परिपत्र सं. 01/2017 : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान वेतन से आयकर कटौती
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 01/2017
परिपत्र की तिथि
02/01/2017
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
02/01/2017
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
(राजस्व विभाग)
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
स्रोत पर कर कटौती -
वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वेतनों से आयकर की कटौती
परिपत्र सं. 1/2017
नर्इ दिल्ली, 2 जनवरी, 2017
निर्देशिका
| पैरा नं. | पृष्ठ सं. | |
| 1. | सामान्य | 1 |
| 2. | वित्त अधिनियम, 2013 के अनुसार आयकर की दरें | 1 |
| 2.1 कर की दरें | 1 | |
| 2.2 आयकर पर अधिभार | 2 | |
| 2.3.1 आयकर पर शिक्षा उपकर | 2 | |
| 2.3.2 आयकर पर माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपकर | 2 | |
| 3. | "वेतन" से स्रोत पर कर कटौती की विस्तृत योजना | 2 |
| 3.1 कर गणना की विधि | 2 | |
| 3.2 नियोक्ता द्वारा गैर-मौद्रिक परिलब्धियों पर कर का भुगतान | 2 | |
| 3.2.1 औसत आयकर की गणना | 2 | |
| 3.3 एक से अधिक नियोक्ता से वेतन | 3 | |
| 3.4 राहत जब वेतन बकाए अथवा उधार के रूप में दी जाए | 3 | |
| 3.5 अन्य किसी शीर्षक के अंतर्गत आय से संबंधित सूचना | 3 | |
| 3.6 शीर्षक "गृह संपत्ति से आय" के अंतर्गत आय की गणना | 3 | |
| 3.7 अधिक अथवा कम कटौती का समायोजन | 4 | |
| 3.8 विदेशी मुदा्र में दिया गया वेतन | 4 | |
| 4. | कर कटौती तथा अपने कर्त्तायों के लिए उत्तरदायी व्यक्ति | 4 |
| 4.1 अधिनियम की धारा 204 की शर्त | 4 | |
| 4.2 धारा 192 के अंतर्गत वेतन से काटा जाने वाला कर | 4 | |
| 4.3 कम दर पर कर की कटौती | 5 | |
| 4.4 काटे गए कर को जमा करना | 5 | |
| 4.4.1 टीडीएस के भुगतान के लिए नियत तिथियां | 5 | |
| 4.4.2 टीडीएस के भुगतान की विधि | 5 | |
| 4.5 कर कटौती को जमा करने में विफलता के लिए ब्याज, शुल्क, जुर्माना व अभियोजन | 6 | |
| 4.6 कर कटौती प्रमाणत्र की प्रस्तुति (धारा 203) | 6 | |
| 4.7 पैन और टैन का अनिवार्य उद्धृतीकरण | 8 | |
| 4.8 कर्मचारी द्वारा पैन की प्रस्तुति के लिए अनिवार्य आवश्यकता (धारा 206कक) | 8 | |
| 4.9 धारा 200(3) के अंतर्गत कर की कटौती का विवरण (टीडीएस का त्रैमासिक विवरण) | 9 | |
| 4.10 पेंशन से आय पर टीडीएस | 10 | |
| 4.11 गैर-निवासी की स्थिति में किए गए टीडीएस से संबंधित मामले | 10 | |
| 5. | शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत आय की गणना | 10 |
| 5.1 शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत आय प्रभार्य | 10 | |
| 5.2 वेतन के स्थान पर "वेतन", "परिलब्धियों" तथा "लाभ" की परिभाषा (धारा 17) | 10 | |
| 5.3 शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत शामिल न होने वाली आय (छूट) | 16 | |
| 5.4 वेतन द्वारा आय से अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत कटौती | 19 | |
| 5.5 अधिनियम के अध्याय VI-क के अंतर्गत कटौती | 19 | |
| 6. | रू. 5 लाख तक कुल आय वाले व्यक्ति के लिए रू. 5,000 की छूट (धारा 87क) | 27 |
| 7. | अनुमोदित सेवानिवृत्ति कोष से अंशदान तथा प्राधिकृत भविष्य निधि के अंतर्गत संचयित शेष के भुगतान पर टीडीएस | 27 |
| 8. | डडीओएस द्वारा खुद को संतुष्ट करने के लिए दावे की वास्तविकता | 28 |
| 9. | काटे जाने वाले आयकर की गणना | 28 |
| 10. | विविध | 28 |
| परिशिष्ट | ||
| परिशिष्ट सं. | विवरण | पृष्ठ सं. |
| I | कुछ उदाहरण | 31-41 |
| II | प्रपत्र सं. 12खक | 42-43 |
| IIक | प्रपत्र सं. 12खख | 44-45 |
| III | कटौतीदाता/कटौतीकर्ता द्वारा त्रैमासिक र्इ-टीडीएस/टीसीएस विवरण की प्रस्तुति के लिए संशेाधित प्रक्रिया | 46 |
| IV | प्रपत्र 24छ की प्रस्तुति की प्रक्रिया | 47-52 |
| V | राज्य सरकार के विभाग/केंद्र सरकार के विभागों की स्थिति में प्रपत्र 24छ को दाखिल करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति | 53 |
| VI | धारा 200(3) के अंतर्गत कर की कटौती के त्रैमासिक विवरण की तैयारी की प्रक्रिया | 54-55 |
| VII | आर्थिक मामला विभाग अधिसूचना दिनांक 22.12.2003 | 56 |
| VIII | बोर्ड की अधिसूचना दिनांक 24.11.2000 | 57 |
| IX | बोर्ड की अधिसूचना दिनांक 29.01.2001 | 58 |
| X | प्रपत्र सं. 10 खक | 59 |
परिपत्र सं. 01/2017
एफ.नं. 275/192/2016-आर्इटी (ख)
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
*****
नार्थ ब्लाक, नर्इ दिल्ली
दिनांक 2 जनवरी, 2017
विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान वेतन से आयकर कटौती
ज्ञापन सं. 02/2015 दिनांक 10.12.2015 हेतु आमंत्रित संदर्भ जिसके द्वारा वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान आयकर अधिनियम, 1961 (तत्पश्चात् "अधिनियम") की धारा 192 के अंतर्गत शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत वेतन के भुगतान द्वारा आयकर कटौती की दरों को सूचित किया गया था। वर्तमान ज्ञापन में वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत देययोग्य वेतन के भुगतान द्वारा आयकर कटौती की दरें शामिल हैं तथा आयकर नियम, 1962 (बाद में नियम) तथा अधिनियम के कुछ संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। संबधित अधिनियम, नियम, प्रपत्र तथा अधिसूचनायें आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध हैं।
2. वित्त अधिनियम, 2016 के अनुसार आयकर की दरें
वित्त अधिनियम, 2016 के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 (अर्थात् निर्धारण वर्ष 2017-18) के लिए शीर्षक "वेतन" का अंतर्गत देययोग्य आयकर अधिनियम की धारा 192 के अंतर्गत कटौती की जानी है। दरें निम्नलिखित हैं :-
2.1 कर की दरें
क. कर की साधारण दरें :
| क्र.सं. | कुल आय | कर की दर |
| 1 | जहां कुल आय रू. 2,50,000/- से अधिक न हो | शून्य |
| 2 | जहां कुल आय रू. 2,50,000/- से अधिक हो लेकिन रू़ 5,00,000/- से अधिक न हो | राशि का 10 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 2,50,000/- से अधिक हो |
| 3 | जहां कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो लेकिन रू़ 10,00,000/- से अधिक न हो | रू. 25,000/- जमा राशि का 20 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो |
| 4 | जहां कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक हो | रू. 1,25,000/- जमा राशि का 30 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय 10,00,000/- से अधिक हो |
ख. भारत के प्रत्येक नागरिक, व्यक्ति के लिए कर की दरें जिनकी आयु वित्त वर्ष के दौरान किसी भी समय साठ वर्ष या उससे अधिक हो लेकिन अस्सी वर्ष से कम हो
| क्र.सं. | कुल आय | कर की दर |
| 1 | जहां कुल आय रू. 3,00,000/- से अधिक न हो | शून्य |
| 2 | जहां कुल आय रू. 3,00,000/- से अधिक हो लेकिन रू़ 5,00,000/- से अधिक न हो | राशि का 10 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 3,00,000/- से अधिक हो |
| 3 | जहां कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो लेकिन रू़ 10,00,000/- से अधिक न हो | रू. 20,000/- जमा राशि का 20 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो |
| 4 | जहां कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक हो | रू. 1,20,000/- जमा राशि का 30 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक हो |
ग. भारत के प्रत्येक नागरिक, व्यक्ति के लिए कर की दरें जिनकी आयु वित्त वर्ष के दौरान किसी भी समय अस्सी वर्ष या उससे अधिक हो
| क्र.सं. | कुल आय | कर की दर |
| 1 | जहां कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक न हो | शून्य |
| 2 | जहां कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो लेकिन रू़ 10,00,000/- से अधिक न हो | राशि का 20 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो |
| 3 | जहां कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक हो | रू. 1,00,000/- जमा राशि का 30 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय 10,00,000/- से अधिक हो |
2.2 आयकर पर अधिभार
आयकर अधिनियम की धारा 111क अथवा धारा 112 के प्रावधानों अथवा इस पैराग्राफ के पूर्ववर्ती प्रावधानों के अनुसार आंके गए आयकर की राशि, आयकर अधिनियम की धारा 2 के वाक्यांश (31) के उप-वाक्यांश (vii) हेतु संदर्भित प्रत्येक व्यक्ति अथवा हिंदु अविभाजित परिवार अथवा व्यक्तियों के संघ अथवा व्यक्तियों की निकाय, चाहे निगमित हो अथवा नहीं, अथवा प्रत्येक कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति की स्थिति में, एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाले, को ऐसे आयकर के पंद्रह प्रतिशत की दर पर आंके गए संयोजन के प्रयोजन के लिए अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा।
बशर्ते कि एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाले उक्त निर्दिष्ट व्यक्तियों की स्थिति में ऐसी आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल आय राशि जो एक करोड़ रूपए से अधिक है, की राशि की तुलना में एक करोड़ रूपए की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं।
2.3.1 आयकर पर शिक्षा उपकर
अधिभार सहित आयकर की राशि यदि हो तो, आयकर के दो प्रतिशत की दर से आयकर पर शिक्षा उपकर को बढ़ाया जाएगा।
2.3.2 आयकर पर माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर
अधिभार, यदि हो तो, सहित आयकर के एक प्रतिशत की दर से अतिरिक्त शिक्षा उपकर वसूला जाएगा लेकिन इसमें 2.3.1 के अनुसार आयकर पर शिक्षा उपकर शामिल नहीं होगा।
3. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 : "वेतन" से स्रोत पर कर कटौती की विस्तृत योजना
3.1 कर गणना की विधि
प्रत्येक व्यक्ति जो शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत किसी भी प्रकार का वेतन का भुगतान करता है उसकी वित्त वर्ष 2016-17 के लिए शीर्र्षक "वेतन" के अंतर्गत निर्धारिती के अनुमानित वेतन पर आयकर काटा जाएगा। आयकर की ऊपर दी गर्इ दरों के आधार पर गणना करना आपेक्षित है, अधिनियम की धारा 206 कक के अनुसार पैन प्रस्तुति हेतु अनिवार्यता से संबंधित प्रावधानों अनुसार तथा प्रत्येक भुगतान के समय कटौती की जाएगी। हालांकि, किसी भी स्थिति में कोर्इ कर मूल से वसूला न जाए जबतक वित्त वर्ष के लिए आवश्यक राशि सहित अनुमानित वेतन रू 2,50,000/- अथवा रू. 3,00,000/- अथवा रू. 5,00,000/- कर्मचारी (कर गणना के कुछ उदाहरण परिशिष्ट-I में दिए गए हैं) की आयु के अनुसार जो भी स्थिति हो, से अधिक न हो।
3.2 नियोक्ता द्वारा अनुलाभों पर कर का भुगतान
नियोक्ता को यह विकल्प दिया गया है कि वह कर्मचारी को दिए जाने वाले आवश्यक गैर-मौद्रिक अनुलाभों पर कर का भुगतान करें। नियोक्ता, उसके विकल्प के अनुसार, कर्मचारी के वेतन से किसी टीडीएस को काटे बिना स्वंय ऐसे अनुलाभों का भुगतान कर सकता है। हालांकि, नियोक्ता को उस समय कर का भुगतान करना होगा जब वह ऐसे करों का अन्य तरीकों से भुगतान कर चुका हो अर्थात् कर्मचारी हेतु शीर्षक "वेतन" के तहत देययोग्य वेतन के भुगतान के समय।
3.2.1 औसत आयकर की गणना
ऊपर दिए गए पैरा 3.2 में निर्दिष्ट कर के भुगतान के उद्देश्य के लिए, कर अनुलाभों, जिसके लिए नियोक्ता द्वारा स्वयं कर का भुगतान किया जाएगा, राशि सहित शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत देययोग्य आय पर वित्त वर्ष के लिए लागू दरों के आधार पर आंके गए आयकर के औसत पर निर्धारित की जाएगी।
3.2.2 उदाहरण
सभी अनुलाभों वाले वर्ष सहित आयु के लिए साठ वर्ष से नीचे के कर्मचारी शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत देययोग्य वेतन रू. 4,50,000/- है जिसमें से रू. 50,000/- गैर-मौद्रिक अनुलाभों के कारण होगी तथा नियोक्ता ऊपर दिए गए पैरा 3.2 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार ऐसे अनुलाभ कर के भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं।
चरण :
| सभी अनुलाभ सहित शीर्षक "वेतन" के तहत देययोग्य आय | रू. 4,50,000/- |
| कुल वेतन पर कर (उपकर सहित) | रू. 20,600/- |
| कर की औसत दर (20,600/4,50,000) X 100) | 4.57 प्रतिशत |
| रू. 50,000/- पर देययोग्य कर (50,000 का 4.57 प्रतिशत) | रू. 2285/- |
| प्रति माह जमा किए जाने वाली अपेक्षित राशि | रू. 190 (रू. 190.40) = 2285/12) |
नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाला कर कर्मचारी के वेतन से टीडीएस के तौर पर समझा जाएगा।
3.3 एक से अधिक नियोक्ता का वेतन
धारा 192 (2) उस स्थिति के साथ व्यवहार करती है जहां कोर्इ व्यक्ति एक से अधिक नियोक्ता के अधीन कार्य करता है या एक से दूसरे नियोक्ता की ओर परिवर्तित होता है। यह कर्मचारी, जो एक से अधिक नियोक्ता की वेतन पर्ची पाते हैं या थे, के कुल वेतन से ऐसे नियोक्ता (करदाता के चुनाव के अनुसार) द्वारा कर कटौती उपलब्ध कराता है। कर्मचारियों को अब पूर्व/अन्य नियोक्ता द्वारा लंबित अथवा प्राप्त मुख्य "वेतन" के अंतर्गत आय की वर्तमान/चुने हुए नियोक्ता को जानकारी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा तथा लिखित में तथा उनके द्वारा तथा पूर्व/अन्य नियोक्ता द्वारा विधिवत सत्यापित वहां के स्रोत से काटे गए कर की जानकारी भी देनी होगी। वर्तमान/चुने हुए नियोक्ता को सभी स्रोतों से प्राप्त वेतन (पूर्व अथवा अन्य नियोक्ता से प्राप्त वेतन सहित) की कुल राशि से काटे गए कर की जानकारी देना आपेक्षित है।
3.4 बकाया अथवा अग्रिम वेतन भुगतान में राहत
3.4.1 धारा 192 (2क) के अंतर्गत जहां निर्धारिती सरकारी कर्मचारी अथवा कंपनी, सहकारी समिति, स्थानीय प्राधिकरण, विश्वविद्यालय, संस्थान, संस्था अथवा निकाय के कर्मचारी होने के नाते धारा 89 (1) के अंतर्गत राहत पाने के अधिकारी होंगे। वह पैरा (3.1) में संदर्भित भुगतान करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को प्रस्तुत किया जा सकता है, प्रपत्र 10ड़ में ऐसा विवरण उनके द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए तथा इसके बाद उत्तरदायी व्यक्ति, जैसा कि निर्दिष्ट है, ऐसे विवरण के आधार पर राहत की गणना करेगा तथा उक्त पैरा (3.1) के अंतर्गत कटौती करने के लिए खाते में रखेगा।
यहां "विश्वविद्यालय" का अर्थ एक केंद्र, राज्य अथवा प्रांतीय अधिनियम के अंतर्गत अथवा द्वारा संस्थापित अथवा निगमित विश्वविद्यालय से है तथा इसमें उस अधिनियम के प्रयोजन के लिए विश्वविद्यालय होने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 की धारा 3 के अंतर्गत घोषित संस्थान शामिल हैं।
3.4.2 प्रभावी तिथि 1/04/2010 (निर्धारण वर्ष 2010-11) के अनुसार, उसकी सेवा, धारा 10(10ग)(i) (नियम 2खक के साथ पठित), स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की योजना, में निर्दिष्ट सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी की स्थिति अथवा उसकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की योजना अथवा योजनाओं के अनुसार, की समाप्ति अथवा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर मिले हुए अथवा मिलने योग्य वाले बकाए की स्थिति में ऐसी कोर्इ राहत नहीं दी जाएगी, यदि उसकी ऐसी स्वैच्छिक वियुक्ति अथवा सेवा की समाप्ति अथवा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर कोर्इ भी मिलने अथवा मिले हुए अथवा मिलने योग्य राशि के संबंध में छूट ऐसे अथवा अन्य किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में धारा 10 (10ग) के अंतर्गत बकाए का दावा किया जा सकता हैं।
3.5 अन्य किसी विषय के अंतर्गत आय संबंधी जानकारी
(प) धारा 192 (2ख) ऐसे करदाता को समान वित्त वर्ष तथा उस स्रोत पर कोर्इ अन्य कर के लिए करदाता द्वारा प्राप्त "वेतन" (घर की संपत्ति से आय के विषय के अंतर्गत नुकसान को छोड़कर ऐसे विषय के अंतर्गत नुकसान मौजूद नहीं होगा) को छोड़कर अन्य किसी विषय के अंतर्गत आय का विवरण प्रस्तुत योग्य करता है। विवरण साधारण वर्णन में भी प्रस्तुत किया जा सकता है जो नियम के नियम 26ख (2) के अंतर्गत निर्धारित तरीके से करदाता द्वारा उचित तरह से हस्ताक्षरित अथवा सत्यापित किया जाएगा तथा साधारण विवरण के अनुसार संबंद्ध किया जाएगा।
मैं..............................................(निर्धारिती का नाम), घोषणा करता हूँ कि उक्त कथन मेरी जानकारी और विश्वास के अनुसार सत्य है
इस कथन को दोहराया जाता हैं कि डीडीओ केवल "भवन संपत्ति से आय" विषय के अंतर्गत किसी भी नुकसान पर विचार कर सकते हैं। वसूले जाने वाले कर की राशि की गणना के लिए डीडीओ द्वारा अन्य किसी भी विषय के अंतर्गत हुए नुकसान पर विचार नहीं किया जाएगा।
3.6 भवन संपत्ति से आय विषय के अंतर्गत आय की गणना
भवन संपत्ति नुकसान पर विचार करने के दौरान डीडीओ को सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी फाइल, ऊपर किए गए घोषणा को संदर्भित करे, तथा भवन संपत्ति से ऐसे नुकसान की गणना के अतिरिक्त संलग्न करना होगा। निम्नलिखित विवरण प्रत्येक भवन संपत्ति के लिए पृथक रूप से भवन संपत्ति से आय विषय के अंतर्गत किए जाने वाले नुकसान के दावे के संबंध में नियोक्ता द्वारा प्राप्त अथवा रखा जा सकता है।
क) सकल वार्षिक किराया/मूल्य
ख) नगरपालिका कर भुगतान, यदि हो
ग) ब्याज भुगतान, यदि हो, हेतु दावे में कटौती
घ) अन्य कटौतियों का भुगतान
ड़) संपत्ति का पता
डीडीओ धारा 192(2घ) के साथ पठित नियम 26ग में निर्दिष्टानुसार ब्याज की कटौती के संबंध में प्रपत्र सं. 12खख में प्रमाण अथवा विवरणों की प्रस्तुति को सुनिश्चित करेगा
3.6.1 भवन संपत्ति से आय की गणना के लिए उधार ली गर्इ पूंजी की ब्याज कटौती के दावे के लिए शर्ते :
अधिनियम की धारा 24 (ख) निम्नानुसार उधार ली गर्इ पूंजी पर ब्याज पर भवन संपत्ति से प्राप्त आय से कटौती की स्वीकृति देता है:
(i) कटौती उस स्थिति में लागू होगी जब भवन संपत्ति उसके द्वारा खरीदी जाए तथा कर्मचारी स्वयं के रहने के लिए उसका प्रयोग करें। हालांकि, रोजगार के अन्य स्थान पर होने के कारण को देखते हुए संबंधित संपत्ति वास्तविक तौर पर कर्मचारी द्वारा कब्ज़ा नहीं की जाती
(ii) कटौती का भाग निम्न तालिका के अनुसार स्वीकार्य होगा
| क्र.सं. | उधार ली गर्इ पूंजी का उद्देश्य | उधार ली गर्इ पूंजी की तिथि | अधिकतम स्वीकार्य कटौती |
| 1 | भवन की मरम्मत अथवा नवीकरण अथवा पुन:निर्माण | किसी भी समय | रू. 30,000/- |
| 2 | भवन का अर्जन अथवा निर्माण | 01.04.1999 से पहले | रू. 30,000/- |
| 3 | भवन का अर्जन अथवा निर्माण | 01.04.1999 को अथवा इसके बाद | रू. 1,50,000/- (निर्धारण वर्ष 2014-15 तक) |
| रू. 2,00,000/- (निर्धारण वर्ष 2015-16 से प्रभावी) |
उक्त क्रम सं. 3 की स्थिति में
(क) भवन का अर्जन अथवा निर्माण उस वित्त वर्ष के समाप्त होने के तीन वर्षों के भीतर होना चाहिए जिसमें पूंजी उधार ली गर्इ थी। अत: डीडीओ के लिए यह आवश्यक है कि वह उस संपत्ति का समाप्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करे जिसके लिए कर्मचारी द्वारा स्व: घोषणा आधार पर अथवा निर्माणकर्ता द्वारा कटौती का दावा किया गया है या तो बिल्डर के माध्यम से अथवा कर्मचारी द्वारा स्व: सत्यापन के माध्यम से
(ख) इसके आगे वित्त वर्ष से वित्त वर्ष, जिसमें संपत्ति अर्जित अथवा निर्माण (अधिनियम की अन्य कोर्इ धारा के अंतर्गत कटौती के तौर पर स्वीकार्य ब्याज के किसी भी भाग द्वारा कम) किया गया है, के लिए अग्रिम अवधि ब्याज उस साल तथा आगामी चार वित्त वर्षों में वित्त वर्ष के लिए समान किस्तों में काटी जाएगी।
(ग) कर्मचारी को डीडीओं के समक्ष उस व्यक्ति द्वारा एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा जिसमें उसे देययोग्य ब्याज की राशि को निर्दिष्ट करते हुए उधार ली गर्इ राशि पर कोर्इ ब्याज देय है। यदि पुराने ऋण को चुकाने के लिए नया ऋण लिया गया है तो ऐसे चुकाए गए मूलधन तथा ब्याज के विवरण को दर्शाते हुए प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना चाहिए।
3.7 कटौती की अधिकता अथवा कमी हेतु समायोजन
धारा 192 (3) के प्रावधान कटौती करने वाले को यह अधिकार देते हैं कि वह वित्त वर्ष के दौरान पहले से किए गए कर की कटौती में किसी अधिकता या कमी का समायोजन कर सके, संबंधित वर्ष के भीतर संबंधित कर्मचारी के लिए आगामी कटौती।
3.8 विदेशी मुद्रा में वेतन भुगतान :
विदेशी मुद्रा में देययोग्य वेतन पर कर की कटौती के उद्देश्य के लिए ऐसे वेतन की रूपए में कीमत स्रोत से आपेक्षित कटौती वाले कर की तिथि के अनुसार ऐसी मुद्रा के "तार अंतरण क्रय दर" के आधार पर आंकी जाएगी। (नियम 26 देखें)
4. कर तथा अपने कर्तव्यों के लिए कटौती हेतु उत्तरदायी व्यक्ति
4.1 अधिनियम की धारा 204 (i) के अनुसार भुगतान, केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा भुगतान को छोड़कर की स्थिति में धारा 192 के उद्देश्य के लिए "भुगतान हेतु उत्तरदायी व्यक्ति" का अर्थ स्वयं नियोक्ता अथवा यदि नियोक्ता कंपनी हो तो, उसके प्रधान अधिकारी सहित स्वयं कंपनी होगा। इसके आगे, धारा 204 (iv) के अनुसार, ऋण के संबंध में, अथवा जो भी स्थिति हो, भुगतान केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार, डीडीओ अथवा अन्य किसी व्यक्ति जो भी नाम हो, ऋण के लिए उत्तरदायी व्यक्ति अथवा जो भी स्थिति हो, धारा 192 के उद्देश्य के लिए "भुगतान के लिए उत्तरदायी व्यक्ति" ऐसी रकम का भुगतान करेगा।
4.2 पैरा 9 के अनुसार निर्धारित कर अधिनियम की धारा 192 के अंतर्गत वेतन से वसूला जाना चाहिए।
4.3 न्यूनतम दर पर कर की कटौती :
करदाता के क्षेत्राधिकार के टीडीएस अधिकारी करदाता द्वारा प्रपत्र सं. 13 में उनके समक्ष परिपूरित आवेदन की प्रतिक्रिया में अधिनियम की धारा 197 के अंतर्गत कर की कोर्इ कटौती न होने अथवा न्यूनतम कटौती का प्रमाणपत्र जारी करें तो डीडीओ को ऐसे प्रमाणपत्र पर विचार करना चाहिए तथा यहां निर्दिष्ट दरों पर देययोग्य वेतन पर कर वसूलना चाहिए। ( नियम 28 कक देखें)। प्रमाणपत्र की विशिष्ट पहचान संख्या टीडीएस के त्रैमासिक विवरण में सूचना देना आपेक्षित है। ( प्रपत्र 27 थ)
4.4 कर कटौती का जमा करना
केंद्र सरकार खाते के स्रोत पर कर कटौती के भुगतान की विधि तथा समय के लिए नियम 30 को संदर्भित करें
4.4.1 टीडीएस के भुगतान हेतु नियत तिथि
केंद्र सरकार के खाते में टीडीएस जमा कराने हेतु भुगतान/जमा करने का समय निम्नानुसार है:-
क) सरकारी कार्यालय की स्थिति में
| क्र.सं. | विवरण | समय जब तक जमा किया जाना है |
| 1 | बिना चालान जमा कर | उसी दिन |
| 2 | चालान सहित जमा कर | अगले महीने का 7वां दिन |
| 3 | नियोक्ता द्वारा जमा किये गए अनुलाभ पर कर | अगले महीने का 7वां दिन |
ख) सरकारी कार्यालय को छोड़कर किसी अन्य स्थिति में
| क्र.सं. | विवरण | समय जब तक जमा किया जाना हैं |
| 1 | मार्च में कर कटौती | अगले वित्त वर्ष की 30 अप्रैल |
| 2 | किसी अन्य माह में कर कटौती | अगले महीने का 7वां दिन |
| 3 | नियोक्ता द्वारा जमा किए गए अनुलाभ पर कर | अगले महीने का 7वां दिन |
हालांकि, यदि डीडीओ अधिनियम 192 के अंतर्गत डीटीएस के त्रैमासिक भुगतान के स्वीकृति हेतु अतिरिक्त क्षेत्राधिकार/संयुक्त आयकर आयुक्त के समक्ष आवेदन करता है तो नियम 30(3) त्रैमासिक आधार तथा निम्न तालिका में दिए गए समय के अनुसार इसके भुगतान का अधिकार देता है :-
| क्र.सं. | वित्त वर्ष का त्रैमासिक समाप्ति तिथि | त्रैमासिक भुगतान तिथि |
| 1 | 30 जून | 7 जुलार्इ |
| 2 | 30 सितम्बर | 7 अक्टूबर |
| 3 | 31 दिसंबर | 7 जनवरी |
| 4 | 31 मार्च | अगले वित्त वर्ष को 30 अप्रैल |
4.4.2 टीडीएस के भुगतान की विधि
4.4.2.1 धारा 200(2क) के अंतर्गत पुस्तक प्रविष्टि द्वारा टीडीएस के भुगतान की स्थिति में पीएओ, निधि अधिकारी द्वारा अनिवार्य विवरण का ब्यौरा
सरकारी कार्यालय, जहां चालान (पुस्तक प्रविष्टि) की प्रस्तुति के बिना केंद्र सरकार को ऋण के तौर पर कर का भुगतान किया जाना है, की स्थिति में वेतन और लेखा अधिकारी अथवा निधि अधिकारी अथवा आहरित चेक तथा संवितरण अधिकारी अथवा अन्य किसी नाम का कोर्इ व्यक्ति जिसे ऋण काटने वाला कर कटौती के बारे में सूचित करता है अथवा केंद्र सरकार के ऋण में ऐसी राशि को डालने वाला—
(क) 30 अप्रैल को अथवा उससे पहले धारा 200(2क) के अंतर्गत प्रपत्र सं. 24छ में विवरण को जमा करना जहां विवरण कटौती कर कटौती करने वाले के द्वारा कर कटौती के संबंध में आयकर महानिदेशक (पद्धति) (टिन सुविधा सेवा केंद्र वर्तमान में मैसर्स राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लि. द्वारा व्यवस्थित की जाती है) द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसी में महीने के अंत से 15 दिनों को अथवा उससे पहले किसी अन्य मामले में, मार्च के महीने से संबंधित हो।
(ख) कटौती की राशि के ऋण के संबंध में प्रत्येक कटौती करने वाले को एजेंसी द्वारा जनित संख्या (पुस्तक पहचान संख्या अथवा बिन के अनुसार) को सूचित करना चाहिए। बिन में प्रपत्र 24छ की पावती संख्या, प्रपत्र संख्या 24छ में डीडीओ अनुक्रम संख्या तथा कर के भुगतान की तिथि शामिल है।
यदि पीएओ/सीडीडीओ/टीओ आदि जैसा ऊपर निर्दिष्ट है, धारा 200(2क) के अंतर्गत आपेक्षितानुसार विवरण को पहुंचाने में विफल होते है तो धारा 272(2)(ड) के अंतर्गत जुर्माने के तौर पर जुर्माने का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगे जो रू. 100/- प्रतिदिन होगा जबतक विफलता जारी रहती हैं। हालांकि, ऐसे जुर्माने की राशि उस राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए जो स्रोत पर कर कटौती हेतु कटौतीपूर्ण हैं।
प्रपत्र 24छ के प्रस्तुतिकरण की प्रक्रिया परिशिष्ट III में शामिल है। पीएक्यू/डीडीओ को पालन किए जाने वाले सही प्रक्रिया को समझने के लिए परिशिष्ट IV में एफएक्यू को ध्यान से पढ़ना चाहिए। क्रेंद सरकार मंत्रालय के जेड एओ/पीएओ मासिक आधार पर प्रपत्र सं. 24छ को दाखिल करने के लिए उत्तरदायी होंगे। राज्य सरकार के विभागों की स्थिति में प्रपत्र सं. 24छ को भरने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति का विवरण परिशिष्ट V में दिया गया है।
प्रपत्र 24छ के प्रस्तुतिकरण की प्रक्रिया का विवरण परिशिष्ट IV में दिया गया हैं। पीएओ/डीडीओ को पालन किए जाने वाले सही प्रक्रिया को समझने के लिए उसमें दिए गएं एफएक्यू को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
4.4.2.2 आयकर चालान द्वारा भुगतान
(i) आयकर चालान द्वारा भुगतान किए जाने की स्थिति में ऐसे कटौतीयोग्य कर की राशि को भारतीय रिजर्व बैंक के किसी कार्यालय अथवा भारतीय स्टेट बैंक की किसी शाखा अथवा अन्य किसी प्राधिकृत बैंक में उक्त पैरा 4.4.1 की तालिका में निर्दिष्ट समय के भीतर प्रेषण द्वारा केंद्र सरकार के ऋण को जमा किया जा सकता है।
(ii) कंपनी तथा व्यक्ति (कंपनी को छोड़कर) जिस पर धारा 44कख के प्रावधान लागू हों, कटौती की गर्इ राशि की स्थिति में, इलैक्ट्रानिक आयकर चालान सहित भारतीय रिजर्व बैंक अथवा भारतीय स्टेट बैंक अथवा अन्य प्राधिकृत बैंक में इलैक्ट्रानिक प्रेषण किया जाएगा। (नियम 125)
राशि भारतीय रिजर्व बैंक अथवा भारतीय स्टेट बैंक अथवा अन्य प्राधिकृत बैंक में इलैक्ट्रानिक प्रेषण के तौर पर समझी जाएगी यदि राशि निम्न प्रकार से प्रेषित की जाए:
(क) भारतीय रिजर्व बैंक अथवा भारतीय स्टेट बैंक अथवा अन्य प्राधिकृत बैंक की इंटरनेट सुविधा : अथवा
(ख) डेबिट कार्ड ( अधिसूचना सं. 41/2010 दिनांक 31 मर्इ 2010)
4.5 कर कटौती जमा करने के विफल रहने पर ब्याज, जुर्माना व अभियोजन
4.5.1 यदि व्यक्ति किसी भी स्रोत से कर कटौती का संपूर्ण अथवा कुछ भाग देने में असमर्थ रहता है तो अथवा कटौती के बाद निर्धारित समय में केंद्र सरकार के क्रेटिड में कर का संपूर्ण अथवा कुछ भाग देने में असमर्थ रहता है तो धारा 201 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवार्इ के लिए जिम्मेदार होगा तथा ऐसे कर के संबंध में निर्धारिती-दोषी के तौर पर समझा जाएगा तथा अधिनियम की धारा 221 के अंतर्गत कार्रवार्इ के लिए उत्तरदायी होगा। आगामी धारा 201(1क) यह बताती है कि ऐसे व्यक्ति साधारण ब्याज के लिए उत्तरदायी होगा।
(i) कर के वसूले जाने वाली तिथि से ऐसे कर की राशि पर प्रत्येक माह अथवा माह के किसी अंश के लिए 1 प्रतिशत की दर पर; तथा
(ii) प्रत्येक माह अथवा तिथि, जिस पर ऐसे कर का वास्तविक भुगतान किया गया था, से ऐसे कर की राशि वाले माह के किसी अंश पर एक तथा डेढ़ प्रतिशत।
ऐसा ब्याज, वसूलनीय, अनिवार्य प्रकृति का है तथा संबंधित त्रैमासिक हेतु टीडीएस के त्रैमासिक विवरण के प्रस्तुतिकरण पर देय होगा।
4.5.2 धारा 271ग साथ-साथ नीचे दर्शाती है कि यदि कोर्इ व्यक्ति धारा 194 ख के दूसरे प्रावधानों के अनुसार संपूर्ण कर अथवा कर के किसी अंश अथवा सभी स्रोत से संपूर्ण कर अथवा कुछ अंश के भुगतान में असमर्थ रहता है तो कर की राशि के समान कुल राशि को जुर्माने के तौर पर देना होगा जो जिसका उसने भुगतान अथवा कटौती न की हो।
4.5.3 आगे, धारा 276 ख यह दर्शाती है कि यदि कोर्इ व्यक्ति, धारा 194ख के दूसरे प्रावधान के अंतर्गत सभी स्रोतों से कर की कटौती अथवा स्वयं के कर भुगतान, उपरोक्तानुसार निर्धारित समय के भीतर केंद्र सरकार को केटिड का भुगतान करने में असफल रहता है तो वह एक अवधि, जो जुर्माने सहित 3 माह से 7 साल के बीच हो सकती है, सश्रम कारावास के साथ दंडित किया जाएगा।
