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वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 21/2020

परिपत्र की तिथि

04/12/2020

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

04/12/2020

परिपत्र सं. 21/2020

परिपत्र सं. 21/2020

 

एफ.नं. आईटी(ए)/1/2020/टीपीएल

भारत सरकार

+

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

****

 

नई दिल्ली, 4 दिसंबर, 2020

 

विषय : प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास अधिनियम, 2020 के प्रावधानों पर स्पष्टीकरण -संबंधित

 

लंबित आयकर मुकद्मेबाजी को कम करने, सरकार के लिए समय से राजस्व जुटाने और करदाताओं को मन की शांति देकर लाभ देने, निश्चितता और समय की बचत और संसाधन देने जो अन्यथा विलंबित और कष्टकर मुकद्मेबाजी प्रक्रिया पर व्यय हुए हैं, के उद्देश्य से प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास अधिनियम, 2020 ('तत्पश्चात् विवाद से विश्वास के तौर पर संदर्भित') को 17 मार्च, 2020 को अधिनियमित किया गया था। विवाद से विश्वास के प्रावधानों को कोविड-19 महामारी को देखते हुए कुछ राहत देने के लिए और कुछ तिथियों को निर्दिष्ट करने के लिए केंद्र सरकार को सशक्त करने के लिए भी कराधान एवं अन्य कानून (कुछ प्रावधानों की राहत और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित किया गया था। इसके लिए, अधिसूचना दिनांक 27 अक्टूबर, 2020 के द्वारा, विवाद से विश्वास के अंतर्गत अतिरिक्त राशि के बिना भुगतान की तिथि को 31 दिसंबर, 2020 से 31 मार्च, 2021 तक बढ़ा दी गई है। विवाद से विश्वास के अंतर्गत घोषणा करने की अंतिम तिथि को भी 31 दिसंबर, 2020 के अंत तक अधिसूचित किया गया था। तद्नुसार, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने देययोग्य राशि के भुगतान जैसा नामित प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र में निर्धारित है, के लिए विवाद से विश्वास की धारा 5(1) में निर्धारित 15 दिनों की समय सीमा की राहत देने के लिए परिपत्र सं. 18/2020 दिनांक 28 अक्टूबर, 2020 को जारी किया है ।

2. करदाताओं को सुविधा देने के लिए, बोर्ड ने परिपत्र सं. 9/2020 दिनांक 22 अप्रैल, 2020 के द्वारा विवाद से विश्वास के अंतर्गत पात्रता, देययोग्य राशि की गणना, प्रक्रिया और परिणाम से संबंधित मुद्दों पर 55 अक्सर पूछे जाने सवालों (एफएक्यू) के उत्तरों के रूप में स्पष्टीकरण जारी किए गए थे। उसके बाद ऐसे मुद्दों पर अग्रिम छूट और स्पष्टीकरण के लिए कई प्रतिनिधित्व प्राप्त हुए। इन प्रतिनिधित्वों में से कुछ को पहले ही अधिसूचना दिनांक 27 अक्टूबर, 2020 और परिपत्र दिनांक 28 अक्टूबर, 2020 के माध्यम से संबोधित कर दिया गया है।

3. विवाद से विश्वास की धारा 10 और 11 बोर्ड/केंद्र सरकार को जनहित में निर्देशों या आदेशों को जारी करने या परेशानियों को दूर करने के अधिकार प्रदान करती है। इस परिपत्र को 34 और एफएक्यू (प्र. सं. 56-89) के उत्तर देने के लिए विवाद से विश्वास की धारा 10 और 11 के अंतर्गत परिपत्र दिनांक 22 अप्रैल, 2020 (जो प्रश्न सं. 1-55 को कवर करती है) को जारी रखते हुए जारी किए जा रहे हैं। यह ध्यान दिया जा सकता है कि एफएक्यू में आयकर अधिनियम, 1961 को अधिनियम के तौर पर, नामित प्राधिकारी (विवाद से विश्वास के अंतर्गत) को डीए के तौर पर, निर्धारण अधिकारी को एओ के तौर पर, आयुक्त (अपील) को आयकर आयुक्त (ए) और आयकर विभाग को विभाग के तौर पर संदर्भित किया गया है।

"कार्यक्षेत्र/पात्रता पर प्रश्न (प्र. सं. 56-75)"

