आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 13/2015

परिपत्र की तिथि

06/07/2015

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

06/07/2015

 परिपत्र सं. 13/2015

2015 की परिपत्र सं. 13

एफ. सं. 142/18/2015-टीपीएल

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

(टीपीएल प्रभाग)

***

दिनांक 6 जुलार्इ, 2015

अज्ञात विदेशी आय तथा परिसंपत्ति के लिए कर अनुपालन पर स्पष्टीकरण

काला धन (अज्ञात विदेशी आय तथा परिसंपत्ति) तथा कर का अधिरोपण अधिनियम, 2015 (तत्पश्चात् 'द एक्ट' के तौर पर संदर्भित) अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत कर अनुपालन प्रावधान को प्रारंभ किया गया है। काला धन (अज्ञात विदेशी आय तथा परिसंपत्ति) तथा कर का अधिरोपण अधिनियम, 2015 (तत्पश्चात् 'द एक्ट' के तौर पर संदर्भित) को अधिसूचित किया गया है। योजना के संबंध में योजना के कार्यक्षेत्र तथा अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया के बारे में जनता से प्रश्न प्राप्त हुए है। बोर्ड ने इस पर विचार किया है तथा निम्नानुसार प्रश्न तथा उत्तर के रूप में परिपत्र के मुद्दे को उठाकर बिंदुओं को स्पष्ट करने का निर्णय लिया है:—