4.6 कर कटौती हेतु प्रमाण पत्र की प्रस्तुति (धारा 203)
4.6.1 धारा 203 के अनुसार डीडीओ द्वारा कर्मचारी को टीडीएस की राशि के ब्यौरे तथा अन्य विवरण वाले प्रपत्र 16 में एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आपेक्षित है। नियम 31 का प्रावधान है कि प्रपत्र 16 कर्मचारी को उस वित्त वर्ष जिसमें वेतन का भुगतान तथा कर कटौती की गर्इ थी, के बाद 31 मर्इ तक दिया जाना चाहिए। साथ ही साथ बैंक को पेंशन के भुगतान के समय काटे गए कर के लिए ऐसे प्रमाणपत्र को जारी करना चाहिए। अधिसूचना सं. 11 दिनांक 19.02.2013 के अधिकार वाले संशोधित प्रपत्र 16 को संलग्न करना चाहिए। प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र द्वारा निर्दिष्ट होगा।
(क) कटौतीदाता की वैध स्थार्इ खाता संख्या (पैन)
(ख) कटौतीदाता का वैध कर कटौती तथा संग्रह खाता संख्या (टैन)
(ग) (i) पुस्तक पहचान संख्या अथवा संख्या (बिन) जहां सरकारी कार्यालय की स्थिति में कर कटौती का जमा चालान की बिना प्रस्तुति पर हुआ।
(ii) बैंक द्वारा भुगतान की स्थिति में चालान पहचान संख्या अथवा संख्या (सिन*)
(*चालान पहचान संख्या (सिन) का अर्थ है ऐसा नंबर जिसमें बैंक शाखा, जहां कर का भुगतान किया गया है, जिस तिथि को कर का भुगतान किया गया है तथा बैंक द्वारा दिए गए चालान सिरियल नंबर, का मूल सांख्यकीय विवरणी (बीएसआर) कोड शामिल है)
(घ) टीडीएस का सभी प्रासंगिक त्रैमासिक ब्यौरा की प्राप्ति संख्या (24थ)। त्रैमासिक ब्यौरे की संख्या की प्राप्ति 8 अंकों की होती है।
आगे परिपत्र 04/2013 दिनांक 17.04.2013 के अनुसार सभी कटौतीदाता (सरकारी कटौतीदाता, जो पुस्तक प्रविष्टि के द्वारा केंद्र सरकार के खाते में टीडीएस जमा करते है, सहित) अध्याय XVII-ख की धारा 192 के प्रावधानों के तहत 1 अप्रैल 2012 को अथवा के बाद कुल कटौती के संबंध में टीआरएसीर्इएस पोर्टल के माध्यम से जनरेट तथा तद्नुसार डाउनलोड करके तथा विधिवत सत्यापन और पुष्टि के बाद प्रपत्र 16 के भाग क को जारी करेगें। प्रपत्र सं. 16 के भाग क के पास विशिष्ट टीडीएस प्रमाणपत्र संख्या होनी चाहिए। प्रपत्र सं. 16 के भाग ख (परिशिष्ट) हाथ से कटौतीदाता द्वारा तैयार किया जाएगा तथा प्रपत्र 16 के भाग क सहित उचित सत्यापन तथा प्रमाणीकरण के बाद कटौतीदाता को जारी किए जाऐंगे।
यह ध्यान दिया जा सकता है कि नर्इ टीडीएस प्रक्रिया के अंतर्गत, कटौतीदाता द्वारा दाखिल टीडीएस विवरण की प्राप्ति संख्या तथा कटौतीकर्ता का टैन/कटौतीकर्ता का पैन कटौतीकर्ता को टीडीएस के ऑनलाइन ऋण की स्वीकृति के लिए विशिष्ट पहचान के तौर पर व्यवहार कर सकता है। इसलिए इन ब्यौरों को दाखिल करने में उचित सावधानी रखी जानी चाहिए। टीडीएस विवरण में सही सिन/बिन नंबर को इंगित करने में भी विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।
यदि डीडीओ धारा 203 के अनुसार आपेक्षित संबंधित व्यक्ति को यह प्रमाणपत्र जारी करने में असफल रहता है तो धारा 272क(2)(छ) के अंतर्गत जुर्माने के तौर पर रू. 100/- प्रतिदिन जब तक यह प्रक्रिया जारी रहती है, भरने के लिए बाध्य होंगे।
हालांकि यह स्पष्ट किया जाता है कि टीडीएस प्रमाणपत्र जारी करने के लिए ऐसी कोर्इ बाध्यता नहीं है यदि सभी स्रोतों से कर छूट तथा कटैातियों के दावे के आधार पर काटनेयोग्य/काटा नहीं गया हो।
(नोट : ट्रेसेज आयकर विभाग का वेब आधारित एप्लीकेशन है जो टीडीएस प्रबंधन से जुडे़ हुए सभी हितधारकों को इंटरफेस होने का मौका मुहैया कराता है। इसके द्वारा चालान की स्थिति को देखा, राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड की डाउनलोडिंग, कोन्सों फाइल, दोषमुक्त रिपोर्ट तथा प्रपत्र 16/16क के साथ-साथ वार्षिक कर साख ब्यौरा (प्रपत्र 26धध) को देखा जा सकता है। प्रत्येक कटौतीदाता को को ट्रेसेस पोर्टल पर स्वयं को पंजीकृत कराना अनिवार्य हैं। कटौतीदाताओं को जारी किए गए प्रपत्र 16/16क को ट्रेसेस पोर्टल से उत्सर्जित तथा डाउनलोड करना चाहिए।
टीडीएस प्रमाणपत्रों को प्राप्त करने तथा विवरण को दाखिल करने से संबंधित कुछ आवश्यक बिंदु नीचे निर्दिष्ट किए गए हैं :
(क) टीडीएस प्रमाणपत्र केवल कटौतीदाता के लिए उत्पन्न होंगे यदि तिमाही 4 में काटौतीदाता द्वारा प्रपत्र 24थ के परिशिष्ट II में वैध पैन को ठीक तरह से निर्दिष्ट किया गया हो। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों को प्रपत्र 16 में यह सुनिश्चित करने की सलाह दी जाती है कि प्रपत्र 24छ/ओएलटीएएस के संबंध में "मैचिंग" की स्थिति "एफ" हो। यदि मैचिंग की स्थिति 'एफ' से अलग हो तो इसे सुधारने के लिए तुरंत आवश्यक कदम उठाएं। यहां यह निर्दिष्ट करना उचित होगा कि कटौतीदाताओं के लिए ब्यौरे के ऑनलाइन सुधार सहित कुछ सुविधाएं वेबसाइट www.itdscpc.gov.in पर उपलब्ध करार्इ गर्इ है।
(ख) नियोक्ता को राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड आरपीयू ( इसके पश्चात विवरणी निर्मित निति) के अनुसार प्रपत्र 24थ के परिशिष्ट 1 के स्तम्भ 321 (भुगतान राशि/ऋण) में वेतन की सकल राशि (धारा 10 के अंतर्गत किसी राशि की छूट तथा अध्याय VIक के अंतर्गत कटौती सहित) उद्धृत करना चाहिए।
(ग) नियोक्ता को राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड आरपीयू के अनुसार प्रपत्र 24थ के परिशिष्ट II के स्तम्भ 333 में धारा 10 के अंतर्गत किसी छूट को छोड़कर वेतन राशि को उद्धृत करना चाहिए।
(घ) टीडीएस के लिए प्रस्तुत 'वेतन' विषय को छोड़कर किसी भी विषय के अंतर्गत वेतन (भवन संपत्ति के घाटे सहित) (स्तम्भ 339 में देखें) पर टीडीएस को राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड आरपीयू के अनुसार स्तम्भ 350 (पिछले नियोक्ता द्वारा टीडीएस के सूचित वेतन) में दिखाया जा सकता है।
(ड) नियोक्ता को पूर्णाकिंत किए बिना परिशिष्ट II में कुल करयोग्य वेतन (स्तम्भ 346) को उद्धृत करने की सलाह दी जाती है अर्थात टीडीएस उसके अनुसार यानि टीडीएस को भी पूर्णांकित किए बिना, काटा तथा सूचित किया जाना चाहिए।
उदाहरण :
| कुल करयोग्य आय | कुल करयोग्य आय (पूर्णांकित) | काटा जाने योग्य टीडीएस | आय के पूर्णाकिंत किए जाने के बाद काटा/सूचित किया गया टीडीएस | अल्प कटौती |
| रू. 13,50,094 | रू. 13,50,090 | रू. 2,35,028.20 | रू. 2,35,027 | रू. 1.20 |
4.6.2 यदि निर्धारिती वर्ष के दौरान एक से अधिक नियोक्ता द्वारा नियुक्त किया गया है तो प्रत्येक कर्मचारी को ऐसी अवधि, जिसमें प्रत्येक नियोक्ता के साथ नियुक्त किए गए ऐसे निर्धारिती, से संबंधित प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र के भाग क तथा भाग ख निर्धारिती के विकल्प पर पिछले नियोक्ता अथवा प्रत्येक नियोक्ता द्वारा जारी किया जा सकता है।
4.6.3. डिजिटल हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणीकरण
(i) जहां प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र जारी किया जाना है वहां कटौती कर्त्ता की पंसद के अनुसार ऐसे प्रमाणपत्रों के प्रमाणीकरण के लिए डिजिटल हस्ताक्षरों का प्रयोग किया जा सकता है।
(ii) वाक्यांश (i) के अंतर्गत प्रमाणपत्र की स्थिति में जारी कटौती कर्त्ता को सुनिश्चित करना चाहिए कि
(क) उक्त पैरा 4.6.1 में निर्दिष्ट शर्तें अनुपालन में हैं;
(ख) एक बार प्रमाणपत्र के डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित हो जाने के पश्चात् प्रमाणपत्र की सामग्री परिवर्तनयोग्य नहीं होगी; तथा
(ग) ऐसे प्रमाणपत्रों का लाग तथा नियंत्रण संख्या कटौती कर्त्ता द्वारा नियंत्रित की जाएगी।
❖ डिजिटल हस्ताक्षरों का प्रयोग इंटरनेट पर अधिकतर र्इ-हस्तांतरण के प्रमाणीकरण के लिए किया जा सकता है क्योंकि डिजिटल हस्ताक्षर का प्रयोग कर जानकारी का हस्तांतरण असुरक्षित है। यह समय की बचत करता हैं विशेषकर ऐसे संगठनों में जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद है क्योंकि हस्तरूपी कर कटौती वाले प्रमाणपत्र को जारी करने में काफी समय लगता है। (परिपत्र सं. 2, 2007 दिनांक 21.05.2007)
4.6.4. आवश्यक वस्तुओं आदि से संबंधित विवरणों का प्रस्तुतीकरण (धारा 192 (2ग) :
4.6.4.1 धारा 192 (2ग) के अनुसार, कर्मचारी को दी जाने वाले वेतन के बदले पूर्वाकांक्षित अथवा लाभ के पूर्ण तथा सत्य विवरण को उपलब्ध कराने के उत्तरदायित्व ऐसे वेतन, यानि स्रोतों से कर कटौती के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, के भुगतान हेतु उत्तरदायी व्यक्ति का होगा। ऐसे विवरणों का प्रपत्र तथा प्रणाली नियम 26क, प्रपत्र 12खक (परिशिष्ट II) तथा प्रपत्र 16 में निर्दिष्ट की गर्इ है। पूर्वाकांक्षित से संबंधित प्रक्रिया तथा मूल्य जानकारी प्रपत्र 12खक में नियोक्ता द्वारा उपलब्ध करार्इ जाएगी यदि दी गर्इ अथवा देययोग्य वेतन रू. 1,50,000/- से अधिक हो तो। अन्य मामलों में जानकारी नियोक्ता द्वारा स्वयं प्रपत्र 16 (भाग ख) में नियोक्ता द्वारा उपलब्ध करार्इ जाएगी।
4.6.4.2 नियोक्ता, जो इस परिपत्र के पैरा 3.2 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार कर्मचारी की ओर से पूर्वाकांक्षित पर कर अदा करता है, को ऐसे संबंधित कर्मचारी को प्रमाणपत्र जारी करना होगा जो केंद्र सरकार को कर का भुगतान करता हो तथा भुगतान की गर्इ राशि, ऐसी दर पर भुगतान किया गया हो तथा जिस पर संशोधित प्रपत्र 16 में कुछ अन्य विवरण हो, को निर्दिष्ट किया हो।
4.6.4.3 कर्मचारी को मुहैया कराए जाने वाले पूर्वाकांक्षित की राशि को दर्शाते हुए ब्यौरे के प्रस्तुतीकरण के लिए धारा 192 (2ग) के अंतर्गत नियोक्ता पर डाला गया उत्तरदायित्व नियोक्ता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है जो उनके तहत बनाए गए कानून तथा नियमों के मूल्यांकन के अनुसार निवर्हनीय है। कोर्इ भी असत्य जानकारी, जाली दस्तावेज अथवा पूर्वाकांक्षित संबंधित जानकारी छिपाने की स्थिति में कानून के तहत अपरिहार्य परिणामों के लिए उत्तरदायी होगा। उक्त निर्दिष्ट प्रपत्र 16 तथा/अथवा प्रपत्र 12खक में प्रमाणपत्र ऐसे वित्त वर्ष जिसमें वेतन का भुगतान किया गया हो तथा कर वसूला गया हो, के तुरंत बाद के वित्त वर्ष की 31 मर्इ तक कर्मचारी को दे दिया जाएगा। यह वह धारा 192 (2ग) के अनुसार आपेक्षित संबंधित व्यक्ति को यह प्रमाणपत्र जारी करने में असफल रहता है तो धारा 272क(2)(i) के अनुसार जुर्माने के तौर पर रू. 100/- प्रतिदिन जब तक यह प्रक्रिया जारी रहती है, भरने के लिए बाध्य होंगे।
अधिनियम की धारा 139ग के अनुसार आंकलन अधिकारी नियोक्ता द्वारा जारी प्रपत्र 16 के साथ प्रपत्र 12खक को प्रस्तुत करने के लिए करदाता से मांग कर सकते हैं।
4.6.5 डीडीओ को धारा 192 (2घ) के अंतर्गत निर्धारित दावे (हानि के निर्धारण के लिए दावे सहित) के प्रमाण अथवा ब्यौरे के सबूत को प्राप्त करने में सक्षम है।
डीडीओ को कथित धारा के अंतर्गत कटौतीयोग्य कर की राशि की गणना अथवा निर्धारिती की आय के अनुमान के उद्देश्य के लिए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कुछ हानि को निर्धारित अथवा कुछ कटौती, छूट अथवा भत्तों को स्वीकृत करने हेतु धारा 192 के अंतर्गत प्राधिकृत किया गया है। कर्मचारी द्वारा दावा किए गए कुछ कटौतियां/छूट/भत्ते/हानि निर्धारण के लिए प्रमाण/सबूत/ब्यौरे जैसे एचआरए में कटौती के दावे के लिए किराया प्राप्ति, स्व: अधिकृत गृह संपत्ति आदि, से हानि का दावा डीडीओ हेतु उपलब्ध नहीं है। इस मामले में निश्चितता तथा एकरूपता लाने के लिए, वित्त अधिनियम में धारा 192(2घ) को शामिल किया है। धारा 192(2घ) मुहैया कराता है कि भुगतान (डीडीओ) के लिए उत्तरदायी व्यक्ति प्रारूप तथा तरीके जिसे निर्धारित किया जा सके, जैसे गृह किराया भत्ता (जहां कुल वार्षिक राशि एक लाख रूपए से अधिक हो), अवकाश यात्रा रियायत अथवा सहायता, शीर्षक 'गृह संपत्ति से आय' के अंतर्गत ब्याज की कटौती और नियमों के नियम 26ग द्वारा निर्धारित प्रपत्र 12खख के अनुसार अध्याय VI-क के अंतर्गत कटौती के दावे के प्रमाण अथवा सबूत अथवा विवरण को निर्धारिती से प्राप्त करेगा। प्रपत्र 12खख परिशिष्ट IIक के अनुसार संलग्न है।
4.7 पैन तथा टैन का अनिवार्य उद्धृतीकरण
4.7.1 अधिनियम की धारा 203 क स्रोतों से कर कटौती के लिए सभी उत्तरदायी व्यक्तियों के लिए यह अनिवार्य करता है कि वह चालान, टीडीएस-प्रमाणपत्र, ब्यौरे तथा अन्य प्रमाणपत्रों में खाता सं. (टैन) का एकत्रीकरण तथा काटे गए कर को उद्धृत तथा प्राप्त करें। इस संबंध में जानकारी इस विभाग के परिपत्र सं. 497 (एफ. सं. 275/118/87-आर्इटी(ख) दिनांक 9.10.1987) में उपलब्ध है। यदि कोर्इ व्यक्ति धारा 203क के अंतर्गत इसका अनुपालन नहीं करता है तो वह धारा 272 खख के अंतर्गत कुल दस हजार रूपए के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा। इसी प्रकार धारा 139क (5ख) के अनुसार स्रोतों से कर देने वाले सभी व्यक्तियों के लिए यह अनिवार्य है कि उन व्यक्तियों, जिनका आयकर धारा 192 (2ग) के अंतर्गत प्रस्तुत ब्यौरे, धारा 203 कें अंतर्गत प्रस्तुत प्रमाणपत्रों तथा अधिनियम की धारा 200(3) के प्रावधानों के अनुसार तैयार तथा प्रेषित सभी ब्यौरों, में कटौती की गर्इ हैं।
4.7.2 सभी करदाताओं को प्रपत्र सं. 24थ (वेतन से की गर्इ कर कटौती) में टीडीएस ब्यौरे को नत्थी करना होगा। क्योंकि आय की विवरणी सहित टीडीएस प्रमाणपत्रों को भरने की आवश्यकता को पूरी तरह साथ किया गया है इसलिए कटौतीदाताओं के पैन की कमी कर देने वालों के लिए ऋण देते समय समस्या उत्पन्न करते हैं। इसलिए कर कटौतीदाताओं को सलाह दी जाती है कि वह प्रपत्र 24थ में वेतन के लिए टीडीएस ब्यौरे में सभी कटौतियों के सही पैन विवरण को प्राप्त तथा उद्धृत करें। करदाताओं को अपने कटौतीदाताओं अपने सही पैन को प्रस्तुत करना अनिवार्य है। कटौतीदाता (नियोक्ता) को कटौती करवाने वाले (कर्मचारी) द्वारा पैन न प्रस्तुत करने पर नीचे दिए गए पैरा 4.8 में निर्दिष्ट अधिनियम की धारा 206कक के अनुसार उच्च दर पर टीडीएस काटने का अधिकार है।
4.8 कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुति की जरुरी अनिवार्यता (धारा 206कक) :
4.8.1 अधिनियम में धारा 206कक के अनुसार आय अथवा राशि जिस पर कर कटौतीयोग्य है, की किसी भी कुल प्राप्ति की स्थिति में कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यदि कर्मचारी (कटौती कराने वाला) कटौतीदाता को अपना पैन प्रस्तुत करने में असफल होता हैं तो करदाता को निम्न उच्च दरों के हिसाब से टीडीएस कटाने का अधिकार होगा :-
i) इस अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों में निर्दिष्ट दरों पर; अथवा
ii) प्रवृत्त दर अथवा दरों पर; अथवा
iii) बीस प्रतिशत की दर पर
क्टौतीदाता को समस्त तीन शर्तों में कर राशि को निर्धारित करना है तथा टीडीएस की उच्चतम दर को लागू करना है। हालांकि, जहां धारा 192 के अंतर्गत टीडीएस के लिए आंकी गर्इ कर्मचारी की आय करयोग्य सीमा से कम होती है तो किसी कर की कटौती नहीं की जाएगी। लेकिन जहां धारा 192 के अंतर्गत टीडीएस के लिए आंकी गर्इ कर्मचारी की आय कराधान से अधिक होती है तो कटौतीदाता धारा 192 में मुहैया कराए गए अनुसार प्रवृत्त दरों पर आधारित कर की आय की औसत दर की गणना करेगा। यदि ऐसा आंका गया कर 20 प्रतिशत से कम होता है तो कर की कटौती 20 प्रतिशत की दर पर की जाएगी तथा यदि औसत दर 20 प्रतिशत से अधिक होता है तो कर औसत दर पर आंका जाना है। 2 प्रतिशत पर शिक्षा उपकर तथा 1 प्रतिशत पर माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर कटौतीयोग्य नहीं हैं, यदि कर अधिनियम की धारा 206कक पर काटा जाता है।
4.9 धारा 200(3) के अंतर्गत कर कटौती का विवरण (टीडीएस का त्रैमासिक ब्यौरा)
4.9.1 कर कटौती (वेतनमान की स्थिति में नियोक्ता) करने वाले व्यक्ति को प्रत्येक वित्त वर्ष की अवधि (विवरण नीचे तालिका में) के लिए प्रपत्र 24थ में टीडीएस के त्रैमासिक ब्यौरे के विधिवत सत्यापन को आयकर महानिदेशक (पद्धति) द्वारा प्राधिकृत टिन/सुविधा केंद्रो पर जमा करना आपेक्षित है जो वर्तमान में मैसर्स राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लि. (राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड) अथवा कटौतीदाता के तौर पर पंजीकरण के बाद www.incometaxindiaefiling.gov.in द्वारा संचालित की जा रही है। किसी भी टिन सुविधा केद्रों पर र्इ-टीडीएस मध्यस्थ्य का ब्यौरा http://www.incometaxindia.gov.in तथा http://tin-nsdl.com पोर्टल पर उपलब्ध हैं। टीडीएस की वार्षिक विवरणी को भरने की अनिवार्यता पूरी तरह से प्रभावी तिथि 1.4.2006 तक हो जानी चाहिए। प्रपत्र 24थ (अधिसूचना सं. एस.ओ. 704(र्इ) दिनांक 12.5.2006) अंतिम तिमाही हेतु दाखिल हुए तिमाही ब्यौरा टीडीएस की वार्षिक विवरणी के तौर पर समझा जाएगा। त्रैमासिक आधार पर इस ब्यौरे को दाखिल की नियत तिथि तालिका में निम्नानुसार हैं :-
तालिका : त्रैमासिक र्इ-टीडीएस विवरणी 24थ के ब्यौरे को दाखिल की तिथि
| क्र.सं. | तिमाही समाप्ति हेतु विवरणी | सरकारी कार्यालयों हेतु नियत तिथि | अन्य कटौतियों हेतु नियत तिथि |
| 1 | 30 जून | 31 जुलार्इ | 15 जुलार्इ |
| 2 | 30 सितम्बर | 31 अक्टूबर | 15 अक्टूबर |
| 3 | 31 दिसंबर | 31 जनवरी | 15 जनवरी |
| 4 | 31 मार्च | 15 मर्इ | 15 मर्इ |
4.9.2 उक्त निर्दिष्ट ब्यौरे को आयकर महानिदेशक (पद्धति) द्वारा निर्दिष्ट प्रक्रियाओं, प्रारूप तथा मानदंडों के अनुसार इलैक्ट्रानिक प्रक्रिया के माध्यम सत्यापित के प्रपत्र 27क में ब्यौरे के सत्यापन सहित अथवा डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक अथवा प्रपत्र रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। र्इ-टीडीएस/डीसीएस ब्यौरे को प्रस्तुत करने के लिए प्रक्रिया परिशिष्ट VI में ब्यौरेवार दी गर्इ है।
4.9.3 प्रपत्र 24थ में 20 से कम कटौती के आंकड़ों तथा करदाता के सरकारी कार्यालय न होने अथवा अधिनियम (अधिसूचना सं. 11 दिनांक 19.02.2013) की धारा 44कख के अंतर्गत अपने खाते को अंकेक्षित करने वाले व्यक्ति को छोड़कर सभी विवरणी इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुत करना आपेक्षित है।
4.9.4 ब्यौरे को प्रस्तुत करने में चूक के लिए शुल्क (धारा 234ड़) :
यदि कोर्इ व्यक्ति 1.07.2012 को अथवा के पश्चात् स्रोतों से कर के संबंध में धारा 200(3) में निर्दिष्ट समय के भीतर ब्यौरा देने अथवा देने के कारण को बताने में असफल रहता है तो शुल्क के तौर पर रू. 200/- प्रतिदिन जब तक यह प्रक्रिया जारी रहती है, भरने के लिए बाध्य होगे। हालांकि, ऐसे शुल्क के लिए राशि कर, जिसके लिए स्रोतों से कर वसूला गया था, की राशि से अधिक नहीं होगा। यह शुल्क अनिवार्य होगा तथा ऐसे ब्यौरे की प्रस्तुती से पूर्व देना होगा।
4.9.5 टीडीएस ब्यौरे को दाखिल करने में होने वाली चूक का सुधार
डीडीओ पहले दिए गए ब्यौरे में प्रस्तुत जानकारी को अद्यतन, जोड़ने, हटाने अथवा किसी त्रुटि को सही करने के लिए सुधार वक्तव्य भी दे सकता है।
4.9.6 ब्यौरा प्रस्तुत करने में असफल अथवा गलत सूचना प्रस्तुति हेतु जुर्माना (धारा 271ज)
यदि कोर्इ व्यक्ति 1.07.2012 को अथवा के पश्चात् स्रोतों से कर के संबंध में धारा 200(3) में निर्दिष्ट समय के भीतर अथवा गलत ब्यौरा देने अथवा देने के कारण को बताने में असफल रहता हैं तो जुर्माने के तौर पर कम से कम रू. 10,000/- जो रू. 1,00,000/- तक बढ़ार्इ जा सकती है, भरने के लिए बाध्य होगे। हालांकि, यदि व्यक्ति यह साबित कर दें कि उसने केंद्र सरकार के क्रेडिट को शुल्क तथा ब्याज, यदि हो, के साथ टीडीएस को भेजने के बाद ब्यौरा देने के लिए निर्धारित समय से एक वर्ष की अंतिम तिथि से पूर्व ऐसे ब्यौरे को वह भेज चुका था, तो उस पर कोर्इ जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।
4.9.7 कर कटौती के ब्यौरे को तैयार करते समय, कटौतीदाता के लिए अनिवार्यता :-
(i) ब्यौरे में कर खाता संख्या (टैन) का संग्रहण तथा उसका कर कटौती उद्धृत अनिवार्य;
(ii) कटौतीदाता के सरकारी (राज्य सरकार सहित) कार्यालय की स्थिति को छोड़कर ब्यौरे में उसकी स्थार्इ खाता संख्या (पैन) को उद्वृता अनिवार्य। सरकारी उद्धृता की स्थिति में "पीएएनएनओटीआरर्इक्यडी" को र्इ-टीडीएस ब्यौरे में उद्धृत किया जाना है;
(iii) सभी कटौतीकारों के पैन को उद्धृत करना अनिवार्य;
(iv) पुस्तक पहचान संख्या अथवा चालान पहचान संख्या जो भी स्थिति हो, सहित केंद्र सरकार को दिए जाने वाले कर के विवरण का प्रस्तुतीकरण;
(v) देय राशि अथवा क्रेटिड जिस पर प्रापक के आंकलन अधिकारी द्वारा धारा 197 के अंतर्गत कोर्इ कटौती नहीं वाले प्रमाणपत्र के निगर्मन के अनुसार कर नहीं काटा गया, के विवरण का प्रस्तुतीकरण।
4.10 पेंशन से आय पर टीडीएस
राष्ट्रीयकृत बैंक से पेंशन प्राप्त करने वाले, जो अपनी पेंशन (जीवनसाथी को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन नहीं) पेंशनकर्त्तोओं की स्थिति में इस परिपत्र में शामिल निर्देश उसी रूप में लागू होंगे जैसे वह वेतन-आय के मामले में लागू होते हैं। जीवन बीमा, भविष्य निधि, एनएससी आदि के कारण धारा 80ग के अंतर्गत पेंशन की राशि से कटौती की स्वीकृति दी जा सकती है यदि पेंशनकर्त्तो बैंक को प्रासंगिक विवरण प्रस्तुत करेंगे। इस संबंध में आरबीआर्इ पेंशन परिपत्र (केंद्रीय श्रृखंला) सं. 7/सी.डी.आर/1992 (संदर्भ सीओ: डीजीबीए: जीए (एनबीएस) सं. 60/जीए.64 (11सीवीएल)-/92) दिनांक 27 अप्रैल 1992 के मार्फत भारतीय रिर्जव बैंक द्वारा भारतीय स्टेट बैंक तथा अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों को आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं तथा सभी बैंकों, जिन्हें पेंशन के भुगतान के सुपुर्द किया गया है, की शाखाओं द्वारा इन निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। आगे, बैंकों की सभी शाखाएं केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के परिपत्र सं. 761 दिनांक 13.1.1998 के मार्फत पेंशनकर्त्तोओं को प्रपत्र 16 में कटौतीयोग्य कर के प्रमाणपत्र को धारा 203 के अंतर्गत जारी करने के लिए बाध्य है।
4.11. गैर-निवासियों की स्थिति में किए जाने वाले टीडीएस से संबंधित मामले
4.11.1 गैर-निवासियों के भारत में काम करने तथा नियोक्ता, यदि पहले ही भारत छोड़ चुके होने की स्थिति में कर्मचारी की देय राशि, द्वारा कर वहन करने तथा आंकलन आदेश के पास होने के समय भारत के बैंक में कोर्इ खाता न होने की स्थिति में प्रतिदाय नियोक्ता को जारी किया जा सकता है क्योंकि कर उसके द्वारा वहन किया गया है। (परिपत्र सं. 707 दिनांक 11.07.1995)
4.11.2 गैर-निवासियों के संबंध भारत में की गर्इ सेवा हेतु दिए जाने वाला वेतन भारत में कमार्इ जाने वाली आय के तौर पर मानी जाएगी। अधिनियम में विशेष रूप से निर्दिष्ट है कि विश्राम अवधि अथवा अवकाश अवधि, इसमें भारत में अग्रगमिता अथवा दूसरी जगह लेना तथा रोजगार के सेवा अनुबंध शामिल हैं, के लिए किसी भी प्रकार का वेतन भारत में कमाए जाने वाले वेतन के तौर पर समझा जाएगा।
5. शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत आय की गणना
5.1 शीर्षक "वेतन" के अंतर्गत आदेय आय
(1) निम्नलिखित आय, वेतन विषय के अंतर्गत आयकर के प्रति देययोग्य मानी जाएगी
(क) पिछले वर्षों, चाहे भुगतान किया हो अथवा नहीं, के दौरान निर्धारिती हेतु पूर्व नियोक्ता अथवा नियोक्ता से आदेय कोर्इ वेतन;
(ख) नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता द्वारा अथवा की ओर से पिछले वर्षों के दौरान कोर्इ दिया हुआ वेतन अथवा उसे स्वीकृत किया हुआ वेतन यदि उसके लिए नियत न होने अथवा नियत होने की स्थिति में;
(ग) नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता के द्वारा अथवा की ओर से पिछले सालों के दौरान वेतन क कोर्इ बकाया भुगतान किया हुआ अथवा भुगतान के लिए स्वीकृत किया हुआ, यदि पिछले सालों के लिए आयकर न वसूला गया हो तो।
(2) संदेह को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि अग्रिम में कोर्इ भी दिया गया वेतन
किसी भी पिछले साल के लिए किसी व्यक्ति की कुल आय में शामिल होगा तथा इसे उस व्यक्ति की कुल आय में शामिल नहीं किया जाएगा जब उसका वेतन देय होगा।
कोर्इ भी वेतन पारितोषिक, छूट अथवा पारिश्रमिक जो भी नाम हो, कंपनी द्वारा कंपनी के हिस्सेदार द्वारा देय अथवा प्राप्त आय को "वेतन" के तौर पर नहीं समझा जाएगा।
5.2 वेतन के स्थान पर "वेतन" "पूर्वाकांक्षित" तथा "लाभ" की परिभाषा
5.2.1 "वेतन" में शामिल हैं
i मेहनताना, शुल्क, पारितोषिक, पूर्वाकांक्षित, लाभ के स्थान पर, वेतन के अलावा, अग्रिम वेतन, वार्षिकी अथवा पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश आदि के नकदीकरण के संबंध में भुगतान
ii अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 6 में शामिल प्राधिकृत भविष्य निधि से संबंधित कर्मचारी के ऋण के वार्षिक संवृद्धि का भाग
क) कर्मचारी के वेतन के 12 प्रतिशत से अधिक प्राधिकृत भविष्य निधि में कर्मचारी के खाते में नियोक्ता द्वारा किया गया योगदान
ख) अब तक कर्मचारी के शेष राशि पर दिया गया ब्याज केंद्र सरकार (प्रभावी तिथि 01.09.2010 को दर 9.5 प्रतिशत पर निश्चित की गर्इ अधिसूचना सं. एसओ 1046 (र्इ) दिनांक 13.05.2011) द्वारा निर्धारित ऐसी दर से अधिक मान्य किया जा सकता है।
iii धारा 80गगघ (इस परिपत्र का पैरा 5.5.3) में संदर्भित अधिसूचना एफ.एन. 5/7/2003-र्इसीबीएंडपीआर दिनांक 22.12.2003 के मार्फत नर्इ पेंशन योजना के अंतर्गत कर्मचारी के खाते में केंद्र सरकार अथवा अन्य नियोक्ता द्वारा योगदान किया जाएगा।
यह ध्यान दिया जाए कि, जब से वेतन में पेंशन शामिल हुर्इ, स्रोत से कर पेंशन से भी काटा जाएगा अन्यथा जबतक आवश्यकता हो। हालांकि, धारा 10 (10क) के अंतर्गत छूट की सीमा तक पेंशन का रूपांतरित भाग के लिए कर कटौती करना आपेक्षित नहीं है।
परिवारिक पेंशन अन्य स्रोतों से आय शीर्षक के अंतर्गत कर देययोग्य है तथा वेतन शीर्षक के अतर्गत देययोग्य नहीं होगी। इसलिए अधिनियम की धारा 192 के प्रावधान प्रयोज्यनीय नहीं है। अत: व्यक्ति को दी गर्इ पारिवारिक पेंशन के लिए कोर्इ टीडीएस डीडीओ को आपेक्षित नहीं है।
5.2.2 रियायत में शामिल है :-
I नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को उपलब्ध कराए जाने वाले निशुल्क आवास के किराए की राशि;
II नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को उपलब्ध कराए जाने वाले किसी आवास के संबंध में किसी छूट की राशि;
III किसी भी लाभ अथवा निशुल्क अथवा कम दरों पर दी गर्इ सुविधा की राशि निम्नलिखित मामलों में से किसी पर लागू होगी:
i कंपनी द्वारा कर्मचारी को जो ऐसी कंपनी का निदेशक हो;
ii कंपनी द्वारा कर्मचारी को जो जिसका कंपनी में वास्तविक हित हो;
iii कंपनी द्वारा (कंपनी संहित) कर्मचारी को जो उक्त i तथा ii बिदुंओं के तहत शामिल नहीं होते हो तथा जिनकी आय "वेतन" ( चाहे एक अथवा एक से अधिक नियोक्ताओं द्वारा देय अथवा भुगतान की हो अथवा स्वीकृति दी हो), मौद्रिक भुगतान, रू. 50,000/- से अधिक, के रूप में उपलब्ध न करार्इ गर्इ हो तथा सभी लाभों की राशि को छोड़कर।
(किराए के संबंध में छूट का गठन अधिनियम की धारा 17(2) (ii) में नीचे विवरण 1 से 4 में निर्दिष्ट की गर्इ है)
IV किसी कार्य जो कि निर्धारिती द्वारा दी जाए, के संबंध में नियोक्ता द्वारा कोर्इ भी कुल राशि।
V धारा 17 के अंतर्गत नियोक्ता द्वारा दिया जाने वाली कोर्इ भी कुल राशि, चाहे प्रत्यक्ष हो अथवा निधि के तौर पर, प्राधिकृत भविष्य निधि अथवा प्राधिकृत पेंशन पूंजी अथवा अन्य निर्दिष्ट पूंजी को छोड़कर, वार्षिक अनुबंध को अथवा निर्धारिती के जीवन के बीमा को प्रभाव में लाने के लिए।
VI नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता द्वारा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित अथवा आवंटित परिश्रम इक्विटी शेयर अथवा निर्दिष्ट प्रतिभूति की राशि, इस उद्देश्य के लिए तथा कर्मचारी को मामूली दर पर अथवा निशुल्क।
(क) "निर्दिष्ट प्रतिभूति" अर्थात् प्रतिभूति संविदा (नियामक) अधिनियम, 1956 की धारा 2(ज) में निर्दिष्टानुसार प्रतिभूति तथा कर्मचारी पूंजी विकल्प किसी योजना अथवा नीति के अंतर्गत स्वीकृत की गर्इ हैं, ऐसी योजना तथा नीति के अंतर्गत दी गर्इ प्रतिभूति सहित;
(ख) "पारिश्रमिक इक्विटी शेयर" अर्थात् राशि योग अथवा बौद्धिक संपदा के रूप में उपलब्ध अधिकारों के प्रयोग अथवा तकनीकी जानकारी को उपलब्ध करने के लिए नकद को छोड़कर विचार हेतु अथवा छूट पर कंपनी के कर्मचारियों अथवा निदेशकों द्वारा जारी इक्विटी शेयर, जो भी नाम हो;
(ग) कोर्इ निर्दिष्ट प्रतिभूति अथवा पारिश्रमिक इक्विटी की राशि तिथि, ऐसी प्रतिभूति के संबंध में निर्धारिती द्वारा प्राप्त अथवा वास्तविक भुगतान राशि द्वारा कम किए जाने के अनुसार निर्धारिती द्वारा प्रदत विकल्प का प्रयोग किया गया था, पर पारिश्रमिक इक्विटी शेयर, अथवा निर्दिष्ट प्रतिभूति, जो भी स्थिति हो, की सही बाजारी कीमत के अनुसार होनी चाहिए;
(घ) "उचित बाजार मूल्य" अर्थात् निर्दिष्टानुसार (आयकर नियम के नियम 3(9) को संदर्भित करें) विधि के अनुसार निर्धारित राशि;
(ड) "विकल्प" अर्थात् अधिकार लेकिन पूर्व-निर्धारित मूल्य पर पारिश्रमिक इक्विटी शेयर अथवा निर्दिष्ट प्रतिभूति के आवेदन के लिए नियोक्ता द्वारा स्वीकृत कार्य नहीं।
VII. निर्धारिती के संबंध में नियोक्ता द्वारा स्वीकृत पेंशन राशि के लिए कोर्इ भी योगदान राशि, एक लाख रूपए की सीमा से अधिक; तथा