प्र.सं. 56 अपील या मध्यस्थता 31 जनवरी, 2020 (या अपील करने का समय 31 जनवरी, 2020 तक समाप्त न हुआ हो) तक अपीलीय प्राधिकारी के पास लंबित है। हालांकि, उस तिथि के बाद और घोषणा करने से पहले, अपील अपीलीय प्राधिकारी द्वारा निपटाई गई हो। क्या वह विवाद से विश्वास के अंतर्गत अभी भी योग्य है? यदि हां, तो विवाद से विश्वास के अंतर्गत देययोग्य राशि की गणना कैसे की जाएगी?
उत्तर   हां, विवाद से विश्वास के अंतर्गत देययोग्य राशि को 31 जनवरी, 2020 के अनुसार अपील या मध्यस्थता की स्थिति के संदर्भ में आंका जाएगा।
प्र.सं. 57 क्या विवाद से विश्वास का लाभ उसे मामले में लिया जा सकता है जहां निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित निर्धारण आदेश का प्रवर्तन उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा रोका गया हो?
उत्तर   हां, ऐसे मामले में निर्धारिती विवाद से विश्वास के अंतर्गत घोषणा कर सकता है, चाहे अपील निर्धारण आदेश के विरूद्ध की गई हो या नहीं। उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में लंबित रिट/अपील को करदाता द्वारा निरस्त किया जाना आवश्यक है। मात्रात्मक अपील के निपटान पर ब्याज और जुर्माना, यदि हो की छूट दी जाएगी।
प्र.सं. 58 अधिनियम की धारा 263 के अंतर्गत आदेश के विरूद्ध अपील या याचिका 31 जनवरी, 2020 (या अपील करने के लिए समय 31 जनवरी, 2020 तक समाप्त न हुई हो) तक लंबित थी। क्या विवाद से विश्वास को ऐसी अपील के निपटान के लिए लाभ लिया जा सकता है?
उत्तर   अधिनियम की धारा 263 के अंतर्गत आदेश में सामान्य निर्देश शामिल है और आय मात्रात्मक नहीं है, ऐसे आदेश के विरूद्ध अपील विवाद से विश्वास के अंतर्गत पात्र नहीं है। हालांकि, अधिनियम की धारा 263 के अंतर्गत आदेश में केवल विशिष्ट निर्देश ही शामिल हो और आय मात्रात्मक (और किसी सामान्य निर्देश शामिल नहीं है जिसके कारण आय मात्रात्मक नही है) है, ऐसे आदेश के विरूद्ध अपील विवाद से विश्वास के अंतर्गत पात्र है। ऐसे मामले में, निर्धारिती को आदेश में सभी मुद्दों को निपटाना आवश्यक है जो कथित आदेश के संदर्भ में अधिनियम की धारा 263 के अंतर्गत आदेश साथ ही साथ अपील (या उसके संदर्भ में निगर्मन जहां अपील करने का समय 31 जनवरी, 2020 को समाप्त हो चुका हो) में लंबित मुद्दों का विषयगत मामला है।
प्र.सं. 59 क्या करदाता जिसके मामले में अपील करने के लिए समय-सीमा 31 जनवरी 2020 से पहले समाप्त हो चुकी हो लेकिन देरी की क्षमा हेतु आवेदन समाप्त हो चुका हो, योग्य है?
उत्तर   यदि 1 अप्रैल, 2019 से 31 जनवरी, 2020 (अवधि में शामिल दोनों तिथियां) के दौरान अपील करने का समय समाप्त हो चुका हो और क्षमा के लिए आवेदन इस परिपत्र के निगर्मन की तिथि से पूर्व दाखिल किया गया हो और अपील घोषणा करने की तिथि से पहले अपीलीय प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत हो चुकी हो तो ऐसे अपील को 31 जनवरी, 2020 तक लंबित समझा जाएगा।
प्र.सं. 60 क्या 31 जनवरी, 2020 तक दाखिल और लंबित प्रत्याक्षेप भी योजना द्वारा कवर है?
उत्तर   हां, हालांकि, मुख्य अपील को प्रत्याक्षेप के साथ निपटाया जाना आवश्यक है।
प्र.सं. 61 क्या 31 जनवरी 2020 तक लंबित विविध आवेदन (एमए) को भी योजना द्वारा शामिल किया जाएगा ?
उत्तर   यदि 31 जनवरी, 2020 तक लंबित एम उस एक अपील के संदर्भ में है जिसे प्रारंभ (31 जनवरी, 2020 से पूर्व) में ही निरस्त किया गया था तो ऐसे एमए योग्य है। विवादित कर को उस अपील के संदर्भ में आंका जाएगा जिसे निरस्त किया गया था।
प्र.सं. 62 क्या तलाशी संबंधी मामले जहां निर्धारण अधिनियम की धारा 158खक (यानी खंड निर्धारण)के अंतर्गत किया गया था, विवाद से विश्वास के अंतर्गत शामिल है?
उत्तर   खंड निर्धारण के संदर्भ में अपील, रिट या विशेष अवकाश याचिका योग्य है यदि विवादित कर कथित खंड निर्धारण के लिए पांच करोड़ रूपए से अधिक नहीं है।
प्र.सं. 63 क्या विवाद से विश्वास का लाभ उन मामलों में लिया जा सकता है जहां कार्यवाही आयकर निपटान आयोग (आईटीएससी) के समक्ष लंबित हो या जहां रिट आईटीएससी के समक्ष दाखिल किया गई हो ?
उत्तर   नहीं
प्र.सं. 64 निर्धारण आदेश के विरूद्ध अपील 31 जनवरी, 2020 को लंबित है (या ऐसे आदेश के समक्ष अपील करने का समय समाप्त न हुआ हो)। निर्धारिती ने आपसी समझौता प्रक्रिया (एमएपी) के अंतर्गत निर्धारण आदेश के समाधान के लिए आवेदन किया हो। क्या विवाद से विश्वास का लाभ लिया जा सकता है?
उत्तर   यदि जहां एमएपी समाधान लंबित हो या निर्धारिती ने एमएपी निर्णय को स्वीकार न किया हो तो संबंधित अपील विवाद से विश्वास के अंतर्गत पात्र है। ऐसे मामले में, घोषणाकर्ता को दोनों एमएपी आवेदन और अपील को निरस्त करना आवश्यक होगा।