प्रश्न सं. 1 : यदि फर्म के पास अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति है, तो क्या ऐसी परिसंपत्ति के संबंध में हिस्सेदार घोषणा दाखिल कर सकता है ?
उत्तर : घोषणा फर्म द्वारा की जाएगी जो अधिनियम की धारा 62 की उप-धारा (2) में निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित की जाएगी। हिस्सेदार अपने नाम से घोषणा नहीं कर सकता। हालांकि, हिस्सेदार उसके द्वारा संघटित अज्ञात परिसंपत्ति के संबंध में घोषणा दाखिल कर सकता है।
प्रश्न सं. 2 : जहां कंपनी के पास अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति हो, क्या वह अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषणा दाखिल कर सकता है ? यदि हां, तो क्या कंपनी के निदेशक को प्रतिरक्षा दी जाएगी ?
उत्तर : हां, कंपनी अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषणा दाखिल कर सकता है। कंपनी के निदेशक कंपनी के नाम पर की गर्इ घोषणा के संबंध में आयकर अधिनियम, संपत्ति कर अधिनियम, फेमा, कंपनी अधिनियम तथा सीमा शुल्क अधिनियम के अंतर्गत किसी उल्लंघन के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
प्रश्न सं. 3 : यदि योजना के अंतर्गत की गर्इ घोषणा के संबंध में प्रतिरक्षा अधिनियम की धारा 67 में निर्दिष्ट को छोड़कर अधिनियम के संबंध में उपलब्ध होती हो ?
उत्तर : धारा 67 पांच अधिनियमों अर्थात् आयकर अधिनियम, संपत्ति कर अधिनियम, फेमा, कंपनी अधिनियम तथा सीमा शुल्क अधिनियम के अंतर्गत अभियोजन से प्रतिरक्षा मुहैया कराती है। यह किसी अन्य अधिनियम के अंतर्गत अभियोजन से प्रतिरक्षा प्रदान नहीं कराती। उदाहरण के लिए - यदि अप्रकटीकृत परिसंपत्ति संरक्षित पशुओं की बिक्री की प्राप्ति से संघटित की गर्इ हो तो व्यक्ति वन्यजीवन (संरक्षण) अधिनियम 1972 के अंतर्गत प्रतिरक्षा के लिए पात्र नहीं होगा।
प्रश्न सं. 4 यदि व्यक्ति घोषणा करता है तो उसे धनशोधन रोकथाम अधिनियम, 2002 से प्रतिरक्षा मुहैया होगी ?
उत्तर : पीएमएलए के अंतर्गत उल्लंघन तब होता है जब प्रक्रिया अथवा गतिविधि से उत्पन्न धनशोधन पीएमएलए हेतु अनुसूची में निर्दिष्ट उल्लंघनों से संबंधित होती है। इसलिए, पीएमएलए के अंतर्गत प्राथमिक अनिवार्यता अनुसूचित उल्लंघन का कमीशन है। अधिनियम के अधिनियमित होने के साथ ही अधिनियम की धारा 51 के अर्न्तगत कर अपवंचन के इरादतन प्रयास का उल्लंघन पीएमएलए के अंतर्गत अनुसूचित उल्लंघन बन जाता है। हालांकि जहां परिसंपत्ति की घोषणा अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत विधिवत की गर्इ हो तो धारा 51 के प्रावधान उस परिसंपत्ति के संबंध में स्वीकार्य नहीं होंगे। इसलिए, पीएमएलए उस परिसंपत्ति के संबंध में अधिनियम की धारा 51 के अंतर्गत कर अपवंचन के इरादतन प्रयास के अनुसूचित उल्लंघन के संबंध में लागू नहीं होगा जिसके लिए अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत घोषणा की गर्इ है।
प्रश्न सं. 5 जहां एक अप्रकटीकृत विदेशी परिसंपत्ति अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषित होता है तथा कर तथा जुर्माना उसकी उचित बाजार कीमत पर दिया जाता है तो घोषक भविष्य में ऐसी परिसंपत्ति की बिक्री पर पूंजीगत प्राप्ति के लिए उत्तरदायी होगा। यदि हां तो ऐसे मामले में पूंजीगत प्राप्ति की गणना कैसे होगी ?
उत्तर हां, घोषक भविष्य में ऐसी परिसंपत्ति की बिक्री पर आयकर अधिनियम के अंतर्गत पूंजीगत प्राप्ति के लिए उत्तरदायी होगा। आयकर के वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, पूंजीगत प्राप्ति बिक्री मूल्य द्वारा संघटन की कटौती लागत से आंकी जाती है। हालांकि, चूंकि परिसंपत्ति इसकी उचित बाजार कीमत पर करारोपित होगी पूंजीगत प्राप्ति के प्रयोजन के लिए अधिग्रहण की लागत कथित उचित बाजार कीमत होगी तथा संघटन की अवधि अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत ऐसी परिसंपत्ति की घोषणा की तिथि से आरंभ होगा।
प्रश्न सं. 6 जहां आयकर अधिनियम की धारा 142/143(2)/148/153क/153ग के अंतर्गत एक नोटिस निर्धारण वर्ष के लिए एक व्यक्ति को तामील किया गया है तो क्या वह अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत स्वैच्छिक घोषणा से अयोग्य होगा ?
उत्तर : व्यक्ति उन विदेशी परिसंपत्तियों की घोषणा से अयोग्य होगा जिसे वर्ष के दौरान प्राप्त किया गया है जिसके लिए धारा 142/143(2)/148/153क/153ग के अंतर्गत एक नोटिस जारी किया गया तथा निर्धारण अधिकारी के समक्ष कार्यवाही लंबित हो। वह अन्य विदेशी परिसंपत्ति की घोषणा करने के लिए मुक्त है जिसे अन्य वर्षों के दौरान प्राप्त किया गया हो जिसके लिए उक्त संदर्भित धाराओं के अंतर्गत कोर्इ नोटिस तामील न किया गया हो।