VIII अन्य कोर्इ अनुषंगी लाभ अथवा सुविधा की राशि नियम 3 में निर्धारितानुसार
5.2.2 क ऐसे लाभ तथा सुविधा के मूल्यांकन हेतु नियम नियम 3 में दिए गए हैं जो निम्नानुसार हैं :-
I नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाली आवासीय सुविधा (नियम 3(1)) :-
भवन में शामिल हैं "आवास", फ्लैट, फार्म हाउस अथवा उसका कोर्इ भाग, होटल परिसर, मोटल, सर्विस अपार्ट्मेंट, अतिथि कक्ष, कारावैन, मोबाइल घर, जहाज अथवा अन्य तैरने वाला ढ़ाचा।
क बिना किराये वाले असुज्जित आवास की रियायत के मूल्यांकन के लिए सभी कर्मचारियों को दो श्रेणियों में विभक्त किया गया हैं :
(i) केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए भवन की राशि ऐसे भवन के लिए दिए जा रहे लाइसेंस शुल्क के समान है क्योंकि कर्मचारी द्वारा वास्तविक किराया तक कम किया जाता है। स्वायत्त, अर्ध-स्वायत्त संस्थानों, पीएसयू/पीएसर्इ व सहायक कंपनियों, विश्वविद्यालयों आदि के कर्मचारी इस मूल्यांकन गणना के तहत नहीं आते।
(ii) अन्य सभी यानि वह करदाता जो केंद्र तथा राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं है, भवन के संबंध में भवन का मूल्यांकन नीचे दी गर्इ तालिका के अनुसार निर्धारित है :
क) जहां कर्मचारी को उपलब्ध किया जाने वाला आवास नियोक्ता द्वारा खरीदा गया है:
| क्र.सं. | 2001 जनगणना के अनुसार जनसंख्या वाले शहर | रियायत |
| 1 | 25 लाख से अधिक | वेतन का 15 प्रतिशत |
| 2 | 10 लाख से अधिक किंतु 25 लाख से कम | वेतन का 10 प्रतिशत |
| 3 | अन्य स्थानों के लिए | वेतन का 7.5 प्रतिशत |
ख) जहां ऐसा उपलब्ध कराया गया आवास कर्मचारी द्वारा पट्टे/किराये पर लिया जाता है :
निर्धारित दर नियोक्ता द्वारा देययोग्य पट्टा किराये पर वास्तविक राशि अथवा वेतन का 15 प्रतिशत है जो भी कम हो, कर्मचारी द्वारा दिए जाने वाले किराये की किसी भी राशि को कम करने के अनुसार। आवासीय भवन के संबंध में रियायत की गणना के उद्देश्य के लिए वेतन का अर्थ:
क वास्तविक वेतन;
ख मंहगार्इ भत्ता अथवा मंहगार्इ वेतन यदि वह कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभ अथवा पेंशन की गणना में शामिल हुआ हो;
ग बोनस;
घ छूट;
ड अन्य सभी करयोग्य भत्ते (जो भाग करयोग्य न हो); तथा
च अन्य कोर्इ मौद्रिक भुगतान जो कर के रूप में देययोग्य हो (जो भी नाम हो)
सभी नियोक्ता द्वारा वेतन अवधि, जिसमें भवन उपलब्ध कराया गया है, के संबंध में विचार किया जाएगा। जहां कर्मचारी के एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण की स्थिति में तैनाती के समय नए स्थान पर भवन सहित उपलब्ध कराया जाएगा जबकि दूसरे स्थान को बनाए रखने की स्थिति में रियायत की राशि ऐसे भवन जिसकी 90 दिनों से कम की अवधि के लिए कम से कम हो, की केवल संदर्भ सहित निर्धारित हो तथा उसके बाद रियायत की राशि ऐसे भवन के लिए वसूली जाएगी।
ख भवन के प्रस्तीतुकरण पर रियायत का मूल्यांकन - उक्त विधि (क में) द्वारा निर्धारितानुसार रियायत की राशि निम्नानुसार बढ़ार्इ जाएगी :—
i) फर्नीचर, उपकरण तथा सामग्री का 10 प्रतिशत शुल्क; अथवा
ii) जहां फर्नीचर, उपकरण तथा सामग्री किराये पर ली गर्इ हो जिस पर वास्तविक किराया भाड़ा देययोग्य हो
तथा ली गर्इ राशि स्वयं कर्मचारी द्वारा दी गर्इ किराये तक सीमित होगी।
यह भी बताया जाता हैं कि जहां केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा कर्मचारी जो ऐसी सरकार के नियंत्रण के तहत उपक्रम अथवा अन्य किसी के साथ प्रतिनियुक्ति सेवा कर रहा हैं, द्वारा भवन मुहैया कराया जाता है,—
(i) ऐसे नियोक्ता के कर्मचारी को उस निकाय अथवा उपक्रम जहां वह प्रतिनियुक्ति आधार पर सेवारत हैं, के तौर पर समझा जाएगा; तथा
(ii) ऐसे आवास की रियायत की राशि उक्त तालिका में क(ii)(क) के अनुसार गणना की जाने वाली राशि होगी, जहां तक नियोक्ता द्वारा भवन खरीदा गया है।
ग होटल में सुसज्जित आवास : रियायत राशि निम्नलिखित दो निम्नतम आधार पर निर्धारित होगी
1. अवधि जिसमें आवास उपलब्ध कराया गया है के संबंध में दी गर्इ अथवा देययोग्य वेतन का 24 प्रतिशत; अथवा
2. ऐसे होटल हेतु नियोक्ता द्वारा दिया गया अथवा देययोग्य वास्तविक शुल्क
ऐसी अवधि जिसमें ऐसा आवास मुहैया कराया गया है नियोक्ता द्वारा देययोग्य अथवा वास्तविक तौर पर कोर्इ दिया गया किराया सीमितानुसार है।
हालांकि, (ग) में कुछ भी करयोग्य नहीं है यदि दो शर्तों को संतुष्ट किया गया हो:
1. होटल आवास पिछले वर्ष में कुल 15 दिनों से अधिक अवधि के लिए मुहैया कराया गया हो, तथा
2. ऐसे भवन ऐसे कर्मचारी को उपलब्ध कराया गया हो जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित होता हो।
यह स्पष्ट किया जाता हैं कि भवन के संपूर्ण भाग के तौर पर उपलब्ध करार्इ गर्इ सेवा के दौरान, रियायत के तौर पर पृथक रूप से मूल्यांकित करने की आवश्यकता नहीं, अन्य सेवा के अतिरिक्त जिसके लिए नियोक्ता द्वारा कर्मचारी हेतु भुगतान अथवा प्रतिपूर्ति की गर्इ है, बचत वाक्यांश के अनुसार रियायत के तौर पर मूल्यांकित की जाएगी। अन्य शब्दों में, आवास के लिए संपूर्ण कीमत नियमों के अनुसार मूल्यांकित की जाएगी तथा होटल द्वारा उपलब्ध करार्इ गर्इ अन्य सुविधाओं के लिए अन्य शुल्क बचत वाक्यांश के अंतर्गत पृथक रूप से मूल्यांकित की जाएगी।
घ हालांकि, खनन स्थल अथवा तटवर्ती तेल अन्वेषण स्थल अथवा परियोजना क्रियान्वयन स्थल अथवा बांध स्थल अथवा ऊर्जा उत्सर्जन स्थल अथवा तटवर्ती स्थल पर कार्यरत कर्मचारी को उपलब्ध कराए गए किसी भवन की राशि रियायत के तौर पर नहीं समझी जाएगी यदि :
i) ऐसा भवन "दूरदराज के इलाकों" में स्थित हो अथवा
ii) जहां भवन "दूरदराज के इलाकों" के क्षेत्रों में स्थित न हो लेकिन अस्थार्इ प्रकार के भवन का चबूतरे वाला क्षेत्र 800 वर्ग फीट से अधिक नहीं होना चाहिए तथा किसी भी नगरपालिका अथवा छावनी की स्थानीय सीमा के तहत 8 किलोमीटर के भीतर नहीं होना चाहिए।
यहां परियोजना क्रियान्वयन स्थल का अर्थ अपनी शुरूआती स्थिति से परियोजना तक वाला स्थान। दूरदराज के इलाकों का अर्थ है कि एक ऐसा क्षेत्र जो नवीनतम प्रकाशित अखिल भारतीय जनगणना के अनुसार कम से कम 20,000 की जनसंख्या वाले शहर से कम से कम 40 किलोमीटर दूर स्थित हो।
II नियोक्ता द्वारा रियायत पर उपलब्ध करार्इ जाने वाली कार [नियम 3(2)] :
(1) यदि नियोक्ता अपने कर्मचारी को कार की सेवा उपलब्ध कराता हैं तो ऐसी रियायतों की राशि :
क) शून्य, यदि कर्मचारी द्वारा कार का प्रयोग पूर्णता और केवल उसके द्वारा कार्यालय संबंधी कार्यों के लिए की जाए।
ख) ऐसे किसी प्रयोग (यदि मोटर कार का प्रयोग कर्मचारी अथवा उसके किसी घर के सदस्य द्वारा अपने निजी अथवा व्यक्तिगत प्रयोग की स्थिति में) के लिए मोटर कार को चलाने तथा उसकी देखरेख करने पर कर्मचारी द्वारा व्यय किया हुआ वास्तविक खर्चा, मोटर कार की सामान्य टूट फूट की राशि के प्रदर्शन में वृद्धि के अनुसार चालक हेतु पारिश्रमिक तथा कर्मचारी द्वारा वसूली गर्इ किसी राशि में वृद्धि के अनुसार, सहित।
ग) रू. 1800/- (जमा रू. 900/- यदि चालक भी उपलब्ध कराया गया हो) प्रतिमाह (कर्मचारी द्वारा आंशिक रूप से सेवा निवर्हन के प्रयोग अथवा आंशिक रूप से उसके अथवा उसके पारिवारिक सदस्य द्वारा निजी अथवा व्यक्तिगत प्रयोग की स्थिति में, यदि देखरेख पर अथवा उसे चलाने पर होने वाला व्यय समान अथवा कर्मचारी द्वारा प्रतिपूर्ति की गर्इ हो, की स्थिति में)। हालांकि, रियायत की राशि रू. 2400/- ( रू. 900/- सहित, यदि चालक भी उपलब्ध कराया गया हो) प्रति माह होगी यदि मोटर कार के इंजन की घन क्षमता 1.6 लीटर से अधिक हो।
घ) रू. 600/- (जमा रू. 900/- यदि चालक भी उपलब्ध कराया गया हो) प्रतिमाह ( कर्मचारी द्वारा आंशिक रूप से सेवा निवर्हन के प्रयोग अथवा आंशिक रूप से उसके अथवा उसके पारिवारिक सदस्य द्वारा निजी अथवा व्यक्तिगत प्रयोग की स्थिति में, यदि देखरेख पर अथवा उसे चलाने पर होने वाला व्यय समान होने की स्थिति में)। हालांकि, रियायत की राशि रू. 900/- ( रू. 900/- सहित, यदि चालक भी उपलब्ध कराया गया हो) प्रति माह होगी यदि मोटर कार के इंजन की घन क्षमता 1.6 लीटर से अधिक हो।
(2) यदि मोटर कार अथवा अन्य किसी मोटर गाड़ी कर्मचारी द्वारा खरीदी गर्इ हो लेकिन वास्तविक देखरेख तथा चलाने का व्यय नियोक्ता द्वारा अदा अथवा दिया जाता हो तो रियायत राशि के मूल्यांकन की विधि भिन्न है तथा निम्नानुसार है :
क) यदि मोटर कार अथवा अन्य कोई वाहन सुविधा गाड़ी कर्मचारी द्वारा खरीदी गर्इ हो लेकिन वास्तविक देखरेख तथा चलाने का व्यय (चालक के वेतन सहित, यदि हो) नियोक्ता द्वारा अदा अथवा दिया जाता हो तो कर के लिए कोर्इ रियायत नहीं दी जाएगी यदि कार का प्रयोग पूर्णता तथा एकमात्र तौर पर कार्यालय के लिए किया जाता हो। हालांकि निम्नलिखित अनुपालन अनिवार्य हैं :
➢ नियोक्ता को कार्यालयीन उद्देश्य के लिए यात्रा के विवरण का पूर्ण ब्यौरा सुरक्षित रखना होगा;
➢ नियोक्ता को प्रमाणपत्र देना होगा कि व्यय पूर्णता कार्यालयीन उद्देश्यों के लिए किया गया।
हालांकि यदि मोटर कार का प्रयोग आंशिक रूप से आधिकारिक कार्यों अथवा आंशिक रूप से निजी कार्यों के उद्देश्यों के लिए किया गया हो तो रियायत संबंधी राशि नियोक्ता द्वारा वहन किया गया वास्तविक व्यय होगा जो उक्त (1) में निर्दिष्ट राशि (ग में) के अनुसार घटाया जाएगा।
मोटर की सामान्य टूट-फूट मोटर कार की वास्तविक कीमत के 10 प्रतिशत वार्षिक के तौर पर आंकी जाएगी।
III निजी परिचारक आदि (नियम 3(3)) : सफार्इ कर्मचारी, माली तथा चौकीदार सहित सभी निजी परिचारकों की निशुल्क सेवा की राशि नियोक्ता के वास्तविक वेतन में से ली जाएगी। जहां कर्मचारी के घर पर परिचारकों की सेवाएं मुहैया करार्इ जाती हैं वहां उसके द्वारा प्रतिपादित की जा रही निजी सुविधा की एवज में कर्मचारी के हाथ में आने वाली रियायत के तौर पर पूरी राशि पर कर लगाया जाएगा। ऐसी सुविधा अथवा सेवा के लिए कर्मचारी द्वारा किसी प्रकार की देय राशि उक्त राशि से वसूली जाएगी।
IV घर में प्रयोग होने वाली गैस,बिजली तथा पानी (नियम 3(4)) : गैस, बिजली तथा पानी के रूप में दी जाने वाली रियायत की राशि गैस, बिजली अथवा पानी मुहैया कराने वाली एजेंसी हेतु नियोक्ता द्वारा चुकार्इ गर्इ राशि होगी। जहां आपूर्ति नियोक्ता के स्वयं के स्रोता से की जाती हो वहां नियोक्ता द्वारा वहन की जा रही प्रति इकार्इ शुल्क रियायत के तौर पर विचारनीय होगी। ऐसी किसी सुविधा अथवा सेवा के लिए कर्मचारी द्वारा दी गर्इ राशि रियायत राशि से कम की जाएगी।
V निशुल्क अथवा रियायती शिक्षा [नियम 3(5)] : कर्मचारी के परिवार के किसी भी पारिवारिक सदस्य के निशुल्क अथवा रियायती शिक्षा के कारण रियायत इस कारण से नियोक्ता द्वारा वहन किए गए खर्चे की राशि के समान खर्चे के अनुसार तय की जाएगी। हालांकि, जहां ऐसे शिक्षा संस्थान खुद नियोक्ता द्वारा चलाए तथा अधिकार रखा गया हो अथवा जहां नियोक्ता के यहां नौकरी करने के कारण किसी संस्थान द्वारा निशुल्क शिक्षा मुहैया करार्इ जाती है तो कर्मचारी की रियायत की राशि अवस्थिति के पास अथवा इसी प्रकार के संस्थान में ऐसी शिक्षा के शुल्क का हवाला देते हुए निर्धारित की जाएगी यदि ऐसी शिक्षा अथवा ऐसे लाभ की लागत प्रति बालक 1000/- प्रतिमाह से अधिक हो। रियायत की राशि कर्मचारी द्वारा दिए गए अथवा वसूली गर्इ राशि, यदि हो, द्वारा सीमित की जाएगी।
VI यात्री सामग्री परिवहन [नियम 3(6)] : नियोक्ता, जो यात्री अथवा सामान के परिवहन में संलग्न हैं, निशुल्क अथवा रियायती दरों पर निजी अथवा व्यक्तिगत यात्रा के लिए कर्मचारी अथवा अपने पारिवार के किसी सदस्य के लिए, यात्री अथवा सामान के परिवहन के उद्देश्य के लिए ऐसे नियोक्ता द्वारा अन्य व्यवस्थाओं को उपलब्ध करा कर अथवा खरीद अथवा पट्टे पर लेकर, के प्रावधानों के अनुसार किसी भी लाभ अथवा सुविधा की राशि ऐसी राशि से वसूली जाएगी जो ऐसे किसी लाभ अथवा सुविधा के लिए कर्मचारी द्वारा वसूला अथवा भुगतित राशि, यदि हो तो, तक सीमित करने के अनुसार सामान्य जन को ऐसे नियोक्ता द्वारा ऐसा लाभ या सुविधा दी गर्इ हो। यह किसी एयरलाइंस अथवा रेलवे के कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा।
VII ब्याज शुल्क अथवा रियायत ऋण [नियम 3(7)(i)] यह सामान्य बात है, विशेषकर वित्त संस्थानों के विषय में, कर्मचारी अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य को रियायती दरों पर ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाए। ऐसे ऋण से उत्पन्न होने वाली रियायती राशि ब्याज से अधिक होगी जो निर्धारित ब्याज दर से अधिक ब्याज यदि हो, में देययोग्य होगा, कर्मचारी अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य द्वारा वास्तविक भुगतान की स्थिति में। निर्धारित ब्याज दर सामान्य जन को समान प्रकार तथा समान उद्देश्य के लिए ऋण के संबंध में प्रासंगिक वित्त वर्ष के पहले दिन के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक द्वारा वार्षिक तौर पर वसूली जाने वाली दर होगी। रियायत राशि अधिकतम बकाया मासिक शेष विधि के आधार पर आंकी जाएगी। इस नियम के अंतर्गत रियायत के आंकलन के लिए नियोक्ता द्वारा गणना तथा समायोजन के लिए अन्यथा अपनार्इ गर्इ अन्य कोर्इ विधि प्रासंगिक नहीं होगी। रू. 20,000/- की कुल राशि वाले छोटे ऋण इससे बाहर होंगे।
नियम 3क में निर्दिष्ट बीमारियों के इलाज के लिए लिया गया ऋण भी छूटप्राप्त होगा बशर्ते चिकित्सा संबंधी प्रतिपूर्ति के लिए दी गर्इ ऋण की राशि किसी बीमा योजना के तहत प्रतिपूर्ति न की गर्इ हो। जहां कोर्इ भी चिकित्सा बीमा प्रतिपूर्ति प्राप्त होती है वहां रियायत दर पर रियायत राशि प्रतिपूर्ति राशि पर प्रतिपूर्ति के तिथि को लिए गए बकाए ऋण के समक्ष वसूली जाएगी लेकिन विशेष रूप से इस उद्देश्य के लिए, लिए गए बकाए ऋण के समक्ष वसूला नहीं जाएगा।
VIII अवकाश लाभांश हेतु नियोक्ता द्वारा यात्रा, पर्यटन, भवन तथा अन्य किसी अवकाश हेतु प्रतिपूर्ति अथवा भुगतान [नियम 3(7)(ii)] :
कर्मचारी अथवा उसके अन्य किसी परिवार के सदस्य द्वारा किसी अवकाश के लाभ के लिए नियोक्ता द्वारा यात्रा, पर्यटन, भवन तथा अन्य देय खर्चो अथवा प्रतिपूर्ति के कारण, छुट्टी यात्रा रियायत (धारा 10(5) के अनुसार) को छोड़कर, इस कारण से नियोक्ता द्वारा वहन किए गए व्यय की राशि होगी। हालांकि, कर्मचारी से किसी प्रकार का वसूला अथवा खर्च की गर्इ राशि निर्धारित रियायत राशि तक सीमित होगी।
जहां नियोक्ता द्वारा ऐसी सुविधाएं दी जाती हों तथा यह सभी कर्मचारियों के लिए एक समान रूप से उपलब्ध न हो तो लाभ की राशि ऐसी राशि से ली जाएगी जिस पर सामान्य जन के लिए अन्य एजेंसियों द्वारा ऐसी सुविधाएं मुहैया करार्इ जाती हैं। यदि अवकाश सुविधाएं नियोक्ता द्वारा पोषित की जाती हैं तथा सभी कर्मचारियों के लिए एक समान रूप से उपलब्ध हैं तो ऐसे लाभ की राशि छूट प्राप्त करने योग्य होगी।
जहां कर्मचारी आधिकारिक दौरे पर हों तथा उसके किसी परिवार के सदस्य के संबंध में खर्चे उसके द्वारा वहन किए गए हों, परिवार के संबंधित सदस्य के संबंध में व्यय की राशि रियायत के तौर पर मानी जाएगी।
IX नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को मुहैया कराए गए सस्ते/निशुल्क खाद्य सामग्री/गैर-मादक पेय पदार्थ [नियम 3(7)(iii)] :
करयोग्य रियायत की राशि की गणना निम्नानुसार की जाएगी :
| 'भुगतान वाउचर' जो अहस्तांतरणीय तथा केवल खाने वाले स्थानों पर प्रयोग के लिए हो, सहित खाद्य पदार्थो/गैर-मादक पेय सामग्री की राशि पर होने वाले व्यय के नियोक्ता द्वारा वहन किए जाने की स्थिति में | XXX | |
| कम : रू. 50/- प्रति खाद्य पदार्थ की स्थार्इ राशि | XXX | |
| कम : नियोक्ता द्वारा वसूली गर्इ राशि | XXX | XXX |
| शेष राशि कर्मचारियों को उपलब्ध कराए गए खाद्य पदार्थ की राशि की रियायत पर करयोग्य होगा। | XXX |
टिप्पणी : छूट निम्न स्थितियों के अनुसार दी जाएगी :
1. चाय/स्नैक्स कार्य अवधि के दौरान मुहैया कराए जाने पर
2. दूरदराज के क्षेत्रों अथवा तट से दूर अधिष्ठापन में कार्य अवधि के दौरान मुहैया करार्इ गर्इ खाद्य सामग्री व गैर-मादक पेय पदार्थ
X सदस्यता शुल्क तथा वार्षिक शुल्क [नियम 3(7)(v)] : कर्मचारी (अथवा उसके किसी परिवार के सदस्य को) द्वारा वहन किया गया कोर्इ भी सदस्यता शुल्क तथा वार्षिक शुल्क, जो नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए क्रेटिड कार्ड (किसी भी अतिरिक्त कार्ड सहित) अथवा अन्यथा, नियोक्ता द्वारा भुगतान अथवा प्रतिपूर्ति हेतु हो, द्वारा वसूला गया हो, निम्नलिखित आधार पर करयोग्य होगा :
| नियोक्ता द्वारा वहन किया गया व्यय | XXX | |
| कम : आधिकारिक उद्देश्यों के लिए व्यय | XXX | |
| कम : कर्मचारी से वसूली गर्इ राशि, यदि हो, | XXX | XXX |
| रियायतानुसार देययोग्य राशि | XXX |
हालांकि राशि पूर्णता तथा केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए वहन की गर्इ तो यह छूटयोग्यनीय होगी यदि निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाए
i) खर्चों के प्रकार तथा तिथि सहित ऐसे खर्चों का पूर्ण ब्यौरा नियोक्ता द्वारा सुरक्षित रखा जाएगा।
ii) नियोक्ता को प्रमाणपत्र देना होगा कि यह पूर्णता तथा केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए वहन किया गया था।
XI क्लब व्यय [नियम 3(7)(vi)]
क्लब सुविधा हेतु कोर्इ वार्षिक अथवा नियतकालिक शुल्क तथा नियोक्ता (अथवा परिवार के किसी सदस्य) जिसका नियोक्ता द्वारा भुगतान अथवा वहन किया गया हो, द्वारा क्लब में किसी खर्च की स्थिति में शुल्क निम्नलिखित आधार पर करयोग्नीय होगी।
| नियोक्ता द्वारा वहन किया गया व्यय राशि | XXX | |
| कम : आधिकारिक उद्देश्यों के लिए व्यय | XXX | |
| कम : कर्मचारी से वसूली गर्इ राशि, यदि हो, | XXX | XXX |
| रियायतानुसार देययोग्य राशि | XXX |
हालांकि राशि पूर्णता तथा केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए वहन की गर्इ तो यह छूटयोग्यनीय होगी यदि निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाएगा
i) ऐसे खर्चों का पूर्ण ब्यौरा, व्यय के प्रकार तथा तिथि सहित तथा इनका व्यापार संबंधी मुनाफा नियोक्ता द्वारा सुरक्षित रखा जाएगा।
ii) नियोक्ता को प्रमाणपत्र देना होगा कि यह पूर्णता तथा केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए वहन किया गया था।
टिप्पणी : 1) नियोक्ता के परिसर में नियोक्ता द्वारा कर्मचारियों की समस्त श्रेणियों को एकसमान स्वास्थ्य क्लब, खेल-कूद सुविधाएं आदि मुहैया कराने तथा उन पर होने वाला व्यय इसमें शामिल नहीं होगा।
2) कॉर्पोरेट अथवा संगठन की सदस्यता, जहां लाभ नौकरी की समाप्ति के बाद विशेष कर्मचारी को नहीं मिलता, के लिए प्रांरभिक तौर पर एक साथ जमा की गर्इ राशि अथवा शुल्क छूटयोग्नीय है। प्रांरभिक शुल्क/जमा, ऐसी स्थिति में, शामिल नहीं होगी।
XII संपत्ति का प्रयोग [नियम 3(7)(vii)] : कर्मचारी अथवा उसके किसी परिवार के सदस्य द्वारा प्रयोग की जाने वाली और नियोक्ता द्वारा खरीदी गर्इ चल संपत्ति (उनको छोड़कर जिन्हें नियम 3 के उप नियम में संदर्भित किया गया है) के लिए यह साधारण है। यह रियायत ऐसे किसी प्रयोग के लिए कर्मचारी द्वारा वसूले गए किसी शुल्क को सीमित करने के अनुसार संपत्ति के वास्तविक मूल्य पर 10 प्रतिशत प्रति दर से वसूली जानी है। हालांकि, कम्प्यूटरों तथा लैपटॉप का प्रयोग में किसी प्रकार की रियायत नहीं मिलेगी।
XIII संपत्ति का स्थानांतरण [नियम 3(7)(viii)] : अक्सर नियोक्ता द्वारा चल संपत्ति (शेयर तथा प्रतिभूति की स्थिति में नहीं) के स्थनांतरण की स्थिति में कर्मचारी अथवा उसके कोर्इ परिवार का सदस्य निशुल्क अथवा बाजार कीमत के मुकाबले बेहद कम कीमत पर इसका लाभ उठाता हैं। चल संपत्ति की वास्तविक लागत तथा कर्मचारी द्वारा अदा की गर्इ कुल राशि, यदि हो, के बीच अंतर रियायतों की राशि से लिया जाएगा। चल संपत्ति, जिसका पहले से प्रयोग किया जा रहा है, की स्थिति में वास्तविक लागत संपत्ति के प्रयेाग वाले सभी पूर्ण वर्षों के लिए ऐसी वास्तविक लागत के 10 प्रतिशत तक सीमित की जाएगी। हालांकि, उच्चतम मूल्यह्रास होने के कारण, कम्प्यूटर तथा इलैक्ट्रानिक मशीन की स्थिति में, रियायतों की राशि प्रयोग के प्रत्येक पूर्ण वर्ष की शेष विधि को कम करके वास्तविक लागत के 50 प्रतिशत तक सीमित की जाएगी। इस संबंध में इलैक्ट्रानिक मशीनों का अर्थ है आंकड़ा संग्रहण तथा संचालन संबंधी उपरकण जैसे कम्प्यूटर, डिजीटल डायरी तथा प्रिंटर। इसमें घर में प्रयोग होने वाले उपकरण ( यानि घरेलू वस्तुएं) जैसे वाशिंग मशीन, माइक्रोवेब, ओवन, मिक्सर, तवे, ओवन आदि शामिल नहीं होगें। इसी प्रकार कार की स्थिति में रियायतों की राशि प्रयोग के प्रत्येक पूर्ण वर्ष की शेष विधि को कम करके वास्तविक लागत के 20 प्रतिशत तक सीमित की जाएगी।
XIV उपहार [नियम 3(7)(iv)] :
किसी उपहार अथवा वाउचर अथवा टोकन की राशि ऐसे उपहार जिन्हें कर्मचारी अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य को नियोक्ता द्वारा दिए, मिले उपहार के तौर पर दिया गया हो, रियायत के अंतर्गत करयोग्य है। हालांकि उपहार आदि कुल रू. 5,000 प्रति वर्ष की राशि से कम, को छूट प्राप्त होगी।
XV नियोक्ता द्वारा धारा 17(2) के तहत रू. 15,000/- प्रति वर्ष से अधिक की चिकित्सा अदायगी की स्थिति में रियायत इस प्रकार दी जानी है :
आगे यह स्पष्ट किया जाता है कि रियायत संबंधी मूल्यांकन की विधि नियमों के नियम 3 तथा अधिनियम की धारा 17(2) के तहत दी गर्इ हैं। कटौती कराने वाले कटौती की प्रक्रिया हेतु रियायत राशि के निर्धारण से पूर्व सावधानीपूर्वक उक्त प्रावधानों को देख सकते हैं।
5.2.3 "वेतन के स्थान पर लाभ" में शामिल है
I अपने नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता अथवा नौकरी की समाप्ति के संबंध में अथवा इससे संबंधित नियम व शर्तों के संशोधन की स्थिति में निर्धारिती द्वारा देय अथवा प्राप्त किसी भी प्रकार के मुआवजे की राशि;
II भविष्य अथवा अन्य निधि से अथवा नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता से निर्धारिती द्वारा लंबित अथवा देय कोर्इ भुगतान (धारा 10 के वाक्यांश (10), (10क), (10ख), (11), (12), (13) अथवा (13क) में सदर्भित भुगतान को छोड़कर), ऐसी पॉलिसी पर बोनस के माध्यम से आवंटित कुल राशि सहित प्रमुख बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त कोर्इ राशि अथवा ऐसा किसी अंशदान पर निर्धारिती द्वारा अंशदान को शामिल नहीं किया जाएगा।
"प्रमुख बीमा पॉलिसी" का अर्थ वही होगा जैसा धारा 10(10घ) में निर्धारित किया गया है।
III किसी व्यक्ति से निर्धारिती द्वारा देय अथवा प्राप्त कोर्इ राशि, चाहे एकमुश्त अथवा किसी अन्य तरीके से,
(क) उसके साथ नौकरी उस व्यक्ति की नियुक्ति से पहले; अथवा
(ख) उस व्यक्ति के साथ उसकी नियुक्ति के छोड़ने के बाद
5.3 "वेतन" विषय के अंतर्गत शामिल न होने वाली आय (छूट)
निम्नलिखित किसी भी वाक्यांश के तहत आने वाली कोर्इ आय अधिनियम की धारा 192 के उद्देश्य हेतु वेतन से आय की गणना हेतु शामिल नहीं की जाएगी।
5.3.1 धारा 10(5) के अंतर्गत भारत में किसी भी स्थान पर (क) भारत में किसी स्थान पर अवकाश अथवा (ख) सेवा से सेवानिवृत्ति अथवा सेवा की समाप्ति के बाद, नियोक्ता अथवा अपने पूर्व नियोक्ता से अपने तथा अपने परिवार के सदस्य के लिए, प्रक्रिया के संबंध में, प्राप्त अथवा देय कोर्इ यात्रा भत्ता अथवा सहायता की राशि नियमों के नियम 2ख में निर्धारित है।
इस वाक्यांश के उद्देश्य के लिए, व्यक्ति के संबंध में "परिवार" का अर्थ हैं :
(i) व्यक्ति का जीवनसाथी तथा बच्चे; तथा
(ii) व्यक्ति के माता-पिता, भार्इ तथा बहन अथवा इनमें से कोर्इ, व्यक्ति पर पूर्णता अथवा मुख्य रूप से आश्रित।
यह भी नोट किया जा सकता है इस वाक्यांश के अंतर्गत छूट की राशि किसी भी स्थिति में ऐसी यात्रा के उद्देश्य के लिए किए गए वास्तविक व्यय की राशि से अधिक नहीं होगी।
5.3.2 मृत्य-सह-सेवानिवृत्ति अनुतोषिक अथवा अन्य कोर्इ अनुतोषिक धारा 10(10) के अंतर्गत कुल आय की गणना के समावेशन से निर्दिष्ट सीमा तक छूटयोग्य हैं। केंद्र सरकार, अथवा जैसी स्थिति हो, केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 अथवा संघ के सिविल सेवा के सदस्यों हेतु स्वीकार्य अन्य किसी समान योजना के तहत अथवा रक्षा से संबंधित पदाधिकारी अथवा संघ ( ऐसे सदस्य अथवा हितधारक जो कथित नियम के तहत नहीं आते) के तहत सिविल पद अथवा अखिल भारतीय सेवा के सदस्य अथवा राज्य की सिविल सेवा के सदस्य अथवा राज्य के तहत सविल सेवा हितधारक अथवा स्थानीय प्राधिकरण के कर्मचारी अथवा पेंशन कोड के अंतर्गत प्राप्त होने वाली सेवानिवृत्ति अनुतोषिक के किसी भुगतान अथवा रक्षा सेवा के सदस्यों पर लागू होने वाले विनियमन के संशोधित पेंशन नियमों के अंतर्गत प्राप्त कोर्इ मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति अनुतोषिक छूट योग्य हैं। उक्त निर्दिष्ट, सेवानिवृत्ति, समाप्ति आदि, को छोड़कर अनुतोषिक प्राप्तकर्ता मंडल द्वारा निर्धारित सीमा तक छूट प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में प्रभावी तिथि 24.05.2010 के अनुसार सीमा 10 लाख है [(अधिसूचना सं. 43/2010 एस.ओ. 1414(र्इ) एफ. सं. 200/33/2009-आर्इटीए-1 दिनांक 11 जून 2010)।
5.3.3 केंद्र सरकार अथवा संघ की सिविल सेवा के सदस्यों हेतु स्वीकार्य अन्य किसी समान योजना के तहत अथवा रक्षा से संबंधित पदाधिकारी अथवा संघ ( ऐसे सदस्य अथवा हितधारक जो कथित नियम के तहत नहीं आते) के तहत सिविल पद अथवा अखिल भारतीय सेवा के सदस्य अथवा रक्षा सेवा से संबंधित पदाधिकारी अथवा राज्य की सिविल सेवा के सदस्य अथवा राज्य के तहत सविल पदाधिकारी अथवा स्थानीय प्राधिकरण के कर्मचारी अथवा केंद्र, राज्य अथवा प्रादेशिक अधिनियम द्वारा स्थापित कॉर्पोरेशन सविल पेंशन कोड के अंतर्गत प्राप्त होने वाली अनुतोषिक के विनियम के किसी भुगतान से धारा 10(10क)(i) के अंतर्गत छूट पाने के हकदार होंगे। अन्य किसी नियोक्ता की योजना के अतर्गत प्राप्त पेंशन के विनियम के भुगतान के संबंधं में छूट धारा 10(10क)(ii) के अंतर्गत वहन की जाएगी। इसके अलावा धारा 10(23ककख) में संदर्भित पूंजी से पेंशन के विनिमय के भुगतान की स्थिति में छूट धारा 10(10क)(iii) के तहत मिलेगी।
5.3.4 व्यक्ति के सेवानिवृत्त होने, चाहे वृद्धावस्था की अयोग्या या चाहे अन्य कोर्इ कारण, के समय उसके द्वारा अर्जित अवकाश की अवधि के संबंध में केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार, अवकाश वेतन के समकक्ष वेतन, के कर्मचारी द्वारा प्राप्त कोर्इ भुगतान धारा 10(10कक)(i) के तहत छूटयोग्य होगा। अन्य कर्मचारियों की स्थिति में यह छूट दस माह की अधिकतम अवकाश के अनुसार वृद्धावस्था की अयोग्यता पर सेवानिवृत्ति के समय अवकाश के संबंध में मिलने वाला पैसे के संबंध के आधार पर निर्धारित की जाएगी। यह छूट उन कर्मचारियों के संबंध में जो 01.04.1998 के बाद सेवानिवृत्त हो चुके हैं, चाहे वृद्धावस्था के कारण अथवा अन्य किसी कारण से, भारत सरकार की अधिसूचना सं. एस.ओ. 588 (र्इ) दिनांक 31.05.2002 के अनुसार, रू. 3,00,000/-, निर्दिष्ट अधिकतम सीमा पर आगे लगाया जाएगा।
5.3.5 धारा 10(10ख) के तहत कामगार द्वारा प्राप्त होने वाला छंटनी मुआवजा कुछ शर्तों के अनुसार आय-कर के दायरे से बाहर है। छंटनी मुआवजे की अधिकतम सीमा औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25च(ख) के आधार आंकी गर्इ राशि अथवा केंद्र सरकार के आधिकारिक राजपत्र, जो भी कम हो, में निर्दिष्ट अधिसूचना द्वारा कम से कम 50,000/- तक है। यह सीमा उन स्थितियों में लागू नहीं होगी जहां मुआवजा किसी योजना, जो केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत की गर्इ हो और लागू होने वाली योजना तथा प्रासंगिक स्थितियों के अनुसार कामगार के उत्तरदायित्व को सुरक्षित रखने हेतु विशेष सुरक्षा की आवश्यकता हो, के तहत दिया जाना हो। ऐसे भुगतान की अधिकतम सीमा रू.5,00,000/- जहां मुआवजा 25.06.1999 की अधिसूचना सं. 10969 में निर्दिष्टानुसार 01.01.1997 को अथवा बाद में दिया हो।
5.3.6 धारा 10(10ग) के अंतर्गत, किसी योजना अथवा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी की स्थिति में स्वैच्छिक रूप से हटने के अनुसार अपनी सेवा की समाप्ति अथवा अपनी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के समय पर निम्नलिखित निकायों के कर्मचारियों द्वारा प्राप्त अथवा प्राप्तनीय (भले ही किश्तों में प्राप्त हुर्इ हो) कोर्इ राशि उस सीमा तक आयकर से मुक्त होगी जबतक ऐसी राशि रू. 5,00,000/- से अधिक नहीं होती।
क) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी;
ख) अन्य कोर्इ कंपनी;
ग) केंद्र, राज्य अथवा प्रांतीय अधिनियम के तहत स्थापित प्राधिकरण;
घ) स्थानीय प्राधिकरण;
ड) एक सहकारी संस्था;
च) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के तहत विश्वविद्यालय के तौर पर घोषित किए हुए संस्थान, केंद्र, राज्य अथवा प्रांतीय अधिनियम के तहत अथवा निगमित अथवा स्थापित विश्विद्यालय;
छ) प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम, 1961 की धारा 3 (छ) के तहत कोर्इ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान;
ज) आधिकारिक राजपत्र में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचितानुसार ऐसे प्रबंधन संस्थान, इस संबंध में निर्दिष्ट किया जाएगा।
