रियायत के तौर पर मूल्यांकित की जाएगी। अन्य शब्दों में, भवन के लिए संपूर्ण कीमत नियमों के अनुसार मूल्यांकित की जाएगी तथा होटल द्वारा उपलब्ध कराई गई अन्य सुविधाओं के लिए अन्य शुल्क बचत वाक्यांश के अंतर्गत पृथक रूप से मूल्यांकित की जाएगी।
(घ) हालांकि, खनन स्थल अथवा तटवर्ती तेल अन्वेषण स्थल अथवा परियोजना क्रियान्वयन स्थल अथवा बांध स्थल अथवा ऊर्जा उत्सर्जन स्थल अथवा तटवर्ती स्थल पर कार्यरत कर्मचारी को उपलब्ध कराए गए किसी भवन की राशि रियायत के तौर पर नहीं समझी जाएगी यदि :
(i) ऐसा अकोमोडेशन "दूरदराज के इलाके" में स्थित हो या
(ii) अकोमोडेशन अस्थाई प्रकार के भवन का चबूतरे वाला क्षेत्र 800 वर्ग फीट से अधिक नहीं होना चाहिए तथा किसी भी नगरपालिका अथवा छावनी की स्थानीय सीमा के तहत 8 किलोमीटर के भीतर नहीं होना चाहिए।
एक "दूरदराज के इलाके" से अर्थ है नवीनतम प्रकाशित अखिल भारतीय जनगणना के अनुसार अधिक से अधिक 20,000 की जनसंख्या वाले एक शहर से दूर कम से कम 40 किलोमीटर में स्थित क्षेत्र.।
ख. नियोक्ता द्वारा रियायत पर उपलब्ध कराई जाने वाली मोटर कार [नियम 3(2)] :
(I) यदि एक नियोक्ता अपने कर्मचारी को मोटर कार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है तो ऐसी रियायत की कीमत को निम्नानुसार निर्धारित किया जाएगा :
(क) यदि कर्मचारी द्वारा कार का प्रयोग पूर्णता और केवल उसके द्वारा कार्यालय संबंधी कार्यो की लिए की जाए तो रियायत की कीमत को शून्य के तौर पर समझा जाएगा। हालांकि, निम्नलिखित अनुपालन आवश्यक हैं :
➢ नियोक्ता ने की गई यात्रा का पूर्ण ब्यौरा रखा हो जिसमें यात्रा, गंतव्य, माईलेज और आधिकारिक उद्देश्य के लिए उसपर किए गए व्यय की राशि शामिल हो सकती है;
➢ नियोक्ता प्रमाण देता है कि आधिकारिक कार्यों का करने के लिए पूर्णता या विशेष तौर पर व्यय किया गया था.।
(ख) यदि मोटर कार विशेष तौर पर कर्मचारी के या उसके घर के किसी सदस्य के निजी या प्राईवेट कार्य के लिए है तो रियायत की कीमत चालक को नियोक्ता द्वारा दिए गए पारिश्रमिक, यदि हो सहित मोटर कार को चलाने और उसके रखरखाव पर नियोक्ता द्वारा किए गए वास्तविक व्यय भी शामिल हैं जिसे मोटर कार (मोटर कार की वास्तविक लागत के 10 प्रतिशत प्रति वर्ष) की सामान्य मरम्म्त की राशि द्वारा बढ़ाया जाएगा और ऐसे प्रयोग के लिए नियोक्ता से वसूली गई किसी राशि से घटाया जाएगा।
(ग) यदि मोटर कार कर्मचारी या उसके घर के किसी सदस्य के लिए आंशिक तौर पर कार्य करने और आंशिक तौर पर निजी या प्राईवेट उद्देश्यों के लिए प्रयोग की जाती है; और
➢ मोटर कार की मरम्मत और उसे चलाने पर किए गए व्यय नियोक्ता द्वारा किए जाते हैं या प्रतिपूर्ति की जाती है। वहां मोटर कार की रियायत की राशि प्रति महीने रू. 1800/- (साथ ही रू. 900/- होगी यदि चालक की सुविधा भी दी जाती है) होगी जहां मोटर कार के इंजन की क्षमता 1.6 लीटर से अधिक न हो। हालांकि, रियायत की राशि प्रति महीने रू. 2400/- (साथ ही रू. 900/- होगी यदि चालक की सुविधा भी दी जाती है) यदि मोटर कार के इंजन की क्षमता 1.6 लीटर हो।
➢ ऐसे निजी या प्राईवेट प्रयोग के लिए मोटर कार की मरम्मत और उसे चलाने पर किए गए व्यय कर्मचारी द्वारा पूर्णता दिए जाते हैं। वहां मोटर कार की रियायत की राशि प्रति महीने रू. 600/- (साथ ही रू. 900/- होगी यदि चालक की सुविधा भी दी जाती है) होगी जहां मोटर कार के इंजन की क्षमता 1.6 लीटर से अधिक न हो। हालांकि, रियायत की राशि प्रति महीने रू. 900/- (साथ ही रू. 900/- होगी यदि चालक की सुविधा भी दी जाती है) यदि मोटर कार के इंजन की क्षमता 1.6 लीटर से अधिक हो।
(II) यदि मोटर कार नियोक्ता की है लेकिन नियोक्ता उसके वास्तविक संचालन और रखरखाव संबंधी शुल्क (चालक, यदि हो, के पारिश्रमिक सहित) पूरे करता है; और
(क) ऐसी प्रतिपूर्ति पूर्णता या विशेष तौर पर आधिकारिक कार्यों के लिए है तो रियायत की राशि शून्य होगी। हालांकि, निम्नलिखित अनुपालन आवश्यक है :
➢ नियोक्ता ने की गई यात्रा का पूर्ण ब्यौरा रखा हो जिसमें यात्रा, गंतव्य, माईलेज और आधिकारिक उद्देश्य के लिए उसपर किए गए व्यय की राशि शामिल हो सकती है
➢ नियोक्ता प्रमाण देता है कि आधिकारिक कार्यों का करने के लिए पूर्णता या विशेष तौर पर व्यय किया गया था
(ख) ऐसा पारिश्रमिक कर्मचारी या उसके घर के किसी सदस्य के आंशिक तौर पर आधिकारिक उद्देश्य के लिए और आंशिक तौर पर निजी या प्राईवेट उपयोग के लिए दिया जाता है, रियायत की राशि नियोक्ता द्वारा किए गए वास्तविक व्यय की राशि होगी जिसे मोटर कार के लिए प्रति महीने रू. 1800/- (साथ ही रू. 900/- होगी यदि चालक की सुविधा भी दी जाती है) द्वारा घटाए है जहां मोटर कार के इंजन की क्षमता 1.6 लीटर से अधिक न हो और यदि मोटर कार के इंजन की क्षमता 1.6 लीटर से अधिक हो तो उसे प्रति महीने रू. 2400/- (साथ ही रू. 900/- होगी यदि चालक की सुविधा भी दी जाती है) तक घटाई जाएगी। हालांकि निम्नलिखित शर्तें आवश्यक है :
➢ नियोक्ता ने की गई यात्रा का पूर्ण ब्यौरा रखा हो जिसमें यात्रा, गंतव्य, माईलेज और आधिकारिक उद्देश्य के लिए उसपर किए गए व्यय की राशि शामिल हो सकती है
➢ नियोक्ता प्रमाण देता है कि आधिकारिक कार्यों को करने के लिए पूर्णता या विशेष तौर पर व्यय किया गया था।
(III) जहां नियोक्ता द्वारा अन्य कोई मोटर वाहन सुविधा दी जाती हो लेकिन वास्तविक मरम्मत और संचालन संबंधी व्यय नियोक्ता द्वारा पूरे या भरे जाते हों तो कर पर कोई रियायत नही वसूली जाएगी यदि वाहन का पूर्णता या विशेष तौर पर प्रयोग आधिकारिक उद्देश्यों के लिए हो। हालांकि, यदि प्रतिपूर्ति वाहन के प्रयोग के लिए आंशिक तौर पर आधिकारिक उद्देश्य के लिए या आंशिक तौर पर निजी उद्देश्यों के लिए हो तो रियायत की राशि नियोक्ता द्वारा की गई वास्तविक व्यय होगी जिसे रू. 900 तक घटाया जाएगा। दोनों मामलों में निम्नलिखित अनुपालन आवश्यक है :
➢ नियोक्ता ने की गई यात्रा का पूर्ण ब्यौरा रखा हो जिसमें यात्रा, गंतव्य, माईलेज और आधिकारिक उद्देश्य के लिए उस पर किए गए व्यय की राशि शामिल हो सकती है;
➢ नियोक्ता प्रमाण देता है कि आधिकारिक कार्यों का करने के लिए पूर्णता या विशेष तौर पर व्यय किया गया था ।
(IV) यदि जहां नियोक्ता के पास एक या एक से अधिक मोटर कार है या उसे किराये पर लिया हुआ है और कर्मचारी या उसके परिवार के किसी सदस्य को ऐसे मोटर वाहन या सभी में से किसी भी ऐसे मोटर वाहन का इस्तेमाल करने की अनुमति है (अपने कार्यों को पूर्णता या विशेष तौर पर करने को छोड़कर) तो रियायत की राशि एक कार के संबंध में गिनी गई राशि होगी मानो कि कर्मचारी को एक मोटर कार आंशिक तौर पर अपने कार्यों को करने और आंशिक तौर पर अपने निजी कार्यों को करने के लिए दी गई थी और अन्य कार या कारों के संबंध में गिनी गई राशि मानो कि उसे उसके निजी या प्राइवेट उद्देश्यों के लिए ऐसी कार दी गई थी।
मोटर कार की सामान्य मरम्मत मोटर वाहन की वास्तविक लागत का 10 प्रतिशत प्रति वर्ष होगी।
(ग) निजी परिचारक आदि [नियम 3(3)] :
सफाईकर्मचारी, माली तथा चौकीदार सहित सभी निजी परिचारकों के लाभ की कीमत नियोक्ता की वास्तविक लागत होगी। जहां कर्मचारी के घर पर परिचारकों की सेवाएं मुहैया कराई जाती हैं वहां उसके द्वारा प्रतिपादित की जा रही निजी सुविधा की एवज में कर्मचारी के हाथ में आने वाली रियायत के तौर पर पूरी राशि पर कर लगाया जाएगा। ऐसी सुविधा अथवा सेवा के लिए कर्मचारी द्वारा किसी प्रकार की देय राशि उक्त राशि से वसूली जाएगी।
(घ) घर में प्रयोग होने वाली गैस,बिजली अथवा पानी [नियम 3(4)] :
गैस, बिजली तथा पानी के रूप में दिए जाने वाले लाभ की कीमत नियोक्ता द्वारा गैस, बिजली अथवा पानी मुहैया कराने वाली एजेंसी को दी गई राशि होगी। जहां आपूर्ति नियोक्ता के स्वयं के स्रोत से की जाती हो वहां नियोक्ता द्वारा वहन की जा रही प्रति ईकाई शुल्क रियायत के तौर पर विचारनीय होगी। ऐसी किसी सुविधा अथवा सेवा के लिए कर्मचारी द्वारा दी गई राशि रियायत राशि से घटाई जाएगी।
(ड़) निशुल्क अथवा रियायती शिक्षा [नियम 3(5)] :
कर्मचारी के परिवार के किसी भी पारिवारिक सदस्य के निशुल्क अथवा रियायती शिक्षा निम्नानुसार निर्धारित की जाएगी
➢ इस कारण से नियोक्ता द्वारा वहन किए गए खर्चे की राशि के बराबर राशि।
➢ जहां ऐसे शिक्षा संस्थान नियोक्ता द्वारा चलाए तथा संचालित हो अथवा जहां कर्मचारी के परिवार के किसी सदस्य के लिए निशुल्क मुहैया कराई गई शिक्षा उस पर नियोक्ता के यहां नौकरी करने के कारण किसी अन्य संस्थान में दी जाती है तो कर्मचारी की रियायत की राशि उसके इलाके में या उसके पास इसी प्रकार के संस्थान में ऐसी शिक्षा के शुल्क के संदर्भ में निर्धारित की जाएगी।
रियायत की राशि कर्मचारी द्वारा दिए गए अथवा वसूली गई राशि, यदि हो, तक सीमित की जाएगी।
यदि जहां शिक्षा संस्थान खुद नियोक्ता द्वारा चलाए या संचालित हो और कर्मचारी के बच्चों को निशुल्क शिक्षा सुविधा दी जाती हो या जहां नियोक्ता के यहां नौकरी करने के कारण किसी संस्थान द्वारा निशुल्क शिक्षा मुहैया कराई जाती है तो रियायत की राशि शून्य होगी यदि ऐसी शिक्षा की लागत अथवा ऐसे लाभ की लागत प्रति बालक 1000/- प्रतिमाह से अधिक न हो।
(च) यात्री सामान परिवहन नियम 3[6)] :
नियोक्ता, जो यात्री अथवा सामान के परिवहन में संलग्न हैं, निशुल्क अथवा रियायती दरों पर निजी अथवा व्यक्तिगत यात्रा के लिए कर्मचारी अथवा अपने पारिवार के किसी सदस्य के लिए, यात्री अथवा सामान के परिवहन के उद्देश्य के लिए ऐसे नियोक्ता द्वारा अन्य व्यवस्थाओं को उपलब्ध करा कर अथवा खरीद अथवा पट्टे पर लेकर, के प्रावधानों के अनुसार किसी भी लाभ अथवा सुविधा की राशि ऐसी राशि से वसूली जाएगी जो ऐसे किसी लाभ अथवा सुविधा के लिए कर्मचारी द्वारा वसूला अथवा भुगतित राशि, यदि हो तो, तक सीमित करने के अनुसार सामान्य जन को ऐसे नियोक्ता द्वारा ऐसा लाभ या सुविधा दी गई हो। यह किसी एयरलाइंस अथवा रेलवे के कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा।
(छ) ब्याज शुल्क अथवा रियायती ऋण [नियम 3(7)(i)]
कर्मचारी या उसके परिवार के किसी सदस्य के लिए ऐसे ब्याज मुक्त या रियायती ऋण से उत्पन्न होने वाली रियायत की राशि कर्मचारी या उसके परिवार के किसी सदस्य द्वारा वास्तव में दिए गए ब्याज, यदि हो, की तुलना में निर्धारित ब्याज दर पर से अधिक होगी। निर्धारित ब्याज दर जन सामान्य को भारतीय स्टेट बैंक द्वारा इसी प्रकार के ऋण और इसी उद्देश्य के लिए दिए गए उधार के संबंध में प्रासंगिक वित्त वर्ष के पहले दिन के अनुसार उनके द्वारा वार्षिक तौर पर वसूली जाने वाली दर होगी। रियायत की राशि अधिकतम बकाया मासिक शेष विधि के आधार पर आंकी जाएगी। इस नियम के अंतर्गत रियायत के आंकलन के लिए नियोक्ता द्वारा गणना तथा समायोजन के लिए अन्यथा अपनाई गई अन्य कोई विधि प्रासंगिक नहीं होगी। हालांकि कुल रू. 20,000/- तक के ऋण के लिए कोई राशि नही वसूली जाएगी।
नियम 3क में निर्दिष्ट बीमारियों के इलाज के लिए लिया गया ऋण भी छूटप्राप्त होगा बशर्ते चिकित्सा संबंधी प्रतिपूर्ति के लिए दी गई ऋण की राशि किसी बीमा योजना के तहत प्रतिपूर्ति न की गई हो। जहां कोई भी चिकित्सा बीमा प्रतिपूर्ति प्राप्त होती हैं वहां रियायत दर पर रियायत राशि प्रतिपूर्ति राशि पर प्रतिपूर्ति के तिथि को लिए गए बकाए ऋण के समक्ष वसूली जाएगी लेकिन विशेषरूप से इस उद्देश्य के लिए, लिए गए बकाए ऋण के समक्ष वसूला नहीं जाएगा।
(ज) अवकाश लाभांश हेतु नियोक्ता द्वारा यात्रा, पर्यटन, भवन तथा अन्य किसी अवकाश हेतु प्रतिपूर्ति अथवा भुगतान [नियम 3(7)(ii] :
कर्मचारी अथवा उसके अन्य किसी परिवार के सदस्य द्वारा किसी अवकाश के लाभ के लिए नियोक्ता द्वारा यात्रा, पर्यटन, भवन तथा अन्य देय खर्चों अथवा प्रतिपूर्ति के कारण, छुट्टी यात्रा रियायत या सहायता (धारा 10 के वाक्यांश 5 के अनुसार) को छोड़कर, इस कारण से नियोक्ता द्वारा वहन किए गए व्यय की राशि होगी। हालांकि, कर्मचारी से किसी प्रकार का वसूला अथवा खर्च की गई राशि निर्धारित रियायत राशि तक सीमित होगी।
जहां नियोक्ता द्वारा ऐसी सुविधाएं दी जाती हो तथा यह सभी कर्मचारियों के लिए एक समान रूप से उपलब्ध न हो तो लाभ की राशि ऐसी राशि से ली जाएगी जिस पर ऐसी सुविधाएं जनता को अन्य एजेंसियों द्वारा दी जाती हों।
जहां कर्मचारी आधिकारिक दौरे पर हो तथा उसके किसी परिवार के सदस्य के संबंध में खर्चे उसके द्वारा वहन किए गए हों, परिवार के संबंधित सदस्य के संबंध में व्यय की राशि रियायत के तौर पर मानी जाएगी।
जहां कर्मचारी आधिकारिक यात्रा पर हो जो अवकाश के तौर पर परिवर्तित हो, ऐसे मामूली लाभ की कीमत रहने या छुट्टी की ऐसी बढ़ाई गई अवधि के संबंध में किए गए व्यय तक सीमित होगी जिसे ऐसी रियायत के लिए कर्मचारी से वसूला जाएगा या दी गई कीमत तक घटाया जाएगा।
(झ) नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को मुहैया कराए गए सस्ते/निशुल्क खाद्य सामग्री/गैर-मादक पेय पदार्थ (नियम [3(7)(iii)] :
एक नियोक्ता द्वारा एक कर्मचारी को दिए गए निशुल्क भोजन और गैर-मादक पेय पदार्थों की कीमत ऐसे नियोक्ता द्वारा किए गए व्यय की राशि होगी जिसे कर्मचारी से दी गई राशि या वसूली गई राशि से घटाया गया हो
निम्नलिखित के लिए कीमत को शून्य समझा जाएगा :
(क) कार्यालय या व्यापारिक परिसर में कार्य करने के दौरान प्रदान किया गया या पेड वाउचर जो हस्तांतरणीय न हो और जो खाने की जगहों पर ही प्रयोग के लिए हो, द्वारा उस सीमा तक प्रदान किया गया निशुल्क भोजन और गैर-मादक पेय पदार्थ जहां उसकी कीमत प्रति मील पचास रूपए से अधिक न हो, या
(ख) कार्य करने के घंटों के दौरान प्रदान किया गया चाय या नाश्ता
(ग) दूर दराज के इलाकों या विदेशी संस्थानों में कार्य करने के घंटों के दौरान निशुल्क भोजन और गैर-मादक पेय पदार्थ
अधिसूचना सं. जी.एस.आर. 415(ई) दिनांक 26.06.2020 के द्वारा, कथित नियम को संशोधित किया गया है ताकि मुहैया किया जा सके कि अधिनियम की धारा 115खकग के अंतर्गत रियायती कर व्यवस्था को चुनने वाले एक निर्धारिती के मामले में, पेड वाउचर के माध्यम से नियोक्ता द्वारा मुहैया कराए गए निशुल्क भोजन और गैर-मादक पेय पदार्थों के संदर्भ में दी गई छूट उपलब्ध नहीं होगी।
(ञ) उपहार [नियम 3(7)(iv)] :
किसी उपहार या वाउचर या टोकन की राशि जिसके स्थान पर ऐसा उपहार कर्मचारी या उसके घर के किसी सदस्य को दिया जाता सकता है वह ऐसे उपहार की राशि के बराबर होगा। हालांकि, यदि उपहार आदि प्रति वर्ष कुल रू. 5000/- की कीमत से कम है तो रियायत की कीमत शून्य होगी।
(ट) सदस्यता शुल्क तथा वार्षिक शुल्क [नियम 3(7)(v)] :
कर्मचारी (अथवा उसके किसी परिवार के सदस्य को) द्वारा वहन किया गया कोई भी सदस्यता शुल्क तथा वार्षिक शुल्क, जो नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए क्रेटिड कार्ड (किसी भी अतिरिक्त कार्ड सहित) अथवा अन्यथा, नियोक्ता द्वारा भुगतान अथवा प्रतिपूर्ति हेतु हो, द्वारा वसूला गया हो, निम्नलिखित आधार पर करयोग्य होगा :
| नियोक्ता द्वारा वहन किया गया व्यय | XXX | ||
| कम : आधिकारिक उद्देश्यों के लिए व्यय | XXX | ||
| कम : कर्मचारी से वसूली गई राशि, यदि हो, | XXX | XXX | |
| रियायत के तौर पर देययोग्य राशि | XXX |
हालांकि, राशि पूर्णता तथा केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए वहन की गई तो यह छूटयोग्यनीय होगी यदि निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाए
(i) खर्चों के प्रकार तथा तिथि सहित ऐसे खर्चों का पूर्ण ब्यौरा नियोक्ता द्वारा सुरक्षित रखा जाएगा।
(ii) नियोक्ता को प्रमाणपत्र देना होगा कि यह पूर्णता तथा केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए वहन किया गया था।
(ढ) क्लब व्यय [नियम 3(7)(vi)]
एक क्लब में कर्मचारी (या उसके घर के किसी सदस्य द्वारा) द्वारा किए गए किसी प्रकार के व्यय (वार्षिक और आवधिक शुल्क सहित) के लिए नियोक्ता द्वारा किए गए प्रतिपूर्ति या भुगतान के लिए रियायत की कीमत वह राशि होगी जिसे नियोक्ता द्वारा दिया जाता है या प्रतिपूर्ति की जाती है जिसे कर्मचारी की ओर से दिए गए या वसूली गई राशि द्वारा घटाया गया हो।
नियोक्ता द्वारा कार्पोरेट सदस्यता के मामले में, रियायत की कीमत में ऐसी कार्पोरेट सदस्यता को प्राप्त करने के लिए दिए गए प्रारंभिक शुल्क शामिल नही होंगें।
हालांकि राशि पूर्णता तथा केवल व्यापारिक उद्देश्यों के लिए वहन की गई तो यह छूटयोग्यनीय होगी यदि निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाएगा
(i) ऐसे खर्चों का पूर्ण ब्यौरा, व्यय के प्रकार तथा तिथि सहित तथा इनका व्यापार संबंधी मुनाफा नियोक्ता द्वारा सुरक्षित रखा जाएगा।
(ii) नियोक्ता को प्रमाणपत्र देना होगा कि यह पूर्णता तथा केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए वहन किया गया था।
टिप्पणी : नियोक्ता द्वारा सभी श्रेणी के कर्मचारियों को समान रूप से स्वास्थ्य क्लब, खेलकूद संबंधी सुविधाएं आदि का प्रयोग करना कर मुक्त है।
(त) संपत्तियों का प्रयोग [नियम 3(7)(vii)] :
नियोक्ता की एक चल संपत्ति (लैपटॉप और कम्प्यूटरों और जो नियम 3 के अन्य उप-नियम 3 में संदर्भित है, को छोड़कर) की रियायत की कीमत और जिसे कर्मचारी या उसके परिवार के किसी सदस्य के द्वारा प्रयोग किया जाता है उसे नियोक्ता द्वारा दिए गए/दिए जाने वाली राशि या परिसंपत्ति की वास्तविक लागत के 10 प्रतिशत पर गिना जाएगा जिसे ऐसे प्रयोग के लिए कर्मचारी से वसूले गए किसी शुल्क द्वारा घटाया है।
(थ) संपत्ति का स्थानांनरण [नियम 3(7)(viii)] :
नियोक्ता की किसी चल संपत्ति को कर्मचारी या उसके परिवार के किसी सदस्य को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर स्थानांतरण से अर्जित रियायत की राशि निम्नलिखित द्वारा घटाई गई नियोक्ता की ऐसी परिसंपत्ति की वास्तविक लागत होगी :
(क) ऐसे प्रत्येक वर्ष के लिए 10 प्रतिशत की दर पर साधारण मरम्मत की लागत जिसके दौरान उस परिसंपत्ति को प्रयोग के लिए रखा हो और आगे
(ख) ऐसे स्थानांतरण के लिए शशि के तौर पर कर्मचारी द्वारा वसूली या दी गई राशि।
टिप्पणी : कम्प्यूटर और इलैक्ट्रानिक मदों के लिए मरम्मत की दर 50 प्रतिशत है और मोटर कार के लिए 20 प्रतिशत है (घटाए गई शेष राशि विधि द्वारा गणना)
(ण) रियायत की कीमत [नियम 3(7)(ix)] :
नियोक्ता द्वारा मुहैया कराए गए अन्य किसी प्रकार के लाभ या सुविधा, सेवा, अधिकार या विशेषाधिकार की कीमत निष्पक्ष लेनदेन के अंतर्गत नियोक्ता को लागत के आधार पर निर्धारित की जाएगी जिसे कर्मचारी अंशदान द्वारा घटाया गया हो। यदि यह नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के आधार पर किए गए मोबाइल फोन पर वास्तविक व्यय सहित टेलीफोन पर व्यय से संबंधित है तो राशि शून्य होगी।
उक्त पैरा (क) से (थ) में, वाक्य "घर" में शामिल होगा
(क) जीवनसाथी
(ख) बच्चे और उनके जीवनसाथी
(ग) माता-पिता
(घ) नौकर और आश्रित
नियोक्ता द्वारा चिकित्सा प्रतिपूर्ति :
वित्त अधिनिमय, 2018 के द्वारा संशोधन के अनुसार, चिकित्सा प्रतिपूर्ति की कुल राशि धारा 17(2) के अंतर्गत रियायत के तौर पर लिया जाना है
आगे यह स्पष्ट किया जाता हैं कि रियायत संबंधी मूल्यांकन की विधि नियमों के नियम 3 तथा अधिनियम की धारा 17(2) के तहत दी गई है। कटौती कराने वाले कटौती की प्रक्रिया हेतु रियायत राशि के निर्धारण से पूर्व सावधानीपूर्वक उक्त प्रावधानों को देख सकते हैं।
इस संदर्भ में, दिनांक 25.06.2021 जारी प्रेस विज्ञप्ति के द्वारा कोविड-19 महामारी को देखते हुए, वित्त वर्ष 2019-20 और बाद के निर्धारण वर्षों के दौरान कोविड-19 के उपचार के लिए नियोक्ता या किसी अन्य व्यक्ति से एक करदाता द्वारा प्राप्त राशि के लिए आयकर संबंधी छूट देने की घोषणा की गई है। आगे, उसी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से, वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान एक व्यक्ति के नियोक्ता की ओर से उस व्यक्ति के पारिवारिक सदस्य द्वारा या कोविड-19 के कारण व्यक्ति की मृत्यु पर अन्य व्यक्ति की ओर से पूर्व अनुग्रह राशि हेतु आयकर संबंधी राहत मुहैया कराने की भी घोषणा की गई थी। यह छूट नियोक्ता की ओर से प्राप्त राशि के लिए किसी सीमा के बिना दी जाएगी और अन्य किसी व्यक्ति से प्राप्त राशि के लिए कुल रू. 10 लाख तक सीमित होगी। इस संदर्भ में कानूनी संशोधनों को वित्त विधेयक 2022 में प्रस्तावित किया गया है जो इस प्रकार से है :
राहत देने के लिए जैसाकि प्रेस विज्ञप्ति में निर्दिष्ट है, धारा 17 के वाक्यांश (2) को संशोधित और यह निर्दिष्ट करने के लिए परंतुक में नए उप-वाक्यांश को शामिल करने के लिए प्रस्ताव दिया गया है कि ऐसी शर्तें जिनको केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है, के संबंध में, कोविड-19 से संबंधित किसी बीमारी के संबंध में कर्मचारी के किसी सदस्य के चिकित्सा उपचार या इलाज पर उसके द्वारा किए गए वास्तविक व्यय के संबंध में नियोक्ता द्वारा दी गई राशि "रियायत" का महत्वपूर्ण हिस्सा नहीं होगी;।
आगे, धारा 56 की उप-धारा (2) के वाक्यांश (x) के परंतुक को संशोधित करने और परंतुक में दो नए वाक्यांश को शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है ताकि बताया जा सके कि —
(i) कोविड-19 से संबंधित किसी बीमारी के संबंध में व्यक्ति के खुद पर किए गए या उसके किसी सदस्य के चिकित्सा उपचार या इलाज पर उसके द्वारा किए गए वास्तविक व्यय के संबंध में किसी व्यक्ति की ओर से उसे प्राप्त हुई कोई राशि ऐसे शर्तों के अनुसार जिसे इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित किया जा सकता है, ऐसे व्यक्ति की आय नहीं होगी;
(ii) मृतक व्यक्ति के नियोक्ता की ओर से एक मृतक व्यक्ति के परिवार के एक सदस्य द्वारा प्राप्त कोई राशि (बिना किसी सीमा के) या उस सीमा तक किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों से प्राप्त कोई राशि जहां ऐसी राशि या कुल राशि दस लाख रूपए से अधिक न हो, जहां ऐसे व्यक्ति की मृत्यु का करण कोविड-19 से संबंधित बीमारी हो और भुगतान ऐसे व्यक्ति की मृत्यु से बारह महीनों के अंदर प्राप्त होती है और उन शर्तों के अनुसार जिसे इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित किया जा सकता है, ऐसे व्यक्ति की आय नही होगी।
आगे, यह बताने के लिए प्रस्ताव दिया गया है कि दोनों उक्त वाक्यांशों के लिए, एक व्यक्ति के संबंध में 'परिवार' का वही अर्थ होगा जिसे धारा 10 के वाक्यांश (5) के स्पष्टीकरण 1 में निर्दिष्ट किया गया है। यह संशोधन 1 अप्रैल, 2020 से पूर्वप्रभावी तौर पर स्थान लेंगे और निर्धारण वर्ष 2020-21 और उसके बाद के निर्धारण वर्षों के संबध में तद्नुसार लागू होंगे।
5.3 "वेतन" विषय के अंतर्गत शामिल न होने वाली आय (छूट) :
निम्नलिखित किसी भी वाक्यांश के तहत आने वाली कोई आय अधिनियम की धारा 192 के उद्देश्य हेतु वेतन से आय की गणना हेतु शामिल नहीं की जाएगी।
5.3.1 धारा 10(5) के अंतर्गत भारत में किसी भी स्थान पर (क) भारत में किसी स्थान पर अवकाश अथवा (ख) सेवा से सेवानिवृत्ति अथवा सेवा की समाप्ति के बाद, नियोक्ता अथवा अपने पूर्व नियोक्ता से अपने तथा अपने परिवार के सदस्य के लिए, प्रक्रिया के संबंध में, प्राप्त अथवा देय कोई यात्रा भत्ता अथवा सहायता की राशि नियमों के नियम 2ख में निर्धारित हैं।
इस वाक्यांश के उद्देश्य के लिए, व्यक्ति के संबंध में "परिवार" का अर्थ हैं :
(i) व्यक्ति का जीवनसाथी तथा बच्चे; तथा
(ii) व्यक्ति के माता-पिता, भाई तथा बहन अथवा इनमें से कोई, व्यक्ति पर पूर्णता अथवा मुख्य रूप से आश्रित
यह भी नोट किया जा सकता हैं इस वाक्यांश के अंतर्गत छूट की राशि किसी भी स्थिति में ऐसी यात्रा के उद्देश्य के लिए किए गए वास्तविक व्यय की राशि से अधिक नहीं होगी।
जैसाकि पैरा 4.6.5 में चर्चा की गई है, नियम 26ग के साथ पठित धारा 192 (2घ) डीडीआके के लिए छूट को देने से पहले अवकाश यात्रा रियायत या सहायता के लिए छूट का दावा करने के संबंध में विवरण/प्रमाण को प्राप्त करना अनिवार्य बनाती है जो कि कर्मचारी द्वारा प्रस्तुति के लिए प्रासंगिक प्रपत्र 12खख हो।
5.3.2 केंद्र सरकार, अथवा जैसी स्थिति हो, केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 अथवा संघ की सिविल सेवा के सदस्यों हेतु लागू अन्य किसी समान योजना के तहत अथवा रक्षा से संबंधित पदाधिकारी अथवा संघ ( ऐसे सदस्य अथवा हितधारक जो कथित नियम के तहत नहीं आते) के तहत सिविल पद अथवा अखिल भारतीय सेवा के सदस्य अथवा राज्य की सिविल सेवा के सदस्य अथवा राज्य के तहत सविल सेवा हितधारक अथवा स्थानीय प्राधिकरण के कर्मचारी अथवा पेंशन कोड के अंतर्गत प्राप्त होने वाली सेवानिवृत्ति अनुतोषिक के किसी भुगतान अथवा रक्षा सेवा के सदस्यों पर लागू होने वाले विनियमन के संशोधित पेंशन नियमों के अंतर्गत प्राप्त कोई मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति अनुतोषिक छूट योग्य हैं। उक्त निर्दिष्ट, सेवानिवृत्ति, समाप्ति आदि, को छोड़कर अनुतोषिक प्राप्तकर्ता मंडल द्वारा निर्धारित सीमा तक छूट प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में प्रभावी तिथि 29.03.2018 के अनुसार सीमा 20 लाख हैं [(अधिसूचना सं. 16/2019 एफ. सं. 200/8/2018-आईटीए-I दिनांक 08.03.2019)]
5.3.3 केंद्र सरकार अथवा संघ की सिविल सेवा के सदस्यों हेतु स्वीकार्य अन्य किसी समान योजना के तहत अथवा रक्षा से संबंधित पदाधिकारी अथवा संघ ( ऐसे सदस्य अथवा हितधारक जो कथित नियम के तहत नहीं आते) के तहत सिविल पद अथवा अखिल भारतीय सेवा के सदस्य अथवा रक्षा सेवा से संबंधित पदाधिकारी अथवा राज्य की सिविल सेवा के सदस्य अथवा राज्य के तहत सविल पदाधिकारी अथवा स्थानीय प्राधिकरण के कर्मचारी अथवा केंद्र, राज्य अथवा प्रादेशिक अधिनियम द्वारा स्थापित कॉर्पोरेशन सविल पेंशन कोड के अंतर्गत प्राप्त होने वाली अनुतोषिक के विनियम के किसी भुगतान से धारा 10(10क)(i) के अंतर्गत छूट पाने के हकदार होंगे। अन्य किसी नियोक्ता की योजना के अतर्गत प्राप्त पेंशन के विनियम के भुगतान के संबंधं में छूट धारा 10(10क)(ii) के अंतर्गत वहन की जाएगी। इसके अलावा धारा 10(23ककख) में संदर्भित पूंजी से पेंशन के विनिमय के भुगतान की स्थिति में छूट धारा 10(10क)(iii) के तहत मिलेगी।