प्रश्न सं. 7 धारा 71(घ)(i) के अनुसार, घोषणा वहां नहीं की जा सकती जहां एक अप्रकटीकृत परिसंपत्ति निर्धारण वर्ष से प्रासंगिक किसी पिछले वर्ष के दौरान प्राप्त किया गया हो जिसके लिए आयकर अधिनिमय की धारा 142, 143(2), 148, 153क अथवा 153ग को निगर्मित किया गया हो। यदि सूचना को निगर्मित किया गया हो लेकिन घोषक को तामील न की गर्इ हो तो उसे कैसे पता चलेगा कि नोटिस को जारी किया गया है ?
उत्तर : घोषक अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषणा के लिए पात्र नहीं होगा जहां अज्ञात परिसंपत्ति को किसी निर्धारण वर्ष के प्रासंगिक किसी प्रासंगिक वर्ष के दौरान प्राप्त किया गया है जहां नोटिस को आयकर अधिनियम की धारा 142, 143(2), 148, 153क अथवा 153ग के अंतर्गत 30 जून, 2015 को अथवा इससे पूर्व घोषक को जारी तथा तामील किया गया हो। घोषक को प्रपत्र 6 में ऐसी किसी नोटिस की प्राप्ति से संबंधित घोषणा को दाखिल करना आपेक्षित है।
प्रश्न सं. 8 : जहां एक अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति को निर्धारण वर्ष के पिछले प्रासंगिक वर्ष के दौरान आंशिक रूप से संघटित किया गया हो जो निर्धारण के लिए लंबित हो तथा अन्य वर्षों के दौरान आंशिक रूप से निर्धारण के लिए लंबित न हो, तो ऐसी परिसंपत्ति अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषणा के लिए पात्र है ?
उत्तर : उस स्थिति में जहां कार्यवाही 30.06.2015 को अथवा इससे पूर्व तामील आयकर अधिनियम की धारा 142, 143(2), 148, 153क अथवा 153ग के अंतर्गत नोटिस के अनुसार निर्धारण अधिकारी के समक्ष लंबित है तो घोषक अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत अज्ञात परिसंपत्ति की घोषणा कर सकता है। हालांकि, घोषित राशि की गणना के दौरान निर्धारण वर्ष जिसके लिए ऐसा नोटिस जारी किया गया है, के पिछले प्रासंगिक वर्ष के दौरान परिसंपत्ति में किया गया निवेश को परिसंपत्ति की उचित बाजार कीमत से घटाने की आवश्यकता है जिसके लिए व्यक्ति को घोषणा के साथ गणना को मुहैया कराना होगा। इसके अतिरिक्त ऐसा निवेश जिसे उचित बाजार कीमत से घटाया  जाएगा आयकर अधिनियम के अंतर्गत लंबित प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के मूल्यांकन में निर्धारणनीय होगा तथा व्यक्ति ऐसी परिसंपत्ति में प्रासंगिक वर्ष के दौरान किए गए निवेश की सूचना निर्धारण अधिकारी को देगा।
  यह भी स्पष्ट करने के लिए कि जहां आयकर अधिनियम की धारा 142, 143 (2), 148 अथवा 153क अथवा 153 ग के अंतर्गत नोटिस को 30.06.2015 को अथवा उसके पश्चात् तामील किया जाता हैं तो घोषक परिसंपत्ति की पूर्ण राशि को घोषित करने के लिए भी पात्र होगा भले ही ऐसी परिसंपत्ति (अथवा ऐसी परिसंपत्ति का भाग) निर्धारण वर्ष, जिसके लिए ऐसा नोटिस तामील किया गया, के पिछले प्रसांगिक वर्ष में प्राप्त की गर्इ हो।
प्रश्न सं. 9 : क्या उस अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति से घोषणा की जा सकती है जिसे मूल्यांकित किया गया हो तथा मामला अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष लंबित हो ?
उत्तर : अधिनियम की धारा 65 के अनुसार, घोषक आयकर अधिनियम के अंतर्गत किए गए किसी मूल्यांकन अथवा पुनर्मूल्यांकन को पुन: खोलने का हकदार नहीं है। इसलिए, वह उन परिसंपत्ति के संबंध में कर अनुपालन का लाभ उठाने का पात्र नहीं है। हालांकि, वह उन अन्य अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति को स्वेच्छा से घोषित कर सकता है जिसे उसने आयकर अधिनियम के अंतर्गत अघोषित तथा फलस्वरूप गैर-आंकलित आय से प्राप्त अथवा अर्जित किया हो।
प्रश्न सं. 10 क्या एक व्यक्ति ऐसे व्यक्ति जिसके विरूद्ध खोज/सर्वेक्षण संचालन किया गया हो, के खिलाफ अधिनियम के अध्याय टप के अंतर्गत स्वैच्छिक घोषणा दाखिल कर सकता है ?
उत्तर : (क) व्यक्ति अध्याय VI के अंतर्गत घोषणा करने के लिए पात्र नहीं है यदि ऐसी खोज की गर्इ है तथा धारा 153क के अंतर्गत नोटिस का निगर्मन के लिए समय समाप्त नहीं हुआ है, भले ही प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए ऐसी सूचना को निगर्मित नहीं किया गया हो। हालांकि, इस मामले में, व्यक्ति एक उस निर्धारण वर्ष के संबंध में घोषणा दाखिल करने के लिए पात्र है जो धारा 153क के अंतर्गत नोटिस के प्रयोजन के लिए प्रासंगिक निर्धारण वर्ष से पूर्व है।
  (ख) सर्वेक्षण संचालन की स्थिति में व्यक्ति पिछले वर्ष जिसमें सर्वेक्षण किया गया था, में प्राप्त अज्ञात परिसंपत्ति के संबंध में अध्याय VI के अंतर्गत घोषणा करने से वर्जित होता है। हालांकि, व्यक्ति ऐसे किसी पिछले वर्ष में प्राप्त अज्ञात परिसंपत्ति के संबंध में घोषणा करने के लिए पात्र है।
प्रश्न सं. 11 जहां खोज/सर्वेक्षण संचालन किया गया था तथा निर्धारण को परिपूरित किया गया लेकिन अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति पर कर नहीं लगाया गया था तो क्या ऐसी परिसंपत्ति की अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषणा की जा सकती है ?
