आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

14/2006

परिपत्र की तिथि

28/12/2006

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

28/12/2006

परिपत्र: सं 14/2006, 28-12-2006 दिनांकित

परिपत्र

2006 वित्त अधिनियम

वित्त अधिनियम, 2006 - प्रत्यक्ष करों से संबंधित प्रावधानों पर व्याख्यात्मक नोट

परिपत्र सं. 14/2006, 28-12-2006 दिनांक

1 परिचय

1.1 वित्त अधिनियम, 2006 के संसद द्वारा पारित रूप में (इसके बाद अधिनियम के रूप में), 18-4-2006 पर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त की और 2006 के अधिनियम संख्या 21 के रूप में अधिनियमित किया गया है.इस परिपत्र प्रत्यक्ष करों से संबंधित अधिनियम के प्रावधानों के पदार्थ बताते हैं.

प्र.20. वित्त अधिनियम, 2006 के द्वारा किए गए बदलाव

2.1 (बाद में 'अधिनियम' के रूप में संदर्भित) वित्त अधिनियम, 2006 की है, -

(मैं) निर्धारण वर्ष 2006-07 के लिए आयकर की दरें और कर कटौती की और अग्रिम कर वित्तीय वर्ष 2006-07 के दौरान भुगतान किया जाना है किया जाना है, जिसके आधार पर आयकर की दरों में निर्दिष्ट;

(Ii) धारा 2, 10, 10 बी, 13, 14A, 17, 36, 40, 43, 43B, 54EC, 54ED, 80 सी, 80CCC, 80-आइए, 80P, 92C, 115JAA, 115JB, 115 हे, 115R संशोधन , 115T, 115WB, 115WC, 120, 139, 139 क, 140A, 142, 148, 153, 153B, 155, 194A, 199, 201, 203, 203A, 203AA, 206, 206C, 234A, 234B, 234C, 246A, 272A , 272BB, आयकर अधिनियम की 273B, 1961;

(Iii) डाला नए वर्गों 80AC, 90A, 115BBC, 139B, आयकर अधिनियम में 271CA, 1961;

(Iv) में संशोधन नियम 3 और आयकर अधिनियम की चौथी अनुसूची, 1961 के भाग ए के नियम 4;

(V) वित्त (नं. 2) अधिनियम, 2004 की धारा 97 में संशोधन;

संपत्ति कर अधिनियम (vi) में संशोधन धारा 17A, 1957.

(सात) वित्त (नं. 2) अधिनियम, 2004 के अध्याय VII में प्रतिभूति लेनदेन कर की वसूली के लिए दरों में वृद्धि हुई.

(3) दर - संरचना

निर्धारण वर्ष 2006-07 के लिए कर के लिए उत्तरदायी आय के संबंध में आयकर का 3.1 दरें

निर्धारण वर्ष 2006-07 के लिए कर के लिए उत्तरदायी करदाताओं की सभी श्रेणियों की आय के संबंध में 3.1-1, आयकर की दरों अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I में निर्दिष्ट किया गया है. अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I में निर्दिष्ट दरों "एडवांस टैक्स" की गणना के प्रयोजनों के लिए वित्त अधिनियम, 2005 की प्रथम अनुसूची के भाग III में निर्धारित उन के रूप में वही कर रहे हैं, स्रोत पर कर की कटौती से "वेतन" और वित्तीय वर्ष 2005-06 के दौरान कुछ मामलों में देय कर का चार्ज.

मैं निम्नलिखित पैराग्राफ में संकेत कर रहे हैं ने कहा कि भाग में निर्दिष्ट दरों की 3.1-2 मुख्य विशेषताएं: -

3.1-3 व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों या कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के शरीर.

प्रथम अनुसूची के भाग मैं के पैरा एक हर व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों या एक सहकारी समिति, फर्म, स्थानीय प्राधिकारी के अलावा अन्य कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति (के शरीर और के मामले में आयकर की दरों को निर्दिष्ट कंपनी) के रूप में के तहत: -

टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य
दर
 
 
 
व्यक्तियों और कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के (भारत में व्यक्तिगत महिलाओं निवासी और भारत में वरिष्ठ नागरिकों निवासी अलावा अन्य) व्यक्तिगत, एचयूएफ, व्यक्तियों का संघ, शरीर
भारत में और पैंसठ वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति महिला, निवासियों सेंध
65 साल या उससे अधिक की उम्र का है, जो भारत में व्यक्तिगत वरिष्ठ नागरिक, निवासी,
तक 1]00]000
शून्य
 
 
 
 
शून्य
 
र 1,00,001 - रु. 1]35]000
 
 
 
 
ग. 10%
 
शून्य
र 1,35,001 - रु. 1]50]000
 
ग. 10%
 
र 1,50,001 - रु. 1,85,000
 
 
 
 
क. 20%
क. 20%
 
र 1,85,001 - रु. 2]50]000
 
 
क. 20%
रुपये अधिक है. 2]50]000
३० %
३० %
३० %

देय 3.1-4 कर देय कर का दस प्रतिशत की दर से संघ के प्रयोजनों के लिए एक अधिभार से बढ़ाया जाएगा, अध्याय आठवीं ए के तहत छूट से कम हो, हर व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार के मामले में कुल आय से अधिक रुपये होने के व्यक्तियों के व्यक्तियों या शरीर की एसोसिएशन.10,00,000. कोई अधिभार रुपये की आय वाले व्यक्तियों द्वारा देय होगा. 10,00,000 या नीचे. सीमांत राहत रुपये से अधिक आय से अधिक पर, अधिभार सहित, कि आयकर की अतिरिक्त राशि देय सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किया जाएगा. 10,00,000 आय रुपए से अधिक है जिसके द्वारा राशि तक सीमित है. 10,00,000. उदाहरण के लिए, रुपए की कुल आय पर कर और अधिभार की राशि. निर्दिष्ट दरों पर गणना की 10,20,000 रुपये हो गया होता. 2,56,000 रु. 25,600 रुपये तक कुल. 2,81,600. रुपए की कुल आय वाले व्यक्ति की तुलना में किए गए इस गणना के अनुसार अतिरिक्त कर देयता,,. 10,00,000 रुपये है. 31,600. हालांकि, रुपए की कुल आय वाले व्यक्ति की तुलना में अतिरिक्त आय. 10,00,000 रुपये का ही है. 20,000. इसलिए, एक मामूली राहत रुपये की सीमा तक दिया जाता है. इस मामले में 11,600 जिससे अतिरिक्त कर देयता अतिरिक्त आय से अधिक नहीं हो सकता है कि प्रदान करते हैं. इस मामले में कुल कर देयता, इसलिए, रुपए हो जाएगा. 2,70,000 के बजाय रुपये. 2,81,000.

एक कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के मामले में 3.1-5, अधिभार आय के सभी स्तरों पर देय आयकर की दस फीसदी की दर से लगाया जाएगा.

3.1-6 शिक्षा उप - "आयकर पर शिक्षा उपकर" नामक एक अतिरिक्त अधिभार सभी मामलों में, अधिभार के समावेशी अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा रहा है.उदाहरण के लिए, आयकर अभिकलन अगर रुपये है. 1,00,000 और अधिभार रुपये है. 10,000, फिर दो फीसदी की शिक्षा उपकर रुपये पर गणना की जानी है. 1,10,000 रुपये होने के लिए बाहर काम करता है. 2,200. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.

3.1-7 सहकारी समितियां - हर सहकारी समिति के मामले में आयकर की दरों के तहत अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा बी में निर्दिष्ट किया गया है

टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य
दर
15,000 रुपए तक 10]000
ग. 10%
र 10,001 - रुपये. 20]000
क. 20%
रुपये अधिक है. 20]000
३० %

कोई अधिभार लगाया जाएगा. शिक्षा उपकर अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा रहा है.

3.1-8 कंपनियों - हर फर्म के मामले में तीस फीसदी की आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा सी में निर्दिष्ट किया गया है. दस फीसदी की दर से सरचार्ज लगाया जाएगा.शिक्षा उपकर अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा रहा है.

3.1-9 स्थानीय अधिकारियों - हर स्थानीय प्राधिकारी के मामले में आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा डी फीसदी तीस में निर्दिष्ट किया गया है. कोई अधिभार लगाया जाएगा.शिक्षा उपकर अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा रहा है.

3.1-10 कंपनियों - एक कंपनी के मामले में आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा ई में निर्दिष्ट किया गया है. एक घरेलू कंपनी के मामले में आयकर की दर से कुल आय का तीस फीसदी है.अभिकलन कर दस प्रतिशत का अधिभार से बढ़ाया जाएगा. शिक्षा उपकर अधिभार के समावेशी अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा रहा है.

एक घरेलू कंपनी के अलावा किसी अन्य कंपनी के मामले में, रॉयल्टी 31-3-1961 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से प्राप्त है, लेकिन 1976/01/04 पचास प्रतिशत पर कर लगाया जाता है पहले. इसी तरह, 29-2-1964 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से इस तरह कंपनी द्वारा प्राप्त तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क है, लेकिन 1976/01/04 से पहले, पचास प्रतिशत पर कर लगाया जाता है. इस तरह कंपनी की कुल आय के संतुलन पर, कर की दर चालीस फीसदी है. अभिकलन कर दो और एक फीसदी से डेढ़ की एक अधिभार से बढ़ाया जाएगा. शिक्षा उपकर अधिभार के समावेशी अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा रहा है.

वित्तीय वर्ष 2006-07 के दौरान निश्चित आय से स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए 3.2 दरें

वर्गों 193, 194, 194A, 194B, 194BB, 194D और आयकर अधिनियम के 195 के प्रावधानों के तहत, कर, बल में दरों पर आय की कटौती के लिए दरों में कटौती की जानी है जिसमें हर मामले में 3.2-1 वित्तीय वर्ष 2006-07 के दौरान स्रोत पर कर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग द्वितीय में निर्दिष्ट किया गया है.

एक अनिवासी (एक कंपनी होने के नाते नहीं) के मामले में 3.2-2, तकनीकी सेवाओं से रॉयल्टी या फीस के माध्यम से आय से वित्तीय वर्ष 2006-07 के दौरान स्रोत पर कर की कटौती की दर सरकार या एक से प्राप्त 31-5-1997 लेकिन उसके बाद 2005/01/06 से पहले सरकार या भारतीय चिंता के साथ यह द्वारा प्रवेश के लिए एक समझौते के अनुसरण में भारतीय चिंता फीसदी और 1 के बाद किए एक समझौते के अनुसरण में बीस होगी - 6-2005, 10 फीसदी हो जाएगी.सभी अनिवासियों के मामले में, धारा 111A में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजीगत लाभ के रास्ते से आय से वित्तीय वर्ष 2006-07 के दौरान स्रोत पर कर की कटौती की दर दस प्रतिशत हो जाएगी.

इस भाग पर लागू होता है जो अन्य सभी मामलों में 3.2-3; वित्तीय वर्ष 2006-07 के दौरान स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए दरों में वित्त अधिनियम, 2005 की प्रथम अनुसूची के भाग द्वितीय में निर्दिष्ट उन लोगों के रूप में ही बने रहेंगे.

इस प्रकार के रूप में प्रत्येक मामले में स्रोत पर कर काटा 3.2-4 कर संघ के प्रयोजनों के लिए एक अधिभार की वृद्धि की जाएगी:

जहां आय या भुगतान या भुगतान किए जाने की संभावना है ऐसी आय की कुल और इस तरह के टैक्स का दस प्रतिशत की दर से व्यक्तियों के व्यक्तियों और शरीर के हर व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, एसोसिएशन,,, के मामले में (मैं) कटौती के अधीन रुपये से अधिक है.10,00,000;

(Ii) इस तरह के कर का दस प्रतिशत की दर से हर फर्म, कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति और घरेलू कंपनी के मामले में;

(Iii) दो की दर और इस तरह के टैक्स का एक फीसदी से डेढ़ बजे एक घरेलू कंपनी के अलावा और हर कंपनी के मामले में.

3.2-5 कोई अधिभार एक सहकारी समिति और स्थानीय प्राधिकारी के मामले में कटौती की आयकर की राशि पर लगाया जा रहा है.

3.2-6 शिक्षा उप - "आयकर पर शिक्षा उपकर" नामक एक अतिरिक्त अधिभार यदि कोई हो, अधिभार के समावेशी कर कटौती की राशि, पर सभी मामलों में, दो प्रतिशत की दर से लगाया जा रहा है.उदाहरण के लिए, आयकर अभिकलन अगर रुपये है. 1,00,000 और अधिभार रुपये है. 10,000, फिर दो फीसदी की शिक्षा उपकर रुपये पर गणना की जानी है. 1,10,000 रुपये होने के लिए बाहर काम करता है. 2,200.

"वेतन", वित्तीय वर्ष 2006-07 के दौरान "एडवांस टैक्स" और कुछ मामलों में आयकर का चार्ज की गणना से स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए 3.3 दरें.