5.3.4 व्यक्ति के सेवानिवृत्त होने, चाहे वृद्धावस्था की अयोग्या या चाहे अन्य कोई कारण, के समय उसके द्वारा अर्जित अवकाश की अवधि के संबंध में केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार, अवकाश वेतन के समकक्ष वेतन, के कर्मचारी द्वारा प्राप्त कोई भुगतान धारा 10(10कक)(i) के तहत छूटयोग्य होगा।
सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर अन्य कर्मचारियों की स्थिति में, यह छूट सेवानिवृत्ति या अन्यथा पर सेवानिवृत्ति के तुरंत पहले के दस महीनों के दौरान आहरित औसत वेतन के आधार पर गिनी गई दस माह की अधिकतम अवकाश के अनुसार वृद्धावस्था की अयोग्यता पर सेवानिवृत्ति के समय अवकाश के संबंध में मिलने वाला पैसे के संबंध के आधार पर निर्धारित की जाएगी। अर्जित अवकाश की हकदारी दी गई प्रत्येक वर्ष की वास्तविक सेवा के लिए 30 दिनों से अधिक नहीं होगी।
यह छूट उन कर्मचारियों के संबंध में, जो 01.04.1998 के बाद सेवानिवृत्त हो चुके हैं, चाहे वृद्धावस्था के कारण अथवा अन्य किसी कारण से, भारत सरकार की अधिसूचना सं. एस.ओ. 588 (ई) दिनांक 31.05.2002 के अनुसार, रू. 3,00,000/-, पर आगे सीमित की जा सकती है। धारा 10(10कक)(ii) के अनुसार, सेवानिवृत्ति के समय गैर-सरकारी कर्मचारी के मामले में अवकाश नकदीकरण के संबंध में छूट निम्नलिखित राशियों का कम से कम होगी :
• सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के खाते में दी गई अर्जित अवकाश की अवधि x औसत मासिक वेतन
• औसत मासिक वेतन x 10 (यानी 10 महीने का औसत वेतन)
• अधिकतम राशि जिसे केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है यानी रू. 3,00,000
• सेवानिवृत्ति के समय वास्तविक तौर पर अवकाश नकदीकरण
छूट की गणना के लिए वेतन में मूल वेतन, मंहगाई भत्ता शामिल है जोकि सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ की गणना के दौरान वेतन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और कर्मचारी द्वारा किए गए कारोबार के निश्चित प्रतिशत पर आधारित कमीशन शामिल है।
यदि एक कर्मचारी उसी वर्ष में एक से अधिक नियोक्ता से अवकाश संबंधी वेतन प्राप्त करता है तो धारा 10(10कक)(ii) के अंतर्गत छूट की अधिकतम राशि केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट राशि (यानी रू. 3,00,000) से अधिक नही हो सकती। जहां किसी कर्मचारी ने पहले के किसी वर्ष में इस धारा के अंतर्गत अवकाश संबधी वेतन की छूट का दावा किया हो तो ऐसे कर्मचारी के मामले में प्रारंभिक सीमा (यानी रू. 3,00,000) को पहले किए गए दावे की छूट की राशि तक घटाया जाएगा।
5.3.5 धारा 10(10ख) के तहत कामगार द्वारा प्राप्त होने वाला छंटनी मुआवजा कुछ शर्तों के अनुसार आय-कर के दायरे से बाहर है। छंटनी मुआवजे की अधिकतम सीमा औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25च(ख) के आधार आंकी गई राशि अथवा केंद्र सरकार के आधिकारिक राजपत्र, जो भी कम हो, में निर्दिष्ट अधिसूचना द्वारा कम से कम 50,000/- तक हैं। यह सीमा उन स्थितियों में लागू नहीं होगी जहां मुआवजा किसी योजना, जो केन्द्र सरकार की ओर से स्वीकृत की गई हो और लागू होने वाली योजना तथा प्रासंगिक स्थितियों के अनुसार कामगार के उत्तरदायित्व को सुरक्षित रखने हेतु विशेष सुरक्षा की आवश्यकता हो, के तहत दिया जाना हो। ऐसे भुगतान की अधिकतम सीमा रू.5,00,000/- जहां मुआवजा 25.06.1999 की अधिसूचना सं. 10969 में निर्दिष्टानुसार 01.01.1997 को अथवा बाद में दिया हो।
5.3.6 धारा 10(10ग) के अंतर्गत, किसी योजना अथवा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी की स्थिति में स्वैच्छिक रूप से हटने के अनुसार अपनी सेवा की समाप्ति अथवा अपनी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के समय पर निम्नलिखित निकायों के कर्मचारियों द्वारा प्राप्त अथवा प्राप्तनीय (भले ही किश्तों में प्राप्त हुई हो) कोई राशि उस सीमा तक आयकर से मुक्त होगी जबतक ऐसी राशि रू. 5,00,000/- से अधिक नहीं होती।
(क) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी
(ख) अन्य कोई कंपनी
(ग) केंद्र, राज्य अथवा प्रांतीय अधिनियम के तहत स्थापित प्राधिकरण
(घ) स्थानीय प्राधिकरण
(ड) एक सहकारी संस्था
(च) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, 1956 के तहत विश्वविद्यालय के तौर पर घोषित किए हुए संस्थान, केंद्र, राज्य अथवा प्रांतीय अधिनियम के तहत अथवा निगमित अथवा स्थापित विश्वविद्यालय
(छ) प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम, 1961 की धारा 3(छ) के तहत कोई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान
(ज) कोई राज्य सरकार; या
(झ) कोई केंद्र सरकार; या
(ञ) आधिकाररिक राजपत्र में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचितानुसार ऐसे प्रबंधन संस्थान, इस संबंध में निर्दिष्ट किया जाएगा; या
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति सेवा के अंतर्गत प्राप्त छूट प्राप्त राशि केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार के कर्मचारियों तथा देश भर अथवा किसी राज्य अथवा राज्यों में महत्वपूर्ण पहचान रखने वाले अधिसूचित संस्थानों के कर्मचारियों को दी गई हैं। यह भी ध्यान दिया जाए कि जहां यह छूट किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी कर्मचारी को स्वीकृत की गई हैं उसके लिए अन्य निर्धारण वर्ष की स्वकृति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, यदि स्वैच्छिक् सेवानिवृत्ति अथवा वृद्धावस्था के कारण सेवानिवृत्ति पर प्राप्त राशि के संबंध में किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 89 के तहत स्वीकृति किया गया हैं तो धारा 10(10ग) के अंतर्गत कोई छूट नहीं दी जाएगी।
5.3.7 जीवन बीमा पॉलिसी [धरा 10(10घ)] के तहत कोई भी प्राप्त होने वाली राशि, निम्नलिखित को छोडकर ऐसी पॉलिसी पर बोनस के रूप में आवंटित कुल राशि धारा 10(10घ) के अंतर्गत छूट मिलेगी।
(i) धारा 80घघ(3) अथवा धारा 80घघक(3) के तहत प्राप्त कोई राशि; अथवा
(ii) प्रमुख बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त कोई राशि अथवा
(iii) 01.04.2003, लेकिन 31.03.2012 को अथवा पूर्व, उस पॉलिसी के संबंध में जब पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी भी वर्ष के लिए देययोग्य प्रीमियम वास्तविक कुल बीमाकृत पूंजी का 20 प्रतिशत से अधिक, को अथवा पश्चात् जारी बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त कोई राशि; अथवा
(iv) 01.04.2012 को अथवा पूर्व, उस पॉलिसी के संबंध में जब पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी भी वर्ष के लिए देययोग्य प्रीमियम वास्तविक कुल बीमाकृत पूंजी का 10 प्रतिशत से अधिक; या
(v) धारा 80घघख में निर्दिष्टानुार बीमारी अथवा संक्रमण से पीड़ित अथवा धारा 80प के अनुसार विक्लांग व्यक्तियों अथवा गंभीर विक्लांग व्यक्ति की स्थिति में 01.04.2013 को अथवा पश्चात जारी बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त कुल राशि ,उस पॉलिसी के संबंध में जब पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी भी वर्ष के लिए देययोग्य प्रीमियम वास्तविक कुल बीमाकृत पूंजी का 15 प्रतिशत से अधिक
हालांकि व्यक्ति की मृत्यु पर उक्त (iii), (iv) तथा (v) में निर्दिष्ट ऐसी पॉलिसी के अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि मुक्त होगी
कथित वाक्यांश को वित्त अधिनियम, 2021 के द्वारा संशोधित किया गया था ताकि बताया जा सके कि :
(क) प्रभावी तिथि 1 फरवरी, 2021 से, 1 फरवरी, 2021 को या उसके बाद जारी यूनिट लिंक्ड इंशोयरेंस पॉलिसी के अंतर्गत प्राप्त राशि पर छूट नहीं होगी यदि ऐसी पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी पिछले वर्ष के लिए देययोग्य प्रीमियम की राश रू. 2,50,000 से अधिक होती है।
(ख) यदि 1 फरवरी, 2021 को या उसके बाद जारी प्रीमियम एक यूलिप से अधिक के लिए देययोग्य है तो इस वाक्यांश के अंतर्गत छूट ऐसी पॉलिसियों के संबंध में ही उपलब्ध होगी जहां उन किसी भी पॉलिसियों की अवधि के दौरान कुल प्रीमियम किसी पिछले वर्ष के लिए रू. 2,50,000 से अधिक न हो।
हालांकि, उक्त संशोधन व्यक्ति की मृत्यु पर प्राप्त राशि के मामले में लागू नहीं होगा।
अधिनियम की धारा 10(12क) के अंतर्गत, राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम ट्रस्ट की ओर से एक निर्धारिती को अपने खाते को बंद करने पर या उस सीमा तक धारा 80गगघ में संदर्भित पेंशन योजना में निकलने पर कोई भुगतान, जो वित्त वर्ष 2019-20 से योजना में से उसके निकलने पर बंद करते समय उसे देययोग्य कुल आय के साठ प्रतिशत से अधिक न हो (जैसा वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित है), कर मुक्त होगा।
अधिनियम की धारा 10(12ख) के अंतर्गत, पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकारी अधिनियम, 2013 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अंतर्गत निर्दिष्ट नियमों और शर्तों के अनुसार उसके खाते में से किए गए आंशिक पैसे निकालने पर धारा 80गगघ में संदर्भित पेंशन योजना के अंतर्गत एक कर्मचारी को राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम योजना से कोई भुगतान उस सीमा तक जहां यह उसकी ओर से किए गए अंशदान की राशि के पच्चीस प्रतिशत से अधिक न हो, कर मुक्त होगा।
5.3.8 किसी भी भविष्य निधि के भुगतान जिस पर भविष्य निधि अधिनियम, 1925 लागू होता हैं अथवा अन्य कोई भविष्य निधि केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किया गया हो तथा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित हो, धारा 10(11) के अंतर्गत के तहत छूट प्राप्त करने के योग्य है। प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2022 से, धारा 10 के वाक्यांश (11) के पहले परंतुक बताता है कि कथित वाक्यांश के अंतर्गत छूट उस सीमा तक एक व्यक्ति के लिए पिछले वर्ष के दौरान अर्जित ब्याज के तौर पर आय के रूप में उपलब्ध नहीं होगी जहां यह 1 अप्रैल, 2021 को या उसके बाद उस फंड में किसी पिछले वर्ष में कुल राशि या राशियों से संबंधित हो और निर्धारित तरीके में गिना गया हो। प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2022 से धारा 10 के वाक्यांश (11) के दूसरे परंतुक बताता है कि यदि एक व्यक्ति द्वारा अंशदान उस फंड में होता है जिसका ऐसे व्यक्ति के नियोक्ता द्वारा कोई अंशदान नहीं होता तो पहले परंतुक के प्रावधान वैसे प्रभावी होगा जैसा शब्द "दो लाख पचास हजार रूपए", शब्द "पांच लाख रूपए" को प्रतिस्थापित किया गया हो। आयकर नियम, 1962 के नियम 9घ को एक भविष्य निधि या मान्यताप्राप्त भविष्य निधि, निर्दिष्ट सीमा से अधिक, में अंशदान से संबंधित करयोग्य ब्याज की गणना के लिए उपलब्ध कराया गया है।
5.3.9 अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 8 में दी गई सीमा तक एक मान्यताप्राप्त भविष्य निधि में भाग लेने वाले कर्मचारी को शेष और देय संचित बैलेंस अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (12) के अंतर्गत करमुक्त है। प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2022 से, उक्त वाक्यांश के अंतर्गत छूट उस सीमा तक एक व्यक्ति के खाते में पिछले वर्ष के दौरान अर्जित ब्याज के रूप में आय के लिए नहीं मिलेगी जहां यह उस व्यक्ति द्वारा किए गए अंशदान की कुल राशि से संबंधित हो जो राशि 1 अप्रैल, 2021 को या उसके बाद उस फंड में किसी पिछले वर्ष में दो लाख पचास हजार रूपए को या उसके बाद उस फंड में किसी पिछले वर्ष में दो लाख पचास हजार रूपए से अधिक हो और जिसे निर्धारित तरीके में गिना गया हो। प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2022 से धारा 10 के वाक्यांश (11) के दूसरे परंतुक बताता है कि यदि एक व्यक्ति द्वारा अंशदान उस फंड में होता है जिसका ऐसे व्यक्ति के नियोक्ता द्वारा कोई अंशदान नही होता तो पहले परंतुक के प्रावधान वैसे प्रभावी होगा जैसा शब्द "दो लाख पचास हजार रूपए", शब्द "पांच लाख रूपए" को प्रतिस्थापित किया गया हो। आयकर नियम, 1962 के नियम 9घ को एक भविष्य निधि या मान्यताप्राप्त भविष्य निधि, निर्दिष्ट सीमा से अधिक, में अंशदान से संबंधित करयोग्य ब्याज की गणना के लिए उपलब्ध कराया गया है।
5.3.10 अधिनियम की धारा 10(13क) के अंतर्गत, निर्धारिती के नियंत्रण में आवासीय अकोमोडेशन के संबंध में किराये (जिस भी नाम से जाना जाए) के भुगतान पर किए गए व्यय को पूरा करने के लिए उसके नियोक्ता द्वारा एक निर्धारिती को विशेष तौर पर दिए गए विशेष भत्ते उस सीमा तक आयकर से मुक्त है जिनको ऐसे स्थान या क्षेत्र के संबंध में निर्धारित किया जा सके जहां ऐसा अकोमोडेशन मौजूद है और अन्य प्रासंगिक विचार मौजूद है। किराये के भुगतान पर व्यय को पूरा करने के लिए विशेष भत्ते की अनुमति पर स्वीकार्य छूट की मात्रा निम्न का कम से कम होगी :
| मुंबई/दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई में | किसी अन्य शहर में |
| 1. वास्तव में प्राप्त भत्ते | 1. वास्तव में प्राप्त भत्ते |
| 2. 10 प्रतिशत वेतन से अधिक का दिया गया किराया | 2. 10 प्रतिशत वेतन से अधिक का दिया गया किराया |
| 3. वेतन का 50 प्रतिशत | 3. वेतन का 40 प्रतिशत |
इसके लिए, "वेतन" में शामिल है मंहगाई भत्ता, यदि रोजगार की शर्तें ऐसी दी गई हों, लेकिन इसमें अन्य सभी भत्ते या रियायते शामिल नहीं हैं।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नियम 2क में निर्दिष्ट सीमाओं के अनुसार निर्धारिती द्वारा नियंत्रित आवासीय परिसर में निर्दिष्ट सीमा के संदर्भ में किराये के भुगतान पर वास्तव में किए गए व्यय ही आयकर से करमुक्त है। इसलिए, निर्धारिती, जो उसके द्वारा खरीदे गए आवास/फ्लैट में रहता है, को दिए गए आवास किराया भत्ता आयकर से करमुक्त नही है।
5.3.11 धारा 10(14) निम्नलिखित भत्तों के लिए छूट प्रदान करता हैं :—
(i) नियम 2खख के अंतर्गत निर्धारित अपने कर्त्तव्य के निवर्हन के दौरान किए गए पूर्ण, आवश्यक तथा विशेष को पूरा करने के लिए कर्मचारी को कुछ विशेष भत्ते अथवा लाभ मिल सकते हैं बशर्तें इस उद्देश्य के लिए वास्तविक व्यय किया गया हो
(ii) कर्मचारी को स्वीकृत किया गया कोई भत्ता चाहे तैनाती वाले स्थान पर अपनी व्यक्गित खर्चों को पूरा करने के लिए हो अथवा उसके स्थानीय स्थल पर, आवासीय स्थान के बढ़ते शुल्क के लिए मुआवजा दिया जाएगा जो कि निर्धारितानुसार तथा निर्धारित किया जा सकता हैं।
हालांकि, उक्त (ii) में संदर्भित भत्ते व्यक्तिगत प्रकार के भत्तों में शामिल नहीं हैं जिसे उसके कार्यालय से संबंधित विशेष प्रकार के कार्यों को पूरा करने के लिए पारिश्रमिक अथवा क्षतिपूर्ति पूरी करने के लिए स्वीकृत किया जाए जब तक ऐसे भत्ते उसके नियुक्ति स्थल अथवा आवास से संबंधित हो।
आगे यह स्पष्ट किया जाता है कि एक कर्मचारी को दिया गया कोई भत्ता जो नियम 2खख के साथ पठित धारा 10(14) के अंतर्गत छूट प्राप्त नहीं है या भत्ते की राशि नियम के अंतर्गत निर्धारित राशि से अधिक है तो वह वेतन से मुख्य आय के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय होगी। उदाहरण के लिए, किसी प्रशिक्षण संस्थान में तैनाती के लिए दिया गया प्रशिक्षण भत्ते के लिए नियम 2खख में कोई छूट मुहैया नहीं कराई गई इसलिए पूरा प्रशिक्षण भत्ता वेतन में शामिल होगा।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने अधिसूचना सं. एसओ 617(ड़) दिनांक 7 जुलाई, 1995 (एफ. सं. 142/9/95-टीपीएल) के मार्फत धारा 10(14) (ii) के उद्देश्य के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं जिसे अधिसूचना एसओ सं. 403 (ई) दिनांक 24.04.2000(एफ. सं. 142/34/99-टीपीएल) के मार्फत संशोधित किया गया है। नियम 2खख को संशोधित किया गया है और वित्त वर्ष 2018-19 के लिए परिवहन भत्ते के संबंध में छूट रू. 3200 प्रतिमाह तक केवल उन नेत्रहीन या कम अंगों वाले शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए ही उलब्ध है जो अपने निवास स्थल तथा नौकरी वाले स्थल के बीच के परिवहन के उद्देश्य से किए गए व्यय करते हैं।
5.3.12 अधिनियम की धारा 10(15)(iv)(i) के अंतर्गत केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, सेवानिवृत्ति को छोड़कर, केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में ऐसी योजना बनाए जाने अथवा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचितानुसार, के कर्मचारी द्वारा किया गया जमा पर सरकार द्वारा दिया जाने वाला ब्याज आयकर से छूट प्राप्त हैं। अधिसूचना सं. एफ.2/14/89-एनएस-II दिनांक 7.6.89, अधिसूचना सं. एफ.2/14/89-एनएस-II दिनांक 12.10.89 द्वारा संशोधितानुसार, केंद्र सरकार ने कथित वाक्यांश के उद्देश्य के लिए सेवानिवृत्ति होने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए जमा योजना के नाम से योजना अधिसूचित की है।
5.3.13 शिक्षा पर होने वाले व्यय को पूरा करने के लिए स्वीकृत किसी भी प्रकार की छात्रवृत्ति अधिसूचना की धारा 10(16) के प्रावधानों के अनुसार कुल आय मे शामिल नहीं की जाएगी।
5.3.14 धारा 10(18) किसी व्यक्ति जो केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार का कर्मचारी हो तथा "परम वीर चक्र" अथवा "महावीर चक्र" अथवा "वीर चक्र" अथवा केंद्र सरकार द्वारा विशेश रूप से निर्दिष्ट ऐसे अन्य वीरता पुरस्कार, द्वारा पेंशन के रूप में प्राप्त किसी प्रकार का वेतन की छूट प्रदान करता हैं। ऐसे किसी व्यक्ति के परिवार के किसी सदस्य द्वारा प्राप्त पारिवारिक पेंशन अधिसूचना सं. एस.ओ. 1948(ई) दिनांक 24.11.2000 तथा 81(ई) दिनांक 29.01.2001 के तहत छूट प्राप्त हैं जिसे अनुलग्नक VII व IX के तहत संलग्न किया गया है। इस उद्देश्य के लिए "पारिवार" अधिनियम की धारा 10(5) में निर्दिष्ट अर्थ के अनुसार है।
ऐसे पुरस्कार को प्राप्त करने की स्थिति में डीडीओ कर में कटौती न करने का विकल्प दे सकता है बशर्ते दावों के मूल्यांकन के बारे में उनको संतुष्ट किया जाए।
5.3.15 अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत कर से छूट निम्न संबंधों में भी उपलब्ध होगी :—
रियायत के अंतर्गत निम्नलिखित शामिल नहीं होगा :
(क) नियोक्ता द्वारा अनुरक्षित किसी अस्पताल में कर्मचारी या उसके परिवार के किसी सदस्य को दिए गए चिकित्सा उपचार की कीमत;
(ख) कर्मचारी द्वारा खुद अपने ऊपर या अपने परिवार के किसी सदस्य पर किए गए चिकित्सा व्यय पर नियोक्ता की ओर से दी गई कोई राशि
• अपने कर्मचारी के चिकित्सीय इलाज के उद्देश्य के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोई अन्य अस्पताल अथवा सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकरण द्वारा अनुरक्षित कोई अन्य अस्पताल;
• प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त द्वारा मंजूर किए गए किसी अस्पताल में निर्धारित बीमारियों के संदर्भ में
(ग) एक कर्मचारी के संबंध में एक नियोक्ता द्वारा दिया गया कोई प्रीमियम, धारा 36 की उप-धारा (1) के वाक्यांश (iख) के लिए केंद्र सरकार या बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) द्वारा मंजूर की गई किसी योजना के अंतर्गत ऐसे नियोक्ता के स्वास्थ्य बीमा को प्रभावी रखने या लागू रखने के लिए।
(घ) धारा 80घ के लिए केंद्र सरकार या आईआरडीए द्वारा मंजूर किसी योजना के अंतर्गत कर्मचारी के खुद अपने या अपने परिवार के किसी सदस्य के लिए बीमा को प्रभावी या लागू रखने के लिए उसके द्वारा दिए गए किसी प्रीमियम के संबंध में नियोक्ता की ओर से दी गई कोई राशि ।
(ड़) भारत से बाहर कर्मचारी (या उसके परिवार के किसी सदस्य पर) के चिकित्सा उपचार पर नियोक्ता द्वारा किया गया कोई व्यय, चिकित्सा उपचार के लिए कर्मचारी (या उसके परिवार के किसी सदस्य) के विदेश में यात्रा व रहने और एक परिचारक जो मरीज के साथ हो, के विदेश में यात्रा और रहने पर किया गया व्यय। हालांकि, विदेश में चिकित्सा उपचार पर व्यय उस सीमा तक ही रियायत से मुक्त होगा जहां इसकी अनुमति भारतीय रिजर्व बैंक से हो। आगे, यात्रा पर व्यय उस कर्मचारी के मामले में ही रियायत से मुक्त होगी जिसकी कुल आय, जिसे उक्त व्यय को शामिल करने से पहले गिना गया हो, दो लाख रूपए से अधिक न हो।
(च) उक्त चिकित्सा उपचार के संबंध में किसी व्यय के लिए नियोक्ता द्वारा दी गई कोई राशि, उक्त (ड़) में निर्दिष्ट शर्तों के अनुसार।
चिकित्सालय अथवा क्लीनिक अथवा नर्सिग होम सहित अस्पताल में चिकित्सीय इलाज पर व्यय किया गया खर्च की छूट का लाभ उठाने के लिए तथा व्यक्ति से संबंध रखने वाला परिवार अर्थात् व्यक्ति का जीवनसाथी तथा बच्चे। परिवार में व्यक्ति के माता-पिता भाई तथा बहनें भी शामिल हैं यदि वह पूर्ण अथवा मुख्यत: व्यक्ति पर आश्रित हैं।
यह निर्दिष्ट करना उचित होगा कि अधिनियम की धारा 10(13क), 10(5ं), 10(14), 17 आदि के अंतर्गत विशेषरूप से मुक्त लाभ मुक्त रहेंगे। यह शामिल लाभ जैसे गृह किराया लाभ, अवकाश यात्रा रियायत, यात्रा तथा स्थानांतरण पर यात्रा व्यय भत्ता, निर्धारितानुसार यात्रा व्यय को पूरा करने के लिए दैनिक भत्ता, चिकित्सा सुविधा
5.3.16 इस संबंध में यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नियम 2खख के साथ पठित धारा 10(14) के अनुसार स्थानांतरण के निजी प्रभाव के स्थानांतरण, पार्किंग और परिवहन के संबंध में दी गई किसी राशि सहित स्थानांतरण या यात्रा पर यात्रा की लागत को पूरा करने के लिए दिए गए किसी भत्ते कर मुक्त होंगे। साथ ही ऐसे भत्ते, चाहे स्थानांतरण के संबंध में यात्रा की अवधि के लिए दिए जाते हों या अपनी ड्यूटी से अनुपस्थिति के कारण एक कर्मचारी द्वारा किए गए सामान्य दैनिक व्यय को पूरा करने के लिए दिए जाते हो, कर मुक्त होंगे।
5.3.17 जी.एस.आर 415(ई) दिनांक 26.06.2020 के मार्फत, नियम 2खख को संशोधित किया गया है ताकि बताया जा सके कि निर्धारिती के धारा 115खकग के अंतर्गत रियायती कर व्यवस्था चुनने की स्थिति में वह निम्नलिखित भत्तों के संदर्भ में ही छूट का हकदार होगा :
(क) परिवहन भत्ते अपने निवास स्थल तथा नौकरी वाले स्थल के बीच के परिवहन के उद्देश्य से किए गए व्यय को पूरा करने के लिए उन कर्मचारियों को दिया जाता है जो नेत्रहीन मूक या बाधिर है या जो नीचे हाथ-पैरों के साथ शारीरिक तौर पर विकलांग है ;
(ख) यात्रा या स्थानांतरण पर यात्रा की लागत को पूरा करने के लिए दिए गए कोई भत्ते ;
(ग) अपने कार्य के सामान्य स्थल से अनुपस्थिति के कारण एक कर्मचारी द्वारा किए गए सामान्य दैनिक भत्तों को पूरा करने के लिए स्थानांतरण के संदर्भ में यात्रा की अवधि के लिए या यात्रा पर दिया गया कोई भत्ता;
(घ) लाभ के रोजगार या एक कार्यालय के कार्यों को करने के लिए परिवहन पर किए गए व्यय को पूरा करने के लिए दिया गया भत्ता बशर्ते इन शर्तों के अनुसार कि नियोक्ता द्वारा निशुल्क परिवहन नहीं दिया जाता हो;
5.4 अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत कटौतियां
5.4.1 धारा 16(झक) के अंतर्गत मानक कटौतियां:
निर्धारण वर्ष 2019-20 से पचास हजार रूपए की कटौती या वेतन की राशि जो भी कम हो, मानक कटौती के तौर पर मान्य होगी।
5.4.2 मनोरंजन भत्ता [(धारा 16(ii)] :
निर्धारिती जो सरकार से वेतन प्राप्त करता हो, को नियोक्ता द्वारा विशेषरूप से स्वीकृत मनोरंजन के रूप में किसी प्रकार के भत्ते के संबंध में धारा 16(ii) एक कटौती स्वीकार्य है जो उसके वेतन को एक/पांच भाग ( किसी प्रकार के भत्ते, लाभ अथवा अन्य रियायत को छोडकर) अथवा पांच हजार जो भी कम हो, होगी।
5.4.3 रोजगार पर कर [(धारा 16(iii)]
भारतीय संविधान, अन्य किसी कानून के तहत लागू, की धारा 276(2) के अर्थानुसार रोजगार (पेशा कर) पर कर "वेतन' विषय के अंतर्गत आय की गणना में कटौतीनुसार स्वीकृत होगी।
5.5 अधिनियम के अध्याय VI-क के अंतर्गत कटौतियां
कर्मचारी के करयोग्य वेतन की गणना के लिए अधिनियम के अध्याय VI-क के अंतर्गत निम्नलिखित कटौतियां उसकी सकल कुल आय से स्वीकृत होंगी।
5.5.1 जीवन बीमा प्रीमियम, स्थगित वार्षिकी, भविष्य निधि हेतु अंशदान, कुछ इक्विटी शेयर अथवा डिबेंचर आदि हेतु अंशदान (धारा 80ग)
क. धारा 80ग, कर्मचारी को निम्नलिखित योजना में वर्तमान वित्तीय वर्ष में भुगतान अथवा जमा की पूर्ण राशि हेतु कटौती हक देती हैं, बशर्ते सीमा रू. 1,50,000/- हो।
(1) व्यक्ति, जीवनसाथी अथवा किसी बच्चे, जीवन बीमा अमल में लाने अथवा रखने के लिए बीमा प्रीमियम का भुगतान
(2) आस्थगिती वार्षिक, के लिए अनुबंध को अमल में लाने अथवा रखने के लिए किया गया कोई भुगतान व्यक्ति, व्यक्ति का जीवनसाथी अथवा कोई बच्चा के जीवन पर नीचे निर्दिष्ट मद (7) हेतु संदर्भित किए गए वार्षिकी योजना हेतु नहीं होगा बशर्ते उपलब्ध कराया जाए कि वार्षिकी के भुगतान के स्थान पर नकद भुगतान को प्राप्त करने के विकल्प को बीमाकृत व्यक्ति द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रावधानों में शामिल नहीं किया गया है।
(3) किसी व्यक्ति को सरकार द्वारा अथवा की ओर से देययोग्य वेतन से किसी प्रकार की कुल कटौती आस्थिगित वार्षिकी अथवा उसके जीवनसाथी अथवा बच्चों के प्रावधानों के गठन हेतु को प्राप्त कराने के उद्देश्य से उसकी सेवा की शर्तों के अनुसार कुल काटी गई राशि वेतन के 1/5 भाग से अधिक नहीं होनी चाहिए।
(4) कोई भी किया गया अंशदान
(क) व्यक्ति द्वारा किसी भविष्य निधि, जिसके लिए भविष्य निधि अधिनियम, 1925 लागू होता हो, के लिए ;
(ख) केंद्र सरकार द्वारा स्थापित कोई भविष्य निधि तथा अधिकारिक राजपत्र में इस संबध में अधिसूचित, जहां ऐसे अंशदान व्यक्ति अथवा जीवनसाथी अथवा बच्चे के नाम पर खाते मे किया गया हो।
(केंद्र सरकार ने जब से अधिसूचना एस.ओ. सं. 1559(ई) दिनांक 3.11.05 के मार्फत सार्वजनिक भविष्य निधि में अधिसूचित किया है)
(ग) कर्मचारी द्वारा अनुमोदित भविष्य निधि हेतु;
(घ) कर्मचारी द्वारा अनुमोदित सेवानिवृत्ति फंड ;
यह ध्यान दिया जा सकता कि किसी फंड हेतु "अंशदान" ऋण अथवा उधार के भुगतान की रकम में शामिल नहीं होगी।
(5) अंशदान के तौर पर वर्ष के दौरान दिया गया अथवा जमा कोई राशि :—
(क) बालिका सहित उस कर्मचारी की बालिका अथवा कर्मचारी के नाम पर जिसके लिए कर्मचारी इस संबंध में निर्दिष्ट आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचितानुसार केंद्र सरकार की ऐसी जमा योजना अथवा केंद्र सरकार की ऐसी प्रतिभूति हेतु कानूनी अभिभावक हो;
