आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 3/2014, 24-1-2014 दिनांक

परिपत्र की तिथि

24/01/2014

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

24/01/2014

परिपत्र सं. 3/2014, 24-1-2014 दिनांक

परिपत्र न. 03ध्2014

पन्ना न- 142/24/2013-टी पी ए ल

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

कर विभागय

(सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैकसिस)

*******

तिथि 24 जनवरी 2014

फाइनैनस एक्ट 2013 के प्रावधानों का पूरा विवरण स्पष्टीकरण सहित परिपत्र

आयकर ए ेक्ट

फार्इनैन्स एक्ट 2013- फार्इनैन्स एक्ट 2013 के प्रावधानो पर पूरा विवरण स्पष्टीकरण सहित

परिपत्र

आयकर एक्ट

फार्इनैन्स एक्ट 2013 - फार्इनैन्स एक्ट 2013 के प्रावधानों पर पूरा विवरण स्पष्टीकरण सहित

परिपत्र न 03/2014 तिथि 24 जनवरी 2014

संशोधन ए क नजर मे

भाग/अनुसूची विवरण अनुच्छेद न.
फार्इनैन्स एक्ट 2013
पहली अनुसूची रेट ढाचां 3.1-3.4
आयकर एक्ट 1961
2 मूलधन सम्पत्ति की परिभाषा मे बदलाव 4.1-4.5
10 कीमैन बीमा पॉलिसी की परिभाषा मे बदलाव 5.1-5.5 जमाकर्ता के निवेशक प्रोटेक्शन फंड के आय मे छूट 6.1-6.3; किसी विकल्पी निवेश फंड के स्टर से पारित होना 7.1-7.4 भारतीय मुद्रा किसी विदेशी कम्पनी द्वारा भारत में आय की प्राप्ति पर छूट 8.1-8.4 नेशनल फाइनैनशियल होलडिग्स कम्पनी लि: को छूट 9.1-9.3।
नयी धारा 32 ए सी का प्रवेशन उत्पादक कम्पनी द्वारा नये उद्योग या मशीनरी के अधिग्रहण या प्रतिष्ठापन के लिये प्रेरणा 10.1-10.4।
36 बैंक के संदर्भ मे जो राशि डूबत कर्ज के रूप मे मान्य है कटौती के लिये उसका स्पष्टीकरण 11.1-11.8।
40. राज्य सरकार के उपक्रमों के संदर्भ मे किसी शुल्क या फीस वर्जित है 12.1-12.3।
नयी धारा 43 सी का प्रवेशन कुछ केस मे अचल सम्पत्ति के स्थानांतरण के लिये आय का मूल्यांकन शीर्षक (व्यवसाय या व्यापार मे मुनाफा) के नीचे; 13.1-13.4.1
56 अपर्याप्त विवेचन प्राप्त हुआ अचल सम्पत्ति की कर योग्यता पर, 14.1-14.4।
80 सी बीमार या अपाहिज व्यक्तियों की जीवन बीमा पॉलिसी मान्य प्रीमियम का सीमा प्रतिशत बढ़ाना, 15.1-15.6।
80 सी जी गुंजाइश, कटौती और उसकी योग्यता को बढ़ाना धारा के तहत, 16.1-16.5
80 डी उन सेहत योजना के योगदान पर कटौती जो केन्द्र सरकार सेहत योजना (सी जी ए च ए स) की तरह है, 17.1-17.3।
नर्इ धारा 80 र्इ र्इ का प्रवेशन वित्तीय वर्ष 2013-14 में घर खरीदने के लिये लोन पर ब्याज़्ा पर कटौती, 18.1-18.4।
80 जी राष्ट्रीय बच्चों के फंड़ को दिये गये दान पर सौ प्रतिशत की कटौती, 19.1-19.4।
80 जी जी बी और 80 जी जी सी योगदान नकद नही होना चाहिये धारा 80 जी जी बी और 80 जी जी सी के तहत कटौती के लिये, 20.1-20.3।
80-1ए ऊर्जा सैक्टर के लिये सूर्यास्त तिथि को बढ़ाना धारा के तहत, 21.1-21.3।
80 जे जे ए अतिरिक्त वेतन के लिये कटौती कुछ मामलों मे, 22.1-22.6।
87 और नर्इ धारा 87 ए का प्रवेशन 2000 व्यक्तियों को छूट जिनकी आय ` 5 लाख तक है, 23.1-23.4।
90 और 90A कर आवासीय प्रमाण पत्र, 24.1-24.5।
अध्याय X-A का कटना जो कि आम एन्टी एवाइडेन्स रूल से संबंधित है आम एन्टी एवार्इडेन्स रूल (जी ए ए आर), 25.1-25.5।
और नये अध्याय XA का प्रवेशन धारा 144 बी ए को शामिल न किया जाना और नर्इ धारा 144 बी ए का प्रवेशन धारा 144 सी, 153 डी, 245 ए न, 245 आर, 246 ए , 253 और 295 का संशोधन
115 ए आय का कर निर्धारण राजशुल्क या तकनीकी सेवाओं के शुल्क के लिये, 26.1-26.4।
115 बी बी डी कम कर का रेट उन लाभाशों पर जो विदेशी कंपनियो से मिला है, 27.1-27.3।
115-ओ लाभाशों के वितरण पर प्रपौत की तरह गिरते हुए असर को हटाना, 28.1-28.5।
नये अध्याय XII डी ए का प्रवेशन कम्पनी द्वारा अनलिस्टिड शेयरों की वापसी खरीद पर वितरित आय पर अतिरिक्त आयकर, 29.1-29.4।
115 आर मुचुअल फंड द्वारा वितरित आय पर कर का परिमेयकरण, 30.1-30.5।
नये अध्याय XII र्इ ए का प्रवेशन प्रतिभूतिकरण ट्रस्ट का कर निर्धारण, 31.1-31.4।
132 बी जब्त की हुर्इ सम्पत्ति का प्रयोग
138 “ फोरेन एक्सचेज रेगुलेशन एक्ट 1947’’ और “फोरेन एक्सचेज रेगुलेशन एक्ट 1973”A जैसे शब्दों का तबादला “फोरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट 1999” से, 33.1-33.4।
139 कर की स्वत: मूल्यांकन के भुगतान के बिना भरी हुर्इ रिटर्न को दोषपूर्ण रिटर्न माना जाएगा, 34.1-34.3।
142 विशेष लेखा परीक्षण का निर्देश उप धारा (2 ए ) के धारा के अधीन, 35.1-35.3
153 और 153 बी मूल्यांकन और पुन: मूल्यांकन को पूरा करने के लिए सीमाबद्ध समय की गणना के लिए समय निकाल देना, 36.1-36.6; जब स्थानांतरण मूल्य अफसर को भेजा जाए तो समय की सीमा मूल्यांकन और पुन: मूल्यांकन के लिये, 37.1-37.6।
167 सी और 179 “कर देय” का स्पष्टीकरण कुछ मामलों मे वसूली के लिये, 38.1-38.3।
नर्इ धारा 194-1ए का प्रवेशन कर कटौती स्रोत पर (टी डी एस) कुछ अचल सम्पत्ति के स्थानांतरण पर (खेती बाड़ी की ज़्ामीन को छोड़कर), 39.1-39.6।
नर्इ धारा 194 ए ल डी का प्रवेशन और धारा 115 ए डी, 195 और 196 डी का संशोंधन विशेष बंध-पत्र और सरकारी ऋण पत्रों पर ब्याज से आय, 40.1-40.2।
204 “भरने के लिये जिम्मेदार” व्यक्ति का मतलब अध्याय XVII के तहत, 41.4-41.4।
206 ए ए कुछ अप्रवासीय बंध पत्र धारक को धारा 206 ए ए के तहत पैन देने को जरूरत से छूट
206 सी किसी सिक्के या कोर्इ वस्तु जिसका वजन 10 ग्राम या उससे कम हो, की नकदी बिक्री पर टी डी एस की छूट को हटाना, 43.1-43.2।
252 पुन: विचार संबंधी कचहरी के अध्यक्ष की नियुक्ति, 44.1-44.4।
नयी धारा का विकल्प धारा 271 एफ ए की जगह वार्षिक सूचना रिटर्न न भरने पर जुर्माना धारा 271 एफ ए के तहत, 45.1-45.5।
चौथी अनसुची स्वीकृति के लिए समय अवधि की बढ़त, 46.1-46.5।
सम्पत्ति कर 1957
2 मूलधन सम्पत्ति की परिभाषा मे बदलाव : खेती बाड़ी की जो जमीन शहरी क्षेत्र मे है उसे सम्पत्ति कर से छूट, 47.1-47.3।
नर्इ धाराए ं 14A, और 14 B का प्रवेशन और धारा 46 का संशोधन अनुलग्नक रहित कुल सम्पत्ति को रिटर्न को इलैक्ट्रानिक भरन की सुविधा के प्रावधान उपलब्ध करवाना, 48.1-48.4।
फार्इनैन्स (न. 2) एक्ट 2004
फार्इनैनस (न. 2) एक्ट 2004 को धारा 98 ऋण पत्र के सौदे कर के रेट का परिमेयकरण, 49.1-49.3।
अध्याय VII फार्इनैन्स एक्ट, 2013
फार्इनैन्स एक्ट 2013 का अध्याय VII और आयकर एक्ट की धारा 36 और 43 में संशोधन वस्तुओं का सौदा कर, 50.1-50.6.2।

1 परिचय

1.1 फार्इनैन्स एक्ट 2013 जिसे सदन ने पारित किया है और राष्ट्रपति की स्वीकृति की मुहर लगी है 10 मर्इ 2013 की और जिसे 2013 के एक्ट न. 17 कहा जा रहा है। यह परिपत्र स्पष्ट करेगा सीधे कर से संबंधित एक्ट के प्रावधानों को।

2. एक्ट ने जो बदलाव किये है

2.1 एक्ट ने

(i) वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिये आयकर के रेट स्पष्ट किये है और आयकर के रेट, कर जहाँ स्रोत पर काटा जाएगा इस आधार पर भी स्पष्ट किए और वित्तीय वर्ष 2013-14 मे ए ंडवास कर भी भरा जाना चाहिए ।

(ii) आयकर एक्ट 1961 की धाराओं 2, 10, 36, 40, 43, 56, 80 सी, 80 सी सी जी, 80डी, 80 जी, 80 जी जी बी, 80 जी जी सी, 80-1ए , 80 जे जे ए ए , 87, 90, 90ए , 115ए , 115 ए डी, 115 बी बी डी, 115-ओ, 115 आर, 132बी, 138, 139, 142, 144 सी, 153, 153 बी, 153 डी, 167 सी, 179, 195, 196 डी, 204, 206 ए ए , 206 सी, 245 ए न, 245 आर, 246 ए , 252, 253, 271 ए फ ए , 291 में संशोधन किये गए है।

(iii) आयकर एक्ट 1961 में अध्याय X-A और धारा 144 बी ए शामिल नहीं किया गया है।

(iv) नर्इ धाराओं 32 ए सी 43 सी ए , 80 र्इ र्इ, 87ए , 1941ए और 194 एल डी का प्रवेशन आयकर एक्ट 1961 में हुआ है।

(v) प्रवेशन अध्याय X-A मे धारा 95-102 है, अध्याय XII डी ए मे धारा 115 क्यू ए -115 क्यू सी है और अध्याय XII र्इ ए मे धारा 115 टी ए - 115 टी सी, धारा 144 बी ए , धारा 194 एल डी है आयकर एक्ट 1961 में।

(vi) आयकर एक्ट 1961 की चौथी अनुसूची के भाग ए का संशोधित नियम 3

(vii) सम्पत्ति कर एक्ट 1957 की संशोधित धाराएं 2 और 46;

(viii) सम्पत्ति कर 1957 एक्ट मे धाराएं 14 ए और 14 बी का प्रवेशन

(ix) फाइनैन्स (न. 2) एक्ट 2004 की संशोधित धारा 98;

(x) अध्याय VII के माध्यम से वस्तु लेन देन कर का परिचय।

3. रेट ढांचा

3.1 वित्तीय वर्ष 2013-14 कर योग्य आय का आयकर रेट

3.1.1 सभी श्रेणी के निर्धारिती की कर योग्य आय पर आयकर लगेगा वर्ष 2013-14 मे, आयकर के रेट एक्ट की पहली अनुसची के भाग I मे स्पष्ट कर दिये गये है। यह वही रेट है जो फार्इनैन्स एक्ट 2012 की पहली अनुसूची के भाग III मे है "एंडवासंकर" की संगणना के लिए 'वेतन' मे से टी डी एस काटने के लिये और कुछ मामलों ये वित्तीय वर्ष 2012-13 का देय आयकर निकालने के लिये

कथित भाग I के मुख्य विशेषताएं निम्न प्रकार से है :-

3.1.2 वैयक्तिक, हिन्दु अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संगठन, व्यक्तियों की सस्ंथा या बनावटी न्यायाधिकारी :-

भाग I का अनुच्छेद ए आयकर के रेट का स्पष्टीकरण करता है हर व्यक्ति, हिन्दु अविभाजित परिवार, व्यक्तियों के संगठन संस्था या बनावटी न्यायाधिकारियों के लिए (सहकारी समिति, फर्म, स्थानीय प्राधिकारी और कम्पनी को छोड़ कर) निम्न प्रकार से

आयकर के रेट
आयकर निर्धारण के लिये आय व्यक्ति (वरिष्ठ और बहुत वरिष्ठ नागरिक जो भारत के आवासी है) हिन्दु अविभाजित परिवार, व्यक्तियो का संगठन सस्था और बनावटी न्यायाधिकारी व्यक्ति जो भारत के आवासी है साठ वर्ष से ऊपर और 80 वर्ष से कम (वरिष्ठ नागरिक) व्यक्ति जो भारत के आवासी है 80 वर्ष और उससे अधिक (बहुत वरिष्ठ नागरिक)
`2, 00, 000 तक शून्य
2, 00, 001 से 2, 50, 000 तक शून्य
` 2, 50, 001lसे ` 5, 00, 000 तक 10% 10%
`5, 00, 001 से `10, 00, 000 तक 20% 20% 20%
`10, 00, 000 से अधिक 30% 30% 30%

किसी व्यक्ति, हिन्दु अविभाजित परिवार व्यक्तियो के समूह व संगठन को कोर्इ सरचार्ज नही लगता। आयकर पर शिक्षा उपकर 2% के रेट से आयकर की राशि पर लगाया जायेगा। उदाहरण के तौर पर अगर आयकर की राशि ` 1, 00, 000 है तो 2% के हिसाब से ` 2000 बनता है। इसके अतिरिक्त कर की संगणना की राशि भी अतिरिक्त उपकर जिसको उच्च शिक्षा उपकर कहा जाता है आयकर पर 1% के हिसाब से बढ जाएगी। अगर कर की संगणना ` 1, 00, 000 बनती है तो शिक्षा उपकर 2, 000 और ` 1, 00, 000 पर उच्च शिक्षा उपकर ` 100 बनता है। तो इस मामले मे कुल उपकर ` 3000 (` 2000 + ` 1000) है। ऐसे उपकर मे कोर्इ छूट उपलब्ध नही है।

3.1.3 सहकारी समितियाँ :

हर सहकारी समिति के मामले मे आयकर की दरे एक्ट की पहली अनुसूची के अनुच्छेद बी के भाग मे स्पष्ट की गर्इ है। रेट निम्न प्रकार से है :

कर योग्य आय रेट
` 10, 000 तक 10%
` 10, 001 से `20, 000 तक 20%
`20, 000 से अधिक 30%

कोर्इ सरचार्ज नही लगेगा।

शिक्षा उपकर और उच्च शिक्षा उपकर आयकर पर 2% और 1% के हिसाब से आयकर की राशि पर लगेगा।

3.1.4. फर्म

हर फर्म के मामले मे की पहली अनुसूची के अनुच्छेद सी के भाग 1 में 30% का आयकर स्पष्ट किया गया है। फर्म के मामले मे भी कोर्इ सरचार्ज नही लगेगा। शिक्षा उपकर आयकर की राशि पर 2% के हिसाब से लगेगा। इसके अतिरिक्त इस तरह की राशि अतिरिक्त सरचार्ज जिसे शिक्षा उपकर कहा जाता है 1% के हिसाब से आयकर की राशि पर लगेगा सभी मामलों में

3.1.5 स्थानीय प्राधिकारी :-

स्थानीय प्राधिकारी के मामले में एक्ट की पहली अनुसूची के अनुच्छेद डी के भाग 1 में आयकर का रेट 30% दिया गया है। कोर्इ सरचार्ज नही लगेगा। बहरहाल शिक्षा उपकर और उच्च शिक्षा उपकर आयकर की राशि पर 2% और 1% के हिसाब से लगेगा

3.3.6 कम्पनियाँ

[कम्पनी के मामले मे एक्ट की पहली अनुसूची के अनुच्छेद र्इ के भाग 1 मे आयकर के रेट का स्पष्टीकरण दिया गया है। अगर वह कंपनी घरेलू है तो कुल आय का 30% आयकर होगा। आयकर पर 5% के हिसाब से सरचार्ज लगेगा अगर घरेलू कम्पनी आय 1 करोड से ऊपर होती है तो।]

[अगर वह कम्पनी घरेलू नही है तो पारित इकरारनामे के तहत जो कि 31-3-1961dको या उसके बाद पर 1-4-1976 से पहले बना सरकार या भारतीय सदर्भ से प्राप्त राजशुल्क पर 50% कर लगाया जाएगा। इसी तरह से पारित इकरारनामे के तहत जो 29-2-1964 को या उसके बाद पर 1-4-1976 से पहले बना सरकार या भारतीय सदर्भ से प्राप्त तकनीकी सेवाओ के लिये शुल्क पर 50% के रेट से कर लगाया जाएगा। शेष आय पर कर का रेट 40% होगा। दो प्रतिशत का सरचार्ज अलग से लगेगा अगर कम्पनी की आय 1 करोड से अधिक है तो ]