प्र.सं. 65 यदि एएआर ने करदाता के पक्ष में निर्णय दिया हो और विभाग उच्च न्यायालय/उच्चतम न्यायालय के समक्ष रिट या अपील कर चुका हो और करदाता की कुल आय एएआर के समक्ष मामले के तथ्यों पर मात्रात्मक था तो करदाता विवाद से विश्वास के अंतर्गत योग्य है?
उत्तर   हां, करदाता योग्य है चूंकि आय मात्रात्मक है। ऐसे मामलों में, चूंकि मुद्दा करदाता के पक्ष में शामिल है, केवल 50 प्रतिशत विवादित कर देययोग्य है।
प्र.सं. 66 अपील आयकर आयुक्त(ए)/विवाद समाधान पैनल (डीआरपी) को नियत की गई और 31 जनवरी, 2020 तक लंबित थी? क्या यह पात्र है?
उत्तर   हां। ऐसे मामले को विवाद से विश्वास के अंतर्गत निपटाया जा सकता है और नियत मामलों को 31 जनवरी, 2020 तक आयकर आयुक्त(ए)/डीआरपी तक लंबित समझा जाएगा। हालांकि, सभी मुद्दे जो या तो अपील (चाहे समायोजित हो या नही) में लंबित थे या जिसके संदर्भ में अपील करने का समय 31 जनवरी, 2020 को समाप्त न हुआ हो, का निपटान किया जाना है।
प्र.सं. 67 क्या उन मामलों में जहां अपीलीय प्राधिकारी ने अभियोजन शिकायत को खारिज कर दिया हो या करदाता के पक्ष में निर्णय दिया हो और कोई अग्रिम अपील घोषणा को दाखिल करने या उससे पहले विभाग द्वारा दाखिल न की गई हो क्या वह योग्य है?
उत्तर   हां, ऐसे मामले योग्य है यदि विभाग द्वारा अपील दाखिल करने की समय सीमा समाप्त हो चुकी हो और विभाग ने अपील दाखिल न की हो (अपील को मांफ करने के साथ या उसके बिना)
प्र.सं. 68 क्या निर्धारिती विवाद से विश्वास को चुनने के योग्य है यदि अभियोजन स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) चूक के कारण किया जाता है?
उत्तर   यदि अभियोजन घोषणा करने की तिथि को या उससे पहले एक वित्त वर्ष में गलत टीडीएस के लिए किया जाता है तो इसे विवाद से विश्वास के अंतर्गत निपटाया नहीं जा सकता।
प्र.सं. 69 एक न्यास ने अधिनियम की धारा 12कक के अंतर्गत पंजीकरण अस्वीकृत किया हो। क्या ऐसे आदेश के समक्ष अपील विवाद से विश्वास के लिए योग्य है?
उत्तर   नहीं
प्र.सं. 70 यदि निर्धारण आदेश कुछ अन्य करदाताओं के मामले में की गई तलाशी पर आधारित अधिनियम की धारा 143(3)/144 के अंतर्गत एक करदाता के मामले में दिया जाता है तो क्या विवाद से विश्वास के अंतर्गत तलाशी मामले या गैर-तलाशी मामले के तौर पर समझा जाना है?
उत्तर   ऐसे मामले को तलाशी मामले के तौर पर समझा जाना है
प्र.सं. 71 विवाद से विश्वास प्रपत्रों में अधिनियम की धारा 143(1) के अंतर्गत सूचना के समक्ष दाखिल अपील के निपटान का विशिष्ट विकल्प शामिल नहीं है। तद्नुसार, कृपया स्पष्ट करें कि ऐसी अपील का निपटान कैसे करें जो 31 जनवरी, 2020 (या अपील करने का समय 31 जनवरी, 2020 तक समाप्त नहीं हुआ है) तक लंबित है
उत्तर   अधिनियम की धारा 143(1) के अंतर्गत सूचना के समक्ष दाखिल अपील विवाद से विश्वास के अंतर्गत योग्य है यदि समायोजन अधिनियम की धारा 143(1) के वाक्यांश (क) के उप-वाक्यांश (iii) से (vi)से के अंतर्गत किया गया हो
प्र.सं. 72 क्या अधिनियम की धारा 248 के अंतर्गत दाखिल अपील विवाद से विश्वास के लिए योग्य है?
उत्तर   हां
प्र.सं. 73 एक करदाता के मामले में जो अपील में नही है, अभियोजन एक मुद्दे के संदर्भ में निर्धारण वर्ष 2012-13 के लिए किया गया। क्या वह उन मुद्दों के लिए घोषणा करने के लिए योग्य होंगे जो इस निर्धारण वर्ष के लिए अपील में है और उसके संदर्भ में अपील में है जिसे प्रारंभ न किया गया हो?
उत्तर   एक निर्धारण वर्ष जिसके संदर्भ में घोषणा की तिथि को या उससे पहले प्रारंभ किया गया हो, से संबंधित घोषणा करने की अयोग्यता। चूंकि इस उदाहरण में, उस निर्धारण वर्ष (2012-13) के लिए अभियोजन पहले ही संस्थापित किया गया हो, करदाता अभियोजन से गैर-संबंधित मुद्दों पर ही इस निर्धारण वर्ष के लिए घोषणा करने के योग्य नहीं है।
प्र.सं. 74 यदि अभियोजन एक विभिन्न निर्धारण वर्ष के लिए है और एक अपील किसी अन्य के लिए, क्या यह इस योजना के लाभ से निर्धारिती को रोकेगा?
उत्तर   एक निर्धारण वर्ष में अभियोजन किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए घोषणा करने से निर्धारिती को नही रोकता यदि यह अन्यथा योग्य हो।
प्र.सं. 75 क्या वह मामले जहां करदाता/विभाग ने धारा 158क/158कक के अंतर्गत घोषणा/आवेदन को दाखिल किया है वह विवाद से विश्वास के अंतर्गत योग्य है?
उत्तर   हां, ऐसे मामले में 31 जनवरी 2020 को या उससे पहले अधिनियम की धारा 158क/158कक के अंतर्गत दाखिल घोषणा/आवेदन को विवाद से विश्वास के लिए 31 जनवरी 2020 तक लंबित अपील समझा जाएगा

