आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

7/2006

परिपत्र की तिथि

17/07/2006

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

17/07/2006

परिपत्र: सं 7/2006, 17-07-2006 दिनांकित
परिपत्र सं. 07/2006

एफ No.153/86/2006-TPL
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
(टीपीएल डिवीजन)
---
नई दिल्ली, 17 जुलाई, 2006
सेवा में

आयकर की सभी मुख्य आयुक्तों
आयकर की सभी महानिदेशकों

विषय: वित्त अधिनियम, 2006 के माध्यम से खंड 43B के लिए clarificatory संशोधनों को ध्यान में रखते अनुभाग 43B के तहत ब्याज की कटौती के संबंध में स्पष्टीकरण.
 
            आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 43B उसमें दो clarificatory स्पष्टीकरण, अर्थात् डालने वित्त अधिनियम, 2006 के द्वारा संशोधित किया गया था; स्पष्टीकरण -3 सी और स्पष्टीकरण 3D.  स्पष्टीकरण इस तरह के ब्याज 'वास्तव में भुगतान' किया गया है कि अगर किसी भी ऋण या उधार या अग्रिम पर ब्याज के रूप में निर्धारिती द्वारा देय किसी भी राशि के रूप में कटौती की अनुमति दी जाएगी कि स्पष्ट और एक ऋण या उधार या अग्रिम में तब्दील लेकिन किया गया है जो किसी भी ब्याज दोनों वास्तव में भुगतान नहीं किया गया आय की गणना में कटौती के रूप में अनुमति नहीं दी जाएगी.  clarificatory स्पष्टीकरण केवल एक ऋण या उधार में औचित्य ब्याज की कि रूपांतरण दोहराना या अग्रिम 'वास्तविक भुगतान' के लिए राशि नहीं है. 

प्र.20.          स्पष्टीकरण परिवर्तित ब्याज कटौती के रूप में अनुमति दी जाएगी जिस तरीके के बारे में कुछ तिमाहियों से मांग की गई है.

(3)         वित्त विधेयक, 2006 (पृष्ठ तत्संबंधी 3) के प्रावधानों की व्याख्या ज्ञापन में स्पष्ट रूप में, ब्याज ऋण या उधार में परिवर्तित या इस तरह के ब्याज 'वास्तव में भुगतान' किया गया है अगर अग्रिम अनुमति दी जाएगी और एक में तब्दील कर दिया गया है, जो किसी भी ब्याज ऋण या उधार या अग्रिम, आदि, ऋण में अपने रूपांतरण के कारण 'वास्तव में भुगतान' किया गया समझा नहीं की जाएगी  वास्तव में बैंक या वित्तीय संस्था के लिए भुगतान किया जब भी बकाया ब्याज आय की गणना में राजस्व व्यय योग्य कटौती की प्रकृति में हो जाएगा.  इसलिए, परिवर्तित ब्याज, एक ऋण या उधार या अग्रिम में अपने रूपांतरण के मद्देनजर कहा जाता है, भी नाम से, परिवर्तित ब्याज 'वास्तव में भुगतान' है, जिसमें पिछले वर्ष की आय की गणना में कटौती के लिए पात्र होंगे.  वास्तव में मूलधन के पुनर्भुगतान का प्रतिनिधित्व नहीं होगा भुगतान किया जाता है जब भी दूसरे शब्दों में, परिवर्तित ब्याज की राशि का नामकरण परिवर्तित ब्याज की राशि के रूप में कोई फर्क पड़ेगा.  निम्नलिखित रेखांकन आकलन अधिकारी और अनुमति देने के लिए करदाता सक्षम हो जाएगा या ब्याज की वास्तविक भुगतान के कारण, धारा 43B के मामले में कटौती की सही राशि का दावा करने के लिए:
{निर्धारिती का नाम: एम / एस. एबीसी
      31-03-2003 पर बैंक से ऋण लिया: 2 रुपए, 37,81,000 / -
      ब्याज अवैतनिक 31-03-2005 तक: 35, 90,000 / -