[बहरहाल धोडी छूट की अनुयति हर कम्पनी को है यह सुनिश्चित करने के लिए जो अतिरिक्त राशि दे आयकर की है सरचार्ज सहित वह उसी आय तक सीमित हो जो 1 करोड़ से ऊपर है] और आयकर एक्ट 1961 के धारा 115 जे बी के तहत जो आय कर योग्य होती है जिन कम्पनियों की आय एक करोड़ से ऊपर है, थोड¬ी छूट उपलब्ध है।]

[शिक्षा उपकर 2% के हिसाब से आयकर की राशि सरचार्ज सहित पर लगेगा हर मामले मे 1 और यह कर की राशि और सरचार्ज अतिरिक्त सरचार्ज जिसे उच्च शिक्षा उपकर कहा जाता है आयकर राशि सरचार्ज सहित पर 1% से बढ़ जाएगा। कोर्इ छूट शिक्षा उपकर और उच्च शिक्षा उपकर पर उपलब्ध नही है।]

3.2 वित्तीय वर्ष 2013.14 मे स्त्रोत पर कर कटौती की दरे

3.2.1 आयकर एक्ट 1961 fकी धारा 193, 194, 194 ए 1.94 बी, 194बी बी, 194 डी और 195 के प्रावधानो के तहत जिस रेट पर कर की कटौती होगी वह एक्ट की पहली अनुसूची के अनुच्छेद 11 में उसका वर्णन है वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिये। वित्तीय वर्ष 2013-14 मे स्त्रोत पर आयकर कटौती के रेट वही रहेंगे जैसे कि फार्इनैन्स एक्ट 2012 fकी पहली अनुसूची के भाग 11 मे वार्णित है सिवाय अप्रवासी को (कंपनी के अतिरिक्त) या विदेशी कम्पनी को जो भुगतान किया गया राजशुल्क या तकनीकी सेवाओ के शुल्क के रूप मे आय के लिए उसके लिऐ रेट 25% होगा 10% की जगह।

3.2.2. सरचार्ज :-

संयोजन के लक्ष्य से जो स्त्रोत पर कर कटेगा वह सरचार्ज से बढ जाएगा जैसा कि निम्न मे वर्णित है:-

(i) हर अप्रवासी व्यक्ति के मामले मे जो कम्पनी नही है सरचार्ज का रेट कर का 10% है जिसमे कुल आय जिसपर कर भरा जाना है कटौतियो के बाद 1 करोड़ से अधिक है।

(ii) विदेशी कपनियो को भुगतान के मामले मे संरचार्ज का रेट कर का 2% है जिसमे कुल आय कटौतियो के बाद एक करोड़ से अधिक है पर दस करोड़ से कम है। अगर आय विदेशी कंपनी के मामले मे दस करोड़ से अधिक है तो सरचार्ज का रेट 5% होगा।

(iii) स्त्रोत पर कर कटौती पर कोर्इ सरचार्ज नही लगेगा किसी व्यक्ति हिन्दु अविमाजित परिवार व्यक्तियो के समूह या संगठन पर बनावटी न्यायाधिकारियो पर सहकारी समिति स्थानीय प्राधिकारी फर्म अगर आवासीय या घरेलू कम्पनी है तो।

3.2.3 शिक्षा उपकर :- सरचार्ज सहित

सयोजन के लक्ष्य से आयकर पर शिक्षा उपकर 2% लगाया जाएगा अगर कोर्इ है तो अप्रवासी जिसमे कंपनी भी शामिल है घरेलू कम्पनी के अलावा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी विदेशी कंपनी पर आयकर ` 1, 20, 00, 000 है तो 2% सरचार्ज हुआ ` 2, 40, 000 तो शिक्षा उपकर की संगणना ` 1, 22, 40, 000 पर होगी जो कि ` 2, 44, 800 बनती है। इसके अतिरिक्त जो कर की कुल राशि जो कटेगी और सरचार्ज अतिरिक्त सरचार्ज से बढ जाएगी जिसे हम आयकर पर उच्च शिक्षा उपकर कहते है 1% के हिसाब से सभी ऐसे मामलों मे। इसलिये पहले वाले उदाहरण मे ` 1, 20, 00, 000 जो कर काटा गया उसपर सरचार्ज ` 2.40, 000 gहै, fकथित उच्च शिक्षा उपकर ` 1, 22, 40, 000 पर 1% के हिसाब से संगणित होगा जो कि ` 1, 22, 400 बनता है। तो कुल उपकर इस मामले मे ` 13, 67, 200 बनता है (` 2, 44, 800 + ` 1, 22, 400) ।

3.3 o वेतन मे से स़्त्रोत पर ही आयकर कटौती के रेट "एडवांस कर" की संगणना और वित्तीय वर्ष 2013.14 मे देय आयकर विशेष मामला में

एक्ट की पहली अनुसूची के भाग III में वेतन मे से स़्त्रोत पर ही कर की स्पष्ट की गर्इ है। यही रेट लागू होगे आयकर भरने के लिये वित्तीय वर्ष 2013-14 हाल की आय पर उन मामलो मे जहाँ मूल्यांकन तेजी से करना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर जो मुनाफा भारत मे हुआ, उन्हे अप्रवासियों को भेजना उन व्यक्तियों की आय का मूल्यांकन जो इसी वित्तीय वर्ष मे अपने मुनाफे के लिए भारत छोड़ रहे हो, उन व्यक्तियों का मूलयांकन जो कर बचाने के लिए सम्पति का स्थानांतरण कर रहे हो थोड़े समय के लिये बना है गए संगठनों का मूल्यांकन आदि। रेट निम्न प्रकार से है :

3.3.2 व्यक्ति हिन्दु अविभाजित परिवार व्यक्तियों का समूह और संगठन और बनावटी न्यायाधिकारी :-

I पहली अनुसूची के अनुच्छेदA का भाग III आयकर के रेट स्पष्ट करता है व्यक्ति हिन्दु अविभाजित परिवार व्यक्तियो का समूह और संगठन या बनावटी न्यायाधिकारी व्यक्ति के लिये (सहकारी समिति, फर्म, स्थानीय प्राधिकारी और कम्पनी के अलावा) मूल छूट की सीमा कर के रेट और आय की दरे वही रहेगी जो वित्तीय वर्ष 2012-13 मे थी। कर के रेट वित्तीय वर्ष 2013-14 मे निम्न प्रकार से है।

आयकर के रेट
आयकर निर्धारण के लिये आय व्यक्ति (वरिष्ठ और बहुत वरिष्ठ नागरिक जो भारत के आवासी है) हिन्दु अविभाजित परिवार, व्यक्तियो का संगठन सस्था और बनावटी न्यायाधिकारी व्यक्ति जो भारत के आवासी है साठ वर्ष से ऊपर और 80 वर्ष से कम (वरिष्ठ नागरिक) व्यक्ति जो भारत के आवासी है 80 वर्ष और उससे अधिक (बहुत वरिष्ठ नागरिक)
`2, 00, 000 तक शून्य
2, 00, 001 से 2, 50, 000 तक शून्य
` 2, 50, 001lसे ` 5, 00, 000 तक 10% 10%
`5, 00, 001 से `10, 00, 000 तक 20% 20% 20%
`10, 00, 000 से अधिक 30% 30% 30%

इस प्रकार से आयकर की संगणना से आयकर सरचार्ज की राशि जिसका रेट 10% होगा बढ जाएगा उस मामले मे अगर एक व्यक्ति की आय 1 करोड़ से अधिक होगी तो।

बहरहाल आयकर के रूप मे कुल राशि जो देय होगी और सरचार्ज कुल आय पर जो 1 करोड़ से अधिक है वह कुल राशि जो आयकर के रूप मे भरनी है उससे अधिक नही होनी चाहिये 1 करोड़ अधिक जो कुल आय है।

शिक्षा उपकर आयकर पर लगेगा 2% पर कुल आयकर की राशि सरचार्ज सहित पर। इसके अतिरिक्त कर जो संगणना से निकलेगा वह अतिरिक्त सरचार्ज के कारण बाद जाएगा जिसे आयकर पर उच्च शिक्षा उपकर कहा जाता है और इसका रेट है आयकर की राशि सरचार्ज सहित पर 1%। शिक्षा उपकर और उच्च शिक्षा उपकर पर कोर्इ राहत उपलब्ध नही है।

3.3.3 सहकारी समितियाँ :

हर सहकारी समिति के मामले मे आयकर की दरे एक्ट की पहली अनुसूची के अनुच्छेद बी के भाग मे स्पष्ट की गर्इ है। रेट निम्न प्रकार से है :

कर योग्य आय रेट
` 10, 000 तक 10%
` 10, 001 से `20, 000 तक 20%
`20, 000 से अधिक 30%

इस प्रकार से की गर्इ संगणना से निकाला गया आयकर सरचार्ज की राशि जिसका रेट 10% होगा बढ जाएगा उस मामले मे अगर सहकारी समिति की आय 1 करोड़ से अधिक होगो तो। * बहरहाल आयकर के रूप मे कुल राशि जो देय होगी और सस्चार्ज कुल आय पर जो 1 करोड़ से अधिक है वह कुल राशि जो आयकर के रूप मे भरनी है उससे अधिक नही होनी चाहिये 1 करोड़ अधिक जो कुल आय है।

शिक्षा उपकर आय कर पर लगेगा 2% पर कुल आयकर की राशि सरचार्ज सहित पर 1 इसके अतिरिक्त कर जो संगणना से निकलेगा वह अतिरिक्त सरचार्ज के कारण बद जाए गा जिसे आयका पर उच्च शिक्षा उपकर कहा जाता है और इसका रेट है आयकर की राशि सरचार्ज सहित पर 1% 1 शिक्षा उपकर और उच्च शिक्षा उपकर पर कोर्इ राहत उपलब्ध नही है। *

[कम्पनी के मामले मे एक्ट की पहली अनुसूची के अनुच्छेद र्इ के भाग 1 मे आयकर के रेट का स्पष्टीकरण दिया गया है। अगर वह कंपनी घरेलू है तो कुल आय का 30% आयकर होगा। आयकर पर 5% के हिसाब से सरचार्ज लगेगा अगर घरेलू कम्पनी आय 1 करोड से ऊपर होती है तो।] पर दस करोड़ से ऊपर नहीं है के रेट से सरचार्ज लगेगा अगर कम्पनी की आय 10 करोड़ से ऊपर होती है तो

[अगर वह कम्पनी घरेलू नही है तो पारित इकरारनामे के तहत जो कि 31-3-1961को या उसके बाद पर 1-4-1976 से पहले बना सरकार या भारतीय सदर्भ से प्राप्त राजशुल्क पर 50% कर लगाया जाएगा। इसी तरह से पारित इकरारनामे के तहत जो 29-2-1964 को या उसके बाद पर 1-4-1976 से पहले बना सरकार या भारतीय सदर्भ से प्राप्त तकनीकी सेवाओ के लिये शुल्क पर 50% के रेट से कर लगाया जाएगा। शेष आय पर कर का रेट 40% होगा। दो प्रतिशत का सरचार्ज अलग से लगेगा अगर कम्पनी की आय 1 करोड से अधिक है तो ] पर दस करोड़ से अधिक नहीं। 5% के हिसाब से सरचार्ज लगेगा अगर कम्पनी की आय दस करोड़ से अधिक हुर्इ धरेलू कम्पनी को छोड़कर [बहरहाल थोड़ी छूट की अनुमति हर कम्पनी को है यह सरचार्ज सहित वह उसी आय तक सीमित हो जो 1 करोड़ से ऊपर है] और आयकर एक्ट 1961 के धारा 115 जे बी के तहत जो आय कर योग्य होती है जिन कपंनियो की आय एक करोड़ से ऊपर है, थोड¬ी छूट उपलब्ध है।]

(ii) कुल रााशि जो देय है आयकर के रूप मे सरचार्ज सहित दस करोड़ की आय पर वह उस राशि से अधिक नही जो आय दस करोड़ से अधिक है [शिक्षा उपकर 2% के हिसाब से आयकर की राशि सरचार्ज सहित पर लगेगा हर मामले मे 1 और यह कर की राशि और सरचार्ज अतिरिक्त सरचार्ज जिसे उच्च शिक्षा उपकर कहा जाता है आयकर राशि सरचार्ज सहित पर 1% से बढ़ जाएगा। कोर्इ छूट शिक्षा उपकर और उच्च शिक्षा उपकर पर उपलब्ध नही है।]

3.4 अतिरिक्त आयकर पर सरचार्ज अगर आयकर एक्ट की धारा 115-ओ या 115 क्यू ए या धारा 115 आर की उप धारा (2) या धारा 115 टी ए के तहत अतिरिक्त आयकर भरना पड़े मतलब घरेलू कम्पनियों द्वारा लाभांश का वितरण, कम्पनी द्वारा शेयरधारकों से शेयरों की वापसी खरीद पर आय का वितरण, म्युचुअल फंड द्वारा अपने निवेशकों को आय का वितरण, ऋण पत्र धारक ट्रस्ट का अपने निवेशको मे आय का वितरण पर जो अतिरिक्त कर को देय होगा वह बढ़ जाएगा 10% सरचार्ज लगने पर

4. मूलधन सम्पत्ति की परिभाषा में संशोधन

4.1 जो आयकर एक्ट की धारा (2) मे शर्ते 14 है एक्ट के संशोधन से पहले उसके अनुसार 'मूलधन सम्पत्ति की परिभाषा है किसी भी तरह की सम्पत्ति जो निर्धारिती के पास है चाहे वह उसके व्यापार या व्यवसाय से संबंधित हो या न हो। सम्पत्ति की कुछ श्रेणीयों जैसे कि खेती बाड़ी की ज़्ामीन को इसमे शामिल नहीं किया गया है। धारा (2) की शर्त 14 की उपशर्त (iii) कहती है (a) खेती बाड़ी की ज़्ामीन किसी भी क्षेत्र मे किसी भी नगर या कैटोनमेंट के अधीन जिसकी आबादी पिछली जन गणना के अनुसार दस हज़्ाार से कम न हो (ii) खेती बाड़ी की ज़्ामीन किसी भी क्षेत्र मे जिसका फासला किसी भी स्थानीय नगर निगम या कैटोनमेट से 8 कि. मी. से अधिक न हो जैसा कि केन्द्र सरकार द्वारा परिभाषित किया गया है ताकि उसमे शहरीकरण या दूसरे मान्य कारको के कारण, वह मुलधन सम्पत्ति का हिस्सा है।

4.2 धारा 2 की शर्त 14 की उप शर्त (iii) का (b) का संशोधन किया गया है कि कोर्इ भी ज़्ामीन किसी भी क्षेत्र मे जिसका फासला (i) स्थानीय सीमा के नगर निगम या कैन्टोमेंट बोर्ड से 2 कि. मी. से अधिक न हो जैसा कि a) मे काथित है और जिसकी जनसंख्या 10 हजार से अधिक पर एक लाख से अधिक न हो, या (ii) किसी भी स्थानीय नगर निगम या कैन्टोमेंट बोर्ड से फासला 6 कि. मी. से अधिक न हो जैसा कि (a) में कथित है और जिसकी जनसंख्या 1 लाख से अधिक हो पर 10 लाख से अधिक न हो; या (iii) वह किसी भी नगर निगम या कैन्टोनमेंट बोर्ड की स्थानीय सीमा से 8 कि. मी. से अधिक न हो जैसा कि (a) मे कथित है जिसकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, वह मूलधन सम्पत्ति का हिस्सा है।

4.3 "जनसंखया" का मतलब है जनसंख्या पिछली जनगणना के हिसाब से जिसके मान्य आंकड़े पिछले वर्ष के पहले दिन से पहले प्रकाशित हो चुके हों।

4.4 ऐसे ही संशोधन आयकर एक्ट 1961 की धारा 2 की शर्त 1ए मे किये गये है जो कि "खेतीबाड़ी से आय" की परिभाषा से संबंधित है और 'शहरी ज़्ामीन' की परिभाषा है सम्पत्ति कर 1957 के अंदर।

4.5 प्रयोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 से लागू होंगे और यह मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद वाले वर्षों मे प्रयोग किया जायेगा।

5. कीमैन बीमा पॉलिसी

5.1 आयकर एक्ट 1961 की धारा 10 की शर्त 10 डी के प्रावाधानों के अनुसार एक्ट के संशोधन से पहले, अन्य विषयों मे, कोर्इ भी राशि जो कि जीवन बीमा पॉलिसी के तहत मिली हो उस पर छूट है कीमैन बीमा पॉलिसी के अतिरिक्त कथित शर्त (10 डी) का स्पष्टीकरण है कि कीमैन बीमा पॉलिसी का मतलब है कि जीवन बीमा पॉलिसी जो एक व्यक्ति ने ली किसी दूसरे व्यक्ति की ज़्िादगी के ऊपर जो कि पहले कथित व्यक्ति का कर्मचारी था या किसी तरह से उसके व्यापार या व्यावसाय से संबंधित था।

5.2 यह देखा गया है कि जो पॉलिसी कीमैन बीमा पॉलिसी के नाम से ली जाती है वह परिपक्वता से पहले ही की मैन को सौप दी जाती है। की मैन शेष प्रीमियम भरता है और क्लेम की पूरी राशि इस पॉलिसी के तहत लेता है और इस पॉलिसी पर इस आधार पर छूट मिलती है कि वह अब की मैन पॉलिसी न रही।