2006-07 और भी करदाताओं की सभी श्रेणियों के मामले में उस वर्ष के दौरान देय "एडवांस टैक्स" की गणना के लिए वित्तीय वर्ष के दौरान "वेतन" से स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए 3.3-1 दरें भाग में निर्दिष्ट किया गया है अधिनियम की प्रथम अनुसूची के तृतीय. दरों निर्धारण वर्ष 2006-07 के लिए अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग मैं में निर्धारित उन के रूप में वही कर रहे हैं.ये दरें भी त्वरित आकलन किया जाना है जहां मामलों में वर्तमान आय पर वित्तीय वर्ष 2006-07 के दौरान आयकर चार्ज करने के लिए लागू कर रहे हैं, गैर निवासियों को भारत में उत्पन्न होने वाली शिपिंग लाभ के जैसे, अनंतिम मूल्यांकन, व्यक्तियों के आकलन के भारत छोड़ने अच्छे के लिए कि वित्तीय वर्ष के दौरान, कर, या इस प्रकार के रूप दरों रहे हैं कम अवधि, आदि के लिए गठित निकायों के आकलन से बचने के लिए संपत्ति के हस्तांतरण की संभावना है, जो व्यक्ति के आकलन:

3.3-2 व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों के शरीर या कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति

प्रथम अनुसूची के भाग III के पैरा एक व्यक्ति के हर व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, संघ के मामले में आयकर की दरों में निर्दिष्ट करता है, व्यक्तियों के शरीर या स्थानीय एक सहकारी समिति, फर्म के अलावा अन्य कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति (, प्राधिकरण और कंपनी). के रूप में निम्नानुसार दरें इस प्रकार हैं: -

टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य
दर
 
 
 
व्यक्तियों और कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के (भारत में व्यक्तिगत महिलाओं निवासी और भारत में वरिष्ठ नागरिकों निवासी अलावा अन्य) व्यक्तिगत, एचयूएफ, व्यक्तियों का संघ, शरीर
व्यक्ति महिला, भारत में निवासी और पैंसठ वर्ष की आयु से नीचे
65 साल या उससे अधिक की उम्र का है, जो भारत में व्यक्तिगत वरिष्ठ नागरिक, निवासी,
15,000 रुपए तक 1]00]000
शून्य
 
 
 
 
शून्य
 
र 1,00,001 - रु. 1]35]000
ग. 10%
 
शून्य
र 1,35,001 - रु. 1]50]000
ग. 10%
 
र 1,50,001 - रु. 1,85,000
क. 20%
क. 20%
 
र 1,85,001 - रु. 2]50]000
क. 20%
रुपये अधिक है. 2]50]000
३० %
३० %
३० %

देय 3.3-3 कर देय कर का दस प्रतिशत की दर से संघ के प्रयोजनों के लिए एक अधिभार से बढ़ाया जाएगा, अध्याय आठवीं ए के तहत छूट से कम हो, हर व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार के मामले में कुल आय से अधिक रुपये होने के व्यक्तियों के व्यक्तियों या शरीर की एसोसिएशन.10,00,000. कोई अधिभार रुपये की आय वाले व्यक्तियों द्वारा देय होगा. 10,00,000 या नीचे. पैरा 3.1.4 में सचित्र, सीमांत राहत रुपये से अधिक आय से अधिक पर, अधिभार सहित, कि आयकर की अतिरिक्त राशि देय सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किया जाएगा. 10,00,000 आय रुपए से अधिक है जिसके द्वारा राशि तक सीमित है. 10,00,000.

कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के मामले में 3.3-4, अधिभार आय के सभी स्तरों पर देय आयकर की दस फीसदी की दर से लगाया जाएगा.

3.3-5 शिक्षा उप - "आयकर पर शिक्षा उपकर" नामक एक अतिरिक्त अधिभार सभी मामलों में, अधिभार के समावेशी अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा रहा है.शिक्षा उपकर की गणना के लिए संख्यात्मक चित्रण पैरा 3.1-6 में दी गई है. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.

3.3-6 सहकारी समितियां - हर सहकारी समिति के मामले में आयकर की दरें अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद बी में निर्दिष्ट किया गया है. दरों अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग मैं की इसी पैराग्राफ में निर्दिष्ट है कि जैसे ही हैं और इस प्रकार है, के रूप में कर रहे हैं

टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य
दर
15,000 रुपए तक 10]000
ग. 10%
र 10,001 - रुपये. 20]000
क. 20%
रुपये अधिक है. 20]000
३० %

कोई अधिभार लगाया जाएगा. शिक्षा उपकर दो फीसदी की दर से लगाया जा रहा है.

3.3-7 कंपनियों - हर फर्म के मामले में, प्रतिशत तीस से आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद सी में निर्दिष्ट किया गया है. दस फीसदी की दर से सरचार्ज लगाया जारी करेगा.शिक्षा उपकर दो फीसदी की दर से लगाया जा रहा है.

3.3-8 स्थानीय अधिकारियों - हर स्थानीय प्राधिकारी के मामले में आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद डी में तीस प्रतिशत के रूप में निर्दिष्ट किया गया है. यह दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग मैं की इसी पैराग्राफ में निर्दिष्ट के रूप में ही है. कोई अधिभार लगाया जाएगा.शिक्षा उपकर दो फीसदी की दर से लगाया जा रहा है.

3.3-9 कंपनियों - एक कंपनी के मामले में आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद ई में निर्दिष्ट किया गया है. इन दरों अधिनियम की पहली अनुसूची के भाग मैं की इसी पैराग्राफ में निर्दिष्ट और आकलन वर्ष 2006-07 के लिए निर्दिष्ट के रूप में एक ही रहेगा उन के रूप में वही कर रहे हैं.

एक घरेलू कंपनी के मामले में आयकर की दर से कुल आय का तीस फीसदी है. अभिकलन कर दस प्रतिशत का अधिभार से बढ़ाया जाएगा. शिक्षा उपकर अधिभार के समावेशी अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा रहा है.

एक घरेलू कंपनी के अलावा किसी अन्य कंपनी के मामले में, रायल्टी 31-3-1961 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से प्राप्त है, लेकिन 1976/01/04 पचास फीसदी की दर से कर लगाया जाता है पहले. इसी तरह, 29-2-1964 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से इस तरह कंपनी द्वारा प्राप्त तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क है, लेकिन 1976/01/04 से पहले, पचास प्रतिशत पर कर लगाया जाता है के मामले में. इस तरह कंपनी की कुल आय के संतुलन पर, कर की दर चालीस फीसदी है. अभिकलन कर दो और एक फीसदी से डेढ़ की एक अधिभार से बढ़ाया जाएगा. शिक्षा उपकर अधिभार के समावेशी अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा रहा है.

[धारा 2 और प्रथम अनुसूची]

(4) विस्तारित विमान लीज किराया पर छूट

4.1 धारा 10 (15 ए) के तहत, एक भारतीय कंपनी द्वारा किए गए किसी भी भुगतान के द्वारा अनुमोदित एक समझौते के तहत एक विदेशी राज्य की सरकार या एक विदेशी उद्यम से पट्टे पर एक विमान या एक विमान इंजन प्राप्त करने के लिए विमान का संचालन के कारोबार में लगे केन्द्र सरकार छूट प्राप्त है.यह छूट भुगतान किया जाता है, जिसके तहत समझौते 31-3-2006 को या उससे पहले में प्रवेश किया है कि हालत के लिए उपलब्ध विषय है.

एक समझौते पर में प्रवेश किया तहत भुगतान है जहां 4.2 इसके अलावा, धारा 10 के खंड (6BB) के तहत, एक विदेशी राज्य की सरकार या ऐसे पट्टा भुगतान के संबंध में एक विदेशी उद्यम की ओर से भारतीय कंपनी द्वारा देय किसी कर छूट प्राप्त है या 2006/01/04 के बाद.

पर या 31-3-2007 से पहले में प्रवेश कर समझौतों के अनुसरण में की गई पट्टा भुगतान के लिए उपर्युक्त छूट प्रदान करने के लिए जारी रखने के लिए इतनी के रूप में धारा 10 की 4.3 खण्ड (15 ए) में संशोधन किया गया है.समन्वित रूप से, धारा 10 के खंड (6BB) पर या 2007/01/04 के बाद में प्रवेश कर समझौतों के अनुसरण में की गई लीज भुगतान के संबंध में टैक्स के ऊपर कमाई करने वाली छूट का लाभ प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है.

4.4 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 4]

प्र.5. विधायकों के निर्वाचन क्षेत्र भत्ते की छूट

धारा 10 (17) के प्रावधानों के तहत 5.1, निम्न आय आयकर से मुक्त है:

(मैं) एक संसद सदस्य या विधान सभा या संसद या राज्य विधान मंडल के किसी भी समिति के एक सदस्य के सदस्य के द्वारा प्राप्त दैनिक भत्ता.

(Ii) किसी निर्वाचन क्षेत्र भत्ता संसद के एक सदस्य द्वारा प्राप्त किया.

(Iii) रुपए तक अन्य सभी अधिसूचित भत्ते. एक विधान सभा के एक सदस्य या राज्य विधानमंडल के किसी भी समिति के एक सदस्य द्वारा प्राप्त कुल में प्रति माह 2,000.

5.2 सांसदों और विधायकों द्वारा प्राप्त भत्ते की कर उपचार में एकरूपता लाने के लिए एक दृश्य के साथ, उप खंड (iii) खंड की धारा 10 (17) प्रदान करने के लिए प्रतिस्थापित किया गया है कि एक राज्य विधान के किसी भी सदस्य द्वारा प्राप्त किसी भी निर्वाचन क्षेत्र भत्ता किसी भी अधिनियम या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए नियमों के तहत विधान सभा कर से मुक्त किया जाएगा.तदनुसार, संसद सदस्यों के मामले के रूप में, अन्य सभी भत्ते, दैनिक भत्ता और संसदीय क्षेत्र भत्ता के अलावा, एक राज्य विधानमंडल के एक सदस्य द्वारा प्राप्त कर योग्य होगा.

5.3 इस संशोधन के बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से प्रभावी होगा.

[धारा 4]

प्र.6. कुछ धर्मार्थ और धार्मिक ट्रस्टों और संस्थानों और कुछ शैक्षिक और चिकित्सा संस्थानों के लिए छूट की अनुमति / बने रहने के लिए एक समय सीमा प्रदान करना.

धारा 10 (23 सी) के प्रावधानों के तहत 6.1 (चतुर्थ), (वि), (vi) और () के माध्यम से, एक फंड, ट्रस्ट या संस्था या विश्वविद्यालय या अन्य शिक्षण संस्थान या अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था के लिए एक आवेदन पत्र बनाने के लिए आवश्यक है विहित प्राधिकारी को कहा खंड के तहत छूट प्रदान करने के लिए.

6.2 एक नया प्रावधान पर या 2006/01/06 के बाद किए गए इस तरह के आवेदन को तुरंत छूट की मांग की है, जिसमें से निर्धारण वर्ष पिछले वित्त वर्ष के दौरान किसी भी समय पर की जाएगी कि प्रदान करने के लिए धारा 10 (23 सी) में सम्मिलित किया गया है.

6.3 प्रयोज्यता - निर्धारण वर्ष बाद 2007-08.

[धारा 4]

प्र.7.        निवेशक संरक्षण कोष की निश्चित आय के लिए छूट का हटाया

7.1 धारा 10 (23EA) के प्रावधानों के तहत एक निवेशक संरक्षण कोष के किसी भी आय या तो संयुक्त रूप से या अलग से, भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा स्थापित और सरकारी राजपत्र में केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित आयकर से छूट प्राप्त है.

7.2 अनुभाग मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों से प्राप्त योगदान के रास्ते और सदस्यों द्वारा इस तरह के निवेशक संरक्षण कोष के किसी भी आय क्या है, अकेले, कर मुक्त हो जाएगा प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है.फंड की अन्य सभी आय कर योग्य होगा.

7.3 प्रयोज्यता - निर्धारण वर्ष बाद 2007-08.

[धारा 4]

8 धारा 10 के तहत बुनियादी ढांचे और अन्य परियोजनाओं में निवेश से होने वाली आय की छूट का हटाया (23g)

धारा 10 (23g), (धारा 115 हे में निर्दिष्ट लाभांश के अलावा अन्य) लाभांश की तरफ से किसी भी आय, ब्याज या एक बुनियादी सुविधाओं कैपिटल फंड के लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ के प्रावधानों के तहत 8.1 या एक बुनियादी सुविधाओं पूंजी कंपनी या एक सह ऑपरेटिव एक अनुमोदित पात्र कारोबार में लगे किसी भी उद्यम या उपक्रम में शेयरों या लंबी अवधि के लिए वित्त के वैसे, 1998/1/6 को या उसके बाद किए गए निवेश से बैंक, कर से छूट प्राप्त है.पात्र व्यापार धारा 80-IA में निर्दिष्ट हैं (4), धारा 80 आईएबी (3), एक आवासीय परियोजना धारा 80 आईबी (10), एक होटल परियोजना या एक अस्पताल परियोजना में करने के लिए भेजा.

8.2 धारा 10 (23g) किसी भी पात्र के कारोबार में मौजूदा रूप में अच्छी तरह से भविष्य के निवेश से आय कर योग्य होगा, जिनमें से एक परिणाम के रूप में, अधिनियम से हटा दिया गया है.

8.3 परिणामी संशोधन धारा 10 (23g) के लिए संदर्भ चूकना धारा 115 हे में बनाया गया है.

8.4 प्रयोज्यता - निर्धारण वर्ष बाद 2007-08.