[केंद्र सरकार ने तब से अधिसूचना जीएसआर सं. 863(ड़)दिनांक 02.12.2014 के मार्फत 'सुकन्या समृद्धि खाता' योजना को अधिसूचित किया हो]
(ख) इस संबंध में निर्दिष्ट आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचितानुसार सरकार द्वारा सरकारी बचत प्रमाणपत्र अधिनियम, 1959 की धारा 2(ग) में परिभाषित ऐसे बचत पत्र हेतु
[केंद्र सरकार ने तब से अधिसूचना सं. एस.ओ. सं. 1560(ई) दिनांक 3.11.05 के मार्फत राष्ट्रीय बचत पत्र (VIII अंक) तथा अधिसूचना जी.एस.आर. 848(ई) दिनांक 29 नवंबर, 2011 के मार्फत राष्ट्रीय बचत पत्र (IX अंक) को अधिसूचित किया है, राष्ट्रीय बचत पत्र (IX अंक) नियम, 2011 जी.एस.आर 868 (ई) दिनांक 7 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित कर, संशोधन अधिसूचना सं. जीएसआर 319(ई), दिनांक 25.4.2012 को प्रबलित बना बचत पत्र एफ सं. 1-13/2011-एनएस-II की श्रेणी के तौर पर राष्ट्रीय बचत पत्र IX अंक को निर्दिष्ट करते हुए]
(6) किसी व्यक्ति, स्वयं के लिए, माता-पिता अथवा किसी बच्चे की स्थिति में अंशदान के रूप में दी गई कोई राशि
क. भारतीय यूनिट ट्रस्ट के यूनिट लिंक्ड बीमा योजना, 1971 के योगदान पर
ख. केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचितानुसार तथा धारा 10 (23घ) में संदर्भित जीवन बीमा निगम के म्चूयल फंड के यूनिट लिंक्ड बीमा योजना में किसी योगदान पर
(केंद्र सरकार ने तब से अधिसूचना एस.ओ सं. 1561 (ई) दिनांक 3.11.2005 के मार्फत एलआईसी म्यूंयल फंड के यूनिट लिंक्ड बीमा योजना (धनरक्षा, 1989 के तौर पर प्रसिद्ध) को अधिसूचित किया हैं।
(7) आधिकारिक राजपत्र, निर्दिष्ट में अधिसूचना द्वारा केंद्र सरकार की अन्य कोई बीमा कंपनी अथवा भारतीय जीवन बीमा निगम की ऐसे वार्षिक योजना के लिए अनुबंध को अमल में लाने अथवा रखने के लिए किया गया किसी प्रकार का अंशदान
(केंद्र सरकार ने तब से अधिसूचना एस.ओ. सं. 1562 (ई) दिनांक 3.11.05 के द्वारा न्यू जीवन धारा, न्यू जीवन धारा-I, न्यू जीवन अक्षय, न्यू जीवन अक्षय-I तथा न्यू जीवन अक्षय- II तथा अधिसूचना एस.ओ. सं. 847 (ई) दिनांक 1.6.2006 के द्वारा जीवन अक्षय- III, अधिसूचना एस.ओ. 1184(ई) दिनांक 19.05.2010 के द्वारा जीवन अक्षय-VI, अधिसूचना एस.ओ. सं. 5056(ई) दिनांक 06.12.2021 के द्वारा जीवन अक्षय-VII)
(8) इस संबंध में संदर्भित आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचानुसार केंद्र सरकार की किसी योजना के अनुसार किसी बनाई गई योजना के अंतर्गत भारतीय यूनिट ट्रस्ट ( उपक्रम व निरसन को स्थानांतरित) अधिनियम, 2002 को संदर्भ करने हेतु निर्दिष्ट कंपनी अथवा प्रबंधक अथवा धारा 10(23घ) की म्यूचुयल फंड की किसी इकाई को दिया अंशदान
[केंद्र सरकार ने तब अधिसूचना एस.ओ. 1563(ई) दिनांक 3.11.2005 के मार्फत इस उद्देश्य के लिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, 2005 को अधिसूचित किया है]
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, 1992 अथवा इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम 1998 के अनुसार बनी हुई योजना में 1.4.2006 के बाद किया गया निवेश धारा 80ग के अंतर्गत कटौती के लिए अर्हता प्राप्त हैं।
(9) इस संबंध में संदर्भित आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचानुसार केंद्र सरकार के अनुसार भारतीय यूनिट ट्रस्ट(उपक्रम का स्थानांतरण व समाप्ति) अधिनियम, 2002, में परिभाषित निर्दिष्ट कंपनी अथवा प्रबंधक अथवा धारा 10(23घ) के संदर्भ हेतु किसी म्यूचुयल फंड के स्थापन पेंशन फंड किसी व्यक्ति द्वारा दिया अंशदान
[केंद्र सरकार ने तब अधिसूचना एस.ओ. 1563(ई) दिनांक 3.11.2005 के मार्फत इस उद्देश्य के लिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, 2005 को अधिसूचित किया है]
(10) इस संबंध में संदर्भित आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचानुसार केंद्र सरकार के अनुसार नेशनल हाउसिंग बैंक द्वारा स्थापित ऐसा कोई पेंशन फंड हेतु कोई अंशदान करने अथवा ऐसी कोई जमा योजना ऐसे किसी अंशदान को करने के लिए
(11) (क) आवासीय उद्देश्य के लिए भारत में घरों की खरीद अथवा निर्माण के लिए दीर्घ-कालीन ऋण उपलब्ध कराने में संलग्न (ख) किसी भारतीय कानून द्वारा अथवा के अंतर्गत स्थापित कोई प्राधिकरण जो भवन अथवा अकोमोडेशन अथवा शहरों, कस्बों तथा गांवों, अथवा दोनों के लिए, की योजना, विकास अथवा शहरों उन्नतीकरण की आवश्यकताओं को संतुष्ट करने में लगी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, इस उद्देश्य हेतु आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा केद्र सरकार की ओर से ऐसी किसी जमा योजना में किसी प्रकार का अंशदान
[केंद्र सरकार ने तब धारा 80ग(2)(xvi)(क) के उद्देश्य हेतु अधिसूचना एस.ओ. No. 37(ई), दिनांक 11.01.2007 के मार्फत हुड़को की सार्वजनिक जमा योजना को अधिसूचित किया है]
(12) आवासीय गृह संपत्ति, आय जो "आवासीय संपत्ति से आय" (अथवा जो यदि निर्धारिती के स्वयं का भवन प्रयोग नहीं होता है, इस विषय के अंतर्गत कर योग्यनीय है) विषय के अंतर्गत कर योग्य है, के क्रय अथवा निर्माण के लिए निर्धारिती द्वारा दी गई कोई रकम, जहां ऐसा भुगतान उसे आवंटित की गई गृह संपत्ति की लागत के लिए किसी कंपनी या सहकारी समिति, जिसका निर्धारिती एक शेयरधारक या सदस्य है, को दी जाने वाली आंशिक भुगतान या किश्त के तौर पर या स्वामित्व आधार पर गृह संपत्ति का निर्माण या बिक्री करने वाले विकास प्राधिकरण, हाउसिंग बोर्ड या अन्य प्राधिकारी आदि की किसी स्व: वित्तपोषण या अन्य प्राधिकारी के अंतर्गत देय राशि की किसी भाग अथवा किसी किश्त के रूप में भुगतान किया जाता है।
कटौती भारत में भवन निर्माण अथवा क्रय के लिए दीर्घ कालीन अवधि का ऋण उपलब्ध के व्यापार में संलग्न संस्थानों की कुछ अन्य श्रेणियां अथवा राष्ट्रीय आवास बैंक, अथवा जीवन बीमा निगम अथवा कोई बैंक अथवा सरकार से निर्धारिती द्वारा उधार लिए गए ऋण के लौटाने के संबंध में भी स्वीकार्य होगी। नियोक्ता द्वारा उधार लिया गया ऋण लौटाने की स्थिति में यह भी कवर होगा यदि नियोक्ता केंद्र अथवा राज्य अधिनियम के अंतर्गत स्थापित कोई अन्य निकाय अथवा कार्पोरेट अथवा बोर्ड अथवा प्राधिकरण अथवा सहकारी संस्था अथवा स्थानीय प्राधिकरण अथवा ऐसे विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय अथवा कानून द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हो
गृह संपत्ति की खरीद के लिए भुगतान में स्टांप ड्यूटी, पंजीकरण शुल्क और अन्य व्यय शामिल होंगे लेकिन प्रवेश शुल्क या शेयर की लागत या प्रारंभिक जमा या किसी अतिरिक्त या वृद्धि या गृह संपत्ति का नवीकरण या मरम्मत, जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा पूरा करने के प्रमाणपत्र को जारी करने के बाद या निर्धारिती द्वारा घर में रहने या उसे पट्टे पर चढ़ानें के बाद होती है, की लागत शामिल नहीं होगी। उसके संबंध में किसी प्रकार के व्यय का भुगतान जिसके संबंध में कटौती अधिनियम की धारा 24 के प्रावधानों के अंतर्गत स्वीकृत है भी एक गृह संपत्ति की खरीद या निर्माण की लागत के लिए भुगतान में शामिल नहीं होगी।
जहां भवन संपत्ति जिसके लिए कटौती इन प्रावधानों के लिए स्वीकार्य की गई है धारा 80ग(20)(xviii) में निर्दिष्ट किसी राशि अथवा धन वापसी के रूप में उसके द्वारा आधिपत्य करने अथवा वापस करने वाले वित्तीय वर्ष के अंत से पांच साल की समाप्ति तिथि से पूर्व किसी भी समय करदाता द्वारा स्थानांतरित किया जा सकता है। इन प्रावधानों के अंतर्गत किसी प्रकार की कटौती ऐसे पूर्व वर्षों में दी गई कुल राशि के संबंध में की जाएगी जब स्थानांतरण किया गया तथा पूर्व के वर्षों की स्वीकृत आय की कुल कटौती निर्धारिती की पिछले वर्षों की कुल आय के कर के अनुसार की जाएगी।
(13) शिक्षण शुल्क, डेवलपमेंट शुल्क या दान या इसी प्रकार के भुगतान को छोड़कर, चाहे प्रवेश के दौरान अथवा उसके बाद भारत में विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय अथवा अन्य शिक्षण संस्थानों को कर्मचारी के किन्हीं दो बच्चों की पूर्णकालीन अवधि शिक्षा के उद्देश्य हेतु
(14) बोर्ड अथवा किसी सार्वजनिक वित्त संस्थान द्वारा अनुमोदित सार्वजनिक कंपनी द्वारा दी गई किसी निर्वाच्य पूंजी का ईक्विटी शेयर अथवा ऋणपत्र हेतु अंशदान
(15) बोर्ड द्वारा अनुमोदित तथा धारा 10 के वाक्यांश (23घ) हेतु सदंर्भित किसी म्युचूयल फंड की किसी श्रेणी हेतु अंशदान, यदि ऐसी श्रेणी के अंशदान की राशि किसी कंपनी की पूंजी के निर्वाच्य निगर्मन में अंशदान हों।
(16) अनुसूचित बैंक के साथ कम से कम पांच वर्षों की अवधि के लिए सावधि जमा हेतु मियादी जमा के तौर पर निवेश, इस उद्देश्य हेतु आधिकारिक राजपत्र में केंद्र सरकार द्वारा निर्मित तथा अधिसूचितानुसार
[केंद्र सरकार ने अधिसूचना एस.ओ. सं. 1220(ई), दिनांक 28.7.2006 के मार्फत इस उद्देश्य हेतु बैंक अवधि जमा योजना, 2006 को अधिसूचित किया है]
(17) इस संबध में आधिकारिक राजपत्र में ऐसी अधिसूचना द्वारा केंद्र सरकार की ओर से कृषि तथा ग्रामीण विकास हेतु राष्ट्रीय बैंक द्वारा जारी ऐसे बांड हेतु अंशदान
(18) वरिष्ठ नागरिक बचत योजना नियम, 2004 के अंतर्गत खाते में किसी प्रकार का निवेश
(19) डाक घर समय अवधि नियम, 1981 के अंतर्गत खाते में पाच वर्षों की अवधि जमा हेतु किसी प्रकार का अंशदान
(20) वित्त वर्ष 2019-20 से, केंद्र सरकार के कर्मचारी द्वारा धारा 80गगघ में संदर्भित पेंशन योजना के निर्दिष्ट खाते में कोई अंशदान —
(क) तीन वर्षों से कम अवधि की निश्चित अवधि के लिए; और
(ख) जो इस योजना के अनुसार है जिसको इस वाक्यांश के लिए आधिकारिक राजपत्र में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है
स्पष्टीकरण - इस वाक्यांश के लिए, "निर्दिष्ट खाता" का अर्थ पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2013 (2013 की 23) की धारा 20 की उप-धारा (3) में संदर्भित अतिरिक्त खाते से है।
ख. धारा 80ग(3) व 80ग(3क) निर्दिष्ट करती है कि किसी प्रीमियम की अस्थगित वार्षिकी राशि अथवा अन्य किसी किए गए भुगतान के अनुबंध को छोड़कर बीमा पॉलिसी की स्थिति में निम्न तक सीमित होगा
| 1 अप्रैल 2012 से पूर्व जारी पॉलिसी | वास्तविक पूंजी निश्चित राशि का 20 प्रतिशत |
| 1 अप्रैल 2012 को अथवा के बाद जारी पॉलिसी | वास्तविक पूंजी निश्चित राशि का 10 प्रतिशत |
| अप्रैल 2013 को अथवा के बाद जारी पॉलिसी * - धारा 80 प के अनुसार विक्लांग व्यक्तियों अथवा गंभीर विक्लांगता अथवा धारा 80डीडीबी में निर्दिष्टानुसार बीमारी अथवा रोग से पीड़ितों की स्थिति में | वास्तविक पूंजी निश्चित राशि का 15 प्रतिशत |
* वित्त अधिनियम 2013 से प्रारंभ
जीवन बीमा पॉलिसी के संबंध में वास्तविक पूंजी सम एशोयर्ड का अर्थ पॉलिसी अवधि के दौरान किसी भी समय बीमाकृत होने पर पॉलिसी के तहत न्यूनतम निश्चित राशि, निम्न खाते में शामिल नहीं होगी
i. प्रीमियम की कोई राशि वापसी हेतु सहमति, अथवा
ii. कुल वास्तविक निश्चित राशि जो किसी व्यक्ति द्वारा पॉलिसी के अंतर्गत प्राप्त की जा सकती है, के अतिरिक्त बोनस अथवा अन्य रूप से प्राप्त लाभ के रूप में
5.5.2 कुछ पेंशन फंड के अंशदान के संबंध में कटौती (धारा 80गगग)
धारा 80गगग, धारा 10(23ककख) में संदर्भित फंड से प्राप्त होने वाली पेंशन के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम अथवा अन्य किसी बीमा कंपनी के वार्षिकी योजना हेतु अनुबंध को लागू करने अथवा रखने के लिए कर हेतु कटौतीयोग्य आय से भुगतान अथवा जमा करने के लिए कर्मचारी कटौती का अधिकार देती है। हालांकि, कटौती कर्मचारी के खाते, यदि हो तो, में ब्याज अथवा उपार्जित बोनस अथवा जमा को छोड़कर की जाएगी यदि राशि रू. 1,50,000 से अधिक न हो। हालांकि यदि कोई राशि उक्त सदर्भित राशि में कर्मचारी के पूंजी हेतु बकाया है तो कटौती उक्तानुसार स्वीकृत की जाएगी तथा कर्मचारी अथवा उसका मनोनीत व्यक्ति निम्न कारणों की वजह से इस खाते में आने वाले ब्याज अथवा उपार्जित बोनस अथवा पूंजी के साथ इस राशि को प्राप्त करेगा।
(i) वार्षिकी योजना की समाप्ति चाहे पूरी हो या कुछ भाग
(ii) वार्षिकी योजना से प्राप्त पेंशन
वित्त वर्ष के दौरान प्राप्त होने वाली राशि उस वित्त वर्ष के लिए कर्मचारी अथवा उसके मनोनीत व्यक्ति की आय से उसी प्रकार कर वसूला जाएगा।
जहां कर्मचारी द्वारा किसी राशि का भुगतान अथवा जमा कराई जाती है तो इस धारा के उद्देश्य हेतु खाते में शामिल की जाती है, ऐसी राशि से संबंधित कटौती धारा 80ग के अंतर्गत स्वीकृत नहीं की जाएगी।
5.5.3 केद्र सरकार की पेंशन योजना के अंशदान के संबंध में कटौती (धारा 80गगघ) :
धारा 80गगघ (1) कर्मचारी, 01.01.2004 को अथवा के पश्चात अन्य नियोक्ता द्वारा अथवा केद्र सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति होने के नाते अथवा व्यक्ति के तौर पर अन्य को कोई निर्धारिती, अधिसूचना एफ. एन. 5/7/2003-ईसीबीएंडपीआर दिनांक 22.12.2003 (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली - एनपीएस) द्वारा अथवा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित, के मार्फत अधिसूचितानुसार पेंशन के अंतर्गत कर हेतु प्रभारणीय आय का देय राशि अथवा जमा से कटौती की जाएगी। बहरहाल, कटौती कर्मचारी के वेतन ( मंहगाई भत्ते को मिलाकर लेकिन अन्य सभी भत्तों और रियायतों को छोड़कर) के 10 प्रतिशत की समान राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए।
धारा 80गगघ(1ख) के अनुसार, 80गगघ(1) में संदर्भित निर्धारिती को अपनी आय की गणना में कटौती की स्वीकृति होगी, अधिसूचित पेंशन योजना के अंतर्गत अपने खाते में दी अथवा जमा पूर्ण राशि अथवा केंद्र सरकार द्वारा जिसे निर्धारित किया जा सकता हैं, जो रू. 50,000 से अधिक नहीं होगी। रू. 50,000 की कटौती स्वीकृत होगी चाहे कटौती उप-धारा (1) के अंतर्गत हो अथवा नहीं। हालांकि इस राशि को धारा 80गगघ की दोनों उप-धारा (1) तथा उप-धारा (1ख) के अंतर्गत दावा नहीं किया जा सकता।
धारा 80गगघ(2) के अनुसार, जहां उक्त पेंशन योजना में किसी प्रकार का अंशदान केंद्र सरकार अथवा अन्य किसी नियेाक्ता द्वारा किया जाता हैं तो कर्मचारी को 14 प्रतिशत तक की सीमा के अनुसार केंद्र सरकार अथवा अन्य किसी नियोक्ता द्वारा पूर्ण राशि के कुल वेतन से कटौती की स्वीकृति दी जाएगी यदि उसके वेतन की राशि का केंद्र सरकार द्वारा अंशदान किया जाता है और अन्य नियोक्ता द्वारा अंशदान के मामले में 10 प्रतिशत का अंशदान किया जाता है।
धारा 80गगघ(3) के अनुसार, उप-धारा (1) या उप-धारा (1ख) में संदर्भित उसके खाते में निर्धारिती के रखी राशि, जिसके संबंध में कटौती उन उप-धाराओं या उप-धारा (2) के अंतर्गत स्वीकृत की गई है, उसपर अर्जित राशि के साथ, यदि हो, पेंशन योजना में से उसके बाहर निकलने या बंद करने पर पूर्ण या आंशिक राशि निर्धारिती या उसके नामांकित व्यक्ति द्वारा प्राप्त होती है, पूर्ण राशि को उस पिछले वर्ष में निर्धारिती या उसके नामांकित व्यक्ति की आय होने के तौर पर समझा जाएगा और तद्नुसार उक्त पिछले वर्ष के प्रासंगिक उक्त निर्धारण वर्ष में कर वसूला जाएगा।
धारा 80गगघ(4) के अनुसार, निर्धारिती द्वारा दी या जमा की गई राशि को उप-धारा (1) या उप-धारा (1ख) के अंतर्गत कटौती के तौर पर स्वीकृत किया गया है, ऐसी राशि के संबंध में कोई कटौती 01.04.2006 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 80ग के अंतर्गत स्वीकार्य नही होगी।
आगे, निर्धारिती के मृत्यु पर, नामांकित व्यक्ति द्वारा प्राप्त राशि पेंशन को उप-धरा 1 या उप-धरा 1ख में समाप्त या प्रारंभ करने पर नामांकित व्यक्ति की आय होने के तौर पर नहीं समझी जाती। जहां कर्मचारी द्वारा भुगतान अथवा जमा कराई किसी राशि का इस धारा के उद्देश्य हेतु खाते में शामिल की जाती है, तो ऐसी राशि से संबंधित कटौती धारा 80ग के अंतर्गत स्वीकृत नहीं की जाएगी।
आगे, धारा 80गगघ(5) के अनुसार, आगे यह निर्दिष्ट किया गया है कि प्रभावी तिथि 01.04.09 से कर्मचारी द्वारा नई पेंशन योजना से प्राप्त कोई राशि पिछले वर्ष में प्राप्त नहीं की गई के तौर पर समझी जाएगी यदि ऐसी राशि उसी पिछले वर्ष में एनयूटी प्लान की खरीद के लिए प्रयोग होती हैं।
इस बात पर महत्व दिया जाता है कि धारा 80गगड़ के अनुसार धारा 80ग, 80गगग तथा धारा 80गगघ(1) के अंतर्गत कटौती की कुल राशि रू. 1,50,000/- से अधिक नहीं होगा। धारा 80गगघ(1ख) के अंतर्गत स्वीकृत कटौती रू. 50,000/- तक एनपीएस में दी गई किसी राशि के संबंध में अतिरिक्त कटौती हैं। हालांकि, धारा 80गगघ(2) के अंतर्गत पेंशन हेतु केंद्र सरकार अथवा अन्य किसी नियोक्ता द्वारा किया गया अंशदान इस धारा के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई रू. 1,50,000/- की सीमा से बाहर होगा।
5.5.4 स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भुगतान, आदि के संबंध में कटौती (धारा 80घ)
| विवरण | स्थिति - 1 | स्थिति – 2 | स्थिति - 3 | |||
| स्वयं व परिवार (उनमें से कोई वरिष्ठ नागरिक न हो) | माता-पिता (उनमें से कोई वरिष्ठ नागरिक न हो) | स्वयं व परिवार (उनमें से कोई वरिष्ठ नागरिक न हो) | माता-पिता (उनमें से कम से कम एक वरिष्ठ नागरिक हो) | स्वयं व परिवार (उनमें से कोई एक वरिष्ठ नागरिक हो) | माता-पिता (उनमें से कम से कम एक वरिष्ठ नागरिक हो) | |
| चिकित्सा व्यय आदि | 25,000 | 25,000 | 25,000 | 50,000 | 50,000 | 50,000 |
| चिकित्सा व्यय** | -- | -- | -- | 50,000 | 50,000 | 50,000 |
| धारा 80घ के अंतर्गत स्वीकार्य कटौती की कुल राशि | 50,000 | 75,000 | 1,00,000 | |||
* इसमें शामिल है (i) अपने और परिवार के लिए केंद्र सरकारी स्वास्थ्य योजना/अधिसूचित योजना हेतु अंशदान और (ii) रू. 5,000/- तक रोकथामी स्वास्थ्य जांच के लिए दी गई राशि
** तभी स्वीकृत होगी यदि कोई राशि चिकित्सा बीमा के लिए नहीं दी जाती
टिप्पणी 1 : निवारक स्वास्थ्य जांच के लिए भुगतान नकद में ही की किया जा सकता है, अन्य भुगतान गैर-नकद विधि में की किया जाना चाहिए।
टिप्पणी 2 : वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा अधिनियम की धारा 80घ को संशोधित किया गया है ताकि उपलब्ध कराया जा सके कि एक वर्ष से अधिक के कवर वाली एकल प्रीमियम स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की स्थिति में कटौती उन वर्षों के लिए अनुपातिक आधार पर स्वीकृत होगा जिसके लिए उक्त निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा के अनुसार बीमा कवर मुहैया कराया गया है
यहां
(i) "परिवार" का अर्थ कर्मचारी का जीवनसाथी और आश्रित बच्चे
(ii) "वरिष्ठ नागरिक" का अर्थ एक व्यक्ति जो भारत में रहता है और जो प्रासंगिक पिछले वर्ष के किसी भी समय दौरान साठ वर्ष या उससे अधिक की आयु का हो
1. डीडीओ को सुनिश्चित करना चाहिए कि उक्त हेतु संदर्भित चिकित्सा बीमा निम्न की ओर से इस संबंध में बनाई गई योजना के अनुसार होगा —
(क) इस संबध में केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित तथा सामान्य बीमा व्यापार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 के अंतर्गत गठित भारतीय जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन; अथवा
(ख) बीमा नियामक द्वारा बीमाकृत और अनुमोदित अन्य कोई तथा बीमा नियामक तथा विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धारा 3 की उप-धारा (1) के अंतर्गत स्थापित विकास प्राधिकरण
2. स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम का एकमुश्त भुगतान
यदि, एक मुश्त राशि एक वर्ष से अधिक के लिए स्वास्थ्य बीमा पर बीमा को प्रभावी या सक्रिय करने के लिए दी जाती है तो अनुपातिक कटौती (उपयुक्त अंश) उस वर्ष के लिए स्वीकार्य होगा जिसमें धारा 8घ की उप-धारा (4क) के अनुसार उत्तरगामी वर्ष/वर्षों के लिए यह दी गई।
5.5.5 विकलांग व्यक्तियों अथवा आश्रितों पर व्यय के संबंध में कटौती
(क) आश्रित विकलांग व्यक्तियों के चिकित्सा उपचार सहित रखरखाव के संबंध में कटौती (धारा 80घघ) :
धारा 80घघ के अंतर्गत, जहां कर्मचारी, भारत का नागरिक हो, पिछले वर्षों के दौरान —
(क) विकलांग व्यक्तियों होने की स्थिति में आश्रित के चिकित्सीय उपचार (नर्सिंग सहित), प्रशिक्षण तथा पुर्नवास हेतु किसी प्रकार का किया गया व्यय; अथवा
(ख) जीवन बीमा निगम अथवा अन्य किसी बीमा कंपनी अथवा प्राधिकरण अथवा निर्दिष्ट कंपनी की ओर से इस संबंध में गठित योजना के अंतर्गत किसी प्रकार का देय अथवा जमा की गई राशि बशर्ते इस संबंध में अनुरक्षण शर्तों तथा आश्रित, विकलांग होने के नाते, के रखरखाव हेतु इस संबंध में बोर्ड द्वारा अनुमोदित, कर्मचारी उस वर्ष की उसकी कुल सकल आय से पचहत्तर हजार रूपए के कुल कटौती स्वीकृत की जाएगी।
हालांकि, जहां ऐसे आश्रित व्यक्ति गंभीर विकलांगता के साथ जूझ रहे हो उन्हें 1,25,000/- रूपए की राशि निर्दिष्ट शर्तों के अनुसार कटौती स्वीकृत होगी।
ऊपर (ख) के अंतर्गत कटौती केवल तभी स्वीकृत होगी यदि निम्नलिखित शर्ते पूरी होती हैं :—
(i) उक्त (ख) में संदर्भित योजना आश्रित के लाभ के लिए वार्षिकी अथवा एकमुश्त राशि के भुगतान के लिए मुहैया कराई है, विकलांग व्यक्ति के तौर पर, व्यक्ति की मृत्यु की स्थिति में जिनका नाम योजना का अंशदान किया गया है।
(ii) नामांकित कर्मचारी या तो आश्रित, विकलांग व्यक्ति के तौर पर अथवा अन्य कोई व्यक्ति अथवा न्यास आश्रित, विकलांग व्यक्ति के तौर पर, के लाभ के लिए उसकी ओर से भुगतान की प्राप्ति के लिए
हालांकि, यदि आश्रित की, विक्लांग व्यक्ति के तौर पर, कर्मचारी से पूर्व मृत्यु होती है तो उक्त के उप-पैरा (ख) के अंतर्गत दी अथवा जमा राशि के समान राशि पिछले वर्ष जिसमें ऐसी राशि कर्मचारी द्वारा प्राप्त होती है, के कर्मचारी की आय होने की तौर पर समझी जाएगी तथा तद्नुसार कर हेतु वसूलनीय होगी जैसे आय उस पछले वर्ष में थी।
निर्धारिती, निर्धारण वर्ष, जिसमें कटौती का दावा किया गया है, में धारा 139 के अंतर्गत आय की विवरणी के साथ निर्धारित प्रपत्र और तरीके में चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र की प्रति प्रस्तुत करेगा। हालांकि, पिछले वर्ष जिसके दौरान विकलांगत प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका हो, की समाप्ति के बाद प्रारंभ होने वाले किसी पिछले वर्ष से संबंधित किसी निर्धारण वर्ष के लिए स्वीकार्य नही होगी जबतक निर्धारित प्रारूप और तरीके में एक नया प्रमाणपत्र प्राप्त न कर लिया जाए।
ख. विकलांग व्यक्तियों के संबंध में कटौती (धारा 80प) :
धारा 80प के अंतर्गत, व्यक्ति की कुल आय की गणना करते हुए, निवासी के तौर पर, जो पिछले वर्ष किसी भी समय चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा विकलांग व्यक्ति के तौर पर प्रमाणित किया जाता है, वहां रू. 75,000/- की कटौती की स्वीकृति होगी। हालांकि जहां ऐसा व्यक्ति गंभीर तौर पर विकलांग है तो रू. 1,25,000/- की उच्चतम कटौती की स्वीकृति होगी।
डीडीओ को ध्यान देना चाहिए कि कर्मचारी के आश्रित होने के मामले में 80घघ की कटौती जबकि खुद कर्मचारी होने के मामले में 80प की कटौती है। हालांकि, दोनों धाराओं के अंतर्गत कर्मचारी डीडीओ को निम्नलिखित प्रस्तुत करेगा :
1. नियमों के नियम 11क(2) के अनुसार निर्धारित प्रपत्र में नियम 11क(1) में निर्दिष्टानुसार चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र की प्रति। डीडीओ को केवल यह देखने के बाद कटौती की स्वीकृति होगी कि प्रस्तुत प्रमाणपत्र इस नियम में परिभाषित चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी है तथा यह उसमें निर्दिष्टानुसार प्रारूप में है।
2. आगे, जहां विकलांगता की शर्तें अस्थाई हैं तथा उक्तकथित प्रमाणपत्र में संलग्न अवधि के पश्चात् इसकी सीमा तक पुर्नमूल्यांकन की आवश्यकता होती है तो इस धारा के अंतर्गत किसी कटौती की स्वीकृति किसी उत्तरगामी अवधि के लिए नहीं होगी जबतक एक नया प्रमाणपत्र चिकित्सा प्राधिकारी से प्राप्त नहीं किया जाता जैसा उक्त 1 में है तथा डीडीओ के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जाता
3. धारा 80घघ तथा 80प के उद्देश्यों के लिए कुछ शर्तें निम्नानुसार हैं :—
(क) 'प्रशासक' का अर्थ यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (उपक्रम का अंतरण एवं निरसन) अधिनियम, 2002 की धारा 2 के वाक्यांश (क) में संदर्भितानुसार प्रशासक है
(ख) "आश्रित" अर्थात् —
(i) व्यक्ति, व्यक्ति का जीवनसाथी, बच्चे, माता-पिता, भाई तथा बहनें अथवा इनमें से कोई भी
(ii) हिंदू अविभाजित परिवार की स्थिति में, हिंदू अविभाजित परिवार का सदस्य, ऐसे व्यक्ति पर पूर्णता अथवा मुख्यता: आश्रित अथवा हिंदू अविभाजित परिवार अपने समर्थन तथा अनुरक्षण के लिए तथा जिसने पिछले वर्ष से संबंधित निर्धारण वर्ष के लिए अपनी कुल आय की गणना में धारा 80प के अंतर्गत किसी कटौती का दावा न किया हो;
(ग) "विकलांगता" का अर्थ विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 2 के वाक्यांश (i) में निर्दिष्ट अर्थ होगा तथा राष्ट्रीय स्वालीनता कल्याण ट्रस्ट, मस्तिष्क पक्षाघात, मानसिक मंदता तथा बहु विकलांगता अधिनियम, 1999 की धारा 2 के वाक्यांश (क), (ग) तथा (ज) में संदर्भित "स्वालीनता", "मस्तिष्क पक्षाघात" तथा "बहु विकलांगता" शामिल हैं
(घ) "जीवन बीमा निगम" का अर्थ धारा 88 की उप-धारा (8) के वाक्यांश (iii) में निर्दिष्ट समान अर्थ होगा।
(ड़) चिकित्सा प्राधिकारी का अर्थ विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 2 के वाक्यांश (त) अथवा ऐसे अन्य चिकित्सा प्राधिकारी से है जिसे राष्ट्रीय स्वालीनता कल्याण ट्रस्ट, मस्तिष्क पक्षाघात, मानसिक मंदता तथा बहु विकलांगता अधिनियम, 1999 की धारा 2 के वाक्यांश (क), (ग), (ज), (ञ) तथा (ण) में संदर्भित "स्वालीनता", "मस्तिष्क पक्षाघात" तथा "बहु विकलांगता" द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, में संदर्भितानुसार चिकित्सा प्राधिकारी से हैं।
(च) "विकलांग व्यक्ति" का अर्थ विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 2 के वाक्यांश (न) में तथा राष्ट्रीय स्वालीनता कल्याण ट्रस्ट, मस्तिष्क पक्षाघात, मानसिक मंदता तथा बहु विकलांगता अधिनियम, 1999 की धारा 2 के वाक्यांश (ञ) संदर्भित व्यक्ति से हैं।
(छ) "गंभीर विकलांग व्यक्ति का अर्थ" हैं -