5.3 धारा 10 (10 डी) के तहत छूट उन पॉलिसियों पर मिलती है जो मूल्यत: तो की मैन पॉलिसी थी पर सत्र मे ही उस पॉलिसी को किसी और व्यक्ति के नाम कर दिया गया। न्यायालय ने भी इस कानून के गुप्त मार्ग को देखा है।

5.4 इस गुप्त मार्ग को बन्द करने और कर के भुगतान से बचने के लिये धारा 10 की शर्त (10 डी) को संशोधन किया गया है कि की मैन बीमा पॉलिसी अगर सत्र मे ही किसी व्यक्ति को दे दी जाती है जान बूझ कर या बिना जाने बूझे तो वह की मैन बीमा पॉलिसी ही रहेगी और आयकर एक्ट की धारा 10 की शर्त (10 डी) के तहत छूट के लिये मान्य नहीं होगी।

प्रयोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 से लागू होगी और मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आने वाले वर्षों में इसका प्रयोग किया जायेगा।

6. जमाकर्ताओं को निवेशक सुरक्षा फंड के तहत होने वाली आय को छूट

6.1 सेबी के प्रावधानों (जमाकर्ता और सहभागी) व नियम 1996 जो कि संशोधित किये गये थे 2012 के तहत कि जमाकर्ताओं एक निवेशक सुरक्षा फंड बनाना पड़ेगा। आयकर एक्ट 1961 की धारा 10 (23 र्इ ए ) बताती है कि एक मान्य स्टॉक एक्स्चेंज से योगदानों के तहत जो आय निवेशक सुरक्षा फंड को प्राप्त होगी वह कर से मुक्त होगी।

6.2 इसी के आधार पर एक नयी शर्त (23 र्इ डी) का प्रवेशन आयकर एक्ट 1961 की धारा 10 मे किया गया है कि जो आय जमाकर्ता को निवेशक सुरक्षा फंड से जो कि सेबी के निर्देशानुसार जमाकर्ता द्वारा बनाया गया है, जमाकर्ता के योगदान से जो आय होती है उस आय को कुल आय की संगणना मे नही गिना जायेगा।

उन्ही शर्ती पर जो कि निवेशक सुरक्षा फंड जो कि मान्य स्टॉक एक्सचेंजो द्वारा बनाया गया है लागू होगी। बहरहाल जितनी भी राशि जो फंड़ देनी होगी जिस पर पिछले वर्ष आयकर नही लगा है उसमे जमाकर्ता का भी हिस्सा है उसको। पिछले वर्ष की आय माना जाएगा जिस वर्ष मे यह राशि बाँटी गर्इ।

6.3 प्रयोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15

और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षो मे प्रयोग किया जाएगा दूसरे मान्य कारको के कारण, वह मूलधन सम्पति का हिस्सा है।

7. किसी विशेष विकल्पी निवेश फन्डस के स्तर से पारित होना

7.1 आयकर एक्ट 1961 की धारा 10 (23 एफ बी) संशोधन से पहले कहती थी कि किसी उद्यम पूंजी उपक्रम मे निवेश से किसी उधम पूंजी कंपनी और उधम पूंजी फन्ड की आय को कर से मुक्त रखा जायेगा। आयकर एक्ट 1961 की धारा 115 यू कहती है कि जो आय वी सी सी या वी सी एफ मे निवेश से होती है या किसी व्यक्ति को प्राप्त होती है वह कर योग्य है उसी प्रकार से (किसी व्यक्ति ने 20 सी यू में सीधा निवेश किया हो)

7.2 ऐसी धाराएं पारित होने का स्तर प्रदान करती है (आय जो है वह निवेशको के हाथो कर योग्य है वी सी एफ या वी सी सी की जगह) उन्ही फन्डस को सेबी द्वारा प्रदान किये गये निवेश और दूसरी शर्तो (वी सी एफ) नियमों 1996 को पूरा करते है। आगे पारित होने का स्तर आय के संदर्भ मे उपलब्ध है जो आय फन्ड को होती है वी सी यू मे निवेश करने से एक कंपनी होने के नाते वह सेबी द्वारा प्रदान की हुर्इ शर्तो (वी सी एफ) और नियमो 1996 को पूरा करते है

7.3 सेबी (विकल्पी निवेश फन्ड) नियम, 2012 (ए आर्इ एफ नियम) ने सेबी (वी सी एफ) नियम 1996 (वी सी एफ नियम) की जगह ले ली है 21 मर्इ 2012 से। पारित होने का स्तर समान उद्यम पूंजी फन्ड जो कि नए नियमो के तहत पजींकृत है और समान निवेश पाबंदियों को निवेश के सदर्भ मे मानते है स्तर प्रदान करने हेतु उद्यम पूंजी उपक्रम मे धारा 10(23 एफ बी) को संशोधित किया गया है :

(i) तत्कालीन वी सी एफ और वी सी सी (जो कि 21/05/2012 से पहले पंजीकृत हुए ) को वी सी एफ के नियमो के अधीन है क्योकि वह ए आर्इ एफ नियमो के तहत रद्द कर दिये गए है वह पारित होने का स्तर पा सकते है जैसा कि अभी उपलब्ध हैै।

(ii) ए आर्इ एफ के नियमो के अधीन उधम पूजी कम्पनी एक कम्पनी है और उधम पूंजी फंड एक फंड है जो ट्रस्ट के रूप मे बनाया गया है जिसको पंजीकरण का प्रमाण पत्र उद्यम पूजी फंड के रूप मे दिया गया है जिसका उप श्रेणी विकल्पी निवेश फंड की होगी और वह निम्न शर्ते पूरी करेगी:-

(क) इसके दो तिहार्इ निवेशिक फंड अनलिस्टिड इक्विटी शेयर मे निवेशित है या इक्विटी सबंधित उद्यम पूंजी उपक्रम के यंत्रो मे)

(ख) ऐसी ए आर्इ एफ द्वारा कोर्इ निवेश बी सी यू मे नही किया गया जो कि सहयोगी कम्ंपनी है।

(ग) ट्रस्ट के यूनिट जो कि ए आर्इ एफ की तरह बनार्इ गर्इ है या कम्पंनी के शेयर जो ए आर्इ एफ की तरह बनार्इ गर्इ है वह किसी मान्य एक्सचेंज मे लिस्टिड नहीं है

(iii) ए आर्इ एफ के नियमो के सदर्भ मे उद्यम पूंजी उपक्रम को उसी तरह से परिभाषित किया जाएगा जैसा कि विकल्पी निवेश फन्ड के नियमो मे किया गया है

7.4 प्रयोजनीयता :- इस संशोधन को लागू किया गया।

अप्रैल 2013 से और उसी सदर्भ मे यह मूल्यांकन वर्ष 2013-14 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षो मे लागू की गर्इ।

8. आय मे छूट जो कि भारत मे प्राप्त की गर्इ भारतीय मुद्रा मे विदेशी कम्पंनी द्वारा:-

8.1 आयकर एक्ट 1961 की धारा 10 की शर्त 48 का परिचय फार्इनैंस एक्ट 2012 द्वारा 1.4.2012 को करवाया गया। यह शर्त एक विदेशी कम्पंनी को छूट प्रदान करती है जो आय उसे भारत मे भारतीय मुद्रा मे प्राप्त हुर्इ भारत मे किसी व्यक्ति को कच्चे तेल की बिक्री से।

8.2 उपर्युक्त शर्त राष्ट्रीय फायदे को ध्यान मे रखते हुए लाया गया ताकि विदेशी कम्पंनीयो को कच्चे तेल की कीमत भारतीय मुद्रा मे की जा सके। समान सुविधा दूसरी वस्तुओ और सेवाओ मे भी उपलब्ध होनी चाहिये (* = की जरूरत)

8.3 उसके अनुरूप आयकर एक्ट 1961 की धारा 10 की शर्त 48 को संशोधित किया गया ताकि विदेशी कम्पंनी द्वारा भारत मे प्राप्त की गर्इ आय वस्तुओ और सेवाए प्रदान करने हेतु केद्र सरकार द्वारा प्रकाशित की जाए कि कोर्इ भी व्यक्ति छूट का हकदार होगा तत्कालीन शर्तो की पूर्ति पर उपर्युक्त शर्त मे।

प्रयोजनीयता :- यह सशोधन 1 अप्रैल 2014 से लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आनेवाले मूल्यांकन वर्षा मे लागू होगा

9. राष्ट्रीय वित्तीय नियंत्रक कम्पनी लि को छूट

नैश्नल फिनानशियल होलडिंगस कम्पंनी लि को छूट

9.1 यूनिट ट्रस्ट ऑफ इण्डिया का कथित उपक्रम यूनिट ट्रस्ट आफ इण्डिया (उपक्रम का स्थानांतरण और निसरित करना) एक्ट 2002 के तहत यू टी आर्इ के वारिस के रूप मे कथित उपक्रम (एस यू यू टी आर्इ) को आयकर से छूट 31.3.2014 तक उपलब्ध थी। एस यू यू टी आर्इ की वारिस एक नर्इ कम्पनी कर रही है जिसकी मालिक केन्द्र सरकार है। यह कम्पंनी नेशनल किनान शियल होल्डिंगस कम्पंनी के नाम से 7 जून 2012 को बनी।

9.2 एन एफ एच सी एल को एस यू यू टी आर्इ के मार्ग पर छूट दिलाने के लिए आयकर एक्ट 1961 की शर्त 49 मे संशोधन किया गया ताकि एन एफ एच सी एल को उस आय पर छूट मिल सके जो उसकी 31.3.2014 को या उससे पहले हुर्इ

9.3 परियोजनीयता : यह संशोधन 1 अप्रैल 2013 को लागू होगा और उसी संदर्भ मे यह मूल्यांकन वर्ष 2013-14 और वर्ष 2014-15 के लिये लगाया जाएगा।

10. उत्पादन कम्पनी द्वारा नये उद्योग और मशीनरी अधिग्रहण और लगाने पर प्रोत्साहन (प्रेरणा)

10.1 उद्योग और मशीनरी निवेश को प्रोत्साहन देने हेतु आयकर एक्ट मे नर्इ धारा 32 ए सी का प्रवेशन किया गया।

जिसमे निर्धारिती अगर एक कम्पनी है तो :-

(क) अगर वह किसी वस्तु का उत्पादन करती है और

(ख) ` 100 करोड़ से अधिक धन नर्इ सम्पत्ति (उद्योग या मशीनरी) में लगाती है 1.4.2013 से 31.3.2015 तक तो निर्धारिती को निम्न की अनुमति होगी :-

(i) मूल्यांकन वर्ष 2014-15 में जितनी नर्इ सम्पत्ति की कुल कीमत होगी उसकी 15% की छूट उसको वित्तीय वर्ष 2013-14 में मिलेगी अगर उस सम्पत्ति की कीमत ` 100 करोड़ से अधिक होगी।

(ii) मूल्यांकन वर्ष 2015-16 के लिये, नर्इ सम्पत्ति की कुल कीमत जो कि 1-4-2013 से 31.3.2015 तक लगार्इ गर्इ, मे से 15% की छूट मिलेगी जो कि आज्ञानुसार कटौती द्वारा कम की जाएगी मूल्यांकन वर्ष 2014-15 के लिये।

10.2 "नर्इ सम्पत्ति" को नये उद्योग या मशीनरी के रूप मे परिभाषित किया गया है पर उसमे निम्न को शामिल नहीं किया गया है:-

(i) कोर्इ उद्योग या मशीनरी जिसको स्थापित किये बिना निर्धारिती ने उसको भारत या विदेश मे इस्तेमाल किया हो;

(ii) कोर्इ उद्योग या मशीनरी किसी कार्यालय, आवासीय अतिथि गृह मे लगार्इ गर्इ हो;

(iii) कोर्इ कार्यालय उपकरण जिसमे कम्प्यूटर और कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर भी शामिल है;

(iv) कोर्इ वाहन;

(v) पानी या हवार्इ यान;

(vi) कोर्इ उद्योग या मशीनरी, जिसकी कुल कीमत पर ही कटौती की अनुमति हो (अवमूल्यन या किसी और वजह से) आय की संगठन शीर्षक "व्यापार या व्यवसाय मे मुनाफे" के नीचे किसी भी पिछले वर्ष मे।

10.3 आगे, मान्य सरंक्षण लगाये गये है उद्योग और मशीनरी का स्थानांतरण रोकने के लिये अगले 5 वर्षों तक। बहरहाल यह पाबंदी एकीकरण या अलग होने पर लागू नहीं होती पर एकीकरण या परिणामित कम्पनी पर लागू होगी, जैसा भी मामला होगा।

10.4 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 से लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग मे लाया जाएगा।

11. राशि जो कटौती के योग्य है बैको के संदर्भ मे डूबंत ऋण के रूप मे उसका स्पष्टीकरण

11.1 आयकर एक्ट की धारा 36(1)(iii a) के प्रावधानों के अनुसार, इस एक्ट के संशोधन से पहले, कुछ बैंक और वित्तीय संस्थानों की आय की संगणना के समय कुछ कटौती मिलती है प्रावधानों के अनुसार जब इनके द्वारा कुछ डूबंत ऋण दिखाये जाते है, उसी सीमा के अंदर जिसका स्पष्टीकरण दिया गया है। आयकर एक्ट की धारा 36(1)(VII a)(a) के तहत जो सीमा का प्रावधान निर्धारित किया गया है डूबंत ऋण का कुछ बैंको के लिये (जो बैंक भारत के बाहर नहीं बने) और सहकारी बैंकों के लिये कुल आय का 7.5% (इस शर्त के तहत कटौती से पहले) और कुल आय का 10% इन बैंकों की ग्रामीण शाखाओं द्वारा 1 यह सीमा कुल आय की 5% है। (इस शर्त के तहत कटौती से पहले) धारा 36(1)(VII a) (b) और 36 (1) (VIIa) (c) के तहत जो बैंक भारत के बाहर बने और कुछ वित्तीय संस्थाओं के लिये।

11.2 आयकर एक्ट की धारा 36 उपधारा (1) की शर्त (VII) डूबंत ऋण के लिये कटौती का प्रावधान बताती है अगर डूबत ऋण की निर्धारिती की किताबों मे वापिस न मिलने योग्य लिख दिया जाये। इस शर्त का प्रावधान कहता है कि जिस निर्धारिती पर आयकर एक्ट की धारा 36(1)(VIIa) लागू होती है तो कथित शर्त (VII) पर कटौती डूबंत ऋण की उस राशि तक सीमित होगी जो डूबत ऋण के खाते मे जमा शेष से जितनी अधिक होगी एक्ट की धारा (36)(1)(VIIa) के तहत

11.3 आयकर एक्ट की धारा 36(1)(VII) के प्रावधान संबंधित है धारा 36(2) के प्रावधानों के संदर्भ मे है। आयकर एक्ट की धारा 36 की उप धारा (2) की शर्त (V) यह बताती है कि निर्धारिती पर अगर कथित एक्ट की 36(1) (VIIa) लगाती है तो उसे डूबंत ऋण की राशि को डूबंत ऋण के खाते मे लिख देना चाहिये जो कि आयकर एक्ट की धारा 36(1) (VIIa) के तहत बना है।

11.4 इसलिये बैंक और वित्तीय संस्था डूबंत ऋण के लिए कटौती ले सकते हैं जिसको धारा 36(1) (VII) के तहत लिख दिया जाता है केवल उतनी राशि पर जितनी डूबंत ऋण के खाते मे जाता है केवल उतनी राशि पर जितनी डूबंत ऋण के खाते मे जमा शेष से जितनी अधिक होगी। बहरहाल कुछ न्यायिक निर्णयों ने धारा 36(1) (VII) के प्रयोग और पहुचँ पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह धारा केवल ग्रामीण शाखाओं के डूबंत ऋण के लिये है।

11.5 आयकर एक्ट की धारा 36(1)(VIIa) की तीन उपधाराए ं है उपधारा (a) उपधारा (b) और उपधारा (c) और उसमे से केवल एक उपधारा (a) खाली ग्रामीण अग्रिम से संबंधित हैं जब कि दूसरी उपधारा ग्रामीण अग्रिम से संबंधित नहीं है। जब कि विदेशी बैंको की कोर्इ ग्रामीण शाखाए ं नही होती। इसलिये जो डूबंत ऋण के खाते का प्रावधान धारा 36(1)(VIIa), धारा 36(1)(VII), धारा 36(a)(V) सभी बैंकों के लिये है चाहे वह ग्रामीण अग्रिम हो या वैसे।

11.6 यह भी देखा गया है कि धारा (VIIa) के अधीन डूबंत ऋण के अलग अलग खाते हैं ग्रामीण अग्रिम और शहरी अग्रिम के लिये और अगर वह ऋण जो वापिस नहीं मिलेगा वह शहरी अग्रिम से संबंधित है तो उसे ग्रामीण अग्रिम मे नहीं लिखा जाना चाहिए हालांकि कि आयकर एक्ट की धारा 36(1)(VIIa) मे ऐसा कोर्इ फर्क देखने मे नहीं आता।

11.7 शर्त (VII), (VIIa) उप धारा (1) और उपधारा (2) की उपयोगिता सिद्ध करने के लिये धारा 36 (i)(VII) में उसके स्पष्टीकरण का प्रवेशन किया गया है यह बताते हुए कि धारा 36(i)(VII) और धारा 36(II)(V) केवल एक खाता ही डुबत ऋण से संबंधित है वह भी धारा 36(I)(VIIa) के अधीन जिसमें सभी तरह की अग्रिम राशि शामिल है ग्रामीण शाखाओं की भी इसलिये जिस निर्धारिती पर धारा 36(i) लागू होता है तो डुबत ऋण के कटौती उतनी राशि पर होती है जितनी डुबत ऋण के खाते मे जमा शेष से अधिक होगी जो खाता धारा 36(1) (VIIa) के अधीन बना है जिसमे ग्रामीण और शहरी अग्रिम मे कोर्इ फर्क नहीं है।