इस मामले में में प्रवेश पुनर्गठन व्यवस्था में, 35, 90,000 के ऊपर राशि के बकाया ब्याज मूल ऋण से अलग दिखाया गया है और कोई ब्याज प्रभार्य पर किया गया है जो एक पैसा पाकर ब्याज सावधि ऋण (FITL) में तब्दील कर दिया गया है FITL.  इस परिवर्तित ब्याज (यानी FITL) 01-04-2010 से ग्यारह किश्तों में भुगतान किया जाना है. - प्रत्येक किस्त 3 करोड की राशि 26,364 / करने के लिए बाहर काम किया.  इस मामले में, वास्तव में 3 करोड की FITL की किस्त के भुगतान के खिलाफ भुगतान की गई राशि की सीमा तक कटौती, 26,364 / - यह वास्तव में भुगतान किया जाता है जब खंड 43B तहत प्रासंगिक निर्धारण वर्ष में दी जाएगी.  वास्तव में भुगतान किया है, यदि कोई हो, धारा 43B के तहत स्वतंत्र रूप से स्वीकार्य हो जाएगा - 2 रुपए की मूल प्राचार्य, 37,81,000 / पर ब्याज कि जोड़ने की जरूरत नहीं.

IIनिर्धारिती का नाम: एम / एस. एक्सवायजेड
      फरवरी, 2003 में बैंक से लिया ऋण: Rs. 34.21 लाख
      31-03-2005 तक बकाया ब्याज रू. 10.93 लाख

इस मामले में, रुपये का बकाया ब्याज की राशि से बाहर. 10.93 लाख रुपये. 2.93 लाख में कोई कटौती अनुभाग 43B के तहत अनुमति दी जानी है, जिसके खिलाफ बैंक द्वारा माफ कर दी है.  रुपये की मूल प्राचार्य. 34.21 लाख रुपए की सीमा के साथ एक चल कैश क्रेडिट अकाउंट में बदल जाती है. रुपये के 21.21 लाख और एक कार्यशील पूंजी सावधि ऋण. 13 लाख, 10.25% की दर से ब्याज ले जाने प्रत्येक.   बकाया ब्याज की शेष राशि (Rs.2.93 लाख रुपए की छूट के बाद शेष Rs.8 लाख) (Rs.34.21 लाख की मूल ऋण से अलग है) एक पैसा पाकर ब्याज सावधि ऋण (FITL) में बदल जाता है. रुपये की FITL. 8 लाख कोई रुचि नहीं ले और 2005/01/04 से चार किश्तों में देय है नहीं करता है.  वास्तव में 2 लाख की FITL की किस्त के भुगतान हद तक राशि प्रासंगिक निर्धारण वर्ष में खंड 43B के तहत कटौती के लिए पात्र होंगे. कैश क्रेडिट खाता और वर्किंग कैपिटल सावधि ऋण रनिंग पर ब्याज का भुगतान भी केवल प्रासंगिक निर्धारण वर्ष में वास्तविक भुगतान पर स्वीकार्य होगा.

3 निर्धारिती का नाम: एम / एस. पीक्यूआर
एक शब्द से निर्धारिती द्वारा लिया ऋण
मई ऋण संस्था, 2002: रुपये. 14.95 करोड़ रुपए
ब्याज अप्रैल, 2004 तक भुगतान किया, लेकिन ब्याज की अदायगी में चूक तिमाही में अप्रैल शुरू कर दिया - जून, 2004.                                     

इस मामले में, Rs.14.95 करोड़ रुपए की मूल प्राचार्य 01-04-2008 से शुरू किया गया था पुनर्भुगतान जिनमें से एक आस्थगित योजना के तहत दिया गया था. तिमाही अप्रैल के लिए ब्याज - भुगतान नहीं जब जून, 2004 को एक FITL में परिवर्तित कर दिया गया. FITL पर ब्याज 10.25% की दर से शुल्क लिया जाता है.  अवधि ऋण संस्था द्वारा पीछा लेखा अभ्यास हर तिमाही के लिए, ब्याज प्राप्य एक 'बकाया मूलधन ऋण' में बदल जाती है और ब्याज प्राप्य राशि आय के रूप में आरक्षित है, कि है.  अवधि ऋण संस्था द्वारा इस तरह के ब्याज प्राप्य