(i) व्यक्ति के एक अथवा एक से अधिक विकलांगता के अस्सी अथवा उससे अधिक होने की स्थिति में, जैसा विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 56 की उप-धारा (4) में संदर्भित हैं; अथवा
(ii) राष्ट्रीय स्वालीनता कल्याण ट्रस्ट, मस्तिष्क पक्षाघात, मानसिक मंदता तथा बहु विकलांगता अधिनियम, 1999 की धारा 2 के वाक्यांश (ण) में संदर्भित गंभीर विकलांग व्यक्ति ;
(ज) "निर्दिष्ट कंपनी" का अर्थ यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (उपक्रम का अंतरण एवं निरसन) अधिनियम, 2002 की धारा 2 के वाक्यांश (ज) में संदर्भित कंपनी से हैं
5.5.6 चिकित्सा उपचार आदि के संबंध में कटौती (धारा 80घघख) :
धारा 80घघख स्वयं के लिए अथवा आश्रित के लिए नियम 11घघ (1) में निर्दिष्ट हो सकने वाले ऐसी बीमारी अथवा रोग के चिकित्सा उपचार के लिए वास्तविक रूप से दी गई किसी राशि के भुगतान के लिए कर्मचारी जो पिछले वर्ष के दौरान भारत में निवासी है, की स्थिति में कटौती की स्वीकृति देता है। स्वीकृत कटौती कर्मचारी अथवा उसके आश्रित अथवा रू. 40,000 जो भी कम हो, के संबंध में वास्तविक रूप से दी गई राशि के समान होती है।
अब कटौती ऑन्कोलॉजिस्ट, एक यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, एक हेमेटोलॉजिस्ट, एक इम्यूनूलॉजिस्ट अथवा ऐसे अन्य विशेषज्ञ, जैसा नियम 11घघ में निर्दिष्ट हैं, द्वारा निर्धारण के आधार पर की स्वीकृत हो सकती है। हालांकि दावे की राशि को राशि द्वारा कम किया जाएगा यदि कर्मचारी द्वारा बीमाकर्ता अथवा प्रतिपूर्ति प्राप्त होती हैं। आगे व्यक्ति जिसके समक्ष ऐसा दावा किया जाता है जो वरिष्ठ नागरिक हो (60 वर्ष अथवा उससे अधिक) तो एक लाख रूपए तक की कटौती की स्वीकृति है।
इस धारा के लिए, कर्मचारी की स्थिति में "आश्रित" अर्थात् व्यक्ति, व्यक्ति का जीवनसाथी, बच्चे, माता-पिता, भाई तथा बहन अथवा इनमें से कोई कर्मचारी पर अपने समर्थन तथा अनुरक्षण जो पूर्ण अथवा मुख्य रूप आश्रित हो, से है। अधिसूचना एसओ सं. 2791(ड़) दिनांक 12.10.2015 के मार्फत, नियम 11घघ को प्रपत्र 10-I में प्रमाणपत्र की प्रस्तुति की अनिवार्यता हटाने के लिए संशोधित किया गया है। नुस्खे के निगर्मन करने वाले विशेषज्ञ के नाम, पते, पंजीकरण सं. एवं पंजीकरण सहित मरीज का नाम तथा आयु, बीमारी/रोग का नाम सन्निहित नियमों में निर्दिष्टानुसार विशेषज्ञ द्वारा निर्धारण अब आपेक्षित हैं।
5.5.7 उच्च शिक्षा के लिए, लिए गए ऋण पर ब्याज के संबंध में कटौती (धारा 80ड़) :
धारा 80ड़ उसकी उच्च शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से अथवा अपने जीवनसाथी अथवा अपने बच्चों अथवा विद्यार्थी जिसका वह कानूनी अभिभावक हैं, की उच्च शिक्षा के लिए किसी वित्त संस्थान अथवा किसी अनुमोदित धर्मार्थ सस्थांन द्वारा लिए गए ब्याज के भुगतान के संबंध में कटौती की स्वीकृति देता है।
कटौती उस वित्त वर्ष के लिए कुल आय की गणना में स्वीकृत की जाएगी जिसमें कर्मचारी लिए गए ऋण पर ब्याज देता हैं तथा तुरंत उत्तरगामी सात वित्तीय वर्षों अथवा वित्त वर्ष तक जिसमें कर्मचारी द्वारा पूर्णता ब्याज दिया जाता है, जो भी पहले हो —
इस धारा के लिए —
(क) "अनुमोदित धर्मार्थ संस्थान" अर्थात् धारा 10(23ग) में निर्धारित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित तथा धर्मांर्थ संस्थान के लिए संस्थापित संस्थान अथवा धारा 80छ(2)(क) में संदर्भित संस्थान ;
(ख) "वित्तीय संस्थान" अर्थात् एक बैंकिंग कंपनी जिसके लिए बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 लागू होते हैं (उस अधिनियम की धारा 51 में संदर्भित किसी बैंक अथवा बैंकिंग संस्थान सहित) अथवा अन्य कोई वित्तीय संस्थान जिसे केंद्र सरकार इस संबंध में आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना में निर्दिष्ट कर सकती हैं।
(ग) "उच्च शिक्षा" अर्थात् केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अथवा ऐसा करने के लिए केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत किसी विद्यालय, बोर्ड अथवा विश्वविद्यालय से उच्च माध्यमिक शिक्षा अथवा इसके समकक्ष को उत्तीर्ण करने के पश्चात् किया गया कोई अध्ययन पाठ्यक्रम
5.5.8 कुछ गृह संपत्तियों के लिए, लिए गए ऋण पर ब्याज के संदर्भ में कटौती (धारा 80ड़ड़क) :
धारा 80ड़ड़क को वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 (2019 की 23) द्वारा प्रस्तुत किया गया है जो एक आवासीय गृह संपत्ति के अधिग्रहण के लिए किसी वित्तीय संस्थान द्वारा उसके द्वारा लिए गए ऋण पर देययोग्य ब्याज के संदर्भ में व्यक्ति (धारा 80ड़ड़ के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए योग्य नहीं है) की कुल आय से कटौती की अनुमति देती है यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं :
(i) ऋण 1 अप्रैल, 2019 को प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च 2020 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान वित्तीय संस्थान द्वारा मंजूर किया गया हो ;
(ii) आवासीय गृह संपत्ति की स्टांप ड्यूटी राशि 45 लाख रूपए से अधिक न हो
(iii) निर्धारिती के पास ऋण की मंजूरी की तिथि पर कोई आवासीय गृह संपत्ति न हो
इस धारा के लिए —
(क) वाक्यांश "वित्तीय संस्थान" का अर्थ वही होगा जो धारा 80ड़ड़ की उप-धारा (5) के वाक्यांश (क) में निर्दिष्ट है
(ख) वाक्यांश "स्टांप ड्यूटी राशि" का अर्थ एक अचल संपत्ति के संबंध में स्टांप ड्यूटी के भुगतान के लिए केंद्र सरकार या एक राज्य सरकार के किसी प्राधिकारी द्वारा अपनाई गई या मूल्यांकित या मूल्यांकन किए जाने वाली राशि है।
इस कटौती की राशि रू. 1,50,000/- से अधिक नहीं होगी और इसकी अनुमति निर्धारण वर्ष 2020-21 और उसके बाद के निर्धारण वर्षों के लिए व्यक्ति की कुल आय की गणना में दी जाएगी।
जहां इस धारा के अंतर्गत कटौती की अनुमति इस धारा में संदर्भित किसी ब्याज के लिए दी जाती है तो उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के अंतर्गत ऐसे ब्याज के संदर्भ में किसी कटौती की अनुमति नहीं दी जाएगी।
5.5.9 इलैक्ट्रिक वाहन को खरीदने के लिए, लिए गए ऋण पर दिए जाने वाले ब्याज के संदर्भ में कटौती (80ड़ड़ख)
धारा 80ड़ड़क को वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 (2019 की 23) द्वारा प्रस्तुत किया गया है जो एक इलैक्ट्रिक वाहन को खरीदने के लिए किसी वित्तीय संस्थान द्वारा उसके ओर से लिए गए ऋण पर देययोग्य ब्याज के संदर्भ में व्यक्ति की कुल आय से कटौती की अनुमति देती है यदि वित्त संस्थान द्वारा ऋण 01.04.2019 से 31.03.2023 की अवधि के बीच दिया गया हो।
इस धारा के लिए —
(क) "इलैक्ट्रिक वाहन" का अर्थ एक ऐसा वाहन जो विशेष रूप से एक इलैक्ट्रिक मोटर से ऊर्जा लेता हो जिसकी कर्षण ऊर्जा वाहन में लगी कर्षण बैट्री से ही दी जाती हो और ऐसा इलैक्ट्रिक रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम हो जिसको ब्रेकिंग के दौरान वाहन की गतिज ऊर्जा को इलैक्ट्रिकल ऊर्जा मे परिवर्तित करने के लिए मुहैया कराया गया हो
(ख) "वित्तीय संस्थान" का अर्थ एक बैंकिंग कंपनी जिस पर बैंकिंग नियामक अधिनियम, 1949 (1949 की 10) लागू होते हो या कोई बैंक या बैंकिंग संस्थान जो उस अधिनियम की धारा 51 में संदर्भित हो और इसमें जमा लेने वाले गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी या एक प्रणालीगत महत्वपूर्ण जमा न लेने वाले गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान शामिल है जैसा धारा 43ख के स्पष्टीकरण 4 के वाक्यांश (ड़) और (छ) में निर्दिष्ट है।
इस कटौती की राशि रू. 1,50,000/- से अधिक नहीं होगी और इसकी अनुमति निर्धारण वर्ष 2020-21 और उसके बाद के निर्धारण वर्षों के लिए व्यक्ति की कुल आय की गणना में दी जाएगी।
जहां इस धारा के अंतर्गत कटौती की अनुमति इस धारा में संदर्भित किसी ब्याज के लिए दी जाती है तो उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के अंतर्गत ऐसे ब्याज के संदर्भ में किसी कटौती की अनुमति नहीं दी जाएगी।
5.5.10 कुछ फंड, धर्माथ संस्थानों आदि हेतु चंदे के संबंध में कटौती आदि (धारा 80छ) :
धारा 80छ को उन मामलों में विभिन्न कोष, धर्मार्थ संस्थानों आदि को किए गए दान के कारण कटौती के लिए धारा 80 छ को मुहैया कराया गया है। यदि जहां कर्मचारी अपने संबंधित नियोक्ता के माध्यम से प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, मुख्य मंत्री राहत कोष अथवा उप-राज्यपाल राहत कोष को दान करता है तो ऐसे कोष के लिए किए गए दान के संबंध में ऐसे प्रत्येक कर्मचारी को पृथक प्रमाणपत्र जारी करना संभव नहीं हैं क्योंकि इन कोष को किए गए अंशदान समेकित चेक के रूप में होते है। एक कर्मचारी इन कोषों के लिए दान करता है तो वह धारा 80छ के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए पात्र हैं। यह एतद्द्वारा, प्रमाणित किया जाता हैं कि उक्तानुसार ऐसे दान के संबंध में दावा इस संबंध में - परिपत्र सं. 2/2005, दिनांक 12.1.2005, संरेखण तथा संवितरण अधिकारी (डीडीओ)/नियोक्ता द्वारा जारी प्रमाणपत्र द्वारा जारी प्रमाणपत्र के आधार पर धारा 80छ के अंतर्गत स्वीकार्य होगा।
इस धारा के अंतर्गत कोई कटौती रू. 2000/- से अधिक के दान की राशि की स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं जबतक राशि नकद के अलावा किसी अन्य विधि द्वारा दिया जाता है।
5.5.11 दिए गए किराये के संबंध में कटौती (धारा 80छछ)
धारा 80छछ अपने स्वयं के निवास के लिए उसके द्वारा दिए गए गृह किराये के संबंध में कटौती हेतु कर्मचारी को कटौती की स्वीकृति देता है। ऐसी कटौती निम्नलिखित शर्तों के अनुसार स्वीकार्य हैं :—
(क) कर्मचारी ने विशेष रूप से उसे स्वीकृत किसी गृह किराये की प्राप्ति नहीं की है, जो अधिनियम की धारा 10(13क) के अंतर्गत छूट हेतु अर्हता प्राप्त करता है;
(ख) कर्मचारी ने प्रपत्र सं. 10खक में घोषणा को दाखिल किया हो (परिशिष्ट X)
(ग) कर्मचारी ने न खरीदा हो :
(i) उसके अथवा उसके जीवनसाथी अथवा नाबालिग बालक द्वारा कोई आवासीय निवास अथवा जहां ऐसा कर्मचारी हिंदु अविभाजित परिवार का सदस्य हैं, ऐसे परिवार द्वारा, ऐसे स्थान पर जहां वह सामान्य रूप से निवास करता है अथवा अपने कार्यालय के कर्तव्यों का निष्पादन करता है अथवा अपने व्यापार अथवा पेशे को चलाता है; अथवा
(ii) किसी अन्य स्थान, किसी आवासीय स्थान पर, जो कर्मचारी के अधिपत्य में हो, जिसकी राशि धारा 23(2)(क) अथवा धारा 23(4)(क), जैसी भी स्थिति हो, के अंतर्गत निर्धारित होनी है।
(घ) वह अपनी कुल आय के 10 प्रतिशत से अधिक के उसके द्वारा दिए गए गृह किराये के संबंध में कुल कटौती का हकदार होगा। कटौती कुल आय के 25 प्रतिशत के समान अथवा रू. 5,000/- प्रति माह , जो भी कम हो, होगी। इन प्रतिशतों के परिणामों की गणना के लिए कुल आय धारा 80छछ के अंतर्गत किसी कटौती को करने से पूर्व आंकी जाएगी।
संरेखण तथा संवितरण प्राधिकारी को स्वयं संतुष्ट करना चाहिए कि उक्त निर्दिष्ट समस्त शर्तें ऐसी कटौती से पूर्व कर्मचारी हेतु उनके द्वारा स्वीकृत हैं। उन्हें किराये के वास्तविक भुगतान के प्रमाण की प्रस्तुति पर आग्रह कर स्वयं को भी इस संबंध में संतुष्ट करना चाहिए।
5.5.12 वैज्ञानिक अनुसंधान अथवा ग्रामीण विकास के लिए कुछ दान के सबंध में कटौती धारा 80छछक
धारा 80छछक नीचे तालिका में दी गई किसी राशि के दान के संबंध में कर्मचारी की कुल आय से कटौती की स्वीकृति देता है :
| क्र.सं. | व्यक्तियों को किया गया दान | धारा के अंतर्गत अनुमोदित अधिसूचना | अनुमोदन/अधिसूचना की अनुमति देने वाला प्राधिकारी |
| 1 | एक अनुसंधान संघ जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रयुक्त होने वाले विश्वविद्यालय, महाविद्यालय अथवा अन्य संस्थान हेतु अथवा वैज्ञानिक अनुसंधान का उत्तरदायित्व हो | धारा 35(1)(ii) के अंतर्गत | केंद्र सरकार |
| 2 | एक अनुसंधान संघ जिसका उद्देश्य सामाजिक विज्ञान अथवा सांख्यकीय अनुसंधान में अनुसंधान के लिए प्रयुक्त होने हेतु विश्वविद्यालय, महाविद्यालय अथवा अन्य संस्थान हेतु अथवा सामाजिक विज्ञान अथवा सांख्यकीय अनुसंधान में अनुसंधान का उत्तरदायित्व हो | धारा 35(1)(ii) के अंतर्गत | केंद्र सरकार |
| 3 | एक संघ अथवा संस्थान, जिसका धारा 35गगक के प्रयोजन के लिए अनुमोदित ग्रामीण विकास के किसी कार्यक्रम के निष्पादन के लिए प्रयुक्त होने हेतु ग्रामीण विकास के किसी कार्यक्रम के उत्तरदायित्व का उद्देश्य हो | धारा 35गगक(2) के अंतर्गत प्रमाणपत्र की प्रस्तुति | नियम 6ककक के अंतर्गत प्राधिकृत प्राधिकारी |
| 4 | एक संघ अथवा संस्थान जिसका उद्देश्य ग्रामीण विकास के कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए व्यक्ति का प्रशिक्षण हो | धारा 35गगक(2क) के अंतर्गत प्रमाणपत्र की प्रस्तुति | नियम 6ककक के अंतर्गत प्राधिकृत प्राधिकारी |
| 5 | एक संघ या संस्थान जिसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधन या वनीकरण के किसी संरक्षण कार्यक्रम का संचालन है | धारा 35गगख के लिए मंजूरी | केंद्र सरकार द्वारा स्थापित और अधिसूचित |
| 6 | वनीकरण के लिए एक फंड | धारा 35गगख की उप-धारा (1) के वाक्यांश (ख) के अंतर्गत अधिसूचित | केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित तथा स्थापित |
| 7 | एक ग्रामीण विकास फंड | धारा 35गगक(1)(ग) के अंतर्गत अधिसूचित | केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित तथा स्थापित |
| 8 | राष्ट्रीय शहरी गरीबी उन्मूलन कोष | धारा 35गगक(1)(घ) के अंतर्गत अधिसूचित | केंद्र सरकार द्वारा स्थापित तथा अधिसूचित |
निम्न स्थिति में इस धारा के अंतर्गत कोई कटौती नहीं होगी :
(i) कर्मचारी की कुल आय जिसमें आय शामिल है जो "व्यापार अथवा पेशे का लाभ तथा प्राप्तियां" विषय के अंतर्गत देययोग्य हैं।
(ii) रू. 2000 से अधिक दान की राशि जबतक ऐसी राशि नकद को छोड़कर किसी अन्य विधि में न दी जाती हो।
आरेखण तथा संवितरण प्राधिकारी को स्वयं को संतुष्ट करना होगा कि ऐसी कटौतियों के समक्ष पूरी की गई उक्त निर्दिष्ट शर्तों को कर्मचारी हेतु उनके द्वारा पूरा किया गया है। उन्हें व्यक्ति, जिनके लिए दान किया गया है, द्वारा दान के वास्तविक भुगतान तथा प्राप्ति के प्रमाण की प्रस्तुति पर इस संबध में आग्रह द्वारा स्वयं को भी संतुष्ट करना होगा तथा सुनिश्चित करना होगा कि स्वीकृति/अधिसूचना सही प्राधिकारी द्वारा जारी की गई हैं। डीडीओ को कर्मचारी द्वारा स्व: घोषणा द्वारा सुनिश्चित करना होगा कि वह "व्यापार अथवा व्यवसाय के लाभ तथा प्राप्तियों" से वेतन प्राप्त नहीं करता है।
5.5.13 बचत खाता में जमा पर ब्याज के संबंध में कटौती (धारा 80ननक) :
धारा 80ननक कर्मचारी, एक वरिष्ठ नागरिक कर्मचारी के तौर पर नहीं, को अपनी कुल आय, यदि इसमें एक बचत खाते में जमा (सावधि जमा के तौर पर नहीं) पर ब्याज के रूप में किसी भी प्रकार की आय शामिल हो, की निम्न राशि तक कटौती की अनुमति देता है :
(i) यदि जहां ऐसी आय की राशि कुल दस हजार रूपए से अधिक न हो, ऐसी पूर्ण राशि; और
(ii) किसी अन्य स्थिति में दस हजार रूपए
कटौती उपलब्ध होगी यदि यह बचत खाता निम्न में संरक्षित होता है :—
(क) बैंकिग संस्थान जिस पर बैंकिग नियामक अधिनियम, 1949 लागू होता है (उस अधिनियम की धारा 51 हेतु संदर्भित किसी बैंक अथवा बैंकिंग संस्थान सहित)
(ख) बैंकिंग (सहकारी भूमि बंधक बैंक अथवा सहकारी भूमि विकास बैंक सहित) के व्यापार को करने में लगी सहकारी संस्था; अथवा
(ग) भारतीय डाक जैसा भारतीय डाक घर अधिनियम, 1898 की धारा 2 के वाक्यांश (ट) में परिभाषित है
इस धारा के लिए "सावधि जमा" का अर्थ नियम अवधि की समाप्ति पर पुन:देययोग्य जमा है।
5.5.14 वरिष्ठ नागरिक के मामले में जमा पर ब्याज के संबंध में कटौती (धारा 80ननक)
धारा 80ननक को वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा प्रस्तुत किया गया है जो निम्न के साथ जमा पर ब्याज के रूप में आय के संदर्भ में उसकी कुल आय से एक वरिष्ठ नागरिक को कटौती की अनुमति देता है —
(क) बैंकिंग कंपनी जिस पर बैकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 लागू होते है (उस अधिनियम की धारा 51 में संदर्भित किसी बैंक या बैंकिंग संस्थान सहित)
(ख) बैंकिंग (सहकारी भूमि बंधक बैंक या सहकारी भूमि विकास बैंक सहित) के व्यापार करने वाले सहकारी संस्था; या
(ग) भारतीय डाक घर अधिनियम, 1898 की धारा 2 के वाक्यांश (ट) में परिभाषितानुसार एक डाकघर
जमा पर उक्त ब्याज के संदर्भ में कटौती की राशि निम्नानुसार है :—
(i) यदि जहां ऐसी आय की राशि कुल पचास हजार रूपए से अधिक न हो तो ऐसी पूरी राशि; और
(ii) अन्य मामलों में पचास हजार रूपए
हालांकि फर्म के किसी सांझेदार या संघ के किसी सदस्य या निकाय के किसी व्यक्ति के लिए धारा 80ननख के अंतर्गत किसी कटौती की अनुमति नहीं है यदि कथित ब्याज एक फर्म, व्यक्तियों के एक संघ या व्यक्तियों की निकाय द्वारा या उसकी ओर से रखे गए किसी जमा से प्राप्त होता है।
इसके लिए "वरिष्ठ नागरिक" का अर्थ भारत में रहने वाले एक व्यक्ति जो प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय साठ वर्ष या उससे अधिक आयु का व्यक्ति हो।
हालांकि, धारा 80ननख के अंतर्गत कटौती का दावा करने वाले करदाता धारा 80ननक के अंतर्गत कटौती के योग्य नहीं होगा।
6. रू. 5 लाख तक की कुल आय वाले व्यक्ति के लिए रू. 12,500 की छूट [धारा 87क]
वित्त अधिनियम 2019 प्रभावी तिथि 01.04.2019, उस करदाता, भारत के निवासी, को राहत प्रदान कराता है जो न्यून आय श्रेणी में है अर्थात् जिनकी कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक न हो। धारा 87क के अंतर्गत छूट की राशि रू. 12,500/- अथवा देय कर की राशि, निर्धारण वर्ष 2019-20 से जो भी कम हो, उपलब्ध है।
7. अनुमोदित सेवानिवृत्ति फंड से अंशदान तथा मान्यता प्राप्त भविष्य निधि के अंतर्गत संचित अधिशेष के भुगतान पर टीडीएस
7.1 कर्मचारी को संचित शेष राशि के भुगतान के लिए मान्यताप्राप्त भविष्य निधि फंड के न्यासियों अथवा फंड विनिमय द्वारा अनुमोदित कोई व्यक्ति, उन मामलों में कटौती करेगा जहां अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग क का नियम 9 का उप-नियम (1) लागू होता हो, अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 10 में निर्दिष्ट कटौती उससे करने के लिए जब कर्मचारी को संचित शेष राशि का भुगतान किया गया हो। संचित शेष राशि को "वेतन" विषय के अंतर्गत देययोग्य आय के तौर पर समझा जाएगा।
7.2 नियोक्ता द्वारा किसी प्रकार के अंशदान, ऐसे अंशदान, यदि हो, पर ब्याज सहित, कर्मचारी को दिया गया स्वीकृत सेवानिवृत्ति फंड ,दी गई राशि पर कर अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग ख के नियम 6 में उपलब्ध सीमा तक फंड को न्यासियों द्वारा काटा जाएगा। टीडीएस उस कर की औसत दर तक होना चाहिए जिस पर कर्मचारी पूर्ववर्ती तीन वर्षों अथवा अवधि, यदि अवधि तीन वर्ष से कम हो व वह फंड का सदस्य रहा हो, के दौरान कर के लिए देने के लिए जिम्मेदार था।
कटौती कराने वाला वापस दिए गए अंशदान (कर, यदि हो, सहित) के कारण किसी प्रकार की कुल राशि पर कर काटने के लिए जिम्मेदार होगा भले ही फंड अथवा फंड का कोई भाग स्वीकृत सेवानिवृत्ति फंड में छोड़ दिया गया हो।
7.3 अधिनियम की धारा 192क के अनुसार, प्रभावी तिथि 01.06.2015, ईपीएफ एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा के अंर्तगत बनाई गई ईपीएफ योजना के ट्रस्टी तथा कर्मचारियों को देय संघटित शेष का भुगतान करने के लिए योजना के अंतर्गत प्राधिकृत कोई व्यक्ति, यदि एक प्राधिकृत भविष्य निधि में भाग लेने वाले कर्मचारियों के शेष संघटित शेष चौथी अनुसूची, जो कर्मचारी हेतु संघटित देय शेष के भुगतान के समय लागू न हो रहा हो, के भाग क के नियम 8 के प्रावधानों के कारण उसकी कुल आय में शामिल होने योग्य हैं, 10 प्रतिशत की दर पर उसपर आयकर की कटौती करेगा यदि ऐसे भुगतान की राशि अथवा ऐसे भुगतान का कुल रू. 50,000/- से अधिक होता है। यदि कर्मचारी अपने पैन सं. को मुहैया नहीं कराता हैं तो कटौती अधिकतम सीमांत दर पर किया जाना होगा।
चौथी अनुसूची के भाग-क के नियम 8 में निम्नलिखित शेष संचित राशि शामिल नहीं है और कुल आय से कर्मचारियों के लिए देययोग्य है
(i) यदि, उसने पाच वर्षों या उससे अधिक की अवधि के लिए अपने नियोक्ता के साथ निरंतर सेवा की हो; या
(ii) यदि, यद्यपि उसने ऐसी निरंतर सेवा न की हो, सेवा निम्न कारणों से निरस्त की गई हो —
• कर्मचारी के खराब स्वास्थ्य के कारण
• नियोक्ता के व्यापार के जारी न रहने पर या कम होने के कारण
• कर्मचारी के नियंत्रण से परे किसी अन्य कारण से या
(iii) यदि, उसकी नौकरी के दौरान, कर्मचारी किसी अन्य नियोक्ता से नौकरी प्राप्त करता है तो ऐसी सीमा तक ऐसे संचित शेष राशि को अन्य नियोक्ता द्वारा अनुरक्षित किसी प्राधिकृत भविष्यनिधि में उसके व्यक्तिगत खाते में स्थानांतरित की जाती है, या
(iv) यदि कर्मचारी के ऋण हेतु पूरी स्थाई शेष राशि धारा 80गगघ में संदर्भित पेंशन योजना के अंतर्गत उसके खाते में स्थानांतरित की जाती है और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाती है
जब संचित राशि देय हो और उसके पूर्व नियोक्ता द्वारा अनुरक्षित किसी अन्य प्राधिकृत भविष्यनिधि में उसके व्यक्तिगत खाते से स्थानांतरित कोई राशि शामिल करते हुए एक कर्मचारी के लिए देययोग्य बन जाती है तो पहले वाले नियोक्ता के अंतर्गत दी गई निरंतर सेवा की अवधि या अवधियों को निरंतर सेवा की अवधि की गणना उक्त (i) और (ii) के लिए गिनी जाएगी। (i) से (iv) में उक्त चार स्थितियों के अंतर्गत संचित शेष राशि और कर्मचारी को देययोग्य राशि धारा 192क के अंतर्गत टीडीएस के लिए उत्तरदायी नहीं है।
8. डीडीओ द्वारा प्राप्त किये जाने वाले दावों का प्रमाण/सबूत
निर्धारिती की अनुमानित आय के लिए या कर कटौती की गणना के लिए, धारा 192(2घ) मुहैया कराती है कि देने (डीडीओ) के लिए उत्तरदायी व्यक्ति निर्धारिती से दावे का प्रमाण या सबूत या खास दावा प्राप्त करेगा जैसे गृह किराया भत्ता (जहां कुल वार्षिक किराया एक लाख रूपए से अधिक हो), शीर्षक "गृह संपत्ति से आय" के अंतर्गत ब्याज की कटौती और 12खख के अनुसार अध्याय VI-क के अंतर्गत कटौती नियमों के नियम 26ग द्वारा निर्धारित है।
आगे, नियम 26ग के साथ पठित धारा 192 (2घ) के अनुसार, डीडीओ के लिए यह आवश्यक है कि कथित छूट देने से पहले अवकाश यात्रा रियायत या सहायता के लिए छूट का दावे के संदर्भ में विवरण/प्रमाण को प्राप्त करे। कर्मचारी द्वारा विवरणों को प्रस्तुत करने के लिए प्रासंगिक प्रपत्र प्रपत्र 12खख है।
यह ध्यान दिया जा सकता है कि डीडीओ को निर्दिष्ट अवधि के दौरान किए गए विशेष प्रकार के व्यय की रसीदों की प्राप्ति के बाद आयकर छूट देनी होगी जैसाकि पैरा 5.3.1 में संदर्भित है।
9. कटौती किए जाने वाले आयकर की गणना :
9.1 धारा 192 के लिए वेतन आय की गणना निम्नानुसार की जाएगी :—
(क) पहले पैरा 5.2 में निर्दिष्ट सभी आय सहित पैरा 5.1 में निर्दिष्टानुसार कुल आय की गणना तथा पैरा 5.3 में निर्दिष्ट आय को छोड़कर
(ख) उक्त (क) में शामिल आंकड़ों से पैरा 5.4 में निर्दिष्ट कटौती की स्वीकृति तथा कर्मचारी के शुद्ध वेतन में शामिल राशि की गणना।
(ग) पैरा 3.5 में निर्दिष्ट सामान्य कथन के रूप में दिखाई गई कुल सकल आय शामिल करने हेतु अन्य सभी विषयों - "भवन संपत्ति", "व्यापार अथवा व्यवसाय की लाभ व परिलब्धियां", "पूंजीगत लाभ", तथा "अन्य स्रोतों से आय" से आय को शामिल करते हुए। हालांकि, यह स्मरण कराया जाता है कि "भवन संपत्ति से आय" विषय के अंतर्गत रू. 2.00 लाख की सीमा तक नुकसान को छोड़कर ऐसे किसी विषय के अंतर्गत किसी प्रकार का नुकसान डीडीओ द्वारा स्वीकार्य नहीं होगा।
(घ) उक्त (ग) में शामिल आंकड़ों से पैरा 5.5 में निर्दिष्ट कटौती स्वीकृत है यदि प्रासंगिक शर्तों को पूरा किया जाए। पैरा 5.5 में निर्दिष्ट शुरूआती सीमा के अनुसार कटौती की कुल राशि उक्त (ख) में निर्दिष्ट राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए तथा यदि यह अधिक होती है तो, उसे उस राशि तक सीमित किया जाना चाहिए।
यह कर्मचारी की कुल आय होगी जिस पर कटौती किए जाने के लिए आयकर आपेक्षित है। यह आय दस रूपए के नजदीकी गुणज की पूर्णाक राशि होनी चाहिए।
9.2 ऐसी आय पर आयकर कर्मचारी की आयु को ध्यान में रखते हुए इस परिपत्र के पैरा 2.1 में दी गई दरों पर और धारा 206कक के प्रावधानों के अनुसार आंकी जाएगी जैसा पैरा 4.8 में चर्चा की गई है। धारा 87क के अनुसार छूट रू. 12500/- तक योग्य व्यक्तियों (पैरा 6 देखें) को दी जा सकती है। लागू होने वाली स्थितियों में अधिभार की गणना की जाएगी (पैरा 2.2 देखें)
9.3 कुल देय कर लेने के लिए देय कर की राशि पर शिक्षा उपकर, लागू हो, (प्राथमिक हेतु 2 प्रतिशत तथा माध्यमिक शिक्षा हेतु 1 प्रतिशत) लगाकर बढ़ाया जाएगा।
9.4 पैरा 9.3 के अंतर्गत आने वाले कर की राशि समान किस्तों के रूप में प्रतिमाह काटी जाएगी। पिछली कटौतियों के अधिक अथवा कम होने की स्थिति में वह उसी वित्त वर्ष के दौरान आगामी कटौतियों की राशि को बढ़ाकर अथवा घटाकर समायोजित कर दी जाएगी।
10. विविध
10.1 यह निर्देश संपूर्ण नहीं है तथा यह नियोक्ता को वेतन से कर कटौती के संबंध में विभिन्न प्रावधानों को समझाने के लिए है जहां भी किसी भी प्रकार की आशंका हो, वहां आयकर अधिनियम, 1961, आयकर नियम, 1962, वित्त अधिनियम, 2020 (2020 की सं. 12), कराधान एंव अन्य कानून (छूट और कुछ प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2020 (2020 की सं. 38), प्रासंगिक परिपत्र/अधिसूचना आदि को संदर्भित किया जा सकता है।
10.2 किसी सहायता की स्थिति में आयकर विभाग के स्थानीय जनसंपर्क अधिकारी/आंकलन अधिकारी को संपर्क किया जा सकता है।
10.3 ये निर्देश केंद्र/राज्य सरकारों के नियंत्रण के अंतर्गत जो भी है, सहित सभी संवितरण अधिकारी तथा उपक्रम के ध्यान में लाए जा सकते है।
10.4 इस परिपत्र की प्रतियां निम्नलिखित वेबसाइट www.finmin.nic.in और www.incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध है
हिन्दी संस्करण का अनुसरण होगा
(अमित राज)
निदेशक (आईटी-बजट), सीबीडीटी
निम्न को प्रति
1. समस्त राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश
2. सभी मंत्रालय/भारत सरकार आदि के विभाग
3. राष्ट्रपति सचिवालय
4. उप-राष्ट्रपति सचिवालय