"गणना से संबंधित प्रश्न (प्र.सं. 76-79)"

प्र.सं. 76 क्या 31 जनवरी 2020 के बाद आयकर आयुक्त (ए) द्वारा जारी वृद्धि नोटिस विवादित कर की गणना के लिए विचारनीय है?
उत्तर   31 जनवरी, 2020 के बाद लेकिन इस परिपत्र के जारी होने की तिथि से पूर्व आयकर आयुक्त(ए) द्वारा बढ़ोत्तरी नोटिस को विवाद से विश्वास के अंतर्गत देययोग्य राशि निर्धारित करने के लिए विचारनीय होगा। हालांकि, इस परिपत्र की तिथि को या उसके बाद लेकिन 31 दिसंबर को या उससे पहले जारी बढ़ोत्तरी नोटिस पर विवाद से विश्वास के अंतर्गत देययोग्य राशि निर्धारित करने के लिए विचारनीय नहीं होगी।
प्र.सं. 77 क्या एक अपील के संबंध में दाखिल कोई अतिरिक्त आधार पर विवादित कर की गणना के दौरान विचार किया जा सकता है?
उत्तर   यदि कोई अतिरिक्त आधार 31 जनवरी 2020 को या उससे पहले दाखिल किया गया हो तो इसे विवादित कर की गणना के लिए विचारा जाएगा।
प्र.सं. 78 यदि अपील दोनों निर्धारण और पुर्ननिर्धारण के समक्ष लंबित होती है जहां संवृद्धि उसी मुद्दे पर पुनरावृत्त होती है तो क्या कर उसी मुद्दे के संदर्भ में देययोग्य होगा यदि दोनों अपीलों का निपटान किया जाता है?
उत्तर   चूंकि पुनरावृत्त बढ़ोत्तरी के संदर्भ में विवादित कर को केवल एक ही बार दिया जाएगा, दोनों निर्धारण और पुर्ननिर्धारण अपीलों को एक साथ निपटाया जाना आवश्यक है। यदि निर्धारण और पुर्ननिर्धारण के संदर्भ में कर देयता के बीच कोई अंतर है तो दोनों कर देयताओं से अधिक पर विवादित कर की गणना के लिए विचार किया जाएगा।
प्र.सं. 79 एक मामले में जहां निर्धारिती एक आदेश (गैरविवादित कर देयता के कारण) और कुछ बढ़ोत्तरियों के समक्ष अपील (गैरविवादित कर देयता के कारण) में कुछ बढ़ोत्तरी करता है तो पहले से दिए गए कर को कर देयता या गैरविवादित कर देयता के समक्ष कैसे समायोजित किया जाएगा?
उत्तर   यदि पूर्व में दिए गए कर, टीडीएस/टीसीएस के तौर पर, आय के स्रोत के साथ स्पष्ट रूप से पहचाने जाने योग्य है तो इसे ऐसी आय के संदर्भ में कर देयता के समक्ष समायोजित किया जाएगा। शेष पूर्व में दिए गए कर जिसे आय के स्रोत के साथ स्पष्ट रूप से स्पष्ट नहीं किया जा सकता, उसे शेष कर देयता के समक्ष विभाजित किया जाएगा।