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति सेवा के अंतर्गत प्राप्त छूट प्राप्त राशि केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार के कर्मचारियों तथा देश भर अथवा किसी राज्य अथवा राज्यों में महत्वपूर्ण पहचान रखने वाले अधिसूचित संस्थानों के कर्मचारियों को दी गर्इ है। यह भी ध्यान दिया जाए कि जहां यह छूट किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी कर्मचारी को स्वीकृत की गर्इ है उसके लिए अन्य निर्धारण वर्ष की स्वकृति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, यदि स्वैच्छिक् सेवानिर्वित अथवा वृद्धावस्था के कारण सेवानिवृत्त पर प्राप्त राशि के संबंध में किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 89 के तहत स्वीकृति किया गया है तो धारा 10(10ग) के अंतर्गत कोर्इ छूट नहीं दी जाएगी।
5.3.7 जीवन बीमा पॉलिसी के तहत कोर्इ भी प्राप्त होने वाली राशि, निम्नलिखित को छोडकर ऐसी पॉलिसी पर बोनस के रूप में आवंटित कुल राशि धारा 10(10घ) के अंतर्गत छूट योग्य होगी:
i) धारा 80घघ(3) अथवा धारा 80घघक(3) के तहत प्राप्त कोर्इ राशि; अथवा
ii) प्रमुख बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त कोर्इ राशि; अथवा
iii) 01.04.2003, किंतु 31.03.2012 को अथवा पूर्व, उस पॉलिसी के संबंध में जब पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी भी वर्ष के लिए देययोग्य प्रीमियम वास्तविक कुल बीमाकृत पूंजी का 20 प्रतिशत से अधिक, को अथवा पश्चात् जारी बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त कोर्इ राशि; अथवा
iv) 01.04.2012 को अथवा पूर्व, उस पॉलिसी के संबंध में जब पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी भी वर्ष के लिए देययोग्य प्रीमियम वास्तविक कुल बीमाकृत पूंजी का 20 प्रतिशत से अधिक; अथवा
v) धारा 80घघख में निर्दिष्टानुार बीमारी अथवा संक्रमण से पीड़ित अथवा धारा 80प के अनुसार विक्लांग व्यक्तियों अथवा गंभीर विक्लांग व्यक्ति की स्थिति में 01.042013 को अथवा पश्चात जारी बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त कुल राशि, उस पॉलिसी के संबंध में जब पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी भी वर्ष के लिए देययोग्य प्रीमियम वास्तविक कुल बीमाकृत पूंजी का 15 प्रतिशत से अधिक।
हालांकि व्यक्ति की मृत्यु पर उक्त (iii), (iv) तथा (v) में निर्दिष्ट ऐसी पॉलिसी के अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि।
5.3.8 किसी भी भविष्य निधि के भुगतान जिस पर भविष्य निधि अधिनियम, 1925 लागू होता है अथवा अन्य कोर्इ भविष्य निधि केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किया गया हो तथा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित हो, धारा 10(11) के अंतर्गत के तहत छूट प्राप्त करने के योग्य है।
5.3.9 अधिनियम की धारा 10 (13क) के अंतर्गत निर्धारिती द्वारा अधिकृत आवासीय निवास के संबंध में किराए (जो भी नाम दिया जाए) के भुगतान पर किए गए व्यय को पूरा करने के लिए नियोक्ता द्वारा निर्धारिती को स्वीकृत विशेषरूप से विशेष भत्ता निर्धारितानुसार आयकर से सीमा तक छूट योग्य हैं, ऐसे क्षेत्र और स्थान के संबंध में जो ऐसा आवास मौजूद है तथा अन्य प्रासंगिक विचारण। नियमों के नियम 2क के अनुसार छूट का परिमाण विशेष भत्तों पर किराये के भुगतान के व्यय को पूरा करने के लिए निम्नलिखित में से एक के अनुसार लागू होगा।
(क) प्रासंगिक अवधि, यानि जिसमें वित्त वर्ष के दौरान आवास अधिकृत किया गया था, के संबंध में निर्धारिती द्वारा प्राप्त ऐसे भत्तों की वास्तविक कीमत; अथवा
(ख) प्रासंगिक अवधि के लिए देय वेतन के दसवें भाग के अधिशेष में किराए के भुगतान पर वहन किया गया वास्तविक व्यय; अथवा
(i) ऐसे भवन जो बंबर्इ, कलकत्ता, दिल्ली अथवा मद्रास में स्थित हो, प्रासंगिक अवधि के लिए कर्मचारी द्वारा देय वेतन का 50 प्रतिशत; अथवा
(ii) ऐसा भवन जो अन्य किसी स्थान पर स्थित हो, प्रासंगिक अवधि के लिए कर्मचारी द्वारा देय वेतन का 40 प्रतिशत।
इस उद्देश्य के लिए "वेतन" में मंहगार्इ भत्ता, यदि रोजगार की शर्ते उपलब्ध हों, लेकिन सभी अन्य भत्तों तथा रियायतों को छोडकर।
यह ध्यान दिया जाए कि आवासीय निवास के संबंध में किराए के भुगतान पर वहन किया गया केवल वास्तविक व्यय निर्धारिती द्वारा अधिकृत किया जाएगा बशर्ते नियम 2क में निर्धारित सीमा आयकर से छूट योग्य हो। इसी प्रकार, कर्मचारी, जिस घर/फ्लैट में वह निवास करता हो, को स्वीकृत होने वाला घर का किराया आयकर की छूट से बाहर होगा। संवितरण प्राधिकरण को इस संबंध में स्वयं कर्मचारी की कुल आय से भवन किराया भत्ता अथवा उसके किसी भाग पर भत्ते को छोड़कर किराए के वास्तविक भुगतान के प्रमाण की प्रस्तुति पर आग्रह को सुनिश्चित करना होगा।
यद्यपि किराए के भुगतान पर वास्तविक व्यय की वसूली धारा 10(13क) के अंतर्गत कटौती के दावे के लिए पूर्व-निर्धारित है। प्रशासनिक उपाय के तौर पर यह निर्णय लिया गया है कि वेतन पाने वाले कमचारी जिनको 3000/- प्रति माह तक भवन किराया भत्ता मिलता है वह किराया पावती प्रस्तुतीकरण से छूट पाने के हकदार होंगे। हालांकि यह हो सकता है कि यह रियायत स्रोतों से कर की कटौती के उद्देश्य के लिए ही है तथा कर्मचारी के इस दैनिक मूल्यांकन में आंकलन अधिकारी ऐसी पूछताछ से मुक्त हो सकता है जो भी वह समझे कि कर्मचारी किराये के भुगतान पर वास्तविक व्यय किया हुआ है।
आगे, यदि कर्मचारी द्वारा चुकाए जाने वाला किराया रू. 1,00,000 प्रति वर्ष हो तो उस कर्मचारी के लिए नियोक्ता को घर के स्वामी के पैन को रिपोर्ट करना अनिवार्य है। यदि घर का स्वामी के पास पैन नहीं है तो नाम व पते सहित घर के मालिक द्वारा घोषणापत्र कर्मचारी द्वारा भरा जाएगा।
5.3.10 धारा 10(14) निम्नलिखित भत्तों के लिए छूट प्रदान करता है
(i) नियम 2खख के अंतर्गत निर्धारित अपने कर्त्तव्यों के निवर्हन के दौरान किए गए पूर्ण, आवश्यक तथा विशेष को पूरा करने के लिए कर्मचारी को कुछ विशेष भत्ते अथवा लाभ मिल सकते हैं बशर्तें इस उद्देश्य के लिए वास्तविक व्यय किया गया हो।
(ii) कर्मचारी को स्वीकृत किया गया कोर्इ भत्ता चाहे तैनाती वाले स्थान पर अपनी व्यक्गित खर्चों को पूरा करने के लिए हो अथवा उसके स्थानीय स्थल पर, आवासीय स्थान के बढ़ते शुल्क के लिए मुआवजा दिया जाएगा जो कि निर्धारितानुसार तथा निर्धारित किया जा सकता है।
हालांकि, उक्त (ii) में संदर्भित भत्ते व्यक्तिगत प्रकार के भत्तों में शामिल नहीं हैं जिसे उसके कार्यालय से संबंधित विशेष प्रकार के कार्यों को पूरा करने के लिए पारिश्रमिक अथवा क्षतिपूर्ति पूरी करने के लिए स्वीकृत किया जाए जब तक ऐसे भत्ते उसके नियुक्ति स्थल अथवा आवास से संबंधित हों।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने अधिसूचना सं. एसओ 617(र्इ) दिनांक 7 जुलार्इ, 1995 (एफ. सं. 142/9/95-टीपीएल) के मार्फत धारा 10(14) (ii) के उद्देश्य के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं जिसे अधिसूचना एसओ सं. 403 (र्इ) दिनांक 24.04.2000(एफ. सं. 142/34/99-टीपीएल) के मार्फत संशोधित किया गया है। कर्मचारी को अपने निवास स्थल तथा नौकरी वाले स्थल के बीच के परिवहन के उद्देश्य से किए गए खर्चों को पूरा करने के लिए स्वीकृत किया गया परिवहन शुल्क अधिसूचना एस.ओ. 395(र्इ) दिनांक 13.05.98 के मार्फत रू. 800 प्रतिमाह अथवा 1600 प्रतिमाह (नेत्रहीन व्यक्ति के लिए) तक की सीमा तक छूट प्राप्त है।
5.3.11 अधिनियम की धारा 10(15)(iv)(i) के अंतर्गत केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, सेवानिवृत्त को छोड़कर, केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में ऐसी योजना बनाए जाने अथवा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचितानुसार, के कर्मचारी द्वारा किया गया जमा पर सरकार द्वारा दिया जाने वाला ब्याज आयकर से छूट प्राप्त है। अधिसूचना सं. एफ.2/14/89-एनएस-II दिनांक 7.6.89, अधिसूचना सं. एफ.2/14/89-एनएस-II दिनांक 12.10.89 द्वारा संशोधन के अनुसार, केंद्र सरकार ने कथित वाक्यांश के उद्देश्य के लिए सेवानिवृत्त होने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए जमा योजना के नाम से योजना अधिसूचित की है।
5.3.12 शिक्षा पर होने वाले व्यय को पूरा करने के लिए स्वीकृत किसी भी प्रकार की छात्रवृत्ति अधिसूचना की धारा 10(16) के प्रावधानों के अनुसार कुल आय में शामिल नहीं की जाएगी।
5.3.13 धारा 10(18) किसी व्यक्ति जो केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार का कर्मचारी हो तथा "परम वीर चक्र" अथवा "महावीर चक्र" अथवा "वीर चक्र" अथवा केंद्र सरकार द्वारा विशेश रूप से निर्दिष्ट ऐसे अन्य वीरता पुरस्कार, द्वारा पेंशन के रूप में प्राप्त किसी प्रकार का वेतन की छूट प्रदान करता है। ऐसे किसी व्यक्ति के परिवार के किसी सदस्य द्वारा प्राप्त पारिवारिक पेंशन अधिसूचना सं. एस.ओ. 1948(र्इ) दिनांक 24.11.2000 तथा 81(र्इ) दिनांक 29.01.2001 के तहत छूट प्राप्त है जिसे परिशिष्ट VII व IX के तहत संलग्न किया गया है। इस उद्देश्य के लिए "पारिवार" अधिनियम की धारा 10(5) में निर्दिष्ट अर्थ के अनुसार है।
ऐसे पुरस्कार को प्राप्त करने की स्थिति में डीडीओ कर में कटौती न करने का विकल्प दे सकता है बशर्ते दावों के मूल्यांकन के बारे में उनको संतुष्ट किया जाए।
5.3.14 अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत कर से छूट निम्न संबंधों में भी उपलब्ध होगी :-
(क) नियोक्ता द्वारा अनुरक्षित किसी अस्पताल में किसी कर्मचारी अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य को किसी उपलब्ध करार्इ जाने वाली चिकित्सा सुविधा पर खर्च होने वाली राशि;
(ख) कर्मचारी के स्वयं के चिकित्सा इलाज अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य द्वारा वास्तविक रूप से व्यय किए गए खर्चे के संबंध में नियोक्ता द्वारा भुगतान की गर्इ कोर्इ राशि;
(i) अपने कर्मचारी के चिकित्सीय इलाज के उद्देश्य के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोर्इ अन्य अस्पताल अथवा सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकरण द्वारा अनुरक्षित कोर्इ अन्य अस्पताल;
(ii) नियम के नियम 3 (क)(1) में निर्धारित दिशानिर्देशों के संबंध में मुख्य आयुक्त द्वारा मान्यता प्राप्त किसी अस्पताल के नियम के नियम 3क(2) में उपलब्धतानुसार निर्धारत बीमारी अथवा रोग के संबंध में।
(ग) कर्मचारी (केंद्र सरकार अथवा बीमा नियामक तथा विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित कोर्इ योजना) के लिए लिए गए चिकित्सा बीमा के संबंध में नियोक्ता द्वारा दिया गया प्रीमियम अथवा कर्मचारी जिसने अपने लिए अथवा अपने परिवार के सदस्य (केंद्र सरकार अथवा बीमा नियामक तथा विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित कोर्इ योजना) के लिए चिकित्सा बीमा लिया हो, को बीमा प्रीमियम की प्रतिपूर्ति
(घ) किसी चिकित्सक द्वारा अपने अथवा अपने परिवार के किसी सदस्य के चिकित्सीय इलाज कराने के लिए कर्मचारी द्वारा व्यय किए गए राशि की अदायगी, नियोक्ता द्वारा, जो वर्ष में कुल रू. 15,000/- के अधिक न हो।
(ड) विदेश में चिक्तिसीय इलाज के संबंध में कर्मचारी अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य के रहने तथा इलाज अथवा ऐसे इलाज के लिए मरीज की सेवा करने वाली एक परिचारक की रहने के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा स्वीकृत सीमा हेतु रियायत इसमें शामिल नहीं होगी। यह ध्यान दिया जा सकता है कि मरीज/परिचारिका द्वारा विदेश यात्रा पर किया गया व्यय केवल तब ही रियायत से बाहर होगा जब कर्मचारी की सकल कुल आय, जैसी कथित व्यय शामिल करने से पूर्व आंकी जाती है, रू. 2 लाख से अधिक न हो।
चिकित्सालय अथवा क्लिीनिक अथवा नर्सिग होम सहित अस्पताल में चिकित्सीय इलाज पर व्यय किया गया खर्च की छूट का लाभ उठाने के लिए तथा व्यक्ति से संबंध रखने वाला परिवार अर्थात् व्यक्ति का जीवनसाथी तथा बच्चे। परिवार में व्यक्ति के माता-पिता भार्इ तथा बहनें भी शामिल हैं यदि वह पूर्ण अथवा मुख्यत: व्यक्ति पर आश्रित हैं।
यह निर्दिष्ट करना उचित होगा कि अधिनियम की धारा 10(13क), 10(5), 10(14), 17 आदि के अंतर्गत विशेष रूप से मुक्त लाभ मुक्त रहेंगे। यह शामिल लाभ जैसे गृह किराया लाभ, अवकाश यात्रा रियायत, यात्रा तथा स्थानांतरण पर यात्रा व्यय भत्ता, निर्धारितानुसार यात्रा व्यय को पूरा करने के लिए दैनिक भत्ता, चिकित्सा सुविधा
5.3.15 इस संबंध में यह ध्यान दिया जाना है कि नियम 2खख के साथ पठित धारा 10(14) के अनुसार यात्रा पर अथवा स्थानांतरण पर दौरे की लागत को पूरा करने के लिए स्वीकृत कोर्इ भत्ता पैकिंग तथा परिवहन के संबंध में किसी दी गर्इ राशि शामिल है तथा ऐसे स्थानांतरण पर व्यक्तिगत प्रभाव के स्थानांतरण छूट प्राप्त होगा। साथ ही कोर्इ भत्ता, चाहे उसके कर्त्तव्य के सामान्य स्थान से अनुपस्थिति के कारण कर्मचारी द्वारा किए गए सामान्य दैनिक शुल्कों को पूरा करने के लिए स्थानांतरण के संबंध में यात्रा की अवधि के लिए स्वीकृत, मुक्त होगा।
5.4 वेतन से आय द्वारा अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत कटौतियां
5.4.1 मनोरंजन भत्ता [धारा 16(ii)] :
निर्धारिती जो सरकार से वेतन प्राप्त करता हो, को नियोक्ता द्वारा विशेष रूप से स्वीकृत मनोरंजन के रूप में किसी प्रकार के भत्ते के संबंध में धारा 16(ii) एक कटौती स्वीकार्य है जो उसके वेतन को एक/पांच भाग ( किसी प्रकार के भत्ते, लाभ अथवा अन्य रियायत को छोडकर) अथवा पांच हजार जो भी कम हो, होगी। गैर सरकारी कर्मचारी के संबंध में किसी प्रकार का कोर्इ मंनोरंजन भत्ते में कोर्इ कटौती नहीं होगी।
5.4.2 नियुक्ति पर कर [धारा 16(iii)]
भारतीय संविधान, अन्य किसी कानून के तहत लागू, की दफा 276(2) के अर्थानुसार रोजगार (वृत्तिक कर) पर कर "वेतन' विषय के अंतर्गत आय की गणना में कटौतीनुसार स्वीकृत होगी।
यह स्पष्ट किया जाता हैं कि सकल वेतन आय, जिसे वित्तीय वर्ष 2004-05 तक स्वीकृत किया गया था, से "सामान्य कटौती" वित्तीय वर्ष 2005-06 से आगे स्वीकार्य नहीं होगी।
5.5 अधिनियम के अध्याय VI-क के अंतर्गत कटौतियां
कर्मचारी के करयोग्य वेतन की गणना के लिए अधिनियम के अध्याय VI-क के अंतर्गत निम्नलिखित कटौतियां उसकी सकल कुल आय से स्वीकृत होगी।
5.5.1 जीवन बीमा प्रीमियम, स्थगित वार्षिकी, भविष्य निधि हेतु अंशदान, कुछ इक्विटी शेयर अथवा डिबेंचर आदि हेतु अंशदान (धारा 80ग)
क. धारा 80ग, कर्मचारी को निम्नलिखित योजना में वर्तमान वित्तीय वर्ष में भुगतान अथवा जमा की पूर्ण राशि हेतु कटौती हक देती हैं, बशर्ते सीमा रू. 1,50,000/- हो।
(1) व्यक्ति, जीवनसाथी अथवा किसी बच्चे, जीवन बीमा अमल में लाने अथवा रखने के लिए बीमा प्रीमियम का भुगतान
(2) आस्थगिती वार्षिक, के लिए अनुबंध को अमल में लाने अथवा रखने के लिए किया गया कोर्इ भुगतान व्यक्ति, व्यक्ति का जीवनसाथी अथवा कोर्इ बच्चा के जीवन पर नीचे निर्दिष्ट मद (7) हेतु संदर्भित किए गए वार्षिकी योजना हेतु नहीं होगा बशर्ते उपलब्ध कराया जाए कि वार्षिकी के भुगतान के स्थान पर नकद भुगतान को प्राप्त करने के विकल्प को बीमाकृत व्यक्ति द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रावधानों में शामिल नहीं किया गया है।
(3) किसी व्यक्ति को सरकार द्वारा अथवा की ओर से देययोग्य वेतन से किसी प्रकार की कुल कटौती अस्थिगित वार्षिकी अथवा उसके जीवनसाथी अथवा बच्चों के प्रावधानों के गठन हेतु को प्राप्त कराने के उद्देश्य से उसकी सेवा की शर्तों के अनुसार कुल काटी गर्इ राशि वेतन के 1/5 भाग से अधिक नहीं होनी चाहिए।
(4) कोर्इ भी किया गया अंशदान:
(क) व्यक्ति द्वारा किसी भविष्य निधि, जिसके लिए भविष्य निधि अधिनियम, 1925 लागू होता हो, के लिए;
(ख) केंद्र सरकार द्वारा स्थापित कोर्इ भविष्य निधि तथा अधिकारिक राजपत्र में इस संबध में अधिसूचित, जहां ऐसे अंशदान व्यक्ति अथवा जीवनसाथी अथवा बच्चे के नाम पर खाते में किया गया हो;
(केंद्र सरकार ने जब से अधिसूचना एस.ओ. सं. 1559(र्इ) दिनांक 3.11.2005 के मार्फत सार्वजनिक भविष्य निधि में अधिसूचित किया है);
(ग) कर्मचारी द्वारा अनुमोदित भविष्य निधि हेतु;
(घ) कर्मचारी द्वारा अनुमोदित सेवानिवृत्ति कोष;
यह ध्यान दिया जा सकता कि किसी कोष हेतु "अंशदान" ऋण अथवा उधार के भुगतान की रकम में शामिल नहीं होगी।
(5) अंशदान के तौर पर वर्ष के दौरान दिया गया अथवा जमा कोर्इ राशि :-
(क) बालिका सहित उस कर्मचारी की बालिका अथवा कर्मचारी के नाम पर जिसके लिए कर्मचारी इस संबंध में निर्दिष्ट आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचितानुसार केंद्र सरकार की ऐसी जमा योजना अथवा केंद्र सरकार की ऐसी प्रतिभूति हेतु कानूनी अभिभावक हो;
[केंद्र सरकार ने तब से अधिसूचना जीएसआर सं. 863(ड़)दिनांक 02.12.2014 के मार्फत 'सुकन्या समृद्धि खाता' योजना को अधिसूचित किया हो]
(ख) इस संबंध में निर्दिष्ट आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचितानुसार सरकार द्वारा सरकारी बचत प्रमाणपत्र अधिनियम, 1959 की धारा 2(ग) में परिभाषित ऐसे बचत पत्र हेतु
[केंद्र सरकार ने तब से अधिसूचना सं. एस.ओ. सं. 1560(र्इ) दिनांक 3.11.2005 के मार्फत राष्ट्रीय बचत पत्र (VIII अंक) तथा अधिसूचना जी.एस.आर. 848(र्इ) दिनांक 29 नवंबर, 2011 के मार्फत राष्ट्रीय बचत पत्र (IX अंक) को अधिसूचित किया है, राष्ट्रीय बचत पत्र (IX अंक) नियम, 2011 जी.एस.आर 868 (र्इ) दिनांक 7 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित कर, संशोधन अधिसूचना सं. जीएसआर 319(र्इ), दिनांक 25.4.2012 को प्रबलित बना बचत पत्र एफ सं. 1-13/2011-एनएस-II की श्रेणी के तौर पर राष्ट्रीय बचत पत्र IX अंक को निर्दिष्ट करते हुए]
(6) किसी व्यक्ति, स्वयं के लिए, माता-पिता अथवा किसी बच्चे की स्थिति में अंशदान के रूप में दी गर्इ कोर्इ राशि
क. भारतीय यूनिट ट्रस्ट के यूनिट लिंक्ड बीमा योजना, 1971 के योगदान पर;
ख. केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचितानुसार तथा धारा 10 (23घ) में संदर्भित जीवन बीमा निगम के म्चूयल फंड के यूनिट लिंक्ड बीमा योजना में किसी योगदान पर
(केंद्र सरकार ने तब से अधिसूचना एस.ओ सं. 1561 (र्इ) दिनांक 3.11.2005 के मार्फत एलआर्इसी म्यूंयल फंड के यूनिट लिंक्ड बीमा योजना (धनरक्षा, 1989 के तौर पर प्रसिद्ध) को अधिसूचित किया है।
(7) आधिकारिक राजपत्र, निर्दिष्ट में अधिसूचना द्वारा केंद्र सरकार की अन्य कोर्इ बीमा कंपनी अथवा भारतीय जीवन बीमा निगम की ऐसी वार्षिक योजना के लिए अनुबंध को अमल में लाने अथवा रखने के लिए किया गया किसी प्रकार का अंशदान;
(केंद्र सरकार ने तब से अधिसूचना एस.ओ. सं. 1562 (र्इ) दिनांक 3.11.2005 के मार्फत न्यू जीवन धारा, न्यू जीवन धारा-I, न्यू जीवन अक्षय, न्यू जीवन अक्षय-I तथा न्यू जीवन अक्षय- II तथा अधिसूचना एस.ओ. सं. 847 (र्इ) दिनांक 1.6.2006 के मार्फत जीवन अक्षय- III)
(8) इस संबंध में संदर्भित आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचानुसार केंद्र सरकार की किसी योजना के अनुसार किसी बनार्इ गर्इ योजना के अंतर्गत भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम व निरसन को स्थानांतरित) को संदर्भ करने हेतु निर्दिष्ट कंपनी अथवा प्रबंधक अथवा धारा 10(23डी) की म्यूचुयल फंड की किसी इकार्इ को दिया अंशदान;
(केंद्र सरकार ने तब अधिसूचना एस.ओ. 1563(र्इ) दिनांक 3.11.2005 के मार्फत इस उद्देश्य के लिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, 2005 को अधिसूचित किया है।
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, 1992 अथवा इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम 1998 के अनुसार बनी हुर्इ योजना में 1.4.2006 के बाद किया गया निवेश धारा 80ग के अंतर्गत कटौती के लिए अर्हता प्राप्त है।
(9) इस संबंध में संदर्भित आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचानुसार केंद्र सरकार के अनुसार भारतीय यूनिट ट्रस्ट( उपक्रम व निरसन को स्थानांतरित) अधिनियम, 2002, में परिभाषित निर्दिष्ट कंपनी अथवा प्रबंधक अथवा धारा 10(23घ) के संदर्भन हेतु किसी म्यूचुयल फंड के स्थापन पेंशन कोष किसी व्यक्ति द्वारा दिया अंशदान;
(केंद्र सरकार ने तब अधिसूचना एस.ओ. 1563(र्इ) दिनांक 3.11.2005 के मार्फत इस उद्देश्य के लिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, 2005 को अधिसूचित किया है।
(10) इस संबंध में संदर्भित आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचानुसार केंद्र सरकार के अनुसार भारतीय नेशनल बैंक द्वारा स्थापित ऐसा कोर्इ पेंशन कोष हेतु कोर्इ अंशदान करने अथवा ऐसी कोर्इ जमा योजना ऐसे किसी अंशदान को करने के लिए;
(11) (क) आवासीय उद्देश्य के लिए भारत में घरों की खरीद अथवा निर्माण के लिए दीर्घ-कालीन ऋण उपलब्ध कराने में संलग्न (ख) किसी भारतीय कानून द्वारा अथवा के अंतर्गत स्थापित कोर्इ प्राधिकरण जो भवन अथवा अकोमोडेशन अथवा शहरों, कस्बों तथा गांवों, अथवा दोनों के लिए, की योजना, विकास अथवा शहरों उन्नतीकरण की आवश्यकताओं को संतुष्ट करने में लगी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, इस उद्देश्य हेतु आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा केंद्र सरकार की ओर से ऐसी किसी जामा योजना में किसी प्रकार का अंशदान
(केंद्र सरकार ने तब धारा 80ग(2)(xvi)(क) के उद्देश्य हेतु अधिसूचना एस.ओ. 37(र्इ) दिनांक 11.01.2007 के मार्फत एचयूडीसीओ की सार्वजनिक जमा योजना को अधिसूचित किया है)
(12) आवासीय भवन संपत्ति, आय जो "आवासीय संपत्ति से आय" विषय के अंतर्गत कर योग्य हैं, के क्रय अथवा निर्माण के लिए निर्धारिती द्वारा दी गर्इ कोर्इ रकम (अथवा जो यदि निर्धारिती के स्वयं का भवन प्रयोग नहीं होता है, इस विषय के अंतर्गत कर योग्यनीय हैं) जहां ऐसा भुगतान किसी विकास प्राधिकरण, हाउसिंग बोर्ड आदि की किसी स्व: वित्तपोषण के अंतर्गत देय राशि की किसी भाग अथवा किसी किश्त के रूप में किया गया भुगतान, के क्रय अथवा निर्माण के उद्देश्य के लिए निर्धारिती द्वारा भुगतित कोर्इ रकम
कटौती भारत में भवन निर्माण अथवा क्रय के लिए दीर्घकालीन अवधि का ऋण उपलब्ध के व्यापार में संलग्न संस्थानों की कुछ अन्य श्रेणियां अथवा राष्ट्रीय आवास बैंक, अथवा जीवन बीमा निगम अथवा कोर्इ बैंक अथवा सरकार से निर्धारिती द्वारा उधार लिए गए ऋण के लौटाने के संबंध में भी स्वीकार्य होगी। नियोक्ता द्वारा उधार लिया गया ऋण लौटाने की स्थिति में यह भी कवर होगा यदि नियोक्ता केंद्र अथवा राज्य अधिनियम के अंतर्गत स्थापित कोर्इ अन्य निकाय अथवा कार्पोरेट अथवा बोर्ड अथवा प्राधिकरण अथवा सहकारी संस्था अथवा स्थानीय प्राधिकरण अथवा ऐसे विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय अथवा कानून द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हो।
स्थानांतरण के लिए किए गए स्टांप ड्यूटी, पंजीकरण शुल्क तथा अन्य खर्चे भी शामिल किए जाऐंगे। भवन संपत्ति की लागत के लिए भुगतान में प्रवेश शुल्क अथवा शेयर पूंजी प्रारंभिक जमा अथवा अन्य किसी वृद्धि अथवा संशोधन शुल्क अथवा भवन संपत्ति जो संबंधित प्राधिकारी द्वारा समाप्ति प्रमाणपत्र के निगर्मन पर किया गया अथवा निर्धारिती द्वारा भवन के अधिपत्य अथवा बाहर निकलने पर, का नवीकरण अथवा मरम्मत का खर्चा शामिल नहीं होगा। अधिनियम की धारा 24 के प्रावधानों के अंतर्गत स्वीकार्य कटौती के संबंध में किसी प्रकार के व्यय के लिए भुगतान भवन संपत्ति के निर्माण अथवा क्रय के लिए भुगतान में शामिल नहीं होगी।
ऐसी अवस्था में भवन संपत्ति जिसके लिए कटौती इन प्रावधानों के लिए स्वीकार्य की गर्इ है धारा 80ग(2)(xviii) में निर्दिष्ट किसी राशि अथवा धन वापसी के रूप में उसके द्वारा अधिपत्य करने अथवा वापस करने वाले वित्तीय वर्ष के अंत से पांच साल की समाप्ति तिथि से पूर्व किसी भी समय करदाता द्वारा स्थानांतरित किया जा सकता है। इन प्रावधानों के अंतर्गत किसी प्रकार की कटौती ऐसे पूर्व वर्षों में दी गर्इ कुल राशि के संबंध में की जाएगी जब स्थानांरण किया गया तथा पूर्व के वर्षों की स्वीकृत आय की कुल कटौती निर्धारिती की पिछले वर्षों की कुल आय के कर के अनुसार की जाएगी।
(13) शिक्षण शुल्क, चाहे प्रवेश के दौरान अथवा उसके बाद भारत में विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय अथवा अन्य शिक्षण संस्थानों को कर्मचारी के किन्हीं दो बच्चों की पूर्णकालीन अवधि शिक्षा के उद्देश्य हेतु
पूर्णकालीन शिक्षा में विद्यार्थी जिसने कथित पाठ्यक्रम के लिए पूर्णकालीन समय के लिए पंजीकरण कराया है, के लिए किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय अथवा अन्य किसी शिक्षण संस्थान द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक पाठ्यक्रम शामिल हैं।
यह स्पष्ट किया जाता है कि शिक्षण शुल्क के तौर पर स्वीकार्य राशि में विकास राशि अथवा चंदा अथवा प्रति व्यक्ति शुल्क अथवा समान प्रकार के राशि के भुगतान को छोड़कर भारत में किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय अथवा अन्य शिक्षण संस्थान को किसी भी प्रकार का भुगतान शामिल होगा।
(14) बोर्ड अथवा किसी सार्वजनिक वित्त संस्थान द्वारा अनुमोदित सार्वजनिक कंपनी द्वारा दी गर्इ किसी निर्वाच्य पूंजी का इक्विटी शेयर अथवा ऋणपत्र हेतु अंशदान।
(15) बोर्ड द्वारा अनुमोदित तथा धारा 10 के वाक्यांश (23घ) हेतु सदंर्भित किसी म्युचूयल फंड की किसी श्रेणी हेतु अंशदान, यदि ऐसी श्रेणी के अंशदान की राशि किसी कंपनी की पूंजी के निर्वाच्य निगर्मन में अंशदान हों।
(16) अनुसूचित बैंक के साथ कम से कम पांच वर्षों की अवधि के लिए सावधि जमा हेतु मियादी जमा के तौर पर निवेश, इस उद्देश्य हेतु आधिकारिक राजपत्र में केंद्र सरकार द्वारा निर्मित तथा अधिसूचितानुसार
(केंद्र सरकार ने अधिसूचना एस.ओ. सं. 1220(र्इ) दिनांक 28.7.2006 के मार्फत इस उद्देश्य हेतु बैंक अवधि जमा योजना, 2006 को अधिसूचित किया है)
(17) इस संबध में आधिकारिक राजपत्र में ऐसी अधिसूचना द्वारा केंद्र सरकार की ओर से कृषि तथा ग्रामीण विकास हेतु राष्ट्रीय बैंक द्वारा जारी ऐसे बांड हेतु अंशदान
(18) वरिष्ठ नागरिक बचत योजना नियम, 2004 के अंतर्गत खाते में किसी प्रकार का निवेश।
(19) डाक घर समय अवधि नियम, 1981 के अंतर्गत खाते में पाच वर्षों की अवधि जमा हेतु किसी प्रकार का अंशदान
ख. धारा 80ग(3) व 80ग(3क) निर्दिष्ट करती है कि किसी प्रीमियम की अस्थगित वार्षिकी राशि अथवा अन्य किसी किए गए भुगतान के अनुबंध को छोड़कर बीमा पॉलिसी की स्थिति में निम्न तक सीमित होगा:
| 1 अप्रैल 2012 से पूर्व जारी पॉलिसी | वास्तविक पूंजी निश्चित राशि का 20 प्रतिशत |
| 1 अप्रैल 2012 को अथवा के बाद जारी पॉलिसी | वास्तविक पूंजी निश्चित राशि का 10 प्रतिशत |
| अप्रैल 2013 को अथवा के बाद जारी पॉलिसी * - धारा 80प के अनुसार विक्लांग व्यक्तियों अथवा गंभीर विक्लांगता अथवा धारा 80डीडीबी में निर्दिष्टानुसार बीमारी अथवा रोग से पीड़ितों की स्थिति में | वास्तविक पूंजी निश्चित राशि का 15 प्रतिशत |
* वित्त अधिनियम 2013 द्वारा प्रारंभ
जीवन बीमा पॉलिसी के संबंध में वास्तविक पूंजी सुनिश्चित राशि का अर्थ नीति की शर्तों के दौरान किसी भी समय बीमित घटना के होने पर पॉलिसी के अंतर्गत न्यूनतम बीमित राशि है, निम्न पर विचार नहीं किया जाएगा-
i. लौटाने के लिए स्वीकृत किसी प्रीमियम की राशि, अथवा
ii. वास्तविक रूप से बीमित राशि के अतिरिक्त बोनस अथवा अन्यथा के रूप में कोर्इ लाभ जिसे किसी व्यक्ति द्वारा नीति के अंतर्गत प्राप्त किया जा सकता है।
5.5.2 कुछ पेंशन कोष के अंशदाने के संबंध में कटौती (धारा 80गगग)
धारा 80गगग धारा 10(23ककख) में संदर्भित कोष से प्राप्त होने वाली पेंशन के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम अथवा अन्य किसी बीमा कंपनी के वार्षिकी योजना हेतु अनुबंध को लागू करने अथवा रखने के लिए कर हेतु कटौतीयोग्य आय से भुगतान अथवा जमा करने के लिए कर्मचारी कटौती का अधिकार देती है। हालांकि, कटौती कर्मचारी के खाते, यदि हो तो, में ब्याज अथवा उपार्जित बोनस अथवा जमा को छोड़कर की जाएगी यदि राशि रू. 1,50,000 से अधिक न हो।
हालांकि यदि कोर्इ राशि उक्त सदर्भित राशि में कर्मचारी के पूंजी हेतु बकाया है तो कटौती उक्तानुसार स्वीकृत की जाएगी तथा कर्मचारी अथवा उसका मनोनीत व्यक्ति निम्न कारणों की वजह से इस खाते में आने वाले ब्याज अथवा उपार्जित बोनस अथवा पूंजी के साथ इस राशि को प्राप्त करेगा।
(i) वार्षिकी योजना की समाप्ति चाहे पूरी हो या कुछ भाग
(ii) वार्षिकी योजना से प्राप्त पेंशन
वित्त वर्ष के दौरान प्राप्त होने वाली राशि उस वित्त वर्ष के लिए कर्मचारी अथवा उसके मनोनीत व्यक्ति की आय से उसी प्रकार कर वसूला जाएगा।
जहां कर्मचारी द्वारा किसी राशि का भुगतान अथवा जमा करार्इ जाती है तो इस धारा के उद्देश्य हेतु खाते में शामिल की जाती हैं, , ऐसी राशि से संबंधित कटौती धारा 80ग के अंतर्गत स्वीकृत नहीं की जाएगी।
5.5.3 केंद्र सरकार की पेंशन योजना के अंशदान के संबंध में कटौती (धारा 80गगघ) :