5. प्रधानमंत्री कार्यालय
6. लोकसभा सचिवालय
7. राज्यसभा सचिवाालय
8. मंत्रीमंडल सचिवालय
9. सचिव, संघ लोक सेवा आयोग, धौलपुर हाउस,नई दिल्ली
10. सचिव, कर्मचारी चयन आयोग, लोधी कॉम्पलैक्स, नई दिल्ली
11. सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली
12. चुनाव आयोग, नई दिल्ली, योजना आयोग, नई दिल्ली
13. राज्यपाल सचिवालय/सभी राज्यों/केद्र शासित प्रदेशों के उप राज्यपाल
14. मंत्रालयों/भारत सरकार के विभागों हेतु सभी एकीकृत वि्त्तीय सलाहाकार
15. राजस्व विभाग, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अधीनस्थ सभी विभागों के प्रमुख एवं कार्यालय
16. सेना मुख्यालय, नई दिल्ली
17. वायु सेना मुख्यालय, नई दिल्ली, नौसेना मुख्यालय, नई दिल्ली
18. डाक एवं तार महानिदेशक, नई दिल्ली
19. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
20. सभी राज्यों के महालेखापाल
21. लेखा निदेशक (केंद्रीय), कोलकाता, नई दिल्ली, मुंबई
22. सभी बैंक (भारतीय स्टेट बैंक सहित सार्वजनिक क्षेत्र के, राष्ट्रीयकृत बैंक)
23. सचिव, भारतीय रिजर्व बैंक केंद्रीय कार्यालय पी.ओ. नं. 406, मुंबई-400001 (25 प्रतियां, इसकी शाखाओ में वितरित करने के लिए)
24. लेखा अधिकारी, असम राइफल्स महानिरीक्षक, (मुख्यालय), शिलांग, वाणिज्य व उद्योग के समस्त चैंबर्स
25 लोक सभा/राज्य सभा सचिवालय पुस्तकालय (प्रति 15 प्रतियां)
26. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की तकनीकी विंग में सभी कार्यालय एवं हिस्से
27. सहायक मुख्य निरीक्षक, आरबीआई निरीक्षण विभाग, क्षेत्रीय प्रकोष्ठ मुंबई/कोलकाता/चेन्नई/नई दिल्ली/तथा कानपुर
28. लेखा नियंत्रक, आर्थिक मामला विभाग, नई दिल्ली
29. प्रबंधक, भारतीय रिजर्व बैंक, लोक ऋण कार्यालय, अहमदाबाद/बेंगलुरू/भुवनेश्वर/मुंबई/कोलकाता/हैदराबाद/कानपुर/जयपुर/चेन्नई/नागपुर/नई दिल्ली/पटना/ग्वालियर/त्रिवेंद्रम
30. रक्षा लेखा महानियंत्रक, नई दिल्ली
31. लेखा परीक्षा निदेशालय, रक्षा सेवाएं, नई दिल्ली, राष्ट्रीय बचत संगठन, नागपुर
32. उप महालेखापाल, डाक व तार, कोलकाता
33. कानूनी सलाहकार, निर्यात-आयात बैंक, पी.ओ. नं. 19969, मुंबई-4000021, मुख्य लेखा नियंत्रक, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, लोक नायक भवन, खान मार्किट, नई दिल्ली
34. एन.एस. शाखा, आर्थिक मामला विभाग, नई दिल्ली
35. कानून मंत्रालय (कानूनी मामला विभाग), शास्त्री भवन, नई दिल्ली, भारत में संचालित सभी विदेशी बैंक
36. एयर इंडिया, नई दिल्ली
37. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नई दिल्ली
अनुलग्नक - I
कुछ उदाहरण
उदाहरण 1
निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए
(क) साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी ( पुरूष व महिला) तथा निम्न कुल वेतन वाले कर्मचारियों की स्थिति में आयकर की गणना
(i) रू. 2,50,000/-,
(ii) रू. 6,00,000/-,
(iii) रू. 10,50,000/-,
(iv) रू. 55,50,000/-, तथा
(v) रू. 1,10,50,000/—
(ख) उक्त कर्मचारियों की स्थिति में टीडीएस राशि क्या होगी, उनके द्वारा उनके डीडीओ/कार्यालयों को पैन जमा नहीं कराए जाने की स्थिति में :
| विवरण | रूपए (i) |
रूपए (ii) |
रूपए (iii) |
रूपए (iv) |
रूपए (v) |
| सकल वेतन आय (भत्तों सहित) | 2,50,000 | 6,00,000 | 10,50,000 | 55,50,000 | 1,10,50,000 |
| जी.पी.एफ अंशदान | 45,000 | 50,000 | 1,00,000 | 1,00,000 | 1,00,000 |
कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
| विवरण | रूपए (i) |
रूपए (ii) |
रूपए (iii) |
रूपए (iv) |
रूपए (v) |
| सकल वेतन | 2,50,000 | 6,00,000 | 10,50,000 | 55,50,000 | 1,10,50,000 |
| घटा : धारा 16(iक) के अंतर्गत मानक कटौती | 50000 | 50000 | 50000 | 50000 | 50000 |
| घटा : धारा 80 ग के तहत कटौती | 45,000 | 50,000 | 1,00,000 | 1,00,000 | 1,00,000 |
| करयोग्य आय | 1,55,000 | 5,00,000 | 9,00,000 | 54,00,000 | 1,09,00,000 |
| (क) उसपर देययोग्य कर | शून्य | शून्य* | 92,500 | 14,32,500 | 30,82,500 |
| अधिभार | 1,43,250 | 4,62,375 | |||
| जोड़े: 4 प्रतिशत @ से स्वास्थ्य व शिक्षा अधिकर | शून्य | शून्य | 3700 | 63,030 | 1,41,795 |
| कुल देय कर | शून्य | शून्य | 96200 | 16,38,780 | 36,86,670 |
@ या आधार नंबर जो भी स्थिति हो
* धारा 87क के अंतर्गत रू. 12500 की छूट के बाद
# यह ध्यान दिया जा सकता है कि कर देयता एकसमान न हो यदि करदाता अधिनियम की धारा 115खकग के अंतर्गत रियायती कर व्यवस्था को चुनता है
उदाहरण 2
निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए
साठ वर्ष की आयु से नीचे के आश्रित विकलांग वाले कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना (नियोक्ता को वैध पैन की प्रस्तुति पर)
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | सकल वेतन | 4,70,000 |
| 2 | विकलांग आश्रित (लेकिन गंभीर विकलांगता न हो) के उपचार पर खर्च की गई राशि | 7,000 |
| 3 | विकलांग आश्रित (लेकिन गंभीर विकलांगता न हो) के रखरखाव के लिए वार्षिकी से संबंधित भारतीय जीवन बीमा निगम को दी गई राशि | 60,000 |
| 4 | जीपीएफ अंशदान | 25,000 |
| 5 | भुगतान की हुई एलआईपी | 10,000 |
| 6 | बचत खाते पर ब्याज आय | 12,000 |
कर की गणना
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | सकल वेतन | 4,70,000 |
| 2 | घटा : धारा 16(iक) के अंतर्गत मानक कटौती | 50,000 |
| 3 | जोड़ें : अन्य स्रोतों से आय बचत खाते पर ब्याज आय | रू. 12,000 |
| 4 | कुल सकल आय | 4,32,000 |
| 5 | घटाया : धारा 80घघ के अंतर्गत कटौती (केवल रू. 75,000/- तक सीमित) | 60,000 |
| 6 | घटाया : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती (i) जीपीएफ रू. 25,000/— (ii) एलआईपी : रू. 10,000/- | 35,000 |
| 7 | घटाया : बचत खाते से ब्याज आय पर धारा 80ननक के अंतर्गत कटौती (रू. 10,000/- तक सीमित) | 10,000 |
| 8 | कुल आय | 2,97,000 |
| 9 | उस पर देययोग्य आयकर ( धारा 87क के अनुसार रू. 12,500 की छूट सहित) | शून्य |
| 10 | जोड़ें : 4 प्रतिशत की दर पर स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर | शून्य |
| 11 | कुल करयोग्य आय | शून्य |
| 12 | तक पूर्णाकिंत | शून्य |
@या आधार नंबर, जो भी स्थिति हो
# यह ध्यान दिया जा सकता है कि कर देयता एकसमान न हो यदि करदाता अधिनियम की धारा 115खकग के अंतर्गत रियायती कर व्यवस्था को चुनता है
उदाहरण 3
निर्धारण वर्ष 2022-23 हेतु
साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना जहां चिकित्सा उपचार पर किया गया खर्चा नियोक्ता द्वारा वहन किया गया हो (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | सकल वेतन | 5,55,000 |
| 2 | नियोक्ता द्वारा स्वयं तथा परिवार के आश्रित सदस्य पर चिकित्सा उपचार पर खर्च की गई राशि | 35,000 |
| 3 | जीपीएफ अंशदान | 20,000 |
| 4 | एलआईसी प्रीमियम | 20,000 |
| 5 | भवन बिल्डिंग की अग्रिम अदायगी | 25,000 |
| 6 | दो बच्चों के लिए अध्यापन शुल्क | 60,000 |
| 7 | यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान में निवेश | 30,000 |
| 8 | बचत खाते पर ब्याज आय | 8,000 |
| 9 | सावधि जमा पर ब्याज आय | 15,000 |
कर की गणना
क्र.सं. |
विवरण |
रूपए |
|
1 |
सकल वेतन |
5,55,000 |
|
2 |
जोड़ें : चिकित्सा व्यय की अदायगी के संबंध में रियायत |
35,000 |
|
3 |
घटा : धारा 16(iक) के अंतर्गत मानक कटौती |
50,000 |
|
4 |
अन्य स्रोतों से आय |
|
|
(i) बचत खाता पर ब्याज आय |
रू. 8,000 | ||
(ii) बचत खाता पर ब्याज आय |
रू. 15,000 | रू. 23,000 | |
5 |
कुल सकल आय |
5,63,000 |
|
6 |
क. : घटा : धारा 80 ग के अंतर्गत कटौती |
|
|
|
(i) जीपीएफ |
रू. 20,000/— |
|
|
(ii) एलआईसी |
रू. 20,000/— |
|
|
(iii) भवन बिल्डिंग की अग्रिम अदायगी |
रू. 25,000/— |
|
|
(iv) दो बच्चों के लिए अध्यापन शुल्क |
रू. 60,000/— |
|
|
(v) यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान में निवेश |
रू. 30,000/— |
|
|
कुल = रू. 1,55,000/— |
|
|
|
रू. 1,50,000/- तक सीमित |
|
|
|
ख. घटा : बचत खाते पर ब्याज आय (रू. 10,000/- तक सीमित केवल बचत खाता ब्याज पर उपलब्ध) पर धारा 80 ननक के अंतर्गत कटौती रू. 8000/-
|
|
|
|
कुल उपलब्ध कटौती रु. 1,58,000 /- |
रू. 1,58,000/- |
|
7 |
कुल आय |
4,05,000 |
|
8 |
उस पर देय-आयकर (धारा 87क के अनुसार रू. 12,500 की छूट सहित) |
शून्य* |
|
9 |
जोड़ें : 4 प्रतिशत की दर पर स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर |
शून्य |
|
10 |
कुल देययोग्य आयकर |
शून्य |
|
@या आधार नंबर, जो भी स्थिति हो
# यह ध्यान दिया जा सकता है कि कर देयता एकसमान न हो यदि करदाता अधिनियम की धारा 115खकग के अंतर्गत रियायती कर व्यवस्था को चुनता है
उदाहरण 4
निर्धारण वर्ष 2022-23 हेतु
साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी की स्थिति में दिल्ली में स्थित आवासीय भवन के संबंध में धारा 10(13क) के अंतर्गत भवन किराया भत्ते की गणना का उदाहारण (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | वेतन | 3,50,000 |
| 2 | मंहगाई भत्ता | 2,00,000 |
| 3 | आवास किराया भत्ता | 1,40,000 |
| 4 | दिया गया आवास किराया | 1,44,000 |
| 5 | साधारण भविष्य निधि | 36,000 |
| 6 | जीवन बीमा प्रीमियम | 4,000 |
| 7 | यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान का अंशदान | 50,000 |
कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
क्र.सं. |
विवरण |
रूपए |
1 |
वेतन+मंहगाई भत्ता + भवन किराया भत्ता 3,50,000 + 2,00,000 + 1,40,000 = 6,90,000 |
7,40,000 |
2 |
कुल वेतन आय |
7,40,000 |
3 |
घटा : धारा 10 (13क) के अंतर्गत घर भवन भत्ता का न्यूनतम (क) प्राप्त एचआरए की वास्तविक राशि = 1,40,000 (ख) आय के 10 प्रतिशत से अधिक किराये पर व्यय ( मंहगाई भत्ते सहित यह समझकर कि मंहगाई भत्ता सेवानिवृत्ति लाभ के लिए लिया गया हैं) (1,44,000 - 55,000) = 89,000 (ग) वेतन (बेसिक+डीए) का 50 प्रतिशत = 2,75,000/- (बंबई/कोलकाता/दिल्ली/चेन्नई) या अन्य शहरों की स्थिति में वेतन (बेसिक + डीए)का 40 प्रतिशत |
89,000 |
|
कुल सकल आय |
6,01,000 |
|
घटा : धारा 80प के अंतर्गत कटौती (i) जीपीएफ रू. 36,000/— (ii) एलआईसी रू. 4,000/— (iii) यूनिट लिंक्ड बीमा योजना में निवेश रू. 50,000/— कुल = 90,000/- |
90,000 |
5 |
कुल आय |
5,11,000 |
|
देययोग्य कर |
14700 |
|
जोडे़ : स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर 4 प्रतिशत की दर पर |
588 |
|
कुल देययोग्य आयकर |
15288 |
|
पूर्णाकिंत राशि |
15290 |
@या आधार नंबर, जो भी स्थिति हो
# यह ध्यान दिया जा सकता है कि कर देयता एकसमान न हो यदि करदाता अधिनियम की धारा 115खकग के अंतर्गत रियायती कर व्यवस्था को चुनता है
उदाहरण 5
निर्धारण वर्ष 2022-23 हेतु
मुंबई में गैर-सरकारी कंपनी में साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी, जिसे दस माह के लिए रियायती दर पर फ्लैट अकोमोडेशन तथा दो माह के लिए होटल में अकोमोडेशन उपलब्ध कराया गया था, की कर की गणना तथा रियायत के मूल्यांकन का उदहारण (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | वेतन | 7,00,000 |
| 2 | बोनस | 1,40,000 |
| 3 | निशुल्क गैस, बिजली, पानी आदि (वास्तविक भुगतान कंपनी द्वारा करने पर) | 40,000 |
| 4 (क) | रियायती दर पर आवास (दस माह के लिए ) @ रू. 3,60,000/- माह | 3,60,000 |
| 4 (ख) | नियोक्ता द्वारा देय होटल किराया (दो माह के लिए) | 1,00,000 |
| 4 (ग) | कर्मचारी द्वारा वापस पाया जाने वाला किराया | 60,000 |
| 4(घ) | फर्नीचर शुल्क | 2,00,000 |
| 5 | यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान हेतु अंशदान | 50,000 |
| 6 | जीवन बीमा प्रीमियम | 10,000 |
| 7 | मान्यताप्राप्त भविष्य निधि हेतु अंशदान | 42,000 |
कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
क्र.सं. |
ब्यौरा |
रूपए |
|
1 |
वेतन |
7,00,000 |
|
2 |
बोनस |
1,40,000 |
|
3 |
कुल वेतन (1+2) रियायत के मूल्यांकन के लिए |
8,90,000 |
|
रियायतों का मूल्यांकन
|
|||
4.(क) |
फ्लैट हेतु रियायत : (2001 की जनगणना के अनुसार 25 लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों के लिए ) 10 माह के लिए वेतन का 15 प्रतिशत = रू. 1,05,000/- |
1,38,600 |
|
4(ख) |
होटल हेतु रियायत : (2 माह के वेतन का 24 प्रतिशत = रू. 33,600/-) से कम तथा (वास्तविक भुगतान = रू. 1,00,000) अर्थात् रू. 33,600 |
||
4(ग) |
फर्नीचर हेतु रियायत (रू. 2,00,000), शुल्क के 10 प्रतिशत की दर पर = रू. 20,000 |
||
4(ग)(i) |
कुल [4(क) + (ख) + (ग)] (1,05,000+ 33,600 + 20,000) = रू. 1,58,600 घटा : प्राप्त किराया (-) रू. 60,000 = रू. 98,600 |
||
4(घ) |
जोड़ें निशुल्क गैस, बिजली, पानी आदि हेतु रियायत रू. 40,000 (+) रू. 98,600 [4(ग)(i)] = रू. 1,38,600 कुल रियायत |
||
5 |
कुल सकल आय (रू. 8,40,000 + 1,38,600) |
9,78,600 |
|
6 |
घटा : धारा 16(iक) के अंतर्गत मानक कटौती |
50,000 |
|
7 |
कुल सकल आय |
9,28,600 |
|
8 |
घटाया : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती : |
|
|
(i) भविष्य निधि (80ग) |
42000 | ||
(ii) एलआईसी (80ग) |
रू. 10,000/— | ||
(iii) यूनिट लिंक्ड प्लान हेतु अंशदान (80ग) |
रू. 50,000/— | ||
कुल = रू. 1,02,000/— धारा 80ग के अंतर्गत रू. 1,02,000 तक सीमित |
1,02,000 | ||
9 |
कुल आय |
8,26,600 |
|
10 |
देय कर |
77,820 |
|
11 |
जोड़ें स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर 4 प्रतिशत की दर पर |
3113 |
|
12 |
कुल देययोग्य आयकर |
80933 |
|
@या आधार नंबर, जो भी स्थिति हो
# यह ध्यान दिया जा सकता है कि कर देयता एकसमान न हो यदि करदाता अधिनियम की धारा 115खकग के अंतर्गत रियायती कर व्यवस्था को चुनता है
उदाहरण 6
निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए
दिल्ली में तैनात गैर-सरकारी कंपनी में साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी की स्थिति में की गई कर की गणना तथा रियायत के मूल्यांकन तथा भवन निर्माण ऋण की अदायगी का उदहारण (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | वेतन | 4,50,000 |
| 2 | मंहगाई भत्ता | 1,00,000 |
| 3 | भवन किराया भत्ता | 1,80,000 |
| 4 | विशेष कार्य भत्ता | 12,000 |
| 5 | भविष्य निधि | 60,000 |
| 6 | एलआईपी | 10,000 |
| 7 | एनएससी VIII अंक में जमा | 30,000 |
| 8 | घर, जो कर्मचारी द्वारा लिया गया हैं, हेतु उसके द्वारा दिया गया किराया | 1,20,000 |
| 9 | गृह भवन किराये को लौटाना (मूलधन) | 60,000 |
| 10 | तीन बच्चों के लिए अध्यापन शुल्क ( रू, 10,000 प्रति बालक) | 30,000 |
कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
क्र.सं. |
विवरण |
रूपए |
||
1 |
सकल वेतन (बेसिक़ + डीए + एचआरए + एसडीए) |
7,42,000 |
||
|
घटाया : धारा 10 (13क) के अंतर्गत घर भवन भत्ता पर छूट निम्न से न्यूनतम |
65,0000 |
||
(क) प्राप्त एचआरए की वास्तविक राशि |
: रू. 1,80,000 | |||
(ख) वेतन (मंहगाई भत्ते सहित) के 10 प्रतिशत से अधिक किराए पर व्यय मंहगाई भत्ता समझकर सेवानिवृत्ति हेतु शामिल किया जाएगा ( 1,20,000-55,000) |
: रू. 65,000 | |||
(ग) वेतन (मंहगाई भत्ते सहित) का 50 प्रतिशत |
: रू. 2,75,000 | |||
2 |
घटा : धारा 16(iक) के अंतर्गत मानक कटौती |
50,000 |
||
3 |
कुल देययोग्य सकल आय |
6,27,000 |
||
4 |
घटाया : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती |
|
||
(i) भविष्य निधि |
: रू. 60,000 | |||
(ii) एलआईपी |
: रू. 10,000 | |||
(iii) एनएससी VIII अंक |
: रू. 30,000 | |||
(iv) एचबीए की पुन अदायगी |
: रू. 60,000 | |||
(v) अध्यापन शुल्क ( दो बच्चों तक सीमित) |
: रू. 20,000 | |||
कुल |
: रू. 1,80,000 | |||
|
1,50,000 तक सीमित | 1,50,000 | ||
5 |
कुल आय |
4,77,000 |
||
6 |
उस पर/देययोग्य आयकर (धारा 87क के अनुसार छूट सहित) |
शून्य |
||
7 |
जोड़ा : स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर 4 प्रतिशत की दर पर |
शून्य |
||
8 |
कुल देययोग्य आयकर |
शून्य |
||
9 |
पूर्णांकित राशि |
शून्य |
||
@या आधार नंबर, जो भी हो
# यह ध्यान दिया जा सकता है कि कर देयता एकसमान न हो यदि करदाता अधिनियम की धारा 115खकग के अंतर्गत रियायती कर व्यवस्था को चुनता है
उदाहरण 7
निर्धारण वर्ष 2022-23 हेतु
क. साठ वर्ष की आयु से अधिक लेकिन 80 वर्ष की आयु से कम तथा निम्न सकल पेंशन वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना
(i) रू. 5,00,000/-
(ii) रू. 8,50,000/-
(iii) रू. 13,00,000/-
ख. उक्त कर्मचारी की स्थिति में टीडीएस राशि क्या होगी, उनके द्वारा उनके डीडीओ/कार्यालयों को पैन जमा न कराए जाने की स्थिति में।
| विवरण | रूपए (i) |
रूपए (ii) |
रूपए (iii) |
| सकल पेंशन | 5,00,000 | 8,50,000 | 13,00,000 |
| पी.एफ. का अंशदान | 70,000 | 1,00,000 | 1,50,000 |
समाधान : कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
| विवरण | रूपए (i) |
रूपए (ii) |
रूपए (iii) |
| सकल पेंशन | 4,50,000 | 8,00,000 | 12,50,000 |
| घटाएं : धारा 16(iक) के अंतर्गत मानक कटौती | 50,000 | 50,000 | 50,000 |
| घटाएं : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती | 70,000 | 1,00,000 | 1,50,000 |
| करयोग्य आय | 3,80,000 | 7,00,000 | 11,00,000 |
| उस पर देय कर (धारा 87क के अनुसार छूट के साथ) | शून्य | 50,000 | 1,40,0000 |
| जोड़ें : स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर 4 प्रतिशत की दर पर | शून्य | 2,000 | 5,600 |
| कुल देययोग्य आयकर | शून्य | 52,000 | 1,45,600 |
@या आधार नंबर, जो भी हो
# यह ध्यान दिया जा सकता है कि कर देयता एकसमान न हो यदि करदाता अधिनियम की धारा 115खकग के अंतर्गत रियायती कर व्यवस्था को चुनता है
उदाहरण 8
निर्धारण वर्ष 2022-23 हेतु
क. 80 वर्ष की आयु से अधिक तथा निम्न सकल पेंशन वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना
(i) रू. 5,50,000/-
(ii) रू. 8,50,000/-
(iii) रू. 13,00,000/-
ख. उक्त कर्मचारी की स्थिति में टीडीएस राशि क्या होगी, उनके द्वारा उनके डीडीओ/कार्यालयों को पैन जमा न कराए जाने की स्थिति में।
| विवरण | रूपए (i) |
रूपए (ii) |
रूपए (iii) |
| सकल पेंशन | 5,50,000 | 8,50,000 | 13,00,000 |
| पी.पी.एफ. का अंशदान | 80,000 | 1,20,000 | 1,50,000 |
कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
| विवरण | रूपए (i) |
रूपए (ii) |
रूपए (iii) |
| सकल पेंशन | 5,50,000 | 8,50,000 | 13,00,000 |
| घटाएं : धारा 16(iक) के अंतर्गत मानक कटौती | 50,000 | 50,000 | 50,000 |
| घटाएं : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती | 80,000 | 1,20,000 | 1,50,000 |
| करयोग्य आय | 4,20,000 | 6,80,000 | 11,00,000 |
| उस पर कर | शून्य | 36,000 | 1,30,000 |
| जोडे़ : 4 प्रतिशत की दर पर स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर | शून्य | 1,440 | 5,200 |
| कुल देययोग्य आयकर | शून्य | 37,440 | 1,35,200 |
@या आधार नंबर, जो भी हो
# यह ध्यान दिया जा सकता है कि कर देयता एकसमान न हो यदि करदाता अधिनियम की धारा 115खकग के अंतर्गत रियायती कर व्यवस्था को चुनता है
उदाहरण 9
1. धारा 80ग के अंतर्गत गृह ऋण पर ब्याज तथा कटौती के लिए करयोग्य आय तथा भत्ते, कटौती की एक गणना
श्री एक्स, दिल्ली में एक केंद्र सरकार के अधिकारी, जो मूल वेतन 40,000, निर्धारित दरों पर डीए, रू. 3600 की दर पर परिवहन भत्ता + उस पर महंगाई भत्ता तथा एचआरए (1 जुलाई, 2021 से मूल वेतन का 24 प्रतिशत) (अगर अपने खुद के घर में रह रहा हो) प्राप्त कर रहे हैं। उसकी वेतन वृद्धि की तिथि 1 जुलाई हैं। निम्नलिखित उसकी आय के अन्य ब्यौरे हैं। निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए उसकी करयोग्य आय तथा देययोग्य कर की गणना करें
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1. | विभागीय परीक्षा की उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन के लिए पारिश्रमिक | 3,000 |
| 2. | निजी निकाय के लिए किए गए कार्य के लिए शुल्क (शुल्क का 1/3वां भाग सरकार द्वारा प्रतिधारित किया गया है) | 6,000 |
| 3. | जी.पी.एफ. प्रति माह हेतु अंशदान | 4,700 |
| 4. | जी.पी.एफ. प्रति माह हेतु वित्त पोषित डाक जीवन बीमा प्रीमियम | 280 |
| 5. | प्रति माह केंद्र सरकार कर्मचारी समूह बीमा योजना में हेतु अंशदान | 500 |
| 6. | जीवन बीमा प्रीमियम (1.04.2012 से पूर्व अपनी पत्नी के नाम पर ली गई रू. 1,00,000 की जीवन बीमा पॉलिसी के तौर पर) | 10,500 |
| 7. | लोक भविष्य निधि हेतु अंशदान | 10,000 |
| 8. | 1.04.1999 के पश्चात् उधार लिए गए एचडीएफसी ऋण का पुर्नभुगतान ईएमआई रू. 25,000 (रू. 95,000 के ऋण के लिए, रू. 2,05,000 ब्याज हेतु) | 3,00,000 |
कर की गणना
| क्र.सं. | विवरण | रूपए | |
| 1 | वेतन से आय | ||
| मूल वेतन @ रू. 40,000 प्रति माह | |||
| (मार्च से जून 21) | 1,60,000 | ||
| @ रू. 41,200 प्रति माह * (जुलाई 2021 से फरवरी 2022) | 3,29,600 | 4,89,600 | |
| मंहगाई भत्ता (काल्पनिक) | |||
| 1.3.2021 से 30.06.2021 @ 7 प्रतिशत अर्थात् रू. 40,000 प्रति माह | 11,200 | ||
| 1.7.2021 से 31.12.2021 @ 9 प्रतिशत अर्थात् रू. 41,200 प्रति माह | 22,248 | ||
| 1.1.2022 से 28.02.2022 @ 11 प्रतिशत (मान लीजिए) अर्थात् रू. 41,200 प्रति माह | 9,064 | 5,32,112 | |
| गृह किराया भत्ता | 1,17,504 | 6,49,616 | |
| परिवहन भत्ता | |||
| 1.3.2021 से 30.6.2021 @ 3200 प्रतिमाह | 12,800 | ||
| 1.7.2021 से 31.12.2021 @ 3780 प्रतिमाह | 22,680 | ||
| 1.1.2022 से 28.2.2022 @ 3852 प्रतिमाह | 7704 | ||
| 43,184 | |||
| 43,184 | |||
| 6,92,800 | |||
| परिश्रमिक | 3,000 | ||
| शुल्क (उसके द्वारा सुरक्षित 2/3 भाग) | 34,800 | ||
| कुल वेतन | 7,30,600 | ||
| घटा : धारा 16(iक) के अंतर्गत मानक कटौती | 50,000 | ||
| शुद्ध वेतन | 6,80,600 | ||
| 2 | गृह संपत्ति से आय | ||
| धारा 23(2)(क) के अंतर्गत स्व सत्यापित संपत्ति जहां संपत्ति 01.04.1999 को या उसके बाद उधार ली गई पूंजी के साथ प्राप्त/बनाई गई हो और ऐसा अधिग्रहण निर्माण उस वित्त वर्ष की समाप्ति सो पांच वर्षों के अंदर आंका गया हो जिसमें पूंजी उधार ली गई | शून्य | ||
| घटा : एचडीएफसी ऋण पर ब्याज | 2,00,000(-) | 2,00,000 | |
| सकल कुल आय | 4,80,600 | ||
| घटा : धारा 80 ग के अंतर्गत कटौती | |||
| - रू. 4,700/- प्रतिमाह पर जीपीएफ | 56,400 | ||
| - रू. 500/- प्रतिमाह पर सीजीईजीआईएस | 6,000 | ||
| - जीवन बीमा प्रीमियम | 10,500 | ||
| - एचडीएफसी ऋण का पुर्नभुगतान | 95,000 | ||
| - लोक भविष्य निधि में जमा | 10,000 | ||
| 1,77,900 | |||
| 1,50,000 | |||
| अधिकतम करयोग्य आय हेतु सीमा | 3,30,600 | ||
| कर देयता की गणना | |||
| देययोग्य कर | 4,030 | ||
| घटा : धारा 87क के अंतर्गत छूट | 4,030 | ||
| शुद्ध करयोग्य आय | शून्य | ||
| जोड़ें : 4 प्रतिशत की दर पर स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर | शून्य | ||
| कुल देययोग्य कर | शून्य | ||
# यह ध्यान दिया जा सकता है कि कर देयता एकसमान न हो यदि करदाता अधिनियम की धारा 115खकग के अंतर्गत रियायती कर व्यवस्था को चुनता है।
अनुलग्नक-II
प्रपत्र सं. 12खक
(नियम 26क(2)(ख) देखें)
रियायत, अन्य मामूली लाभ या सुविधाओं के विवरण दर्शाते हुए विवरण और उसकी राशि के साथ वेतन के स्थान पर लाभ
(1) नियोक्ता का नाम और पता :
(2) टैन
(3) नियोक्ता के टीडीएस मूल्यांकन रेंज :
(4) कर्मचारी का नाम, पद और पैन या आधार नंबर, जो भी हो :
(5) यदि कर्मचारी निदेशक अथवा कंपनी में पर्याप्त रूचि रखने वाला व्यक्ति हो तो :
(जहां नियोक्ता ही कंपनी हो)
(6) कर्मचारी के "वेतन" विषय के अंतर्गत आय : (रियायत को छोड़कर)
(7) वित्त वर्ष :
(8) रियायतों का मूल्यांकन
| क्र.सं. | रियायत का प्रकार (नियम 3 देखें) | नियम के अनुसार रियायत राशि (रू) | कर्मचारी द्वारा वसूली गई राशि, यदि हो (रू) | कर हेतु देययोग्नीय रियायत राशि कॉलम (3)-कॉलम (4) (रू) |
| (1) | (2) | (3) | (4) | (5) |
| 1 | भवन | |||
| 2 | कार/अन्य वाहन | |||
| 3 | सफाईकर्मी, माली, चौकीदार अथवा निजी परिचारक | |||
| 4 | गैस, बिजली, पानी | |||
| 5 | ब्याज शुल्क अथवा रियायती ऋण | |||
| 6 | अवकाश व्यय | |||
| 7 | नि:शुल्क अथवा रियायती यात्रा | |||
| 8 | निशुल्क भोजन | |||
| 9 | निशुल्क शिक्षा | |||
| 10 | उपहार, वाउचर आदि | |||
| 11 | क्रेडिट कार्ड व्यय | |||
| 12 | क्लब व्यय | |||
| 13 | कर्मचारी द्वारा चल संपत्ति का प्रयोग | |||
| 14 | कर्मचारी को संपत्ति का स्थानांतरण | |||
| 15 | अन्य किसी लाभ/सुविधा/सेवा/विशेष लाभ की राशि | |||
| 16 | स्टॉक विकल्प (गैर-अर्हता विकल्प) | |||
| 17 | अन्य लाभ अथवा सुविधाएं | |||
| 18 | रियायत की कुल राशि | |||
| 19 | 17(3) के अनुसार वेतन के स्थान पर लाभ की कुल राशि |
(9) कर का विवरण :—
(क) धारा 192(1) के अंतर्गत वेतन से काटा गया कर ...........................
(ख) धारा 192 (1क) के अंतर्गत कर्मचारी की ओर से नियोक्ता द्वारा दिया गया कर ...........................
(ग) दिया गया कुल कर ...........................
(घ) सरकारी कोष में किए गए भुगतान की तिथि ............................
नियोक्ता द्वारा घोषणा
मैं.....................................पुत्र...................................(पद)................................के तौर पर कार्यरत, की ओर से........................................(नियोक्ता का नाम) एतद्द्वारा घोषणा करता हूं कि उक्त दी गई जानकारी लेखा पुस्तकें, प्रपत्र तथा अन्य प्रासंगिक आंकड़ों अथवा हमारे पास मौजूद जानकारी पर आधारित हैं तथा ऐसे प्रत्येक रियायत की राशि का विवरण धारा 17 तथा इस आधार पर बनाए गए नियम के अनुसार है और ऐसी जानकारी सत्य और सही है।
स्थान......................
कर कटौती करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर
दिनांक...................
पूरा नाम......................
पद...............................