11.8 परियोजनीयता:- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 से लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

12 राज्य सरकार उपक्रमों मे कोर्इ फीस या शुल्क का भुगतान करने की अनुमति नहीं है:-

12.1 आयकर एक्ट 1961 की धारा 40 इस एक्ट के संशोधन से पहले उस राशि का बारे मे बताती है जो आय की संगणना मे काटी नहीं जाएगी शीर्षक 'व्यापार या व्यवसाय से मुनाफे के अधीन बिना कटौती के खर्चे कथित धारा के अधीन सवैधानिक खर्चे जैसे अनुषंगी लाभकर, आयकर, सम्पत्तिकर आदि भी शामिल है : राज्य सरकार के उपक्रमों पर आयकर मूल्यांकन के कुछ झगड़े सामने आए है कि अगर कोर्इ राशि जो लाइसेंस शुल्क राजशुल्क के रूप मे राज्य सरकार ने ली है वह राशि आय संगणना मे क्यों नही गिनी जाती ऐसे उपक्रमों मे। कुछ मामलों मे निर्णय जारी कर दिये गये है कि अतिरिक्त राशि जो ऐसे उपक्रमों से इस रूप मे आयी है वह राज्य सरकार के पास जमा करवा दी जाये। परिणाम स्वरूप ऐसी आय अतिरिक्त है तो कर योग्य नहीं है। यह एक पक्का कानून है कि राज्य सरकार के उपक्रम राज्य से अलग कानूनी अस्तित्व है इसलिये आयकर के योग्य है।

12.2 राज्य सरकार उपक्रमों का कर आधार बचाने के लिये शुल्क फीस आदि के रूप से या राज्य सरकारों का उस राशि का उपयोग अपने उपक्रमों से आयकर एक्ट की धारा 40 को संशोधित किया गया है कोर्इ भी राशि जो फीस शुल्क आदि के रूप मे सीधे या किसी और रूप से राज्य सरकार के उपक्रमों द्वारा राज्य सरकार लगाएगी उस पर "व्यापार या व्यवसाय से मुनाफा" के शीर्षक के नीचे आय की संगणना मे कटौती के रूप मे होने की अनुमति नही है। "राज्य सरकार उपक्रम" ऐसे उद्देश्य के लिये निम्न शामिल होते है:-

(i) एक निगम जो राज्य सरकार के द्वारा या किसी एक्ट द्वारा बनाया गया हो जो राज्य सरकार के अधीन आता है।

(ii) एक कम्पनी जिसमे इक्विटी शेयर मूलधन का 50% से अधिक राज्य सरकार के पास है।

(iii) एक कम्पनी जिसमे भरा हुए इक्विटी शेयर का मूलधन उस कम्पनी के पास है जो शर्त

(iv) (i) या शर्त (ii) मे वार्णित है (चाहे उसको अकेले या इकÎे लिया गया हो)

(v) एक कम्पनी या निगम जिसमे राज्य सरकार को उसके अधिकांश निर्देशक नियुक्त करने का अधिकार हो या तो प्रबंधन या योजना निर्णय को नियंत्रण करने का अधिकार हो, सीधे या किसी के द्वारा संभवत: शेयरधारिता या प्रबंधन अधिकार या शेयरधारक इकराननामे या मताधिकार या किसी और तरह से।

(vi) एक प्राधिकार, बोर्ड, संस्थान या संगठन जो राज्य सरकार के किसी कानून के तहत स्थापित किया गया हो या जो राज्य सरकार के नियंत्रण मे हो।

परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 से लागू होगा और उसके अनुसार मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आनेवाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया गया।

13. आय की संगणना शीर्षक 'व्यापार या व्यवसाय से मुनाफा' कुछ मामलों मे अचल सम्पत्ति के स्थानांतरण के लिये

13.1 आय की एक्ट के प्रावधानों के अधीन जब एक मूलधन सम्पत्ति, जो अचल है, उसका स्थानांतरण इस विचार हेतु जो उस मूल्य से कम हो जो राज्य सरकार या किसी प्राधिकार ने किया है स्टाम्प ड्यूटी के भुगतान हेतु स्थानांतरण के संदर्भ मे तो ऐसा मूल्य (स्टाम्प ड्यूटी मूल्य) उस सम्पत्ति का पूरा मूल्य माना जाता है आयकर एक्ट की धारा 50 सी के अधीन। बरहाल यह प्रावधान अचल सम्पत्ति के स्थानांतरण पर लागू नहीं होते जो स्थानांतरणकर्ता के पास है व्यापारगत माल के रूप

13.2 इसके अनुरूप मे एक नर्इ धारा 43 सी का प्रवेशन हुआ है आयकर एक्ट मे जहाँ पर किसी सम्पत्ति के स्थानंतरण (मूलधन सम्पत्ति के अतिरिक्त) चाहे वह ज़्ामीन या इमारत या दोनों ही हो उस स्थानांतरण सम्पत्ति का मूल्य स्टाम्प ड्यूटी मूल्य से कम हो तो मूल्यांकन मूल्य को ही पूरा मूल्य माना जाएगा आय की संगणना शीर्षक "व्यापार या व्यवसाय से मुनाफा" के नीचे। *=अन्य विषयों के साथ।

13.3 यह भी कहा गया है कि अगर [इकरारनामा जिससे उस सम्पत्ति का मूल्यांकन होगा जिसका स्थानांतरण होना है उसकी तिथी और सम्पत्ति के स्थानांतरण के पंजीकृत कराने की तिथि का लिया जायेगा पंजीकरण करने वाली तिथि का नहीं ऐसे स्थानांतरण के लिये। यह अपवाद उन मामले मे लागू होगा जहाँ पर कथित सम्पत्ति का थोड़ा भाग स्थानांतरण के लिये प्राप्त किया जा चुका है किसी भी रूप मे नगद को छोड़कर इकरारनामे के तिथि को या उससे पहले।]

13.4 परियोनीयता:- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आनेवाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

14. अचल सम्पत्ति की कर योग्यता जो प्राप्त हुर्इ है अपर्याप्त मनन के लिये

14.1 आयकर एक्ट धारा 56 (2)(VIIb) इस एक्ट के संशोधन से पहले *यह बताती है कि कोर्इ भी अचल सम्पत्ति किसी व्यक्ति या हिन्दु अतििभाजित परिवार को मिलती है निमित्त के बिना जिसकी स्टाम्प ड्यूटी का मूल्य `59000 से अधिक है तो स्टाम्प ड्यूटी का मूल्य पर कर लगेगा दूसरे स्त्रोतों से आय के रूप मे।

14.2 कथित प्रावधान मे वह हालात शामिल नहीं होते जिसमे अचल सम्पत्ति जो प्राप्त हुर्इ है वह अपर्याप्त निमित्त के लिये है। धारा 56(2)(vii) के प्रावधानों के अनुसार जहाँ पर एक अचल सम्पत्ति निमित्त के लिए प्राप्त होती है जिसका मूल्य उस सम्पत्ति की स्टाम्प ड्यूटी से कम है पर पचास हज़्ाार से अधिक है तो उस सम्पत्ति की स्टाम्प ड्यूटी के मूल्य और निमित्त के बीच जो अंतर है उस पर कर लगाया जाएगा दूसरे स्त्रोतो से आय के रूप में

14.3 यह ध्यान मे रखते हुए कि [इकरारनामा जिससे उस सम्पत्ति का मूल्यांकन होगा जिसका स्थानांतरण होना है उसकी तिथि और सम्पत्ति के स्थानांतरण के पंजीकृत कराने की तिथि का लिया जायेगा पंजीकरण करने वाली तिथि का नहीं ऐसे स्थानांतरण के लिये। यह अपवाद उन मामले मे लागू होगा जहाँ पर कथित सम्पत्ति का थोड़ा भाग स्थानांतरण के लिये प्राप्त किया जा चुका है किसी भी रूप मे नगद को छोड़कर इकरारनामे के तिथि को या उससे पहले।]

14.4 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आनेवाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

15 अपाहिज या बीमार व्यक्ति के जीवन बीमा पॉलिसी पर योग्य बीमा प्रीमियम की सीमा प्रतिशत बढ़ाना

15.1 आयकर एक्ट 1961 की धारा 10 (10डी) इस एक्ट के संशोधन से पहले यह बताती है कि कोर्इ भी राशि जो जीवन बीमा पॉलिसी के अधीन प्राप्त की गर्इ हो, जिसमे बोन्स की राशि भी शामिल है वह कर से मुक्त है बशर्ते उसका प्रीमियम 'कुल मूलधन बीमाकृत राशि से' 10% से अधिक न हो

15.2 इसी तरह आयकर एक्ट की धारा 80C (3A) इस एक्ट के संशोधन से पहले इस धारा के तहत कटौती उपलब्ध है प्रीमियम या कोर्इ और भुगतान बीमा पॉलिसी की तरफ किया गया हो वह 'कुल मूलधन बीमाकृत राशि से 10% से अधिक न हो।

15.3 उपर्युक्त 10% की सीमा का परिचय फार्इनैंस एक्ट 2012 द्वारा हुआ था और यह उन पॉलिसियों पर लागू होता है जो 1-4-2012 या उसके बाद जारी की गर्इ। कुछ बीमा पॉलिसी जो अपाहिज या बीमार व्यक्तियों के लिये है उनका वार्षिक प्रीमियम बीमाकृत राशि के कुल मूलधन के 10% से अधिक होता है। पर चूंकि सीमा 10% से अधिक होता है। पर चूंकि सीमा 10% की है तो यह पॉलिसी आयकर एक्ट की धारा 10 (10डी) के तहत छूट के लिये अयोग्य है। ऐसे मामलों मे धारा 80C के तहत तभी योग्य होगी जब प्रीमियम 'कुल मूलधन बीमाकृत राशि' का 10% तक होगा।

15.4 उपर्युक्त की रोशनी मे यह कहा जाता है कोर्इ भी राशि जिसमे बोनस भी शामिल है बीमा पॉलिसी के अधीन है जो कि जारी की गर्इ थी 1.4.2013 या उसके बाद किसी ऐसे व्यक्ति के जीवन पर

(i) जो कि विकलांगता से पीड़ित है या तीक्षण विकलांगता जैसा कि धारा 80 यू मे वर्णित है या

(ii) किसी ऐसी बिमारी से पीड़ित है जैसा कि धारा 80 डीडीबी के नियमों मे वर्णित है।

वह आयकर एक्ट धारा 10(10डी) अधीन छूट है अगर किसी भी वर्ष मे पॉलिसी के सत्र के दौरान प्रीमियम कुल मूलधन बीमाकृत राशि का 15% से अधिक नहीं हुआ है।

15.5 आयकर एक्ट की धारा 80 सी (3ए) का भी संशोधन किया गया है ताकि कथित धारा के अधीन कटौती की जा सके उस प्रीमियम की राशि पर जो उसे पालिसी के लिये दी गर्इ जो 1.4.2013 या उसके बाद जारी की गर्इ थी ऐसे व्यक्ति के जीवन पर जिसका वर्णन उपर्युक्त अनुच्छेद 15.4 मे दिया गया है भरे हुए प्रीमियम की हद तक पर वह कुल मूलधन बीमा कृत राशि के 15% से अधिक नही होना चाहिये

15.6 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आनेवाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

16. कटौती की गुंजार्इश और योग्यता को बढ़ाना धारा 80 सी सी जी के तहत

16.1 आयकर एक्ट की धारा 80 सीसी जी के तहत संशेाधन से पहले दूसरे विषयो के साथ यह कहता कि एक आवासी व्यक्ति जिसने लिस्टिड इक्विटी शेयर का अधिग्रहण उस योजना के अनुरूप किया है जो केद्र सरकार ने अधुसूचित की थी तो उसका निवेश की हुर्इ राशि पर 50% की कटौती मिलेगी बशर्ते कथित कटौती रु 25,000 से अधिक न हो।

16.2 यह कटौती एक बार की है और एक ही मूल्यांकन वर्ष मे उपलब्ध होगी। यह कटौती नए फुटकर निवेशक को उपलब्ध है जिसकी कुल आय रु 10 लाख से अधिक नही है। राजीव गांधी इक्विटी बचत योजना को अधिसूचित किया गया है धारा 80 सीसी जी के अधीन।

16.3 निवेश की प्रेरणा को उदार बनाने के लक्षय से जो नए फुटकर निवेशक द्वारा शेयर बाजार मे उपलब्ध है धारा 80 सी सी जी के प्रावधानो का सशोधन किया गया है ताकि इक्विटी अभिलिनव्यस्त फंड के सूचीबद्ध भागों मे निवेश भी कटौती के योग्य होगा धारा 80 सी सी जी के प्रावधानो के तहत। इस उद्देश्य के लिये इक्विटी अभिनिव्यस्त फंड को मतलब दिया गया है धारा 10(30) आयकर एक्ट मे

16.4 आयकर एक्ट की धारा 80 सी सी जी के तहत कटौती तीन लगातार मूल्यांकन वर्षो के लिये उपलब्ध है जो उस मूल्यांकन वर्ष से शुरू होगी पिछले वर्ष के सदर्भ में जब सूचीबद्ध इक्विटी शेयर या सूचीबद्ध यूनिट पहली बार लिए गये थे नये फुटकर निवेशक द्वारा जिसकी कुल आय मान्य मूल्यांकन वषर्ेा मे लाख से अधिक नही होगी। संशोधित राजीव गांधी इक्विटी बचत योजना को भी अधिसूचित किया गाया 18.12.2013 को

16.5 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आनेवाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

17. सी जी एच एस जैसी समान सेहत योजना के योगदान पर कटौती

17.1 आयकर एक्ट की धारा 18 डी एक्ट के संशेाधन से पहले और विषयो के साथ यह भी कहती है कि कुल राशि जो पिछले वर्ष भरी गयी निर्धारिती की कर योग्य आय मे से व्यक्ति होने के नाते अपने और अपने परिवार की सेहत का बीमा मे फेर बदल या चालू रखने के लिये या कोर्इ भी योगदान जो सी जी एच एस को दिया गया जो रु 15,000 से अधिक न हो उस पर कटौती की अनुमति है निर्धारिती की कुल आय को संगणना के समय

17.2 यह देखा गया है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की और सेहत योजनाए भी है जो सी जी एच एस जैसी है पर उन योजनाओ के विक्रेताओ को कोर्इ कटौती की अनुमति नही है। ऐसी योजनाओ को सी जी एच एस के मुकाबले मे लाने के लिये धारा 180 डी को संशोधित किया गया है। कटौती का लाभ इस धारा के अधीन निर्धारिती को होगा अगर वह दूसरी सहेत योजना जो कि केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूधित है का योगदान देगा तो।

17.3 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आनेवाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

18. उस लोन के ब्याज पर कटौती जो वित्तीय वर्ष 2013.14 मे पारित किया गया आवासीय सम्पत्ति खरीदने के लिये

18.1 आयकर एक्ट की धारा 24 दे प्रावधानो के अनुसार एक्ट के संशोधन से पहले कर योग्य आय जो शीर्षक घर की सम्पत्ति से आय के नीचे आती है उसकी संगणना की जाती है वहाँ पर कथित कटौतियो के बाद। कथित धारा मे परिभाषित कटौतियां निम्न प्रकार से है:-

1) राशि जो वार्षिक मूल्य की 30% है।

ii) जहाँ पर सम्पत्ति खरीदी, निर्माण की गर्इ मरम्मत की गर्इ, उसका नवीनीकरण किया गया उधार की राशि से उस राशि पर जो देय ब्याज है।

जहाँ पर सम्पत्ति एक घर या का एक हिस्सा है जिसपर मालिक का कब्जा है अपने आवास के लिये या मालिक का कब्जा नही है क्योकि उसका काम, व्यवसाय व्यापार किसी और जगह पर है और उसको किसी और जगह पर रहना पड़ता है जो कि उसकी अपनी नही है, तब कटौती जैसा कि कहा गया है रु 1,50,000 से अधिक नही होनी चााहिये पर उस धारा मे वर्णित शर्तो के आधार पर

18.2 परिवार के लिये वहन करने योग्य आवास के मुद्दे को ध्यान मे रखते हुए, पहली बार घर खरीदने वालो के अतिरिक्त लाभ के लिए आयकर एक्ट मे नर्इ धारा 80 र्इ र्इ का प्रवेशन हुआ है जो कि घर खरीदने हेतु लिये गए लोन पर ब्याज की कटौती से संबधित है।

18.3 धारा 80 र्इ र्इ कहती है निर्धारिती की कुल आय की संगणना करते समय चूंकि वह एक व्यक्ति है, उस लोन के ब्याज पर कटौती की अनुमति है जो उसने किसी वित्तीय संस्थान से लिया है घर खरीदने के लिये।

18.3.1 कथित धारा के अधीन कटौती ` 1 लाख से ऊपर नही होना चाहिये व्यक्ति की कुल आय की संगणना करते समय मूल्यांकन वर्ष जो 1अप्रैल 2014 को शुरू हुआ उसके लिये और उन मामलो जहाँ पिछले वर्ष भरा हुआ ब्याज कथित मूल्यांकन वर्ष मे भी मान्य है और एक लाख से कम है तो शेष राशि मूल्याकंन वर्ष की लिए मान्य होगी जो वर्ष 1 अप्रैल 2015 को शुरू होगा

18.3.2 कटौती निम्न शर्तो पर मान्य होगी :-

(i) वित्तीय सस्ंथान द्वारा लोन 4.4.2013 से 31.3.2014 तक के बीच पारित होना चाहिये।