धारा 80गगघ (1) कर्मचारी, 01.01.2004 को अथवा के पश्चात अन्य नियोक्ता द्वारा अथवा केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति होने के नाते अथवा व्यक्ति के तौर पर अन्य को कोर्इ निर्धारिती, अधिसूचना एफ. एन. 5/7/2003-र्इसीबीएंडपीआर दिनांक 22.12.2003 (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली - एनपीएस) द्वारा अथवा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित, के मार्फत अधिसूचितानुसार पेंशन के अंतर्गत कर हेतु प्रभारणीय आय का देय राशि अथवा जमा से कटौती की जाएगी। बहरहाल, कटौती कर्मचारी के वेतन (मंहगार्इ भत्ते को मिलाकर लेकिन अन्य सभी भत्तों और रियायतों को छोड़कर) के 10 प्रतिशत की समान राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए।
धारा 80गगघ(1ख) के अनुसार, 80गगघ(1) में संदर्भित निर्धारिती को अपनी आय की गणना में कटौती की स्वीकृति होगी, अधिसूचित पेंशन योजना के अंतर्गत अपने खाते में दी अथवा जमा पूर्ण राशि अथवा केंद्र सरकार द्वारा जिसे निर्धारित किया जा सकता हैं, जो रू. 50,000 से अधिक नहीं होगी। रू. 50,000 की कटौती स्वीकृत होगी चाहे कटौती उप-धारा (1) के अंतर्गत हो अथवा नहीं। हालांकि इस राशि को धारा 80गगघ की दोनो उप-धारा (1) तथा उप-धारा (1ख) के अंतर्गत दावा नहीं किया जा सकता।
धारा 80गगघ(2) के अनुसार,जहां कथित पेंशन योजना में किसी प्रकार का अंशदान केंद्र सरकार अथवा अन्य किसी नियेाक्ता द्वारा किया जाता हैं तो कर्मचारी को उसके पिछले वर्ष के वेतन की 10 प्रतिशत तक की सीमा के अनुसार केंद्र सरकार अथवा अन्य किसी नियोक्ता द्वारा पूर्ण राशि के कुल वेतन से कटौती की स्वीकृति दी जाएगीं।
यदि कोर्इ राशि उक्त संदर्भित पेंशन योजना में कर्मचारी की पूंजीे के समक्ष बकाया है तो कटौती उक्त संदर्भ के अनुसार स्वीकृत की जाएगी तथा कर्मचारी अथवा उसका मनोनीत सदस्य निम्न कारण की वजह से उस पर उपार्जित राशि सहित इस राशि को प्राप्त करेगा।
(i) पेंशन योजना की समाप्ति अथवा बाहर निकलने की स्थिति में अथवा
(ii) वार्षिकी योजना की खरीद द्वारा प्राप्त पेंशन तथा ऐसी समाप्ति अथवा बाहर निकलने की स्थिति का चुनाव करता है
तो वित्त वर्ष के दौरान प्राप्त ऐसी राशि उस वित्त वर्ष के लिए कर्मचारी की आय अथवा उसके नामांकित व्यक्ति व्यक्ति की आय होगी तथा तद्नुसार कर हेतु वसूल होगी।
जहां कर्मचारी द्वारा भुगतान अथवा जमा करार्इ किसी राशि का इस धारा के उद्देश्य हेतु खाते में शामिल की जाती है, तो ऐसी राशि से संबंधित कटौती धारा 80ग के अंतर्गत स्वीकृत नहीं की जाएगीं।
आगे यह निर्दिष्ट किया जाता हैं कि प्रभावी तिथि 01.04.2009 से नर्इ पेंशन योजना से कर्मचारी द्वारा प्राप्त कोर्इ राशि पिछले वर्ष में प्राप्त न किए गए के तौर पर समझी जाएगी यदि ऐसी राशि उसी पिछले वर्ष में वार्षिकी योजना की खरीद के लिए प्रयोग होती है।
इस बात पर महत्व दिया जाता हैं कि धारा 80गगड़ के अनुसार धारा 80ग, 80गगग तथा धारा 80गगघ(1) के अंतर्गत कटौती की कुल राशि रू. 1,50,000/- से अधिक नहीं होगी। धारा 80गगघ(1ख) के अंतर्गत स्वीकृत कटौती रू. 50,000/- तक एनपीएस में दी गर्इ किसी राशि के संबंध में अतिरिक्त कटौती है। हालांकि, धारा 80गगघ(2) के अंतर्गत पेंशन हेतु केंद्र सरकार अथवा अन्य किसी नियोक्ता द्वारा किया गया अंशदान इस धारा के अंतर्गत उपलब्ध करार्इ गर्इ रू. 1,50,000/- की सीमा से बाहर होगा।
5.5.4 इक्विटी बचत योजना के अंतर्गत किए गए निवेश से संबंधित कटौती (धारा 80गगघ) :
धारा 80गगघ अधिसूचित इक्विटी बचत योजना के अंतर्गत किए गए निवेश के संबंध में प्रभावी मूल्यांकन वर्ष 2013-14 अनुसार कटौती उपलब्ध कराता है। राजीव गांधी इक्विटी बचत योजना 2012 को इस धारा के अंतर्गत अधिसूचना योजना के अनुसार एसओ सं. 2777र्इ दिनांक 23.11.2012 (उत्तरगामी शुद्धिपत्र एसओ. नं. 2835र्इ दिनांक 05.12.2012) तथा इस धारा के अंतर्गत योजना के तौर पर अधिसूचना सं. 3693र्इ दिनांक 18.12.2013 के मार्फत संशोधित किया गया है। यह योजना आरजीर्इएसएस 2013 के अनुसार अधिसूचना एसओ सं. 3693 दिनांक 18.12.2013 (आरजीर्इएसएस, 2013) के मार्फत दिसंबर 2013 में संशोधित की गर्इ थी। आरजीर्इएसएस 2013 के अनुसार इस धारा के अंतर्गत यह कटौती उपलब्ध होगी यदि निम्न शर्तों को पूरा किया जाता है :
(क) निर्धारिती अकेला रहता हो;
(ख) उसकी सकल कुल आय रू. 12 लाख से अधिक न हो;
(ग) उसने धारा 10(38) में परिभाषित इक्विटी उन्मुख कोष की अधिसूचित योजना अथवा सूचित सूची के अनसुार सूचित शेयर लिए हो
(घ) निर्धारिती नया रिटेल निवेशक हो
(ड) उक्त योजना के अनुसार अधिग्रहण की तिथि से 3 साल की अवधि के लिए निवेश बंद हो
(च) निर्धारिती निर्धारितानुसार अन्य शर्तो को पूरा करता हो।
कटौती राशि : कटौती राशि इक्विटी शेयर/इकार्इ में निवेशित राशि का 50 प्रतिशत है। हालांकि, इस प्रावधान के अंतर्गत राशि रू. 25,000 से अधिक न हो।
कटौती की वापसी - उक्त कथित कटौती के दावों के बाद यदि निर्धारिती उक्त शर्तों को पूरा करने में असफल रहता है तो वास्तविक स्वीकार्य कटौती उस वर्ष के निर्धारिती आय से समझी जाएगी जब व्यक्तिक्रम प्रतिबद्ध हो।
यह कटौती उस वर्ष की शुरूआत के साथ लगातार तीन मूल्यांकन वर्षों के लिए स्वीकृत होगी जिसमें सूचित इक्विटी शेयर अथवा श्रेणी पहले अधिकृत की गर्इ थी। किसी वर्ष में इस धारा के तहत करदाता द्वारा किसी प्रकार की कटौती का दावा किया जाता है तो वह अन्य किसी वर्ष के लिए इस धारा के तहत किसी कटौती का हकदार नहीं होगा।
5.5.5 स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भुगतान, आदि के संबंध में कटौती (धारा 80घ)
स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम आदि हेतु उपलब्ध कटौती हेतु धारा 80घ उपलब्ध कराती है जिसका आंकलन निम्नानुसार किया जाता है :
क्र.सं. |
व्यक्ति जिसके लिए भुगतान किया गया है |
भुगतान का प्रकार |
भुगतान की विधि |
स्वीकार्य कटौती (रू. में) |
1 |
कर्मचारी अथवा उसका परिवार*
|
❖ कर्मचारी अथवा इसके परिवार के स्वास्थ्य बीमा को लागू करने अथवा प्रभावी रखने के लिए कुल राशि अथवा ❖ केंद्र सरकार (वित्त अधिनियम 2013) द्वारा अधिसूचित ऐसी कोर्इ अन्य योजना अथवा सीजीएसएस को किया गया किसी प्रकार का अन्य अंशदान |
नगद को छोड़कर अन्य विधि |
कुल स्वीकार्य राशि रू. 25,000/- है वरिष्ठ नागरिकों तथा (अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए रू. 30000) |
2 |
❖ कर्मचारी अथवा परिवार के निवारक स्वास्थ्य जांच की वजह से किया गया भुगतान, ( रू. 5,000/- तक सीमित, नकद भुगतान स्वीकार्य) |
नगद सहित अन्य विधि |
||
3 |
❖ अति वरिष्ठ नागरिक के स्वास्थ्य पर किए गए चिकित्सा व्यय के कारण दी गर्इ राशि तथा कोर्इ राशि ऐसे व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बीमा प्रभावी बनाए रखने हेतु दिया गया है |
नगद को छोड़कर अन्य विधि |
कुल स्वीकार्य राशि रू. 30,000/- है |
|
4 |
कर्मचारी के माता-पिता*
|
❖ कर्मचारी के माता- पिता के स्वास्थ्य पर बीमा को प्रभावी रखने अथवा प्रदत्त रखने के लिए दी गर्इ पूर्ण राशि |
नगद को छोड़कर अन्य विधि |
कुल स्वीकार्य राशि रू. 25,000/- है (रू. 30,000/- वरिष्ठ तथा अति वरिष्ठ नागरिक के लिए) |
5 |
❖ केंद्र कर्मचारी के माता-पिता के लिए निवारक नागरिकों के लिए रू. स्वास्थ्य जांच की वजह से किया गया भुगतान ( रू. 5,000/- तक सीमित, नकद भुगतान स्वीकार्य) |
नगद सहित अन्य कोर्इ विधि |
||
6 |
❖ अति वरिष्ठ नागरिक के स्वास्थ्य पर किया गया चिकित्सा व्यय के कारण दी गर्इ पूर्ण राशि तथा कोर्इ राशि ऐसे व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बीमा को प्रभावी रखने के लिए नहीं दी गर्इ हो |
नगद को छोड़कर अन्य विधि |
कुल स्वीकार्य राशि रू. 30,000/- है |
* उक्त क्र.सं. 1, 2 तथा 3 तथा 4, 5 तथा 6 के अंतर्गत कटौती के तौर पर स्वीकृत कुल राशि रू. 30,000/- से अधिक नहीं होगी
यहां
i) 'परिवार' का अर्थ कर्मचारी का जीवन साथी अथवा आश्रित बच्चे हैं
ii) 'वरिष्ठ नागरिक' का अर्थ भारत में रहने वाला व्यक्ति जिसकी आयु पिछले प्रासंगिक वर्षों के दौरान साठ वर्ष अथवा इससे अधिक है।
iii) 'अति वरिष्ठ नागरिक' का अर्थ भारत में रहने वाला व्यक्ति जिसकी आयु पिछले प्रासंगिक वर्षों के दौरान अस्सी वर्ष अथवा इससे अधिक है।
डीडीओ को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उक्त संदर्भित चिकित्सा बीमा इस संबंध में योजना सहित लागू होगी :
(क) इस संबध में केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित तथा सामान्य बीमा व्यापार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 के अंतर्गत गठित भारतीय जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन; अथवा
(ख) बीमा नियामक तथा विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धारा 3 की उप-धारा (1) के अंतर्गत स्थापित बीमा नियामक तथा विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित अन्य कोर्इ बीमा कंपनी।
5.5.6 विकलांग व्यक्तियेां अथवा आश्रितों पर व्यय के संबंध में कटौती
5.5.6.1 आश्रित विकलांग व्यक्तियों के चिकित्सा उपचार सहित रखरखाव के संबंध मं कटौती (धारा 80घघ) :
धारा 80घघ के अंतर्गत, जहां कर्मचारी, भारत का नागरिक हो, पिछले वर्षों के दौरान
(क) विकलांग व्यक्तियों होने की स्थिति में आश्रित के चिकित्सीय उपचार (नर्सिंग सहित), प्रशिक्षण तथा पुर्नवास हेतु किसी प्रकार का किया गया व्यय; अथवा
(ख) जीवन बीमा निगम अथवा अन्य किसी बीमा कंपनी अथवा प्राधिकरण अथवा निर्दिष्ट कंपनी की ओर से इस संबंध में गठित योजना के अंतर्गत किसी प्रकार का देय अथवा जमा की गर्इ राशि बशर्ते इस संबंध में अनुरक्षण शर्तों तथा आश्रित, विकलांग होने के नाते, के रखरखाव हेतु इस संबंध में बोर्ड द्वारा अनुमोदित, कर्मचारी उस वर्ष की उसकी कुल सकल आय से पचहत्तर हजार रूपए के कुल कटौती स्वीकृत की जाएगी।
हालांकि, जहां ऐसे आश्रित व्यक्ति गंभीर विकलांगता के साथ जूझ रहे हों उन्हें रु. 1,25,000/- रूपए की राशि निर्दिष्ट शर्तों के अनुसार कटौती स्वीकृत होगी।
ऊपर (ख) के अंतर्गत कटौती केवल तभी स्वीकृत होगी यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं :-
(i) उक्त (ख) में संदर्भित योजना आश्रित के लाभ के लिए वार्षिकी अथवा एकमुश्त राशि के भुगतान के लिए मुहैया करार्इ है, विकलांग व्यक्ति के तौर पर, व्यक्ति की मृत्यु की स्थिति में जिनका नाम योजना का अंशदान किया गया है।
(ii) नामांकित कर्मचारी या तो आश्रित, विकलांग व्यक्ति के तौर पर अथवा अन्य कोर्इ व्यक्ति अथवा न्यास आश्रित, विकलांग व्यक्ति के तौर पर, के लाभ के लिए उसकी ओर से भुगतान की प्राप्ति के लिए।
हालांकि, यदि आश्रित की, विक्लांग व्यक्ति के तौर पर, कर्मचारी से पूर्व मृत्यु होती है तो उक्त के उप-पैरा (ख) के अंतर्गत दी अथवा जमा राशि के समान राशि पिछले वर्ष जिसमें ऐसी राशि कर्मचारी द्वारा प्राप्त होती है, के कर्मचारी की आय होने की तौर पर समझी जाएगी तथा तद्नुसार कर हेतु वसूलनीय होगी जैसे आय उस पछले वर्ष में थी।
5.5.6.2 विकलांग व्यक्तियों के संबंध में कटौती (धारा 80 प)
धारा 80प के अंतर्गत, व्यक्ति की कुल आय की गणना में, निवासी के तौर पर, जो पिछले वर्ष किसी भी समय विकलांग व्यक्ति के तौर पर चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत होता है, वहां रू. 75,000/- की कटौती की स्वीकृति होगी। हालांकि जहां ऐसा व्यक्ति गंभीर विकलांग है तो रू. 1,25,000/- की उच्चतम कटौती की स्वीकृति होगी।
डीडीओ को नोट करना चाहिए कि 80घघ कटौती कर्मचारी की कटौती की स्थिति में है जबकि 80प कटौती स्वयं कर्मचारी की स्थिति में है। हालांकि, दोनों धाराओं के अंतर्गत कर्मचारी को निम्नलिखित डीडीओ को प्रस्तुत करना होगा।
1. नियमों के नियम 11क(2) के अनुसार निर्धारित प्रपत्र में नियम 11क(1) में निर्दिष्टानुसार चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र की प्रति। डीडीओ को केवल यह देखने बाद कटौती की स्वीकृति होगी कि प्रस्तुत प्रमाणपत्र इस नियम में परिभाषित चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी हैं तथा यह उसमें निर्दिष्टानुसार प्रारूप में हैं।
2. आगे, जहां विकलांगता की शर्तें अस्थार्इ हैं तथा उक्तकथित प्रमाणपत्र में संलग्न अवधि के पश्चात् इसकी सीमा तक पुर्नमूल्यांकन की आवश्यकता होती है तो इस धारा के अंतर्गत किसी कटौती की स्वीकृति किसी उत्तरगामी अवधि के लिए नहीं होगी जबतक एक नया प्रमाणपत्र चिकित्सा प्राधिकारी से प्राप्त नहीं किया जाता जैसा उक्त 1 में है तथा डीडीओ के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जाता।
3. धारा 80घघ तथा 80प के उद्देश्यों के लिए कुछ शर्तें निम्नानुसार हैं :-
(क) 'प्रशासक' का अर्थ यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (उपक्रम का अंतरण एवं निरसन) अधिनियम, 2002 की धारा 2 के वाक्यांश (क) में संदर्भितानुसार प्रशासक है;
(ख) "आश्रित" अर्थात्—
(i) व्यक्ति, व्यक्ति का जीवनसाथी, बच्चे, माता-पित, भार्इ तथा बहनें अथवा इनमें से कोर्इ भी;
(ii) हिंदु अविभाजित परिवार की स्थिति में, हिंदु अविभाजित परिवार का सदस्य, ऐसे व्यक्ति पर पूर्णत: अथवा मुख्यता: आश्रित अथवा हिंदु अविभाजित परिवार अपने समर्थन तथा अनुरक्षण के लिए तथा जिसने पिछले वर्ष से संबंधित निर्धारण वर्ष के लिए अपनी कुल आय की गणना में धारा 80प के अंतर्गत किसी कटौती का दावा न किया हो;
(ग) "विकलांगता" का अर्थ विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 2 के वाक्यांश (i) में निर्दिष्ट अर्थ होगा तथा राष्ट्रीय स्वालीनता कल्याण ट्रस्ट, मस्तिष्क पक्षाघात, मानसिक मंदता तथा बहु विकलांगता अधिनियम, 1999 की धारा 2 के वाक्यांश (क), (ग) तथा (ज) में संदर्भित "स्वालीनता", "मस्तिष्क पक्षाघात" तथा "बहु विकलांगता" शामिल है;
(घ) "जीवन बीमा निगम" का अर्थ धारा 88 की उप-धारा (8) के वाक्यांश (iii) में निर्दिष्ट समान अर्थ होगा।
(ड़) चिकित्सा प्राधिकारी का अर्थ विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 2 के वाक्यांश (त) अथवा ऐसे अन्य चिकित्सा प्राधिकारी से है जिसे राष्ट्रीय स्वालीनता कल्याण ट्रस्ट, मस्तिष्क पक्षाघात, मानसिक मंदता तथा बहु विकलांगता अधिनियम, 1999 की धारा 2 के वाक्यांश (क), (ग), (ज), (ञ तथा (ण) में संदर्भित "स्वालीनता", "मस्तिष्क पक्षाघात" तथा "बहु विकलांगता" द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, में संदर्भितानुसार चिकित्सा प्राधिकारी से है।
(च) "विकलांग व्यक्ति" का अर्थ विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 2 के वाक्यांश (न) में तथा राष्ट्रीय स्वालीनता कल्याण ट्रस्ट, मस्तिष्क पक्षाघात, मानसिक मंदता तथा बहु विकलांगता अधिनियम, 1999 की धारा 2 के वाक्यांश (ञ) संदर्भित व्यक्ति से हैं।
(छ) "गंभीर विकलांग वाले व्यक्ति का अर्थ" हैं -
(i) व्यक्ति के एक अथवा एक से अधिक विकलांगता के अस्सी अथवा उससे अधिक होने की स्थिति में, जैसा विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 56 की उप-धारा (4) में संदर्भित हैं अथवा
(ii) राष्ट्रीय स्वालीनता कल्याण ट्रस्ट, मस्तिष्क पक्षाघात, मानसिक मंदता तथा बहु विकलांगता अधिनियम, 1999 की धारा 2 के वाक्यांश (ण) में संदर्भित गंभीर विकलांग व्यक्ति;
(ज) "निर्दिष्ट कंपनी" का अर्थ यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (उपक्रम का अंतरण एवं निरसन) अधिनियम, 2002 की धारा 2 के वाक्यांश (ज) में संदर्भित कंपनी से है
5.5.7 चिकित्सा उपचार आदि के संबंध में कटौती (धारा 80घघख) :
धारा 80घघख स्वयं के लिए अथवा आश्रित के लिए नियम 11घघ (1) में निर्दिष्ट हो सकने वाले ऐसी बीमारी अथवा रोग के चिकित्सा उपचार के लिए वास्तविक रूप से दी गर्इ किसी राशि के भुगतान के लिए कर्मचारी जो पिछले वर्ष के दौरान भारत में निवासी है, की स्थिति में कटौती की स्वीकृति देता है। स्वीकृत कटौती कर्मचारी अथवा उसके आश्रित अथवा रू. 40,000 जो भी कम हो, के संबंध में वास्तविक रूप से दी गर्इ राशि के समान होती है।
अब कटौती ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा निर्धारण के आधार पर की स्वीकृत हो सकती है। एक यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, एक हेमेटोलॉजिस्ट, एक इम्यूनूलॉजिस्ट अथवा ऐसे अन्य विशेषज्ञ, जैसा नियम 11घघ में निर्दिष्ट है। हालांकि दावे की राशि को राशि द्वारा कम किया जाएगा यदि कर्मचारी द्वारा बीमाकर्ता अथवा प्रतिपूर्ति प्राप्त होती हैं। आगे व्यक्ति जिसके समक्ष ऐसा दावा किया जाता है जो वरिष्ठ नागरिक हो (60 वर्ष अथवा उससे अधिक) तो रू. 60,000/- तक की कटौती की स्वीकृति है तथा अति वरिष्ठ नागरिक (80 वर्ष अथवा अधिक) की स्थिति में कटौती रू. 80,000/- तक स्वीकृत है।
इस धारा के प्रयोजन के लिए, कर्मचारी की स्थिति में "आश्रित" अर्थात् व्यक्ति, व्यक्ति का जीवनसाथी, बच्चे, माता-पिता, भार्इ तथा बहन अथवा इनमें से कोर्इ कर्मचारी पर अपने समर्थन तथा अनुरक्षण जो पूर्ण अथवा मुख्य रूप आश्रित हो, से है।
अधिसूचना एसओ सं. 2791(झ) दिनांक 12.10.2015 के मार्फत, नियम 11घघ को प्रपत्र 10-I में प्रमाणपत्र की प्रस्तुति की अनिवार्यता हटाने के लिए संशोधित किया गया हैं। नुस्खे के निगर्मन करने वाले विशेषज्ञ के नाम, पते, एवं पंजीकरण सं. सहित मरीज का नाम तथा आयु, बीमारी/रोग का नाम सन्निहित नियमों में निर्दिष्टानुसार विशेषज्ञ द्वारा निर्धारण अब आपेक्षित है।
5.5.8 उच्च शिक्षा के लिए लिए गए ऋण पर ब्याज के संबंध में कटौती (धारा 80ड़):
धारा 80ड़ उसकी उच्च शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से अथवा अपने जीवनसाथी अथवा अपने बच्चों अथवा विद्यार्थी जिसका वह कानूनी अभिभावक है, की उच्च शिक्षा के लिए किसी वित्त संस्थान अथवा किसी अनुमोदित धर्मार्थ सस्थांन द्वारा लिए गए ब्याज के भुगतान के संबंध में कटौती की स्वीकृति देता है।
कटौती उस वित्त वर्ष के लिए कुल आय की गणना में स्वीकृत की जाएगी जिसमें कर्मचारी लिए गए ऋण पर ब्याज देता है तथा तुरंत उत्तरगामी सात वित्तीय वर्षों अथवा वित्त वर्ष तक जिसमें कर्मचारी द्वारा पूर्णता ब्याज दिया जाता है, जो भी पहले हो -
इस धारा के प्रयोग के लिये
(क) "अनुमोदित धर्मार्थ संस्थान" अर्थात् धारा 10(23ग) में निर्धारित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित तथा धर्मांर्थ संस्थान के लिए संस्थापित संस्थान अथवा धारा 80छ(2)(क) में संदर्भित संस्थान;
(ख) "वित्तीय संस्थान" अर्थात् एक बैंकिंग कंपनी जिसके लिए बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 लागू होते हैं (उस अधिनियम की धारा 51 में संदर्भित किसी बैंक अथवा बैंकिंग संस्थान सहित) अथवा अन्य कोर्इ वित्तीय संस्थान जिसे केंद्र सरकार इस संबंध में आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना में निर्दिष्ट कर सकती हैं;
(ग) "उच्च शिक्षा" अर्थात् केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अथवा ऐसा करने के लिए केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत किसी विद्यालय, बोर्ड अथवा विश्वविद्यालय से उच्च माध्यमिक शिक्षा अथवा इसके समकक्ष को उत्तीर्ण करने के पश्चात् किया गया कोर्इ अध्ययन पाठ्यक्रम।
5.5.9 कुछ कोष, धर्मार्थ संस्थानों आदि हेतु चंदे के संबंध में कटौती आदि (धारा 80छ) :
धारा 80छ को उन मामलों में विभिन्न कोष, धर्मार्थ संस्थानों आदि को किए गए दान के कारण कटौती के लिए धारा 80छ को मुहैया कराया गया है। यदि जहां कर्मचारी अपने संबंधित नियोक्ता के माध्यम से प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, मुख्य मंत्री राहत कोष अथवा उप-राज्यपाल राहत कोष को दान करता है तो ऐसे कोष के लिए किए गए दान के संबंध में ऐसे प्रत्येक कर्मचारी को पृथक प्रमाणपत्र जारी करना संभव नहीं हैं क्योंकि इन कोष को किए गए अंशदान समेकित चेक के रूप में होते हैं। एक कर्मचारी इन कोषों के लिए दान करता है तो वह धारा 80छ के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए पात्र हैं। यह एतद्द्वारा, प्रमाणित किया जाता है कि उक्तानुसार ऐसे दान के संबंध में दावा इस संबंध में - परिपत्र सं. 2/2005, दिनांक 12.1.2005, संरेखण तथा संवितरण अधिकारी (डीडीओ)/नियोक्ता द्वारा जारी प्रमाणपत्र द्वारा जारी प्रमाणपत्र के आधार पर धारा 80छ के अंतर्गत स्वीकार्य होगा।
इस धारा के अंतर्गत कोर्इ कटौती रू. 10,000/- से अधिक के दान की राशि की स्थिति में स्वीकार्य नहीं है जबतक राशि नगद के अलावा किसी अन्य विधि द्वारा दिया जाता है।
5.5.10 दिए गए किराये के संबंध में कटौती (धारा 80छछ)
धारा 80छछ अपने स्वयं के निवास के लिए उसके द्वारा दिए गए गृह किराये के संबंध में कटौती हेतु कर्मचारी को कटौती की स्वीकृति देता है। ऐसी कटौती निम्नलिखित शर्तों के अनुसार स्वीकार्य हैं :-
(क) कर्मचारी ने विशेष रूप से उसे स्वीकृत किसी गृह किराये की प्राप्ति नहीं की है, जो अधिनियम की धारा 10(13क) के अंतर्गत छूट हेतु अर्हता प्राप्त करता है;
(ख) कर्मचारी ने प्रपत्र सं. 10खक में घोषणा को दाखिल किया हो (परिशिष्ट X)
(ग) कर्मचारी ने न खरीदा हो:
(i) उसके अथवा उसके जीवनसाथी अथवा नाबालिग बालक द्वारा कोर्इ आवासीय निवास अथवा जहां ऐसा कर्मचारी हिंदु अविभाजित परिवार का सदस्य है, ऐसे परिवार द्वारा, ऐसे स्थान पर जहां वह सामान्य रूप से निवास करता है अथवा अपने कार्यालय के कर्त्तव्यों का निष्पादन करता हैं अथवा अपने व्यापार अथवा पेशे को चलाता है; अथवा
(ii) किसी अन्य स्थान, किसी आवासीय स्थान पर, जो कर्मचारी के अधिपत्य में हो, जिसकी राशि धारा 23(2)(क) अथवा धारा 23(4)(क), जैसी भी स्थिति हो, के अंतर्गत निर्धारित होनी है।
(घ) वह अपनी कुल आय के 10 प्रतिशत से अधिक के उसके द्वारा दिए गए गृह किराये के संबंध में कुल कटौती का हकदार होगा। कटौती कुल आय के 25 प्रतिशत के समान अथवा रू. 2,000/- प्रति माह , जो भी कम हो, होगी। इन प्रतिशतों के परिणामों की गणना के लिए कुल आय धारा 80छछ के अंतर्गत किसी कटौती को करने से पूर्व आंकी जाएगी।
संरेखण तथा सवितरण प्राधिकारी को स्वयं संतुष्ट करना चाहिए कि उक्त निर्दिष्ट समस्त शर्तें ऐसी कटौती से पूर्व कर्मचारी हेतु उनके द्वारा स्वीकृत है। उन्हें किराये के वास्तविक भुगतान के प्रमाण की प्रस्तुति पर आग्रह कर स्वयं को भी इस संबंध में संतुष्ट करना चाहिए।
5.5.11 वैज्ञानिक अनुसंधान अथवा ग्रामीण विकास के लिए कुछ दान के संबंध में कटौती
धारा 80छछक नीचे तालिका में दी गर्इ किसी राशि के दान के संबंध में कर्मचारी की कुल आय से कटौती की स्वीकृति देता है :
| क्र.सं. | व्यक्तियों को किया गया दान | धारा के अंतर्गत अनुमोदित अधिसूचना | अनुमोदन/अधिसूचना की अनुमति देने वाला प्राधिकारी |
| 1 | एक अनुसंधान संघ जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रयुक्त होने वाले विश्वविद्यालय, महाविद्यालय अथवा अन्य संस्थान हेतु अथवा वैज्ञानिक अनुसंधान का उत्तरदायित्व हो | धारा 35(1)(ii) के अंतर्गत | केंद्र सरकार |
| 2 | एक अनुसंधान संघ जिसका उद्देश्य सामाजिक विज्ञान अथवा सांख्यकीय अनुसंधान में अनुसंधान के लिए प्रयुक्त होने हेतु विश्वविद्यालय, महाविद्यालय अथवा अन्य संस्थान हेतु अथवा सामाजिक विज्ञान अथवा सांख्यकीय अनुसंधान में अनुसंधान का उत्तरदायित्व हो | धारा 35(1)(ii) के अंतर्गत | केंद्र सरकार |
| 3 | एक संघ अथवा संस्थान, जिसकी धारा 35गगक के प्रयोजन के लिए अनुमोदित ग्रामीण विकास के किसी कार्यक्रम के निष्पादन के लिए प्रयुक्त होने हेतु ग्रामीण विकास के किसी कार्यक्रम के उत्तरदायित्व का उद्देश्य हो | धारा 35गगक(2) के अंतर्गत प्रमाणपत्र की प्रस्तुति | नियम 6ककक के अंतर्गत निर्धारित प्राधिकारी |
| 4 | एक संघ अथवा संस्थान जिसका उद्देश्य ग्रामीण विकास के कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए व्यक्ति का प्रशिक्षण हो | धारा 35गगक(2क) के अंतर्गत प्रमाणपत्र की प्रस्तुति | नियम 6ककक के अंतर्गत निर्धारित प्राधिकारी |
| 5 | किसी पात्र परियोजना अथवा योजना के निष्पादन के लिए राष्ट्रीय समिति द्वारा अनुमोदित एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी अथवा एक स्थानीय प्राधिकारी अथवा संघ | धारा 35 कग(2)(क) के अंतर्गत प्रमाणपत्र की प्रस्तुति | समाजिक एवं आर्थिक कल्याण के संवर्धन के लिए राष्ट्रीय समिति |
| 6 | एक ग्रामीण विकास कोष | धारा 35गगक(1)(ग) के अंतर्गत अधिसूचित | केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित तथा स्थापित |
| 7 | राष्ट्रीय शहरी गरीबी उन्मूलन कोष | धारा 35गगक(1)(घ) के अंतर्गत अधिसूचित | केंद्र सरकार द्वारा स्थापित तथा अधिसूचित |
निम्न स्थिति में इस धारा के अंतर्गत कोर्इ कटौती नहीं होगी:
i) कर्मचारी की कुल आय जिसमें आय शामिल है जो "व्यापार अथवा पेशे का लाभ तथा प्राप्तियां" विषय के अंतर्गत देययोग्य है।
ii) रू. 10,000 से अधिक दान की राशि तथा नकद में देय
आरेखण तथा संवितरण प्राधिकारी को स्वयं को संतुष्ट करना होगा कि ऐसी कटौतियों के समक्ष पूरी की गर्इ उक्त निर्दिष्ट शर्तों को कर्मचारी हेतु उनके द्वारा पूरा किया गया है। उन्हें व्यक्ति, जिनके लिए दान किया गया है, द्वारा दान के वास्तविक भुगतान तथा प्राप्ति के प्रमाण की प्रस्तुति पर इस संबध में आग्रह द्वारा स्वयं को भी संतुष्ट करना होगा तथा सुनिश्चित करना होगा कि स्वीकृति/अधिसूचना सही प्राधिकारी द्वारा जारी की गर्इ हैं। डीडीओ को कर्मचारी द्वारा स्व: घोषणा द्वारा सुनिश्चित करना होगा कि वह "व्यापार अथवा व्यवसाय के लाभ तथा प्राप्तियों" से वेतन प्राप्त नहीं करता है।
5.5.12 बचत खाता में जमा पर ब्याज के संबंध में कटौती (धारा 80ननक) :
धारा 80ननक वित्त वर्ष 2012-13 से आरंभ की गर्इ है तथा यह कर्मचारी को स्वीकृति प्रदान करती है कि उसकी सकल आय, यदि बचत खाते में जमा (अवधि जमा नहीं) के ब्याज के रूप में किसी आय शामिल हो, कटौती निम्न राशि पर होगी :-
(i) ऐसी आय की स्थिति में राशि कुल दस हजार, ऐसी कुल राशि, से अधिक नहीं होंनी चाहिए, तथा
(ii) किसी अन्य स्थिति में दस हजार रूपए
कटौती उपलब्ध होगी यदि यह बचत खाता निम्न में संरक्षित होता है :-
(क) बैंकिग संस्थान जिस पर बैंकिग नियामक अधिनियम, 1949 लागू होता है (उस अधिनियम की धारा 51 हेतु संदर्भित किसी बैंक अथवा बैंकिंग संस्थान सहित);
(ख) बैंंकिंग (सहकारी भूमि बंधक बैंक अथवा सहकारी भूमि विकास बैंक सहित) के व्यापार को करने में लगी सहकारी संस्था; अथवा
(ग) भारतीय डाक कार्यालय अधिनियम, 1898 की धारा 2 के वाक्यांश (V) में परिभाषितानुसार डाक घर
इस धारा के लिए "सावधि जमा" का अर्थ नियम अवधि की समाप्ति पर पुन:देययोग्य जमा
6. रू. 5 लाख तक की कुल आय वाले व्यक्ति के लिए रू. 2,000 की छूट (धारा 87क)
वित्त अधिनियम 2013 उस करदाता, भारत के निवासी, को राहत प्रदान कराता है जो न्यून आय श्रेणी में हैं अर्थात् जिनकी कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक न हो। धारा 87क के अंतर्गत उपलब्ध छूट की राशि निर्धारण वर्ष 2017-18 से रू. 5,000/- अथवा करयोग्य राशि, जो भी कम हो, है।
7. अनुमोदित कोष से अंशदान तथा मान्यताप्राप्त भविष्य निधि के अंतर्गत संचित अधिशेष के भुगतान पर टीडीएस
7.1 कर्मचारी को संचित शेष राशि के भुगतान के लिए मान्यताप्राप्त भविष्य निधि कोष के न्यासियों अथवा कोष विनिमय द्वारा अनुमोदित कोर्इ व्यक्ति, उन मामलों में कटौती करेगा जहां अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग क का नियम 9 का उप-नियम (1) लागू होता हो, अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 10 में निर्दिष्ट कटौती उससे करने के लिए जब कर्मचारी को संचित शेष राशि का भुगतान किया गया हो।
संचित शेष राशि को "वेतन" विषय के अंतर्गत देययोग्य आय के तौर पर समझा जाएगा।
7.2 नियोक्ता द्वारा किसी प्रकार का अंशदान, ऐसे अंशदान, यदि हो, पर ब्याज सहित, कर्मचारी को दिया गया अनुमोदित सेवानिवृत्ति कोष, दी गर्इ राशि पर कर अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग ख के नियम 6 में उपलब्ध सीमा तक कोष को न्यासियों द्वारा काटा जाएगा। टीडीएस उस कर की औसत दर तक होना चाहिए जिस पर कर्मचारी पूर्ववर्ती तीन वर्षों अथवा अवधि, यदि अवधि तीन वर्ष से कम हो व वह कोष का सदस्य रहा हो, के दौरान कर के लिए देने के लिए उत्तरदायी था।
कटौती कराने वाला लौटे हुए अंशदान (कर, यदि हो, सहित) के कारण किसी प्रकार की कुल राशि पर कर काटने के लिए उत्तरदायी होगा भले ही कोष अथवा कोष का कोर्इ भाग अनुमोदित सेवानिवृत्ति कोष में छोड़ दिया गया हो।
7.3 अधिनियम की धारा 192क के अनुसार, प्रभावी तिथि 01.06.2015, र्इपीएफ एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा के अंर्तगत बनार्इ गर्इ र्इपीएफ योजना के ट्रस्टी तथा कर्मचारियों को देय संघटित शेष का भुगतान करने के लिए योजना के अंतर्गत प्राधिकृत कोर्इ व्यक्ति, यदि एक प्राधिकृत भविष्य निधि में भाग लेने वाले कर्मचारियों के शेष संघटित शेष चौथी अनुसूची, जो कर्मचारी हेतु संघटित देय शेष के भुगतान के समय लागू न हो रहा हो, के भाग क के नियम 8 के प्रावधानों के कारण उसकी कुल आय में शामिल होने योग्य हैं, 10 प्रतिशत की दर पर उसपर आयकर की कटौती करेगा यदि ऐसे भुगतान की राशि अथवा ऐसे भुगतान का कुल रू. 50,000/- से अधिक होता है। यदि कर्मचारी अपने पैन सं. को मुहैया नहीं कराता है तो कटौती अधिकतम सीमांत दर पर किया जाना होगा।
8. डीडीओ द्वारा दावों की वास्तविकता के संबंध में स्वयं का संतुष्टिकरण :