"परिणाम से संबंधित प्रश्न (प्र. सं. 80-87)"

प्र.सं. 80 क्या जुर्माने के समक्ष अपील जो मात्रात्मक निर्धारण से संबंधित नहीं है जैसे अधिनियमों की धारा 271ख, 271खक, 271घक के अंतर्गत जुर्माने, 'विवादित कर' से संबंधित अपील के निपटान पर मांफ किया जाता है?
उत्तर   नहीं, ऐसे जुर्माना आदेश के सक्षम अपील को अलग से निपटाया जाना आवश्यक है।
प्र.सं. 81 कुछ ऋण के संदर्भ में, बढ़ोत्तरी अधिनियम की धारा 68 के अंतर्गत की गई थी। अपील आयकर आयुक्त(ए) के समक्ष लंबित है और निर्धारित विवाद से विश्वास के लिए योग्य है। विवाद से विश्वास के भुगतान करने के बाद क्या निर्धारिती अपने पूंजीगत खातों में कथित ऋण को जमा करके अपने बही खातों में एंट्री कर सकता है?
उत्तर   नहीं, विवाद से विश्वास एक सर्वक्षमा योजना नहीं है। यह उन विवादस्पद मुद्दों पर अपीलों का निपटान करने का विकल्प देती है जो न तो विभाग द्वारा स्वीकृत है न ही निर्धारिती द्वारा।
प्र.सं. 82 क्या अभियोजन से प्रतिरक्षा घोषणाकर्ता के लिए ही है या विवाद से विश्वास के अंतर्गत मुद्दों कंपनी या फर्म के सहभागी के निदेशक के लिए भी है?
उत्तर   यदि एक मुद्दा विवाद से विश्वास के अंतर्गत निपटाया गया हो तो उस मुद्दे के संदर्भ में अभियोजन से प्रतिरक्षा अधिनियम की धारा 278ख के अंतर्गत उसी मुद्दे के संदर्भ में कंपनी/फर्म (घोषणाकर्ता के तौर पर) के निदेशक/सहभागी को भी दी जाएगी।
प्र.सं. 83 यदि अपील में अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iक) के अंतर्गत अस्वीकृत के मुद्दे शामिल हों तो क्या परिणामी राहत उसी भुगतान/कटौती के रूप में की गई अधिनियम की धारा 201 के अंतर्गत कार्यवाही में उपलब्ध होगी
उत्तर   नहीं