अनुलग्नक-IIक
प्रपत्र सं. 12खख
(नियम 26ग देखें)
धारा 192 के अंतर्गत कर की कटौती करने के लिए एक नियोक्ता की ओर से दावों का ब्यौरा दर्शाते हुए ब्यौरा
| 1. कर्मचारी का नाम और पता : | |||
| 2. कर्मचारी की स्थाई खाता संख्या अथवा आधार नम्बर | |||
| 3. वित्त वर्ष : |
| दावों का विवरण और उसका प्रमाण | ||||
| क्र.सं. | दावे का प्रकार | राशि (रू.) | प्रमाण/विवरण | |
| (1) | (2) | (3) | (4) | |
| 1 | गृह किराया भत्ता : | |||
| (i) मकान मालिक को दिया गया किराया | ||||
| (ii) मकान मालिक का नाम | ||||
| (iii) मकान मालिक का पता | ||||
| (iv) मकान मालिक की स्थाई खाता संख्या या आधार संख्या जो भी हो | ||||
| टिप्पणी : स्थाई खाता संख्या या आधार नंबर, जो भी हो, को प्रस्तुत किया जाएगा यदि पिछले वर्ष के दौरान दिया गया कुल किराया एक लाख रूपए से अधिक हो | ||||
| 2 | अवकाश यात्रा रियायत या सहायता | |||
| 3 | उधार पर ब्याज की कटौती : | |||
| (i) ऋणदाता को देययोग्य/दिया गया ब्याज | ||||
| (ii) ऋणदाता का नाम | ||||
| (iii) ऋणदाता का पता | ||||
| (iv) ऋणदाता की स्थाई खाता संख्या या आधार नंबर, जो भी हो | ||||
| (क) वित्तीय संस्थान (यदि उपलब्ध हो) | ||||
| (ख) नियोक्ता (यदि उपलब्ध हो) | ||||
| (ग) अन्य | ||||
| 4 | अध्याय vi-क के अंतर्गत कटौती | |||
| (क) धारा 80ग, 80गगग और 80गगघ | ||||
| (i) धारा 80ग | ||||
| (क) | ........................ | |||
| (ख) | ........................ | |||
| (ग) | ........................ | |||
| (घ) | ........................ | |||
| (ड़) | ........................ | |||
| (च) | ......................... | |||
| (छ) | ......................... | |||
| (ii) धारा 80गगग | ||||
| (iii) धारा 80गगघ | ||||
| (ख) अध्याय VI-क के अंतर्गत अन्य धाराएं (उदाहरण 80ड़, 80छ, 80ननक आदि) | ||||
| (i) धारा ................................. | ||||
| (ii) धारा ................................. | ||||
| (iii) धारा ................................. | ||||
| (iv) धारा ................................. | ||||
| (v) धारा ................................. | ||||
| सत्यापन | ||||
| मैं ................... पुत्र/पुत्री..............................(पिता का नाम) एतद्वारा प्रमाणित करता/करती हूं कि ऊपर दी गई सूचना पूरी और सही है | ||||
| स्थान......................... | ||||
| तिथि........................... | ||||
| (कर्मचारी के हस्ताक्षर) | |
| पद............................ | पूरा नाम |
अनुलग्नक III
स्रोत से कर कटौती के परिपत्र की बिंदु सं. 4.4.2.1-आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वेतन से आयकर कटौती-वित्त वर्ष 2015-16
पुस्तक प्रविष्टि द्वारा टीडीएस भुगतान की स्थिति में पूर्वनिर्धारण अधिकारी, कोष अधिकारी द्वारा विवरण का अनिवार्य दाखिलीकरण
1. टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर प्रपत्र 24छ को तैयार करने तथा प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया
2. प्रपत्र 24छ डीआईटी (पद्धति), दिल्ली द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना (फाइल फारमेट) के अनुसार पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ (बाद में निर्धारण अधिकारी के तौर पर संदर्भित) द्वारा तैयार किया जाना चाहिए जो टिन की वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर उपलब्ध है। निर्धारण अधिकारी चाहे तो इन-हाउस सुविधाओं, थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड ई-गर्वेनेंस अवसंरचना लिमिटेड (राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड), जो टिन वेबसाइट www.tin-nsdl.com से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता हैं, द्वारा विकसित प्रपत्र प्रपत्र 24छ विवरणी प्रस्तुति यूटिलिटी (आरपीयू) के प्रयोग द्वारा प्रपत्र 24छ तैयार किया जाना चाहिए।
प्रपत्र 24छ को तैयार करने के बाद निर्धारण अधिकारी को फाइल मान्यकरण यूटिलिटी (एफवीपी), जो टिन वेबसाइट पर निशुल्क उपलब्घ हैं, का प्रयोग कर इसे मान्यकृत करना आपेक्षित है।
निर्धारण अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित वास्तविक विवरण सांख्यिकी रिपोर्ट के साथ सीडी/डीवीडी/पैन ड्राईव में '.fvu फाइल, एफवीपी के माध्यम से एक बार फाइल मान्यकृत होने पर टिन-सुविधा केंद्र पर प्रस्तुत की जानी चाहिए। टिन-सुविधा केंद्र पर प्रपत्र 24छ की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित एक रसीद निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी। निर्धारण अधिकारी टिन वेबसाइट पर प्रपत्र24छ की स्थिति देख सकते है।
पुस्तक पहचान संख्या (बिन) प्रपत्र 24छ में प्रतिवेदित वैध टैन के साथ दर्ज प्रत्येक डीडीओ हेतु जनित की जाएगी जिसे प्रपत्र 24छ में निर्दिष्ट ई-मेल आईडी पर निर्धारण अधिकारी को आगे प्रसारित किया जाएगा। निर्धारण अधिकारी को संबंधित डीडीओ को बिन विवरण देने की आवश्यकता है। बिन को त्रैमासिक ई-टीडीएस/टीसीएस विवरण में डीडीओ द्वारा उद्धृत किया जाना है। बिन में प्रपत्र 24छ की रसीद संख्या, डीडीओ क्रमांक संख्या तथा स्थानंतरण वाउचर की तिथि सन्निहित है।
निर्धारण अधिकारी को कटौतीदाता द्वारा काटे गए कर के संबंध में माह के अंत से दस दिनों के भीतर प्रपत्र 24छ को प्रस्तुत करना तथा उसे उस माह के लिए सूचित करना आपेक्षित है। "माह-वित्त वर्ष" के लिए केवल एक नियमित प्रपत्र 24छ जमा किया जा सकता है।
1.1 प्रपत्र 24छ मे संशोधन
निर्धारण अधिकारी टिन केंद्रीय प्रणाली पर स्वीकृत प्रपत्र 24छ के किसी संशोधन अथवा निरसन के लिए संशोधित प्रपत्र 24छ को पेश कर सकते हैं। संशोधित प्रपत्र 24छ की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित प्रपत्र 24छ के समान हैं। सीडी/पैन ड्राईव पर कॉपी की हुए मान्यकृत संशोधित प्रपत्र 24छ (.fva फाइल) टिन-सुविधा केंद्र हेतु मूल प्रपत्र 24छ तथा एसएसआर की अंनतिम रसीद के साथ जमा किया जाना हैं। टिन-सुविधा केंद्र पर संशोधित प्रपत्र 24छ की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित रसीद निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी। निर्धारण अधिकारी टिन वेबसाइट पर प्रपत्र 24छ की स्थिति देख सकते हैं।
टिन वेबसाइट पर प्रपत्र 24छ का ऑनलाइन अपलोड :
टिन वेबसाइट पर प्रपत्र 24छ के ऑनलाइन अपलोड के लिए लेखा कार्यालय पहचान संख्या (निर्धारण अधिकारीईएन) जरूरी है। ऑनलाइन निर्धारण अधिकारीईएन पंजीकरण के लिए निर्धारण अधिकारी को टिन-सुविधा केंद्र के माध्यम से कम से कम एक प्रपत्र 24छ को जमा करने की आवश्यकता है। निर्धारण अधिकारी एआईएन पंजीकरण के पश्चात् निर्धारण अधिकारी टिन वेबसाइट पर निर्धारण अधिकारी खाते के द्वारा प्रपत्र 24छ को जमा कर सकते है। प्रपत्र 24छ की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित प्रपत्र 24छ (टिन-सुविधा केंद्र पर जमा कराए गए) के समान है। मान्यकृत प्रपत्र 24छ संशोधित फाइल (.fvu फाइल) टिन वेबसाइट पर अपलोड की जानी है। ऑनलाइन अपलोड में एसएसआर जमा करने की आवश्यकता नहीं है। टिन केंद्रीय प्रणाली पर स्वीकृत प्रपत्र 24छ हेतु 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित ऑनलाइन रसीद जनित तथा प्रदर्शित की जाएगी तथा निर्धारण अधिकारी को दिखाई जाएगी। रसीद का प्रारूप टिन-सुविधा केंद्र द्वारा जारी रसीद के समान है।
प्रपत्र 24छ के ऑनलाइन अपलोड के लिए निर्धारण अधिकारी हेतु कोई प्रभार देययोग्नीय नहीं हैं। लॉगिन पर निर्धारण अधिकारी बिन विवरण को देख/डाउनलोड तथा जनसंख्कीय विवरण को अद्यतन कर सकते हैं।
टिन वेबसाइट पर संशोधित प्रपत्र 24छ की ऑनलाइन अपलोडिंग
निर्धारण अधिकारी टिन केंद्रीय प्रणाली पर स्वीकृत प्रपत्र 24छ के किसी संशोधन अथवा निरसन के लिए संशोधित प्रपत्र 24छ को पेश कर सकते हैं। संशोधित प्रपत्र 24छ की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित प्रपत्र 24छ के समान हैं। मान्यकृत प्रपत्र 24छ संशोधित प्रपत्र (.fvu फाइल) टिन वेबसाइट पर निर्धारण अधिकारी खाते के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड की जा सकती है। टिन केंद्रीय प्रणाली पर स्वीकृत प्रपत्र 24छ के संशोधन हेतु 15 अंकों वाले टोकन नंबर सिन्न्हित आनलाइन रसीद निर्धारण अधिकारी के लिए जनित तथा प्रदर्शित होगी। रसीद का प्रारूप टिन-सुविधा केंद्र द्वारा जारी रसीद के समान है। ऑनलाइन अपलोड में मूल प्रपत्र 24छ की अंनतिम रसीद तथा एसएसआर को जमा करने की आवश्यकता नहीं है।
2. अक्सर पूछे जाने वाले सवालों तथा विस्तृत विवरण के लिए निर्धारण अधिकारी को सलाह दी जाती है कि वह टिन वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर लॉगिन करे।
परिशिष्ट IV
वेतन एवं संवितरण अधिकारी (निर्धारण अधिकारी/जिला कोषागार अधिकारी (डीटीओ/आहरण एवं संवितरण अधिकारी (सीडीडीओ) द्वारा मासिक प्रपत्र सं. 24छ विवरण की प्रस्तुति
1. किस आयकर नियम के अंतर्गत प्रपत्र 24छ को दाखिल किया जाना चाहिए ?
आयकर विभाग अधिसूचना सं. 41/2010 दिनांक 31, मई 2010 आयकर नियम 30 का संशोधन करता है जो अनिवार्य करता है कि सरकारी कार्यालय कि स्थिति में जहां चालान (बैंक में कर जमा करने से संबधित) की प्रस्तुति के बिना केंद्र सरकार को कर का भुगतान किया जाता है, प्रासंगिक पीनिर्धारण अधिकारी/सीडीडीओ/डीटीओ अथवा समकक्ष सरकारी कार्यालय (इस दस्तावेज में यहां निर्धारण अधिकारी के तौर पर निर्दिष्ट) को मासिक आधार पर प्रपत्र 24छ जमा करना आपेक्षित है।
2. कौन प्रासंगिक पीएओ/सीडीडीओ/डीटीओ है, कौन प्रपत्र 24छ को दाखिल करने के लिए उत्तरदायी है ?
एक प्रासंगिक पीएओ/सीडीडीओ/डीटीओ वह कार्यालय है जिसको कटौती कराने वाला/डीडीओ (टैन धारक) पुस्तक समायोजन के माध्यम से टीडीएस/टीसीएस के प्रेषण की सूचना देता है। सामान्य तौर पर केंद्र सरकार का डीडीओ अपने संबंधित वेतन एवं संवितरण अधिकारी (पीएओ) को पुस्तक प्रविष्टि के माध्यम से टीडीएस की सूचना देते हैं तथा राज्य सरकार के डीडीओ अपने संबंधित जिला कोषागार अधिकारी को पुस्तक प्रविष्टि के माध्यम से टीडीएस की सूचना देते हैं। ऐसे पीएओ तथा डीटीओ को मासिक आधार पर प्रपत्र 24छ जमा करना आपेक्षित है।
यहां आहरण एवं संवितरण अधिकारी (सीडीडीओ) की ऐसे भी उदाहरण है जब राज्य के एजी को प्रत्यक्ष तौर पर पुस्तक प्रविष्टि के माध्यम से सूचना देते हैं। उदाहरण के लिए, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग आदि। ऐसे सीडीडीओ को मासिक आधार पर प्रपत्र 24छ जमा करना आपोक्षित है। परिशिष्ट III में योजनाबद्ध आरेख विभिन्न परिस्थितियों में प्रपत्र 24छ दाखिल के लिए उत्तरदायी व्यक्ति की स्थिति स्पष्ट करता हैं
3. क्या समान कार्यालय/अधिकारी डीडीओ तथा निर्धारण अधिकारी के तौर पर कार्य कर सकता है ?
सामान्य तौर पर, पीएओ कार्यालय वह है जिसको डीडीओ टीडीएस की सूचना देता है तथा इसलिए, दोनों अलग-अलग कार्यालयों से होते हैं। बहरहाल, जहां डीडीओ और निर्धारण अधिकारी समान हैं, सीडीडीओ की स्थिति में, वहां प्रपत्र 24छ की सांख्यकीय सूचना उसके वरिष्ठ अधिकारी द्वारा प्रति हस्ताक्षरित होनी चाहिए।
4. एआईएन क्या है तथा किसे आवेदन करना चाहिए ?
लेखा कार्यालय पहचान संख्या (एआईएन) एक विशिष्ट प्रकार के सात अंकों की संख्या है जो प्रत्येक निर्धारण अधिकारी को आयकर निदेशालय द्वारा (पद्धति), दिल्ली द्वारा आवंटित की जाती है। प्रत्येक निर्धारण अधिकारी की इस संख्या द्वारा प्रणाली में विशिष्ट प्रकार से पहचान होती है। निर्धारण अधिकारी को टीडीएस कार्यालय के क्षेत्राधिकार में एआईएन हेतु आवेदन करना आपेक्षित है। एआईएन आवेदन टिन साइट से डाउनलोड की जा सकती है। प्रत्येक एआईएन धारक को प्रपत्र 24छ को जमा करना आपेक्षित है।
प्रत्येक डीडीओ की कर कटौती तथा संग्रहण खाता संख्या के द्वारा प्रणाली में पहचान होती है। यह संख्या आयकर विभाग द्वारा आवंटित होती है।
5. लेखा कार्यालय पहचान संख्या (एएआईएन) आवेदन को कहां जमा किया जाना चाहिए ?
एएआईएन आवंटन हेतु विधिवत भरें तथा हस्ताक्षरित आवेदन सीआईटी (टीडीएस) क्षेत्राधिकार के पीएओ/सीडीडीओ/डीटीओ द्वारा वास्तविक रूप से जमा किया जाना चाहिए। परिपूरित तथा सही एआईएन आवेदन पत्र क्षेत्राधिकार सीआईटी (टीडीएस) द्वारा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड ई-गर्वनेंस अवसंचरना लिमिटेड (राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड), टाइम्स टॉवर, प्रथम तल, कमला मिल्स कांपाउंड, सेनापति बापत मार्ग, लोअर परेल, मुंबई-400013 पर निर्धारण अधिकारी ईएन के आवंटन की सिफारिश करते हुए पीएओ/सीडीडीओ/डीटीओ को अग्रषित किया जाएगा।
6. प्रपत्र 24छ के माध्यम से कौन सी सूचना जमा की जानी चाहिए ?
पप्रत्येक निर्धारण अधिकारी को पृथक रूप से हर प्रकार की कटौती/संग्रहण की जानकारी अर्थात् उसके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत प्रत्येक डीडीओ द्वारा दिया गया टीडीएस-वेतन/टीडीएस गैर-वेतन/टीडीएस-गैर वेतन गैर-निवासी/टीसीएस, देते हुए प्रत्येक माह एक पूरा, सत्य तथा समेकित प्रपत्र 24छ प्रस्तुत करना चाहिए।
7. प्रपत्र 24छ को कहां जमा किया जाना चाहिए ?
प्रपत्र 24छ केवल टिन-सुविधा केंद्र पर सीडी/पैन ड्राईव में केवल इलैक्ट्रानिक रूप में अथवा वेबपोर्टल www.tin-nsdl.com पर निर्धारण अधिकारी के खाते के माध्यम से ऑनलाइन प्रस्तुत किया जाना चाहिए। प्रपत्र सं. 24छ को ऑनलाइन जमा करने की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। अंनतिम रसीद संख्या (पीआरएन) प्रपत्र 24छ की प्राप्ति रसीद के तौर पर जारी की जाएगी।
8. ऑनलाइन सुविधा के लिए पंजीकरण कैसे करें ?
टिन वेंबसाइट www.tin-nsdl.com के माध्यम से ऑनलाइन प्रपत्र 24 छ भरने के लिए एओ खाते के लिए पंजीकरण अनिवार्य हैं। एओ खाते के लिए पंजीकरण केवल एक बार आपेक्षित हैं। निर्धारण अधिकारी को, एओ खाते के पंजीकरण हेतु नो योर कस्टर (केवाईसी) मानदंडों के अनुपालन में कम से कम एक बार टिन-एफसी पर प्रपत्र 24छ जमा कराना आपेक्षित हैं। पंजीकरण के बाद, निर्धारण अधिकारी के लिए यह विकल्प मौजूद हैं कि वह या तो टिन-सुविधा केंद्र पर सीडी/पैन ड्राईव के द्वारा अथवा ऑनलाइन प्रपत्र 24छ जमा करें।
9. एओ खाते के साथ किस प्रकार की कार्यक्षमताएं उपलब्ध हैं ?
एओ खाते के माध्यम से, निर्धारण अधिकारी भरे हुए प्रपत्र 24छ की स्थिति, बिन (पुस्तक पहचान संख्या) विवरण प्राप्त, एओ प्रोफाइल को अद्यतन तथा प्रपत्र 24छ को अपलोड कर सकता हैं। स्टेटस ट्रैकिंग एआईएन तथा प्रपत्र 24छ की संबंधित अंनतिम रसीद संख्या (पीआरएन) पर आधारित हैं।
10. क्या निर्धारण अधिकारी पेपर के रूप में प्रपत्र 24छ प्रस्तुत कर सकता हैं ?
नहीं, प्रपत्र 24छ केवल इलैक्ट्रानिक रूप से जमा किया जाना हैं।
11. क्या निर्धारण अधिकारी आयकर कार्यालय में इलैक्ट्रानिक रूप से तैयार प्रपत्र 24छ को जमा कर सकता है ?
नहीं, इलैक्ट्रानिक रूप से तैयार प्रपत्र 24छ केवल टिन-सुविधा केंद्र अथवा ऑनलाइन जमा किया जाना हैं।
12. प्रपत्र 24 छ में क्या-क्या शामिल है?
प्रत्येक प्रपत्र 24छ आयकर विभाग (आईटीडी) द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए। प्रपत्र 24छ में शामिल है :—
• निर्धारण अधिकारी द्वारा भरे हुए प्रपत्र 24छ का विवरण (एआईएन, नाम, जनसंख्यिकीय जानकारी, संपर्क विवरण)
• मंत्रालय/राज्य की जानकारी सहित निर्धारण अधिकारी (केंद्र/राज्य सरकार) की श्रेणी
• स्टेटमेंट का ब्यौरा (माह तथा वर्ष जिसके लिए प्रपत्र 24छ भरा जाना है)
• भुगतान सारांश, कटौती का प्रकार (टीडीएस-वेतन/टीडीएस गैर-वेतन/टीडीएस-गैर वेतन गैर-निवासी/टीडीएस) के अनुसार
• डीडीओ वार भुगतान विवरण (डीडीओ का टैन, नाम, जनसांख्यकीय विवरण, कुल दिया गया कर तथा सरकारी खाते (ए.जी./प्रधान सीसीए) को प्रेषित
• डीडीओ, जो निर्धारण अधिकारी से संबंधित हो, यदि निर्धारण अधिकारी, डीडीओ के नवीनतम विवरण को बढ़ाना/घटाना अथवा अपडेट करना चाहे, उसे विवरण में निर्दिष्ट करना चाहिए।
13. प्रपत्र 24छ विवरण को तैयार करने की क्या प्रक्रिया है?
निर्धारण अधिकारी या तो घरेलू सुविधाओं का प्रयोग करते हुए प्रपत्र 24छ को तैयार कर सकता है या थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर द्वारा या एनएसडीएल द्वारा तैयार किए गए प्रपत्र 24छ प्रीपेशन यूटिलिटी का प्रयोग करते हुए जोकि टिन-वेबसाइट (www.tin-nsdl.com) या आईटीडी वेबसाइट (www.incometaxindia.gov.in) पर निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है।
एक बार विवरण के तैयार होने पर, निर्धारण अधिकारी राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड द्वारा तैयार फाइल मान्यकरण यूटिलिटी (एफयूवी), जो टिन अथवा आयकर विभाग की वेबसाइट पर निशुल्क उपलब्ध है, का प्रयोग कर इसे मान्यकृत करेंगे। विवरण निर्धारण अधिकारी द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित होने पर प्रपत्र 24छ सांख्यकीय विवरण रिपोर्ट के साथ राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड द्वारा संचालित किसी भी टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर कॉम्पैक डिस्क (सीडी) में प्रस्तुत किया जा सकता हैं। टिन -सुविधा केंद्र की सूची टिन अथवा आयकर विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
टिन-सुविधा केंद्र द्वारा एक बार प्रपत्र 24छ स्वीकार किए जाने पर विवरण के जमा करने के प्रमाण के अनुसार निर्धारण अधिकारी को विशिष्ठ अनंतिम रसीद संख्या (पीआरएन) के साथ अनंतिम रसीद जारी की जाएगी।
14. प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी क्या है ?
प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी एक जावा आधारित यूटिलिटी हैं। प्रपत्र 24छ प्र्रस्तुति यूटिलिटी वेबसाइट www.tin-nsdl.com से निशुल्क डाउनलोड की जा सकता हैं। डाउनलोड करने के बाद, इसे मशीन की लोकल डिस्क पर सेव करना जरूरी हैं।
जेआरई (जावा रन-टाइम एनवायरमेंट) (वर्जन : एसयूएन जेआरई : 1.4.2_02 अथवा 1.4.2_03 अथवा 1.4.2_04 अथवा आईबीएम जेआरई : 1.4.1.0) कम्प्यूटर पर इंस्टाल किया जाना चाहिए जहां प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी इंस्टाल किया जाना हैं। जेआरई http://java.sun.com तथा http://www.ibm.com@developerworks@javaa@jdk से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता हैं अथवा आप अपने कम्प्यूटर वेंडर (हार्डवेयर) से इसे इंस्टाल करने के लिए कहें।
प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी विंडो प्लेटफार्म विडों 2के प्रोफेशनल/विंडो 2के सर्वर/विंडो एनटी 4.0 सर्वर/विंडो एक्सपी प्रोफेशनल पर चलाया जा सकता हैं। श्प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटीश् को चलाने के लिए '24GRPU.bat' फाइल पर क्लिक करें।
यदि जेआरई आपके कम्प्यूटर पर इंस्टाल नही हैं तो '24GRPU.bat' पर क्लिक करें, जिसके बाद एक संदेश प्रदर्शित होगा। ऐसी स्थिति में, जेआरई को इंस्टाल करें तथा दुबारा प्रयास करें। यदि जेआरई का उचित वर्जन इंस्टाल हो तो प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी प्रदर्शित होगा।
15. प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी को डाउनलोड तथा इंस्टाल करने के लिए क्या किया जाना चाहिए ?
डाउनलोडिंग में किसी प्रकार की सहायता तथा प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी प्रयोग करने के लिए प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी में "मदद" में उपलब्ध कराए गए निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढे़। यह यूटिलिटी 75,000 तक के रिकार्ड सहित प्रपत्र 24छ को तैयार करने के लिए प्रयोग की जा सकती हैं। प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी (वर्जन 1.2) नियमित तथा संशोधित विवरण के लिए प्रयोग की जा सकती हैं।
16. फाइल मान्यकरण यूटिलिट (एफवीयू) क्या है ?
निर्धारण अधिकारी को फाइल के प्रारूप स्तर सटीकता को सुनिश्चित करने के लिए फाइल मान्यकरण यूटिलिटी (एफवीयू) के माध्यम से प्रस्तुति यूटिलिटी का प्रयोग करके जनित प्रपत्र 24छ (नियमित/संशोधित) फाइल को देना चाहिए। यह यूटिलिटी टिन वेबसाइट से निशुल्क भी डाउनलोड की जा सकती हैं। प्रपत्र 24छ में किसी प्रकार की त्रुटि आने पर निर्धारण अधिकारी द्वारा त्रुटियों को सुधारना चाहिए। सुधार के पश्चात, प्रयोगकर्ता कों एफवीयू के माध्यम से संशोधित प्रपत्र 24छ देना चाहिए। यह प्रक्रिया त्रुटि मुक्त प्रपत्र 24छ जनित होने तक दोहराई जानी चाहिए। वित्त वर्ष 2005-06 से प्रारंभ तैयार प्रपत्र 24छ इस यूटिलिटी के प्रयोग द्वारा मान्यकृत किया जा सकता हैं।
प्रपत्र 24छ एफवीयू एक जावा आधारित यूटिलिटी हैं। जेआरई (जावा रन-टाइम एनवायरमेंट) (वर्जन : एसयूएन जेआरई : 1.4.2_02 अथवा 1.4.2_03 अथवा 1.4.2_04 अथवा आईबीएम जेआरई : 1.4.1.0) कम्प्यूटर पर इंस्टाल किया जाना चाहिए जहां प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी इंस्टाल किया जाना हैं। जेआरई http://java.sun.com तथा http://www.ibm.com@developerworks@javaa@jdk से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता हैं अथवा आप अपने कम्प्यूटर वेंडर (हार्डवेयर) से इसे इंस्टाल करने के लिए कहें।
प्रपत्र 24छ एफवीयू सेटअप में निम्न दो फाइलें सन्निहित है
• Form 24G FVU.bat : यह एफवीयू के इंस्टालेशन हेतु सेटअप प्रोग्राम हैं।
• Form 24G_ FVU_STANDALONE.jar % यह एफवीयू प्रोग्राम फाईल हैं।
यह फाइलें कार्यन्वित होने वाली जिप फाइल (Form 24G FVU.exe)(Version 1.2) में हैं। इन फाइलों को Form 24G FVU से इंस्टाल करना अनिवार्य हैं।
एक्सटै्रक्ट तथा सेटअप के लिए निर्देश नीचे दिए गए है :
• Form 24G FVU एक्सटै्रक्ट तथा सेटअप
• Form 24G FVU.bat % यह एफवीयू के इंस्टालेशन हेतु सेटअप प्रोग्राम हैं।
• Form 24G_ FVU_STANDALONE.jar % यह एफवीयू प्रोग्राम फाईल हैं।
यह फाइलें कार्यन्वित होने वाली जिप फाइल (Form 24G FVU.exe)(Version 1.2) में हैं। इन फाइलों को Form 24G FVU से इंस्टाल करना अनिवार्य हैं।
एक्सटै्रक्ट तथा सेटअप के लिए निर्देश नीचे दिए गए है :
Form 24G FVU एक्सटै्रक्ट तथा सेटअप
17. आरपीयू के माध्यम से प्रपत्र 24 विवरण तैयार होने के बाद, तीन फाइले जनित होंगी जब ऐसा विवरण एफवीयू से गुजरेगा। क्या टिन-सुविधा केंद्र हेतु निर्धारण अधिकारी द्वारा सभी तीन फाइलों को सीडी/पैन ड्राईव में डालना अनिवार्य है ?
जब सही फाइलें एफवीयू से होकर गुजरेगी तो निम्नलिखित तीन फाइले उत्पन्न होंगी :—
(क) अपलोड फाइल
(ख) प्रपत्र 24छ विवरण साख्यिकीय रिपोर्ट तथा
(ग) प्रपत्र 24छ
क्रम सं. (क) में प्रत्येक प्रपत्र24छ (अपलोड फाइल) सीडी में सेव करनी चाहिए तथा इसे लेखा अधिकारी द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षर करने के बाद कागजी रूप में क्र.सं. (ब) में निर्दिष्ट विवरण सांख्यिकीय रिपोर्ट सहित संलग्न किया जाना चाहिए जिसे टिन-सुविधा केद्र पर जमा किया जाना चाहिए।
प्रपत्र 24छ : प्रपत्र 24छ, उक्त क्रमांक संख्या (ग) में, टीडीएस/टीसीएस बही समायोजन प्रपत्र का पाठक अनुकूल प्रारूप हैं। यह एचटीएमएल प्रारूप में प्रपत्र 24छ के वास्तविक रूप की तरह हैं। इसमें लेखा अधिकारी साथ ही साथ संरेखण एवं संवितरण अधिकारी का विवरण शामिल हैं। इस फाइल को जमा करने की आवश्यकता नहीं है।
18. क्या प्रपत्र 24छ विवरण सही किया जा सकता है ?
प्रत्येक प्रपत्र 24छ को आयकर विभाग (आईटीडी) द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना के अनुसार तैयार किया जाना है। यदि यह नए आंकड़े संरचना को पुष्ट नहीं हैं तो इसे टिन द्वारा अस्वीकार कर दिया जाएगा।
प्रक्रिया के अनुसार, प्रपत्र 24छ से संबंधित विवरण परिपूरित तथा सत्य होना चाहिए। किसी भी स्थिति में खंडित विवरण जमा ( अर्थात् उसी एआईएन, वित्त वर्ष तथा माह के संबंध में विभिन्न प्रकार के प्रपत्र के अंतर्गत कटौती हेतु ब्यौरा देते हुए पृथक विवरण) की अपेक्षा नहीं की जाएगी। हालांकि, मूल स्वीकृत विवरण में किसी प्रकार की त्रुटि 'संशोधित बयान' को जमा करके सुधारी जा सकती हैं। संशोधन हेतु, आरपीयू का नवीनतम प्रारूप टिन वेबसाइट से डाउनलोड किया जाना चाहिए।
प्रपत्र 24छ संशोधन टिन वेबसाइट पर प्रत्यक्ष रूप से अपलोडिड किया जा सकता हैं। टिन केंद्रीय प्रणाली पर प्रत्यक्ष रूप से अपलोड करने के लिए निर्धारण अधिकारी को पहले टिन वेबसाइट पर एआईएन पंजीकृत कराना होना तथा संशोधित प्रपत्र 24छ अपलोड करना होगा।
19. कितने प्रकार के संशोधित विवरण स्वीकार्य है ?
निर्धारण अधिकारी. द्वारा दो प्रकार के संशोधित विवरण प्रस्तुत किये जा सकते हैं। यह नीचे दिए गए हैं।
• एम (संशोधन) :- मौजूदा प्रपत्र 24छ विवरण में किसी संशोधन हेतु
• एक्स (रद्द करना) :- मौजूदा प्रपत्र 24छ विवरण में किसी निरकरण हेतु
संशोधित विवरण तैयार करने के लिए मूल विवरण की रसीद संख्या तथा पिछले विवरण की रसीद संख्या अनिवार्य है।
पहले संशोधन की स्थिति में, मूल विवरण का पीआरएन "मूल विवरण की रसीद संख्या" फील्ड में उपलब्ध कराया जाना चाहिए तथा "पिछले विवरण की रसीद संख्या" फील्ड में भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
संशोधित विवरण पहले ही जमा कराए जाने की स्थिति में, मूल विवरण का पीआरएन "मूल विवरण की रसीद संख्या" फील्ड उपलब्ध कराई जानी चाहिए तथा पिछले संशोधन का पीआरएन "पिछले विवरण की रसीद संख्या" फील्ड में निर्दिष्ट कराया जाना चाहिए।
20. एम टाइप का संशोधन विवरण क्या है ?
इस प्रकार का संशोधित विवरण निर्धारण अधिकारी द्वारा प्रस्तुत किया जाना चाहिए, यदि वह अपनी किसी प्रकार की जानकारी जैसे नाम, पता, उत्तरदायी व्यक्ति का विवरण, श्रेणी, मंत्रालय, राज्य अथवा डीडीओ (संरेखण एवं संवितरण अधिकारी) आदि को घटाना अथवा बढ़ाना, को अद्यतन करना चाहता है। एआईएन (लेखा कार्यालय पहचान संख्या), वित्त वर्ष तथा माह में संशोधन स्वीकार्य नहीं हैं।
मूल प्रपत्र 24छ विवरण में उपलब्ध कराए गए डीडीओ विवरण में तीन प्रकार से संशोधन किया जा सकता है :
• बढ़ाना : डीडीओ विवरण मूल प्रपत्र 24छ में शामिल किया जा सकता है।
• अद्यतन : डीडीओ का विवरण (अर्थात् टैन, टैन का नाम, जनसांख्यिकीय तथा संपर्क विवरण, कर कटौती राशि तथा प्रेषण, कटौती का प्रकार) मूल अथवा उत्तरवर्ती संशोधन विवरण में मुहैया कराए गए डीडीओ रिकार्ड के लिए अद्यतन किया जा सकता है।
• हटाना : मूल प्रपत्र 24छ अथवा उत्तरवर्ती संशोधन विवरण में उपलब्ध कराए गए डीडीओ रिकार्ड को हटाया जा सकता है।
एम प्रकार का संशोधन विवरण सदैव एओ विवरण तथा डीडीओ विवरण में शामिल होगा जिसे बढ़ाया तथा/अथवा हटाया जा सकता है।
21. X प्रकार का संशोधन विवरण क्या है ?
इस प्रकार के संशोधन विवरण को एओ द्वारा प्रस्तुत किया जाना चाहिए यदि वह मौजूदा प्रपत्र 24छ विवरण को रद्द करना चाहे। संशोधन के X प्रकार की फाइलिंग उसी प्राईमरी की (एआईएन, वित्त वर्ष तथा माह) के लिए नियमित प्रपत्र 24छ को जमा करने की स्वीकृति देती हैं। इस प्रकार का संशोधन केवल तभी जमा होगी जब प्रपत्र 24छ गलत एआईएन, वित्त वर्ष अथवा माह के साथ जमा किया गया हो।
22. बिन क्या है ?
बिन का पूरा अर्थ स्वीकार्य मासिक प्रपत्र 24छ में निर्दिष्ट प्रत्येक प्रपत्र प्रकार के लिए "पुस्तक पहचान संख्या या बुक आईडिफिकेशन नंबर" हैं। बिन में निम्न शामिल है :—
(i) रसीद संख्या : रसीद संख्या सात अंकों का विशिष्ठ अंक है जो प्रपत्र 24छ के सफलतापूर्वक स्वीकृति पर जनित होता है।
(ii) डीडीओ क्रमांक संख्या : यह पांच अंकों वाली विशिष्ठ अंक है जो प्रपत्र 24छ में प्रतिवेदित प्रत्येक डीडीओ लेन-देन पर जनित होती है।
(iii) स्थानांतरण वाउचर तिथि : यह माह की वह अंतिम तिथि है जिसके लिए प्रपत्र 24छ विवरण जमा किया गया हैं।
बिन को संबंधित डीडीओ, जिसे टीडीएस/टीसीएस विवरण में इसकी सूचना देना आपेक्षित हैं, द्वारा प्रसारित करना आपेक्षित है। बिन का उद्धृतीकरण प्रभावी तिथि 01 फरवरी 2012 से अनिवार्य कर दिया गया है। बिन चालान की प्रस्तुति के बिना जमा किए जाने वाले टीडीएस के दावे को मूल्यांकित करने के लिए विशिष्ट प्रकार की संख्या हैं। जैसा कि यह सत्यापन की (चाबी) है, इसलिए सलाह दी जाती है कि संबंधित डीडीओ को निर्धारण अधिकारी द्वारा दिया गया वैध बिन टीडीएस विवरण में सही रूप से जमा किया जाना चाहिए।
23. बिन कब जनरेट होता है?
स्वीकृत प्रपत्र 24छ विवरण की प्रसंस्करण पर, बिन प्रपत्र प्रपत्र 24छ विवरण में मौजूद प्रत्येक डीडीओ रिकॉर्ड (वैध टैन सहित) हेतु जनित होता है। बिन टिन केंद्रीय प्रणाली पर जनित होता हैं तथा टैन के विवरण तथा प्रपत्र के प्रकार के साथ पीएओ को सूचित किया जाता है।
24. पीएओ तथा डीडीओ बिन के साथ क्या करते हैं ?
पीएओ को संबंधित डीडीओ को बिन प्रसारित करना आपेक्षित हैं। त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण को तैयार करने के दौरान डीडीओ को कथित बिन विवरण को उद्धृत करना आपेक्षित हैं यदि कर स्थानांतरण वाउचर (पुस्तक समाविष्टि) के माध्यम से दिया गया हो।
विशेषकर 24छ के लिए जनित बिन प्रपत्र प्रपत्र 24छ में मुहैया कराई गई ई-मेल आईडी पर एओ को मेल किया जाना है। इसके अतिरिक्त एओ टिन साइट पर निर्धारण अधिकारी लागिन के माध्यम से बिन विवरण को डाउनलोड भी कर सकते हैं।
25. किन परिस्थितियों में बिन को जनरेट किया जा सकता है ?
• बिन प्रपत्र 24छ संशोधन विवरण में जुडे़ हुए वैध टैन-डीडीओ रिकॉर्ड के लिए जनित किया जाएगा।
• बिन डीडीओ रिकॉर्ड के लिए जनित होगा जहां आयकर विभाग के डेटाबेस में अवैध टैन्स/टैन उपलब्ध नहीं है वह वैध टैन के साथ अद्यतन होगा।
• टैन के नाम, जनसांख्यिकीय तथा संपर्क विवरण में कोई अद्यतन, कर कटौती तथा प्रेषण अथवा कटौती के प्रकार हेतु नया बिन जनित नहीं होगा।
• कटे हुए डीडीओ रिकॉर्ड के लिए बिन विवरण जनित नहीं होगा।
26. बिन की क्या उपयोगिता है ?
डीडीओ द्वारा भरे गए त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण में सूचित टीडीएस राशि तथा बिन विवरण सत्यापन उद्देश्य के लिए पीएओ द्वारा भरे हुए प्रपत्र सं. 24छ में भरे हुए संबंधित ब्यौरे के साथ जोड़ी जाएगी।
27. क्या यहां ऐसे उदाहरण हैं जहां टीडीएस/टीसीएस विवरण में सूचित टीडीएस राशि तथा बिन विवरण प्रपत्र प्रपत्र 24छ उस रिपोर्ट से मेल न खाते हों ?