(ii) घर खरीदने के लिये लोन 25 लाख 25 लाख से अधिक नही होना चाहिये।

(iii) घर का मूल्य 40 लाख से अधिक नही होना चाहिये।

(iv) निर्धारिती लोन पारित होने वाली तारीख को किसी और आवासीय सम्पत्ति का मालिक नही होना चाहिये।

18.3.3 यह भी कहा गया है कि धारा 80 र्इ र्इ के तहत ही किसी मूल्यांकन वर्ष मे कटौती की अनुमति है उस ब्याज पर उप धारा (1) मे वर्णित है। आयकर के और किसी प्रावाधान मे ऐरो ब्याज पर कटौती की अनुमति नही है किसी भी मूल्यांकन वर्ष मे 1 "वित्तीय सस्ंथान को परिभाषित किया गया है चाहे वह कोर्इ बैंक या बैकिंग सस्ंथान जिसका वर्णन उस एक्ट की धारा 51 में किया गया है या आवासीय वित्त कम्ंपनी को परिभाषित किया गया है वह सार्वजनिक कम्ंपनी जिसका निर्माण व पंजीकरण भारत मे हुआ जिसका मुख्य उद्देश्य लम्बी अवधि का वित्त उपलब्ध कराना घर खरीदने के लिये भारत में।

18.3.4 परियोनीयता:- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आनेवाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

19. सौ प्रतिशत कटौती राष्ट्रीय बाल फंड में दान पर

19.1 आयकर एक्ट की धारा 80 जी एक्ट के संशोधन से पहले बताती है कि एक निर्धारिती का कुल आय मे कटौती मिलती है अगर वह किसी फंड या सस्ंथान मे दान देता है। कटौती 50% के रेट से होगी उतनी राशि पर जितनी दान दी गर्इ है कुछ सस्ंथानो और फन्डस को छोडकर जो धारा 80 जी (1) मे वर्णित है जहाँ कटौती 100% के रेट से है।

19.2 राष्ट्रीय बाल फंड मे दान की राशि पर 50% की कटौती की छूट अनुमति थी।

19.3 दान जो राष्ट्रीय महत्व के होते है उस दान की राशि पर 100% की कटौती की अनुमति है। राष्ट्रीय बाल फंड भी राष्ट्रीय महत्व का है, धारा का संशोधन किया गया है ताकि इस फंड का दान देने पर निर्धारिती को उसकी आय की संगणना मे दान की राशि पर 100% की छूट मिले।

19.4 परियोनीयता:- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आनेवाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

20. धारा 80 जी जी बी और धारा 80 जी जी सी के तहत योगदान नकद में नही होना चाहिये

20.1 आयकर एक्ट की धारा 80 जी जी बी के तहत, एक्ट के संशोधन से पहले जितनी भी राशि एक भारतीय कम्पनी द्वारा किसी राजनीतिक पार्टी या मतदान ट्रस्ट को दी जाती है पिछले वर्ष के दौरान वह राशि उस भारतीय कम्पनी की कुल आय में से कटौती ही हकदार है। ऐसी ही कटौती एक निर्धारिती को है अगर वह एक व्यक्ति है स्थानीय प्राधिकारी या बनावटी न्यायाधिकारी के सिवाय धारा 80 जी जी सी के तहत।

20.2 कोर्इ भी विशेष ज़्ारिया उपलब्ध नही करवाया गया ऐसे योगदानों के लिये। नकदी योगदानों को हतोत्साहित करने के लिये उक्त कथित धाराओं का संशोधन किया गया है कि धारा 80 जी जी बी और 80 जी जी सी के तहत किसी कटौती की अनुमति नही है अगर योगदान नकद मे किया जाता है तो।

20.3 परियोनीयता:- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आनेवाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

21 ऊर्जा सैक्टर के लिये सूर्यास्त की तिथि को आगे बढ़ाना

21.1 आयकर एक्ट की धारा 80 1 ए (4) (iv) एक्ट के संशोधन से पहले कथित धारा के प्रावधानों के अनुसार एक उपक्रम के मुनाफे मे कटौती तभी सभंव है जब :-

क) वह भारत के किसी भाग मे स्थापित किया गया हो ऊर्जा उत्पादन और वितरण के लिये और उसका ऊर्जा उत्पादन 1.4.1993 से 31.3.2013 के बीच शुरू हो गया हो।

ख) व आपूर्ति और वित्तरण करे नर्इ आपूर्ति की लाइनों का जाल बिछाके 1.4.1999 से 31.3.2013 के बीच।

ग) वर्तमान प्रसार जाल का नवीनीकरण का काम ले 1.4.2004 से 31.3.2013 तक के बीच।

21.2 ऐसे उपक्रमों को शुरू करने के लिये उनकी समय अवधि को बढ़ाने के लिये ताकि वह कर प्रोत्साहन के योग्य बने। उक्त प्रावधानों का संशोधन करके समय अवधि को एक वर्ष बढाया गया यानि कि 31.3.2014 तक

21.3 परियोजनीयता:- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

22 कुछ मामलों मे अतिरिक्त वेतन पर कटौती

22.1 एक्ट के संशोधन से पहले एक्ट की धारा 80 जे जे ए ए कटौती का प्रावधान बताती है अतिरिक्त वेतन पर 30% की जो पिछले वर्ष ये किसी भारतीय कम्पनी जो किसी वस्तु का उत्पादन करती है, उसके द्वारा नये कर्मचारियों को जो अतिरिक्त वेतन दिया गया उसपर। यह कटौती तीन मूल्यांकन वर्षो तक मान्य है जिसमे उसे उस वर्ष का पिछला वर्ष भी शामिल है जब यह रोज़्ागार दिया गया था

22.2 इस धारा के तहत किसी कटौती की अनुमति नही है अगर यह उद्योगिक उपक्रम तत्कालीन उपक्रम को तोड़कर या नवीनीकरण करके या किसी तत्कालीन उपक्रम के साथ एकीकरण करके बनाया गया है

22.3 धारा 80 जे जे ए ए के तहत कर प्रोत्साहन नीले कॅालर वाले कर्मचारी जो उत्पादन क्षेत्र मे है उनके लिये था पर असल मे यह दूसरे कर्मचारियों के लिये भी इस्तेमाल किया जा रहा है जो दूसरे क्षेत्रों मे है। इसलिये 80 जे जे ए ए के प्रावधानों का सशोधन किया गया है ताकि उस भारतीय कम्पंनी को भी कटौती मिल सके जो चीज़्ाो का उत्पादन करके मुनाफा कमा रही है।

22.4 कटौती की राशि अतिरिक्त वेतन का 30% होगा जो नये कर्मचारियों को दी गर्र्इ ऐसे उद्योग मे पिछले वर्ष मे, तीन लगातार मूल्यांकन वर्षों के लिये जिसमे पिछला मूल्यांकन वर्ष भी शामिल है जब यह रोजगार दिया गया।

22.5 यह भी कहा गया है कि यह कटौती उन उद्योगों को नही मिलेगी जो तत्कालीन उद्योग का अधिग्रहण, स्थानांतरएण या दूसरी कम्पनी के साथ एकीकरण का परिणाम है।

22.6 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

23. `2000 की छूट उन व्यक्तियों को जिनकी कुल आय `5,00,000 तक है

23.1 व्यक्तिगत कर दाता के जो निचली आय के दर मे आते है उनको राहत देने के उद्दश्ेय से निर्धारिती को कर मे छूट मिलती है क्योंकि वह एक भारत का आवासी व्यक्ति है जियकी कुल आय `5,00,000 से अधिक नहीं है।

23.2 कटौती कुल आय पर देय आयकर के बराबर किसी मूल्यांकन वर्ष के लिए या `2000 की जो भी कम हो। इसलिये कोर्इ व्यक्ति जिसकी आय `2,20,000 तक की होगी उसे कर देने की जरूरत नहीं है और वह व्यक्ति जिसकी आय `2,20,000 से अधिक पर `5,00,000 से कम होगी उसे `2000 की कर मे छूट मिलेगी।

23.3 आयकर एक्ट 1961 धारा 87 ए का प्रवेशन हुआ है और धारा 87 का संशोधन।

23.4 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2014 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

24 कर आवासी प्रमाण पत्र

आयकर एक्ट की धारा 90 केन्द्र सरकार को सशक्त करती है कि वह किसी भी विदेशी सरकार या किसी विशेष इलाका जो भारत से बाहर है इकरारनामा करे निम्न उद्देश्यों से

(i) दोहरे कर से राहत दिलाने के लिये,

(ii) जानकारी की अदला बदली

(iii) कर की वसूली आगे धारा 90 ए केन्द्र सरकार को सशक्त करती है उक्त उद्देश्यों किसी भी संगठन के साथ इकरारनामा करते के लिये।

24.2 इसी हक की आजमाइश में केन्द्र सरकार ने विभिन्न दुगनी कर परिहार इकरारनामे (डी टी ए ए 1/5) किये है विभिन्न देशा के साथ और संगठनों के साथ डी टी ए ए और घरेलू कानून के बीच पारस्परिक प्रभाव कि कर दाता जो कि इकरारनामा बद्ध देश से है वह किसी लाभकारी प्रावधानो का फायदा उठा सकता है चाहे वह डी टी ए ए का हो या घरेलू कानून का। आयकर एक्ट की धारा 90 और 90 ए (4) जिसका प्रवेशन फार्इनैन्स एक्ट 2012 द्वारा हुआ टी आर सी की प्रस्तुति जिसमे वर्णित ब्यौरे है जो कि शर्तपूर्ति है उन इकरारनामों का फायदा उठाने के लिये जो इस धारा मे कथित है

24.3 दूसरे देशों के कर प्राधिकारियों व शेयर धारकों द्वारा चिन्ता दर्शार्इ गर्इ थी अलग-अलग देश टी आर सी अपने कानून के हिसाब से जारी करते है। इसलिये विभिन्न देशों द्वारा जारी किये गये टी आर सी मे सभी ब्यौरे न हो जिसका आयकर एक्ट की धारा 90 ()4 या 90 ए (4) मे शामिल होना अनिवार्य है।

24.4 कथित चिन्ताओं के मद्देनजर उप धारा (4) को संशोधित किया गया है कि वर्णित ब्यौरे की अनिवार्यता का विदेशी सरकार द्वारा जारी किये गये प्रमाण पत्र से हटाया जाए। इसलिये विभिन्न देशों द्वारा जारी किये हुए हर रूप मे उप धारा (4) जरूरत को पूरा कर सकते है। धारा 90 और 90 ए मे उप धारा (5) का प्रवेशन हुआ है कि कर दाता को सभी दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करानी होगी जैसी कथित है। यह विवरण अधिसूची 47/2013 26.6.2016 को जारी हुआ जिसमे आयकर नियम 1962 के नियम 21 ए बी को संशोधित किया गया है

24.5 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2013 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2013-14 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

25. जनरल एन्टी एवाइडेन्स रूल (जी ए ए आर)

25.1 जनरल एन्टी एवाइडेन्स रूल (जी ए ए आर का परिचय आयकर एक्ट मे फार्इनेन्स एक्ट 2012 द्वारा हुआ था। जी ए ए आर से संबंधित वास्तविक प्रावधन आयकर एक्ट के अध्याय X-ए (धारा 95 से 102) मे है। इस प्रक्रिया के प्रक्रियात्मक प्रावधान जो कि जी ए ए आर के आमन्त्रण और मूल्यांकन आदेश पारित करने के प्रावधान धारा 144 बी ए में है। अध्याय X-A और धारा 144 बी ए के प्रावधान 1-4-2014 से लागू हो गये होगें।

25.2 विभिन्न प्रतिनिधित्व जी ए ए आर के प्रावधानों के खिलाफ मिले सरकार वे एक विशेष कमेटी बनार्इ जिसमें शेयरधारकों से परामर्श और जी ए ए आर के दिशानिर्देशों का अंतिम रूप देना और उसके परिपालन के लिये रास्ते का नक्शा तैयार करना। विशेषज्ञ कमेटी के अनुरोध मे कानूनी संशोधन के सुझाव नियम और जी ए ए आर के परिपालन के दिशानिर्देश शामिल थे। विशेषज्ञ कमेटी के मुख्य अनुरोध सरकार ने कुछ रूपान्तरों के साथ मान लिये है। सरकार द्वारा माने गये कुछ अनुरोधों पर अध्याय X-A और धारा 144 बी ए के प्रावधानों पर संशोधन की ज़्ारूरत थी।

25.3 अनुरोधों को लागू करने के लिए निम्न संशोधन किए गए है आयकर एक्ट के जी ए ए आर के प्रावधानों मे फार्इनैन्स एक्ट 2012 द्वारा :-

ए) अध्याय X-A और धारा 144 बी ए के प्रावधान 1-4-2016 को लागू होंगे 1-4-2014 की बजाय। प्रावधान मूल्यांकन वर्ष 2016-17 से लागू होगें मूल्यांकन वर्ष 2014-15 की बजाय।

बी) एक प्रबन्ध, जिसका मुख्य उद्देश्य होगा कर लाभ उसका एक अस्वीकार्य परिहार प्रबंध माना जाएगा। धारा 96 का प्रावधान जो कहता है कि यह मुख्य उद्देश्य या मुख्य उद्देश्यों मे से एक का सशोधन उसके अनुरूप किया गया है।

सी) कारण जैसे समय अवधि जितनी देर के लिये वह प्रबंध टिका; निर्धारिती द्वारा कर भुगतान का सत्य और एक सत्स कि प्रबंध द्वारा बाहर जाने का रास्ता उपलब्ध करवाया गया मान्य है पर पर्याप्त नहीं है यह जानने के लिये कि यह प्रबंध अस्वीकार्य परिहार प्रबंध है। धारा 97 के प्रावधान जो यह कहते है कि यह कारक मान्य नही है उनको भी संशोधित कर दिया गया है।

डी) एक प्रबंध मे वित्त वस्तु नहीं है अगर उसका व्यापार के जोखिमों पर कोर्इ प्रभाव नही है या कुल नकदी बहाव किसी समूह का प्रबंध को सिवाय कर लाभ का प्रभाव जो कि अध्याय X-A के लागू होने पर मिलेगा। धारा 97 के प्रावधानों का संशोधन किया गया है ताकि प्रबध मे कोर्इ वित्तीय वस्तु की कमी न हो अगर उपर्युक्त शर्त को सतुष्ट कर दिया जाता है

र्इ) पारित पैनल मे एक अध्यक्ष होना चाहिये जो कि उच्च न्यायाल का न्यायाधीश होना न रह चुका होना चाहिये एक सदस्य भारतीय कर सेवा से जो कि आयकर के मुख्य कमिशनर से कम पद का नही होना चाहिये एक सदस्य भारतीय कर सेवा से जो कि आयकर के मुख्य कमीशनर से कम पद का नही होना चाहिए, एक सदस्य जिसके सीधे कर, व्यापार लेखा जोखा, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार प्रणाली जैसे मुद्दों पर अच्छा ज्ञान होना चाहिए। धारा 144 बी ए का प्रावधान कि पारिती पैनल मे तीन सदस्यों से कम सदस्य नही होने चाहिये आय कर प्राधिकारी होने के नाते और एक अफसर भारतीय कानून सेवाओं से के अनुरूप संशोधन किया गया है।

एफ) पारित पैनल द्वारा जारी किये निर्देश निर्धारिती और आयकर प्राधिकरियों पर भी लागू होगें और एक्ट के प्रावधानों के अधीन इन निर्देशों के खिलाक कोर्इ अपील नही की जा सकती। धारा 144 बी ए के प्रावधान कि पारित पैनल का निर्देश केवल मूल्यांकन अफसर पर लागू होगा का संशोधन कर दिया गया है।

जी) केन्द्र सरकार एक या अधिक पारित पैनल बना सकती है जैसा भी जरूरी हो और पारित पैनल का सत्र आम तौर पर एक वर्ष का होगा जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। धारा 144 बी ए के प्रावधानों का उसके अनुरूप संशोधन कर दिया गया है।

एच) दो अलग परिभाषाएं धारा 102 के प्रावधानों की फार्इनैन्स एक्ट 2012 द्वारा "सहयोगी व्यक्ति" और संबंधित व्यक्ति को जो दिया गया है और उसमे केवल एक प्रावधान है जो "संबंधित व्यक्ति" को परिभाषित करता है। धारा 102 के प्रावधानों का संशोधन उसके अनुरूप कर दिया गया है।

23.4 परिमाणित संशोधन दूसरी धाराओं मे भी कर दिये गये है जो प्रक्रियात्मक मुद्दो से संबंधित है। जी ए ए आर नियमां मे अधिसूचित कर दिया गया है अधिसूचना न. 75/2013 तारीख 23 सितंबर 2013।

25.5 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2016 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2016-17 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

26. आय का कर निर्धारण राज शुल्क और तकनीकी सेवाओं के लिये शुल्क के माध्यम से

26.1 आयकर एक्ट की धारा 115 एफ गैर आवासी कर दाता के कर निर्धारण के बारे मे बताती है जहाँ कुल आय मे राजशुल्क से आग और तकनीकी सेवाओं का शुल्क (एफ टी एस) से आय भी शामिल है जो कि एक इकरारनामे मे के तहत प्राप्त की गर्इ जो 31.3.1976 या उसके बाद हुआ जो कि एक स्थायी संस्थापत से जुडे़ हुए नही है अगर कोर्इ है भारत मे गैर आवासी ) एक्ट की धारा 115A के संशोधन से पहले कुल आय पर कर देय होता था निम्न रेटों पर :-

(i) आय का 30% राज शुल्क या प्राप्त एफ टी एस एक इकरारनामे के तहत जो 31.5.1997 या उससे पहले हुआ हो

(ii) आय का 20% राज शुल्क या प्राप्त एफ टी एस एक इकरारनामे के तहत जो 31.5.1997 के बाद पर 1.6.2005 से पहले और