उत्तर : हां, ऐसी अज्ञात परिसंपत्ति अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषित किया जा सकता है।
प्रश्न सं. 12 क्या एक व्यक्ति को अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत स्वैच्छिक घोषणा से रोका जाता है यदि डीटीएए के अंतर्गत सरकार द्वारा कोर्इ सूचना प्राप्त की गर्इ हो ?
उत्तर : धारा 71(घ)(iii) के अनुसार, व्यक्ति उस स्थिति में अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति की घोषणा नहीं कर सकता जहां केंद्रीय सरकार ने डीटीएए के अंतर्गत ऐसी परिसंपत्ति के संबंध में एक सूचना को प्राप्त किया हो। व्यक्ति अन्य अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति के संबंध में स्वैच्छिक घोषणा करने का हकदार है जहां किसी सूचना को प्राप्त नहीं किया गया है।
प्रश्न सं. 13 व्यक्ति कैसे जान सकता है कि सरकार ने उसके द्वारा संघटित ऐसी अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति की सूचना को प्राप्त किया है जो घोषणा को अयोग्य सिद्ध करे ?
उत्तर : व्यक्ति यह नहीं जान सकता कि सरकार ने उसके द्वारा संघटित अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति के बारे में सूचना को प्राप्त कर लिया है यदि उसने आयकर अधिनियम के अंतर्गत किसी पूछताछ/कार्यवाही में उसे सूचित न किया हो। व्यक्ति के घोषणा को दाखिल करने के पश्चात्, जिसे अधिक से अधिक 30 सितम्बर, 2015 तक दाखिल किया जाना है, उसे 31 अक्टूबर, 2015 तक प्रधान आयुक्त/आयुक्त द्वारा सूचना जारी की जाएगी। चाहे सरकार द्वारा कोर्इ सूचना प्राप्त की गर्इ हो तथा फलस्वरूप चाहे वह की गर्इ घोषणा पर भुगतान करने के लिए पात्र हो। यदि ऐसी परिसंपत्ति के संबंध में सरकार द्वारा 30 जून, 2015 तक कोर्इ सूचना प्राप्त नहीं होती है तो व्यक्ति घोषित परिसंपत्ति के संबंध में कर तथा जुर्माने के भुगतान के लिए 31 दिसंबर, 2015 तक समय दिया जाएगा।
  ऐसी स्थिति हो सकती है जहां व्यक्ति 5 परिसंपत्तियों के संबंध में घोषणा कर सकता है जबकि सरकार के पास केवल 1 परिसिपंत्ति के बारे में सूचना हो। ऐसी स्थिति में व्यक्ति अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत शेष 4 परिसंपत्तियों की घोषणा करने के लिए पात्र होगा। ऐसी स्थिति में घोषक, प्रधान आयुक्त/आयुक्त द्वारा सूचना की प्राप्ति पर, परिसंपत्ति जो घोषणा के लिए पात्र नहीं है, को बाहर रखने की सूचना के ऐसी प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर की गर्इ घोषणा को संशोधित करेंगे। अधिनियम के अंतर्गत पात्र परिसंपत्ति पर कर तथा जुर्माना 31 दिसंबर, 2015 तक संशोधित घोषणा के संबंध में देययोग्य होगा। अनुचित परिसंपत्ति प्रावधानों के संदर्भ में आयकर अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे। (कृपया प्रश्न सं. 15 के उत्तरों को भी देखें)
प्रश्न सं. 14 : क्या परिणाम है यदि अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत कोर्इ घोषणा अधिनियम के आरंभ से पूर्व प्राप्त की गर्इ अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति के संबंध में नहीं होती है ?
उत्तर : धारा 72(ग) के अनुसार, जहां अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व किसी परिसंपत्ति को संघटित किया गया हो तथा अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत कोर्इ घोषणा नहीं होती तो ऐसी परिसंपत्ति को वर्ष जिसमें यह निर्धारण अधिकारी की सूचना में आर्इ है, में प्राप्त की गर्इ होने के तौर पर समझी जाएगी तथा अधिनियम के प्रावधान तद्नुसार लागू होंगे।
  भारत के वर्ष 2015 के उर्तरार्ध में अमेरिका से एफएटीसीए के अंतर्गत सूचना के स्वत: आदान प्रदान (एर्इओआर्इ) के माध्यम से सूचना को प्राप्त करने की प्रक्रिया को आरंभ करने की संभावना है। इसके बाद, बहुपक्षीय समझौते के अंतर्गत भारत 2017 से एर्इओआर्इ रूट के अंतर्गत अन्य देशों से सूचना को प्राप्त करना आरंभ करेगा। 18 मार्च 2015 के अनुसार, 58 क्षेत्राधिकार (भारत सहित) 2017 तक एर्इओआर्इ के अंतर्गत सूचना सांझा करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा उन क्षेत्राधिकारों सहित 36 क्षेत्राधिकार 2018 तक सांझा करने के लिए प्रतिबद्ध है जिसकी लाभकारी कर व्यवस्था है। बहुपक्षीय समझौते के निकट भविष्य में समस्त देशों को आच्छादन करने की संभावना है। एर्इओआर्इ के अंतर्गत सूचना में परिसंपत्ति के नियंत्रक व्यक्ति (लाभाथ्री मालिक) की सूचना शामिल होगी। एक अज्ञात परिसंपत्ति की खेाज की संभावना भविष्य में किसी समय पर उत्पन्न हो सकती है उदाहरण के लिए कह सकते है, अचल संपत्ति की सूचना का पता लगाया जा सकता है यदि कोर्इ उपयोग बिल/संपत्ति कर अथवा माली/अभीक्षक का वेतन मौजूदा अथवा बंद बैंक खाते के माध्यम से किया गया हो। इसलिए, 100,000 डॉलर के लिए पूर्व में संघटित अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति की कोर्इ सूचना, कहा जा सकता है वर्ष 1975 में, बाद में निर्धारण अधिकारी की सूचना में आर्इ हो, जब इसकी राशि, 5 लाख डॉलर, बनती है तो मूल्यांकन तिथि पर परिसपंत्ति की उचित बाजार कीमत के 120 प्रतिशत की राशि अधिनियम के अंतर्गत देयता वर्ष 2020 में उत्पन्न हो सकती है, साथ ही अभियोजन तथा अन्य परिणाम भी। इस मामले में यदि मूल्यांकन तिथि वर्ष 2020 में है तो अधिनियम के अंतर्गत कर तथा जुर्माने की राशि 6 लाख डॉलर होगी।