[धारा 4 और 25]

9 कुछ निकायों या अधिकारियों की निर्दिष्ट आय की छूट

9.1 कुछ निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले निश्चित अधिसूचित निकायों या अधिकारियों छूट के लिए एक दृश्य के साथ, एक नया खंड (42) अधिनियम की धारा 10 में सम्मिलित किया गया है. इस खंड दो या अधिक देशों या द्वारा हस्ताक्षरित एक सम्मेलन के साथ केन्द्र सरकार द्वारा प्रवेश, स्थापित गठित या एक संधि या समझौते के तहत नियुक्त किया गया है जो एक अधिसूचित गैर लाभ शरीर या अधिकार के लिए उत्पन्न होने वाले किसी भी निर्दिष्ट आय को कर छूट के लिए प्रदान करता है केन्द्र सरकार.यह भी निर्दिष्ट आय शरीर या अधिकार के लिए उत्पन्न होने वाली ऐसी आय होगी कि उसमें एक विवरण के माध्यम से स्पष्ट किया गया है, जो की प्रकृति और सीमा केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित है.

9.2 यह संशोधन 2006/01/04 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता है और आकलन वर्ष 2006-07 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होती है.

[धारा 4]

10 कुछ कटौती का लाभ वापसी निर्धारित समय सीमा के भीतर दाखिल नहीं किया गया है जिन मामलों में अनुमति दी जाए नहीं

10.1 धारा 139 (1) नियत तारीख से आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए हर निर्धारिती पर एक दायित्व डाले.प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में (1) के खंड की 10 बी डाला गया है उपधारा के लिए उनकी आय, एक परन्तुक (चौथा परंतुक) से खंड 10 बी के तहत कटौती के लिए हकदार हैं जो करदाता द्वारा इस संबंध में अनुपालन लागू करने की दृष्टि से कि कोई खंड 10 बी के तहत कटौती धारा 139 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट नियत तारीख को या उससे पहले उसकी आय का रिटर्न प्रस्तुत नहीं करता है, जो एक निर्धारिती की अनुमति दी जाएगी. इसी तरह, उनकी आय से धारा 80-आइए या धारा 80-आईएबी या धारा 80 आईबी या धारा 80-आईसी के तहत कटौती के लिए हकदार हैं जो करदाता द्वारा नियत तिथि तक आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए अनुपालन लागू करने की दृष्टि से धारा 80-आइए या धारा 80-आईएबी या धारा 80 आईबी या धारा 80-आईसी के तहत कोई कटौती उसकी आय का रिटर्न प्रस्तुत नहीं करता है, जो एक निर्धारिती की अनुमति दी जाएगी प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में, एक नई धारा 80AC सम्मिलित किया गया है धारा 139 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट नियत तारीख को या उससे पहले.

10.2 यह संशोधन 2006/01/04 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता है और आकलन वर्ष 2006-07 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होती है.

[5 वर्गों और 15]

प्र।11. आय छूट देने के संबंध में व्यय आवंटन के लिए विधि

आयकर अधिनियम, 1961 की 11.1 धारा 14A, उक्त अधिनियम के अध्याय-IV के तहत कुल आय की गणना के प्रयोजनों के लिए, कोई कटौती नहीं करता है जो आय के संबंध में निर्धारिती द्वारा किए गए व्यय के संबंध में अनुमति दी जाएगी कि प्रदान करता है आयकर अधिनियम के तहत कुल आय का हिस्सा नहीं. अनुभाग 14A के मौजूदा प्रावधानों में, तथापि, जो आय के संबंध में किए गए व्यय कंप्यूटिंग की कोई विधि कुल आय के हिस्से के लिए प्रदान की गई है फार्म नहीं करता है.नतीजतन, इस तरह के व्यय का निर्धारण करने की विधि पर करदाताओं और विभाग के बीच काफी विवाद है.

ऊपर से देखने में 11.2, यह ऐसी आय के संबंध में किए गए व्यय की राशि का निर्धारण करने के लिए मूल्यांकन अधिकारी के लिए अनिवार्य होगा कि प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में (2) धारा 14A में सम्मिलित किया गया है एक नई उपधारा जो फार्म नहीं करता के रूप में इस तरह के विधि के अनुसार कुल आय का हिस्सा निर्धारित किया जा सकता है., निर्धारिती के खातों को ध्यान में रखते हुए, वह कुल फार्म का हिस्सा नहीं है जो आय के संबंध में व्यय के संबंध में निर्धारिती के दावे की सत्यता से संतुष्ट नहीं है हालांकि, अगर निर्धारण अधिकारी निर्धारित विधि का पालन करेगा आय. उप - धारा के प्रावधान (2), भी एक निर्धारिती कोई व्यय कुल आय का हिस्सा नहीं है जो आय के संबंध में उसके द्वारा किए गए किया गया है का दावा है कि जहां एक मामले के संबंध में लागू होगा.

11.3 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 7]

प्र.12.     स्वास्थ्य बीमा नियोक्ता द्वारा भुगतान प्रीमियम और कर्मचारियों के हाथों में इस तरह के भुगतान की छूट की स्थिति की कटौती से संबंधित प्रावधानों को युक्तिसंगत

कारण या भुगतान या नियोक्ता द्वारा एक कर्मचारी के लिए अनुमति दी 12.1 कोई वेतन सिर 'वेतन' के तहत कर के दायरे में है.शब्द 'वेतन' के एवज में या वेतन के अलावा मजदूरी, पेंशन, अनुलाभ या लाभ भी शामिल है, जो अन्य बातों के साथ धारा 17 में परिभाषित किया गया है.हालांकि, खंड (iii) की धारा 17 के खंड (2) के परन्तुक के, दस्तूरी के दायरे से, इस तरह के एक कर्मचारी के स्वास्थ्य पर एक बीमा लागू करने के लिए या बल में रखने के लिए एक नियोक्ता द्वारा भुगतान किसी भी प्रीमियम छूट, यह प्रदान की धारा 36 के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित योजना के अनुसार है (1) (बी).धारा 36 (1) (आईबी) सामान्य बीमा कारोबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 के तहत साधारण बीमा निगम द्वारा तैयार किए और केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित योजना को दर्शाता है.

धारा 17 के खंड (2) के परन्तुक के 12.2 खण्ड (चतुर्थ) इसी कर्मचारियों का चिकित्सा बीमा प्रीमियम की प्रतिपूर्ति यह धारा 80 डी के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित योजना के अनुसार है प्रदान की छूट. धारा 80 डी, वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा यथा संशोधित, योजना सामान्य बीमा कारोबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 या यह किसी भी द्वारा तैयार योजना के अनुसार किया जाना चाहिए तहत साधारण बीमा निगम द्वारा तैयार एक योजना या तो होना चाहिए कि प्रदान करता है बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 के तहत बीमा नियामक विकास प्राधिकरण ने मंजूरी दे दी है, जो अन्य बीमा कंपनी.

12.3 धारा 36 (1) (बी) एक नियोक्ता बल में एक बीमा रखने के लिए उसके द्वारा भुगतान चेक द्वारा किसी भी प्रीमियम की राशि के संबंध में अपने मुनाफे और व्यवसाय या पेशे से लाभ की गणना में कटौती के हकदार है कि प्रदान करता है अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर.हालांकि, कटौती बीमा भारतीय साधारण बीमा निगम द्वारा तैयार किए और इस उद्देश्य के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित योजना के अनुसार तभी उपलब्ध है.

भी से चेक द्वारा भुगतान किसी भी प्रीमियम की राशि की कटौती के लिए प्रदान करने के लिए धारा 36 के प्रावधानों संरेखित करने की दृष्टि से 12.4 (1) (बी) धारा 80 डी के लोगों के साथ कहा, खंड (आईबी) प्रतिस्थापित किया गया है निर्धारिती, एक नियोक्ता के रूप में, बल में किसी अन्य बीमा कंपनी द्वारा तैयार किए और बीमा की धारा 3 की उपधारा (1) के तहत स्थापित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित एक योजना के तहत अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर एक बीमा रखने के लिए विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999.

प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में 12.5 इसके अलावा, एक युक्तिकरण के उपाय के रूप में, खंड (iii) और (iv) की धारा 17 के खंड (2) के परन्तुक के प्रावधानों में संशोधन किया गया है कि नियोक्ता या प्रीमियम के किसी भी प्रतिपूर्ति द्वारा भुगतान किसी भी प्रीमियम बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित अन्य बीमा कंपनियों की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के लिए कर्मचारियों द्वारा भुगतान किया, यह भी अनुलाभ के दायरे से मुक्त किया जाएगा.

12.6 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 8 और 9]

प्र.13. बुनियादी सुविधाओं पूंजी कंपनी, बुनियादी ढांचे कैपिटल फंड और बुनियादी ढांचे की सुविधा की परिभाषा

आयकर अधिनियम, बुनियादी ढांचा, पूंजी कंपनी और बुनियादी ढांचे कैपिटल फंड के मौजूदा प्रावधानों के तहत 13.1 धारा 10 के खंड (23g) में परिभाषित किया गया है.इसके अलावा, इस परिभाषा वर्गों 80-आइए और 80 आईबी के संदर्भ में भी है. "बुनियादी सुविधाओं पूंजी कंपनी" और धारा 10 के खंड में 'मौजूदा बुनियादी ढांचे कैपिटल फंड' (23g) की परिभाषा के विभिन्न अन्य प्रावधानों में आयकर अधिनियम में भेजा गया है.धारा 10, आयकर अधिनियम की धारा 2 के खंड (23g) की चूक को देखते हुए बुनियादी ढांचे पूंजी कंपनी और बुनियादी ढांचे कैपिटल फंड की सामान्य परिभाषा के लिए उपलब्ध कराने के लिए खंड (26A) और (26B) डालने से संशोधन किया गया है.

13.2 ये संशोधन 2006/01/04 से पूर्वव्यापी प्रभाव ले और आकलन वर्ष 2006-07 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

13.3 इसके अलावा, आयकर अधिनियम की धारा 36 की उप - धारा (1) के खंड की व्याख्या (आठ) के खंड (घ) के प्रयोजनों के लिए धारा 10, बुनियादी ढांचे की सुविधा के खंड (23g) की चूक को ध्यान में रखते मेरा मतलब है, को परिभाषित किया गया है -

(मैं) एक बुनियादी सुविधाओं सुविधा उपधारा के खंड के लिए स्पष्टीकरण (मैं) में परिभाषित के रूप में (4) धारा 80-आइए, या में इस संबंध में बोर्ड द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है के रूप में एक समान प्रकृति के किसी अन्य सार्वजनिक सुविधा की सरकारी राजपत्र और जो विहित की शर्तों को पूरा;

(Ii) खंड में निर्दिष्ट एक उपक्रम (द्वितीय) या खंड (iii) या खंड (चतुर्थ) की उपधारा (4) धारा 80-IA की; और

(Iii) एक उपक्रम धारा 80 आईबी की उप - धारा (10) में निर्दिष्ट.

13.4 यह संशोधन 2007/01/04 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2007-08 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[धारा 3, 4 और 9]

उप - धारा (1) धारा 36 के खंड (आठ) को स्पष्टीकरण के खंड (घ) के प्रावधानों के अनुसार "बुनियादी ढांचे की सुविधा 'के रूप में अधिसूचना के लिए पात्र होने के लिए एक सार्वजनिक सुविधा के द्वारा पूरा किया जाना स्थितियां निर्धारित 13.5 अधिसूचना ख़बरदार जारी किया गया है अतः 1152 (ई) नियम 6ABAA आयकर नियम, 1962 में सम्मिलित किया गया है 20-7-2006 के माध्यम से जो दिनांकित.एक अन्य अधिसूचना ख़बरदार द्वारा ऐसा 1153 (ई) 20-7-2006 कुछ सार्वजनिक सुविधाएं भी "बुनियादी सुविधा" के रूप में निर्दिष्ट किया गया है दिनांकित.

प्र.14. 'डेरिवेटिव' की परिभाषा के लिए संदर्भ

धारा 43, एक मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में किए गए डेरिवेटिव में ट्रेडिंग के संबंध में पात्र लेन - देन के खंड (5) के मौजूदा प्रावधानों के तहत 14.1 एक सट्टा लेन - देन नहीं समझा नहीं है.डेरिवेटिव की परिभाषा पहले प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 की धारा 2 के खंड (एए) में भेजा गया था.प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 के लिए जनवरी, 2005 में एक संशोधन के माध्यम से, उक्त खंड (एए) खंड (एसी) के रूप में फिर से लिखित था.तदनुसार, 'व्युत्पन्न' शब्द की परिभाषा के संदर्भ में धारा 43 में खंड (5) फिर से लिखित दिया गया है.

14.2 यह संशोधन 2006/01/04 से पूर्वव्यापी प्रभाव ले जाएगा.

[धारा 11]

प्र.15.     स्वीकार्य नहीं भारत के बाहर अर्जित आय पर करों का भुगतान के खिलाफ आय की गणना में कटौती

(क) खंड 40 का, किसी भी राशि किसी भी व्यवसाय या पेशे के लाभ या लाभ पर लगाया या के अनुपात में मूल्यांकन किसी भी कीमत या कर के खाते पर भुगतान (द्वितीय) खंड के उपखंड में निहित मौजूदा प्रावधानों के तहत 15.1, या फिर किसी भी तरह के लाभ और लाभ (इसके बाद आयकर), के आधार पर, आय की गणना में कटौती के रूप में अनुमति नहीं है.भारत के बाहर का भुगतान किसी भी तरह के कर भी आय की गणना में कटौती के रूप में स्वीकार्य नहीं है. हालांकि भारत के बाहर का भुगतान इस तरह के कर मामला हो सकता है धारा 90 के प्रावधानों या,, धारा 91 के अनुसार व्यक्ति की वैश्विक आय पर भारत में देय टैक्स के खिलाफ ऋण के लिए पात्र है.