संरेखण तथा संवितरण अधिकारियों को कर्मचारी द्वारा की गर्इ वास्तविक जमा/अंशदान/भुगतान के बारे में स्वयं को संतुष्ट करना चाहिए, ऐसे विवरण/जानकारी के लिए आवाह्न द्वारा जिसके लिए उन्हें कथित कटौती की स्वीकृति के समक्ष आवश्यक माना गया है। कर्मचारी द्वारा किए गए किसी प्रकार के जमा/अंशदान/भुगतान से संबंधित कर्मचारी के दावे की प्रमाणिकता के संबंध में डीडीओ द्वारा संतुष्ट न होने पर उसे इसकी आज्ञा नहीं देनी चाहिए तथा कर्मचारी आवश्यक प्रमाण आदि की प्रस्तुति तथा आय की विवरणी को भरकर ऐसी राशि पर कटौती/छूट का दावा करने के लिए मुक्त है बशर्तें वह आंकलन अधिकारी को इस संबंध में संतुष्ट करें।
9. कटौती किए जाने वाले आयकर की गणना :
9.1 धारा 192 के लिए वेतन आय की गणना निम्नानुसार की जाएगी :-
(क) पहले पैरा 5.2 में निर्दिष्ट सभी आय सहित पैरा 5.1 में निर्दिष्टानुसार कुल आय की गणना तथा पैरा 5.3 में निर्दिष्ट आय को छोड़कर
(ख) उक्त (क) में शामिल आंकड़ों से पैरा 5.4 में निर्दिष्ट कटौती की स्वीकृति तथा कर्मचारी के शुद्ध वेतन में शामिल राशि की गणना।
(ग) पैरा 3.5 में निर्दिष्ट सामान्य कथन के रूप में दिखार्इ गर्इ कुल सकल आय शामिल करने हेतु अन्य सभी विषयों - "भवन संपत्ति", "व्यापार अथवा व्यवसाय की लाभ व परिलब्धियां", "पूंजीगत लाभ", तथा "अन्य स्रोतों से आय" से आय को शामिल करते हुए। हालांकि, यह स्मरण कराया जाता है कि "भवन संपत्ति से आय" विषय के अंतर्गत नुकसान को छोड़कर ऐसे किसी विषय के अंतर्गत किसी प्रकार का नुकसान डीडीओ द्वारा स्वीकार्य नहीं होगा।
(घ) उक्त (ग) में शामिल आंकड़ों से पैरा 5.5 में निर्दिष्ट कटौती स्वीकृत है यदि प्रासंगिक शर्तों को पूरा किया जाए। पैरा 5.5 में निर्दिष्ट शुरूआती सीमा के अनुसार कटौती की कुल राशि उक्त (ख) में निर्दिष्ट राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए तथा यदि यह अधिक होती है तो, उसे उस राशि तक सीमित किया जाना चाहिए।
यह कर्मचारी की कुल आय होगी जिस पर कटौती किए जाने के लिए आयकर आपेक्षित है। यह आय दस रूपए के नजदीकी गुणज की पूर्णाक राशि होनी चाहिए।
9.2 ऐसी राशि पर आयकर की गणना पैरा 4.8 में परिभाषितानुसार धारा 206कक के प्रावधानों के अनुसार तथा कर्मचारी की आयु को ध्यान में रखते हुए इस परिपत्र के पैरा 2.1 में दी गर्इ दरों के अनुसार की जाएगी। धारा 87क के अनुसार छूट रू. 2,000/- तक योग्य व्यक्तियों (पैरा 6 देखें) को दी जा सकती है। लागू होने वाली स्थितियों में अधिभार की गणना की जाएगी (पैरा 2.2 देखें)
9.3 कुल देय कर लेने के लिए देय कर की राशि पर शिक्षा उपकर, लागू हो, (प्राथमिक हेतु 2 प्रतिशत तथा माध्यमिक शिक्षा हेतु 1 प्रतिशत) लगाकर बढ़ाया जाएगा।
9.4 पैरा 9.3 के अंतर्गत आने वाले कर की राशि समान किस्तों के रूप में प्रतिमाह काटी जाएगी। पिछली कटौतियों के अधिक अथवा कम होने की स्थिति में वह उसी वित्त वर्ष के दौरान आगामी कटौतियों की राशि को बढ़ाकर अथवा घटाकर समायोजित कर दी जाएगी।
10. विविध
10.1 यह निर्देश संपूर्ण नहीं हैं तथा यह नियोक्ता को वेतन से कर कटौती के संबंध में विभिन्न प्रावधानों को समझाने के लिए हैं जहां भी किसी भी प्रकार की आशंका हो, वहां आयकर अधिनियम, 1961, आयकर नियम, 1962, वित्त अधिनियम 2016, प्रासंगिक परिपत्र/अधिसूचना आदि को संदर्भित किया जा सकता है।
10.2 किसी सहायता की स्थिति में आयकर विभाग के स्थानीय जनसंपर्क अधिकारी/आंकलन अधिकारी को संपर्क किया जा सकता है।
10.3 यह निर्देश केंद्र/राज्य सरकारों के नियंत्रण के अंतर्गत जो भी है, सहित सभी संवितरण अधिकारी तथा उपक्रम के ध्यान में लाए जा सकते है।
10.4 इस परिपत्र की प्रतियां आयकर निदेशक (जन संपर्क, मुद्रण व प्रकाशन तथा आधिकारिक भाषा), 6वां तल, मयूर भवन, क्नॉट प्लेस, नर्इ दिल्ली-110001 तथा निम्नलिखित वेबसाइट पर उपलब्ध हैं
www.finmin.nic.in तथा www.incometaxindia.gov.in
हिन्दी संस्करण का अनुसरण होगा
(संदीप सिंह)
अवर सचिव, भारत सरकार
निम्न को प्रति
1. समस्त राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश
2. भारत सरकार/ सभी मंत्रालय के विभाग आदि
3. राष्ट्रपति सचिवालय
4. उप-राष्ट्रपति सचिवालय
5. प्रधानमंत्री कार्यालय
6. लोकसभा सचिवालय
7. राज्यसभा सचिवालय
8. मंत्रीमंडल सचिवालय
9. सचिव, संघ लोक सेवा आयोग, धौलपुर हाउस,नर्इ दिल्ली
10. सचिव, कर्मचारी चयन आयोग, लोधी कॉम्पलैक्स, नर्इ दिल्ली
11. सर्वोच्च न्यायालय, नर्इ दिल्ली
12. चुनाव आयोग, नर्इ दिल्ली
13. योजना आयोग, नर्इ दिल्ली
14. राज्यपाल सचिवालय/सभी राज्यों/केद्र शासित प्रदेशों के उप राज्यपाल
15. भारत सरकार के विभागों/ मंत्रालयों हेतु एकीकृत सभी वित्तीय सलहाकार
16. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, केंद्रीय आबकारी एंव कस्टम बोर्ड के राजस्व विभाग, के अधीनस्थ सभी विभागों के प्रमुख एवं कार्यालय
17. सेना मुख्यालय, नर्इ दिल्ली
18. वायु सेना मुख्यालय, नर्इ दिल्ली
19. नौसेना मुख्यालय, नर्इ दिल्ली
20. डाक एवं तार महानिदेशक, नर्इ दिल्ली, (10 प्रतियां)
21. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (50 प्रतियां)
22. महालेखापाल-I आंध्र प्रदेश, हैदराबाद
23. महालेखापाल-II, आंध्र प्रदेश, हैदराबाद
24. महालेखापाल, असम, शिलांग
25. महालेखापाल-I, बिहार, रांची
26. महालेखापाल-II, बिहार, पटना
27. महालेखापाल-I, गुजरात, अहमदाबाद
28. महालेखापाल-II, गुजरात, राजकोट
29. महालेखापाल, केरल, तिरूवनंतपुरम
30. महालेखापाल, मध्य प्रदेश, ग्वालियर
31. महालेखापाल, तमिलनाडु, चेन्नर्इ
32. महालेखापाल-I, महाराष्ट्र, मुंबर्इ
33. महालेखापाल-II, महाराष्ट्र, नागपुर
34. महालेखापाल, कर्नाटक,बेंगलुरू
35. महालेखापाल, उड़ीसा, भुवनेश्वर
36. महालेखापाल, पंजाब, चंडीगढ़
37. महालेखापाल, हिमाचल प्रदेश, शिमला
38. महालेखापाल, राजस्थान, जयपुर
39. महालेखापाल-I,II, III, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद
40. महालेखापाल, पश्चिम बंगाल, कोलकाता
41. महालेखापाल, हरियाणा, चंडीगढ़
42. महालेखापाल, जम्मू व कश्मीर, श्रीनगर
43. महालेखापाल, मणिपुर, इम्फाल
44. महालेखापाल, त्रिपुरा, अगरतला
45. महालेखापाल, नागालैंड, कोहिमा
46. लेखापरीक्षक (केंद्रीय), कोलकाता
47. लेखापरीक्षक (केंद्रीय राजस्व),नर्इ दिल्ली
48. लेखापरीक्षक (केंद्रीय), मुंबर्इ
49. लेखापरीक्षक, वैज्ञानिक एवं वाणिज्य विभाग, मुंबर्इ
50. सभी बैंक (भारतीय स्टेट बैंक सहित सार्वजनिक क्षेत्र के, राष्ट्रीयकृत बैंक )
51. सचिव, भारतीय रिजर्व बैंक केंद्रीय कार्यालय पी.बी. नं. 406, मुंबर्इ-400001 (25 प्रतियां, इसकी शाखाओं में वितरित करने के लिए)
52. लेखा अधिकारी, असम राइफल्स महानिरीक्षक, (मुख्यालय), शिलांग
53. वाणिज्य व उद्योग के समस्त चैंबर्स
54 लोक सभा/राज्य सभा सचिवालय पुस्तकालय (प्रति 15 प्रतियां)
55. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की तकनीकी विंग में सभी अधिकारी एवं विभाग
56. सहायक मुख्य निरीक्षक, आरबीआर्इ निरीक्षण विभाग, क्षेत्रीय प्रकोष्ठ मुंबर्इ/कोलकाता/चेन्नर्इ/नर्इ दिल्ली/तथा कानपुर
57. लेखा नियंत्रक, आर्थिक मामला विभाग, नर्इ दिल्ली
58. प्रबंधक, भारतीय रिजर्व बैंक, लोक ऋण कार्यालय, अहमदाबाद/बेंगलुरू/भुवनेश्वर/मुंबर्इ/कोलकाता/हैदराबाद/कानपुर/जयपुर/चेन्नर्इ/नागपुर/नर्इ दिल्ली/पटना/गुवहाटी/त्रिवेंद्रम
59. महालेखापाल, डाक व तार, शिमला
60. रक्षा लेखा महानियंत्रक, नर्इ दिल्ली
61. लेखा परीक्षा निदेशालय, रक्षा सेवाएं, नर्इ दिल्ली
62. विश्व स्वास्थ्य संगठन, नर्इ दिल्ली
63. अंतर्राष्ट्रीय श्रम कार्यालय, भारत शाखा, नर्इ दिल्ली
64. सचिव, इंडियन रेड क्रास सोसार्इटी, नर्इ दिल्ली
65. परमाणु ऊर्जा विभाग, मुंबर्इ
66. सचिव, विकास बोर्ड, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
67. राष्ट्रीय बचत संगठन, नागपुर
68. उप-महालेखाकार, डाक एवं तार, कोलकाता
69. कानूनी सलाहकार, आयात-निर्यात बैंक, पी.बी. नं. 19969, मुंबर्इ-4000021
70. प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक, स्थानीय प्रधान कार्यालय:-
i. जीवन दीप बिल्डिंग, 1 मीडिलटॉन स्ट्रीट, कोलकाता
ii. सर्किल टॉप हाउस, राजा सलार्इ, चेन्नर्इ-600001
iii. लखनऊ, उत्तर प्रदेश
iv. बैंक स्ट्रीट, हैदराबाद-500001
v. हमीदा रोड़, भोपाल-462001
vi. शॉप नं. 101 से 105, सेक्टर 17-बी, चंडीगढ़
vii. नर्इ एएमएन. बिल्डिंग, मैडम कामा रोड़, मुंबर्इ-400021
viii. 9, संसद मार्ग, नर्इ दिल्ली-110001
ix. भेडरू, अहमदाबाद-380001
x. जज कोर्ट रोड़, पोस्ट बॉक्स नं. 103, पटना-800001
xi. 59, फोरेस्ट पार्क, भुवनेश्वर
xii. गुवाहाटी, असम
71. मुख्य लेखा नियंत्रक, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, लोक नायक भवन, खान मार्किट, नर्इ दिल्ली
72. स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, (मुख्य कार्यालय), द माल, पटियाला
73. स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, मुख्य कार्यालय, तिलक मार्ग, "सी" स्कीम, जयपुर
74. स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, मुख्य कार्यालय, गन फैक्ट्री, हैदराबाद
75. स्टेट बैंक ऑफ इंदौर, 5 यशवंत निवास रोड़, इंदौर
76. स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, (मुख्य कार्यालय), के.जी. रोड़, बैंगलूरू
77. स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र, सत्यनारायण रोड़ के पीछे, भावनगर, गुजरात
78. स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, पोस्ट बॉक्स नं. 34, तिरूवंनतपुरम्
79. एन.एस. शाखा, आर्थिक मामला विभाग, नर्इ दिल्ली
80. संपादक, "द इनकम टैक्स रिपोर्टर" कंपनी लॉ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (प्रा) लि. 88, त्यागराज रोड, त्यागराज नगर, चेन्नर्इ-600017
81. संपादक, चार्टर्ड सेक्रेटरी, द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया, 'आर्इसीएसआर्इ हाउस, 22, इंस्टीट्यूशनल एरिया, लोधी रोड़, नर्इ दिल्ली-110003
82. संपादक, "टैक्सेशन" 174, जोर बाग, नर्इ दिल्ली
83. संपादक, "द टैक्स लॉ रिव्यू" पोस्ट बॉक्स नं. 152, जालंधर-144001
84. संपादक, "टैक्समैन" एलार्इड सर्विसेज (प्रा) लि. 1871, कूचा चेलन, खारी बावली, दिल्ली - 110006
85. कानून मंत्रालय (कानूनी मामला विभाग), शास्त्री भवन, नर्इ दिल्ली
86. भारतीय खाद्य निगम, 16-17, बाराखंभा लेन, नर्इ दिल्ली-110001
87. आर्इएफसीआर्इ, बैंक ऑफ बड़ौदा भवन, 16, संसद मार्ग, नर्इ दिल्ली
88. आर्इडीबीआर्इ, आर्इडीबीआर्इ टावर, काफि परेड, मुंबर्इ-400005
89. आर्इसीआर्इसीआर्इ, 163, बैकबे रिक्लेमेशन, मुंबर्इ-400 020
90. नाबार्ड, पूनम चैंबर्स, डा. ऐनी बेसेंट रोड़, पी.बी. नं. 552, वर्ली, मुंबर्इ
91. राष्ट्रीय आवास बैंक, तृतीय तल, बॉम्बे लाइफ बिल्डिंग, 45, वीर नरिमन रोड़, मुंबर्इ
92. आर्इआरबीआर्इ, 19, नेताजी सुभाष रोड़, कोलकाता
93. भारत में संचालित हो रहे सभी विदेशी बैंक
94. एयर इंडिया, नर्इ दिल्ली
95. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नर्इ दिल्ली
96. उप-निदेशक (प्रशा.), एनएसएसओ (एफओडी), महालोनोबिस भवन, 6वां तल, 164, जी.एल. टैगौर रोड़, कोलकाता-700108
(संदीप सिंह)
अवर सचिव, भारत सरकार
परिशिष्ट - I
कुछ दृष्टांत
उदाहरण 1
निर्धारण वर्ष 2017-18 हेतु
(क) साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी ( पुरूष व महिला) तथा कुल वेतन वाले कर्मचारियों की स्थिति में आयकर की गणना
i) रू. 2,50,000/-,
ii) रू. 5,00,000/-,
iii) रू. 10,00,000/-,
iv) रू. 20,00,000/-, तथा
v) रू. 1,10,00,000/-
(ख) उक्त कर्मचारियों की स्थिति में टीडीएस राशि क्या होगी, उनके द्वारा उनके डीडीओ/कार्यालयों को पैन जमा नहीं कराए जाने की स्थिति में
| विवरण | रूपए (i) | रूपए (ii) | रूपए (iii) | रूपए (iv) | रूपए (v) |
| सकल वेतन आय (भत्तों सहित) | 2,50,000 | 5,00,000 | 10,00,000 | 20,00,000 | 1,10,00,000 |
| जी.पी.एफ. का अंशदान | 45,000 | 50,000 | 1,00,000 | 1,00,000 | 1,00,000 |
कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
| विवरण | रूपए (i) | रूपए (ii) | रूपए (iii) | रूपए (iv) | रूपए (v) |
| सकल वेतन | 2,50,000 | 5,00,000 | 10,00,000 | 20,00,000 | 1,10,00,000 |
| कम : धारा 80 ग के तहत कटौती | 45,000 | 50,000 | 1,00,000 | 1,00,000 | 1,00,000 |
| करयोग्य आय | 2,05,000 | 4,50,000 | 9,00,000 | 19,00,000 | 1,09,00,000 |
| उसपर देययोग्य कर | शून्य | 15,000* | 1,05,000 | 3,95,000 | 30,95,000 |
| अधिभार | 4,64,250 | ||||
| जोड़े: (i) शिक्षा उपकर @ 2% (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 % |
शून्य शून्य |
360 180 |
2100 1050 |
7,900 3950 |
61,900 30,950 |
| कुल देय कर | शून्य | 18,540 | 1,08,150 | 4,06,850 | 36,52,100 |
| धारा 206कक के अंतर्गत टीडीएस, कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुत न किए जाने पर | शून्य | 38,000 | 1,30,000 | 4,06,850 | 36,52,100 |
* धारा 87क के अंतर्गत रू. 5,000 की छूट सहित
उदाहरण -2
निर्धारण वर्ष 2017-18 हेतु
साठ वर्ष की आयु से नीचे के आश्रित विकलांग वाले कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | सकल वेतन | 4,20,000 |
| .2 | विकलांग व्यक्ति के तौर पर आश्रित (लेकिन गंभीर विकलांगता न हो) के उपचार पर खर्च की गर्इ राशि | 7,000 |
| 3 | आश्रित के रखरखाव के लिए वार्षिकी से संबंधित भारतीय जीवन बीमा निगम को दी गर्इ राशि | 60,000 |
| 4 | जीपीएफ अंशदान | 25,000 |
| 5 | भुगतान की हुर्इ एलआर्इपी | 10,000 |
| 6 | बचत खाते पर ब्याज आय | 12,000 |
कर की गणना
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | सकल वेतन | 4,20,000 |
| .2 | जमा : अन्य स्रोतों से आय बचत खाते पर ब्याज आय | रू. 12,000 |
| 3 | कुल सकल आय | 4,32,000 |
| 4 | घटाया : धारा 80घघ के अंतर्गत कटौती (केवल रू. 60,000/- तक सीमित) | 60,000 |
| 5 | घटाया : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती (i) जीपीएफ रू. 25,000/- (ii) एलआईपी रू.10,000/- : = रू. 35,000 |
35,000 |
| 6 | घटाया : बचत खाते (रू. 10,000/- तक सीमित) से ब्याज आय पर धारा 80ननक के अंतर्गत कटौती | 10,000 |
| 7 | कुल आय | 3,27,000 |
| 8 | उस पर देययोग्य आयकर ( धारा 87क के अनुसार रू. 5,000 की छूट सहित) | 2,700 |
| 9 | जोड़े : (i) शिक्षा उपकर @ 2% (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 % |
114 57 |
| 10 | कुल करयोग्य आय | 2,871 |
| 11 | तक पूर्णाकिंत | 2,870 |
उदाहरण -3
निर्धारण वर्ष 2016-17 हेतु
साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना जहां चिकित्सा उपचार पर किया गया खर्चा नियोक्ता द्वारा वहन किया गया हो (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | सकल वेतन | 5,20,000 |
| 2 | नियोक्ता द्वारा स्वयं तथा परिवार के आश्रित सदस्य पर चिकित्सा उपचार पर खर्च की गर्इ राशि | 35,000 |
| 3 | जीपीएफ अंशदान | 20,000 |
| 4 | एलआर्इसी प्रीमियम | 20,000 |
| 5 | भवन बिल्डिंग की अग्रिम अदायगी | 25,000 |
| 6 | दो बच्चों के लिए अध्यापन शुल्क | 60,000 |
| 7 | यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान में निवेश | 30,000 |
| 8 | बचत खाते पर ब्याज आय | 8,000 |
| 9 | सावधि जमा पर ब्याज आय | 15,000 |
कर की गणना
क्र.सं. |
विवरण |
रूपए |
1 |
सकल वेतन |
5,20,000 |
2 |
जमा : चिकित्सा व्यय की अदायगी के संबंध में रियायत धारा 17(2)(v) के अनुसार रू. 15,000/- से अधिक होने पर |
20,000 |
3 |
अन्य स्रोतों से आय i) बचत खाता पर ब्याज आय रू. 8,000 ii) सावधि जमा खाता पर ब्याज आय रू. 15,000 |
रू. 23,000 |
4 |
कुल सकल आय |
5,63,000 |
5 |
क. : घटा : धारा 80 ग के अंतर्गत कटौती (i) जीपीएफ रू. 20,000/- (ii) एलआर्इसी रू. 20,000/- (iii) भवन बिल्डिंग की अग्रिम अदायगी रू. 25,000/- (i(iv) दो बच्चों के लिए अध्यापन शुल्क रू. 60,000/- (v) यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान में निवेश रू. 30,000/- कुल = रू. 1,55,000/- रू. 1,50,000 तक सीमित ख. घटा : बचत खाते पर ब्याज आय (रू. 8000/- तक सीमित केवल बचत खाता ब्याज पर उपलब्ध) पर धारा 80 ननक के अंतर्गत कटौती रू. 8000/- कुल उपलब्ध कटौती रू. 1,58,000/- |
1,58,000 |
6 |
कुल आय |
4,05,000 |
7 |
उस पर देय आयकर (धारा 87क के अंतर्गत छूट के बाद) |
12,800 |
8 |
जमा : (i) शिक्षा उपकर @ 2 % (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 % |
138 |
9 |
कुल देययोग्य आयकर |
13,214 |
10 |
निम्न तक पूर्णाकिंत |
13,214 |
उदाहरण -4
निर्धारण वर्ष 2017-18 हेतु
साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी की स्थिति में दिल्ली में स्थित आवासीय भवन के संबंध में धारा 10(13क) के अंतर्गत भवन किराया भत्ते की गणना का उदाहरण (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | वेतन | 3,50,000 |
| 2 | मंहगार्इ भत्ता | 2,00,000 |
| 3 | आवास किराया भत्ता | 1,40,000 |
| 4 | दिया गया आवास किराया | 1,44,000 |
| 5 | साधारण भविष्य निधि | 36,000 |
| 6 | जीवन बीमा प्रीमियम | 4,000 |
| 7 | यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान का अंशदान | 50,000 |
कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
क्र.सं. |
विवरण |
रूपए |
1 |
वेतन + मंहगार्इ भत्ता + भवन किराया भत्ता + 3,50,000 + 2,00,000 + 1,40,000 = 6,90,000 |
6,90,000 |
2 |
कुल वेतन आय |
6,90,000 |
3 |
घटा : धारा 10 (13क) के अंतर्गत घर भवन भत्ता का न्यूनतम (क) प्राप्त एचआरए की वास्तविक राशि = 1,40,000 (ख) आय के 10 प्रतिशत से अधिक किराये पर व्यय ( मंहगार्इ भत्ते सहित यह समझकर कि मंहगार्इ भत्ता सेवानिवृत्त लाभ के लिए लिया गया है) (1,44,000 - 55,000) = 89,000 (ग) वेतन (बेसिक + डीए) का 50 प्रतिशत = 2,75,000/- |
89,000 |
|
कुल वेतन आय |
6,01,000 |
|
घटाया : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती (i) जीपीएफ रू. 36,000/- (ii) एलआर्इसी रू. 4,000/- ((iii) यूनिट लिंक्ड बीमा योजना में निवेश रू. 50,000/- कुल - रू. 1,14,000/- |
90,000 |
4 |
कुल वेतन आय |
5,11,000 |
देययोग्य कर |
27,200 |
|
जोडा : (i) शिक्षा उपकर @ 2% (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 % |
544 272 |
|
|
कुल देययोग्य आयकर |
28016 |
|
तक पूर्णाकिंत |
28020 |
उदाहरण -5
निर्धारण वर्ष 2016-17 हेतु
मुंबर्इ में गैर-सरकारी कंपनी में साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी, जिसे दस माह के लिए रियायती दर पर फ्लैट अकोमोडेशन तथा दो माह के लिए होटल में अकोमोडेशन उपलब्ध कराया गया था, की कर की गणना तथा रियायत के मूल्यांकन का उदाहरण (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | वेतन | 7,00,000 |
| 2 | बोनस | 1,40,000 |
| 3 | निशुल्क गैस, बिजली, पानी आदि (वास्तविक भुगतान कंपनी द्वारा करने पर ) | 40,000 |
| 4 (क) | रियायती दर पर आवास (दस माह के लिए ) @ रू. 36,000/- माह | 3,60,000 |
| 4 (ख) | नियोक्ता द्वारा देय होटल किराया (दो माह के लिए ) | 1,00,000 |
| 4 (ग) | कर्मचारी द्वारा वापस पाया जाने वाला किराया | 60,000 |
| 4(घ) | फर्नीचर शुल्क | 2,00,000 |
| 5 | यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान हेतु अंशदान | 50,000 |
| 6 | जीवन बीमा प्रीमियम | 10,000 |
| 7 | मान्यताप्राप्त भविष्य निधि हेतु अंशदान | 42,000 |
कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
क्र.सं. |
विवरण |
रूपए |
1 |
वेतन |
7,00,000 |
2 |
बोनस |
1,40,000 |
3 |
कुल वेतन (1+2) रियायत के मूल्यांकन हेतु |
8,40,000 |
|
रियायतों का मूल्यांकन |
|
4 (क) |
फ्लैट हेतु रियायत (10 माह के लिए वेतन का 15 प्रतिशत = रू. 1,05,000/-) तथा (वास्तविक दिया गया किराया = रू. 3,60,000) अर्थात् रू. 1,05,000/- का न्यूनतम |
|
4(ख) |
होटल हेतु रियायत : (2 माह के वेतन का 24 प्रतिशत = रू. 33,600/-) से कम तथा (वास्तविक भुगतान = रू. 1,00,000) अर्थात् रू. 33,600 |
|
4(ग) |
फर्नीचर हेतु रियायत (रू. 2,00,000), शुल्क के 10 प्रतिशत की दर पर रू. 20,000 |
|
4(ग)(i) |
[4(क)+(ख)+(ग), (1,05,000 + 33,600 + 20,000) रू. 1,58,600 का कुल घटा : प्राप्त किराया (-) रू. 60,000 = रू. 98,600 |
|
4(घ) |
जोड़ें निशुल्क गैस, बिजली, पानी आदि हेतु रियायत रू. 40,000 (+) रू. 98,600 [4(ग)(i)] = रू. 1,38,600 कुल रियायत |
1,38,600 |
5 |
कुल सकल आय (रू. 8,40,000 +1,38,600) |
9,78,600 |
6 |
कुल सकल आय |
9,78,600 |
7 |
घटाया : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती : (i) भविष्य निधि (80ग) :42,000/- (ii) एलआर्इसी (80ग) रू. 10,000/- (iii) यूनिट लिंक्ड प्लान हेतु अंशदान (80ग) रू. 50,000/- कुल = रू. 1,02,000/- धारा 80ग के अंतर्गत रू. 1,02,000 तक सीमित |
1,02,000/- |
8 |
कुल आय |
8,76,600 |
9 |
देय कर |
1,00,320 |
10 |
जोड़ा (i) शिक्षा उपकर @ 2 % (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 % |
1,003 |
11 |
कुल देययोग्य आयकर |
1,03,329 |
12 |
तक पूर्णांकित |
1,03,330 |
उदाहरण -6
निर्धारण वर्ष 2017-18 हेतु
दिल्ली में तैनात गैर-सरकारी कंपनी में साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी की स्थिति में कर की गणना तथा रियायत के मूल्यांकन तथा भवन निर्माण ऋण की अदायगी का उदाहरण (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | वेतन | 4,00,000 |
| 2 | मंहगार्इ भत्ता | 1,00,000 |
| 3 | भवन किराया भत्ता | 1,80,000 |
| 4 | विशेष कार्य भत्ता | 12,000 |
| 5 | भविष्य निधि | 60,000 |
| 6 | एलआर्इपी | 10,000 |
| 7 | एनएससी VIII अंक में जमा | 30,000 |
| 8 | घर, जो कर्मचारी द्वारा लिया गया है, हेतु उसके द्वारा दिया गया किराया | 1,20,000 |
| 9 | गृह भवन किराये को लौटाना (प्रधान) | 60,000 |
| 10 | तीन बच्चों के लिए अध्यापन शुल्क ( रू, 10,000 प्रति बालक) | 30,000 |
कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
| क्र.सं. | विवरण | रूपए | |
| .1 | सकल वेतन (बेसिक + डीए + एचआरए़ + एसडीए) | 6,92,000 | |
| घटाया : धारा 10 (13क) के अंतर्गत घर भवन भत्ता पर छूट | |||
| निम्न का न्यूनतम | |||
| (क) प्राप्त एचआरए की वास्तविक राशि | : 1,80,000 | ||
| (ख) वेतन (मंहगार्इ भत्ते सहित) के 10 प्रतिशत से अधिक किराए पर व्यय मंहगार्इ भत्ता समझकर सेवानिवृत्ति हेतु शामिल किया जाएगा ( 1,20,000-50,000) |
: = रू. 70,000 | ||
| (ग) वेतन (मंहगार्इ भत्ते सहित) का 50 प्रतिशत | रू. 2,50,000 | ||
| 70,000 | |||
| 2 | कुल देययोग्य सकल आय | 6,22,000 | |
| घटाया : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती | |||
| (i) भविष्य निधि | : रू. 60,000 | ||
| (ii) एलआर्इपी | : रू. 10,000 | ||
| (iii) एनएससी VIII अंक | : रू. 30,000 | ||
| (iv) एचबीए की पुन अदायगी | : रू. 60,000 | ||
| (v) अध्यापन शुल्क ( दो बच्चों तक सीमित) | : रू. 20,000 | ||
| कुल | : रू. 1,80,000 | ||
| 1,50,000 तक सीमित | 1,50,000 | ||
| कुल आय | 4,72,000 | ||
| उस पर/देययोग्य आयकर | 20,200 | ||
| जोड़ा : | |||
| (i) शिक्षा उपकर @ 2 % | 404 | ||
| (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 % | 202 | ||
| कुल देययोग्य आयकर | 20,806 | ||
| तक पूर्णाकिंत | 20,810 | ||
उदाहरण - 7
निर्धारण वर्ष 2017-18
क. साठ वर्ष की आयु से अधिक लेकिन 80 वर्ष की आयु से कम तथा निम्न सकल पेंशन वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना
(i) रू. 4,50,000/-
(ii) रू. 8,00,000/-
(iii) रू. 12,50,000/-
ख. उक्त कर्मचारी की स्थिति में टीडीएस राशि क्या होगी, उनके द्वारा उनके डीडीओ/कार्यालयों को पैन जमा न कराए जाने की स्थिति में।
| विवरण | रूपए (i) | रूपए (ii) | रूपए (iii) |
| सकल पेंशन | 4,50,000 | 8,00,000 | 12,50,000 |
| पी.एफ. का अंशदान | 70,000 | 1,00,000 | 1,50,000 |
कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
| विवरण | रूपए (i) | रूपए (ii) | रूपए (iii) |
| सकल पेंशन | 4,50,000 | 8,00,000 | 12,50,000 |
| घटाया : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती | 70,000 | 1,00,000 | 1,50,000 |
| करयोग्य आय | 3,80,000 | 7,00,000 | 11,00,000 |
| उस पर देय कर (धारा 87क के अंतर्गत छूट के बाद) | 3,000 | 60,000 | 1,50,000 |
| जोड़ा : | |||
| (i) शिक्षा उपकर @ 2 % | 120 | 1200 | 3000 |
| (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 % | 60 | 600 | 1500 |
| कुल देययोग्य आयकर | 3,180 | 61,800 | 1,54,500 |
| कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुत न करने की स्थिति में धारा 206कक के अंतर्गत टीडीएस | 24,000 | 90,000 | 1,70,000 |
उदाहरण - 8
निर्धारण वर्ष 2017-18 हेतु
क. 80 वर्ष की आयु से अधिक तथा निम्न सकल पेंशन वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना
(i) रू. 5,00,000/-
(ii) रू. 8,00,000/-
(iii) रू. 12,50,000/-
ख. उक्त कर्मचारी की स्थिति में टीडीएस राशि क्या होगी, उनके द्वारा उनके डीडीओ/कार्यालयों को पैन जमा न कराए जाने की स्थिति में।
| विवरण | रूपए (i) | रूपए (ii) | रूपए (iii) |
| सकल पेंशन | 5,00,000 | 8,00,000 | 12,50,000 |
| पी.एफ. का अंशदान | 80,000 | 1,20,000 | 1,50,000 |
कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना
| विवरण | रूपए (i) | रूपए (ii) | रूपए (iii) |
| सकल पेंशन | 5,00,000 | 8,00,000 | 12,50,000 |
| घटाया : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती | 80,000 | 1,20,000 | 1,50,000 |
| करयोग्य आय | 4,20,000 | 6,80,000 | 11,00,000 |
| उस पर देय | शून्य | 36,000 | 1,30,000 |
| जोड़ा : | |||
| (i) शिक्षा उपकर @ 2 % | 720 | 2600 | |
| (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 % | 360 | 1300 | |
| कुल देययोग्य आयकर | शून्य | 37,080 | 1,33,900 |
| ख. कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुत न करने की स्थिति में धारा 206कक के अंतर्गत टीडीएस | शून्य | 76,000 | 1,60,000 |
उदाहरण - 9
धारा 10(13क) के अंतर्गत छूट
1- 31.10.2015 से एक्सवार्इजेड लि. के साथ नियोजित श्री. ए, ने निम्नलिखित परिलब्धियां प्राप्त की :
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | मूल वेतन प्रति माह | 13,000 |
| 2 | जुलार्इ, 2015 में प्राप्त वर्ष के लिए बोनस | 72,000 |
| 3 | प्रति माह नियोक्ता द्वारा क्लब सुविधा (केवल निजी प्रयोग के लिए) व्यय | 700 |
| 4 | प्रतिमाह गृह किराया भत्ता | 2,800 |
| 5 | यूआरपीएफ में प्रतिमाह नियोक्ता का अंशदान (श्री ए. भी समान अंशदान देते हैं) | 1,000 |
| प्रभावी तिथि 01.11.2015 से, श्री ए. निम्नलिखित वेतन के साथ पीक्यूआर लि. से जुडे़ | ||
| 1 | मूल वेतन | 18,000 |
| 2 | प्रति माह गृह किराया भत्ता | 1,600 |
| 3 | प्रति माह नियोक्ता द्वारा क्लब सुविधा (केवल निजी प्रयोग के लिए) व्यय | 1,100 |
| 4 | कार्यालय तथा निवास के बीच यात्रा के लिए कार का प्रयोग - नियोक्ता व्यय प्रतिमाह | 600 |
| 5 | आरपीएफ में प्रतिमाह नियोक्ता का अंशदान (श्री ए. भी समान अंशदान देते हैं) | 2,000 |
| श्री ए. के अन्य विवरण निम्नानुसार हैं | ||
| 1 | श्री ए अमृतसर में मासिक किराये का भुगतान कर रहते है | 3,500 |
| 2 | अन्य स्रोतों से श्री ए. की आय | 95,000 |
| 3 | एलआर्इसी/पीपीआर/एनएससी आदि को श्री ए का अंशदान | 20,000 |
| निर्धारण वर्ष 2017-18 के लिए श्री ए की आय तथा कर देयता की गणना करें | ||
कर की गणना
| क्र.सं. | विवरण | रूपए | |
| 1 | वेतन से आय | ||
| एक्सवार्इजेड लि. द्वारा | |||
| मूल वेतन (रू. 13,000 X 7) | 91,000 | ||
| बोनस | 7,200 | ||
| क्लब सुविधा (रू. 700 X 7) रूपए | रूपए | 4,900 | |
| एच.आर.ए. (रू. 2,800 X 7) | 19,600 | ||
| घटा : धारा 10(13क) के अंतर्गत छूट | 15,400 | 4,200 | |
| यूआरपीएफ हेतु नियोक्ता अंशदान | 1,07,300 | ||
| (ख) पीक्यूआर लि. से | रूपए | ||
| मूल वेतन (रू. 18,000 X 5) | 90,000 | ||
| एच.आर.ए. (रू. 1,600 X 5) | 8,000 | ||
| घटा : धारा 10(13क) के अंतर्गत छूट | 8000 | ||
| क्लब सुविधा (रू. 1,100 X 5) | 5,500 | ||
| कार की सुविधा (रियायतानुसार करयोग्य नहीं हैं) | 15,400 | ||
| आर.पी.एफ. हेतु नियोक्ता अंशदान | 95,500 | ||
| सकल वेतन | 2,02,800 | ||
| घटा : कटौती | ---- | ||
| निविल वेतन | 2,02,800 | ||
| 2 | अन्य स्रोतों से आय | 95,000 | |
| कुल सकल आय | 2,97,800 | ||
| घटा : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती | |||
| : एलआर्इसी/पीपीएफ /एनएससी हेतु अंशदान | रू. 20,000 | ||
| : आरपीएफ हेतु अंशदान (रू. 2,000 x 5) | रू. 10,000 | 30,000 | |
| कुल आय | 2,67,800 | ||
| कर देयता की गणना | |||
| रू. 2,67,800 पर देययोग्य कर | 1,780 | ||
| घटा : धारा 87क के अंतर्गत छूट | 1,780 | ||
| निविल देययोग्य आय | शून्य | ||
| जमा : अधिभार | शून्य | ||
| जमा : शिक्षा उपकर @ 2 प्रतिशत | -- | ||
| जमा : उच्च तथा माध्यमिक शिक्षा उपकर @ 1 प्रतिशत | -- | ||
| कुल देययोग्य कर | शून्य | ||
उदाहरण 10
2. धारा 80ग के अंतर्गत गृह ऋण तथा कटौती पर ब्याज के लिए करयोग्य आय तथा भत्ते, कटौती की एक गणना