प्र.सं.

84

कर एक आय पर नहीं काटा गया और अधिनियम की धारा 201 के अंतर्गत आदेश डिडक्टी के मामले में पारित किया गया था। कथित आय डिडक्टी के मामले में भी मूल्यांकित की गई थी। दोनों डिडक्टी और डिडक्टी अपील या मध्यस्थता में हैं, जो विवाद से विश्वास के अंतर्गत योग्य है। निम्नलिखित परिस्थितियों में विवाद से विश्वास के अंतर्गत कथित आय के संदर्भ में डिडक्टी और डिडक्टी द्वारा देययोग्य राशि क्या होगी -

  (i) जहां डिडक्टी अपनी अपील या मध्यस्थता का निपटान करता है और विवाद से विश्वास के अंतर्गत भुगतान करता है?

  (ii) जहां डिडक्टी अपनी अपील या मध्यस्थता का निपटान करता है और विवाद से विश्वास के अंतर्गत भुगतान करता है?

उत्तर

 

  (i) के मामले में चूंकि डिडक्टी ने अपनी अपील (या मध्यस्थता) का निपटान कर लिया है और कर का भुगतान कर दिया है उसे विवाद से विश्वास के अंतर्गत ब्याज और जुर्माने से छूट मिलेगी। डिडक्टी ने कथित आय के संदर्भ में विवाद से विश्वास के अंतर्गत कर का भुगतान करना आवश्यक नहीं होगा और वह डिडक्टी द्वारा दिए गए कर के लिए क्रेडिट प्राप्त करेगा। हालांकि, उसे कथित आय के संदर्भ में ब्याज और जुर्माना, यदि हो, देना आवश्यक होगा और यदि ऐसा ब्याज या जुर्माना विवाद से विश्वास के योग्य हो तो वह लागू होने वाली राशि देकर इसका निपटान कर सकता है (25 प्रतिशत/30 प्रतिशत)

  (ii) के मामले में चूंकि डिडक्टी ने अपनी अपील (या मध्यस्थता) का निपटान कर लिया है और कर का भुगतान कर दिया है उसे ब्याज और जुर्माने से छूट मिलेगी। डिडक्टी को कथित आय पर कर की कटौती न करने के संदर्भ में विवाद से विश्वास के अंतर्गत कर का भुगतान करना आवश्यक नहीं होगा। हालांकि, उसे कथित आय के संदर्भ में ब्याज और जुर्माना, यदि हो, देना आवश्यक होगा या यदि ऐसा ब्याज या जुर्माना विवाद से विश्वास के योग्य हो तो वह लागू होने वाली राशि देकर इसका निपटान कर सकता है (25 प्रतिशत/30 प्रतिशत)