15.2 संदेह एक विदेशी देश में भुगतान आय कर लाभ और व्यापार या पेशे से लाभ की गणना में कटौती के लिए पात्र है या नहीं व्यक्त की गई है.इस संबंध में न्यायिक राय सरकार के पक्ष में निर्णय की भारी संख्या के साथ विभाजित है. फिर भी, कुछ निर्धारिती मुनाफे और व्यवसाय या पेशे से लाभ की गणना में कटौती के रूप में और अपने वैश्विक आय पर भारत में देय टैक्स के खिलाफ ऋण के रूप में, विदेशी देश में भुगतान दोनों यानी आयकर का दावा करने के लिए जारी है.कुछ करदाताओं ने दावा किया है इस दोहरे लाभ विधायी मंशा के खिलाफ है.

न्यायिक संघर्ष को समाप्त करने की दृष्टि से 15.3, स्पष्टीकरण 1 उपखंड (ii) खंड (क) आयकर अधिनियम की धारा 40 की जिससे स्पष्ट करने के लिए डाला गया है कि भारत के बाहर भुगतान किया है और कर की राहत के लिए पात्र किसी भी राशि धारा 91 के तहत देय आयकर से धारा 90 या कटौती के तहत स्वीकार्य नहीं है, और आयकर अधिनियम की धारा 40 के तहत कटौती के रूप में, स्वीकार्य नहीं किया गया है माना जाता है. करदाताओं, हालांकि, धारा 90 के प्रावधानों, या जैसा भी मामला हो, धारा 91 के अनुसार एक विदेशी देश में भुगतान आयकर के संबंध में टैक्स क्रेडिट के लिए पात्र होने के लिए जारी रहेगा.

15.4 यह संशोधन प्रकृति में clarificatory है और 2006/01/04 पर आयकर अधिनियम में डाला जाता है.

15.5 एक और स्पष्टीकरण भारत के बाहर भुगतान किया है और हाल में डाला अनुभाग 90A के तहत टैक्स की राहत के लिए पात्र किसी भी राशि के मुनाफे और के लाभ की गणना में कटौती के रूप में अनुमति नहीं दी जाएगी कि उपलब्ध कराने के स्पष्टीकरण के रूप में 2 aforementioned खंड (द्वितीय) में सम्मिलित किया गया है व्यवसाय या पेशे.

15.6 यह संशोधन 2006/01/06 से प्रभावी होगा.

[धारा 10]

प्र.16. ब्याज खंड 43B के तहत कटौती के लिए पात्र नहीं 'वास्तव में भुगतान नहीं

ब्याज के रूप में देय राशि वास्तव में अगर खंड 43B, उस खंड में निर्दिष्ट किसी ऋण या उधार पर ब्याज के रूप में निर्धारिती द्वारा देय किसी भी राशि के खंड (घ) में निहित मौजूदा प्रावधानों के तहत 16.1 आय की गणना में कटौती के रूप में अनुमति दी है निर्धारिती द्वारा भुगतान किया.

16.2 यह निश्चित निर्धारिती इस तरह के रूपांतरण ब्याज दायित्व और, के एक रचनात्मक निर्वहन था कि जमीन पर एक ताजा ऋण में एक मौजूदा ऋण पर देय ब्याज के रूपांतरण के कारण खंड 43B के तहत कटौती का दावा कर रहे थे कि सूचना के लिए आ गया है इसलिए, वास्तविक की राशि भुगतान.एक ताजा ऋण में ब्याज के रूपांतरण के खिलाफ कटौती का दावा अनुभाग 43B के प्रावधानों के दुरुपयोग का मामला है. एक नया स्पष्टीकरण -3 सी, इसलिए, किसी भी ऋण या उधार पर ब्याज के रूप में निर्धारिती द्वारा देय किसी भी राशि, खंड 43B के खंड (घ) में निर्दिष्ट है, तो एक ऋण या उधार में रुचि बदल जाती है कि स्पष्ट करने के लिए डाला गया है तो परिवर्तित, वास्तविक भुगतान होने के लिए नहीं माना जाएगा.

16.3 यह संशोधन खंड (डी) धारा 43B में डाला जाता है और आकलन वर्ष 1989-90 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होता है, जो था से तारीख यानी 1989/01/04 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता है.

[धारा 12]

16.4 इसी प्रकार, धारा 43B, उस खंड में निर्दिष्ट किसी ऋण या अग्रिम पर ब्याज के रूप में निर्धारिती द्वारा देय किसी भी राशि के खंड (ए) में निहित मौजूदा प्रावधानों के तहत आय की गणना में कटौती के रूप में अनुमति दी जाती है तो ब्याज के रूप में देय राशि वास्तव में निर्धारिती द्वारा भुगतान किया जाता है.

स्पष्टीकरण -3 सी के समान 16.5 एक clarificatory स्पष्टीकरण भी खंड (ए) के प्रयोजनों के लिए आवश्यक है.एक नया स्पष्टीकरण 3 डी, इसलिए, किसी भी ऋण या अग्रिम पर ब्याज के रूप में निर्धारिती द्वारा देय किसी भी राशि, खंड 43B के खंड (ए) में निर्दिष्ट है, तो एक ऋण या अग्रिम, ब्याज में बदल जाता है कि प्रभाव के लिए डाला गया है इसलिए, परिवर्तित वास्तविक भुगतान होने के लिए नहीं माना जाएगा.

16.6 यह संशोधन भी खंड (ए) से तारीख यानी 1997/01/04 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता अनुभाग 43B में डाला गया था और आकलन वर्ष 1997-98 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होती है.

वित्त विधेयक, 2006 17-7-2006 बोर्ड द्वारा जारी किया गया दिनांक एक स्पष्टीकरण ख़बरदार सर्कुलर नंबर 7 के पारित होने के बाद 16.7.परिपत्र अनुमति देने के लिए या ब्याज की वास्तविक भुगतान के खिलाफ कटौती की सही राशि का दावा करने के लिए मूल्यांकन अधिकारी और निर्धारिती सक्षम करने के लिए कुछ चित्र देता है.

[धारा 12]

प्र.17. खंड 54EC के तहत छूट के लिए 'लंबी अवधि निर्दिष्ट संपत्ति' की परिभाषा में बदलाव

एक लंबी अवधि के पूंजीगत संपत्ति के हस्तांतरण से उत्पन्न होने वाले खंड 54EC पूंजीगत लाभ के मौजूदा प्रावधानों के तहत 17.1 हद तक इस तरह के लाभ के लिए एक दीर्घकालिक निर्दिष्ट संपत्ति में निवेश कर रहे हैं, कर से छूट दी गई है.अभिव्यक्ति "दीर्घकालिक निर्दिष्ट परिसंपत्ति" खंड में परिभाषित (ख) कृषि के लिए राष्ट्रीय बैंक द्वारा 2000/01/04 पर या के बाद (मैं) जारी किए गए तीन साल के बाद प्रतिदेय किसी भी बंधन मतलब करने के लिए कहा अनुभाग के लिए स्पष्टीकरण की और कर दिया गया है ग्रामीण विकास, या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा, (ii) ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड द्वारा 2001/01/04 पर या के बाद, (iii) राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा या छोटे से 2002/01/04 पर या के बाद भारत के उद्योग विकास बैंक.

केवल लंबे समय के संबंध में, कर में छूट का लाभ प्रतिबंधित करने के लिए इतनी के रूप में कर राजस्व बढ़ाने के लिए और भी सड़कों, राजमार्गों और ग्रामीण विद्युतीकरण बुनियादी सुविधाओं का ध्यान केंद्रित विकास की दिशा में धन channelize करने की दृष्टि से 17.2, खंड 54EC के प्रावधानों में संशोधन किया गया है तीन साल के बाद प्रतिदेय हैं, और 2006/01/04 पर या के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा या रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा जारी किए जाते हैं और प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित कर रहे हैं जो उन बांडों में निवेश अवधि के पूंजीगत लाभ कहा अनुभाग की.इस प्रकार, संशोधित प्रावधानों के तहत, अनुभाग 54EC का लाभ लंबे समय अवधि के पूंजीगत लाभ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड की अधिसूचित बांड में 2006/01/04 पर या बाद का निवेश केवल तभी उपलब्ध होंगे. यह आगे खंड 54EC के संशोधित प्रावधानों निर्धारण वर्ष 2006-07 के लिए लागू नहीं कर रहे हैं कि स्पष्ट किया जा सकता है.

[धारा 13]

प्र.18. खंड 54ED के तहत छूट की वापसी

खंड 54ED की 18.1 मौजूदा प्रावधानों एक दीर्घकालिक पूंजी परिसंपत्ति का हस्तांतरण से उत्पन्न होने वाले पूंजीगत लाभ, प्रतिभूतियों या एक म्यूचुअल फंड की या भारतीय यूनिट ट्रस्ट की इकाइयों को सूचीबद्ध किया जा रहा हद तक कर से मुक्त किया जाएगा कि उपलब्ध कराने के इस तरह के लाभ एक सार्वजनिक कंपनी द्वारा बनाई गई पूंजी का एक पात्र मुद्दा, का हिस्सा बनाने इक्विटी शेयरों में निवेश किया है, और जनता के लिए सदस्यता के लिए पेशकश कर रहे हैं.

18.2 वित्त (नं. 2) अधिनियम, 2004 ख़बरदार.सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स इक्विटी एक कंपनी के शेयरों या भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में प्रवेश किया एक इक्विटी उन्मुख म्युचुअल फंड की यूनिटों के कुछ विशिष्ट लेनदेन के मूल्य पर लगाया गया है. प्रतिभूति लेनदेन कर की वसूली के फलस्वरूप, एक कंपनी या भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से म्यूचुअल फंड उन्मुख एक इक्विटी की इकाई के इक्विटी शेयर का हस्तांतरण से उत्पन्न होने वाले लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ कर से मुक्त कर दिया गया है. उसी को ध्यान में रखते अनुभाग 54ED के प्रावधानों अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं. केवल 31-3-2006 को या उससे पहले एक दीर्घकालिक पूंजी परिसंपत्ति का हस्तांतरण से उत्पन्न होने वाले पूंजीगत लाभ के संबंध में कहा कि खंड के लाभ को सीमित करने के लिए इतनी के रूप में तदनुसार, खंड 54ED के प्रावधानों में संशोधन किया गया है.

18.3 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 14]

प्र.19. बैंकों में सावधि जमा के लिए धारा 80 सी के लाभ का विस्तार

19.1 धारा 80 सी के भुगतान या कुछ विशिष्ट योजनाओं में जमा रकम के संबंध में रुपए की कटौती एक व्यक्ति या एक हिंदू अविभाजित परिवार के लिए एक लाख, के लिए प्रदान करता है.कटौती के लिए पात्र निवेश या भुगतान आदि जीवन बीमा प्रीमियम, प्रोविडेंट फंड या आस्थगित वार्षिकियां के लिए योजनाओं के लिए योगदान, इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड की खरीद, ट्यूशन फीस का भुगतान, आवास ऋण की मूल राशि की अदायगी में शामिल हैं, इसके अलावा, विकृतियों को कम करने के क्रम में, वहाँ कोई क्षेत्रीय कैप हैं और निर्धारिती निर्दिष्ट समग्र सीमा के भीतर पात्र रास्ते में से किसी एक या अधिक का चयन करने के लिए स्वतंत्र है.

(2) धारा 80 सी के 19.2 उपधारा, खंड (XX) को खंड (क) में निर्दिष्ट योजनाओं में भुगतान किया है या पिछले वर्ष में जमा राशि कहा अनुभाग के तहत कटौती के लिए पात्र है कि प्रदान करता है.एक सावधि जमा में निवेश प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में बैंकों और बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड, आदि जैसे अन्य संस्थानों के बीच एक समान अवसर प्रदान करने के लिए धारा 80 सी के एक उप - धारा (2) में एक नया खंड (XXI) सम्मिलित किया गया है किसी भी अनुसूचित बैंक, और जो साथ नहीं कम से कम 5 साल की एक निश्चित अवधि के लिए तैयार है और केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित एक योजना के अनुसार है, ने कहा कि खंड के तहत कटौती के लिए पात्र होंगे."बैंक अनुसूचित" अभिव्यक्ति भी इस उद्देश्य के लिए परिभाषित किया गया है. बैंक सावधि जमा योजना, 2006 28-7-2006 को अधिसूचित कर दिया गया है.