प्रश्न सं. 15 यदि अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति की घोषणा अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत होती है तथा यह इस कारण की वजह से अयोग्य पार्इ गर्इ थी कि सरकार के पास डीटीएए के अंतर्गत पहले सूचना थी तो व्यक्ति अधिनियम के अंतर्गत परिणामों के लिए उत्तरदायी होगा ?
उत्तर : ऐसी परिसंपत्ति के संबंध में जिसे कर अनुपालन के अंतर्गत सदभाव से विधिवत रूप से घोषित किया गया हो लेकिन पात्र नहीं पाया गया हो तो, वह अधिनियम की धारा 72(ग) द्वारा नहीं पकड़ा जाएगा तथा अधिनियम के अंतर्गत ऐसी परिसंपत्ति के संबंध में कोर्इ कार्यवाही निहित नहीं होगी। हालांकि, ऐसी सूचना आयकर अधिनियम के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त हो सकती है।
प्रश्न सं. 16 : उक्त प्रश्न सं. 15 हेतु प्रतिउत्तर हेतु संदर्भित अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति के संदर्भ में, जहां आयकर अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही प्रारंभ होती है, ऐसी परिसंपत्ति के संबंध में लाभ उठाने हेतु आयकर अधिनियम के अंतर्गत निपटान आयोग आदि का विकल्प हो सकता है ?
उत्तर : आयकर अधिनियम के समस्त प्रावधान उन परिसंपत्तियों के संबंध में लागू होंगे।
प्रश्न सं. 17 : एक व्यक्ति के पास कुछ अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति है। यदि वह निर्धारण वर्ष 2015-16 अथवा कहे 2014-15 (विलंबित विवरणी में) के लिए आयकर विवरणी में उन परिसंपत्तियों की घोषणा करता है तो उसे अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत स्वैच्छिक कर अनुपालन में उन परिसंपत्तियों की घोषणा करने की आवश्यकता है ?
उत्तर : अधिनियम के अनुसार, अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति का अर्थ वह परिसंपत्ति है जो बेहिसाब है/ऐसी परिसंपत्ति में निवेश का स्रोत पूर्णता समझने योग्य नहीं है। क्योंकि अनुसूची चक में सूचित परिसंपत्ति आयकर विवरणी में कुल आय की गणना का अभिन्न अंग नहीं है तथा फलस्वरूप करारोपित नहीं होती, विवरणी की अनुसूची चक में विदेशी परिसंपत्ति की मात्र सूचना का अर्थ यह नहीं है कि परिसंपत्ति में निवेश के स्रोत को परिभाषित किया गया है। विदेशी परिसंपत्ति अधिनियम के अंतर्गत करारोपित होने के लिए उत्तरदायी है (चाहे विवरणी में सूचित हो अथवा नहीं) यदि ऐसी परिसंपत्ति में निवेश का स्रोत अवर्णित है। इसलिए, घोषणा उन समस्त परिसंपत्तियों के संबंध में अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत किया जाना चाहिए जो बेहिसाब है/ऐसी परिसंपत्ति में निवेश का स्रोत पूर्णता वर्णात्मक नहीं है।
प्रश्न सं. 18 एक व्यक्ति कुछ विदेशी परिसंपत्तियों का अधिकार रखता है जो पूर्णता विवरणात्मक है तथा दिए गए कर में प्राप्त होती है। हालांकि, उसने पूर्व में आयकर विवरणी की अनुसूची चक में इन परिसंपत्तियों को सूचित नहीं किया है। क्या उसे अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत ऐसी परिसंपत्तियों की घोषणा करनी चाहिए ?
उत्तर : चूंकि, ये परिसंपत्तियां पूर्णता विवरणात्मक है इन्हें अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति के तौर पर नहीं समझा जाता तथा अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषित नहीं की जानी चाहिए। हालांकि यदि परिसंपत्ति निर्धारण वर्ष 2016-17 के लिए (पिछले वर्ष 2015-16 से संबंधित) अथवा निवासी के तौर पर (सामान्य निवासी को छोड़कर) निवासी द्वारा, आयकर विवरणी की अनुसूची चक में सूचित नहीं होता है तो वह अधिनियम की धारा 43 के अंतर्गत रू. 10 लाख के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा। हालांकि, जुर्माना पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय अधिक से अधिक रू. 5 लाख के समकक्ष की राशि के कुल शेष वाले एक अथवा एक से अधिक विदेशी बैंक खाते के रूप में परिसंपत्ति के संदर्भ में लागू नहीं है।
प्रश्न सं. 19 एक व्यक्ति के पास विदेशी बैंक खाता है जिसमें कर्इ वर्षों में अज्ञात आय जमा की गर्इ है। उसने इन वर्षों के दौरान खाते में राशि को व्यय किया है तथा अब उसके केवल 500 डॉलर का शेष बाकी है। क्या उसे घोषणा के अंतर्गत इस 500 डॉलर पर कर का भुगतान करने की आवश्यकता है ?