(i) टीडीएस/टीसीएस विवरण में डीडीओ द्वारा बिन की गलत/असत्य सूचना की घटना देखने में आई है। बिन तथा टीडीएस विवरण में अनुरूप राशि की गलत सूचना प्रपत्र प्रपत्र 24छ में सूचितानुसार संबंधित राशि के असंतुलन का कारण होगी। इस स्थिति में, संभावना है कि अनुरूपी कटौती कराने वाले को टीडीएस/टीसीएस का क्रेटिड प्राप्त न हो। इसलिए, संबंधित पीएओ द्वारा प्रसारितानुसार बिन, डीडीओ द्वारा भरे हुए टीडीएस/टीसीएस में इसी राशि के साथ सही रूप से सूचित किया जाना चाहिए।
(ii) कई मामलों में, एक विशिष्ट डीडीओ को इसी प्रकार के टीडीएस विवरण के लिए प्रपत्र 24छ में एक से अधिक एओ द्वारा सूचना देने के मामले भी आते हैं जो कि एक मान्य परिस्थिति नहीं हैं। डीडीओ तथा संबंधित एओ को मामले के समाधान निकालने की सलाह दी जाती है तथा विशेष माह के लिए प्रकार प्रकार के प्रपत्र के लिए केवल एक एओ का खाका तैयार करना चाहिए।
28. पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ के क्या कर्त्तव्य हैं ?
i. टीडीएस कार्यालय के क्षेत्राधिकार के साथ एआईएन हेतु आवेदन करने के लिए, एआईएन आवेदन टिन वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।
ii. डीडीओ सूचना हेतु सही टैन को प्राप्त करने हेतु
iii. महीन के अंत से 10 दिनों के भीतर प्रपत्र प्रपत्र 24छ (सीडी, डीवीडी, पैन ड्राईव में) को जमा करने हेतु, चाहे इलैक्ट्रानिकली अथवा टिन सुविधा केंद्र पर अथवा टिन वेबसाइट पर प्रत्यक्ष अपलोड द्वारा
iv. टिन वेबसाइट के माध्यम से भरे हुए प्रपत्र 24छ की स्थिति का पता लगाने के लिए
v. प्रपत्र 24छ विवरण के आधार पर जनित पुस्तक पहचान संख्या (बिन) को डाउनलोड करने के लिए
vi. संबंधित डीडीओ को बिन प्रसारित करने के लिए
29. डीडीओ के क्या कर्त्तव्य हैं ?
i. अपने पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ ,जिसको डीडीओ/कटौतीदाता काटे जाने वाले कर के बारे में सूचित करता है, को सही पैन उपलब्ध कराना तथा वह केंद्र सरकार के क्रेटिड में ऐसी राशि को जमा करने के लिए उत्तरदायी हैं।
ii. पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ की सूचना के लिए काटे गए कर की सूचना तथा पुस्तक समायोजन के माध्यम से केंद्र सरकार के खाते में क्रेटिड हेतु
iii. काटे गए कर के लिए त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण (24थ, 26थ आदि) में बिन उद्धृत करने तथा पुस्तक समायोजन द्वारा क्रेटिड हेतु
iv. नियत तिथि के भीतर टीडीएस/टीसीएस विवरण का दाखिलीकरण (24थ, 26थ आदि)
v. ट्रेसेज वेबसाइट (www.tdscpc.gov.in) से प्रपत्र 16/26क डाउनलोड करने के लिए तथा कटौतीकर्ता को इसका समय से निगर्मन
30. त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण में बिन विवरण के गैर-उद्धृतीकरण के क्या परिणाम है ?
(क) डीडीओ द्वारा भरे हुए त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण में सूचित टीडीएस की राशि तथा बिन विवरण का सत्यापन उद्देश्य के लिए पीएओ द्वारा प्रपत्र 24छ में भरे विवरण के साथ मिलाप किया जाएगा।
(ख) टीडीएस/टीसीएस विवरण में डीडीओ द्वारा किसी प्रकार की गलत सूचना असंगति का कारण बन सकती है जिससे संबंधित कटौती कराने वाले के क्रेटिड, कटौती कराने वाले के प्रपत्र 26कध में उपलब्ध नहीं होगा।
(ग) पूर्ण जानकारी टिन वेबसाइट www.tin-nsdl.com तथा आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध हैं।
31. कटौतीदाता को जारी किए जाने के लिए प्रपत्र 16/16क का प्रारूप क्या है ?
केवल ट्रसेज पोटर्ल से प्रपत्र 16/16क को डाउनलोड तथा उत्सर्जित करना अनिवार्य है। कटौतीदाता को वेतन विवरण के लिए प्रपत्र 16 के भाग 'ख' को ही व्यक्तिगत रूप से जारी करने की स्वीकृति है।
32. क्या कोई स्थिति हैं जहां डीडीओ एआईएन को प्राप्त करना भी अनिवार्य है ?
हां, यदि कटौतीदाता सीडीडीओ की क्षमता का है तथा राज्य निर्धारण अधिकारी को वाउचर स्थानांतरण के माध्यम से कर कटौती की प्रत्यक्ष रिपोर्ट करता है तो उस स्थिति में सीडीडीओ को एआईएन को प्राप्त करना आपेक्षित है तथा संबंधित बही समायोजन प्रविष्टियों के लिए 24छ को दाखिल करना हैं तथा तत्पश्चात् टैन धारक के तौर पर टीडीएस/टीसीएस विवरण को दाखिल करना भी आपेक्षित है।
उदाहरण के लिए राज्य सरकार में कार्यकारी अभियंता की स्थिति में जो चेक के माध्यम से टीडीएस/टीसीएस की कटौती के पश्चात् ठेकेदार को भुगतान करते हैं, ऐसे टीडीएस लेनदेनों की रिपोर्टिंग के लिए प्रपत्र 24थ को दाखिल करने के लिए उत्तरदायी है। उन्हें एआईएन को प्राप्त करना तथा इन बही समायोजन प्रविष्टि की मासिक रिपोर्टिंग के लिए प्रपत्र 24छ को दाखिल करना तथा उसके बाद बिन के उद्धृतीकरण द्वारा टैन धारक के तौर पर त्रैमासिक टीडीएस विवरण को दाखिल करना आवश्यक होगा।
अनुलग्नक V
राज्य सरकार के विभाग की स्थिति में प्रपत्र 24छ दाखिल करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति

| पुस्तक प्रविष्टि की सूचना का प्रकार | 24 छ भरने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति (एआईएन धारक) |
| क | पीएओ/डीटीओ |
| ख | पीएओ/डीटीओ |
| ग | पीएओ/डीटीओ |
| घ | पीएओ/डीटीओ |
| ड़ | सीडीडीओ |
| च | एसटीओ |
| एजी | महालेखापाल |
| पीएओ | वेतन एवं लेखा अधिकारी |
| डीटीओ | जिला कोषागार कार्यालय |
| एसटीओ | उप कोषागार कार्यालय |
| डीडीओ | संरेखण एवं संवितरण अधिकारी |
| सीडीडीओ | आहरण एंव संवितरण अधिकारी |
अनुलग्नक VI
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वेतन स्रोत से कर कटौती के परिपत्र की बिंदु सं. 4.9 - वित्त वर्ष 2015-16 - अधिनियम की धारा 200(3) के अंतर्गत कर कटौती का त्रैमासिक विवरण के तैयारी की प्रक्रिया
1. त्रैमासिक ई-टीडीएस विवरण/विवरणी डीआईटी (पद्धति), दिल्ली द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना (फाइल फारमेट) के अनुसार कटौतीदाता/डीडीओ द्वारा तैयार किया जाना चाहिए जो टिन की वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर उपलब्ध हैं। कटौतीदाता/डीडीओ चाहे तो इन-हाउस सुविधाओं, एनएसडीएल ई-गर्वेनेंस अवसंरचना लिमिटेड (एनएसडीएल), जो टिन वेबसाइट से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता हैं, द्वारा विकसित विवरणी प्रस्तुति यूटिलिटी (आरपीयू) अथवा थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर के प्रयोग द्वारा ई-टीडीएस विवरण/विवरणी तैयार कर सकते हैं।
ई-टीडीएस विवरण/विवरणी को तैयार करने के बाद कटौतीदाता/डीडीओ को फाइल वैलिडेशन यूटिलिटी (एफवीपी), जो टिन वेबसाइट पर निशुल्क उपलब्ध हैं, का प्रयोग कर इसे मान्यकृत करना आपेक्षित है।
2. टिन सुविधा केद्र (टिन-एफसी) पर ई-टीडीएस विवरण/विवरणी के प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया
एफवीयू के माध्यम से एक बार फाइल मान्यकृत होने पर '.fvu फाइल जनित होगी। कटौतीदाता/डीडीओ अथवा कटौतीदाता/डीडीओ द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा विधिवत भरे हुए तथा हस्ताक्षरित वास्तविक प्रपत्र 27क सहित सीडी/डीवीडी/पैन ड्राईव में इस एफवीपी, श्ण्अिन फाइल की प्रति टिन-सुविधा केंद्र पर प्रस्तुत किया जाना है। कटौतीदाता/डीडीओ को 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध कराई जाएगी। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर ई-टीडीएस विवरण/विवरणी की स्थिति देख सकते हैं। 'वित्त-वर्ष-त्रैमासिक-टैन-प्रपत्रश्, हेतु केवल एक नियमित ई-टीडीएस विवरण/विवरणी जमा की जाएगी।
2.1 ई-टीडीएस विवरण/विवरणी में संशोधन
2.1.1 विवरण के ऑनलाइन संशोधन के लिए सीपीसी-टीडीएस पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) की भी शुरूआत की गई हैं जिसके द्वारा व्यक्तिगत सूचना, पैन संशोधन, चालान जानकारी घटाना/बढ़ाना, वेतन की जानकारी को घटाना/बढ़ाना, कटौतीदाता पंक्ति आदि को बढ़ाना/अपडेट/मूव करना, कटौतीदाता द्वारा भरे विवरण में डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना किया जा सकता हैं। अन्य जानकारी के लिए कृपया नीचे दी गई तालिका को संदर्भित करें।
| डिफाल्ट समरी व्यू | व्यक्तिगत जानकारी | चालान संशोधन (बेमेल, मेल कटौतीकर्ता+कटौतीकर्ता मूवमेंट) | पैन संशोधन (परिशिष्ट I) | पैन संशोधन (परिशिष्ट II) | विवरण हेतु चालान जमा करना | ब्याज, उदग्रहण भुगतान | संशोधित/बढ़ाई गई कटौतीकर्ता पंक्ति | हटाई/बढ़ाई गई वेतन कटौती पंक्ति | |
| ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर सहित, 2013-14 से आंरभ) | हां | हां | हां | हां | हां | हां | हां | हां | हां |
| ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर सहित, 2013-14 से आंरभ) | हां | हां | हां | नहीं | नहीं | हां | हां | नहीं | नहीं |
| ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर कें बिना, 2013-14 से आंरभ) | हां | नहीं | हां | नहीं | नहीं | हां | हां | नहीं | नहीं |
| ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर के बिना, 2013-14 से पूर्व से आंरभ) | हां | नहीं | हां | नहीं | नहीं | हां | हां | नहीं | नहीं |
अधिक जानकारी के लिए कटौतीदाता को सलाह दी जाती है कि टीआरएसीईएस पर उपलब्ध ई-ट्यूटोरियल/अक्सर पूछे जाने वाले सवाल हेतु संदर्भित करें। ऑनलाइन संशोधन के लिए कोई शुल्क नहीं होगा तथा कोन्सो फाइल की डाउनलोडिंग तथा टिन एफसी को विजिट करने की की अनिवार्यता दूर करता है।
2.1.2 प्रभावी तिथि 1 जनवरी, 2015 से टीआरएसीईएस सीपीसी-टीडीएस (सामान्यत: विवरण भरने की तिथि से दो दिन के पश्चात्) के प्रसंस्करण की तिथि से 7 दिनों तक संशोधन विंडों उपलब्ध कराएगा। यह सुविधा सीपीसी- टीडीएस द्वारा पहचाने जाने वाले चालान मिसमैच तथा पैन त्रुटियों के मामलों को भरने में तथा मांग सूचना को जारी होने से रोकने में मदद करेगा। इसलिए, कटौतीदाता को सलाह दी जाती हैं कि वह इस सुविधा के लाभ के लिए प्रसंस्करण स्थिति को समय-समय पर देखते रहें ।
2.1.3 कटौतीदाता/डीडीओ ई-टीडीएस विवरण में किसी संशोधन के लिए संशोधित ई-टीडीएस विवरण को भी जमा कर सकते हैं। संशोधित विवरण टीडीएस समेकित फाइल के प्रयोग द्वारा तैयार किया जा सकता है जो टीआरएसीईएस की वेबसाइट www.tdscpc.gov.in पर उपलब्ध है। संशोधित विवरण का मान्यकरण टिन-एफसी पर विवरण सांख्यकीय रिपोर्ट तथा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित भौतिक प्रपत्र 27क, नियमित ई-टीडीएस विवरण के समान है। टिन सुविधा केंद्र पर कागजी विवरण/विवरणीकी सफलतापूर्वक स्वीकृति पर कटौतीदाता/डीडीओ को 15 अंकों की टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध कराई जाएगी। कटौतीदाता/डीडीओ टीआरएसीईएस वेबसाइट पर ई-टीडीएस विवरण की स्थिति देख सकते हैं।
3. टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर कागजी टीडीएस विवरण/विवरणी को तैयार करने तथा प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया :
प्रपत्र 24थ में सभी विवरण/विवरणी 20 अथवा उससे कम के कटौती रिकार्ड को छोड़कर कम्प्यूटर मीडिया में प्रस्तुत किया जाना है। कटौतीदाता/डीडीओ द्वारा विधिवत रूप से भरे हुए तथा हस्ताक्षरित कागजी विवरण/विवरणी टिन सुविधा केद्र पर जमा किया जाना है। टिन सुविधा केंद्र पर कागजी विवरण/विवरणीकी सफलतापूर्वक स्वीकृति पर कटौतीदाता/डीडीओ को 15 अंकों की टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध कराई जाएगी। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर कागजी विवरण/विवरणी की स्थिति देख सकते हैं। कागजी विवरण/विवरणी के लिए कोई प्रभार देय नही हैं।
4. कागजी विवरण/विवरणी में संशोधन :
वास्तविक टीडीएस विवरण/विवरणी टिन पर वास्तविक टीडीएस विवरण/विवरणी स्वीकृति हेतु किसी संशोधन की स्थिति में दुबारा भरा जा सकता है। कटौतीदाता को विधिवत रूप से भरे हुए तथा हस्ताक्षरित वास्तविक टीडीएस विवरण/विवरणी को टिन-सुविधाकेंद्र पर नियमित कागजी विवरण/विवरणी की अनंतिम रसीद की प्रति के साथ जमा करना होगा। टिन-सुविधा केंद्र पर संशोधित कागजी विवरण/विवरणी की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर कटौतीदाता/डीडीओ को विशिष्ट 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध कराई जाएगी। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर कागजी विवरण/विवरणीकी स्थिति देख सकते हैं।
5. टिन वेबसाइट पर ऑनलाइन ई-टीडीएस विवरण/विवरणी की प्रस्तुति की प्रक्रिया
कटौतीदाता/डीडीओ को ई-टीडीएस विवरण/विवरणी के ऑनलाइन अपलोड हेतु डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) जुटाना आपेक्षित है। टिन वेबसाइट पर पंजीकरण के पश्चात् कटौतीदाता/डीडीओ द्वारा अनुमोदित पत्रांक एनएसडीएल को संगठन के लैटर हैड पर उपलब्ध कराना चाहिए। एक बार एनएसडीएल द्वारा आवेदन स्वीकृत होने पर एक यूजर आईडी बन जाएगी तथा कटौतीदाता/डीडीओ को पंजीकरण के समय मुहैया कराई गई उनकी पंजीकृत ई-मेल पर भेज दी जाएगी। ई-टीडीएस विवरण को तैयार करने तथा मान्यकरण नियमित ई-टीडीएस विवरण/विवरणी( टिन-एफसी पर जमा) के समान है। कटौतीदाता/डीडीओ अपने यूजर आई तथा डीएसएससी के माध्यम से लॉग इन कर सकते हैं तथा टिन वेबसाइट पर एफवीयू द्वारा जनित ई-टीडीएस फाइल ('.fvu फाइल ) को अपलोड तथा मान्यकृत कर सकते हैं। टिन पर ई-टीडीएस विवरण/विवरणीकी सफलतापूर्वक स्वीकृति पर विशिष्ट 15 अंकों वाले डिजिटल टोकन नं. तथा 8 अंको वालीे रसीद संख्या सन्निहित रसीद जनित तथा प्रदर्शित होगी। ऑनलाइन अपलोड में भौतिक रूप से प्रपत्र 27क को जमा करने की आवश्यकता नहीं है। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर ई-टीडीएस विवरण/विवरणीकी स्थिति देख सकते हैं।
ई-टीडीएस विवरण/विवरणी के ऑनलाइन अपलोड करने के लिए कोई शुल्क देय नहीं है।
6. टिन वेबसाइट पर ई-टीडीएस विवरण/विवरणी का संशोधन
कटौतीदाता/डीडीओ टिन केंद्रीय प्रणाली पर स्वीकृत होने वाली ई-टीडीएस विवरण/विवरणी में किसी संशोधन हेतु संशोधित ई-टीडीएस/विवरणी को जमा कर सकते हैं। संशोधित विवरण/विवरणी केवल टीडीएस समेकित फाइल का प्रयोग कर ही तैयार किया जा सकता है जो टेन पंजीकरण के माध्यम से सीपीसी-टीडीएस पोर्टल www.tdscpc.gov.in पर उपलब्ध है। ई-टीडीएस विवरण की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित ई-टीडीएस विवरण/विवरणीके समान है। कटौतीदाता/डीडीओ अपने यूजर आई तथा डीएसएससी के माध्यम से लॉग इन कर सकते हैं तथा टिन वेबसाइट पर एफवीयू द्वारा जनित ई-टीडीएस फाइल ('.fvu फाइल ) को अपलोड तथा मान्यकृत कर सकते हैं। टिन पर ई-टीडीएस विवरण/विवरणी संशोधन के सफलतापूर्वक स्वीकृति पर विशिष्ट 15 अंकों वाले डिजिटल टोकन नं. सन्निहित रसीद जनित तथा प्रदर्शित होगी। ऑनलाइन अपलोड में भौतिक रूप से प्रपत्र 27क तथा नियमित ई-टीडीएस विवरण/विवरणीकी अनंतिम रसीद की प्रति को को जमा करने की आवश्यकता नहीं हैं। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर ई-टीडीएस विवरण/विवरणी की स्थिति देख सकते हैं ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और अधिक विवरण के लिए कटौतीदाता/डीडीओ को सलाह दी जाती है कि वह वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर लॉग इन करें।
अनुलग्नक-VII
वित्त मंत्रालय
(आर्थिक मामला विभाग)
(ईसीबी व पीआर प्रभाग)
अधिसूचना
नई दिल्ली, 22 दिसंबर, 2003
एफ.सं. 5/7/2003-ईसीबी एंड पीआर - सरकार ने केंद्र सरकार सेवा के नवागंतुकों, सैन्य बल के अलावा, प्रथम स्तर पर, के लिए नई परिभाषित अंशदान पेंशन प्रणाली आरंभ करने से संबंधित 2003-04 के बजट घोषणा के क्रियान्वयन के प्रस्ताव को 23 अगस्त, 2003 को, परिभाषित लाभ पेंशन प्रणाली की मौजूदा प्रणाली से प्रतिस्थापित करने के लिए, स्वीकृत किया था।
i. प्रणाली 1 जनवरी 2004 ( प्रथम स्तर पर सैन्य बलों को छोड़कर) से केंद्र सरकार की सेवा के सभी नए नियुक्तों के लिए अनिवार्य है। मासिक अंशदान वेतन तथा मंहगाई भत्ते का 10 प्रतिशत होगा, जिसे कर्मचारी द्वारा दिया जाना हैं तथा केंद्र सरकार द्वारा इसका मिलाप किया जाना हैं। बहरहाल, गैर सरकारी कर्मचारी के संबंध में सरकार की ओर से कोई अंशदान नहीं किया जाएगा। अंशदान तथा निवेश रिटर्न निकाले न जाने वाले टियर-I खाते में जमा की जाएगी। मौजूदा परिभाषित लाभ पेंशन तथा जीपीएफ के प्रावधान केंद्र सरकारी की सेवा में नए नियुक्ति हेतु उपलब्ध नहीं होगी।
ii. उक्त पेंशन खाते के अतिरिक्त, प्रत्येक व्यक्ति के पास अपने विकल्प के अनुसार अवैतानिक टियर-II विड्राल खाता भी होना चाहिए। यह विकल्प जीपीएफ के तौर पर दिया जाएगा जिसे केंद्र सरकार की सेवा में नई भर्ती के लिए वापस लिया जाएगा। सरकार इस खाते में किसी प्रकार का अंशदान नहीं करेगी। ये परिंसंपत्तियां उक्त प्रक्रिया के अनुसार ही संचालित होगीं। बहरहाल, कर्मचारी किसी भी समय अपने पैसे के 'सैकेंड टियर' के भाग अथवा पूरी राशि को निकालने के लिए मुक्त हैं। इस विड्राल खाते में किसी प्रकार की पेंशन जमा नहीं की जाएगी तथा इसे किसी विशेष कर का लाभ नहीं मिलेगा।
iii. व्यक्ति सामान्य तौर पर टियर-I पेंशन प्रणाली से 60 वर्ष की आयु में अथवा के बाद बाहर निकल सकते हैं। बाहर निकलने पर व्यक्ति द्वारा वार्षिकी (आई आर डी ए-विनियमित जीवन बीमा निगम) को खरीदने के लिए पेंशन राशि से 40 प्रतिशत निवेश करना आपेक्षित हैं। सरकारी कर्मचारी की स्थिति में वार्षिकी सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी तथा उसके आश्रित माता-पिता तथा उसके जीवन साथी के जीवन के लिए पेंशन उपलब्ध कराई जानी चाहिए। व्यक्ति को बची हुई पेंशन राशि का एकमुश्त पैसा प्राप्त होगा जिसे किसी भी तरह से प्रयोग के लिए वह मुक्त है। व्यक्ति को 60 साल की आयु के पहले पेंशन प्रणाली से बाहर निकलने की आजादी हैं। बहरहाल इस स्थिति में अनिवार्य वार्षिकी पेंशन राशि का 80 प्रतिशत होगी।
नई पेंशन प्रणाली की रचना
(i) इसके पास केंद्रीय रिकार्ड संरक्षण एवं लेखांकन (सीआरए) अवसंरचना होगा। कई पेंशन कोष प्रबंधकों (पीएफएम) को योजना की तीन श्रेणियां दी जाएगी जो क, ख तथा ग हैं
(ii) भाग लेने वाली संस्थाओं (पीएफएम तथा सीआरए) को पिछले अनुभव के बारे में आसानी से समझ आने वाली जानकारी मुहैया कराई जाएगी जिससे व्यक्ति प्राप्त सूचना के आधार यह फैसला कर सके कि कौन सी योजना का चुनाव करना है।
2. नई पेंशन प्रणाली के संचालन हेतु प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2004 से होनी चाहिए।
यू.के. सिन्हा, संयुक्त सचिव
अनुलग्नक-VIII
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
(केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड)
अधिसूचना
नई दिल्ली, 24 नवंबर, 2000
आय कर
एस.ओ. 1048 (ई) - आय कर अधिनियम, 1961 (1961 की 43) की धारा 10 के वाक्यांश (18) के उप-वाक्यांश (प) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एतद्द्वारा केंद्र सरकार तत्संबंधी कॉलम 3 के अनुरूप निर्दिष्टानुसार स्थितियों में दिए गए पुरस्कार का नीचे दी गई तालिका के कॉलम 2 में निर्दिष्ट कथित धारा के अनुसार वीरता पुरस्कार का उल्लेख करती हैं
तालिका
| क्र.सं. | वीरता पुरस्कार का नाम | पात्रता हेतु परिस्थितियां | |
| (1) | (2) | (3) | |
| 1. | अशोक चक्र | जब नागरिक को वीरता हेतु पुरस्कृत किया जाए | |
| 2. | कीर्ति चक्र | -तदैव- | |
| 3. | शौर्य चक्र | -तदैव- | |
| 4. | सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक | जब जीवन रक्षक कार्य प्रदर्शित करने की स्थिति में नागरिक को बहादुरी के लिए पुरस्कृत किया जाए | |
| 5. | उत्तम जीवन रक्षा पदक | -तदैव- | |
| 6. | जीवन रक्षा पदक | -तदैव- | |
| 7. | वीरता हेतु राष्ट्रपति पुलिस पदक | तब पुरस्कृत किया जाता हैं जब पुलिस बलों, केंद्रीय पुलिस अथवा सुरक्षा बलों तथा इस कार्य के लिए संबंधित विभाग के प्रमुख द्वारा प्रमाणित किए गए सदस्यों ने अविश्वसनीय बहादुरी का परिचय दिया हो | |
| 8. | वीरता हेतु पुलिस पदक | -तदैव- | |
| 9. | सेना पदक | तब पुरस्कृत किया जाता है जब साहस अथवा विशिष्ट वीरता का परिचय दिया जाए तथा प्रासंगिक सेवा मुख्यालय द्वारा इस संबंध में प्रमाणपत्र जारी किया जाए | |
| 10. | नौ सेना पदक | -तदैव- | |
| 11. | वायुसेना पदक | -तदैव- | |
| 12. | वीरता हेतु अग्निशमन सेवा पदक | तब पुरस्कृत किया जाता है जब साहस अथवा विशिष्ट वीरता का परिचय दिया जाए तथा पिछले मुख्यालय द्वारा इस संबंध में प्रमाणपत्र जारी किया जाए | |
| 13. | वीरता हेतु राष्ट्रपति पुलिस व अग्निशमन पदक | -तदैव- | |
| 14. | वीरता हेतु राष्ट्रपति अग्निशमन पदक | -तदैव- | |
| 15. | वीरता हेतु राष्ट्रपति होम गार्ड व नागरिक सुरक्षा पदक | -तदैव- | |
| 16. | वीरता हेतु होम गार्ड व नागरिक सुरक्षा पदक | -तदैव- | |
| (अधिसूचना सं. 1156/एफ.सं. 142/29/99-टीपीएल) | |||
टी.के. शाह
निदेशक
अनुलग्नक-IX
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
नई दिल्ली, 29 जनवरी, 2001
एस.ओ. 81 (ई) - आयकर अधिनियम, 1961 (1961 की 43) की धारा 10 के वाक्यांश (18) के उप-वाक्यांश (i) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एतद्द्वारा केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) संख्या एस.ओ. 1048(ई), दिनांक 24 नवंबर, 2000 में भारत सरकार की अधिसूचना में निम्नलिखित संशोधन को करने के उद्देश्य से तथा कथित धारा के उद्देश्य के लिए वीरता पुरस्कार को निर्दिष्ट करती है :—
कथित अधिसूचना के अनुसार तालिका में 'पात्रता हेतु परिस्थिति' से संबंधित कोष्ठक (3) के अंतर्गत क्रमांक संख्या 1,2 तथा 3 के समक्ष शब्दों में 'नागरिक हेतु" शब्द छूट गया हैं।
(अधिसूचना सं. 22/एफ सं. 142/29/99-टीपीएल)
टी.के. शाह निदेशक
अनुलग्नक-X
प्रपत्र सं. 10खक
(नियम 11ख देखें)
धारा 80 छछ के अ्रतर्गत कटौती का दावा करने वाले
निर्धारिती द्वारा दाखिल किया जाने वाला घोषणापत्र
मैं/हम....................................................................................................................................................(स्थाई खाता संख्या सहित निर्धारिती का नाम) एतद्द्वारा यह घोषणा करता हूं कि पिछले वर्ष.................के दौरान मैनें/हमने .....................माह की अवधि के लिए मेरे/हमारे रहने के उद्देश्य से परिसर.........................................................(परिसर का पूरा पता) को अधिगृहित किया था तथा श्री/कुमारी/श्रीमती...................................................(मकान मालिक का नाम व पूरा पता) को नकद/रेखांकित चेक, बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से रू...........................का भुगतान किया।
आगे यह भी प्रमाणित किया जाता हैं कि निम्न द्वारा कोई अन्य आवासीय अकोमोडेशन नहीं खरीदा गया है
(क) मैं/मेरे जीवनसाथी/मेरे छोटे बच्चे/हमारा परिवार (निर्धारिती के एचयूएफ होने की स्थिति में), ............................................जहां मैं/हम साधारणतय: रहते/कार्यालय अथवा रोजगार अथवा व्यापार अथवा व्यवसाय करते हैं अथवा
(ख) मेरे/हमारे, अन्य स्थान होने पर, मेरे अधिकार क्षेत्र में आवास होने पर, जिसकी राशि धारा 23(2)(ख) की धारा 23(2)(क)(i) कें अतर्गत निर्धारित की जानी है।
******
अनुलग्नक-ख
1[प्रपत्र सं. 16
[नियम 31(1)(क) देखें]
भाग क
धारा 192 के अंतर्गत एक कर्मचारी को दिए गए वेतन पर स्रोत पर कर कटौती के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 203 के अंतर्गत प्रमाणपत्र या धारा 194ध के अंतर्गत निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक की पेंशन/ब्याज आय
| प्रमाणपत्र सं. | अंतिम अपडेट होने की तिथि | |||
| नियोक्ता/निर्दिष्ट बैंक का नाम और पता | कर्मचारी/वरिष्ठ नागरिक का नाम और पता | |||
| डिडक्टर का पैन | डिडक्टर का टैन | कर्मचारी/निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक का पैन | नियोक्ता द्वारा दिए गए कर्मचारी संदर्भ सं./पेंशन भुगतान सं. (यदि हो) | |
| सीआईटी (टीडीएस) | निर्धारण वर्ष | नियोक्ता के पास कार्य करने की अवधि | ||
| पता.............................................. .................................................. शहर.......................................... पिन कोड ................................................. |
से | तक | ||
| दी गई/जमा की गई राशि और कर्मचारी के संबंध में उसपर स्रोत पर काटे जाने वाले कर का सारांश | ||||
| तिमाही | धारा 200 की उप-धारा (3) के अंतर्गत टीडीएस का मूल त्रैमासिक ब्यौरे की प्राप्ति संख्या | दी गई/जमा की गई राशि | काटी गई राशि (रू.) | जमा/प्रेषित कर की राशि (रू) |
| कुल (रू.) | ||||
1. आयकर (छब्बीसवां संशोधन) नियम, 2021, प्रभावी तिथि 2.9.2021 द्वारा प्रतिस्थापित
I. केंद्र में काटे गए और जमा किए गए कर का ब्यौरा
बुक समायोजन के माध्यम से सरकारी खाता (डिडक्टर को भुगतान के आधार पर डिडक्टी के संबंध में काटे और जमा किए गए कर का ब्यौरा देना है)
| क्र.सं. | डिडक्टी के संदर्भ में जमा किया गया कर (रू.) | बुक पहचान संख्या (बिन) | |||
| प्रपत्र सं. 24छ की प्राप्ति संख्या | प्रपत्र सं. 24छ में डीडीओ क्रमांक संख्या | वाउचर के स्थानांतरण की तिथि डीडी/एमएम/वाईवाईवाईवाई | प्रपत्र सं. 24छ के साथ मैचिंग होने की स्थिति | ||
| कुल (रू.) | |||||
II. चालान के माध्यम से केंद्र सरकारी खाते में काटे गए और जमा किए गए कर का ब्यौरा
(डिडक्टर जिसके लिए डिडक्टी के संदर्भ में काटे और जमा किए गए कर का ब्यौरे के आधार पर भुगतान किया जाना है )
| क्र.सं. | डिडक्टी के संदर्भ में जमा किया गया कर (रू.) | चालान पहचान संख्या (सिन) | |||
| बैंक की शाखा का बीएसआर कोड | तिथि जिस पर कर जमा किया गया डीडी/एमएम/वाईवाईवाईवाई | चलान क्रमांक संख्या | ओएलटीएएस के साथ मैचिंग की स्थिति | ||
| कुल (रू.) | |||||
सत्यापन
मैं,................................................पुत्र/पुत्री,.............................................................., .........................................................(पद) के तौर पर कार्यरत एतद्द्वारा प्रमाणित करता हूं कि रू. ................................[रू. .......................................................................................................................................(शब्दों में)] की कटौती की गई है और केंद्र सरकार को जमा की गई है। मैं आगे, प्रमाणित करता हूं कि उक्त सूचना सही, पूर्ण और सत्य है और बही खातों, दस्तावेजों, टीडीएस ब्यौरे, जमा टीडीएस और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड पर आधारित है।
स्थान..............................
(कर कटौती करने के लिए जिम्मेदार हस्ताक्षर)
तिथि ............................
पद................................
पूरा नाम.......................................