उप खंड के 19.3 खण्ड (ग्यारहवीं) (2) खंड के अधीन अधिसूचित एलआईसी म्युचुअल फंड के किसी भी तरह के यूनिट लिंक्ड बीमा योजना में भाग लेने के लिए (4) धारा 80 सी की उपधारा में निर्दिष्ट किसी भी व्यक्ति के नाम में योगदान करने के लिए संदर्भित करता है केन्द्र सरकार के रूप में धारा 10 के (23D), अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट सकता है.कहा उपधारा के खंड (तेरहवीं) के रूप में धारा 10 या ऐसी योजना के अनुसार तैयार की किसी भी योजना के तहत व्यवस्थापक या निर्दिष्ट कंपनी से के खंड (23D) के तहत अधिसूचित किसी भी म्यूचुअल फंड की किसी भी यूनिट के लिए सदस्यता के लिए संदर्भित करता है अधिसूचित किया जा सकता है केन्द्र सरकार द्वारा.खण्ड (चौदह) ने कहा कि उप - धारा की धारा 10 या प्रशासक या निर्दिष्ट कंपनी द्वारा के खंड (23D) के तहत अधिसूचित किसी भी म्युचुअल फंड द्वारा स्थापित किसी भी पेंशन निधि के लिए एक व्यक्ति द्वारा योगदान करने के लिए संदर्भित करता है, केन्द्र सरकार के रूप में हो सकता है , अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट.

19.4 धारा 10 के खंड (23D) के बाद संशोधन किया गया है और यह भी प्रतिभूति और विनिमय इंडिया एक्ट, 1992 या कानून बनाए इस आधार पर, खंड के प्रावधानों (ग्यारहवीं), (तेरहवीं) के बोर्ड और (के तहत पंजीकृत एक म्युचुअल फंड को संदर्भित करता है के बाद से "खंड (23D) में निर्दिष्ट" शब्द से "खंड (23D के तहत अधिसूचित)" शब्द स्थानापन्न के रूप में तो XIV) की उपधारा (2) में संशोधन किया गया है.इस संशोधन केवल धारा 10 के खंड (23D) के साथ कि इन धाराओं के प्रावधानों aligning के उद्देश्य के लिए है.

19.5 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 16]

प्र.20. खंड 80CCC के प्रावधानों को युक्तिसंगत

20.1 धारा 80CCC एक निर्धारिती, एक व्यक्ति जा रहा है, प्रभाव या बल में जीवन के किसी वार्षिकी योजना के लिए एक अनुबंध पर रखने के लिए भुगतान किया है या उसके द्वारा जमा की गई राशि के बारे में उनकी कुल आय में से (रूपये दस हजार तक) एक कटौती की अनुमति होगी प्रदान करता है बीमा भारत के निगम या कोष से पेंशन प्राप्त करने के लिए किसी अन्य बीमा कंपनी के धारा 10 के खंड (23AAB) में निर्दिष्ट.

20.2 धारा 80 सी और धारा 80CCC के तहत उपलब्ध कटौती एक लाख रुपये की एक समग्र सीमा से छाया हुआ है के बाद से खंड 80CCE में निर्धारित है, और धारा 80 सी में कोई क्षेत्रीय कैप कर रहे हैं, के रूप में दो वर्गों के प्रावधानों में संशोधन से गठबंधन किया गया है खंड 80CCC के प्रावधानों के एक लाख रुपये रुपये दस हजार से निवेश की सीमा बढ़ाने के लिए.जैसा कि ऊपर कहा, संशोधन खंड 80CCE के तहत उपलब्ध कराए गए एक लाख रुपये के समग्र टोपी के अधीन है.

20.3 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 17]

प्र.21. पावर सेक्टर के लिए और औद्योगिक पार्क के लिए कर लाभ का विस्तार

21.1 धारा आयकर अधिनियम की 80 आइए (विकास संचालन और बुनियादी ढांचे की सुविधा, औद्योगिक पार्क या उत्पादन, वितरण या बिजली आदि खण्ड के प्रसारण के रखरखाव में लगे हुए औद्योगिक उपक्रमों या उद्यमों द्वारा प्राप्त लाभ और लाभ के संबंध में कटौती के लिए प्रदान करता है चतुर्थ) की उपधारा (4) ने कहा कि खंड की कि कटौती एक उपक्रम के लिए उपलब्ध है जो प्रदान करता है

यह 1993/01/04 और 31-3-2006 को समाप्त होने पर शुरुआत की अवधि के दौरान बिजली उत्पन्न करने के लिए शुरू होता है (एक), पीढ़ी या पीढ़ी और बिजली के वितरण के लिए भारत में स्थापित किया जाता है;

(ख) 1999/01/04 पर शुरुआत और 31-3-2006 को समाप्त होने की अवधि के दौरान नई पारेषण या वितरण लाइनों का एक नेटवर्क बिछाने से प्रसारण या वितरण शुरू होता है;

(ग) 2004/01/04 पर शुरुआत और 31-3-2006 को समाप्त होने की अवधि के दौरान किसी भी समय पारेषण या वितरण लाइनों के मौजूदा नेटवर्क की पर्याप्त नवीकरण और आधुनिकीकरण चलाती है.

मौजूदा प्रावधानों के तहत 21.2, कटौती 31-3-2006 के बाद नई पारेषण या वितरण लाइनों का एक नेटवर्क बिछाने, या प्रसारण के मौजूदा नेटवर्क की पर्याप्त नवीकरण और आधुनिकीकरण का कार्य द्वारा पीढ़ी, या प्रसारण या वितरण शुरू जो उपक्रमों के लिए उपलब्ध नहीं है उक्त तारीख के बाद या वितरण लाइनों.2012 तक सभी को बिजली उपलब्ध कराने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करने की दृष्टि से, उप खंड (क), (ख) और खंड (ग) (चतुर्थ) की उपधारा (4) धारा 80-IA की है 31-3-2006 से 31-3-2010 को समय सीमा का विस्तार करने के लिए संशोधन किया गया.

21.3 इसी प्रकार, खंड (ग) उप - धारा (4) के खंड के 80 आइए प्रदान करता है कि विकसित, विकसित और संचालित या रखता है और एक औद्योगिक पार्क या योजना के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित विशेष आर्थिक क्षेत्र जो संचालित एक उपक्रम फंसाया और अवधि 1997/01/04 पर शुरुआत और 31-3-2006 को समाप्त होने के लिए यह द्वारा अधिसूचित, कटौती के लिए पात्र है.

21.4 औद्योगिक पार्क के लिए निवेश आकर्षित करने के लिए जारी करने के लिए कहा, खंड (iii) 31-3-2009 को 31-3-2006 से समय सीमा का विस्तार करने के लिए संशोधन किया गया है.

21.5 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 18]

प्र.22. कुछ सहकारी बैंकों को उपलब्ध कर लाभ की वापसी

22.1 धारा 80P, अन्य बातों के साथ बैंकिंग के कारोबार में लगे या अपने सदस्यों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने, या एक कुटीर उद्योग का व्यवसाय, या की कृषि उपज के विपणन की सहकारी समितियों की कुल आय में से कटौती करने का प्रावधान है इसके आदि अपने सदस्यों के कृषि उपज की शक्ति की सहायता के बिना सदस्यों, या प्रसंस्करण,,

22.2 सहकारी बैंक किसी भी कर लाभ का आनंद नहीं है जो अन्य वाणिज्यिक बैंकों के साथ सममूल्य पर कार्य कर रहे हैं.इसलिए, अनुभाग 80P संशोधन किया गया है और (4) एक नई उपधारा कहा अनुभाग के प्रावधानों के एक प्राथमिक कृषि ऋण समिति या एक प्राथमिक सह के अलावा अन्य किसी भी सहकारी बैंक के संबंध में लागू नहीं होगा कि उपलब्ध कराने के लिए डाला गया है सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक. अभिव्यक्ति "सहकारी बैंक", "प्राथमिक कृषि ऋण समिति" और "प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक 'भी उन्हें स्पष्टता उधार देने के लिए परिभाषित किया गया है.

22.3 इसके अलावा, एक नया उपखंड (VIIa) (ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराने सहित) के मुनाफे और बैंकिंग के किसी भी व्यवसाय के लाभ के साथ एक सहकारी समिति द्वारा किए कि उपलब्ध कराने के लिए धारा 2 के खंड (24) में सम्मिलित किया गया है इसकी सदस्यों की आय 'की परिभाषा में शामिल किया जाएगा.

22.4 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 3 और 19]

प्र 23 आदि दोहरे कराधान से राहत से संबंधित प्रावधान

धारा 90 के मौजूदा प्रावधानों के तहत 23.1, केन्द्र सरकार भारत के बाहर किसी भी देश की सरकार के साथ एक दोहरे कराधान से बचाव समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है.एक की जरूरत है केन्द्र सरकार बाद में लागू करने या एक ही करने के लिए प्रभाव देने के लिए इस तरह के समझौते को गोद लेने के साथ, दोहरे कराधान से राहत प्रदान करने के लिए निर्दिष्ट गैर सरकारी संगठनों के बीच एक समझौते पर सक्षम करने के लिए महसूस किया गया.

इस प्रयोजन के लिए 23.2, एक नई धारा 90A भारत में किसी भी निर्दिष्ट संघ किसी के साथ दोहरे कराधान से राहत, दोहरे कराधान के परिहार, सूचना के आदान प्रदान या आयकर की वसूली के लिए प्रदान करने के लिए एक समझौते में प्रवेश कर सकते हैं कि उपलब्ध कराने के लिए डाला गया है भारत के बाहर एक निर्धारित क्षेत्र में और केन्द्र सरकार के राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस तरह के समझौते को गोद लेने और लागू करने के लिए आवश्यक प्रावधान कर सकता है कि निर्दिष्ट एसोसिएशन.

(2) खंड 90A के 23.3 उपधारा इस तरह के समझौते के संबंध में और इस तरह के समझौते के लागू होता है जिसे करने के लिए एक निर्धारिती के संबंध में, आयकर अधिनियम के प्रावधानों वे निर्धारिती को अधिक फायदेमंद होते हद तक लागू होंगे कि प्रदान करता है.उप - धारा (3) ने कहा कि खंड के संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित जब तक आयकर अधिनियम में या इस तरह के समझौते में थे, लेकिन परिभाषित नहीं किसी भी अवधि में केन्द्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में उसे सौंपे रूप में एक ही अर्थ होगा कि प्रदान करता है और इस तरह के अर्थ अधिनियम या समझौते के उपबंधों से असंगत नहीं है, यह स्पष्ट किया गया है कि एक घरेलू कंपनी है जिस दर से अधिक दर पर भारत के बाहर निर्दिष्ट क्षेत्र में शामिल कंपनी के संबंध में टैक्स का आरोप प्रभार्य, ऐसी कंपनी के संबंध में कर की वसूली के कम अनुकूल प्रभारी के रूप में नहीं माना जाएगा.

इस प्रयोजन के लिए 23.4, 'निर्दिष्ट एसोसिएशन' किसी भी अधिसूचित संस्था, संगठन या शरीर, भारत में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन कार्य शामिल किया जाए या नहीं, या भारत के बाहर निर्दिष्ट क्षेत्र के कानूनों के मतलब को परिभाषित किया गया है.'निर्दिष्ट क्षेत्र' खंड के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा इस तरह के रूप में अधिसूचित किया जा सकता है, जो भारत के बाहर किसी भी क्षेत्र मतलब करने के लिए परिभाषित किया गया है. परिणामी संशोधन धारा 2 (37 ए) में किया गया है.

23.5 प्रयोज्यता - बाद 2006/01/06 से.

[धारा 3 और 20]

प्र 24 मूल्य निर्धारण के लिए स्थानांतरण से संबंधित प्रावधानों को युक्तिसंगत

अनुभाग 92C के 24.1 मौजूदा प्रावधानों के हाथ की दूरी कीमत की गणना के लिए प्रदान करते हैं.उप - धारा (4) ने कहा कि खंड के मूल्यांकन अधिकारी हाथ की दूरी कीमत के आधार पर एक निर्धारिती की कुल आय की गणना कर सकते हैं कि प्रदान करता है. उप - धारा को पहले परन्तुक (4) निर्धारण अधिकारी द्वारा गणना के रूप में एक निर्धारिती की कुल आय निर्धारिती, धारा 10 ए या खंड 10 बी के तहत या अध्याय VI-A जाएगा के अधीन कोई कटौती द्वारा घोषित आय से अधिक है, जहां कि प्रदान करता है निर्धारिती की कुल आय इस उपधारा के तहत आय की गणना के बाद बढ़ाया है जिसके द्वारा आय की राशि के संबंध में अनुमति दी जा.

24.2 धारा 10A और 10B निर्यात से व्युत्पन्न लाभ और लाभ के संबंध में कटौती प्रदान करते हैं.धारा 10AA भी विशेष आर्थिक क्षेत्रों में नव स्थापित इकाइयों के संबंध में, निर्यात से व्युत्पन्न लाभ और लाभ की कटौती करने का प्रावधान है. हाथ की दूरी कीमत के अनुसार आय की गणना के माध्यम से बढ़ाया आय पर वर्गों 10A, 10 बी और 10AA के तहत कटौती के संबंध में इसी तरह के उपचार के लिए उपलब्ध कराने के लिए इतनी के रूप में (4) अनुभाग 92C के उप अनुच्छेद के प्रावधानों को युक्तिसंगत बनाया गया है. खंड 10AA तहत कोई कटौती निर्धारिती की कुल आय गणना के बाद बढ़ाया है जिसके द्वारा आय की राशि के संबंध में अनुमति दी जाएगी प्रदान करने के रूप में तो तदनुसार, (4) अनुभाग 92C की उप - धारा को पहले परंतुक संशोधन किया गया है आय के तहत उपधारा कहा.