(iii) आय का 10% राज शुल्क या प्राप्त एफ टी एस एक इकरारनामे के तहत जो 1.6.2003 या उससे बाद हुआ हो

26.2 भारत की कर संधियाँ 87 देशों के साथ है और अधिकतर संधियाँ भारत को इज़्ााज़्ात देती है कि राजशुल्क की कुल राशि पर कर लगाया जाए 10% से 25% तक जब कि कर की दर धारा 115 ए के अधीन 10% है। कुछ मामलों इस के कारण कर निर्धारण कम दर 10% पर हुआ है चाहै वह सेधि अनुमति देती है कि कर रेट निर्धारण अधिक रेट पर हो।

26.3 इस बेतरतीवी को ठीक करने के लिये गैर आवासी कर दाता को जो आय राजशुल्क या तकनीकी सेवा शुल्क से होगी जैसा कि धारा 115 ए मे वर्णित है वह 10% से बढाकर 25% कर दी गर्इ है। यह 25% का रेट उस आय पर लागू है जो राजशुल्क या प्राप्त एफ टी एस एक इकरारनामे के तहत जो 31.3.1996 के बाद हुआ

26.4 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2016 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2016-17 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

27. विदेशी कम्पनियों द्वारा प्राप्त लाभांश पर कर का कम रेट

27.1 आयकर एक्ट की धारा 115 बी बी डी कुल लाभांशों पर कर निर्धाराण करती है जो एक भारतीय कंम्पनी के विदेशी कम्पनी के विदेशी कम्पनी द्वारा मिला (जिस मे उसकी 26% या उससे अधिक शेयर नियंत्रण) 15% के रेट पर अगर यह लाभाश कुल आय मे शामिल है वित्तीय वर्ष 2012-13 यानिकि मूल्यांकन वर्ष 2012-13 उपर्युक्त प्रावधान आय की स्वदेश भेजने को प्रोत्साहन देने के लिये लाया गया था जो की आवसियों द्वारा विदेश मे निवेश से अर्जित की थी कुह शर्तो के चलते

27.2 कर प्रोत्साहन को एक और वर्ष बढाने के उद्देश्य से धारा 115 बी वी डी का संशोधन किया गया इसको लागू करने इस संदर्भ मे लाभांशो की प्राप्ति से आय को किसी विदेशी कम्पंनी द्वारा दिये गये हो वित्तीय वर्ष 2013-14 वही शर्तों के चलते

27.3 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2016 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2016-17 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

28 लाभांश वित्तरण कर के प्रपात की तरह गिरते हुए प्रभाव को हटाना

28.1 आयकर एक्ट की धारा 115-ओ कर निर्धारित करती है वितरित मुनाफे का एक घरेलू कम्पनी द्वारा। इसके अनुसार कोर्इ भी राशि जिसका एलान, वितरण या लाभाशं के रूप मे भुगतान किया गया चाहे वह तत्कालीन एकत्रित मुनाफे मे से ही क्यो न हो, 15% के रेट से उसपर कर लगेगा। इस कर को हम लाभांश वितरण कर कहते है। ऐसा वितरित लाभाशं के प्राप्तकर्ता को छूट मिलती हैै।

28.2 आयकर एक्ट की धारा 115 बी बी डी कुल लाभांशों पर कर निर्धाराण करती है जो एक भारतीय कंम्पनी के विदेशी कम्पनी के विदेशी कम्पनी द्वारा मिला (जिस मे उसकी 26% या उससे अधिक शेयर नियंत्रण) 15% के रेट पर

28.3 धारा 115-ओ के अनुसार कर की नीव (लाभांश जो कि देय है कम्पनी के मामले मे) डी डी टी के लिये कम कर देनी चाहिये जितना लाभांश उसको उसकी सहयोगी कम्पनी से मिला अगर उस सहयोगी ने डी डी टी भर दिया है जो कि ऐसी लाभाशं पर देय होता है। इससे डी डी टी का प्रपात की तरह गिरता प्रभाव हट जाएगा उस ढाँचे पर से जहाँ एक घरेलू कम्पंनी लाभाश प्राप्ता करती है अपने सहयोगी से (वह भी घरेलू कम्पनी है) और अपने शेयर धारकों मे बाटँ देती है।

28.4 धारा 115-ओ को संशोधित किया गया है प्रपात की तरह गिरते हुए प्रभाव को खत्म करने के लिये घरेलू कम्पनी द्वारा प्राप्त किये लाभांशो के सदर्भ मे अपनी विदेशी सहयोगी कम्पंनी से (विदेशी कम्पनी जिसमे घरेलू कम्पनी की 50% से अधिन इक्विटी सहायक शेयर मूल धन है) यह भी कहा गया है जहाँ उन लाभांशो पर कर जो विदेशी कम्पंनी द्वारा दिये गये है वह देय है धारा 115 बी बी डी के तहत घरेलू कम्पनी द्वारा तब कोर्इ लाभांश जो वितरित किया जाता है उसी वर्ष वह आयकर एक्ट की धारा 115-0 के तहत तो उस पर डी डी टी लागू नही होता।

28.5 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

29 अतिरिक्त आयकर कम्पनी द्वारा वितरित आय पर बिना सूचीबद्ध शेयरों को पुन:खरीदने के लिये

29.1 आयकर एक्ट की धारा 2 (22) (e) के प्रावधानों एक्ट के संशोधन से पहले लाभांशो की परिभाषा देते है आयकर एक्ट के उद्देश्यों के लिये। धारा 115-ओ डी डी टी तब लगाने को कहती है जब कम्पनी अपने शेयर धारकों को लाभांश बाटती है। डी डी टी लगाने के परिणाम स्वरूप शेयर धारकों द्वारा प्राप्त किया हुआ लाभाश उनकी कुल आय मे नही आता। जो राशि शेयर धारकों को कम्पनी के शेयर पुन:खरीदने पर कम्पनी द्वारा ही मिलती है उसे लाभांश तो नही मानते पर वह कर योग्य है मूलधन मुनाफे के रूप मे एक्ट की धारा 46 A के तहत।

29.2 एक कम्पनी जिसके पास वितरण योग्य आरक्षित निधि है तो उसके पास दो विकल्प है या तो वह वही शेयर धारकों मे लाभांशो के रूप मे बाँट दे या फिर उसे वापिस खरीद ले एक राशि जो उसने आरक्षित की है उस रेट पर। पहले मामले कम्पनी द्वारा किया गया भुगतान डी डी टी हेतु आएगा और शेयर धारकों का उससे होने वाली आय मे छूट है। दूसरे के मामले ये वह आय शेयरधारकों को कर योग्य बनाएगी मूलधन मुनाफे के रूप मे। असूचिबद्द कम्पनियाँ अपने शेयर खुद खरीदती है लाभांश देने की बजाय ताकि उनको डी डी टी के रूप मे कर न भरना पडे विशेषकर जब मूलधन मुनाफा के रूप मे शेयरधारकों को कर नही लगता और अगर लगता भी है तो कम रेट मे

29.3 ऐसे प्रयासों को रोकने के लिए आयकर एक्ट मे नये अध्याय xii का डी ए प्रवेशन हुआ है कि जो राशि कम्पनी देगी अपने शेयर पुन खरीद ने पर जो कि शेयर जारी करने के समय से अत्याधिक होगा, उसपर कर लगाया जाएगा 20% वित्तीय आय के ऊपर जो उसने शेयरधारक को दी है। जो अतिरिक्त कर जो कम्पनी भरेगी वह अंतिम कर होगा डी डी टी की राह पर। शेयरधारकों को इससे होने वाली आय पर छूट होगी आयकर एक्ट की धारा 10(34ए) के तहत जहाँ कम्पनी अतिरिक्त कर की देनदार है। अपने शेयर की पुन:खरीद पर

29.4 परियोजनीयता- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा

30 मुचुअल फंड द्वारा वितरित आय पर कर का परिमेयकरण

30.1 आयकर एक्ट की धारा 115 आर के तहत एक्ट के संशोधन से पहले कोर्इ भी आय जो कम्पनी या उसके द्वारा वितरित की जाती है वर अतिरिक्त आय कर के लिए योग्य होती है कोर्इ भी वितरण अगर किसी फंड द्वारा किया जाता है इक्विटी फंड के अलावा कोर्इ व्यक्ति या एच यू एफ नही है तो कर का रेट 30% होगा और अगर है तो 12.5% या 25% जो फंड पर निर्भर करता है।

30.2 सभी फंडो को एक जैसा ही कर लगे इक्विटी फंड को छोड़कर का रेट वितरित आय पर 12.5% से बढ़ाकर 25% कर दिया गया है सभी मामलों मे जहाँ वितरण किसी व्यक्ति या एच यू एफ के हो रहा है।

30.3 मूलसुविधा ऋण फंड जिसे किसी गैर बैकिंग वित्तीय कम्पंनी के रूप मे स्थपित की गर्इ है तो जो ब्याज फंड द्वारा गैर आवासी निवेशक को दिया जाएगा वह रिआयती रेट 5% पर कर योग्य है। आय का वितरण आर्इ डी एक द्वारा जो मुचुअल फंड के रूप मे स्थापित किया गया तो वितरण कर उन्ही रेटों पर होगा जो मुचुअल फंड का होता है।

30.4 आय के कर निर्धारण मे एक सारता लाने के लिए किसी गैर आवासी की आय जो आर्इ डी एफ जो कि आर्इ टी एफ एम बी एफ से या आर्इ डी एफ मुचुअल फंड के रूप मे स्थापित की गर्इ है, उससे होती है तो धारा 115 आर को संशोधित किया गया है ताकि उस कर को 5% के रेट पर लगाया जा सके।

30.5 परियोजनीयता- यह सशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

31 प्रतिभूतिकरण ट्रस्ट का कर

31.1 आयकर एक्ट की धारा 161 कहती है कि एक ट्रस्ट के मामले मे अगर उसकी आय मे व्यापार के मुनाफे भी शामिल है। ऐसी ट्रस्ट की आय अधिकतम अल्पमत रेट पर लगार्इ जाएगी ट्रस्ट के हाथों।

31.2 जो कम्पनी ट्रस्ट के रूप मे बनार्इ गर्इ थी उनका विशेष उद्देश्य प्रतिभूतिकरण गतिविधियों उनको दिक्कत आ रही थी आयकर एक्ट मे विशेष वितरण के अभाव परे कर निर्धारण के सदंर्भ मे कर निर्धारण ट्रस्ट के स्तर पर तत्कालीन प्रावधानों के अनुसार वह पाबदी लगाने वाला माना जा रहा था विशेषकर जहाँ ट्रस्ट के निवेशक ऐसे व्यक्ति हो जिन्हे कर से छूट मिली हो आयकर एक्ट के प्रावधानों के तहत मुचुअल फंड की तरह।

31.3 प्रतिभूतिकरण प्रकिया को आसान बनाने के लिए एक विशेष कार्यप्रणाली उपलब्ध करवार्इ गर्इ है प्रतिभूतिकरण कम्पनियो की आय के कर निर्धारण के सदर्भ में, जो कि एक ट्रस्ट के रूप मे बनार्इ गर्इ है। प्रतिभूतिकरण को गतिविधि के लिए। आयकर एक्ट की धारा 10 को संशोधित किया गया है और एक नये अध्याय XII र्इ का प्रवेशन हुआ है विशेष कर प्रणाली उपलब्ध करवाने के लिए। कर प्रणाली की मुख्य विशेषताए है :-

(i) वहनों के प्रतिभूतिकरण मे जो ट्रस्ट की तरह स्ािापित किये गये है "विशेष कार्य अलग कम्पनी" के रूप मे सेबी (सार्वजनिक प्रस्ताव और प्रतिभूति ऋण वाहाों का सूचीबद्ध) नियमों 2008 या "विशेष कार्य वाहन" ट्रस्ट के रूप मे स्तरीय सम्पत्ति के प्रतिभूतिकरण के दिशा निर्देश पर जे कि आर बी आर्इ ने जारी की है और जिसकी गतिविधियँ या तो सेबी या आर बी आर्इ नियंत्रित करेगी। ऐसी ट्रस्ट की प्रतिभूतिकरण से होने वाली आय कर मुक्त होगी।

(ii) प्रतिभूतिकरण ट्रस्ट को अतिरिक्त आयकर देना पड़ेगा। उस आय पर जो उसने अपने निवेशकों मे वितरित की है मुचुअल फंड की तरह अतिरिक्त आय कर 25% के रेट से लगेगा जो निवेशक व्यक्ति या एच यू एफ है और दूसरो को 30% के रेट से। कोर्इ अतिरिक्त आय कर नहीं लगेगा अगर प्रतिभूतिकरण ट्रस्ट की वितरित आय एक व्यक्ति द्वारा प्राप्त की जाती है जिसके मामले मे चाहे आय का स्त्रोत या स्वभाव कैसा भी हो उस उस पर कर नहीं लगेगा। उदाहरण के तौर पर अगर आय एक मुचुअल फंड मे वितरित होती, जिसकी आय सभी स्त्रोतों से कर मुक्त है धारा 10(23डी) आयकर एक्ट के अधीन, कोर्इ अतिरिक्त आयकर फिर देय नहीं है।

(iii) वितरण कर के परिणामस्वरूप निवेशक द्वारा प्राप्त वितरित आय कर से मुक्त होगी आयकर एक्ट की धारा 10 (23डी) के तहत।

(iv) प्रतिभूतिकरण ट्रस्ट को 1% के हिसाब से प्रति माह ब्याज़्ा देना पड़ेगा अगर अतिरिक्त कर वर्णित समय अवधि मेन भरा गया तो।

(v) प्रतिभूतिकरण ट्रस्ट का व्यक्ति जो कर भरने के लिये जिम्मेदार है उसे ही निधारिती माना जाएगा देय कर राशि के संदर्भ मे या अतिरिक्त कर अगर केन्द्र सरकार के खाते मे न जमा करवाया गया हो।

31.4 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

32. जब्त की हुर्इ सम्पत्ति का प्रयोग धारा 132 बी के तहत

32.1 आयकर एक्ट की धारा 132बी के प्रावधानों के अनुसार एक्ट के संशोधन से पहले और विषयों के साथ जब्त की हुर्इ नकदी देय आयकर, सम्पत्ति कर, खर्चा कर, भेट कर, ब्याज कर एक्ट, मूल्यांकन के खर्चे जुर्माना और देय ब्याज उसमे से ले ली जाए। विभिन्न न्यायालयों ने 'तत्कालीन देयदारी' मे एंडवांस कर देयदारी निर्धारिती भी शामिल होगी जिसका कानून के साथ सामंजस्य नही बैठता प्रावधान के पीछे कानूनी मंशा यही है कि देय कर/ब्याज़्ा/जुर्माना जो आगे मूल्यांकन मे देय होगा उसकी भी वसूली हो जाए

32.2 उसके अनुरूप कथित धारा 132 बी को संशोधित किया गया है यह स्पष्ट करने के लिये कि देनदारी मे एडवांस कर शामिल नहीं है आयकर एक्ट की अध्याय XVII के भाग (c) के तहत।

32.3 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

33. "फोरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट, 1947" और "फोरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट, 1973" की जगह "फोरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999"

33.1 आयकर एक्ट की धारा 138 निर्धारिती की जानकारी का खुलासा करती है धारा 1 (ai), और विषयों के साथ यह भी कहता है कि बोर्ड या आयकर प्राधिकारी जिनका स्पष्टीकरण दिया गया है वह पूरी जानकारी किसी भी विदेशी आदान प्रदान की कानून के तहत जैसा कि फोरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट धारा 2(b) मे वर्णित है किसी अफसर या संगठन को दे ताकि उस कानून के तहत उनको काम करने मे सहूलियत हो। एफ र्इ आर ए 1947 जो कथित धारा मे वर्णित है वह 1973 मे दोहराया गया। 1999 मे नया एक्ट फोरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट की जगह उसने ले ली (एफ र्इ एम ए) एफ र्इ आर ए 1947 का हल्का सा रूपान्तर एफ र्इ एम ए 1999 मे किया गया है। फोरेन एक्सचेंज की परिभाषा एफ र्इ एम 1999 की धारा (2) (n) मे की गर्इ है।

33.2 उपर्युक्त आयकर एक्ट की धारा 138 (i) (ai) का संशोधन किया है ताकि फोरेन एक्सचेंज का मतलब वही रहे जैसा कि एफ र्इ एम ए 1999 की धारा 2 (n) मे वर्णित है।

33.3 ऐसे ही संशोधन धारा 10(4), 10(4बी), 10(15), 10 ए, 10 बी, 48, 115 ए बी, 115 सी और 196 ए आयकर एक्ट मे किये गये है।

33.4 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1-4-2013 से लागू होगा।

34. आय की रिटर्न जो स्वत: मूल्यांकन कर के बिना भरी जाए उसे दोषपूर्ण रिटर्न माना जाए

34.1 एक्ट के संशोधन से पहले धारा 139 (9) के प्रावधान कहते हैं अगर मूल्यांकन अफसर को अगर लगता है कि निर्धारिती की रिर्टन दोषपूर्ण है तो वह दोष निर्धारिती का बता कर उसको एक मौका दे सकता है गलती सुधारने का 15 दिन के भीतर। अगर दी गयी समय अवधि मे गलती ठीक नही होती तो उस रिटर्न को रद्द कर दिया जाता है। वह शर्ते जिनकी अनापूर्ति पर रिर्टन को दोषपूर्ण माना जाता है वह उक्त धारा के 'स्पष्टीकरण्' मे दी गर्इ है। धारा 140 ए कहती है अगर कोर्इ कर देय है रिर्ट के हिसाब से, पूर्वदत्त करों को ध्यान मे रखते हुए, निर्धारिती को वह कर व्याज़्ा के साथ् देना होगा इस एक्ट के किसी भी प्रावधान के अधीन और रिटर्न भरने या एडवांस कर भरने मे देरी हो रिटर्न भरने से पहले। यह देखा गया है कि बहुत से निर्धारिती अपनी आय की रिटर्न भरते है बिना स्वत: मूल्यांकन कर के।