भाग ख (अनुलग्नक-I)
धारा 192 के अंतर्गत काटे गए कर के लिए कर्मचारियों के संबंध में
| दिए गए वेतन और अन्य किसी प्रकार के कर और काटे गए कर का ब्यौरा | ||||
| क | यदि धारा 115खकग के अंतर्गत करधान को चुना हो | [हां/नही] | ||
| ख | सकल वेतन | |||
| (क) | धारा 17(1) में शामिल प्रावधानों के अनुसार वेतन | रू. ..... | ||
| (ख) | धारा 17(2) के अंतर्गत रियायत की राशि (प्रपत्र सं. 12खक के अनुसार, जहां भी लागू हो) | रू. ..... | ||
| (ग) | धारा 17(3) के अंतर्गत वेतन के स्थान पर लाभ (प्रपत्र सं. 12खक के अनुसार, जहां भी लागू हो) | रू. ..... | ||
| (घ) | कुल | रू. ..... | ||
| (ड़) | अन्य नियोक्ता से प्राप्त वेतन की कुल ज्ञात राशि | रू. ..... | ||
| 2 | घटा : धारा 10 के अंतर्गत छूट की सीमा तक भत्ते | |||
| (क) | धारा 10(5) के अंतर्गत यात्रा रियायत या सहायता | रू. ..... | ||
| (ख) | धारा 10(10) के अंतर्गत मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेचुएटी | रू. ..... | ||
| (ग) | धारा 10(10क) के अंतर्गत पेंशन की परिवर्तित कीमत | रू. ..... | ||
| (घ) | धारा 10(10कक) के अंतर्गत अवकाश वेतना नगदीकरण के बराबर नकदी | रू. ..... | ||
| (ड़) | धारा 10(13क) के अंतर्गत गृह किराया भत्ता | रू. ..... | ||
| (च) | धारा 10 के अंतर्गत किसी अन्य प्रकार की छूट की राशि | |||
| वाक्यांश... | रू. ..... | |||
| वाक्यांश... | रू. ..... | |||
| वाक्यांश... | रू. ..... | |||
| वाक्यांश... | रू. ..... | |||
| वाक्यांश... | रू. ..... | |||
| ... | रू. ..... | |||
| (छ) | धारा 10 के अंतर्गत किसी अन्य प्रकार की छूट की कुल राशि | रू...... | ||
| (ज) | धारा 10 के अंतर्गत किए गए छूट संबंधी दावे की कुल राशि | रू...... | ||
| [2(क)+2(ख)+2(ग)+2(घ)+2(ड़)] | ||||
| 3 | वर्तमान नियोक्ता से प्राप्त वेतन की कुल राशि | रू...... | ||
| 4 | घटा : धारा 16 के अंतर्गत कटौती | |||
| (क) | धारा 16(iक) के अंतर्गत मानक कटौती | रू...... | ||
| (ख) | धारा 16(ii) के अंतर्गत मनोरंजन भत्ता | रू...... | ||
| (ग) | धारा 16(iii) के अंतर्गत रोजगार पर कर | रू...... | ||
| 5. | धारा 16 के अंतर्गत कटौतियों की कुल राशि | रू...... | ||
| [4(क)+4(ख)+4(ग)] | ||||
| 6. | शीर्षक 'वेतन' के अंतर्गत वसूले जाने वाली आय [(3+1(ड़)-5] | रू...... | ||
| 7 | जोड़ों धारा 192(2ख) के अनुसार कर्मचारी द्वारा रिपोर्ट की जाने वाली कोई अन्य आय | |||
| (क) | नियोक्ता की ओर से बताई गई गृह संपत्ति से आय (या स्वीकार्य हानि) जिसे टीडीएस के लिए प्रस्तुत किया हो | रू...... | ||
| (ख) | टीडीएस के लिए प्रस्तुत शीर्षक अन्य स्रोतों के अंतर्गत आय | रू...... | ||
| 8. | कर्मचारी द्वारा बताई गई अन्य आय की कुल राशि [7(क)+7(ख)] | रू...... | ||
| 9. | कुल सकल आय (6+8) | रू...... | ||
| 10 | अध्याय VI-क के अंतर्गत कटौती | |||
| कुल राशि | कटौतीयोग्य राशि | |||
| (क) | धारा 80ग के अंतर्गत भविष्य निधि आदि हेतु जीवन बीमा प्रीमियम, अंशदान के संदर्भ में कटौती | रू...... | रू...... | |
| (ख) | धारा 80गगग के अंतर्गत कुछ पेंशन फंड के लिए अंशदान के संदर्भ में कटौती | रू...... | रू...... | |
| (ग) | धारा 80गगघ(1) के अंतर्गत पेंशन योजना के लिए करदाता द्वारा अंशदान के संदर्भ में कटौती | रू...... | रू...... | |
| (घ) | धारा 80ग, 80गगग और 80गगघ(1) के अंतर्गत कुल कटौती | रू...... | रू...... | |
| (ड़) | धारा गगघ(1ख) के अंतर्गत अधिसूचित पेंशन योजना के लिए दी गई/जमा की गई राशि के संबंध में कटौती | रू...... | रू...... | |
| (च) | धारा 80गगगघ(2) के अंतर्गत पेंशन योजना के लिए नियोक्ता द्वारा अंशदान के संदर्भ में कटौती | रू...... | रू...... | |
| (छ) | धारा 80घ के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के संदर्भ में कटौती | रू...... | रू...... | |
| (ज) | धारा 80ड़ के अंतर्गत उच्च शिक्षा हेतु लिए गए ऋण पर ब्याज के संदर्भ में कटौती | रू...... | रू...... | |
| सकल राशि | योग्य राशि | कटौतीपूर्ण राशि | ||
| (झ) | धारा 80छ के अंतर्गत कुछ फंड, धर्मांर्थ संस्थानों को दान के सन्दर्भ में कुल कटौती | रू...... | रू...... | रू...... |
| (ञ) | 80ननक के अंतर्गत बचत खाते में जमा ब्याज के संदर्भ में कटौती | रू...... | रू...... | रू...... |
| (ट) | अध्याय VI-क के किसी अन्य प्रावधान के अंतर्गत काटी गई राशि | |||
| धारा................ | रू...... | रू...... | रू...... | |
| धारा................ | रू...... | रू...... | रू...... | |
| धारा................ | रू...... | रू...... | रू...... | |
| धारा................ | रू...... | रू...... | रू...... | |
| धारा................ | रू...... | रू...... | रू...... | |
| धारा................ | रू...... | रू...... | रू...... | |
| रू...... | रू...... | रू...... | ||
| (ठ) | अध्याय VI-क के किसी अन्य प्रावधानों के अंतर्गत काटे जाने वाली कुल राशि | रू...... | रू...... | रू...... |
| 11 | अध्याय VI-क के अंतर्गत काटे जाने वाली कुल राशि [10(क)+10(ख)+10(ग)+10(घ)+10(ड़)+10(च)+10(छ)+10(ज)+10(झ)+10(ञ)+10(ठ)] | रू...... | ||
| 12 | कुल करयोग्य आय (9-11) | रू...... | ||
| 13 | कुल आय पर कर | रू...... | ||
| 14 | धारा 87क, यदि लागू होती हो, के अंतर्गत छूट | रू...... | ||
| 15 | अधिभार, जहां भी लागू हो | रू...... | ||
| 16 | स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर 4 प्रतिशत की दर पर | रू...... | ||
| 17 | देययोग्य कर (13+15-16-14) | रू...... | ||
| 18 | घटा : धारा 89 के अंतर्गत राहत (ब्यौरा संलग्न) | रू...... | ||
| 19 | शुद्ध देययोग्य कर (17-18) | रू...... | ||
सत्यापन
मैं,................................................पुत्र/पुत्री,.............................................................., .........................................................(पद) के तौर पर कार्यरत एतद्द्वारा प्रमाणित करता हूं कि उक्त सूचना सही, पूर्ण और सत्य है और बही खातों, दस्तावेजों, टीडीएस ब्यौरे, जमा टीडीएस और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड पर आधारित है।
स्थान..............................
(कर कटौती करने के लिए जिम्मेदार हस्ताक्षर)
तिथि ............................
पूरा नाम.......................................
अनुलग्नक-II
धारा 194प के अंतर्गत कर कटौती के लिए योग्य वरिष्ठ नागरिकों के संबंध में
| क | यदि धारा 115खकग के अंतर्गत कराधान को चुना हो | [हां/नहीं] | ||
| 1 | सकल वेतन | |||
| (क) | धारा 17(1) के वाक्यांश (ii) में शामिल प्रावधानों के अनुसार पेंशन | रू...... | ||
| 2. | प्राप्त वेतन की कुल राशि | रू...... | ||
| 3 | घटा : धारा 16 के अंतर्गत कटौती | |||
| (क) | धारा 16(iक) के अंतर्गत मानक कटौती | रू...... | ||
| (ख) | धारा 16(iii) के अंतर्गत रोजगार पर कर | रू...... | ||
| 4. | धारा 16 के अंतर्गत कटौती की कुल राशि [3(क)+3(ख)] | रू...... | ||
| 5 | शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूले जाने वाली आय [2-4] | रू...... | ||
| 6 | निर्दिष्ट बैंक द्वारा दिए गए अन्य मुख्य स्रोत के अंतर्गत ब्याज आय | रू...... | ||
| 7 | कुल सकल आय [5+6] | रू...... | ||
| 8 | अध्याय VI-क के अंतर्गत कटौती | |||
| कुल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | |||
| (क) | धारा 80ग के अंतर्गत भविष्य निधि हेतु अंशदान, जीवन बीमा प्रीमियम के संदर्भ में कटौती | रू...... | रू...... | |
| (ख) | धारा 80गगग के अंतर्गत कुछ भविष्य निधि हेतु अंशदान के संदर्भ में कटौती | रू...... | रू...... | |
| (ग) | धारा 80गगघ (1) के अंतर्गत पेंशन योजना के लिए करदाता द्वारा अंशदान के संदर्भ में कटौती | रू...... | रू...... | |
टिप्पणी :
1. भाग क की मद ड़ में सूचना को भरने के लिए सरकारी डिडक्टर यदि कर आयकर चालान की प्रस्तुति के बिना दिया जाता है और भाग क की मद II में यदि कर भुगतान में आयकर चालान शामिल होता है।
2. भाग क की मद II में सूचना को दाखिल करने के लिए गैर-सरकारी डिडक्टर
3. डिडक्टर निर्धारिती के टीडीएस विवरण के संबंध में क्षेत्राधिकार रखने वाले आयकर आयुक्त (टीडीएस) का पता प्रस्तुत करेगा
4. यदि निर्धारिती को वर्ष के दौरान एक ही निर्धारिती द्वारा नियोजित किया जाता है, वित्त वर्ष के लिए 31 मार्च, 2021 को समाप्त होने वाली तिमाही के लिए जारी किए गए प्रपत्र सं. 16 में प्रमाणपत्र में वित्त वर्ष की सभी तिमाहियों के लिए कर कटौती और जमा का ब्यौरा शामिल होगा।
5. (i) यदि एक निर्धारिती को वर्ष के दौरान एक से अधिक नियोक्ता द्वारा नियोजित किया जाता है तो प्रत्येक नियोक्ता उस अवधि से संबंधित प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र का भाग क जारी करेगा जिसके लिए ऐसे निर्धारिती को प्रत्येक नियोक्ता की ओर से रोजगार दिया गया था
(ii) प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र के भाग-ख (अनुलग्नक-I) को प्रत्येक नियोक्ताओं या निर्धारिती की इच्छा पर अंतिम नियोक्ता द्वारा जारी किया जा सकता है
(iii) प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र के भाग-ख (अनुलग्नक-I) को निर्दिष्ट बैंक की ओर से निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक को जारी किया जा सकता है।
6. भाग क में, मद और II में, डिडक्टी के संदर्भ में जमा कर के लिए कॉलम में, कर की कुल राशि, अधिभार और स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर को प्रस्तुत करें
7. डिडक्टर कर्मचारी को भाग ख (अनुलग्नक) की प्रस्तुति से पहले मद संख्या 2(च) और 10(ट) में विधिवत तौर पर ब्यौरा,जहां मौजूद हो, प्रस्तुत करेगा]
अनुलग्नक ग
प्रपत्र सं. 24थ
धारा 192, 194प और नियम 31क देखें
.............................को समाप्त तिमाही (जून/सिंतबर/दिसंबर/मार्च).............................(वित्त वर्ष) के लिए धारा 192 के अंतर्गत कर्मचारी को दिए गए वेतन के संबंध में आयकर अधिनियम की धारा 200 की उप-धारा (3) के अंतर्गत कर कटौती का त्रैमासिक ब्यौरा या धारा 194प के अंतर्गत निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक की आय
| 1. (क) कर कटौती और संग्रहण खाता संख्या | (घ) इस तिमाही के लिए पहले से दाखिल की गई है (हां/नहीं) |
|||||||||||
| (ख) स्थाई खाता संख्या [पैन] [टिप्पणी 1 देखें] | (ड़) यदि (घ) का उत्तर "हां" है तो मूल ब्यौरे का टोकन नं. |
|||||||||||
| (ग) वित्त वर्ष | (च) डिडक्टर का प्रकार [टिप्पणी 2 देखें] | |||||||||||
| 2. डिडक्टर (नियोक्ता) का ब्यौरा | ||||||||||||
| (क) नियोक्ता का नाम | ||||||||||||
| (ख) यदि केंद्र/राज्य सरकार हो | ||||||||||||
| नाम (टिप्पणी 3 देखें) | ||||||||||||
| पीएओ/टीओ/सीडीडीओ का एआईएन कोड | ||||||||||||
| (ग) टैन पंजीकरण सं. | ||||||||||||
| (घ) पता | ||||||||||||
| फ्लैट नं. | ||||||||||||
| परिसर/बिल्डिंग रोड़/सड़क/लेन एरिया/स्थान/टाउन/शहर/जिला/राज्य | ||||||||||||
| पिन कोड | ||||||||||||
| दूरभाष नं. | ||||||||||||
| वैकल्पिक दूरभाष नं. (टिप्पणी 4 देखें) | ||||||||||||
| ईमेल | ||||||||||||
| वैकल्पिक ईमेल (टिप्पणी 4 देखें) | ||||||||||||
| 3. कर की कटौती करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का ब्यौरा | ||||||||||||
| (क) नाम | ||||||||||||
| (ख) पता | ||||||||||||
| फ्लैट नं. | ||||||||||||
| परिसर/बिल्डिंग रोड़/सड़क/लेन एरिया/स्थान/टाउन/शहर/जिला/राज्य का नाम | ||||||||||||
| पिन कोड | ||||||||||||
| दूरभाष नं. | ||||||||||||
| वैकल्पिक दूरभाष नं. (टिप्पणी 4 देखें) | ||||||||||||
| ईमेल | ||||||||||||
| वैकल्पिक ईमेल (टिप्पणी 4 देखें) | ||||||||||||
| मोबाइल नं. | ||||||||||||
4. काटे गए और केंद्र सरकार को दिए गए कर का ब्यौरा
क्र.सं. |
कर |
उपकर | शिक्षा उपकर |
ब्याज |
शुल्क (टिप्पणी 12 देखें) |
जुर्माना/अन्य |
चालान/बुक समायोजन के अनुसार कुल जमा राशि [302+303+304+ 305+306+307] (टिप्पणी 6 देखें) |
चालान (ग)/बुक समायोजन (ख) के माध्यम से टीडीएस की विधि (टिप्पणी 7 देखें) |
प्रपत्र सं. 24छ की बीसीआर कोड/प्राप्ति सं. (टिप्पणी 8 देखें) |
प्राप्ति सं. छ की चालान क्रमांक सं./डीडीओ क्रमांक सं. (टिप्पणी 8 देखें) |
तिथि जिस पर स्थानांतरण वाउचर की तिथि/वाउचर के माध्यम से जमा राशि टिप्पणी 8 देखें) |
गैर जरूरी चालान (टिप्पणी 9 देखें) |
| [301] | [302] | [303] | [304] | [305] | [306] | [3005] | [308] | [309] | [310] | [311] | [312] | [313] |
| 1. | ||||||||||||
| 2. | ||||||||||||
| 3. | ||||||||||||
5. दिए गए वेतन और उसपर कर्मचारी द्वारा काटा गया कर
(i) प्रासंगिक तिमाही के ब्यौरे वाले प्रत्येक विवरण सहित अनुलग्नक I को संलग्न करें
(ii) अंतिम ब्यौरे, यानी पूर्ण वित्त वर्ष के लिए ब्यौरे वाले 31 मार्च को समाप्त होने वाली तिमाही के लिए, के साथ अनुलग्नक II को संलग्न करें
(iii) अंतिम ब्यौरे, यानी पूर्ण वित्त वर्ष के लिए ब्यौरे वाले 31 मार्च को समाप्त होने वाली तिमाही के लिए, के साथ अनुलग्नक III को संलग्न करें
सत्यापन
मैं,..................................................................., एतद्द्वारा प्रमाणित करता हूं कि ऊपर प्रस्तुत किए गए सभी ब्यौरे सही और पूरे हैं।
स्थान.....................................
स्रोत पर कर कटौती के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के हस्ताक्षर
तिथि.....................................
नोट
स्रोत पर कर कटौती के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का नाम और पद
1. गैर-सरकारी डिडक्टरों के लिए पैन उद्धृत करना आवश्यक है। सरकारी डिडक्टरों के मामले में "PANNOTREQD" निर्दिष्ट करना चाहिए।
2. कृपया सरकारी और गैर-सरकारी डिडक्टर को निर्दिष्ट करें।
3. केंद्र सरकार के मामले में, कृपया मंत्रालय/विभाग का नाम निर्दिष्ट करें। राज्य सरकार के मामले में, कृपया राज्य का नाम निर्दिष्ट करें।
4. वैकल्पिक दूरभाष नंबर और वैकल्पिक ई-मेल के मामले में, कृपया उस व्यक्ति का दूरभाष और ई-मेल प्रस्तुत करें जिसे डिडक्टर की अनुपस्थिति और कर कटौती करने वाले व्यक्ति की अनुपस्थिति में संपर्क किया जा सकता है।
5. टीडीएस ब्यौरे को देरी से दाखिल करने के लिए धारा 234ड़ के अंतर्गत दिया गया शुल्क को शुल्क के अलग कॉलम (कॉलम 306) में निर्दिष्ट किया जाना है।
6. कॉलम 308 में, सरकारी डीडीओ को पीएओ/सीडीडीओ द्वारा प्रेषित टीडीएस की राशि को निर्दिष्ट करना है। अन्य डिडक्टरों को चालान के माध्यम से जमा टीडीएस की सटीक राशि लिखनी होगी।
7. कॉलम 309 में, सरकारी डिडक्टर को "ख" लिखें जहां टीडीएस बुक समायोजन के माध्यम से केंद्र सरकार को प्रेषित की जानी है। अन्य डिडक्टरों को "ग" लिखना है।
8. चालान/स्थानांतरण वाउचर (सिन/बिन) ब्यौरे यानी 310,311,312 एकदम वैसा ही होना चाहिए जैसा कर सूचना नेटवर्क पर उपलब्ध है।
9. कॉलम 313 में, गैर जरूरी शीर्षक को निर्दिष्ट करें जैसा चालान पर चिन्हित है।
अनुलग्नक-ड़: डिडक्टी के अनुसार टीडीएस का विभाजन
(प्रत्येक लाइन के लिए अलग अनुलग्नक का प्रयोग करें)
प्रमुख प्रपत्र 24थ की कर्मचारी को दिए वेतन और उस पर कर कटौती का विवरण क्र.सं. 04 पर तालिका में मद
| प्रपत्र सं. 24छ की शाखा/प्राप्ति सं. का बीएसआर कोड | नियोक्ता का नाम | |||||
| तिथि जिस पर चालान जमा किया गया/वाउचर स्थानांतरण तिथि (डीडी/एमएम/वाईवाईवाईवाई) | टैन | |||||
| चालान क्रमांक सं./प्रपत्र 24छ की डीडीओ क्रमांक सं. | ||||||
| चालान के अनुसार राशि | ||||||
| डिडक्टी में से आवंटित होने वाला कुल टीडीएस जैसाकि कॉलम 326 की वार्टिकल कॉलम में है | ||||||
| नीचे डिडक्टियों के बीच आवंटित होने वाला कुल ब्याज |
क्र. सं. |
नियोक्ता द्वारा दी गई कर्मचारी संदर्भ सं./ पीपीओ सं., यदि उपलब्ध हो |
कर्मचारी/ निदिष्ट वरिष्ठ नागरिक का पैन |
कर्मचारी/ निदिष्ट वरिष्ठ नागरिक का नाम |
धारा कोड (टिप्पणी 4 देखें) |
भुगतान/क्रेडिट की तिथि (डीडी/एमएम/ वाईवाई वाईवाई) |
कटौती की तिथि (डीडी/एमएम/ वाईवाई वाईवाई) |
दी गई या क्रेडिट राशि |
कर |
अधिभार |
शिक्षा उपकर |
कुल टीडीएस (कॉलम 322, 323, 324 का कुल) |
कुल जमा टीडीएस रू |
जमा करने की तिथि (डीडी/एमएम/ वाईवाई वाईवाई) |
कटौती न करने/कम कटौती करने/ ज्यादा कटौती करने का कारण (टिप्पणी 1, 2 और 3 देखें) |
कटौती न करने/ कम कटौती करने के लिए निर्धारण अधिकारी द्वारा धारा 197 के अंतर्गत प्रमाणपत्र की सं. |
[314] |
[315] |
[316] |
[317] |
[318] |
[319] |
[320] |
[321] |
[322] |
[323] |
[324] |
[325] |
[326] |
[327] |
[328] |
[329] |
1 |
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2 |
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3 |
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कुल |
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सत्यापन
मैं,............................................................................................, एतद्द्वारा स्पष्ट करता हूं कि कि ऊपर प्रस्तुत किए गए सभी ब्यौरे सही और पूर्ण है।
स्थान....................................................... |
स्रोत पर कर कटौती करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के हस्ताक्षर........................................ |
तिथि....................................................... |
स्रोत पर कर कटौती करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का नाम और पद......................................... |
टिप्पणियां :
1. "क" लिखें, यदि धारा 197 के अंतर्गत कम दर पर कर की कटौती करने के लिए निर्धारण अधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र दिया गया हो। ऐसे मामलों में कर्मचारी का पैन आवश्यक है।
2. "ख" लिखें, यदि धारा 197 के अंतर्गत कर कटौती न करने के लिए निर्धारण अधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र दिया गया हो। ऐसे मामलों में कर्मचारी का पैन आवश्यक है।
3. "ग" लिखें, यदि डिडक्टी द्वारा पैन की प्रस्तुति न करने के कारण अधिक दर पर कटौती की गई हो।
4. धारा कोड की सूची निम्नानुसार है :
| धारा | भुगतान का प्रकार | धारा कोड |
| 192 | भारतीय सरकारी कर्मचारियों के अलावा सरकारी कर्मचारियों को भुगतान | 92क |
| 192 | सरकारी कर्मचारियों के अलावा सरकारी कर्मचारियों को भुगतान | 92ख |
| 192 | भारतीय सरकारी कर्मचारियों को भुगतान | 92ग |
| 194प | निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक को भुगतान | 94प |
| परिशिष्ट II | |||||||||
| वित्त वर्ष.......................................................के दौरान जमा या क्रेडिट किए गए वेतन का ब्यौरा और देययोग्य शुद्ध कर (धारा 192 के अंतर्गत) | |||||||||
| क्र.सं. | कर्मचारी की स्थाई खाता सं. | कर्मचारी का नाम | यदि धारा 115खकग के अंतर्गत कराधान को चुना हो (हां/नहीं) | डिडक्टी प्रकार (वरिष्ठ नागरिक,अति वरिष्ठ नागरिक, अन्य) | तिथि से और उस तिथि तक जहां वह वर्तमान वित्त वर्ष में वर्तमान नियोक्ता के साथ नियोजित है (डीडी/एमएम/वाईवाईवाईवाई) | (क) धारा 17(1) में शामिल प्रावधानों के अनुसार कुल वेतन | (ख) धारा 17(2) के अंतर्गत रियायत की कीमत (प्रपत्र सं. 12खक के अनुसार जहां लागू हो) | (ग) धारा 17(3) के अंतर्गत वेतन के स्थान पर लाभ (प्रपत्र सं. 12खक के अनुसार जहां लागू हो) | वर्तमान नियोक्ता की ओर से प्राप्त कुल वेतन की राशि (वेतन की परिभाषा के लिए टिप्पणी 1) |
| (330) | (331) | (332क) | (332ख) | (333) | (334) | (335) | (336) | (337) | (338) |
| अन्य नियोक्ता से प्राप्त वेतन की कुल प्रतिवेदित राशि (वेतन की परिभाषा के लिए टिप्पणी 1 देखें) | धारा 10(5) के अंतर्गत यात्रा रियायत या सहायता | धारा 10(10) के अंतर्गत मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेचुएटी | धारा 10(10क) के अंतर्गत पेंशन की परिवर्तित कीमत | धारा 10(10कक) के अंतर्गत अवकाश वेतन नकदीकरण के बराबर नकद | धारा 10(13क) के अंतर्गत गृह किराया भत्ता | मालिक का पैन, यदि छूट का दावा धारा 10(13क) के अंतर्गत किया गया हो (टिप्पणी 3 देखें) | धारा 10 के अंतर्गत किसी अन्य प्रकार की छूट की राशि | धारा 10 के अंतर्गत किए गए छूट संबंधी दावों की कुल राशि (340 + 341 + 342 + 343 +344 + 346) | धारा 16(iक) के अंतर्गत कुल कटौती |
| (339) | (340) | (341) | (342) | (343) | (344) | (345) | (346) | (347) | (348) |
| धारा 16(ii) के अंतर्गत कुल कटौती | धारा 16(iii) के अंतर्गत कुल कटौती | शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वसूले जाने वाली आय (338 + 339 - 347 + 348 + 349 + 350) | धारा 192 (2ख) के अनुसार टीडीएस के लिए प्रस्तुत कर्मचारी द्वारा सूचित गृह संपत्ति से आय (या स्वीकार्य आय ) | पैन ऋणदाता, यदि गृह ऋण पर ब्याज का दावा धारा 24(ख) के अंतर्गत किया गया हो (टिप्पणी 4 देखें) | धारा 192 (2ख) के अनुसार टीडीएस के लिए प्रस्तुत शीर्षक अन्य स्रोतों के अंतर्गत आय | कुल सकल आय (351 + 352 + 354) | धारा 80ग के अंतर्गत भविष्य निधि आदि के लिए अंशदान जीवन बीमा प्रीमियम के संबंध में कटौती | धारा 80गगग के अंतर्गत कुछ पेंशन फंड के लिए अंशदान के संदर्भ में कटौती | धारा 80गगघ(1) के अंतर्गत अधिसूचित पेंशन योजना के लिए करदाता द्वारा अंशदान के संदर्भ में कटौती | |||
| सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | |||||||
| (349) | (350) | (351) | (352) | (353) | (354) | (355) | (356) | (357) | (358) | (359) | (360) | (361) |
| धारा 80गगघ(1ख) के अंतर्गत अधिसूचित पेंशन योजना के अंतर्गत जमा या दी गई राशि के संबंध में कटौती | धारा 80गगघ(2) के अंतर्गत अधिसूचित पेंशन के लिए नियोक्ता द्वारा अंशदान के संदर्भ में कटौती | धारा 80घ के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के संदर्भ में कटौती | धारा 80ड़ के अंतर्गत उच्च शिक्षा के लिए लिए गए ऋण पर ब्याज के संदर्भ में कटौती | धारा 80छ के अंतर्गत कुछ फंउ, धर्मांर्थ संस्थानों को दान के सदंर्भ में कुल कटौती | धारा 80ननक के अंतर्गत बचत खाते में जमा पर ब्याज के संदर्भ में कटौती | अध्याय VI-क के किसी अन्य प्रावधान के अंतर्गत काटे जाने वाली राशि |
अध्याय VI-क के अंतर्गत काटे जाने वाली कुल राशि (357 + 359 + 361 (रू. 1,50,000 तक सीमित) + 363 + 365 + 367 + 369 + 372 + 375 + 378) | ||||||||||
| सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | योग्य राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | योग्य राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | योग्य राशि | कटौतीपूर्ण राशि | |
| (362) | (363) | (364) | (365) | (366) | (367) | (368) | (369) | (370) | (371) | (372) | (373) | (374) | (375) | (376) | (377) | (378) | (379) |
| कुल करयोग्य आय (355-379) | कुल आय पर आयकर | धारा 87क के अंतर्गत छूट यदि लागू हो | अधिभार, जहां भी लागू हो | स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर | धारा 89 के अंतर्गत आयकर राहत जब वेतन बकाया हो या उधार दिया गया हो | शुद्ध कर देयता (381 + 383 + 384-382 + 385) | संपूर्ण वर्ष के लिए वर्तमान नियोक्ता द्वारा काटे गए कर की कुल राशि (प्रत्येक कर्मचारी के संदर्भ में सभी तिमाहियों के लिए अनुलग्नक I के कॉलम 325 में कुल राशि) | अन्य नियोक्ता या डिडक्टी द्वारा स्रोत पर काटे गए कर की सूचित राशि (आय जिसके संबध में कॉलम 339 में कुल करयोग्य आय की गणना में शामिल है) | पूर्ण वर्ष के लिए स्रोत पर काटे गए कर की कुल राशि (387+388) | कर कटौती में कमी (+) या कर कटौती की अधिकता (-) (386-389) |
| (380) | (381) | (382) | (383) | (384) | (385) | (386) | (387) | (388) | (389) | (390) |
टिप्पणियां :
1. वेतन में शामिल है पारिश्रमिक, वार्षिकी, पेंशन, ग्रेचुएटी (धारा 10(10) के अंतर्गत छूट को छोड़कर), शुल्क, कमीशन, बोनस, अतिरिक्त वेतन (अनिवार्य जमा) अधिनियम, 1974 (1974 की 37) के अंतर्गत जमा राशि के पुर्नभुगतान, रियायत, रोजगार के समाप्त होने पर या उसके संबंध में किए गए भुगतान सहित किसी प्रकार के वेतन या पारिश्रमिक के स्थान पर या उसके अलावा लाभ, एडवांस वेतन, किसी प्रकार के अवकाश का लाभ न लेने के लिए किसी अवधि के संबध में प्राप्त किसी प्रकार का भुगतान (धारा 10(10कक) के अंतर्गत छूट को छोड़कर), आयकर अधिनियम, 1961 की चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 6 के अनुसार कर के लिए वसूले जाने वाले मान्यता प्राप्त भविष्य निधि के खाते में बैलेंस में किसी प्रकार की वार्षिक वृद्धि, आयकर अधिनियम, 1961 की चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 11 के उप-नियम(4) के अनुसार कर्मची को प्राप्त आय के तौर पर समझे जाने वाली कोई राशि, धारा 80गगघ में संदर्भित एक पेंशन योजना के अंतर्गत कर्मचारी के खाते में केंद्र सरकार द्वारा किया गया कोई अंशदान या शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत आयकर हेतु वसूलनीय किसी अन्य प्रकार की आय।
2. जहां एक नियोक्ता एक कर्मचारी को दिए गए मेहनताना से कटौती करता है या उसकी ओर से किसी भी प्रकार के सेवानिवृत्ति फंड में उस कर्मचारी के अंशदान करता है तो इस प्रकार की सभी कटौती या भुगतान ब्यौरे में शामिल होना चाहिए।
3. मकान मालिक की स्थाई खाता संख्या वहां प्रस्तुत करना आवश्यक है जहां पिछले वर्ष के दौरान दिया गया कुल किराया एक लाख रूपए से अधिक होती है।
4. ऋणदाता की स्थाई खाता संख्या वहां प्रस्तुत करना आवश्यक है जहां घर का ऋण, जिस पर ब्याज का भुगतान किया है, वित्तीय संस्थान या नियोक्ता के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से लिया गया हो।
| अनुलग्नक III | |||||||||||
| वित्त वर्ष.......................................................के दौरान जमा या क्रेडिट पेंशन और ब्याज आय का ब्यौरा और देययोग्य शुद्ध कर (धारा 194प के अंतर्गत) | |||||||||||
| क्र.सं. | निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक की स्थाई खाता संख्या/आधार नंबर | निर्दिष्ट वरिष्ठ नागरिक का नाम | डिडक्टी प्रकार ( वरिष्ठ नागरिक/अति वरिष्ठ नागरिक) | यदि धारा 115खकग के अंतर्गत कराधान को चुना हो (हां/नही) | धारा 17(1) के वाक्यांश (ii) में शामिल प्रावधानों के अनुसार सकल पेंशन | धारा 16 के अंतर्गत कटौती | शीर्षक "आय के अंतर्गत आय" | निर्दिष्ट बैंक द्वारा अन्य स्रोत के अंतर्गत दिया गया अन्य ब्याज | कुल सकल आय | ||
| धारा 16(क) के अंतर्गत मानक कटौती | रोजगार पर कर (16(iii) | कुल | |||||||||
| (391) | (392) | (393) | (394) | (395) | (396) | (397) | (398) | (399) = (397) + (398) | (400) = (396) - (398) | (401) | (402) = (400) + (401) |
| धारा 80ग के अंतर्गत भविष्य निधि के लिए अंशदान, जीवन बीमा प्रीमियम के संबध में कटौती | धारा 80गगग के अंतर्गत कुछ पेंशन फंड के लिए अंशदान के संदर्भ में कटौती | धारा 80गगघ(1) के अंतर्गत पेंशन योजना हेतु करदाता द्वारा अंशदान के संदर्भ में कटौती | धारा 80ग, 80गगग और 80गगघ(1) के अंतर्गत कुल कटौती (रू. 1,50,000 से अधिक नही) | धारा 80गगघ (1ख) के अंतर्गत अधिसूचित पेंशन योजना के लिए दी गई/जमा की गई राशि के संबंध में कटौती | धारा 80घ के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के संबंध में कटौती | धारा 80ड़ के अंतर्गत उच्च शिक्षा के हेतु लिए गए ऋण के संदर्भ में कटौती | धारा 80छ के अंतर्गत कुछ फंड, धर्मांर्थ संस्थानों के संबध में कटौती | धारा 80ननख के अंतर्गत बचत खाते में जमा पर ब्याज के संबंध में कटौती | |||||||||||||
| सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | योग्य राशि | कटौतीपूर्ण राशि | सकल राशि | योग्य राशि | कटौतीपूर्ण राशि | ||||
| (403) | (404) | (405) | (406) | (407) | (408) | (409) | (410) | (411) | (412) | (413) | (414) | (415) | (416) | (417) | (418) | (419) | (420) | (421) | |||
| अध्याय VI-क के किसी अन्य प्रावधान के अंतर्गत कटौतीपूर्ण राशि | अध्याय VI-क के अंतर्गत कुल कटौतीपूर्ण राशि कुल करयोग्य आय | कुल करयोग्य आय | कुल आय पर कर | धारा 87क के अंतर्गत छूट यदि लागू हो | अधिभार, जहां भी लागू हो | स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर | देययोग्य कर | धारा 89 के अंतर्गत राहत | शुद्ध देययोग्य कर | ||||||||||||
| धारा कोड (टिप्पणी 1 देखें) | सकल राशि | योग्य राशि | कटौतीपूर्ण राशि | ||||||||||||||||||
| (422) | (423) | (424) | (425) | (426) = (409) + (411) + (413) + (415) + (418) + (421) + (425) | (427) = (402) - (426) | (428) | (429) | (430) | (431) | (432) = (428) + (430) + (431) + (429) | (433) | (434) | |||||||||
टिप्पणियां :
2. धारा कोड
| क्र.सं. | धारा | ब्यौरे | धारा कोड |
| 1 | 80घघ | आश्रित, जो विकलांग है, के चिकित्सा उपचार सहित रखरखाव के संबंध में कटौती | घघ |
| 2 | 80ड़ड़ | आवासीय गृह संपत्ति हेतु लिए गए ऋण पर ब्याज के संदर्भ में कटौती | ड़ड़ |
| 3 | 80ड़ड़क | कुछ गृह संपत्तियों हेतु लिए गए ऋण पर ब्याज के संदर्भ में कटौती (80ड़ड़ के अंतर्गत शामिल नहीं) | ड़ड़क |
| 4 | 80छछ | दिए गए किराये के संबंध में कटौती | छछ |
| 5 | 80छछग | राजनीतिक दल को किसी व्यक्ति की ओर से दिए गए अंशदान के संबंध में कटौती | छछग |
| 6 | 80प | विकलांग व्यक्ति के मामले में कटौती | प,"; |