उत्तर : अधिनियम की धारा 59 अज्ञात परिसंपत्ति की घोषणा के लिए मुहैया करार्इ गर्इ है तथा ना कि आय के लिए। इस मामले में बैंक खाता एक अज्ञात परिसंपत्ति है जिसे घोषित किया जा सकता है। अज्ञात परिसंपत्ति पर कर इसकी उचित बाजार कीमत पर दिए जाने के लिए आपेक्षित है। बैंक खाते की स्थिति में उचित बाजार कीमत नियम 3(1)(ड़) के अनुसार आंके गए खाते में की गर्इ समस्त राशि है। इसलिए, कर तथा जुर्माने को उचित बाजार कीमत पर दिए जाने की आवश्यकता है नाकि तिथि के अनुसार शेष पर।
प्रश्न सं. 20 एक व्यक्ति 1994-95 तथा 1997-98 के बीच सीमित अवधि के लिए विदेशी बैंक खाता रखता था, जो अवर्णित था। चूंकि ऐसा खाता 1997-98 में बंद हो गया था क्या उसे अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत इसे घोषित करने की आवश्यकता है ?
उत्तर : अधिनियम की धारा 59 मुहैया कराती है कि घोषणा किसी अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति से की जा सकती है जिसे उस आय से प्राप्त किया गया है जो आयकर अधिनियम के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय नहीं है। चूंकि बैंक खाते में निवेश अविवरणात्मक था तथा इस अकरारोपित आय से था यह अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषित हो सकता है। गैर-घोषणा के परिणाम भविष्य में किसी समय अधिनियम के अंतर्गत उत्पन्न हो सकते है जब ऐसे खाते की सूचना निर्धारण अधिकारी की सूचना में आती है।
प्रश्न सं. 21 एक व्यक्ति अपने पिता, जो अब जीवित नहीं है, से 2003-04 में गृह संपत्ति विरासत में पाता है। ऐसी परिसंपत्ति निवेश के अज्ञात स्रोतों से प्राप्त की गर्इ थी। संपत्ति 2011-12 में व्यक्ति द्वारा बेची गर्इ। क्या उसे अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत ऐसी संपत्ति को घोषित करने की आवश्कता है तथा यदि हां तो घोषणा के उद्देश्य के लिए ऐसी संपत्ति की उचित बाजार कीमत क्या होगी ?
उत्तर : चूंकि संपत्ति निवेश की अविवरणात्मक स्रोतों से है तो इसे अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषित किया जा सकता है। हालांकि, इस मामले में घोषणा को व्यक्ति द्वारा किए जाने की आवश्यकता है जो अपने पिता के कानूनी प्रतिनिधि की क्षमता में संपत्ति को विरासत के रूप में प्राप्त करता है। उनके मामले में संपत्ति की उचित कीमत राशि इसके अधिग्रहण की उच्च होगा तथा नियमों के नियम 3(2) के अनुसार बिक्री मूल्य होगा।
प्रश्न सं. 22 एक व्यक्ति आय के अज्ञात स्रोतों से वर्ष 2000-01 के दौरान विदेशी राष्ट्र में गृह संपत्ति को प्राप्त करता है। संपत्ति को 2007-08 मे बेचा गया था तथा प्राप्ति को विदेशी बैंक खाते में जमा किया गया था। क्या उसे अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत दोनो परिसंपत्तियों को घोषित करने तथा दोनो परिसंपत्तियों पर कर का भुगतान करने की आवश्यकता है ?
उत्तर : घोषणा उसकी उचित बाजार कीमत पर दोनो गृह संपत्ति तथा बैंक खाते के संबंध में की जा सकती है। गृह संपत्ति की उचित बाजार कीमत इसकी लागत तथा बिक्री मूल्य का उच्चतम घटा बैंक खाते में जमा राशि होगी। यदि गृह संपत्ति की लागत राशि उच्च होती है तो घोषक को गृह पर (लागत मूल्य - बिक्री मूल्य) का भुगतान करना आपेक्षित होगा। यदि गृह संपत्ति का बिक्री मूल्य अधिक होता है तो गृह संपत्ति की उचित बाजार कीमत शून्य होगी क्योंकि पूर्ण राशि बैक खाते में जमा किया गया था। बैंक खाते की उचित बाजार कीमत नियम 3(1)(ड़) के अंतर्गत निर्धारित होगी तथा कर तथा जुर्माना इस राशि पर दिया जाएगा। (कृपया उचित बाजार कीमत की गणना के लिए नियम 3(3) के अंतर्गत उदाहरण को भी संदर्भित करें)
  इसके अतिरिक्त, समस्त अज्ञात विदेशी परिसंपत्तियों को घोषित करने की सलाह दी जाती है भले ही नियम 3 के अनुसार उचित बाजार कीमत गणना शून्य हो। यह भविष्य में अधिनियम के अंतर्गत किसी पूछताछ को वर्जित कर सकता है यदि ऐसी परिसंपत्ति निर्धारण अधिकारी की सूचना में आती है।
प्रश्न सं. 23 एक व्यक्ति गैर-निवासी है। हालांकि, वह पहले भारत का निवासी था तथा भारत में कर हेतु वसूलनीय राशि में से विदेशी परिसंपत्ति को प्राप्त किया था जिसे आय की विवरणी में घोषित नहीं किया गया था अथवा उस आय के संबंध में कोर्इ विवरणी दाखिल नहीं की गर्इ थी। क्या वह व्यक्ति अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषणा को दाखिल कर सकता है ?
उत्तर : धारा 59 मुहैया कराती है कि एक घोषणा को निर्धारण वर्ष 2016-17 से पूर्व किसी निर्धारण वर्ष के लिए आयकर अधिनियम के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय आय से प्राप्त अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति के किसी व्यक्ति द्वारा की जा सकती है। चूंकि व्यक्ति वर्ष जिसमें उसने भारत में कर हेतु वसूलनीय आय से विदेशी परिसंपत्ति (जो अप्रकटीकृत थी) को प्राप्त किया था, में निवासी था, क्या वह अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत उन परिसंपत्तियों के संबंध में धारा 59 के अंतर्गत घोषणा को दाखिल कर सकता है।