24.3 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 21]

प्र.25. गैर लाभ शिक्षा या चिकित्सा संस्थानों सहित पूर्ण चैरिटेबल ट्रस्ट या संस्थाओं द्वारा प्राप्त गुमनाम दान का कराधान

25.1 पूर्ण धर्मार्थ या धार्मिक ट्रस्टों या संस्थाओं की आय के साथ ही आंशिक रूप से धर्मार्थ या धार्मिक ट्रस्टों या संस्थाओं आय और में निवेश के आवेदन के कुछ शर्तों को पूरा, अन्य बातों के साथ, के अधीन वर्गों 11 और 12 के तहत आयकर से छूट प्राप्त है निर्दिष्ट मोड.इसी तरह, किसी भी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था की आय (के माध्यम से) उपखंड (iiiad) या उपखंड में निर्दिष्ट या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था के उप - खंड (iiiae) या उपखंड में निर्दिष्ट () के माध्यम से या किसी भी फंड या संस्था (वी) धारा 10 के खंड (23 सी) की, में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने के लिए आयकर विषय से मुक्त है उपखंड (चतुर्थ) या उपखंड में निर्दिष्ट किसी ट्रस्ट या संस्था में करने के लिए भेजा उक्त खंड.

बेनामी दान के माध्यम से इन संस्थानों के लिए बेहिसाब पैसे की channelisation को रोकने के लिए एक दृश्य के साथ 25.2, एक नया खंड 115BBC गुमनाम दान के माध्यम से एक पूरी तरह चैरिटेबल ट्रस्ट या संस्था के किसी भी आय इसकी कुल आय में शामिल किया जाएगा प्रदान करने के लिए डाला गया है और 30 प्रतिशत की दर से कर लगेगा.यानी पूरी तरह धर्मार्थ और धार्मिक ट्रस्टों या संस्थाओं के लिए किए बेनामी दान. मिश्रित उद्देश्य पर भरोसा करता है या संस्थाओं यह किसी भी विश्वविद्यालय या अन्य शिक्षा संस्था या किसी भी अस्पताल या उनके द्वारा चलाए अन्य चिकित्सा संस्था के लिए तभी लगाया जा जाएगा.पूर्ण धार्मिक ट्रस्टों या संस्थाओं को बेनामी दान कर लगाया जाना नहीं होगा.

25.3 बेनामी दान धारा 2 (24) में निर्दिष्ट किसी स्वैच्छिक योगदान मतलब करने के लिए नए खंड में परिभाषित किया गया है (आईआईए) ऐसे योगदान प्राप्त एक व्यक्ति के नाम और पते का संकेत पहचान के रिकार्ड को बनाए रखने नहीं है जहां अधिनियम के इस तरह के योगदान और इस तरह के अन्य ब्यौरे करने वाले व्यक्ति के रूप में हो सकता है निर्धारित है.

25.4 परिणामी संशोधन धारा 10 (23 सी) और धारा 115BBC के तहत कर योग्य है जो किसी भी बेनामी दान के माध्यम से किसी भी आय, निर्धारिती की कुल आय में शामिल किया जाएगा कि उपलब्ध कराने के लिए धारा 13 में किया गया है.

25.5 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

Clarificatory प्रकृति का 25.6 संशोधन आगे (आईआईए) आय की परिभाषा में शामिल करने के लिए धारा 2 (24) में किया गया है, किसी भी विश्वविद्यालय या अन्य शिक्षा संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था से प्राप्त स्वैच्छिक योगदान (उप खंड में निर्दिष्ट छह) और (क्रमशः धारा 10 (23 सी) के) के माध्यम से.धारा 10 के खंड (23 सी) के लिए छठे प्रावधान पहले से ही कुछ निश्चित परिस्थितियों में छूट के साथ आय के रूप में स्वैच्छिक योगदान के उपचार में संकेत दिया.

25.7 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 1999-2000 से.

25.8 संशोधन भी किसी भी विश्वविद्यालय या अन्य शिक्षा संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था से प्राप्त स्वैच्छिक योगदान उप खंड (iiiad) में निर्दिष्ट और (iiiae) क्रमशः धारा 10 की कि उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है (23C) में शामिल किया जाएगा आय की परिभाषा.

25.9 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 3, 4, 6 और 22]

26 मेट क्रेडिट के ले जाने के लिए आगे के लिए अवधि बढ़ाना

(1) अनुभाग 115JAA के 26.1 उपधारा कर के किसी भी राशि किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए एक कंपनी द्वारा खंड 115JA के तहत भुगतान किया जाता है, तब तो भुगतान कर के संबंध में क्रेडिट कहा के प्रावधानों के अनुसार की अनुमति होगी प्रदान करता है खंड 115JAA. खंड 115JAA की उप - धारा (1 ए) 1 अप्रैल 2006 और बाद किसी भी वर्ष पर शुरू होने निर्धारण वर्ष के लिए खंड 115JB के तहत भुगतान कर के किसी भी राशि के संबंध में एक समान व्यवस्था के लिए प्रदान करता है.उप - धारा (2) खंड 115JAA के टैक्स क्रेडिट (1) अनुभाग 115JA या अनुभाग 115JB और तहत देय कर की राशि के तहत किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए भुगतान कर का अंतर हो जाएगा उपधारा के तहत अनुमति दी जाए कि प्रदान करता है आयकर अधिनियम के सामान्य प्रावधानों. उप - धारा (3) खंड 115JAA की उप - धारा के तहत निर्धारित ऋण की राशि (2) आगे बढ़ाया और (4) और (5) ने कहा अनुभाग के उप वर्गों के प्रावधानों के अनुसार बंद सेट किया जाएगा प्रदान करता है , लेकिन आगे ले जाने के लिए इस तरह के तुरंत टैक्स क्रेडिट (1) ने कहा अनुभाग के उप - धारा के तहत स्वीकार्य हो जाता है जिसमें निर्धारण वर्ष सफल पांचवें निर्धारण वर्ष से परे अनुमति नहीं दी जाएगी.

करदाता को राहत प्रदान करने के लिए 26.2, 1 अप्रैल 2006 को या उसके बाद शुरू होगा किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए खंड 115JB तहत मेट का भुगतान करने के लिए आवश्यक हैं जो कंपनियों, किया जा रहा है, अनुभाग 115JAA का प्रावधान कर ऋण की राशि निर्धारित की है कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया होगा आगे बढ़ाया और तुरंत टैक्स क्रेडिट कहा अनुभाग के तहत स्वीकार्य हो जाता है जिसमें निर्धारण वर्ष सफल सात मूल्यांकन वर्षों के लिए बंद सेट होने की अनुमति दी जाए.

26.3 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 23]

प्र.27. न्यूनतम वैकल्पिक कर से संबंधित प्रावधानों को युक्तिसंगत

27.1 धारा 115JB एक कंपनी के मामले में, कर 1 अप्रैल को या उसके बाद शुरू होने निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक किसी भी पिछले वर्ष, 2001 के संबंध में आयकर अधिनियम के तहत अभिकलन के रूप में कुल आय पर देय है, तो उस प्रदान करता है कम से कम सात और अपनी किताब लाभ का एक फीसदी से डेढ़, ऐसी पुस्तक लाभ कुल निर्धारिती की आय और प्रासंगिक पिछले वर्ष के लिए देय कर ऐसी किताब लाभ का प्रतिशत सात और एक आधा हो जाएगा होना समझा जाएगा .

खंड 115JB तहत भुगतान मेट के लिए ऋण के बाद से 27.2 वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा निर्धारण वर्ष 2006-07 से शुरू की गई है, और मेट क्रेडिट का लाभ उठाने के लिए अवधि उप - धारा (1) के सात साल के लिए पांच साल से बढ़ा दी गई है कहा अनुभाग प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है कि 1 अप्रैल 2007 को या उसके बाद शुरू होने निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक किसी भी पिछले वर्ष के संबंध में आयकर अधिनियम के तहत अभिकलन के रूप में कुल आय पर आयकर देय से कम है तो अपनी किताब लाभ का दस प्रतिशत, ऐसी पुस्तक लाभ निर्धारिती की कुल आय होना समझा जाएगा और प्रासंगिक पिछले वर्ष के लिए देय कर ऐसी किताब लाभ का दस प्रतिशत हो जाएगी.

27.3 उप - धारा को स्पष्टीकरण (2) खंड 115JB की अनुसूची के भाग II और III के प्रावधानों के अनुसार तैयार, प्रासंगिक पिछले वर्ष के लिए लाभ और हानि खाते में दिखाया गया है "पुस्तक लाभ" शुद्ध लाभ का मतलब है कि कहते हैं कंपनी अधिनियम, 1956 के लिए छठी, और कहा स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट के रूप में कुछ समायोजन की वृद्धि हुई या कम के रूप में.उक्त स्पष्टीकरण, अन्य बातों के साथ किसी भी तरह की राशि डेबिट किया जाता है, तो किताब लाभ राशि या [उसके खंड (23g) में निहित प्रावधानों के अलावा अन्य] धारा 10 में निर्दिष्ट किसी आय को सम्बद्ध व्यय की मात्रा की वृद्धि की जाएगी कि प्रदान करता है लाभ और हानि खाते में है और इसे किसी भी तरह की राशि लाभ और हानि खाते में जमा किया जाता है, तो कहा धारा 10 में निर्दिष्ट आय की राशि से कम हो जाएगा.

27.4 संदर्भ "खंड (23g) में निहित प्रावधानों के अलावा और क्या है" खंड 115JB को स्पष्टीकरण के खंड (च) और खंड (द्वितीय) से छोड़ा गया है. संशोधन वित्त अधिनियम, 2006 की धारा 10 धारा 4 के खंड (23g) की चूक को परिणामी है.

उक्त स्पष्टीकरण के 27.5 इसके अलावा खंड (च) पुस्तक लाभ राशि या उसके [खंड (38) में निर्दिष्ट आय को छोड़कर धारा 10 में निर्दिष्ट किसी आय को सम्बद्ध व्यय की मात्रा की वृद्धि की जाएगी कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है कहा स्पष्टीकरण की] और खंड (द्वितीय) को भी पुस्तक लाभ [खंड (38) में निर्दिष्ट आय को छोड़कर उसके] की धारा 10 में निर्दिष्ट आय की राशि से कम हो जाएगा कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है.

धारा 10 की उप - धारा (38) की 27.6 प्रावधान भी एक कंपनी की लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ की तरह से है कि आय प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है अनुभाग 115JB तहत और आय के भुगतान के लिए पुस्तक लाभ कंप्यूटिंग में खाते में रखा जाएगा उस धारा के तहत कर.

आयकर अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के तहत 27.7, परिसंपत्तियों के पुनर्मूल्यांकन के कारण उच्च मूल्यह्रास के दावे की अनुमति नहीं है.हालांकि, कंपनियों ने इस तरह उच्च मूल्यह्रास का दावा करने परिसंपत्तियों के पुनर्मूल्यांकन का सहारा है. कुछ कंपनियों द्वारा परिसंपत्तियों के पुनर्मूल्यांकन के माध्यम से उच्च मूल्यह्रास के दावे के कारण राजस्व का रिसाव प्लग करने की दृष्टि से एक नया खंड (छ) पुस्तक लाभ राशि के द्वारा वृद्धि की जाएगी कि उपलब्ध कराने के लिए उक्त स्पष्टीकरण में सम्मिलित किया गया है लाभ और हानि खाता और (आईआईए) मूल्यह्रास की राशि, संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन के कारण ह्रास का दावा करेगा छोड़कर, लाभ और हानि खाते में दावा किया है कि उपलब्ध कराने के लिए कहा स्पष्टीकरण में सम्मिलित किया गया है एक नया खंड नामे मूल्यह्रास किताब लाभ से कम किया.इस खाते पर दोहरे कराधान से बचने के लिए एक दृश्य के साथ, एक नया खंड (IIb) पुनर्मूल्यांकन आरक्षित से वापस ले लिया और हद तक, लाभ और हानि खाते में जमा राशि से अधिक नहीं है कि उपलब्ध कराने के लिए कहा स्पष्टीकरण में सम्मिलित किया गया है नया खंड (आईआईए) में निर्दिष्ट परिसंपत्तियों के पुनर्मूल्यांकन के कारण मूल्यह्रास की राशि, किताब लाभ से कम किया जाएगा.

27.8 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 4 और 24]

प्र 28 सभी इक्विटी आधारित फंड और इक्विटी ओरिएंटेड फंडों की परिभाषा में परिवर्तन करने के लिए लाभांश वितरण कर की वसूली से छूट का विस्तार

खंड 115R के तहत 28.1 (2), अपनी यूनिट धारकों के लिए एक म्युचुअल फंड द्वारा किसी भी वितरित आय की राशि, अन्य बातों के साथ, के संबंध में इस तरह के म्युचुअल फंड 12.5 प्रति की दर से वितरित आय पर अतिरिक्त आयकर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है किसी भी व्यक्ति या एचयूएफ के लिए वितरित आय पर और किसी भी अन्य व्यक्ति को वितरित आय पर 20 फीसदी की दर से प्रतिशत.इस अतिरिक्त आयकर हालांकि, इसकी यूनिट धारकों के लिए एक ओपन एंडेड इक्विटी ओरिएंटेड फंड द्वारा वितरित आय पर लगाया नहीं है. एक ओपन एंडेड इक्विटी ओरिएंटेड फंड निवेश योग्य धन ऐसे फंड की कुल आय का पचास से अधिक प्रतिशत की सीमा तक घरेलू कंपनियों में इक्विटी शेयरों के माध्यम से निवेश कर रहे हैं, जहां एक कोष के रूप में खंड 115R के स्पष्टीकरण में परिभाषित किया गया है.