श्री एक्स, दिल्ली में एक केंद्र सरकार के अधिकारी, मूल वेतन में रू. 23,720, ग्रेड वेतन रू. 7,600, निर्धारित दरों पर डीए, रू. 3200 की दर पर परिवहन भत्ता उस पर महंगार्इ भत्ता तथा मूल वेतन का 30 प्रतिशत एचआरए ग्रेड वेतन (अपने स्वयं के घर में रहने के माध्यम से) प्राप्त कर रहे हैं। उसकी बढ़ोत्तरी की तिथि 1 जुलार्इ है। निम्नलिखित उसकी आय के अन्य ब्यौरे है। निर्धारण वर्ष 2015-16 के लिए उसकी करयोग्य आय तथा देययोग्य कर की गणना करें।
| क्र.सं. | विवरण | रूपए |
| 1 | विभागीय परीक्षा की उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन के लिए पारिश्रमिक | 3,000 |
| 2 | निजी निकाय के लिए किए गए कार्य के लिए शुल्क (शुल्क का 1/3वां भाग सरकार द्वारा प्रतिधारित किया गया है) | 6,000 |
| 3 | जी.पी.एफ. प्रति माह हेतु अंशदान | 4,700 |
| 4 | जी.पी.एफ. प्रति माह हेतु वित्त पोषित डाक जीवन बीमा प्रीमियम | 280 |
| 5 | प्रति माह केंद्र सरकार कर्मचारी समूह बीमा योजना में हेतु अंशदान | 500 |
| 6 | जीवन बीमा प्रीमियम (1.04.2012 से पूर्व अपनी पत्नी के नाम पर ली गर्इ रू. 1,00,000 की जीवन बीमा पॉलिसी के तौर पर) | 10,500 |
| 7 | लोक भविष्य निधि हेतु अंशदान | 10,000 |
| 8 | 1.04.1999 के पश्चात् उधार लिए गए एचडीएफसी ऋण का पुर्नभुगतान र्इएमआर्इ रू. 25,000 (रू. 95,000 के ऋण के लिए, रू. 2,05,000 ब्याज हेतु) | 3,00,000 |
कर की गणना
| क्र.सं. | विवरण | रूपए | |
| 1 | वेतन से आय | ||
| मूल वेतन @ रू. 23,720 प्रति माह | |||
| (मार्च से जून 16) | 94,880 | ||
| @ रू. 24,660 प्रति माह (जुलार्इ 2014 से फरवरी 2015) | 1,97,280 | 2,92,160 | |
| 91,200 | |||
| ग्रेड वेतन @ रू. 7,600 प्रति माह | |||
| मंहगार्इ भत्ता | |||
| 1.3.2014 से 30.06.2014 @ 100 प्रतिशत अर्थात् रू. 31,320 प्रति माह | 1,25,280 | ||
| 1.7.2014 से 31.12.2014 @ 107 प्रतिशत अर्थात् रू. 34,518 प्रति माह | 2,07,108 | ||
| 1.1.2015 से 28.02.2015 @ 113 प्रतिशत (स्वीकृत) अर्थात् | |||
| रू. 36,454 प्रति माह | 72,908 | 4,05,296 | |
| गृह किराया भत्ता | |||
| @ मूल वेतन के 30 प्रतिशत पर + ग्रेड वेतन | |||
| 1.3.2014 से 30.6.2014 @ रू. 9,396 | 33,584 | ||
| 1.07.2014 से 28.2.2015 @ रू. 9,678 | 77,424 | 1,15,008 | |
| परिवहन भत्ता | |||
| 1.3.2014 से 30.6.2014 @ रू. 6,400 प्रतिमाह | 25600 | ||
| 1.7.2014 से 31.12.2014 @ रू. 6,624 प्रतिमाह | 39,744 | ||
| 1.1.2015 से 28.2.2015 रू. 6,816 प्रति माह | 13,632 | ||
| 78,976 | |||
| घटा : धारा 10(14) के अंतर्गत 800 प्रतिमाह की दर से छूट | 9600 | 69,376 | |
| 9,73,040 | |||
| पारिश्रमिक | 3,000 | ||
| शुल्क (उसके द्वारा सुरक्षित 2/3 भाग) | 4000 | ||
| कुल वेतन | 9,80,040 | ||
| घटा : मानक कटौती | - | ||
| निवल वेतन | 9,80,040 | ||
| 2 | गृह संपत्ति से आय | ||
| शून्य पर समझी गर्इ, धारा 23(2)(क) के अंतर्गत स्व-सत्यापित | |||
| घटा : एचडीएफसी ऋण पर ब्याज | 2,00,000(-) | 2,00,000 | |
| सकल कुल आय | 7,80,040 | ||
| घटा : धारा 80 ग के अंतर्गत कटौती | |||
| रू. 4,700/- प्रतिमाह पर जीपीएफ | 56,400 | ||
| रू. 500/- प्रतिमाह पर सीजीर्इजीआर्इएस | 6,000 | ||
| जीवन बीमा प्रीमियम | 10,500 | ||
| एचडीएफसी ऋण का पुर्नभुगतान | 95,000 | ||
| लोक भविष्य निधि में जमा | 10,000 | ||
| 1,77,900 | |||
| 1,50,000 | |||
| अधिकतम कराधान आय हेतु सीमा | 6,30,040 | ||
| कर देयता की गणना | |||
| देययोग्य कर | 51,008 | ||
| जमा : अधिभार | - | ||
| जमा : शिक्षा उपकर | 1020 | ||
| कुल कर देयता | 52,538 | ||
परिशिष्ट -II
प्रपत्र सं. 12खक
(नियम 26क(2)(ख) को देखें)
रियायत के विवरण को दर्शाते हुए वर्णन, उसकी राशि सहित वेतन के स्थान पर अन्य अनुषंगी लाभ अथवा सुविधाएं तथा मुनाफा
1) नियोक्ता का नाम तथा पता :
2) टैन
3) कर्मचारी की टीडीएस आंकलन श्रेणी :
4) कर्मचारी का नाम, पद तथा पैन :
5) यदि कर्मचारी निदेशक अथवा कंपनी में पर्याप्त रूचि रखने वाला व्यक्ति हो तो (जहां नियोक्ता ही कंपनी हो) :
6) कर्मचारी के "वेतन" विषय के अंतर्गत आय (रियायत को छोड़कर) :
7) वित्त वर्ष :
8) रियायत मूल्यांकन
| क्र.सं. | रियायत का प्रकार (नियम 3 देखें) | नियम के अनुसार रियायत राशि (रू.) | कर्मचारी द्वारा वसूली गर्इ राशि, यदि हो (रू.) | कर हेतु देययोग्नीय रियायत राशि कॉलम (3)-कॉलम (4) (रू.) |
| (1) | (2) | (3) | (4) | (5) |
| 1 | भवन | |||
| 2 | कार/अन्य वाहन | |||
| 3 | सफार्इकर्मी, माली, चौकीदार अथवा निजी परिचारक | |||
| 4 | गैस, बिजली, पानी | |||
| 5 | ब्याज शुल्क अथवा रियायती ऋण | |||
| 6 | अवकाश व्यय | |||
| 7 | नि:शुल्क अथवा रियायती यात्रा | |||
| 8 | निशुल्क भोजन | |||
| 9 | निशुल्क शिक्षा | |||
| 10 | उपहार, वाउचर आदि | |||
| 11 | क्रेडिट कार्ड व्यय | |||
| 12 | क्लब व्यय | |||
| 13 | कर्मचारी द्वारा चल संपत्ति का प्रयोग | |||
| 14 | कर्मचारी को संपत्ति का स्थानांतरण | |||
| 15 | अन्य किसी लाभ/सुविधा/ सेवा/विशेष लाभ की राशि | |||
| 16 | स्टॉक विकल्प (गैर-अर्हता विकल्प) | |||
| 17 | अन्य लाभ अथवा सुविधाएं | |||
| 18 | रियायत की कुल राशि | |||
| 19 | 17(3) के अनुसार वेतन के स्थान पर लाभ की कुल राशि |
9. कर का विवरण :-
(क) धारा 192(1) के अंतर्गत कर्मचारी के वेतन से काटा गया कर |
........................... |
(ख) धारा 192 (1क) के अंतर्गत कर्मचारी की ओर से नियोक्ता द्वारा दिया गया कर |
........................... |
(ग) दिया गया कुल कर |
........................... |
(घ) सरकारी कोष में किए गए भुगतान की तिथि |
............................ |
नियोक्ता द्वारा घोषणा
मैं.....................................पुत्र...................................(पद)................................के तौर पर कार्यरत, की ओर से................................(नियोक्ता का नाम) एतद्द्वारा घोषणा करता हूं कि उक्त दी गर्इ जानकारी लेखा पुस्तकें, प्रपत्र तथा अन्य प्रासंगिक आंकड़ों अथवा हमारे पास मौजूद जानकारी पर आधारित हैं तथा ऐसे प्रत्येक रियायत की राशि का विवरण धारा 17 तथा इस आधार पर बनाए गए नियम के अनुसार हैं और ऐसी जानकारी सत्य और सही है।
उत्तरदायी व्यक्ति के हस्ताक्षर
स्थान................. |
कर कटौती हेतु |
दिनांक................... |
पूरा नाम...................... |
|
पद............................... |
परिशिष्ट IIक
प्रपत्र सं. 12खख
(नियम 26ग देखें)
| 1. कर्मचारी का नाम तथा पता | |||
| 2. कर्मचारी की स्थार्इ खाता संख्या | |||
| 3 वित्त वर्ष | |||
| दावे का ब्यौरा तथा उसका प्रमाण | |||
| क्र.सं. | दावे का प्रकार | राशि (रू.) | प्रमाण ब्यौरा |
| (1) | (2) | (3) | (4) |
| 1 | गृह किराया भत्ता : | ||
| (i) मकान मालिक का दिया गया किराया | |||
| (ii) मकान मालिक का नाम | |||
| (iii) मकान मालिक पता | |||
| (iv) मकान मालिक की स्थार्इ खाता संख्या | |||
| टिप्पणी : स्थार्इ खाता संख्या प्रस्तुत की जाएगी यदि पिछले वर्ष के दौरान दिया गया कुल किराया एक लाख रूपए से अधिक होता हो | |||
| 2 | यात्रा अवकाश छूट अथवा सहायता | ||
| 3 | उधार पर ब्याज की कटौती | ||
| (i) ऋणदाता को देययोग्य/दिया गया ब्याज | |||
| (ii) ऋणदाता का नाम | |||
| (iii) ऋणदाता का पता | |||
| (iv) ऋणदाता की स्थार्इ खाता संख्या | |||
| (क) वित्त संस्थान (यदि हो) | |||
| (ख) नियोक्ता (यदि हो) | |||
| (ग) अन्य | |||
| 4 | अध्याय VI-क के अंर्तगत कटौती | ||
| (क) धारा 80ग, 80गगग और 80गगघ | |||
| (i) धारा 80ग | |||
| (क) ...................... | |||
| (ख) ...................... | |||
| (ग) ...................... | |||
| (घ) ...................... | |||
| (ड़) ...................... | |||
| (च) ...................... | |||
| (छ) ...................... | |||
| (ii) धारा 80गगग | |||
| (iii) धारा 80गगघ | |||
| (ख) अध्याय VI-क के अंतर्गत अन्य धाराएं (उदाहरण 80ड़, 80छ, 80ननक आदि) | |||
| (i) धारा...................... | |||
| (ii) धारा...................... | |||
| (iii) धारा...................... | |||
| (iv)धारा ...................... | |||
| (v) धारा...................... | |||
| सत्यापन | |||
| मैं,..........................,पुत्र/पुत्री..............................एतद्द्वारा प्रमाणित करता हूँ कि उक्त दी गर्इ सूचना सही और पूरी है। | |||
| स्थान........................ | |||
| तिथि........................ | (कर्मचारी के हस्ताक्षर) | ||
| पद.......................... | पूरा नाम | ||
परिशिष्ट III
स्त्रोत से कर कटौती के परिपत्र की बिंदु सं. 4.4.2.1-आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वेतन से आयकर कटौती-वित्त वर्ष 2015-16
पुस्तक प्रविष्टि द्वारा टीडीएस भुगतान की स्थिति में प्रधान निर्धारण अधिकारी, कोष अधिकारी द्वारा विवरण का अनिवार्य दाखिलीकरण
1. टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर प्रपत्र 24छ को तैयार करने तथा प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया
प्रपत्र 24छ डीआर्इटी (पद्धति), दिल्ली द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना (फाइल फारमेट) के अनुसार पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ (बाद में निर्धारण अधिकारी के तौर पर संदर्भित) द्वारा तैयार किया जाना चाहिए जो टिन की वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर उपलब्ध है। निर्धारण अधिकारी चाहे तो इन-हाउस सुविधाओं, थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड र्इ-गर्वेनेंस अवसंरचना लिमिटेड (राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड), जो टिन वेबसाइट www.tin-nsdl.com से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है, द्वारा विकसित प्रपत्र प्रपत्र 24छ विवरणी प्रस्तुति यूटिलिटी (आरपीयू) के प्रयोग द्वारा प्रपत्र 24छ तैयार किया जाना चाहिए।
प्रपत्र 24छ को तैयार करने के बाद निर्धारण अधिकारी को फाइल मान्यकरण यूटिलिटी (एफवीपी), जो टिन वेबसाइट पर निशुल्क उपलब्ध हैं, का प्रयोग कर इसे मान्यकृत करना आपेक्षित है।
निर्धारण अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित वास्तविक विवरण सांख्यिकी रिपोर्ट के साथ सीडी/डीवीडी/पैन ड्रार्इव में 'एफवीपी फाइल, एफवीपी के माध्यम से एक बार फाइल मान्यकृत होने पर टिन-सुविधा केंद्र पर प्रस्तुत की जानी चाहिए। टिन-सुविधा केंद्र पर प्रपत्र 24छ की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित एक रसीद निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध करार्इ जाएगी। निर्धारण अधिकारी टिन वेबसाइट पर प्रपत्र24छ की स्थिति देख सकते हैं।
पुस्तक पहचान संख्या (बिन) प्रपत्र 24छ में प्रतिवेदित वैध टैन के साथ दर्ज प्रत्येक डीडीओ हेतु जनित की जाएगी जिसे प्रपत्र 24छ में निर्दिष्ट र्इ-मेल आर्इडी पर निर्धारण अधिकारी को आगे प्रसारित किया जाएगा। निर्धारण अधिकारी को संबंधित डीडीओ को बिन विवरण देने की आवश्यकता है। बिन को त्रैमासिक र्इ-टीडीएस/टीसीएस विवरण में डीडीओ द्वारा उद्धृत किया जाना है। बिन में प्रपत्र 24छ की रसीद संख्या, डीडीओ क्रमांक संख्या तथा स्थानांतरण वाउचर की तिथि सन्निहित है।
निर्धारण अधिकारी को कटौतीदाता द्वारा काटे गए कर के संबंध में माह के अंत से दस दिनों के भीतर प्रपत्र 24छ को प्रस्तुत करना तथा उसे उस माह के लिए सूचित करना आपेक्षित है। 'माह-वित्त वर्ष' के लिए केवल एक नियमित प्रपत्र 24छ जमा किया जा सकता है।
1.1 प्रपत्र 24छ में संशोधन
निर्धारण अधिकारी टिन केंद्रीय प्रणाली पर स्वीकृत प्रपत्र 24छ के किसी संशोधन अथवा निरसन के लिए संशोधित प्रपत्र 24छ को पेश कर सकते हैं। संशोधित प्रपत्र 24छ की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित प्रपत्र 24छ के समान है। सीडी/पैन ड्रार्इव पर कॉपी की हुए मान्यकृत संशोधित प्रपत्र 24छ (एफवीपी फाइल) टिन-सुविधा केंद्र हेतु मूल प्रपत्र 24छ तथा एसएसआर की अंनतिम रसीद के साथ जमा किया जाना है। टिन-सुविधा केंद्र पर संशोधित प्रपत्र 24छ की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर 15 अंको वाले टोकन नं. सन्निहित रसीद निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध करार्इ जाएगी। निर्धारण अधिकारी टिन वेबसाइट पर प्रपत्र 24छ की स्थिति देख सकते हैं।
2. टिन वेबसाइट पर प्रपत्र 24छ का ऑनलाइन अपलोड :
टिन वेबसाइट पर प्रपत्र 24छ के ऑनलाइन अपलोड के लिए लेखा कार्यालय पहचान संख्या (निर्धारण अधिकारीर्इएन) जरूरी हैं। ऑनलाइन निर्धारण अधिकारीर्इएन पंजीकरण के लिए निर्धारण अधिकारी को टिन-सुविधा केंद्र के माध्यम से कम से कम एक प्रपत्र 24छ को जमा करने की आवश्यकता हैं। निर्धारण अधिकारीर्इएन पंजीकरण के पश्चात् निर्धारण अधिकारी टिन वेबसाइट पर निर्धारण अधिकारी खाते के द्वारा प्रपत्र 24छ को जमा कर सकते है। प्रपत्र 24छ की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित प्रपत्र 24छ (टिन-सुविधा केंद्र पर जमा कराए गए) के समान हैं। मान्यकृत प्रपत्र 24छ संशोधित फाइल (.fvu फाइल) टिन वेबसाइट पर अपलोड की जानी हैं। ऑनलाइन अपलोड में एसएसआर जमा करने की आवश्यकता नहीं है। टिन केंद्रीय प्रणाली पर स्वीकृत प्रपत्र 24छ हेतु 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित ऑनलाइन रसीद जनित तथा प्रदर्शित की जाएगी तथा निर्धारण अधिकारी को दिखार्इ जाएगी। रसीद का प्रारूप टिन-सुविधा केंद्र द्वारा जारी रसीद के समान हैं।
प्रपत्र 24छ के ऑनलाइन अपलोड के लिए निर्धारण अधिकारी हेतु कोर्इ प्रभार देययोग्नीय नहीं हैं।
लॉगिन पर निर्धारण अधिकारी बिन विवरण को देख/डाउनलोड तथा जनसंख्कीय विवरण को अद्यतन कर सकते हैं।
पंजीकरण तथा प्रपत्र 24छ के ऑनलाइन अपलोडिंग के लिए कोर्इ डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) आवश्यक नहीं है।
2.1 टिन वेबसाइट पर संशोधित प्रपत्र 24छ की ऑनलाइन अपलोडिंग
निर्धारण अधिकारी टिन केंद्रीय प्रणाली पर स्वीकृत प्रपत्र 24छ के किसी संशोधन अथवा निरसन के लिए संशोधित प्रपत्र 24छ को पेश कर सकते हैं। संशोधित प्रपत्र 24छ की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित प्रपत्र 24छ के समान हैं। मान्यकृत प्रपत्र 24छ संशोधित प्रपत्र (.fvu फाइल) टिन वेबसाइट पर निर्धारण अधिकारी खाते के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड की जा सकती है। टिन केंद्रीय प्रणाली पर स्वीकृत प्रपत्र 24छ के संशोधन हेतु 15 अंकों वाले टोकन नंबर सिन्न्हित आनलाइन रसीद निर्धारण अधिकारी के लिए जनित तथा प्रदर्शित होगी। रसीद का प्रारूप टिन-सुविधा केंद्र द्वारा जारी रसीद के समान है। ऑनलाइन अपलोड में मूल प्रपत्र 24छ की अंनतिम रसीद तथा एसएसआर को जमा करने की आवश्यकता नहीं है।
3. अक्सर पूछे जाने वाले सवालों तथा विस्तृत विवरण के लिए निर्धारण अधिकारी को सलाह दी जाती है कि वह टिन वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर लॉगिन करें।
परिशिष्ट IV
वेतन एवं लेखा अधिकारी (निर्धारण अधिकारी/जिला कोषागार अधिकारी (डीटीओ/आहरण एवं संवितरण अधिकारी (सीडीडीओ) द्वारा मासिक प्रपत्र सं. 24छ विवरण की प्रस्तुति
1. किस आयकर नियम के अंतर्गत प्रपत्र 24छ को दाखिल करना चाहिए ?
आयकर विभाग अधिसूचना सं. 41/2010 दिनांक 31, मर्इ 2010 आयकर नियम 30 का संशोधन करता हैं जो अनिवार्य करता है कि सरकारी कार्यालय कि स्थिति में जहां चालान (बैंक में कर जमा करने से संबधित) की प्रस्तुति के बिना केंद्र सरकार को कर का भुगतान किया जाता है, प्रासंगिक पीएओ/सीडीडीओ/ डीटीओ अथवा समकक्ष सरकारी कार्यालय (इस दस्तावेज में यहां निर्धारण अधिकारीे के तौर पर निर्दिष्ट) को मासिक आधार पर प्रपत्र 24छ जमा करना आपेक्षित है।
2. कौन प्रासंगिक प्रधाननिर्धारण अधिकारी/सीडीडीओ/डीटीओ हैं, कौन प्रपत्र 24छ दाखिल करने के लिए उत्तरदायी हैं ?
एक प्रासंगिक प्रधाननिर्धारण अधिकारी/सीडीडीओ/डीटीओ वह कार्यालय हैं जिसकों कटौती कराने वाला/डीडीओ (टैन धारक) पुस्तक समायोजन के माध्यम से टीडीएस/टीसीएस के प्रेषण की सूचना देता है। सामान्य तौर पर केंद्र सरकार का डीडीओ अपने संबंधित वेतन एवं संवितरण अधिकारी (प्रधाननिर्धारण अधिकारी) को पुस्तक प्रविष्टि के माध्यम से टीडीएस की सूचना देते हैं तथा राज्य सरकार के डीडीओ अपने संबंधित जिला कोषागार अधिकारी को पुस्तक प्रविष्टि के माध्यम से टीडीएस की सूचना देते हैं। ऐसे प्रधाननिर्धारण अधिकारी तथा डीटीओ को मासिक आधार पर प्रपत्र 24छ जमा करना आपेक्षित है।
यहां आहरण एवं संवितरण अधिकारी (सीडीडीओ) की ऐसे भी उदाहरण हैं जब राज्य के एजी को प्रत्यक्ष तौर पर पुस्तक प्रविष्टि के माध्यम से सूचना देते हैं। उदाहरण के लिए, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग आदि। ऐसे सीडीडीओ को मासिक आधार पर प्रपत्र 24छ जमा करना आपेक्षित है। परिशिष्ट III में योजनाबद्ध आरेख विभिन्न परिस्थितियों में प्रपत्र 24छ दाखिल करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति की स्थिति स्पष्ट करता है।
3. क्या समान कार्यालय/अधिकारी डीडीओ तथा निर्धारण अधिकारीे के तौर पर कार्य कर सकता है ?
सामान्य तौर पर, पीएओ कार्यालय वह हैं जिसको डीडीओ टीडीएस की सूचना देता है तथा इसलिए, दोनों अलग-अलग कार्यालयों से होते हैं। बहरहाल, जहां डीडीओ और निर्धारण अधिकारीे समान हैं, सीडीडीओ की स्थिति में, वहां प्रपत्र 24छ की सांख्यकीय सूचना उसके वरिष्ठ अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित होनी चाहिए।
4. एआर्इएन क्या है तथा किसे आवेदन करना चाहिए ?
लेखा कार्यालय पहचान संख्या (एआर्इएन) एक विशिष्ट प्रकार के सात अंकों की संख्या हर जो प्रत्येक निर्धारण अधिकारी को आयकर निदेशालय द्वारा (पद्धति), दिल्ली द्वारा आवंटित की जाती है। प्रत्येक निर्धारण अधिकारी की इस संख्या द्वारा प्रणाली में विशिष्ट प्रकार से पहचान होती है। निर्धारण अधिकारीे को टीडीएस कार्यालय के क्षेत्राधिकार में एआर्इएन हेतु आवेदन करना आपेक्षित है। एआर्इएन आवेदन टिन साइट से डाउनलोड की जा सकती है। प्रत्येक एआर्इएन धारक को प्रपत्र 24छ को जमा करना आपेक्षित है।
प्रत्येक डीडीओ की कर कटौती तथा संग्रहण खाता संख्या के द्वारा प्रणाली में पहचान होती है। यह संख्या आयकर विभाग द्वारा आवंटित होती है।
5. लेखा कार्यालय पहचान संख्या (एआर्इएन) आवेदन को कहां जमा किया जाना चाहिए ?
एआर्इएन आवंटन हेतु विधिवत भरे तथा हस्ताक्षरित आवेदन सीआर्इटी (टीडीएस) क्षेत्राधिकार के पीएओ/सीडीडीओ/डीटीओ द्वारा वास्तविक रूप से जमा किया जाना चाहिए। परिपूरित तथा सही एआर्इएन आवेदन पत्र क्षेत्राधिकार सीआर्इटी (टीडीएस) द्वारा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड र्इ-गर्वनेंस अवसंचरना लिमिटेड (राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड), टाइम्स टॉवर, प्रथम तल, कमला मिल्स कंपाउंड, सेनापति बापत मार्ग, लोअर परेल, मुंबर्इ-400013 पर निर्धारण अधिकारी एआर्इएन के आवंटन की सिफारिश करते हुए पीएओ/सीडीडीओ/डीटीओ को अग्रेषित किया जाएगा।
6. प्रपत्र 24छ के माध्यम से कौन सी सूचना जमा की जानी चाहिए ?
प्रत्येक निर्धारण अधिकारी को पृथक रूप से हर प्रकार की कटौती/संग्रहण की जानकारी अर्थात् उसके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत प्रत्येक डीडीओ द्वारा दिया गया टीडीएस-वेतन/टीडीएस गैर-वेतन/टीडीएस-गैर-वेतन गैर-निवासी/टीसीएस, देते हुए प्रत्येक माह एक पूरा, सत्य तथा समेकित प्रपत्र 24छ प्रस्तुत करना चाहिए।
7. प्रपत्र 24छ को कहां जमा किया जाना चाहिए ?
प्रपत्र 24छ केवल टिन-सुविधा केंद्र पर सीडी/पैन ड्रार्इव में केवल इलैक्ट्रानिक रूप में अथवा वेबपोर्टल www.tin-nsdl.com पर निर्धारण अधिकारी के खाते के माध्यम से ऑनलाइन प्रस्तुत किया जाना चाहिए। प्रपत्र सं. 24छ को ऑनलाइन जमा करने की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। अंनतिम रसीद संख्या (पीआरएन) प्रपत्र 24छ की प्राप्ति रसीद के तौर पर जारी की जाएगी।
8. ऑनलाइन सुविधा के लिए पंजीकरण कैसे करें ?
टिन वेंबसाइट www.tin-nsdl.com के माध्यम से ऑनलाइन प्रपत्र 24 छ भरने के लिए एओ खाते के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। एओ खाते के लिए पंजीकरण केवल एक बार आपेक्षित है। निर्धारण अधिकारी को, एओ खाते के पंजीकरण हेतु नो योर कस्टमर (केवार्इसी) मानदंडों के अनुपालन में कम से कम एक बार टिन-एफसी पर प्रपत्र 24छ जमा कराना आपेक्षित हैं। पंजीकरण के बाद, निर्धारण अधिकारी के लिए यह विकल्प मौजूद हैं कि वह या तो टिन-सुविधा केंद्र पर सीडी/पैन ड्रार्इव के द्वारा अथवा ऑनलाइन प्रपत्र 24छ जमा करें।
9. एओ खाते के साथ किस प्रकार की कार्यक्षमताएं उपलब्ध हैं ?
एओ खाते के माध्यम से, निर्धारण अधिकारी भरे हुए प्रपत्र 24छ की स्थिति, बिन (पुस्तक पहचान संख्या) विवरण प्राप्त, एओ प्रोफाइल को अद्यतन तथा प्रपत्र 24छ को अपलोड कर सकता है। स्टेटस ट्रेकिंग एआर्इएन तथा प्रपत्र 24छ की संबंधित अंनतिम रसीद संख्या (पीआरएन) पर आधारित है।
10. क्या निर्धारण अधिकारी पेपर के रूप में प्रपत्र 24छ प्रस्तुत कर सकता है ?
नहीं, प्रपत्र 24छ केवल इलैक्ट्रानिक रूप से जमा किया जाना है।
11. क्या निर्धारण अधिकारी आयकर कार्यालय में इलैक्ट्रानिक रूप से तैयार प्रपत्र 24छ को जमा कर सकता है ?
नहीं, इलैक्ट्रानिक रूप से तैयार प्रपत्र 24छ केवल टिन-सुविधा केंद्र अथवा ऑनलाइन जमा किया जाना है।
12. प्रपत्र 24 छ में क्या-क्या शामिल है ?
प्रत्येक प्रपत्र 24छ आयकर विभाग (आर्इटीडी) द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए। प्रपत्र 24छ में शामिल हैं :-
• निर्धारण अधिकारी द्वारा भरे हुए प्रपत्र 24छ का विवरण (एआर्इएन, नाम, जनसंख्यिकीय जानकारी, संपर्क विवरण)
• मंत्रालय/राज्य की जानकारी सहित निर्धारण अधिकारी (केंद्र/राज्य सरकार) की श्रेणी
• स्टेटमेंट का विवरण ( माह तथा वर्ष जिसके लिए प्रपत्र 24छ भरा जाना है)
• भुगतान सारांश, कटौती का प्रकार (टीडीएस-वेतन/टीडीएस गैर-वेतन/टीडीएस-गैर वेतन गैर निवासी/टीडीएस) के अनुसार
• डीडीओ वार भुगतान विवरण (डीडीओ का टैन, नाम, जनसांख्यकीय विवरण, कुल दिया गया कर तथा सरकारी खाते (ए.जी./प्रधान सीसीए) को प्रेषित
• डीडीओ, जो निर्धारण अधिकारी से संबंधित हो, यदि निर्धारण अधिकारी, डीडीओ के नवीनतम विवरण को बढ़ाना/घटाना अथवा अद्यतन करना चाहे, उसे विवरण में निर्दिष्ट करना चाहिए।
13. प्रपत्र 24छ विवरण को तैयार करने की क्या प्रक्रिया है ?
निर्धारण अधिकारी चाहे तो इन-हाउस सुविधाओं, राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड जो टिन वेबसाइट www.tin-nsdl.com से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है, द्वारा विकसित, प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी (आरपीयू) अथवा थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर अथवा आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in के प्रयोग द्वारा प्रपत्र 24छ तैयार कर सकते हैं।
एक बार विवरण के तैयार होने पर, निर्धारण अधिकारी राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड द्वारा तैयार फाइल मान्यकरण यूटिलिटी (एफयूवी), जो टिन अथवा आयकर विभाग की वेबसाइट पर निशुल्क उपलब्ध है, का प्रयोग कर इसे मान्यकृत करेंगे। विवरण निर्धारण अधिकारी द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित होने पर प्रपत्र 24छ सांख्यकीय विवरण रिपोर्ट के साथ राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड द्वारा संचालित किसी भी टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर कॉम्पैक डिस्क (सीडी) में प्रस्तुत किया जा सकता है। टिन -सुविधा केंद्र की सूची टिन अथवा आयकर विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
टिन-सुविधा केंद्र द्वारा एक बार प्रपत्र 24छ स्वीकार किए जाने पर विवरण के जमा करने के प्रमाण के अनुसार निर्धारण अधिकारी को विशिष्ठ अंनतिम रसीद संख्या (पीआरएन) के साथ अनंतिम रसीद जारी की जाएगी।
14. प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी क्या है ?
प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी एक जावा आधारित यूटिलिटी है। प्रपत्र 24छ प्र्रस्तुति यूटिलिटी वेबसाइट www.tin-nsdl.com से निशुल्क डाउनलोड की जा सकता है। डाउनलोड करने के बाद, इसे मशीन की लोकल डिस्क पर सेव करना जरूरी है।
जेआरर्इ (जावा रन-टाइम एनवायरमेंट) (वर्जन : एसयूएन जेआरर्इ : 1.4.2_02 अथवा 1.4.2_03 अथवा 1.4.2_04 अथवा आर्इबीएम जेआरर्इ : 1.4.1.0) कम्प्यूटर पर इंस्टाल किया जाना चाहिए जहां प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी इंस्टाल किया जाना है। जेआरर्इ http://java.sun.com तथा http://www.ibm.com@developerworks@javaa@jdk से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है अथवा आप अपने कम्प्यूटर वेंडर (हार्डवेयर) से इसे इंस्टाल करने के लिए कहें।
प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी विंडो प्लेटफार्म विडों 2के प्रोफेशनल/विंडो 2के सर्वर/विंडो एनटी 4.0 सर्वर/विंडो एक्सपी प्रोफेशनल पर चलाया जा सकता हैं। "प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी" को चलाने के लिए '24GRPU.bat' फाइल पर क्लिक करें।
यदि जेआरर्इ आपके कम्प्यूटर पर इंस्टाल नहीं है तो '24GRPU.bat' पर क्लिक करें, जिसके बाद एक संदेश प्रदर्शित होगा। ऐसी स्थिति में, जेआरर्इ को इंस्टाल करें तथा दुबारा प्रयास करें। यदि जेआरर्इ का उचित वर्जन इंस्टाल हो तो प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी प्रदर्शित होगा।
15. प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी को डाउनलोड तथा इंस्टाल करने के लिए क्या किया जाना चाहिए ?
डाउनलोडिंग में किसी प्रकार की सहायता तथा प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी प्रयोग करने के लिए प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी में 'मदद' में उपलब्ध कराए गए निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढे़ं। यह यूटिलिटी 75,000 तक के रिकार्ड सहित प्रपत्र 24छ को तैयार करने के लिए प्रयोग की जा सकती है। प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी (वर्जन 1.2) नियमित तथा संशोधित विवरण के लिए प्रयोग की जा सकती है।
16. फाइल मान्यकरण यूटिलिट (एफवीयू) क्या है ?
निर्धारण अधिकारी को फाइल के प्रारूप स्तर सटीकता को सुनिश्चित करने के लिए फाइल मान्यकरण यूटिलिटी (एफवीयू) के माध्यम से प्रस्तुति यूटिलिटी का प्रयोग करके जनित प्रपत्र 24छ (नियमित/संशोधित) फाइल को देना चाहिए। यह यूटिलिटी टिन वेबसाइट से निशुल्क भी डाउनलोड की जा सकती है। प्रपत्र 24छ में किसी प्रकार की त्रुटि आने पर निर्धारण अधिकारी द्वारा त्रुटियों को सुधारना चाहिए। सुधार के पश्चात, प्रयोगकर्ता कों एफवीयू के माध्यम से संशोधित प्रपत्र 24छ देना चाहिए। यह प्रक्रिया त्रुटि मुक्त प्रपत्र 24छ जनित होने तक दोहरार्इ जानी चाहिए। वित्त वर्ष 2005-06 से प्रारंभ तैयार प्रपत्र 24छ इस यूटिलिटी के प्रयोग द्वारा मान्यकृत किया जा सकता है।
प्रपत्र 24छ एफवीयू एक जावा आधारित यूटिलिटी है। जेआरर्इ (जावा रन-टाइम एनवायरमेंट) (वर्जन : एसयूएन जेआरर्इ : 1.4.2_02 अथवा 1.4.2_03 अथवा 1.4.2_04 अथवा आर्इबीएम जेआरर्इ : 1.4.1.0) कम्प्यूटर पर इंस्टाल किया जाना चाहिए जहां प्रपत्र 24छ प्रस्तुति यूटिलिटी इंस्टाल किया जाना है। जेआरर्इ http://java.sun.com तथा http://www.ibm.com@developerworks@javaa@jdk से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है अथवा आप अपने कम्प्यूटर वेंडर (हार्डवेयर) से इसे इंस्टाल करने के लिए कहें।
प्रपत्र 24छ एफवीयू सेटअप में निम्न दो फाइलें शामिल हैं—
• Form 24G FVU.bat : यह एफवीयू के इंस्टालेशन हेतु सेटअप प्रोग्राम है।
• Form 24G_ FVU_STANDALONE.jar : यह एफवीयू प्रोग्राम फार्इल है।
यह फाइलें कार्यन्वित होने वाली जिप फाइल (Form 24G FVU.exe)(Version 1.2) में हैं। इन फाइलों को Form 24G FVU से इंस्टाल करना अनिवार्य है।
एक्सटै्रक्ट तथा सेटअप के लिए निर्देश नीचे दिए गए है :
• Form 24G FVU का निष्कर्ष तथा व्यवस्था की गई है
17. आरपीयू के माध्यम से प्रपत्र 24 विवरण तैयार होने के बाद, तीन फाइलें जनित होंगी जब ऐसा विवरण एफवीयू से गुजरेगा। क्या टिन-सुविधा केंद्र हेतु निर्धारण अधिकारी द्वारा सभी तीन फाइलों को सीडी/पैन ड्रार्इव में डालना अनिवार्य है ?
जब सही फाइलें एफवीयू से होकर गुजरेगी तो निम्नलिखित तीन फाइलें उत्पन्न होंगी :-
(क) अपलोड फाइल
(ख) प्रपत्र 24छ विवरण साख्यिकीय रिपोर्ट तथा
(ग) प्रपत्र 24छ
क्रम सं. (क) में प्रत्येक प्रपत्र24छ (अपलोड फाइल) सीडी में सेव करनी चाहिए तथा इसे लेखा अधिकारी द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षर करने के बाद कागजी रूप में क्र.सं. (ब) में निर्दिष्ट विवरण सांख्यिकीय रिपोर्ट सहित संलग्न किया जाना चाहिए जिसे टिन-सुविधा केंद्र पर जमा किया जाना चाहिए।
प्रपत्र 24छ : प्रपत्र 24छ, उक्त क्रमांक संख्या (ग) में, टीडीएस/टीसीएस बही समायोजन प्रपत्र का पाठक अनुकूल प्रारूप है। यह एचटीएमएल प्रारूप में प्रपत्र 24छ के वास्तविक रूप की तरह है। इसमें लेखा अधिकारी साथ ही साथ संरेखण एवं संवितरण अधिकारी का विवरण शामिल है। इस फाइल को जमा करने की आवश्यकता नहीं है।
18. क्या प्रपत्र 24छ विवरण सही किया जा सकता है ?