प्रश्न सं. 24 एक व्यक्ति अब निवासी है। हालांकि, पहले वह गैर-निवासी था, जब उसने आय, जो भारत में कर हेतु वसूलनीय थी, से विदेशी परिसपंत्ति (जो उसने अब संघटित रखना जारी रखा है) को प्राप्त किया था। क्या व्यक्ति को अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत उन परिसपंत्तियों के संबंध में घोषणा को दाखिल करने की आवश्यकता है ?
उत्तर : नहीं, वह परिसंपत्ति अधिनियम के अंतर्गत अज्ञात परिसंपत्ति की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आती।
प्रश्न सं. 25 यदि एक व्यक्ति के पास 3 अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति है तथा अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत उनमे से केवल 2 की घोषणा करता है तो क्या उसे घोषित 2 परिसंपत्तियों के संबंध में अधिनियम से सुरक्षा प्राप्त होगी ?
उत्तर : यह अपेक्षा की जाती है कि व्यक्ति को अपनी समस्त अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति को घोषित करना चाहिए। हालांंकि, इस स्थिति में व्यक्ति अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषित दो परिसंपत्तियों के संबंध में अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत सुरक्षा प्राप्त करेगा तथा तीसरी परिसंपत्ति जो घोषित नहीं हुर्इ है, के संबंध में कोर्इ सुरक्षा मुहैया नहीं करार्इ जाएगी।
प्रश्न सं. 26 एक निवासी भारत से बाहर आय अर्जित करता है जिसे उसके विदेशी बैंक खाते में जमा किया गया है। आय विदेशी राष्ट्र मे कर हेतु वसूलनीय थी जब उसे अर्जित किया गया था लेकिन इसे भारत मे आय की विवरणी में घोषित नहीं किया गया था तथा परिणामस्वरूप भारत में करारोपित नहीं किया गया। क्या उसे अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत ऐसी राशि को घोषित करने की आवश्यकता है ? क्या वह दिए गए विदेशी कर के ऋण प्राप्त करेगा ?
उत्तर : अध्याय VI के अंतर्गत अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति की घोषणा की जानी है। इस मामले में, भारत के निवासी के तौर पर व्यक्ति, विदेशी बैंक खाते को अध्याय VI के अंतर्गत घोषित किए जाने की आवश्यकता है चूंकि यह अज्ञात परिसंपत्ति है तथा भारत में कर हेतु वसूलनीय राशि से प्राप्त है। बैंक खाते उचित बाजार कीमत नियम 3(1)(ड़) के अनुसार निर्धारित होगें। विदेशी कर भुगतान का कोर्इ ऋण भारत में स्वीकार्य नहीं होगा चूंकि अधिनियम की धारा 84 अधिनियम हेतु आयकर अधिनियम (दिए गए विदेशी कर के ऋण से संबंधित) की धारा 90(1)(क)/90(1)(क)/90(1)(ख)/90क(1)(क)/90क(1)(ख) के प्रयोग को मुहैया नहीं कराती। आगे, अधिनियम की धारा 73 अधिनियम के अंतर्गत वसूलनीय कर के संबंध में राहत की स्वीकृति के उद्देश्य के लिए विदेशी राष्ट्र के साथ समझौते की स्वीकृति नहीं देता।
प्रश्न सं. 27 क्या एक व्यक्ति अपनी अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति को अध्याय IV के अंतर्गत घोषित कर सकता है जिसे भ्रष्टाचार के माध्यम से अर्जित आय से प्राप्त किया गया हो ?
उत्तर : नहीं, अधिनियम की धारा 71(ख) के अनुसार, अध्याय VI भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम, 1988 के अंतर्गत किसी दंडनीय अपराध के अभियोजन के संबंध में अन्य विषयों के साथ लागू नहीं होंगे। इसलिए, ऐसी परिसंपत्ति की घोषणा अध्याय VI के अंतर्गत नहीं की जा सकती। हालांकि, यदि ऐसी घोषणा की जाती है तथा यह घटना सामने आती है कि परिसंपत्ति भ्रष्टाचार के माध्यम से अर्जित आय का प्रतिनिधित्व करती है तो इसे तथ्यों की गलत बयानी कहा जाएगा तथा घोषणा अधिनियम की धारा 68 के अंतर्गत शून्य समझी जाएगी। यदि एक घोषणा को शून्य के तौर पर समझा जाता है तो अधिनियम के प्रावधान ऐसी परिसंपत्ति के संदर्भ में लागू होगे जैसे वह किसी अन्य अज्ञात विदेशी परिसपंत्ति के सबंध में लागू हुए है।
प्रश्न सं. 28 यदि एक विदेशी परिसंपत्ति को कर हेतु वसूलनीय अज्ञात आय में से आंशिक रूप से प्राप्त किया गया हो तथा आंशिक रूप से अज्ञात आय/छूट आय (कर भुगतान आय) में से प्राप्त किया गया हो तो क्या उस विदेशी परिसंपत्ति को अज्ञात के तौर पर समझा जाएगा ? क्या अध्याय VI के अंतर्गत ऐसी परिसंपत्ति के संबंध में घोषणा किए जाने की आवश्यकता है ? यदि हां तो कितनी राशि को प्रकटीकृत किया जाना चाहिए ?
उत्तर : अधिनियम की धारा 5 के अनुसार, अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति की राशि की गणना में कोर्इ आय, जिसे आयकर अधिनियम के अंतर्गत कर हेतु मूल्यांकित किया गया है जिसके द्वारा वह परिसंपत्ति प्राप्त की गर्इ है, अज्ञात विदेशी परिसपंत्ति की राशि से घटार्इ जाएगी। केवल निवेश का भाग ऐसी विदेशी परिसपंत्ति अज्ञात (अविवरणात्मक) है इसलिए ऐसी विदेशी परिसंपत्ति की घोषणा अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत की जा सकती है। घोषणा की राशि 1 जुलार्इ, 2015 के अनुसार ऐसी परिसंपत्ति की उचित बाजार कीमत होगी जैसा अधिनियम की धारा 5 के अनुसार आंकी गर्इ राशि द्वारा घटार्इ जाती है।