खंड 115R के प्रावधानों के रूप में 28.2 (2) एक की जरूरत क्लोज एंडेड इक्विटी आधारित फंडों के रूप में अच्छी तरह से एक ही बढ़ा कर एक समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए महसूस किया गया, केवल ओपन एंडेड इक्विटी ओरियेंटेड फंडों आवेदन किया.तदनुसार, शब्द 'ओपन एंडेड' अनुभाग 115R के लिए (2) और धारा 115T के स्पष्टीकरण से परंतुक से हटा दिया गया है. सभी इक्विटी ओरिएंटेड फंडों, यानी. खुले समाप्त हो गया और करीब एंडेड दोनों, इसलिए लाभांश वितरण कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा.

28.3 इसके अलावा, सेबी के दिशा निर्देशों में दिए गए उस के साथ खंड 115T के स्पष्टीकरण में दिए इक्विटी ओरिएंटेड फंड की परिभाषा संरेखित करने के लिए, कहा परिभाषा अन्य बातों के साथ करने के लिए संशोधन किया गया है, एक इक्विटी ओरिएंटेड फंड ऐसे फंड का मतलब है कि प्रदान जहां निवेश योग्य धन ऐसी आय का पचास प्रतिशत के स्थान पर, इस तरह के फंड की कुल आय का प्रतिशत से अधिक पैंसठ की हद तक घरेलू कंपनियों में इक्विटी शेयरों के माध्यम से निवेश कर रहे हैं.

28.4 इसी प्रकार धारा 10 (38) में और धारा 97 (5) (i) वित्त (नं. 2) अधिनियम, 2004 की, इक्विटी ओरिएंटेड फंड निवेश योग्य धन रास्ते से द्वारा निवेश कर रहे हैं, जहां एक कोष के रूप में परिभाषित किया गया है इस तरह के फंड की कुल आय का पचास से अधिक प्रतिशत की सीमा तक घरेलू कंपनियों में इक्विटी शेयरों.सेबी के दिशा निर्देशों, धारा 10 (38) और धारा 97 (5) वित्त (i) (नं. 2) अधिनियम के साथ इन परिभाषाओं के लिए पंक्ति में इसी तरह के उद्देश्य के साथ, 2004 एक इक्विटी ओरिएंटेड फंड का मतलब है कि उपलब्ध कराने में संशोधन किया गया है एक इस तरह के निवेश योग्य धन से अधिक पैंसठ फंड की कुल आय के बजाय इस तरह के आय का पचास फीसदी फीसदी की हद तक घरेलू कंपनियों में इक्विटी शेयरों के माध्यम से निवेश कर रहे हैं, जहां फंड.

28.5 प्रयोज्यता - बाद 2006/01/06 से.

[धारा 4, 26, 27 और 76]

प्र.29. फ्रिंज बेनिफिट टैक्स के प्रावधानों Rationalising

29.1 धारा 115WB 'शब्द का मामूली लाभ' की एक परिभाषा प्रदान करता है.यह अन्य बातों के साथ, आदि ने अपने कर्मचारियों को एक नियोक्ता द्वारा प्रदान की प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी भी विशेषाधिकार, सेवा, सुविधा या लाभ,,, कर्मचारियों के लिए एक अनुमोदित सेवानिवृत्ति निधि के लिए नियोक्ता द्वारा किसी भी योगदान है, इसका मतलब है

(2) ने कहा कि खंड के 29.2 उपधारा अनुषंगी लाभ नियोक्ता अपने व्यवसाय या पेशे के पाठ्यक्रम में है, तो अपने कर्मचारियों को नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई मानी पर कोई खर्च खर्च या किसी भी किया जाएगा कि प्रदान करता है उप खंड के खंड (डी) के प्रावधान आदि मनोरंजन, आतिथ्य, सम्मेलन, प्रचार सहित बिक्री संवर्धन, के प्रयोजनों के लिए भुगतान (2) खंड 115WB के प्रचार सहित बिक्री संवर्धन से विज्ञापन पर कुछ खर्च शामिल नहीं है.

नियोक्ताओं के लिए राहत प्रदान करने के लिए इस तरह के अपवाद के डोमेन का विस्तार करने के लिए 29.3, एक नया खंड (2) ने कहा कि खंड 115WB के प्रदान करने के लिए उप खंड के खंड (डी) के परन्तुक में सम्मिलित किया गया है कि नि: शुल्क नमूने के वितरण पर खर्च डॉक्टरों और माल या नियोक्ताओं के व्यापार की सेवाओं की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए ख्याति के किसी भी व्यक्ति को भुगतान करने के लिए या चिकित्सा उपकरणों की दवाओं, के, अनुषंगी लाभ के मूल्यांकन के लिए 'प्रचार सहित बिक्री संवर्धन' में शामिल नहीं किया जाएगा.

खंड 115WB की 29.4 उप - धारा (3) उपधारा के प्रयोजनों के लिए (1) ने कहा कि खंड की, विशेषाधिकार, सेवा, सुविधा या लाभ से भुगतान किया है या देय है, जो टैक्स के संबंध में अनुलाभ शामिल नहीं है प्रदान करता है कर्मचारी.

29.5 इस टैक्स के प्रावधानों से निवास से अपने कर्मचारियों के कार्यालय के लिए इधर - उधर यात्राओं पर खर्च नियोक्ताओं के लिए विशेष रूप से मुक्त व्यय,, करने के लिए, उप - धारा (3) खंड 115WB के प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है कि किसी भी लाभ या सुविधा काम या निवास की जगह काम करने के लिए ऐसी जगह की जगह उनके आवास से कर्मचारियों द्वारा यात्रा के लिए अपने कर्मचारियों को नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराई मुफ्त या रियायती परिवहन या किसी भी तरह के भत्ते की प्रकृति अनुषंगी लाभ का हिस्सा नहीं होगा.

खंड 115WC में निहित मौजूदा प्रावधानों के तहत 29.6, अनुषंगी लाभ का मूल्य फ्रिंज बेनिफिट टैक्स की वसूली के प्रयोजन के लिए मामूली लाभ के रूप में लिया जाएगा जो खंड 115WB में निर्दिष्ट कुछ खर्च का प्रतिशत, के मामले में निर्धारित किया जाना है.

उप खंड के 29.7 खंड (ख) (1) के खंड 115WC के कर्मचारियों के लिए एक अनुमोदित सेवानिवृत्ति निधि के लिए नियोक्ता द्वारा योगदान की वास्तविक राशि मामूली लाभ के मूल्य होगी कि प्रदान करता है.

29.8 उक्त खंड (ख) यह योगदान दिया है जिनके संबंध में प्रति कर्मचारी एक लाख रुपये से अधिक न हो हद तक एक अनुमोदित सेवानिवृत्ति निधि के लिए एक नियोक्ता द्वारा कि योगदान प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है, लाभ कर हाशिये के लिए उत्तरदायी नहीं होगा .ए, बी और सी और वह निम्नलिखित तरीके से अनुमोदित सेवानिवृत्ति निधि में उनके, खाते में योगदान करता है: उदाहरण के लिए, तीन कर्मचारियों की है, जो एक नियोक्ता पर विचार -

कर्मचारी
नियोक्ता द्वारा अनुमोदित सेवानिवृत्ति कोष के लिए अंशदान
ए
र
60,000 रूपये
ख
र
95]000
ग
र
2]50]000

कर्मचारियों को एक और बी के मामले में, अनुषंगी लाभ का मूल्य इन कर्मचारियों के संबंध में नियोक्ता द्वारा योगदान रुपये से अधिक नहीं है के बाद से शून्य होने के लिए रखा जाएगा. प्रत्येक मामले में 1,00,000.हालांकि, कर्मचारी सी के मामले में हाशिये पर लाभ का मूल्य रुपये होगी. फ्रिंज बेनिफिट टैक्स की वसूली के प्रयोजनों के लिए - 1,50,000 (1,00,000 रुपए 2,50,000).

उप खंड के खंड (ग) में निहित मौजूदा प्रावधानों के तहत 29.9 (1) के खंड 115WC कहा, यह खर्च का बीस फीसदी उप - धारा (2 की (कश्मीर) को खंड (ए) में निर्दिष्ट है कि प्रदान की जाती है ) वाहन, यात्रा और विदेश यात्रा सहित यात्रा () पर किए गए खर्च भी शामिल है जो अनुभाग 115WB, की, अनुषंगी लाभ का मूल्य होगी.

29.10 (2) खंड 115WB की उप - धारा और प्रदान करने के लिए डाला गया है (1) अनुभाग 115WC की उप - धारा में एक नया खंड (ए) में एक नया खंड (क्यू) कि पाँच दौरे पर किए गए खर्च का प्रतिशत और (विदेश यात्रा सहित) यात्रा अनुषंगी लाभ का मूल्य निर्धारित करने के लिए ले जाया जाएगा.हालांकि, वाहन के प्रयोजनों के लिए किए गए खर्च का बीस फीसदी अनुषंगी लाभ के मूल्यांकन के प्रयोजनों के लिए लिया जाना जारी रखा किया जाएगा.

29.11 उप - धारा (2) ने कहा कि खंड के 115WC अनुभाग 115WB की उप - धारा (2) में निर्दिष्ट कुछ खर्च के मामले में मामूली लाभ के मूल्यांकन के लिए कम दर के लिए प्रदान करता है.

29.12 न्यू खंड (एए), (एबी), (डीए) और (DB) (2) यात्रियों या माल की ढुलाई के कारोबार में लगे एक नियोक्ता के मामले में है कि उपलब्ध कराने के लिए खंड 115WC की उप - धारा में सम्मिलित किया गया है विमान या जहाज द्वारा, उद्देश्यों के लिए मामूली लाभ के मूल्य खंड (ख) में निर्दिष्ट और (छ) उप - धारा (2) के होटल, आवास और बोर्डिंग के आतिथ्य और उपयोग से संबंधित अनुभाग 115WB के क्रमश: "पाँच होगी उप - धारा (1) धारा 115 WC के के खंड (ग) में निर्दिष्ट फीसदी बीस "" के बजाय "फीसदी.

29.13 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 28 और 29]

प्र.30. आयकर अधिकारियों की शक्ति और समारोह के संबंध में निर्देश जारी करने बोर्ड की शक्तियों के बारे में स्पष्टीकरण

30.1 धारा 120 आयकर अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र के नीचे देता है.उप - धारा में समाहित मौजूदा प्रावधानों (1) ने कहा कि खंड की, आयकर अधिकारियों शक्तियों के सभी या किसी भी व्यायाम और अनुसार सभी या किसी पर सौंपे गए कृत्यों के या, को सौंपा, ऐसे अधिकारियों प्रदर्शन करेगा कि प्रदान उन अधिकारियों के सभी या किसी से ऐसी शक्तियों और कार्यों के अभ्यास के लिए बोर्ड द्वारा जारी निर्देश के साथ.

विधानमंडल का इरादा, (1) ने कहा कि खंड के किसी भी आयकर प्राधिकरण, रैंक में एक अधिकारी के अधिक होने, शक्तियों का प्रयोग हो सकता है कि स्पष्ट करने के लिए इतनी के रूप में सम्मिलित किया गया है उपधारा के लिए एक व्याख्या स्पष्ट करने के लिए एक दृश्य के साथ 30.2 यह तो कहा अनुभाग के तहत बोर्ड द्वारा निर्देशित है और, अगर रैंक में कम आयकर प्राधिकरण का कार्य करते हैं.यह भी किसी भी तरह के दिशा कहा उपधारा (1) के तहत बोर्ड द्वारा जारी किए गए एक दिशा होना समझा जाएगा कि स्पष्ट किया गया है.

30.3 यह संशोधन पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू होगा और 1 अप्रैल 1988 से प्रभावी हो जाएगा.

[धारा 30]

प्र.31. रिटर्न फार्म में संशोधन

उप खंड के 31.1 मौजूदा प्रावधानों (9) धारा 139 के मूल्यांकन अधिकारी एक निर्धारिती द्वारा दायर आयकर रिटर्न दोषपूर्ण है कि मानता है कि जहां प्रदान; वह निर्धारिती अंतरंग और उसे पंद्रह दिनों के भीतर एक ही सुधारने का एक मौका दे सकता है.कहा उपधारा को स्पष्टीकरण कहा उपधारा के लिए स्पष्टीकरण की (एफ) को खंड (क) में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा कर रहे हैं, जब तक कि आय का रिटर्न दोषपूर्ण माना जाएगा कि प्रदान करता है.

31.2 स्पष्टीकरण के (एफ) को खंड (क) में निर्दिष्ट शर्तों के किसी के साथ बांटना केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड पर शक्ति प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में (9) सम्मिलित किया गया है ने कहा कि उप - धारा को स्पष्टीकरण के लिए एक प्रावधान कहा उपधारा के लिए, व्यक्तियों के एक वर्ग या वर्गों के संबंध में.यह भी बोर्ड (क) उप - धारा (1) और उप - धारा के तहत निर्धारित आय की वापसी के रूप में व्याख्या की (एफ) खंड में निर्दिष्ट शर्तों के किसी भी शामिल करने की शक्ति होगी कि प्रदान की गई है (6) धारा 139 के.