प्रत्येक प्रपत्र 24छ को आयकर विभाग (आर्इटीडी) द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना के अनुसार तैयार किया जाना है। यदि यह नए आंकड़े संरचना को पुष्ट नहीं है तो इसे टिन द्वारा अस्वीकार कर दिया जाएगा।
प्रक्रिया के अनुसार, प्रपत्र 24छ से संबंधित विवरण परिपूरित तथा सत्य होना चाहिए। किसी भी स्थिति में खंडित विवरण जमा ( अर्थात् उसी एआर्इएन, वित्त वर्ष तथा माह के संबंध में विभिन्न प्रकार के प्रपत्र के अंतर्गत कटौती हेतु ब्यौरा देते हुए पृथक विवरण) की अपेक्षा नहीं की जाएगी। हालांकि, मूल स्वीकृत विवरण में किसी प्रकार की त्रुटि 'संशोधित बयान' को जमा करके सुधारी जा सकती है। संशोधन हेतु, आरपीयू का नवीनतम प्रारूप टिन वेबसाइट से डाउनलोड किया जाना चाहिए।
19. कितने प्रकार का संशोधित विवरण स्वीकार्य है ?
निर्धारण अधिकारी. द्वारा दो प्रकार के संशोधित विवरण प्रस्तुत किये जा सकते हैं। यह नीचे दिए गए हैं।
• एम (संशोधन) :- मौजूदा प्रपत्र 24छ विवरण में किसी संशोधन हेतु
• एक्स (रद्द करना) :- मौजूदा प्रपत्र 24छ विवरण में किसी निरकरण हेतु
संशोधित विवरण तैयार करने के लिए मूल विवरण की रसीद संख्या तथा पिछले विवरण की रसीद संख्या अनिवार्य है।
पहले संशोधन की स्थिति में, मूल विवरण का पीआरएन "मूल विवरण की रसीद संख्या" फील्ड में उपलब्ध कराया जाना चाहिए तथा "पिछले विवरण की रसीद संख्या" फील्ड में भी उपलब्ध करार्इ जानी चाहिए।
संशोधित विवरण पहले ही जमा कराए जाने की स्थिति में, मूल विवरण का पीआरएन "मूल विवरण की रसीद संख्या" फील्ड उपलब्ध करार्इ जानी चाहिए तथा पिछले संशोधन का पीआरएन "पिछले विवरण की रसीद संख्या" फील्ड में निर्दिष्ट कराया जाना चाहिए।
20. संशोधन विवरण का एम-प्रकार क्या है ?
इस प्रकार का संशोधित विवरण निर्धारण अधिकारी द्वारा प्रस्तुत किया जाना चाहिए, यदि वह अपनी किसी प्रकार की जानकारी जैसे नाम, पता, उत्तरदायी व्यक्ति का विवरण, श्रेणी, मंत्रालय, राज्य अथवा डीडीओ (संरेखण एवं संवितरण अधिकारी) आदि को घटाना अथवा बढ़ाना, को अद्यतन करना चाहता है। एआर्इएन (लेखा कार्यालय पहचान संख्या), वित्त वर्ष तथा माह में संशोधन स्वीकार्य नहीं है।
मूल प्रपत्र 24छ विवरण में उपलब्ध कराए गए डीडीओ विवरण में तीन प्रकार से संशोधन किया जा सकता है :
• बढ़ाना : डीडीओ विवरण मूल प्रपत्र 24छ में शामिल किया जा सकता है।
• अपडेट : डीडीओ का विवरण (अर्थात् टैन, टैन का नाम, जनसांख्यिकीय तथा संपर्क विवरण, कर कटौती राशि तथा प्रेषण, कटौती का प्रकार) मूल अथवा उत्तरवर्ती संशोधन विवरण में मुहैया कराए गए डीडीओ रिकार्ड के लिए अपडेट किया जा सकता है।
• हटाना : मूल प्रपत्र 24छ अथवा उत्तरवर्ती संशोधन विवरण में उपलब्ध कराए गए डीडीओ रिकार्ड को हटाया जा सकता है।
एम-प्रकार का संशोधन विवरण सदैव एओ विवरण तथा डीडीओ विवरण में शामिल होगा जिसे बढ़ाया तथा/अथवा हटाया जा सकता है।
21. X प्रकार का संशोधन विवरण क्या है ?
इस प्रकार के संशोधन विवरण को एओ द्वारा प्रस्तुत किया जाना चाहिए यदि वह मौजूदा प्रपत्र 24छ विवरण को रद्द करना चाहे। संशोधन के X प्रकार की फाइलिंग उसी प्रार्इमरी की (एआर्इएन, वित्त वर्ष तथा माह) के लिए नियमित प्रपत्र 24छ को जमा करने की स्वीकृति देती है। इस प्रकार का संशोधन केवल तभी जमा होगी जब प्रपत्र 24छ गलत एआर्इएन, वित्त वर्ष अथवा माह के साथ जमा किया गया हो।
22. बिन क्या है ?
बिन का पूरा अर्थ स्वीकार्य मासिक प्रपत्र 24छ में निर्दिष्ट प्रत्येक प्रपत्र प्रकार के लिए "पुस्तक पहचान संख्या या बुक पहचान नंबर" है। बिन में निम्न शामिल हैं :-
(i) रसीद संख्या : रसीद संख्या सात अंकों का विशिष्ठ अंक है जो प्रपत्र 24छ के सफलतापूर्वक स्वीकृति पर जनित होता है।
(ii) डीडीओ क्रमांक संख्या : यह पांच अंकों वाली विशिष्ठ अंक है जो प्रपत्र 24छ में प्रतिवेदित प्रत्येक डीडीओ लेन-देन पर जनित होती है।
(iii) स्थानांतरण वाउचर तिथि : यह माह की वह अंतिम तिथि है जिसके लिए प्रपत्र 24छ विवरण जमा किया गया है।
बिन को संबंधित डीडीओ, जिसे टीडीएस/टीसीएस विवरण में इसकी सूचना देना आपेक्षित हैं, द्वारा प्रसारित करना आपेक्षित है। बिन का उद्धृतीकरण प्रभावी तिथि 01 फरवरी 2012 से अनिवार्य कर दिया गया है। बिन चालान की प्रस्तुति के बिना जमा किए जाने वाले टीडीएस के दावे को मूल्यांकित करने के लिए विशिष्ट प्रकार की संख्या है। जैसा कि यह सत्यापन की (चाबी) है, इसलिए सलाह दी जाती है कि संबंधित डीडीओ को निर्धारण अधिकारी द्वारा दिया गया वैध बिन टीडीएस विवरण में सही रूप से जमा किया जाना चाहिए।
23. बिन कब जनरेट होता है?
स्वीकृत प्रपत्र 24छ विवरण की प्रसंस्करण पर, बिन प्रपत्र प्रपत्र 24छ विवरण में मौजूद प्रत्येक डीडीओ रिकॉर्ड (वैध टैन सहित) हेतु जनरेट होता है। बिन टिन केंद्रीय प्रणाली पर जनरेट होता है तथा टैन के विवरण तथा प्रपत्र के प्रकार के साथ पीएओ को सूचित किया जाता हैं।
24. पीएओ तथा डीडीओ बिन के साथ क्या करते है ?
पीएओ को संबंधित डीडीओ को बिन प्रसारित करना आपेक्षित है। त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण को तैयार करने के दौरान डीडीओ को कथित बिन विवरण को उद्धृत करना आपेक्षित हैं यदि कर स्थानांतरण वाउचर (पुस्तक समाविष्टि) के माध्यम से दिया गया हो।
विशेषकर 24छ के लिए जनित बिन प्रपत्र प्रपत्र 24छ में मुहैया करार्इ गर्इ र्इ-मेल आर्इडी पर एओ को मेल किया जाना है। इसके अतिरिक्त एओ टिन साइट पर निर्धारण अधिकारी लागिन के माध्यम से बिन विवरण को डाउनलोड भी कर सकते हैं।
25. किन परिस्थितियों में बिन को जनरेट किया जा सकता है ?
• बिन प्रपत्र 24छ संशोधन विवरण में जुडे़ हुए वैध टैन-डीडीओ रिकॉर्ड के लिए जनित किया जाएगा।
• बिन डीडीओ रिकॉर्ड के लिए जनित होगा जहां आयकर विभाग के डेटाबेस में अवैध टैन्स/टैन उपलब्ध नहीं है वह वैध टैन के साथ अपडेट होगा।
• टैन के नाम, जनसांख्यिकीय तथा संपर्क विवरण में कोर्इ अद्यतन, कर कटौती तथा प्रेषण अथवा कटौती के प्रकार हेतु नया बिन जनित नहीं होगा।
• कटे हुए डीडीओ रिकॉर्ड के लिए बिन विवरण जनित नहीं होगा।
26. बिन की क्या उपयोगिता है ?
डीडीओ द्वारा भरे गए त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण में सूचित टीडीएस राशि तथा बिन विवरण सत्यापन उद्देश्य के लिए पीएओ द्वारा भरे हुए प्रपत्र सं. 24छ में भरे हुए संबंधित ब्यौरे के साथ जोड़ी जाएगी।
27. क्या यहां ऐसे उदाहरण हैं जहां टीडीएस/टीसीएस विवरण में सूचित टीडीएस राशि तथा बिन विवरण प्रपत्र प्रपत्र 24छ उस रिपोर्ट से मेल न खाते हों ? ऐसी असंगति का परिणाम क्या होगा ?
(i) टीडीएस/टीसीएस विवरण में डीडीओ द्वारा बिन की गलत/असत्य सूचना की घटना देखने में आर्इ हैं। बिन तथा टीडीएस विवरण में अनुरूप राशि की गलत सूचना प्रपत्र प्रपत्र 24छ में सूचितानुसार संबंधित राशि के असंतुलन का कारण होगी। इस स्थिति में, संभावना है कि अनुरूपी कटौती कराने वाले को टीडीएस/टीसीएस का क्रेटिड प्राप्त न हो। इसलिए, संबंधित पीएओ द्वारा प्रसारितानुसार बिन, डीडीओ द्वारा भरे हुए टीडीएस/टीसीएस में इसी राशि के साथ सही रूप से सूचित किया जाना चाहिए।
(ii) कर्इ मामलों में, एक विशिष्ट डीडीओ को इसी प्रकार के टीडीएस विवरण के लिए प्रपत्र 24छ में एक से अधिक एओ द्वारा सूचना देने के मामले भी आते हैं जो कि एक मान्य परिस्थिति नहीं है। डीडीओ तथा संबंधित एओ को मामले के समाधान निकालने की सलाह दी जाती है तथा विशेष माह के लिए प्रकार प्रकार के प्रपत्र के लिए केवल एक एओ का खाका तैयार करना चाहिए।
28. पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ के क्या कर्त्तव्य हैं ?
i टीडीएस कार्यालय के क्षेत्राधिकार के साथ एआर्इएन हेतु आवेदन करने के लिए, एआर्इएन आवेदन टिन वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।
ii डीडीओ को सूचना द्वारा सही टैन को प्राप्त करने हेतु।
iii महीन के अंत से 10 दिनों के भीतर प्रपत्र प्रपत्र 24छ (सीडी, डीवीडी, पैन ड्रार्इव में) को जमा करने हेतु, चाहे इलैक्ट्रानिकली अथवा टिन सुविधा केंद्र पर अथवा टिन वेबसाइट पर प्रत्यक्ष अपलोड द्वारा।
iv टिन वेबसाइट के माध्यम से भरे हुए प्रपत्र 24छ की स्थिति का पता लगाने के लिए।
v प्रपत्र 24छ विवरण के आधार पर जनित पुस्तक पहचान संख्या (बिन) को डाउनलोड करने के लिए।
vi संबंधित डीडीओ को बिन प्रसारित करने के लिए।
29. डीडीओ के क्या कर्त्तव्य हैं ?
i अपने पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ ,जिसको डीडीओ/कटौतीदाता काटे जाने वाले कर के बारे में सूचित करता है, को सही पैन उपलब्ध कराना तथा वह केंद्र सरकार के क्रेटिड में ऐसी राशि को जमा करने के लिए उत्तरदायी है।
ii पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ की सूचना के लिए काटे गए कर की सूचना तथा पुस्तक समायोजन के माध्यम से केंद्र सरकार के खाते में क्रेटिड हेतु।
iii काटे गए कर के लिए त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण (24थ, 26थ आदि) में बिन उद्धृत करने तथा पुस्तक समायोजन द्वारा क्रेटिड हेतु।
iv नियत तिथि के भीतर टीडीएस/टीसीएस विवरण का दाखिलीकरण (24थ, 26थ आदि)।
v. ट्रेसेज वेबसाइट (www.tdscpc.gov.in) से प्रपत्र 16/26क डाउनलोड करने के लिए तथा कटौतीकर्ता को इसका समय से निगर्मन।
30. त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण में बिन विवरण के गैर-उद्धृतीकरण के क्या परिणाम हैं ?
(क) डीडीओ द्वारा भरे हुए त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण में सूचित टीडीएस की राशि तथा बिन विवरण का सत्यापन उद्देश्य के लिए पीएओ द्वारा प्रपत्र 24छ में भरे विवरण के साथ मिलाप किया जाएगा।
(ख) टीडीएस/टीसीएस विवरण में डीडीओ द्वारा किसी प्रकार की गलत सूचना असंगति का कारण बन सकती है जिससे संबंधित कटौती कराने वाले के क्रेटिड, कटौती कराने वाले के प्रपत्र 26कध में उपलब्ध नहीं होगा।
(ग) पूर्ण जानकारी टिन वेबसाइट www.tin-nsdl.com तथा आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध हैं।
31. कटौतीदाता को जारी किए जाने के लिए प्रपत्र 16/16क का प्रारूप क्या है ?
केवल ट्रसेज पोटर्ल से प्रपत्र 16/16क को डाउनलोड तथा उत्सर्जित करना अनिवार्य हैं। कटौतीदाता को वेतन विवरण के लिए प्रपत्र 16 के भाग 'ख' को ही व्यक्तिगत रूप से जारी करने की स्वीकृति है।
32. क्या कोर्इ स्थिति है जहां डीडीओ एआर्इएन को प्राप्त करना भी अनिवार्य है ?
हां, यदि कटौतीदाता सीडीडीओ की क्षमता का है तथा राज्य निर्धारण अधिकारी को वाउचर स्थानांतरण के माध्यम से कर कटौती की प्रत्यक्ष रिपोर्ट करता है तो उस स्थिति में सीडीडीओ को एआर्इएन को प्राप्त करना आपेक्षित है तथा संबंधित बही समायोजन प्रविष्टियों के लिए 24छ को दाखिल करना है तथा तत्पश्चात् टैन धारक के तौर पर टीडीएस/टीसीएस विवरण को दाखिल करना भी आपेक्षित है।
उदाहरण के लिए राज्य सरकार में कार्यकारी अभियंता की स्थिति में जो चेक के माध्यम से टीडीएस/टीसीएस की कटौती के पश्चात् ठेकेदार को भुगतान करते हैं, ऐसे टीडीएस लेनदेनों की रिपोर्टिंग के लिए प्रपत्र 24थ को दाखिल करने के लिए उत्तरदायी है। उन्हें एआर्इएन को प्राप्त करना तथा इन बही समायोजन प्रविष्टि की मासिक रिपोर्टिंग के लिए प्रपत्र 24छ को दाखिल करना तथा तत्स्थानी बिन के उद्धृतीकरण द्वारा टैन धारक के तौर पर त्रैमासिक टीडीएस विवरण को दाखिल करना आपेक्षित होगा।
परिशिष्ट V
"राज्य सरकार के विभागों की स्थिति में प्रपत्र सं. 24छ को भरने के लिए उत्तदायी व्यक्ति"
| पुस्तक प्रविष्टि की सूचना का प्रकार | 24 छ भरने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति (एआर्इएन धारक) |
| क | पीएओ/डीटीओ |
| ख | पीएओ/डीटीओ |
| ग | पीएओ/डीटीओ |
| घ | पीएओ/डीटीओ |
| ड़ | सीडीडीओ |
| च | एसटीओ |
| एजी | महालेखापाल |
| पीएओ | वेतन एवं लेखा अधिकारी |
| डीटीओ | जिला कोषागार कार्यालय |
| एसटीओ | उप-कोषागार कार्यालय |
| डीडीओ | संरेखण एवं संवितरण अधिकारी |
| सीडीडीओ | आहरण एंव संवितरण अधिकारी |
परिशिष्ट VI
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वेतन से स्रोत कर कटौती के परिपत्र की बिंदु सं. 4.9 - वित्त वर्ष 2015-16 - अधिनियम की धारा 200(3) के अंतर्गत कर कटौती का त्रैमासिक विवरण के तैयारी की प्रक्रिया
1. त्रैमासिक र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी डीआर्इटी (पद्धति), दिल्ली द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना (फाइल फारमेट) के अनुसार कटौतीदाता/डीडीओ द्वारा तैयार किया जाना चाहिए जो टिन की वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर उपलब्ध है। कटौतीदाता/डीडीओ चाहे तो इन-हाउस सुविधाओं, एनएसडीएल र्इ-गर्वेनेंस अवसंरचना लिमिटेड (एनएसडीएल), जो टिन वेबसाइट से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है, द्वारा विकसित विवरणी प्रस्तुति यूटिलिटी (आरपीयू) अथवा थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर के प्रयोग द्वारा र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी तैयार कर सकते हैं।
र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी को तैयार करने के बाद कटौतीदाता/डीडीओ को फाइल वैलिडेशन यूटिलिटी (एफवीपी), जो टिन वेबसाइट पर निशुल्क उपलब्ध है, का प्रयोग कर इसे मान्यकृत करना आपेक्षित हैं।
2. टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी के प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया
एफवीयू के माध्यम से एक बार फाइल मान्यकृत होने पर एफवीयू फाइल, जनित होगी। कटौतीदाता/डीडीओ अथवा कटौतीदाता/डीडीओ द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा विधिवत भरे हुए तथा हस्ताक्षरित वास्तविक प्रपत्र 27क सहित सीडी/डीवीडी/पैन ड्रार्इव में इस एफवीपी, एफवीयू फाइल, की प्रति टिन-सुविधा केंद्र पर प्रस्तुत किया जाना है। कटौतीदाता/डीडीओ को 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध करार्इ जाएगी।
कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी की स्थिति देख सकते हैं। 'वित्त वर्ष-त्रैमासिक-टैन-प्रपत्र' हेतु केवल एक नियमित र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी जमा की जाएगी।
2.1 र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी में संशोधन
2.1.1 विवरण के ऑनलाइन संशोधन के लिए सीपीसी-टीडीएस पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) की भी शुरूआत की गर्इ है जिसके द्वारा व्यक्तिगत सूचना, पैन संशोधन, चालान जानकारी घटाना/बढ़ाना, वेतन की जानकारी को घटाना/बढ़ाना, कटौतीदाता पंक्ति आदि को बढ़ाना/अपडेट/मूव करना, कटौतीदाता द्वारा भरे विवरण में डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना किया जा सकता है। अन्य जानकारी के लिए कृपया नीचे दी गर्इ तालिका को संदर्भित करें।
| डिफाल्ट समरी व्यू | व्यक्तिगत जानकारी | चालान संशोधन (बेमेल, मेल कटौतीकर्ता + कटौतीकर्ता मूवमेंट | पैन संशोधन (परिशिष्ट I) | पैन संशोधन (परिशिष्ट II) | विवरण हेतु चालान जमा करना | ब्याज, उदग्रहण भुगतान | संशोधित/बढ़ार्इ गर्इ कटौतीकर्ता पंक्ति | हटार्इ/बढ़ार्इ गर्इ वेतन कटौती पंक्ति | |
| ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर सहित, 2013-14 से आंरभ) | हाँ | हाँ | हाँ | हाँ | हाँ | हाँ | हाँ | हाँ | हाँ |
| ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर सहित, 2013-14 से आंरभ) | हाँ | हाँ | हाँ | नहीं | नहीं | हाँ | हाँ | नहीं | नहीं |
| ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर कें बिना, 2013-14 से आंरभ) | हाँ | नहीं | हाँ | नहीं | नहीं | हाँ | हाँ | नहीं | नहीं |
| ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर के बिना, 2013-14 से पूर्व से आंरभ) | हाँ | नहीं | हाँ | नहीं | नहीं | हाँ | हाँ | नहीं | नहीं |
अधिक जानकारी के लिए कटौतीदाता को सलाह दी जाती है कि टीआरएसीर्इएस पर उपलब्ध र्इ-ट्यूटोरियल/अक्सर पूछे जाने वाले सवाल हेतु संदर्भित करें। ऑनलाइन संशोधन के लिए कोर्इ शुल्क नहीं होगा तथा कोन्सो फाइल की डाउनलोडिंग तथा टिन एफसी को विजिट करने की की अनिवार्यता दूर करता है।
2.1.2 1 जनवरी, 2015 की प्रभावी तिथि से टीआरएसीर्इएस सीपीसी-टीडीएस (सामान्यत: विवरण भरने की तिथि से दो दिन के पश्चात्) के प्रसंस्करण की तिथि से 7 दिनों तक संशोधन विंडों उपलब्ध कराएगा। यह सुविधा सीपीसी-टीडीएस द्वारा पहचाने जाने वाले चालान मिसमैच तथा पैन त्रुटियों के मामलों को भरने में तथा मांग सूचना को जारी होने से रोकने में मदद करेगा। इसलिए, कटौतीदाता को सलाह दी जाती है कि वह इस सुविधा के लाभ के लिए प्रसंस्करण स्थिति को यथा समय देखते रहें।
2.1.3 कटौतीदाता/डीडीओ र्इ-टीडीएस विवरण में किसी संशोधन के लिए संशोधित र्इ-टीडीएस विवरण को भी जमा कर सकते हैं। संशोधित विवरण टीडीएस समेकित फाइल के प्रयोग द्वारा तैयार किया जा सकता है जो टीआरएसीर्इएस की वेबसाइट www.tdscpc.gov.in पर उपलब्ध है। संशोधित विवरण का मान्यकरण टिन-एफसी पर विवरण सांख्यकीय रिपोर्ट तथा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित भौतिक प्रपत्र 27क, नियमित र्इ-टीडीएस विवरण के समान है। टिन सुविधा केंद्र पर कागजी विवरण/विवरणी की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर कटौतीदाता/डीडीओ को 15 अंकों की टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध करार्इ जाएगी। कटौतीदाता/डीडीओ टीआरएसीर्इएस वेबसाइट पर र्इ-टीडीएस विवरण की स्थिति देख सकते हैं।
3. टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर कागजी टीडीएस विवरण/विवरणी को तैयार करने तथा प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया
प्रपत्र 24थ में सभी विवरण/विवरणी 20 अथवा उससे कम के कटौती रिकार्ड को छोड़कर कम्प्यूटर मीडिया में प्रस्तुत किया जाना हैं। कटौतीदाता/डीडीओ द्वारा विधिवत रूप से भरे हुए तथा हस्ताक्षरित कागजी विवरण/विवरणी टिन सुविधा केंद्र पर जमा किया जाना है। टिन सुविधा केंद्र पर कागजी विवरण/विवरणी की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर कटौतीदाता/डीडीओ को 15 अंकों की टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध करार्इ जाएगी। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर कागजी विवरण/विवरणी की स्थिति देख सकते हैं। कागजी विवरण/विवरणी के लिए कोर्इ प्रभार देय नहीं है।
3.1 कागजी विवरण/विवरणीमें संशोधन
वास्तविक टीडीएस विवरण/विवरणी टिन पर वास्तविक टीडीएस विवरण/विवरणी स्वीकृति हेतु किसी संशोधन की स्थिति में दुबारा भरा जा सकता है। कटौतीदाता को विधिवत रूप से भरे हुए तथा हस्ताक्षरित वास्तविक टीडीएस विवरण/विवरणी को टिन-सुविधा केंद्र पर नियमित कागजी विवरण/विवरणी की अनंतिम रसीद की प्रति के साथ जमा करना होगा। टिन-सुविधा केंद्र पर संशोधित कागजी विवरण/विवरणी की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर कटौतीदाता/डीडीओ को विशिष्ट 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध करार्इ जाएगी। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर कागजी विवरण/विवरणी की स्थिति देख सकते हैं।
4. टिन वेबसाइट पर ऑनलाइन र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी की प्रस्तुति की प्रक्रिया
कटौतीदाता/डीडीओ को र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी के ऑनलाइन अपलोड हेतु डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) जुटाना आपेक्षित हैं। टिन वेबसाइट पर पंजीकरण के पश्चात् कटौतीदाता/डीडीओ द्वारा अनुमोदित पत्रांक एनएसडीएल को संगठन के लैटर हैड पर उपलब्ध कराना चाहिए। एक बार एनएसडीएल द्वारा आवेदन स्वीकृत होने पर एक यूजर आर्इडी बन जाएगी तथा कटौतीदाता/डीडीओ को पंजीकरण के समय मुहैया करार्इ गर्इ उनकी पंजीकृत र्इ-मेल पर भेज दी जाएगी। र्इ-टीडीएस विवरण को तैयार करने तथा मान्यकरण नियमित र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी( टिन-एफसी पर जमा) के समान है। कटौतीदाता/डीडीओ अपने यूजर आर्इ तथा डीएसएससी के माध्यम से लॉग इन कर सकते हैं तथा टिन वेबसाइट पर एफवीयू द्वारा जनित र्इ-टीडीएस फाइल ('.fvu फाइल') को अपलोड तथा मान्यकृत कर सकते हैं। टिन पर र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर विशिष्ट 15 अंको वाले डिजिटल टोकन नं. तथा 8 अंकों वाली रसीद संख्या सन्निहित रसीद जनित तथा प्रदर्शित होगी। ऑनलाइन अपलोड में भौतिक रूप से प्रपत्र 27ए को जमा करने की आवश्यकता नहीं है। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी की स्थिति देख सकते हैं।
र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी के ऑनलाइन अपलोड हेतु कोर्इ शुल्क देय नहीं है।
4.1 टिन वेबसाइट पर र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी ऑनलाइन वेवसाइट पर
कटौतीदाता/डीडीओ टिन केंद्रीय प्रणाली पर स्वीकृत होने वाली र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी में किसी संशोधन हेतु संशोधित र्इ-टीडीएस/विवरणी को जमा कर सकते हैं। संशोधित विवरण/विवरणी केवल टीडीएस समेकित फाइल का प्रयोग कर ही तैयार किया जा सकता है जो टिन पंजीकरण के माध्यम से सीपीसी-टीडीएस पोर्टल www.tdscpc.gov.in पर उपलब्ध है। र्इ-टीडीएस विवरण की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी के समान है। कटौतीदाता/डीडीओ अपने यूजर आर्इ तथा डीएसएससी के माध्यम से लॉग इन कर सकते हैं तथा टिन वेबसाइट पर एफवीयू द्वारा जनित र्इ-टीडीएस फाइल ('.fvu फाइल ) को अपलोड तथा मान्यकृत कर सकते हैं। टिन पर र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी संशोधन के सफलतापूर्वक स्वीकृति पर विशिष्ट 15 अंकों वाले डिजिटल टोकन नं. सन्निहित रसीद जनित तथा प्रदर्शित होगी। ऑनलाइन अपलोड में भौतिक रूप से प्रपत्र 27क तथा नियमित र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी की अनंतिम रसीद की प्रति को को जमा करने की आवश्यकता नहीं है। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर र्इ-टीडीएस विवरण/विवरणी की स्थिति देख सकते हैं।
5. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल तथा अधिक विवरण के लिए कटौतीदाता/डीडीओ को सलाह दी जाती है कि वह वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर लॉग इन करें।
परिशिष्ट VII
वित्त मंत्रालय
(आर्थिक मामला विभाग)
(र्इसीबी एंड पीआर डिविजन)
अधिसूचना
नर्इ दिल्ली, 22 दिसंबर, 2003
एफ.सं. 5/7/2003-र्इसीबी एंड पीआर - सरकार ने केंद्र सरकार सेवा के नवागंतुकों, सैन्य बल के अलावा, प्रथम स्तर पर, के लिए नर्इ परिभाषित अंशदान पेंशन प्रणाली आरंभ करने से संबंधित 2003-04 के बजट घोषणा के क्रियान्वयन के प्रस्ताव को 23 अगस्त, 2003 को, परिभाषित लाभ पेंशन प्रणाली की मौजूदा प्रणाली से प्रतिस्थापित करने के लिए, स्वीकृत किया था।
i प्रणाली 1 जनवरी 2004 ( प्रथम स्तर पर सैन्य बलों को छोड़कर) से केंद्र सरकार की सेवा के सभी नए नियुक्तों के लिए अनिवार्य हैं। मासिक अंशदान वेतन तथा मंहगार्इ भत्ते का 10 प्रतिशत होगा, जिसे कर्मचारी द्वारा दिया जाना है तथा केंद्र सरकार द्वारा इसका मिलाप किया जाना है। बहरहाल, गैर सरकारी कर्मचारी के संबंध में सरकार की ओर से कोर्इ अंशदान नहीं किया जाएगा। अंशदान तथा निवेश रिटर्न निकाले न जाने वाले टियर-I खाते में जमा की जाएगी। मौजूदा परिभाषित लाभ पेंशन तथा जीपीएफ के प्रावधान केंद्र सरकारी की सेवा में नए नियुक्ति हेतु उपलब्ध नहीं होगी।
ii उक्त पेंशन खाते के अतिरिक्त, प्रत्येक व्यक्ति के पास अपने विकल्प के अनुसार अवैतानिक टियर-II निकासी खाता भी होना चाहिए। यह विकल्प जीपीएफ के तौर पर दिया जाएगा जिसे केंद्र सरकार की सेवा में नर्इ भर्ती के लिए वापस लिया जाएगा। सरकार इस खाते में किसी प्रकार का अंशदान नहीं करेगी। यह परिसंपत्तियां उक्त प्रक्रिया के अनुसार ही संचालित होगी। बहरहाल, कर्मचारी किसी भी समय अपने पैसे के 'सैकेंड टियर' के भाग अथवा पूरी राशि को निकालने के लिए मुक्त है। इस विड्राल खाते में किसी प्रकार की पेंशन जमा नहीं की जाएगी तथा इसे किसी विशेष कर का लाभ नहीं मिलेगा।
iii व्यक्ति सामान्य तौर पर टियर-I पेंशन प्रणाली से 60 वर्ष की आयु में अथवा के बाद बाहर निकल सकते हैं। बाहर निकलने पर व्यक्ति द्वारा वार्षिकी (र्इराडा-विनियमित जीवन बीमा निगम) को खरीदने के लिए पेंशन राशि से 40 प्रतिशत निवेश करना आपेक्षित है। सरकारी कर्मचारी की स्थिति में वार्षिकी सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी तथा उसके आश्रित माता-पिता तथा उसके जीवन साथी के जीवन के लिए पेंशन उपलब्ध करार्इ जानी चाहिए। व्यक्ति को बची हुर्इ पेंशन राशि का एकमुश्त पैसा प्राप्त होगा जिसे किसी भी तरह से प्रयोग के लिए वह मुक्त है। व्यक्ति को 60 साल की आयु के पहले पेंशन प्रणाली से बाहर निकालने की आजादी है। बहरहाल इस स्थिति में अनिवार्य वार्षिकी पेंशन राशि का 80 प्रतिशत होगी।
नर्इ पेंशन प्रणाली की रचना
(i) इसके पास केंद्रीय रिकार्ड संरक्षण एवं लेखांकन (सीआरए) अवसंरचना होगा। कर्इ पेंशन कोष प्रबंधकों (पीएफएम) को योजना की तीन श्रेणियां दी जाएगी जो क, ख तथा ग हैं।
(ii) भाग लेने वाली संस्थाओं (पीएफएम तथा सीआरए) को पिछले अनुभव के बारे में आसानी से समझ आने वाली जानकारी मुहैया करार्इ जाएगी जिससे व्यक्ति प्राप्त सूचना के आधार यह फैसला कर सके कि कौन सी योजना का चुनाव करना है।
2. नर्इ पेंशन प्रणाली के संचालन हेतु प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2004 से होनी चाहिए।
यू.के. सिन्हा, संयुक्त सचिव
परिशिष्ट - VIII
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
(केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड)
अधिसूचना
नर्इ दिल्ली, 24 नवंबर, 2000
आयकर
एस.ओ. 1048 (र्इ) - आयकर अधिनियम, 1961 (1961 की 43) की धारा 10 के वाक्यांश (18) के उप-वाक्यांश (i) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एतद्द्वारा केंद्र सरकार तत्संबंधी कॉलम 3 के अनुरूप निर्दिष्टानुसार स्थितियों में दिए गए पुरस्कार का नीचे दी गर्इ तालिका के कॉलम 2 में निर्दिष्ट कथित धारा के अनुसार वीरता पुरस्कार का उल्लेख करती है,—
तालिका
| क्र.सं. | वीरता पुरस्कार का नाम | पात्रता हेतु परिस्थितियां |
| (1) | (2) | (3) |
| 1. | अशोक चक्र | जब नागरिक को वीरता हेतु पुरस्कृत किया जाए |
| 2. | कीर्ति चक्र | -तदैव- |
| 3. | शौर्य चक्र | -तदैव- |
| 4. | सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक | जब जीवन रक्षक कार्य प्रदर्शित करने की स्थिति में नागरिक को बहादुरी के लिए पुरस्कृत किया जाए |
| 5. | उत्तम जीवन रक्षा पदक | -तदैव- |
| 6. | जीवन रक्षा पदक | -तदैव- |
| 7. | वीरता हेतु राष्ट्रपति पुलिस पदक | तब पुरस्कृत किया जाता है जब पुलिस बलों, केंद्रीय पुलिस अथवा सुरक्षा बलों तथा इस कार्य के लिए संबंधित विभाग के प्रमुख द्वारा प्रमाणित किए गए सदस्यों ने अविश्वसनीय बहादुरी का परिचय दिया हो |
| 8. | वीरता हेतु पुलिस पदक | -तदैव- |
| 9. | सेना पदक | तब पुरस्कृत किया जाता है जब साहस अथवा विशिष्ट वीरता का परिचय दिया जाए तथा प्रासंगिक सेवा मुख्यालय द्वारा इस संबंध में प्रमाणपत्र जारी किया जाए |
| 10. | नौ सेना पदक | -तदैव- |
| 11. | वायुसेना पदक | -तदैव- |
| 12. | वीरता हेतु अग्निशमन सेवा पदक | तब पुरस्कृत किया जाता है जब साहस अथवा विशिष्ट वीरता का परिचय दिया जाए तथा पिछले मुख्यालय द्वारा इस संबंध में प्रमाणपत्र जारी किया जाए |
| 13. | वीरता हेतु राष्ट्रपति पुलिस व अग्निशमन पदक | -तदैव- |
| 14. | वीरता हेतु राष्ट्रपति अग्निशमन पदक | -तदैव- |
| 15. | वीरता हेतु राष्ट्रपति होम गार्ड व नागरिक सुरक्षा पदक | -तदैव- |
| 16. | वीरता हेतु होम गार्ड व नागरिक सुरक्षा पदक | -तदैव- |
(अधिसूचना सं. 1156/एफ.सं. 142/29/99-टीपीएल)
टी.के. शाह
निदेशक
परिशिष्ट IX
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
नर्इ दिल्ली, 29 जनवरी, 2001
एस.ओ. 81 (र्इ) - आयकर अधिनियम, 1961 (1961 की 43) की धारा 10 के वाक्यांश (18) के उप-वाक्यांश (i) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एतद्द्वारा केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) संख्या एस.ओ. 1048(र्इ), दिनांक 24 नवंबर, 2000 में भारत सरकार की अधिसूचना में निम्नलिखित संशोधन को करने के उद्देश्य से तथा कथित धारा के उद्देश्य के लिए वीरता पुरस्कार को निर्दिष्ट करती है :-
कथित अधिसूचना के अनुसार तालिका में "पात्रता हेतु परिस्थिति" से संबंधित कोष्ठक (3) के अंतर्गत क्रमांक संख्या 1,2 तथा 3 के समक्ष शब्दों में 'नागरिक हेतु" शब्द छूट गया है।
(अधिसूचना सं. 22/एफ सं. 142/29/99-टीपीएल)
टी.के. शाह
निदेशक
परिशिष्ट X
प्रपत्र सं. 10खक
(नियम 11ख देखें)
धारा 80 छछ के अ्रतर्गत कटौती का दावा करने वाले
निर्धारिती द्वारा दाखिल किया जाने वाला घोषणापत्र
मैं/हम .................................................................................................................................................... (स्थार्इ खाता संख्या सहित निर्धारिती का नाम) एतद्द्वारा यह घोषणा करता हूँ कि पिछले वर्ष ................. के दौरान मैनें/हमने ..................... माह की अवधि के लिए मेरे/हमारे रहने के उद्देश्य से परिसर ......................................................... (परिसर का पूरा पता) को अधिगृहित किया था तथा श्री/कुमारी/श्रीमती...................................................(मकान मालिक का नाम व पूरा पता) को नकद/रेखांकित चेक, बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से रू. ..........................का भुगतान किया।
आगे यह भी प्रमाणित किया जाता है कि निम्न द्वारा कोर्इ अन्य आवासीय अकोमोडेशन नहीं खरीदा गया है
क) मैं/मेरे जीवनसाथी/मेरे छोटे बच्चे/हमारा परिवार (निर्धारिती के एचयूएफ होने की स्थिति में), ............................................ जहां मैं/हम साधारणतय: रहते/कार्यालय अथवा रोजगार अथवा व्यापार अथवा व्यवसाय करते हैं अथवा
ख) मेरे/हमारे, अन्य स्थान होने पर, मेरे अधिकार क्षेत्र में आवास होने पर, जिसकी राशि धारा 23(2)(ख) की धारा 23(2)(क)(प) कें अतर्गत निर्धारित की जानी है।
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