प्रश्न सं. 29 क्या घोषणा के उद्देश्य के लिए अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति घोषणा की तिथि पर घोषक द्वारा संघटित होनी चाहिए ?
उत्तर नहीं, ऐसी कोर्इ आवश्यकता नहीं है। घोषणा की जा सकती है यदि विदेशी परिसंपत्ति को अज्ञात आय में से प्राप्त किया गया भले ही इसे निरस्त कर दिया गया हो तथा घोषणा की तिथि पर घोषक द्वारा संघटित न किया गया हो।
प्रश्न सं. 30 अध्याय VI के अंतर्गत घोषणा के समय प्रधान आयुक्त/आयुक्त की गर्इ घोषणा के संदर्भ में कोर्इ पूछताछ करेंगे ?
उत्तर घोषणा करने के पश्चात् प्रधान आयुक्त/आयुक्त पूछताछ करेंगे कि घोषित परिसंपत्ति के संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी सूचना को प्राप्त किया गया है। इसके अलावा कोर्इ अन्य पूछताछ घोषणा के समय उसके द्वारा नहीं की जाएगी।
प्रश्न सं. 31 एक व्यक्ति विदेशी परिसंपत्ति में लाभाथी है। क्या वह अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत घोषणा के लिए पात्र है ?
उत्तर जहां तक स्वामित्व का संबंध है, अधिनियम की धारा 2(11) के अनुसार "भारत से बाहर स्थित अज्ञात परिसंपत्ति" का अर्थ व्यक्ति द्वारा अपने नाम पर अथवा उसके संबंध में जिसका वह लाभाथी मालिक है, द्वारा संघटित परिसंपत्ति है। "लाभाथी मालिक" तथा "लाभाथी" की परिभाषा क्रमश : आयकर अधिनियम की धारा 139(1) हेतु व्याख्या 4 तथा व्याख्या 5 में मुहैया करार्इ गर्इ है (पीएमएलए (रिकार्ड अनुरक्षण) नियम, 2005 के नियम 9(3) के अंतर्गत उपलब्ध लाभाथी स्वामित्व के निर्धारण के साथ विचरित है)। इसलिए, अधिनियम के उद्देश्य के लिए, परिसंपत्ति के संबंध में "लाभाथी मालिक" का अर्थ एक व्यक्ति है जो किसी अन्य व्यक्ति अथवा स्वयं के तुरंत अथवा भविष्यगत लाभ, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष, के लिए परिसंपत्ति के लिए प्रतिफल को मुहैया, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष, कराता है। आगे, एक परिसंपत्ति के संबंध में "लाभाथी" का अर्थ वह व्यक्ति है जिसने पिछले वर्ष के दौरान परिसंपत्ति से लाभ निकाला हो तथा ऐसी परिसंपत्ति के लिए प्रतिफल ऐसे लाभाथी को छोड़कर किसी व्यक्ति द्वारा मुहैया कराया गया हो। इसलिए, अधिनियम के अनुसार लाभाथी स्वामी अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत घोषणा के लिए पात्र है।
  ऐसी स्थिति हो सकती है जहां एक व्यक्ति विदेशी परिसंपत्ति में लाभाथी के तौर पर सूचित हो, हालांकि, यदि उसने परिसंत्ति के लिए प्रतिफल को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से मुहैया कराया हों तो वह अधिनियम के उद्देश्य के लिए लाभाथ्र्ाी स्वामी की परिभाषा के अंतर्गत अंतर्निहित होगा।
प्रश्न सं. 32 एक व्यक्ति विदेशी राष्ट्र में नियोजित था जहां उसने उस देश में अर्जित आय में से एक परिसंपत्ति को प्राप्त किया अथवा बनाया। क्या ऐसी परिसंपत्ति को अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत घोषित किए जाने की आवश्यकता है ?
उत्तर : यदि व्यक्ति, जब वह भारत मे गैर-निवासी था, आय, जो भारत में कर हेतु वसूलनीय नहीं है मे से विदेशी परिसंपत्ति को प्राप्त अथवा बनाता है तो ऐसी परिसंपत्ति अधिनियम के अंतर्गत अज्ञात परिसंपत्ति नहीं होगी।
  हालांकि, यदि भारत में आय प्राप्त अथवा अर्जित की गर्इ थी जब वह गैर-निवासी था, तो ऐसी आय भारत में वसूलनीय है। यदि ऐसी आय, आय की विवरणी में प्रकटीकृत नहीं थी तथा विदेशी परिसंपत्ति को ऐसी आय से प्राप्त किया गया था तो परिसंपत्ति अज्ञात विदेशी परिसंपत्ति बन जाती है तथा व्यक्ति अधिनियम के अध्याय VI के अंतर्गत ऐसी परिसंपत्ति की घोषणा कर सकता है।

 

(गौरव कनौजिया)

निदेशक, भारत सरकार

निम्न को प्रति :—

 

  1. पीएस से एफएम/ओएसडी से एफएम/ओएसडी से एमओएस (आर)

  2. पीएस से सचिव (राजस्व)

  3. अध्यक्ष, सदस्य तथा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में अवर सचिव तथा उससे ऊपर के अन्य समस्त अधिकारी

  4. समस्त प्रधान मुख्य आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक - अपने क्षेत्रो/प्रभारों में समस्त अधिकारियों के बीच वितरित करने के प्रतिवेदन के साथ

  5. प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति)/प्रधान आयकर महानिदेशक (सर्तकता)/प्रधान आयकर महानिदेशक (प्रशा.)/प्रधान महानिदेशक (राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी)/प्रधान आयकर महानिदेशक (एलएंडआर)

  6. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के मीडिया समन्वयक तथा आधिकारिक प्रवक्ता

  7. विभागीय वेबसाइट पर चस्पा के लिए वेब मैनेजर