हर तिमाही में निर्धारिती द्वारा भुगतान करने की आवश्यकता है और दो घटक होते है - (i) पैसा पाकर ब्याज सावधि ऋण (FITL) का भुगतान और FITL पर (द्वितीय) ब्याज. घटकों तिमाही के लिए FITL अर्थात और हर तिमाही में FITL पर ब्याज प्रासंगिक निर्धारण वर्ष में खंड 43B के तहत वास्तविक भुगतान पर कटौती के रूप में अनुमति दी जाएगी दोनों. एक आस्थगित योजना के तहत है, जो मूल प्राचार्य पर भुगतान किया जाना है कि ब्याज जोड़ने की जरूरत संबंधित आकलन वर्षों में वास्तविक भुगतान पर स्वीकार्य है. 
4निर्धारिती का नाम: एम / एस. एक्सवायजेड
         एक अवधि ऋण संस्था से निर्धारिती द्वारा लिए गए ऋण: 100 करोड़ रुपए
         ब्याज की दर: 11%
         Rs.33 करोड़: तीन साल, यानी, 31-03-2006 तक के लिए बकाया ब्याज

उनके साथ बातचीत के दौरान कुछ बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के पुनर्गठन की व्यवस्था आम तौर पर मूल प्राचार्य के साथ ब्याज के विलय के लिए प्रदान नहीं करते हैं और दोनों अपनी अलग पहचान बनाए रखने के लिए जारी है कि स्पष्ट किया.  हालांकि, वे प्रिंसिपल के साथ ब्याज के विलय के लिए उपलब्ध कराने के एक पुनर्गठन व्यवस्था से इंकार नहीं किया.  प्राचार्य के साथ ब्याज के विलय की संभावना के प्रकाश में, चुकौती किस्त ब्याज के भुगतान के साथ ही प्राचार्य के हिस्से की अदायगी का समावेश होगा.  ऐसी स्थितियों में, ब्याज की वास्तविक भुगतान के कारण कटौती की राशि एक आनुपातिक आधार पर गणना करना होगा.  उदाहरण के लिए, मर्ज किए गए ब्याज और Rs.133crores के प्रिंसिपल की उक्त राशि में से, 20 करोड़ रुपए पहले वर्ष में चुकाया और उसमें शामिल ब्याज की राशि अलग पहचाना नहीं है.  ब्याज की वास्तविक भुगतान के कारण आय की गणना में कटौती की राशि निम्नलिखित तरीके से बाहर काम किया जाएगा:
                                              20x33 4.962 करोड़ =.
                                              133

Rs.4.962 वास्तव में भुगतान 20 करोड़ रुपए के बाहर करोड़ों के रूप में प्रथम वर्ष में 20 करोड़ रुपए की अदायगी के बाहर, Rs.4.962 करोड़ रुपए की कटौती ब्याज घटक का प्रतिनिधित्व करता है, कटौती के रूप में खंड 43B के प्रावधानों के संदर्भ में स्वीकार्य होगी .  मूलधन के पुनर्भुगतान का प्रतिनिधित्व बैलेंस Rs.15.039 करोड़ रुपये आय की गणना में कटौती के रूप में स्वीकार्य नहीं होगा.

एक पुनर्गठन व्यवस्था में जो Rs.33 करोड़ रुपये के ब्याज की राशि 100 करोड़ रुपए की मूल प्राचार्य के साथ विलय कर दिया और 100 करोड़ रुपए का प्रिंसिपल, खाते पर कटौती के बाहर 'भुगतान किश्तों' से अलग से देय नहीं है : ब्याज की वास्तविक भुगतान के तहत ही अनुमति दी जाएगी

Rs.133 करोड़ की ऋण राशि के बाहर अदायगी. निम्नलिखित तीन घटकों होगा -
100 करोड़ रुपए के प्रमुख (क) अदायगी. ... एक्स
(ख) 100 करोड़ रुपए के प्राचार्य पर ब्याज.     ....  वा
         रुपये के ब्याज की (ग) अदायगी.  सीआर 33.         ... Z
                      (वित्त पोषित ब्याज सावधि ऋण में परिवर्तित)   