प्र.सं. 85 प्रश्न सं. 84 में निर्दिष्ट परिदृश्यों में, कर क्रेडिट की राशि क्या होगी यदि धारा 201 अपील के निपटान पर राशि का भुगतान एक खोज करने या इस कारण से विवादित कर के 100 प्रतिशत से अधिक होती है कि भुगतान 31 मार्च 2017 के बाद की जाती है?
उत्तर   डिडक्टी के हाथों कर क्रेटिड विवादित कर के 100 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती भले ही विवादित कर के 100 प्रतिशत से अधिक का भुगतान उसकी धारा 201 की अपील को निपटाने वाले डिडक्टी द्वारा किया जाना आवश्यक हो।
प्र.सं. 86 प्रश्न सं. 31 का उत्तर स्पष्ट करता है कि जहां निर्धारिती विवाद से विश्वास (यानी अधिनियम की धारा 201 के अंतर्गत) के अंतर्गत टीडीएस के डिडक्टी के तौर पर टीडीएस देयता का निपटान करता है, क्या वह उस वर्ष में अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iक) के परंतुक के अंतर्गत व्यय भत्ते के परिणामी राहत प्राप्त करेगा जिसमें कर को काटा जाना आवश्यक था। उस स्थिति में क्या होगा जहां टीडीएस की वही राशि बाद के वर्षों में वसूली गई थी और तद्नुसार निर्धारिती ने उस वर्ष में कटौती का दावा पहले ही किया हो?
उत्तर   दोहरी कटौती का कोई सवाल ही नहीं है। यदि निर्धारिती ने ऐसी राशि के भुगतान के कारण बाद के वर्ष में अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iक) के अंतर्गत उसी राशि की कटौती का दावा किया है वह विवाद से विश्वास के अंतर्गत निपटान करने के आधार पर कटौती का दुबारा दावा करने का हकदार नहीं होगा।
प्र.सं. 87 घोषणाकर्ता ने विवादित जुर्माने के लिए घोषणा की है। उसे विवाद का निपटारा करने के लिए 25 प्रतिशत या 30 प्रतिशत का भुगतान करना आवश्यक है। क्या ब्याज इस मामले में लगाया या लगाने योग्य होता है?
उत्तर   हां, घोषणाकर्ता द्वारा एक बार विवाद जुर्माने की आपेक्षित राशि का भुगतान किए जाने पर ऐसे जुर्माने से संबंधित जुर्माने की छूट दी जाएगी।

प्रक्रिया से संबंधित प्रश्न (प्र. सं. 88-89)

प्र.सं. 88 अलग आदेश एक विशेष निर्धारण वर्ष के लिए अधिनियम की धारा 201(1) व 201(1क) के अंतर्गत पारित किया गया था। निर्धारिती ने अधिनियम की धारा 201(1) के अंतर्गत प्रमुख हिस्से के लिए दो अलग अपील दाखिल किए हैं। क्या वह धारा 201(1) आदेश के समक्ष विवाद से विश्वास के अंतर्गत एक ही घोषणा कर सकता है और अधिनियम की धारा 201(1क) के अंतर्गत लगाए गए ब्याज की 100 प्रतिशत छूट की मांग कर सकता है
उत्तर   हां, अधिनियम की धारा 201(1) के अंतर्गत आदेश के विरूद्ध अपील को विवाद से विवाद के अंतर्गत निपटाया जाता है तो अधिनियम की धारा 201(1क) के अंतर्गत लगाए गए ब्याज की 100 प्रतिशत छूट मिलेगी।
प्र.सं. 89 एक बार घोषणा के विवाद से विश्वास की धारा 4 के अंतर्गत निर्धारित द्वारा दाखिल करने पर क्या इसे वापस लिया जा सकता है? यदि हां तो कार्यवाही के किस स्तर पर इसकी अनुमति होगी ?
उत्तर   हां, घोषणा विवाद से विश्वास के अंतर्गत धारा 5(1) के अंतर्गत एक प्रमाणपत्र को जारी करने वाले डीए के समक्ष किसी भी समय वापस ली जा सकती है।

(अंकित जैन)

अवर सचिव, भारत सरकार

 

निम्न को प्रति

  1. एफएम को पीएस/एफएम को ओएसडी/एमओएस (एफ) को पीएस/एमओएस (एफ) को ओएसडी

  2. सचिव (राजस्व) को पीपीएस

  3. अध्यक्ष, सीबीडीटी व सभी सदस्य, सीबीडीटी

  4. समस्त प्रधान आयकर महानिदेशक/प्रधान आयकर आयुक्त

  5. सीबीटीडी के सभी संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त/निदेशक/उप सचिव/अवर सचिव

  6. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

  7. जेएस व कानूनी सलाहकार, कानून व न्याय मंत्रालय, नई दिल्ली

  8. आयकर आयुक्त (एमएंडटीपी), सीबीडीटी के आधिकारिक प्रवक्ता

  9. आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) कार्यालय

10. संयुक्त आयकर आयुक्त (डाटाबेस प्रकोष्ठ) विभागीय वेबसाइट irsofficersonline.gov.in पर अपलोडिंग के लिए