34.2 धारा 140 ए के प्रावधानों के सााि सामंजस्य बैठाने के लिये धारा 139 (9) आयकर एक्ट को संशोधित किया गया है कि आय की रिटर्न को तब तक दोषपूर्ण माना जाए जब तक ब्याज सहित देय कर धारा 140 ए के प्रावधानों के मुताबिक रिटर्न भरने से पहले या रिटर्न के साथ न भरा गया हो

34.3 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

35. लेखे जोखे का विशेष निर्देश धारा 142 (2ए) के तहत

35.1 आयकर एक्ट की धारा 142 2(ए) एक्ट के संशोधन से पहले अगर *कार्यवाही के दौरान अफसर को कही भी निर्धारिती के लेखा जोखा मे कुछ समझ नही आता है या कुछ भी गलत लगता है तो वह कमीश्नर की इज़्ााज़्ात से निर्धारिती को अपना लेखा जोखे की जांच किसी लेखाकार से करवाकर उसकी रिर्पोट निर्धारिती फार्म मे देने का कह सकता है।*

35.2 धारा 142 (2ए) को संशोधित किया गया है कि कार्यवाही के दौरान अगर अफसर को लेखा जोखे मे बाधाएं, हिसाब किताब के विवरण मे कोर्इ अड़चन या गड़बड़ी निर्धारिती की व्यवसायिक गतिविधियाँ से संबंधित *कार्यवाही के दौरान अफसर को कही भी निर्धारिती के लेखा जोखा मे कुछ समझ नही आता है या कुछ भी गलत लगता है तो वह कमीश्नर की इज़्ााज़्ात से निर्धारिती को अपना लेखा जोखे की जांच किसी लेखाकार से करवाकर उसकी रिर्पोट निर्धारिती फार्म मे देने का कह सकता है।*

35.3 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

36. मूल्यांकन और पुन: मूल्यांकन को पूरा करने के लिए सीमाबद्ध समय की गणना के लिए समय निकाल देना, 3

36.1 आयकर एक्ट की धारा 153 समय सीमा देता है मूल्यांकन अकसर मूल्यांकन और पुन: मूल्यांकन पूरा करने के लिये। धारा 153 का स्पष्टीकरण कहता है कि कुछ वर्णित समय अवधि को शामिल नहीं करता समय सीमा की संगणना मे कथित धारा के उद्देश्यों के लिये। आयकर एक्ट का स्पष्टीकरण। धारा 153 का एक्ट के संशोधन से पहले कहता है कि *उस तारीख को जब मूल्यांकन अफसर निर्धारिती को निर्देश देता है िकवह अपने लेखा जोखा किसी लेखाकार से ठीक करवाये धारा 142 (2ए) के तहत, उस तारीख से लेकर अंतिम तिथि जब निर्धारिती ने वह रिपोर्ट पेश करनी होती है।* उसे समय अवधि की संगणना समय सीमा के बारे मे कुछ नही कहा मूल्यांकन अफसर के निर्देश पर जैसा कि न्यायालय ने पहले कहा।

36.2 उसके अनुरूप धारा 153 का स्पष्टीकरण। की शर्त (iii) को संशोधित किया गया जिसमे समय जो शुरू होता है *उस तारीख को जब मूल्यांकन अफसर निर्धारिती को निर्देश देता है िकवह अपने लेखा जोखा किसी लेखाकार से ठीक करवाये धारा 142 (2ए) के तहत, उस तारीख से लेकर अंतिम तिथि जब निर्धारिती ने वह रिपोर्ट पेश करनी होती है।* जब यह निर्देश को न्यायालय मे चुनौती दी जाती, उस तारीख को खत्म होगा जब कमीश्न के आदेश पर इस निर्देश को खारिज किया जायेगा, वह समय अवधि शामिल नही होगी समय सीमा की संगणना मे धारा 153 के उद्देश्यों के लिये।

36.3 इसी तरह से धारा 153 के स्पष्टीकरण 1 की शर्त (viii) एक्ट के संशोधन से पहले उस समय अवधि को शामिल नहीं करता जो शुरू होती है उस तारीख को जब जानकारी के अदला बदली का हवाला दिया गया था एक प्राधिकारी द्वारा जिसका वर्णन धारा 90 और धारा 90 ए के इकरारनामे, खत्म होती है उस तारीख को जब मांगी गर्इ जानकारी कमीश्न प्राप्त करता है या एक वर्ष जो भी कम हो। कमी कभी एक से अधिक हवाले दिये जाते है जानकारी की अदला बदली मे एक ही मामले मे और विदेशों प्राधिकारियों से उसका जवाब भागों मे आता है। ऐसे मामलो मे समय अवधि का झगड़ा हमेशा रहेगा कि क्या उसको उस तारीख से शुरू करना चाहिये जब जानकारी की अदला बदली के लिये पहला हवाला दिया गया था अंतिम। ऐसा ही झगड़ा रहेगा जब जानकारी प्राप्त होगी।

36.4 उक्त हालात को स्पष्ट करने के लिए कथित खंड (viii) धारा 153 का संशोधन किया गया है कि समय अवधि को शामिल नहीं करता जो शुरू होती है उस तारीख को जब जानकारी के अदला बदली का हवाला दिया गया था एक प्राधिकारी द्वारा जिसका वर्णन धारा 90 और धारा 90 ए के इकरारनामे, खत्म होती है उस तारीख को जब मांगी गर्इ जानकारी कमीश्न प्राप्त करता है या एक वर्ष जो भी कम हो।

36.5 आयकर एक्ट की धारा 153 (बी) के स्पष्टीकरण को भी ऐसे ही संशोधित किया गया है।

36.6 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2016 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2016-17 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

37. मूल्यांकन और पुन: मूल्यांकन को पूरा करने के लिए सीमाबद्ध समय की गणना के लिए समय निकाल देना, 3

37.1 आयकर एक्ट की धारा 153 समय सीमा देता है मूल्यांकन अकसर मूल्यांकन और पुन: मूल्यांकन पूरा करने के लिये। धारा 153 का स्पष्टीकरण कहता है कि कुछ वर्णित समय अवधि को शामिल नहीं करता समय सीमा की संगणना मे कथित धारा के उद्देश्यों के लिये समय सीमा दी गर्इ है मूल्यांकन और पुन मूल्यांकन को पूरा करने के लिए धारा 43(3),147,153ए, 153सी आदि मे। यह सीमा बदल जाती है अगर धारा 92 सी ए के तहत हवाला दे दिया जाता है स्थानंतरण मूल्य आयकर को (टी पी ओ) मूल्यांकन या पुन: मूल्यांकन के दौरान। यह समय अवािध् या तो वित्तीय वर्ष के अन्त मे जब प्रपत्र जारी किया गया कार्यवाही के लिये या मूल्यांकन वर्ष जब कार्यवाही शुरू हुर्इ।

37.2 फार्इनैन्स एक्ट 2012 समय सीमा जो कि धारा 153 और आयकर एक्ट 153 बी मे दिया गया है उसे बड़ा दिया गया है तीन महीने के लिये। सीमा मामलो में जो आयकर एक्ट की धारा 92 सी ए के अधीन आये उसे टी पी ओ को सौंप दिया गया और समय सीमा को 9 महीने से बढ़ाकर 1 वर्ष कर दिया गया है। समान संशोधन धारा 153 और 153 बी मे भी किये गये।

37.3 धारा 153 के तीसरे प्रावधान (1) प्रवेशन से एक अनियमित्ता उत्पन्न हुर्इ। मूल्यांकन वर्ष 2009-10 के एक मामले मे धारा 92 सी ए के अधीन एक हवाला दिया गया और टी पी ओ ने 1.7.2012 से पहले आदेश पारित कर दिया। यह तीसरे प्रावधान के नीचे नहीं आ सका। जिसका प्रवेशन फार्इनैन्स एक्ट 2012 द्वारा हुआ और यह दूसरे प्रावधाान के नीचे भी नही आ सका। उसको 153(1)(a) के नीचे जगह मिली जिसकी अवधि 2 साल है मूल्यांकन वर्ष के अन्त से यानि कि 31.3.2012 तक। इसलिये उसका 1 वर्ष का लाभ नहीं मिला जैसा कि सोचा गया था। फार्इनैन्स एक्ट 2012 के संशोधन से पहले यह मामला दूसरे प्रावधन के नीचे आता और समय सीमा पूरी होती 31-2-2012 (33 महीने) तीसरे प्रावधान के प्रवेशन कार्इनैस एक्ट 2012 के द्वारा समय अवधि 31-12-2012 से कम होकर 31-3-2012 हो गर्इ यह कानून को मंशा नही थी।

37.4 धारा 153 (1) का तीसरा प्रावधान को संशोधित किया गया पहला मूल्यांकन वर्ष जब पहली बार आय का मूल्यांकन हुआ वह शुरू हुआ 1-4-2009 और उसके बाद आने एक हवाला दिया गया 92 सी ए (1) के तहत शर्त (a) के प्रावधान लागू नही होगा 1 दो साल की जगह तीन साल हो गया है।

37.5 ऐसे ही संशोधन उप खंड (2) उप खंड (2A) धारा 153 और 153 B आयकर एक्ट मे जहाँ पर संशोधन के कारण अव्यस्तता फैल गर्इ जब फार्इनैस एक्ट 2012 के तहत संशोधन किया गया

परियोजनीयता :- यह संशोधन 1-7-2012 से लागू होगे

38. 'देय कर' का स्पष्टीकरण कुछ मामलों मे वसूली के लिये

38.1 आयकर एक्ट की धारा 179 कहती है जब देय कर की वसूली न हो सके प्रार्इवेट कम्पनी से तो निर्देशक (जो पिछल वर्ष भी निर्देशक या जिस वर्ष से वसूली संबंधित है) ही पूरा कर न देने के लिये जिम्मेदार होगा जब तक वह यह साबित नही कर देता कि कर की जो वसूली नही की गर्इ किसी लापरवाही या उसके पद के प्रति लापरवाही है। यह प्रावधान आयकर एक्ट की माँग पूरी करने के लिये है एक प्रार्इवेट कम्पनी से। कुछ न्यायालये ने देय कर जो धारा 179 मे इस्तेमाल किया जाता है उसमे जुर्माना ब्याज और आयकर एक्ट की दूसरी राशि शामिल नही है

38.2 उक्त मे यह स्पष्ट होता है कि कथित धारा 129 मे देय कर मे जुर्माना ब्याज या और कोर्इ राशि जो आयकर एक्ट के अधीन देय हैै। देय है। देय कर के स्पष्टीकरण धारा 161 टी के प्रावधानो मे भी दिया गया ह

38.3 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2016 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2016-17 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

39 टीडी एस कुछ अचल सम्पत्ति के स्थानतरण पर

(खेती बाडी जमीन के सिवाय)

39.1 आयकर एक्ट जब नियम 114 बी आयकर नियमो के साथ पण्ति हो तो उसके अधीन एक वैधानिक जरूरत है कि किसी अचल सम्पत्ति की खरीद बेच मे पैन न भी डाला जाए जिसका मूत्य `5 लाख या उससे अधिक हो। बहरहाल जो जानकारी आय कर विभाग को रजिस्ट्रार या सब रजिस्ट्रार द्वारा वार्षिक रिटने मे दी जाती है वह द्वर्शाती है कि अधिकतर ग्राहक और विक्रेता अचल सम्पत्ति के जिसका मूल्य `30 लाख से अधिक हो उन्होने ने अपला पैन न नही दिया या गलत दिया सम्पत्ति के स्थानतरण पर वित्तीय वर्ष 2011-12 मे।

39.2 आयकर एक्ट के प्रावधानों के अधीन एक्ट के सशोधन से पहले टी डी एस वेतन ब्याज दलाली प्रशासकीय सेवाओं मे पहले ही कट जाता था। किसी गैर आवासीय द्वारा सम्पत्ति के स्थानांतरण पर स्थानांतरणकर्ता को ही टी डी एस काटना पड़ेगा सिवाय अनिवार्य अधिग्रहण के कुछ अचल सम्पत्तियों मे।

39.3 स्थावर सपंदा क्षेत्र के कारोबार की एक रिपोर्टिग प्रक्रियां हो और जल्द से जल्द कर लिया जा सके इसके लिये एक नर्इ धारा 194 (ए) का प्रवेशन आयकर एक्ट मे हुआ कि हर स्थानात रिती भुगतान करते समय या स्थानांतरण के लिये राशि जमा करते समय किसी आवासीय को कर काट लेना चाहिये ऐसी राशिका 1%।

39.4 छोटे कर दाताओं पर बोनस कम करने के लिये इस धारा के तहत कोर्इ कर देय नही है जहाँ पर किसी सम्पत्ति के स्थानांतरण को राशि `50,00,000 से कम है।

39.5 धारा 203 ए के प्रावधान के अनुसार हर ब्यक्ति जो इस नयी धारा 194-आर्इ ए के प्रवेशन पर कर काटता है तो उसे एक टैन न लेना जरूरी है। इस धारा के अधीन कर काटने वाले पर बोझ कम करने के लिये धारा 203 A के प्रावधान एक व्यक्ति पर लागू नही होंगे जो धारा 194 1ए के प्रावधानों के तहत कर काटता है।

40. आय आबन्ध और सरकारी ऋणपत्र के ब्याज पर

40.1 चालू खाते के घारे और विदेशी निवेश जी ज़्ारूरत भारत मे रूपयों मे एक नयी धारा 194 एल डी का प्रवेशन हुआ है आयकर एक्ट 5% के रेट पर जबकि आस रेट 20% है देय ब्याज़्ा पर 1-6-2013 या उसके बाद पर 1-6-2015 से पहले भारतीय कम्पनी या सरकारी आबन्ध आयकर भुगतान किसी विदेशी निवेशक को करना है (एफ आर्इ आर्इ) या क्यू एक आर्इ को पर ब्याज़्ा भारतीय कम्पनी के रूपये आबन्ध को ब्याज़्ा की सीमा पार नही करनी चाहिये जो सरकार द्वारा अधिसूचित है। इस रेट को अधिसूचित किया गया है प्रपत्र 56/2013 तिथि 29.7.13 को निम्न प्रकार से :-

(i) जो आबन्द 1.7.2010 से पहले जारी किये गये है तो उस पर ब्याज़्ा का रेट 500 से बेसिस पाइन्ट से अधिक स्टेट बैंक ऑफ इडिंया के आधार रेट से बढ़ना नही चाहिये। जुलार्इ 2010 को।

(ii) जो आबन्ध 1.7.2010 के बाद जारी हुए है पर ब्याज़्ा का रेट 500 से बेसिस पाइन्ट से अधिक स्टेट बैंक ऑफ इडिंया के आधार रेट से बढ़ना नही चाहिये कथित आबन्ध की जारी करने की तारीख पर

40.2 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 अप्रैल 2016 को लागू होगा और उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2016-17 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों मे प्रयोग किया जाएगा।

41. 'व्यक्ति भरने के लिए जिम्मेदार' का मतलब अध्याय XVII के अधीन

41.1 आयकर एक्ट 1961 का अध्याय XVII कार्य करता है कर की वसूली और इकÎा करने पर। धारा 204 परिभाषित करती है 'व्यक्ति भरने के लिए जिम्मेदार' को धारा 204 (iia) "व्यक्ति भरने के लिये जिम्मेदार" कि कोर्इ राशि जो देय है अप्रवासी भारतीय को कोर्इ भी राशि जो किसी विदेशी मुद्र सम्पत्ति के स्थानांतरण का जो कि कोर्इ छोटी अवधि की मूलधन सम्पत्ति वही है, मतलब कि वह प्राधिकारी व्यापारी है जो जिम्मेदार है इतनी राशि अप्रवासी भारतीय को सौपने का या इतनी राशि अपने अप्रवासी खाते मे डालने पर जो कि फारेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट 1973 के आधार पर और जो नियम इसके अधीन बने। 'प्राधिकारी व्यापारी' जैसा कि उक्त मे वर्णित है कथित धारा के स्पष्टीकरण मे कि उसका मतलब वही है जो फारेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट 1973 की धारा (2)(b) मे दिया गया है। स्पष्टीकरण मे फोरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट 1973 मे उसका वर्णन है।

41.2 1999 मे फोरेन एक्सचेंज मैनेज़्ामेंट एक्ट 1999 का परिचय हुआ या और उसने फोरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट 1973 की जगह ली। फेमा मे 'प्राधिकारी व्यापारी' की जग ह प्राधिकारी व्यक्ति ने ली।

41.3 फोरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट 1977 की जगह फोरेन एक्सचेंज मैनेज़्ामेंट एक्ट 1999 के लेने की वजह से धारा 204 मे संशोधन किया गया है 'प्राधिकारी व्यापारी' की जगह 'प्राधिकारी व्यक्ति' ने ले ली और 'प्राधिकारी व्यक्ति' का मतलब वही है जो उसकी फेमा एक्ट 1999 की धारा (2)(c)

41.4 यह संशोधन 1-4-2013 से लागू होगा।

42. धारा 206 ए ए के तहत पैन न. न देने की धूट कुल अप्रवासी आबन्ध धारको को

42.1 आयकर एक्ट की धारा 194 एल सी के तहत एक भारतीय कम्पनी द्वारा ब्याज का भुगतान एक अप्रवासी को जो पैस विदेश मुद्रा मे उधार लिया गया लोन इकरारनामे के तहत या लम्बी अवधि के मूलभूत आबन्ध पर जिस पर कटौती रेट 5% का 20% की बजाय। एक्ट की धारा 206 ए ए के तहत अगर अप्रवासी अपना पैन न. देन दाता को नही देता तो कर को 20% के हिसाब से रोकना पड़ेगा।