ब्याज की इन राशियों वास्तव में भुगतान किया जाता है, तो ऊपर व्यवस्था में, वाई और जेड की राशि अनुभाग 43B के तहत कटौती के रूप में स्वीकार्य होगी.  मूलधन के पुनर्भुगतान का प्रतिनिधित्व एक्स की राशि, आय की गणना में कटौती के लिए पात्र नहीं होगा. 
यह पूरी तरह से भुगतान किया जाता है जब तक एक पुनर्गठन व्यवस्था भी, पहले ब्याज के भुगतान के लिए उपलब्ध करा सकता है.  ऐसे मामलों में, वास्तव में भुगतान ब्याज की पूरी राशि, खंड 43B के संदर्भ में कटौती के रूप में अनुमति दी जाएगी.
            
(4)         ऊपर चित्र एक ऋण या उधार या अग्रिम में अपने रूपांतरण के मद्देनजर कहा जाता है, भी नाम से परिवर्तित ब्याज, जो पिछले वर्ष के संबंध में आय की गणना में कटौती के लिए पात्र हो जाएगा कि शो होगा, जिसमें परिवर्तित ब्याज 'वास्तव में भुगतान' है.  ऋणदाता के लिए ऋण लेने के द्वारा ब्याज की 'वास्तविक भुगतान' धारा 36 के प्रावधानों के संदर्भ में राजस्व व्यय का प्रतिनिधित्व करता है (1 क्योंकि दूसरे शब्दों में, FITL, आदि के लिए परिवर्तित ब्याज की राशि का नाम बदलने से कोई फर्क नहीं करना चाहिए ) (ग) और कोई रास्ता नहीं में यह मूलधन के पुनर्भुगतान का प्रतिनिधित्व करता है.

प्र.5.          ऊपर द्वितीय पर देखा के रूप में ब्याज की छूट के मामलों में, कोई कटौती छूट 'वास्तविक भुगतान' का प्रतिनिधित्व नहीं करता है के रूप में आयकर अधिनियम, 1961 के तहत स्वीकार्य है.          

प्र.6.          बैंकों और वित्तीय संस्थानों के अनुसार, उधारदाताओं और उधारकर्ताओं के बीच में प्रवेश चुकौती व्यवस्था / शेड्यूल में असंख्य विविधताओं हो सकता है.  यह है, इसलिए इस संबंध में उधारकर्ताओं और उधारदाताओं के बीच में प्रवेश किया जा सकता है जो व्यवस्था के सभी प्रकार कल्पना करने के लिए संभव नहीं हो सकता.  मौलिक सिद्धांत, हालांकि, एक राशि बैंकों या वित्तीय संस्थानों को देय ब्याज के रूप में निर्धारित किया गया है, ब्याज के नामकरण के बाद किसी भी परिवर्तन पर अनुमति दी जा होगा अनुभाग 43B के संदर्भ में अपने allowability और कटौती को प्रभावित नहीं करेगा कि रहता है अपनी 'वास्तविक भुगतान'.  आकलन अधिकारी, इसलिए, बैंकों या वित्तीय संस्थानों के लिए ब्याज की 'वास्तविक भुगतान' के सबूत के रूप में आदि ऋणदाता बैंक या वित्तीय संस्थान से करदाता द्वारा प्राप्त किया जा निर्धारिती से एक प्रमाण पत्र प्राप्त करने में उचित होगा. 
भवदीय

(डीपी सेमवाल)
निदेशक (टीपीएल-III)
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1         अध्यक्ष, ऊपर अवर सचिव और रैंक के सीबीडीटी में सदस्य और सभी अन्य अधिकारी उपस्थित थे.
प्र.20.          सभी आयकर के मुख्य आयुक्तों और आयकर महानिदेशकों
(3)         सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (आरएसपी और पीआर), मयूर भवन, सामान्य मेलिंग सूची के अनुसार त्रैमासिक टैक्स बुलेटिन में और संचलन के लिए मुद्रण के लिए नई दिल्ली.
(4)         भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (40 प्रतियां)
प्र.5.          संयुक्त सचिव और कानूनी सलाहकार, विधि एवं न्याय, नई दिल्ली.
प्र.6.          आयकर महानिदेशक, अ, नागपुर.

(डीपी सेमवाल)
निदेशक (टीपीएल-III)