आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 05/2016

परिपत्र की तिथि

29/02/2016

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

29/02/2016

 परिपत्र सं. 05/2016

परिपत्र सं. 05/2016

 

एफ. नं. 275/06/2016-आर्इटी (ख)

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड)

 

नर्इ दिल्ली, दिनांक 29 फरवरी, 2016

 

विषय : विज्ञापनों की खरीद अथवा प्रसार हेतु विज्ञापन कंपनियों हेतु टेलीविजन चैनलों अथवा प्रकाशन संस्थाओं द्वारा भुगतान पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस)

 

विज्ञापनों की खरीद अथवा प्रसार के लिए विज्ञापन एजेंसियों को टेलीविजन चैनलों अथवा समाचार पत्र अथवा पत्रिका प्रकाशित करने वाले मीडिया हाउस द्वारा भुगतान पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) प्रावधानों की प्रयोज्यता का मुद्दा इस संबंध में प्राप्त प्रतिनिधियों को देखते हुए बोर्ड द्वारा जांचा गया है।

2. यह अवलोकन किया गया है कि विज्ञापन व्यापार में दो प्रकार के भुगतान शामिल हैं :

  (i) विज्ञापन एजेंसी को ग्राहक द्वारा भुगतान, तथा

 (ii) टेलीविजन चैनलों/सामाचार कंपनी को विज्ञापन एजेंसी द्वारा भुगतान

इन भुगतानों पर टीडीएस की प्रयोज्यता परिपत्र सं. 715 दिनांक 8.8.1995 सहित पहले से व्यवहारित की गर्इ है, जहां इसे प्रश्न सं. 1 व 2 में स्पष्ट किया गया है कि जबकि धारा 194ग (कार्य अनुबंध के तौर पर) के अंतर्गत टीडीएस भुगतान के प्रथम प्रकार पर प्रयोज्य होगा, इसलिए भुगतान के दूसरे प्रकार उदाहरण मीडिया कंपनी को विज्ञापन एजेंसी द्वारा भुगतान, पर धारा 194ग के अंतर्गत कोर्इ टीडीएस नहीं होगा।

3. हालांकि, विभिन्न स्थितियों में अन्य मुद्दे उठाए गए है कि विज्ञापन के प्रसार/बुकिंग के लिए मीडिया कंपनियों द्वारा विज्ञापन कंपनियों द्वारा ली गर्इ अथवा स्थिर शुल्क/मूल्य (आमतौर पर बिलिंग का 15 प्रतिशत) 'दलाली' अथवा 'छूट' है। निर्धारिती द्वारा तर्क दिया गया है कि चूंकि मीडिया कंपनी तथा विज्ञापन कंपनी के बीच संबंध प्रिंसपल-से-प्रिसंपल आधार पर है, ऐसा भुगतान व्यापार छूट के रूप में है तथा ना कि, इसलिए, धारा 194ज के अंतर्गत टीडीएस की सीमा के बाहर दलाली के रूप में। दूसरी ओर विभाग ने कुछ मामलों में निर्णय लिया है कि चूंकि विज्ञापन एजेंसी विज्ञापन प्राप्त करने के लिए मीडिया कंपनी की ओर से कार्य करती है इसलिए दलाली के रचनात्मक भुगतान हेतु पूर्व राशि से रखा गया लाभ तथा, तद्नुसार, धारा 194ज के अंतर्गत टीडीएस लगता है।

4. मुद्दे को लिविंग मीडिया लिमिटेड के मामले में जागरण प्रकाशन लि. तथा दिल्ली उच्च न्यायालय के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा जांचा गया है तथा दोनों मामलों में कहा था कि मीडिया कंपनी तथा विज्ञापन एजेंसी के बीच संबंध 'प्रीसिंपल-से-प्रीसिपल' आधार का है तथा इसलिए धारा 194ज के अंतर्गत टीडीएस के लिए उत्तरदायी नहीं है। लिविंग मीडिया लि. तथा जागरण प्रकाशन लि. के मामले में विभाग द्वारा दाखिल एसएलपी को क्रमश: आदेश दिनांक 11.12.2009 तथा आदेश 05.05.2014 के मार्फत उच्चतम न्यायालय द्वारा खारिज किया गया है। यद्यपि ये निर्णय प्रिंट मीडिया के संबंध में हैं, अनुपात इलैक्ट्रानिक मीडिया/टेलीविजन विज्ञापन के लिए भी प्रयोज्य है चूंकि शामिल गतिविधियों का सामान्य प्रकार समान है।

5. उक्त को देखते हुए, एतद्द्वारा स्पष्ट किया जाता है कि विज्ञापनों की बुंकिंग हेतु अथवा खरीद अथवा प्रसार हेतु विज्ञापन एजेंसी को टेलीविजन चैनलों/समाचार कंपनियों द्वारा भुगतान पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) नहीं होगी। आगे यह भी स्पष्ट किया जाता है कि बोर्ड के परिपत्र सं. 715 दिनांक 8.8.1995 की प्रश्न सं. 27 हेतु संदर्भित 'दलाली' विज्ञापनों की बुकिंग के लिए विज्ञापन कंपनियों को मीडिया कंपनियों द्वारा भुगतान से संदर्भित नहीं है लेकिन मॉडल, कलाकार, फोटोग्राफ, खेलकर्मी आदि की संलग्नता के लिए भुगतान से संदर्भित है तथा इसलिए यह इस परिपत्र में संदर्भित टीडीएस के मुद्दे हेतु प्रासंगिक नहीं है।

हिन्दी संस्करण अनुसरित है

 

(संदीप सिंह)

अवर सचिव, भारत सरकार

 

समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक

 

निम्न को प्रति :

  1. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष तथा समस्त सदस्य

  2. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में समस्त संयुक्त सचिव तथा आयुक्त

  3. प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) तथा प्रधान आयकर महानिदेशक (प्रशा.)

  4. अपर महानिदेशक (वसूली) तथा (पीआर, पीपी एवं ओएल)

  5. संबधित पोर्टल पर निर्देशों को चस्पा करने के लिए वेबमैनेजर irsofficersonline.gov.in तथा incometaxindia.gov.in

  6. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (30 प्रतियां)

  7. गार्ड फाइल

 

(संदीप सिंह)

अवर सचिव, भारत सरकार