42.2 व्यवहारिक कठिनार्इ जो पैन न लेने मे आती है अप्रवासी आबन्ध धारको को इसके लिये धारा 206 ए ए को संशोधित किया गया है कि धारा 206 ए ए के प्रावधान जो ब्याज अप्रवासी को भरा हुआ है, उस पर लागू नही होगे औ वह ब्याज लम्बी अवधि के मूलभूत आबन्ध पर है जिसका जिक्र आयकर एक्ट 194 एल सी मे किया गया है।

42.3 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

43. टी सी एस पर छूट को हटाना किसी सिक्के या वस्तु जिसका वज़्ान ग्राम हो उसकी नगदी बिक्री पर

43.1 फार्इनैन्स एक्ट 2012 ने धारा 206 सी के प्रावधानों मे संशोधन किया गहने बेचने वाला बेच पर 1% के रेट से कर ले लेगा अगर गहनों चांदी की बेच नकदी में दो लाख या पाँच लाख से अधिक होगी तो। चांदी को कोर्इ सिक्का या और कोर्इ वस्तु नहीं होनी चाहिये जिसका वज़्ान 10 ग्राम या उससे कम हो। बेच की सीमा पहले दे दी गर्इ है टी सी एस लगान के लिये चाँदी की नकदी चांदी की बेच पर। कोर्इ प्रमाणिता नही दी गर्इ टी किसी सिक्के, वस्तु की नकदी बेच पर टी सी एस लगाने की छूट पर। धारा 206 सी का संशोधन किया गया कि अलग छूट जो टी सी एस के लगाने पर दी गर्इ है उस वापिस लिया जा सके किसी सिक्के या वस्तु जिसका वज़्ान 10 ग्राम है उसकी नकदी बिक्री पर।

43.2 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

44. पुन विचार संबंधी कचहरी के अध्यक्ष की नियुक्ति

44.1 आयकर एक्ट की धारा 252 बताती है आयकर पुन संबंधी विचार कचहरी के गठन के बारे मे, न्याययिक व्यक्तियों व मुनीम की योग्यता, अध्यक्ष की, उप अध्यक्ष की नियुक्ति के बारे मे

44.2 अध्यक्ष की पसंद उपअध्यक्ष तक सीमित है। विकल्पों को और बढ़ाने के लिये कि अध्यक्ष पर के लिए सही व्यक्ति का चुनाव हो एक संशोधन लाया गया है कि न्यायिक पदों से संबधित व्यक्तियों को इसमे लाया जाए।

44.3 उसके अनुरूप धारा 252(3) का संशोधन किया ळै कि केन्द्र सरकार ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति करे जो उच्च न्यायालय का सेवनिवृत्त न्यायाधीश है और जिसने सात वर्ष या उससे अधिक उच्च न्यायालय मे न्यायाधीश के रूप मे सेवा पूरी की है, कचहरी का अध्यक्ष या उप अध्यक्ष बने

44.4 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

45. धारा 271 एफ ए के अधीन जुर्माना वार्षिक रिटर्न न भरने पर

45.1 आयकर एक्ट की 285 बी ए अनिवार्य करती है वार्षिक रिटर्न भरना विस्तृत व्यक्तियों विस्तृत कारोबार का वर्णन करते हुए वर्णित समय अवधि के अंदर 285 बी ए (2) के अधीन और धारा की उप धारा (5) मूल्यांकन अफसर को हक देती है िकवह एक नोटिस जारी करे अगर देय तिथि तक रिटर्न न भरी गर्इ हो।

45.2 आयकर एक्ट की धारा 271 एफ ए संशोधन से पहले कहती थी कि अगर एक व्यक्ति जिसने रिटर्न भरनी है जैसा कि धारा 285 बी ए (1) आयकर एक्ट के अधीन ज़्ारूरी है, वह वर्णित समय अवधि के भीतर नहीं पाता उसे जुर्माने के तौर पर एक सौ इससे प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना भरना पड़ेगा जब तक वह रिटर्न न भर कर दी जाए।

45.3 आयकर एक्ट की धारा 271 एफ ए को संशोधित किया कि अगर एक व्यक्ति को रिटर्न भर कर देनी है जैसा कि आयकर एक्ट की धारा 285 बी ए (1) के अधीन अनिर्वाय है औ वह धारा 285 बी ए (2) मे वर्णित समय अवधि मे भर नही पाता तो आयकर प्राधिकारी जो धारा मे वर्णित है वव उसे निर्देश दे सकते है कि वह प्रतिदिन के एक सौ रूपये जुर्माना भरे जब तक वह रिटर्न उपलब्ध कराने मे असमर्थ है।

45.4 अगर तब भी वह व्यक्ति धारा 285 बी ए (5) के अधीन पेश किए हुए नोटिस मे वर्णित समय अवधि मे रिटर्न नही भर पाते तो उसे `500/- प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना भरना पड़ेगा जब तक रिटर्न भरी नही जाती।

45.5 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

46. आयकर एक्ट 1961 की चौथी अनुसूची के भाग ए मे पारित समय अवधि का बढ़ाना

46.1 आयकर एक्ट की चौथी अनुसूची के नियम 4 का भाग ए वह शर्ते रखता है जो एक प्रोविडेन्ट को पूरी करनी चाहिए आयकर एक्ट के अधीन मान्यता प्राप्त करने के लिये। नियम 4 की एक ज़्ारूरत जैसा कि शर्त (ea) मे वर्णित है कि संस्थापन को केन्द्र प्रोविडेन्ट फंड कमीश्न द्वारा अधिसूचीत होना चाहिये कर्मचारी प्रोविडेन्ट फंड की धारा। (4) के अधीन विविध प्रावधान एक्ट, 1952 [र्इ पी एफ और एम पी एक्ट] और उसको कथित एक्ट की' धारा 17 के तहत छूट मिली हो।

46.2 भाग (ए) का नियम (3) आयकर की चौथी अनुसूची कहती है कि मुख्य कमीशन या आयकर कमीश्न किसी प्रोविडेन्ट फंड की मान्यता से सहमत हो जो उनकी नज़्ार मे उन शर्तों को पूरा करे जो नियम 4 मे वर्णित है और उन पर शर्तों को जो बोर्ड ने रखी है नियमों के रूप मे।

46.3 नियम 3 का उपनियम (1) संशोधन से पहले कहता था कि चाहे। किसी प्रोविडेन्ट फंड आयकर एक्ट के तहत मान्यता मिल गर्इ हो 31.3.2006 से पहले पर वह प्रोविडेन्ट फंड उन शर्तों को पूरा नही करता जो नियम 4 की शर्त (ea) मे वर्णित है 31-3-2013 से पहले उस फंड की मान्यता हटा ली जायेगी।

44.4 र्इ पी एफ ओ के पास बहुत सी प्रार्थना पत्र विचाराधीन थे र्इ पी एफ और एम पी एक्ट की धारा 17 के अधीन छूट चाहिए थी। पहले प्रावधन को संशोधित किया गया जिसमे समय अवधि को 31-3-2013 से बढ़ाकर 31-3.2014 कर दी गर्इ।

46.5 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

47 खेती बाड़ी की भूमि को सम्पत्ति कर से मुक्ति जो शहरी क्षेत्र मे है

47.1 फार्इनैन्स एक्ट 1992 ने सम्पत्ति कर के प्रावधानों मे संशोधन किया है कि सम्पत्ति कर कुछ विशिष्ट सम्पत्तियों पर लगेगा। सम्पत्ति की परिभाषा जिस पर सम्पत्ति कर लगेगा उससे शहरी भूमि भी शामिल है। शहरी भूमि का मतलब है जो भूमि नगर निगम या कैन्टोनमेंट के अधिकार क्षेत्र मे आती है या वह भूमि जो अधिसूचीत क्षेत्र मे स्थित है। कुछ श्रेणीयां शहरी भूमि की जैसे वह भूमि जिसपर इमारत का निर्माण वर्जिज है भूमि जो उद्योग के लिये रखी गयी है, भूमि जो व्यापार मे स्टॉक के तौर पर रखी गर्इ है उनको शहरी भूमि की परिभाषा मे शामिल नहीं किया गया है। आम तौर पर खेती बाड़ी की ज़्ामीन पर या तो किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नही है या निर्माण केवल कृषि ज़्ारूरतों के लिये किया जा सकता है पर कृषि भूमि पर कुछ विशेष छूट नही है। हाल फिल्हाल मे ही सर्वोच्च न्यायालय ने यह ठहराया कि जो भूमि शहरी क्षेत्र मे है वह सम्पत्ति कर योग्य है। जैसे कि सम्पत्ति कर केवल अनउत्पादक सम्पत्ति पर लगता ह।; ऐसी कोर्इ मंशा नही थी कि कृषि भूमि पर सम्पत्ति कर लगाया जाए जिसको हम अनुत्पादक सम्पत्ति नही कह सकते।

47.2 उक्त की रोशनी मे सम्पत्ति कर एक्ट 1957 मे शहरी क्षेत्र की परिभाषा को संशोधित किया गया है कि सम्पत्ति कर उस शहरी भूमि पर नहीं लगेगा जो

(i) सरकार के रिकार्ड मे कृषि भूमि है और

(ii) कृषि उद्योगो के लिए इस्तेमाल की जाती है

परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

48. कुल सम्पत्ति की अनुलग्नक रहित रिटर्न के इलैक्ट्रानिक तरीके से भरे जाते के प्रावधान लागू करना

48.1 सम्पत्ति कर की धारा 14 के तहत कुल सम्पत्ति की रिटर्न मूल्यांकन तिथि पर निर्धारित फार्म मे भरनी होती है। निर्धारित तरीके से सत्यापन की गर्इ हो जिसमे कुल सम्पत्ति का विवरण प्रस्तुत हो। अभी तो, कुछ दस्तावेज़्ा रिपोर्टो को रिटर्न के साथ देना होता सम्पत्ति कर के प्रावधान जब सम्पत्ति कर नियमों के साथ पठित हों उनके अधीन

48.2 आयकर एक्ट की धारा 139 सी और 139 डी मे इस सुविधा का प्रावधान है कि अनुलग्नक रहित सम्पत्ति की रिटर्न को कुछ श्रेणी के निर्धारिती इलैक्ट्रानिक फार्म मे भर सकते है। अनुलग्नक रहित कुल सम्पत्ति रिटर्न को इलैक्ट्रानिक तरीके से भरना आसान करने के लिये धारा 14 ए और 14 बी का प्रवेशन हुआ है सम्पत्ति कर एक्ट मे उसी नक्शे कदम पर।

48.3 सम्पत्ति कर की धारा 46 के प्रावधान जो बोर्ड की नियम बनाते अधिकार का वर्णन करते है, उको भी संशोधित किया गया है।

48.4 परियोजनीयता :- यह संशोधन 1 जून 2013 से लागू होगा।

49. ऋण पत्र व्यापार कर (एस टी टी)

49.1 ऋण पत्र व्यापार पत्र (एस टी टी) कुल विशिष्ट ऋपत्रों पर, का परिचय फार्इनैन्स एक्ट (2) 2004 के माध्यम से हुआ।

49.2 फार्इनैन्स एक्ट (2) की धारा 98 का संशोधन किया गया है कर योग्य ऋपत्रों के कारोबार मे एस टी टी रेट घटाने के लिए जैसा कि निम्न मे वर्णित है:-

क्र न. कर योग्य ऋणपत्रों को देय द्वारा स्वभाव तत्कालीन रेट% में प्रतावित रेट %
1 2 3 4 5
1. सुपुर्दगी आधारित इक्विटी फंड खरीद किसी मान्यता प्राप्त भारतीय स्टाक एक्सचेंज मे हासिल खरीदार 0.1 शून्य
2. सुपुर्दगी आधारित इक्विटी फंड बिक्री किसी मान्यता प्राप्त भारतीय स्टाक एक्सचेंज मे हासिल विक्रेता 0.1 0.001
3. ऋण पत्र में सÍे की बिक्री विक्रेता 0.017 0.01
4. इक्विटी फंड की किसी मुचुअल फंड का बिक्री विक्रेता 0.25 0.001

49.3 यह संशोधन 1-6-2013 को लागू होगे और उसके अनुरूप किसी भी व्यापार जो उस दिन या उसके बाद होगा उसपर लागू होगें।

50. उपयोगी वस्तु के व्यापार पर कर (सी टी टी)

50.1 एक्ट के अध्याय VII सी टी टी का परिचय हुआ और 1-7-2013 को लागू हुआ अधिसूचना एस ओ 1768 (र्इ) तिथि 19-6-2013 सी टी टी के नियम अधिसूचित किये गये अधिसूचना इस ओ 1769 (र्इ) तिथि 19-6-2013 द्वारा। सी टी टी किसी कर योग्य अयोगी वस्तु के व्यापार जो किसी मान्य संगठन मे दाखिल है।

50.2 कर योग्य आयोगी वस्तु के व्यापार का मतलब है उपयोगी वस्तुओ के बिक्री का व्यापार वह वस्तुओ जो कृषि वस्तुओं से अलग है जिनका व्यापार मान्य संगठनों मे होता है। सी टी टी कर योग्य वस्तुओं के व्यापर पर इकÎा किया जाता है मान्य संगठनों द्वारा

50.2.1 कृषि वस्तुओं जिनपर सी टी टी नहीं लगता वह है बादाम, जौं, चना/दाले, खोपरा, धनिया, कपास, कपासिमा खाला, गुआर के बीज़्ा, र्इसबगुल के बीज़्ा, जीरा, मक्की चारा, काली मिर्च, आलू/सरसों के बीज़्ा, जूट लाल मिर्च, सोयाबी, सोयामील, हल्दी व गेहूँ

50.3 कर लगाया जाता टेबल मे दिये हुए रेटों पर कर योग्य वस्तुओं के बिक्री के व्यापार पर :-

क्र न. क्र योग्य उपयोगी वस्तुओ का व्यापर रेट देय द्वारा
1 2 3 4
1. डपयोगी वस्तु से उत्पन्न वस्तु से बिक्री 0.01% विक्रेता

50.4 सी टी टी की वसूली और इकÎा करने से संबंधित प्रावधान मे रिटर्न करना, मूल्यांकन प्रक्रिया, मूल्यांकन अफसर की ताकत, ब्याज, जुर्माना, विपक्षी दल का संस्थान, अपील भारत, केन्द्र सरकार की ताकत आदि सब कुछ उपलब्ध है।

50.5 आयकर एक्ट की धारा 36 को संशोधित किया गया है कि जितनी राशि देय है अयोगी वस्तु के व्यापार के कर के रूप मे निर्धारिती द्वारा कर योग्य वस्तुओ का व्यापार के कर के रूप मे निर्धारिती द्वारा कर योग्य वस्तुओ का व्यापार जो कि उसके पिछले वर्ष के व्यावसाय मे शामिल उसमे कटौती की अनुमति है अगर उस आय की संगणना शीर्षक व्यापार या व्यावसाय से मुनाफा के नीचे होती ह।

50.6 आयकर एक्ट की धारा 43(5) को भी संशोधित किया गया है कि योग्य व्यापार उपयोगी वस्तुओं के संदर्भ मे जो किसी मान्य संगठन मे किया जाता है उसे अव्यवहार्य व्यापार नही माना जाएगा। मान्य व्यापार केवल वही व्यापार आएगा जिसपर सी टी टी लगात हो। एक स्पष्टीकरण का प्रवेशन हुआ है। "उपयोगी वस्तु से उत्पन्न" का मतलब वही होगा जोकि एक्ट के अध्याय VII मे वर्णित है।

50.6.2 परियोजनीयता :- एक्ट की धारा 36 और 43 संशोधन 1-4-2014 से लागू होगें उसके अनुरूप मूल्यांकन वर्ष 2014-15 और उसके बाद आने वाले मूल्यांकन वर्षों में

[आशीष मोहान्ती]

सचिव भारत सरकार को

तिथि 24/2024

[पन्ना न. 142/24/2013-टी पी एन]

प्रतिलिपि सेवा मे

1. व्यक्तिगत सचिव वित्त मंत्री।

2. व्यक्तिगत सविव-सचिव (कर), वित्त मंत्री के सलाहकार।

3. अध्यक्ष और सभी सदस्य सी बी डी टी मे उप सचिव और उससे ऊपर पद।

4. सभी मुख्य कमीश्नर, डी जी आयकर-एक विनती के साथ सभी अफसरों मे उनके कार्यक्षेत्र मे घुमादिया जाए

5. डी ज्ी आर्इ टी (अंतराष्ट्रीय कर) डी जी आर्इ टी (प्रणाली) डी जी आर्इ टी (सतर्कता) डी जी आर्इ टी (प्रश्न)

6. मीडिया संयोजक और सी बी डी टी का अधिकारी प्रवक्ता

7. डी आर्इ टी (आर्इ टी, आर एस पी, पी आर) डी आर्इ टी (स्तर्कता) डी आर्इ टी (लेखा जोखा) डी आर्इ टी (प्रणाली) डी आर्इ टी (विशेष जाँचकर्ता)

8. नियन्ता और भारत का महा लेखा परिक्षक (30 प्रतिलिपियाँ)

9. सयुक्त सचिव, और कानूनी सलाहकार, कानून और न्याय मंत्रालय, नर्इ दिल्ली

10. द इन्सटीयूट ऑफ चार्टर्ड एकाउन्टैन्टस ऑफ इण्डिया आर्इ पी इस्टेट, नर्इ दिल्ली

11. सभी व्यापार मण्डल, आम डाक सूची

आशीष मोहान्ती

उप सचिव भारत सरकार