आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 4/2019

परिपत्र की तिथि

28/01/2019

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

28/01/2019

परिपत्र सं. 4/2019

 परिपत्र सं. 04/2019

 

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नार्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली, 28 जनवरी, 2019

 

विषय : आयकर अधिनियम के अंतर्गत आधिकारिक संपत्ति-भागी की स्थिति और देयता के संबंध में स्पष्टीकरण-संबंधी

 

प्रेसीडेंसी टाउन इन्सॉल्वेंसी एक्ट, 1909 और प्रोवेनसियल इन्सॉल्वेंसी एक्ट, 1920 के प्रावधानों के अंतर्गत जहां दिवालियापन का आदेश संबंधित न्यायालय द्वारा एक देनदार के विरूद्ध दिया जाता है तो देनदार की संपत्ति न्यायालय द्वारा नियुक्त आधिकारिक संपत-भागी के साथ निहित हो जाती है। आधिकारिक संपत्ति-भागी तब दिवालिया हुए व्यक्ति की संपत्ति को प्राप्त करता है और दिवालिया व्यक्ति के लेनदारों के बीच आवंटित करता है। परिणामस्वरूप, आधिकारिक संपत्ति-भागी की जिम्मेदारी है कि वह उसे दिए गए संपत्ति संबंधी आयकर मामलों को संभाले। इस संबंध में, आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) की धारा 160(1) के वाक्यांश (iii) जो आधिकारिक संपत्ति-भागी के मामले में एक 'प्रतिनिधि निर्धारिती' पर लागू होती है, को लागू करने संबंधित स्पष्टीकरण की मांग की गर्इ है। आगे, आधिकारिक संपत्ति-भागी यानी व्यक्तियों की उपयुक्त श्रेणी में उनकी दोषक्षमता, जैसा अधिनियम की धारा 2(31) में निर्दिष्ट है, की स्थिति के संबंध में स्पष्टीकरण की भी मांग की जा चुकी है।

2. अधिनियम की धारा 160(1)(iii) के प्रावधानों के अनुसार वहां निर्दिष्ट अन्य स्थितियों में एक प्रतिनिधि संपत्ति-भागी उस किसी आय के संबंध में उत्तरदायी बन जाता है जो संपत्ति-भागी ने प्राप्त की है या किसी व्यक्ति के लाभ के लिए संपत्ति को प्रबंधित करने के दौरान प्राप्त करने के लिए हकदार है। दो दिवालियापन अधिनिमयों के अनुसार, अधिकारिक संपत्ति-भागी ऋणदाता के लाभ के लिए देनदार की संपत्ति को संभालता है। आगे, दिवालियापन अधिनियम, 1909, स्पष्ट शर्तों में, बताता है कि एक संपत्ति-भागी एक बार न्यायिक निर्णय के आदेश के दिवालियापन अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत दिए जाने के बाद संपत्ति में स्वामित्व हित नही रखेगा। इसलिए, एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि चूंकि आधिकारिक संपत्ति-भागी ऋणी की ओर से आय प्राप्त नहीं करता और संपत्ति को नहीं संभालता इसलिए उसे ऋणी की संपत्ति से उत्पन्न कर देयता की गणना के दौरान अधिनियम के अंतर्गत ऋणी के 'प्रतिनिधि निर्धारिती' के तौर पर नहीं समझा जा सकता।

3. चूंकि दिवालिया व्यक्ति की संपत्ति आधिकारिक संपत्ति-भागी के कार्यो को नियमित करने वाले अधिनियम/कानून के विशिष्ट प्रावधानों के अनुसार आधिकारिक संपत्ति-भागी में निहित है, उसे आयकर अधिनियम के लिए कानूनी उद्यम के तौर पर समझा जाना चाहिए। इसलिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि अधिनियम के अंतर्गत कर देयता के निर्वाह के लिए आधिकारिक सपंत्तिभागी की स्थिति एक 'कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति' है जैसा अधिनियम की धारा 2(31)(vii) में निर्दिष्ट है, अधिनियम की धारा 2(31) के उप-वाक्यांश (i) से (vi) में आने वाले व्यक्ति के तौर पर नहीं।

4. इसलिए, आधिकारिक संपत्ति-भागी को दिवालिया व्यक्ति की हर संपत्ति के लिए अलग से 'कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति' पर लागू होने वाले आर्इटीआर प्रपत्र में इलैक्ट्रनिक रूप से आयकर विवरणी को दाखिल करना जरूरी है। और आय कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति पर एक विशेष वर्ष में लागू होने वाली दरों के अनुसार करोड़पति होगी।

5. उक्त स्थिति को देखते हुए, आधिकारिक संपत्ति-भागी को दिवालिया व्यक्ति की प्रत्येक संपत्ति के लिए अलग पैन प्राप्त करना होगा।

6. हिंदी संस्करण का अनुसरण किया जाना है

 

हस्ता/-

(राजा राजेश्वरी आर.)

अवर सचिव, (आर्इटीए-II), सीबीडीटी

 

(एफ.नं. 225/427/2018/आर्इटीए.II)

 

निम्न को प्रति :

  1. एफएम हेतु पीएस/एफएम हेतु ओएसडी/एमओएस (एफ) हेतु पीएस/एमओएस (एफ) हेतु ओएसडी

  2. सचिव (राजस्व) हेतु पीएस

  3. अध्यक्ष, सीबीडीटी व सभी सदस्य, सीबीडीटी

  4. समस्त प्रधान आयकर महानिदेशक/प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त

  5. सभी संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त, सीबीडीटी

  6. आयकर आयुक्त (एमएंडटीपी), सीबीडीटी के आधिकारिक प्रवक्ता

  7. आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) कार्यालय

  8. अपर आयकर आयुक्त (डाटाबेस प्रकोष्ठ) विभागीय वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए

 

(राजा राजेश्वरी आर.)

अवर सचिव, (आर्इटीए-II), सीबीडीटी