31.3 यह संशोधन 1 जून 2006 से लागू हो गया है.

[धारा 31]

प्र.32. एक से छह योजना की चूक

(1) धारा 139 की उप - धारा के परन्तुक के मौजूदा प्रावधान के तहत 32.1, यह है, भले ही उसमें सूचीबद्ध छह व्यय / परिसंपत्ति मानदंडों में से किसी को पूरा करने के लिए किसी भी व्यक्ति, उनकी आय के रिटर्न प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी कि प्रदान की गई है उसकी कुल आय कर के दायरे में नहीं अधिकतम राशि से अधिक नहीं था.

32.2 धारा 139 के प्रावधान को छोड़ दिया गया है और वापसी के प्रावधान के तहत सजा हो के लिए आवश्यक हो जाएगा.

32.3 प्रयोज्यता - निर्धारण वर्ष 2006-07 और उसके बाद से.

[धारा 31]

प्र.33. पैन पैन और स्वप्रेरणा आवंटन के आवंटन के लिए व्यक्तियों के नए वर्ग का निर्धारण

अनुभाग 139 क के 33.1 मौजूदा उप वर्गों (1) के प्रावधानों और (1 ए) के एक स्थायी खाता संख्या के लिए आवश्यक हैं जो व्यक्ति के वर्ग के लिए प्रदान करते हैं.

के लिए उपयोगी है या इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्रासंगिक हो सकता है जो किसी भी जानकारी एकत्र करने के उद्देश्य के लिए है कि प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में 33.2 एक नया उप - धारा (1 बी) सम्मिलित किया गया है, केन्द्र सरकार अधिसूचना के माध्यम से किसी भी वर्ग या निर्दिष्ट कर सकता है व्यक्तियों की कक्षाओं, और ऐसे व्यक्तियों को निर्धारित समय के भीतर एक स्थायी खाता संख्या के आवंटन के लिए मूल्यांकन अधिकारी को आवेदन करना होगा.

उप - धारा में समाहित मौजूदा प्रावधानों के तहत 33.3 (2) ने कहा कि खंड के आकलन अधिकारी भी कर देय है जिसके द्वारा किसी अन्य व्यक्ति, एक स्थायी खाता संख्या के लिए आवंटित कर सकता है.

33.4 मूल्यांकन अधिकारी, जैसा निर्धारित किया गया लेनदेन की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, यह भी कोई कर उसके द्वारा देय या है कि क्या किसी अन्य व्यक्ति (करने के लिए एक स्थायी खाता संख्या आवंटित कर सकता है कि उपलब्ध कराने के लिए इतनी के रूप में उप - धारा में संशोधन किया गया है नहीं), ढंग से और निर्धारित किया जा सकता है के रूप में प्रक्रिया के अनुसार.

33.5 यह संशोधन 2006/01/06 से प्रभाव में आ गया है.

[धारा 32]

प्र.34. टैक्स रिटर्न preparers के माध्यम से रिटर्न जमा करने की सुविधा प्रदान करने के लिए नई योजना

किसी भी निर्दिष्ट वर्ग या व्यक्तियों की कक्षाओं आय का रिटर्न तैयार करने और प्रस्तुत करने के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य के लिए है कि प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में 34.1 एक नई धारा 139B आयकर अधिनियम में सम्मिलित किया गया है, बोर्ड, अधिसूचना के माध्यम से, एक फ्रेम कर सकते हैं ऐसे व्यक्तियों को एक कर रिटर्न Preparer के माध्यम से उनकी आय का रिटर्न प्रस्तुत कर सकते हैं कि उपलब्ध कराने योजना स्कीम के तहत इस तरह के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत.यह आगे कहा अनुभाग के तहत फंसाया योजना टैक्स रिटर्न Preparer आय विवरणी प्रस्तुत व्यक्तियों की सहायता करेगा जिस तरीके से निर्दिष्ट करेगा कि उपलब्ध कराई गई है. एक टैक्स रिटर्न Preparer उसके द्वारा तैयार लौटने पर उसके हस्ताक्षर करना होगा. यह भी एक व्यक्ति (द्वितीय) या खंड (चतुर्थ) की उपधारा (2) के खंड 288 या व्यक्तियों की निर्दिष्ट वर्ग या वर्गों के एक कर्मचारी की एक कर के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत नहीं किया जाएगा खंड में निर्दिष्ट है कि प्रदान की गई है Preparer लौटें.यह भी कहा कि खंड के अंतर्गत अधिसूचित किए जाने की योजना, शिक्षा और अन्य योग्यताओं के पास होने के लिए जो और एक टैक्स रिटर्न Preparer योजना के तहत इस तरह के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत किया जाएगा, जिसके लिए अवधि में ढंग से प्रदान कर सकता है कि निर्धारित कर दिया गया है और एक व्यक्ति द्वारा पूरा किया जाना आवश्यक अन्य स्थितियों, एक टैक्स रिटर्न Preparer के रूप में कार्य करने के लिए. योजना भी आचरण और टैक्स रिटर्न preparers, एक टैक्स रिटर्न Preparer को दी प्राधिकरण वापस लिया जा सकता है, जिसके तहत परिस्थितियों, और जाने की आवश्यकता है या के लिए निर्दिष्ट किया जा सकता है जो किसी भी अन्य विषय के लिए कर्तव्यों और दायित्वों के कोड के लिए उपलब्ध करा सकता है इस खंड के प्रयोजन. इस संशोधन 2006/01/06 से प्रभाव में आ गया है. टैक्स रिटर्न Preparer योजना, तो 2006 2039 (ई) ख़बरदार अधिसूचित 28-11-2006 को अपील की गई है.

[धारा 33]

प्र.35. धारा 142 के तहत नोटिस जारी करने के लिए समय सीमा के बारे में Clarificatory संशोधन

उप - धारा में समाहित 35.1 मौजूदा प्रावधानों (1) के खंड, अन्य बातों के साथ (एक व्यक्ति उपधारा के तहत निर्धारित समय के भीतर अपनी आय का एक वापसी नहीं बनाया गया है, जहां एक मामले में मूल्यांकन करने के प्रयोजनों के लिए प्रदान करना है कि कहा 1) धारा 139 का, मूल्यांकन अधिकारी निर्धारित प्रपत्र और तरीके से उसका आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए उसे जरूरत ऐसे व्यक्ति को कहा कि उप - धारा के तहत नोटिस दे सकते हैं.

एक व्यक्ति, प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से पहले अपनी आय का एक वापसी नहीं बनाया गया है, जहां एक मामले में है कि प्रदान के रूप में तो धारा 142 की उपधारा (1) के खंड के 35.2 प्रावधानों (मैं) में संशोधन किया गया है अधिकारी का आकलन आय से उनकी वापसी के प्रस्तुत करने के लिए ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता कहा उपधारा के तहत प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति के बाद एक नोटिस सेवा कर सकता है.

35.3 यह संशोधन 2006/01/06 से प्रभाव में आ गया है.

जहां किसी सूचना के किसी भी करने के लिए प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति के बाद (1) उप - धारा के तहत 1990/01/04 पर या के बाद कार्य किया गया है कि उपलब्ध कराने के रूप में उक्त खंड (क) के लिए एक प्रावधान भी सम्मिलित किया गया है 35.4 प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से पहले अपनी आय का एक वापसी नहीं बनाया गया है, जो व्यक्ति, इस तरह की सूचना एक नोटिस उक्त उप - धारा (1) के प्रावधानों के अनुसार कार्य किया जा समझा जाएगा.

35.5 यह संशोधन 1990/01/04 से पूर्वव्यापी प्रभाव ले जाएगा.

[धारा 35]

प्र.36. उप - धारा के तहत नोटिस जारी करने के लिए समय सीमा (2) धारा 147 के तहत मूल्यांकन या फिर से मूल्यांकन करने के प्रयोजनों के लिए धारा 143 का

खंड 148 की उपधारा 36.1 मौजूदा प्रावधानों (1) धारा 147 के तहत किसी भी मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन या फिर अभिकलन करने से पहले, मूल्यांकन अधिकारी को प्रस्तुत करने के लिए उसे जरूरत, निर्धारिती पर, धारा 148 के तहत नोटिस की सेवा करेगा कि उपलब्ध कराने के अपने इस तरह के नोटिस के जवाब में सुसज्जित वापसी धारा 139 के तहत सजा हो आवश्यक एक वापसी के रूप में अगर आय या वह निर्धारणीय है जिनके संबंध में किसी भी अन्य व्यक्ति और अधिनियम के प्रावधानों की आयकर रिटर्न लागू नहीं होगी.

36.2 जहां एक वापसी खंड के तहत कार्य एक नोटिस के जवाब में 30-9-2005 को 1991/01/10 से इस अवधि के दौरान सुसज्जित किया गया है कि उपलब्ध कराने के लिए इतनी के रूप में सम्मिलित किया गया है (1) धारा 148 की उपधारा के लिए एक प्रावधान 148 और, बाद में एक नोटिस उप - धारा के तहत कार्य किया गया है (2) ने कहा कि यह उप के संशोधन से पहले तुरंत खड़ा था (2) धारा 143 की उप - धारा के परन्तुक में निर्दिष्ट बारह महीने की समाप्ति के बाद धारा 143 के धारा उपधारा में निर्दिष्ट के रूप में मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन या फिर अभिकलन बनाने के लिए वित्त अधिनियम, 2002. द्वारा लेकिन समय सीमा की समाप्ति से पहले (2) धारा 153 का, इस तरह के नोटिस वैध नोटिस होना समझा जाएगा.

एक वापसी अनुभाग 148 और तहत कार्य एक नोटिस के जवाब में 30-9-2005 को 1991/01/10 से इस अवधि के दौरान सुसज्जित किया गया है कि जहां प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में 36.3 इसके अलावा एक परंतुक ने कहा, उप - धारा में सम्मिलित किया गया है बाद में एक नोटिस खंड के अधीन कार्य किया गया है (द्वितीय) की उपधारा (2) (2) धारा 143 की उपधारा के खंड (ख) के परन्तुक में निर्दिष्ट बारह महीने की समाप्ति के बाद धारा 143 की लेकिन पहले उप खंड में निर्दिष्ट के रूप में मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन या फिर अभिकलन बनाने के लिए समय सीमा की समाप्ति (2) धारा 153 का, इस तरह के नोटिस वैध नोटिस होना समझा जाएगा.

36.4 ये संशोधन 1991/01/10 से पूर्वव्यापी प्रभाव ले जाएगा.

36.5 नव डाला पहले परंतुक या दूसरे परंतुक के प्रावधानों 1-10 को या उसके बाद से सुसज्जित किया गया है जो किसी भी वापसी के संबंध में लागू नहीं होगा कि स्पष्ट करने के लिए इतनी के रूप में उप - धारा को एक व्याख्या (1) भी सम्मिलित किया गया है - 2005 अनुभाग 148 की उपधारा (1) के तहत कार्य एक नोटिस के जवाब में.

36.6 यह संशोधन पूर्वव्यापी प्रभाव पड़ेगा और 2005/01/10 से प्रभावी हो जाएगा.

[धारा 36]

प्र.37. मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन के पूरा होने के लिए प्रदान की समय सीमा की कमी

धारा 153 का 37.1 मौजूदा प्रावधानों के मूल्यांकन और reassessments पूरा करने के लिए समय सीमा प्रदान करते हैं.आयकर अधिनियम की धारा 153B खंड 132a के तहत बुलाया गया है खोज खंड 132 या खाते की किताबें, अन्य दस्तावेज या किसी भी संपत्ति के तहत शुरू की गई है जिन मामलों में समय सीमा या मूल्यांकन के पूरा प्रदान करता है. संपत्ति कर अधिनियम की धारा 17A के मौजूदा प्रावधानों के मूल्यांकन और शुद्ध धन के reassessments पूरा करने के लिए समय सीमा प्रदान करते हैं.

एक वित्तीय वर्ष के दौरान उठाया मांग एकत्र किया जा सकता है, ताकि 37.2 समय के मूल्यांकन के पूरा होने के लिए निर्दिष्ट सीमा और वर्गों 153 और आयकर अधिनियम की 153B, और संपत्ति कर अधिनियम की धारा 17A में में फिर से आकलन संशोधित किया गया है एक ही वर्ष में.संशोधित समय सीमा तीन महीने से कम के रूप में, उक्त धाराओं के तहत निर्धारित समय सीमा में किया जाएगा.

37.3 ये संशोधन 2006/01/06 से प्रभाव में ले लिया है.

[धारा 37, 38 और 57]

प्र.38. न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) और के भुगतान के लिए क्रेडिट वर्गों 234A, 234B और 234C के तहत ब्याज के आरोप के प्रयोजनों के लिए भारत के बाहर एक देश या निर्दिष्ट क्षेत्र में भुगतान कर

एक निर्धारिती अग्रिम कर के भुगतान में आय विवरणी प्रस्तुत करने में और डिफ़ॉल्ट के लिए डिफ़ॉल्ट के लिए एक महीने के लिए हर महीने या भाग के लिए एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने के लिए दोषी ठहराया गया वर्गों 234A और 234B के मौजूदा प्रावधानों के तहत 38.1 क्रमशः.इसी अग्रिम कर की मोहलत के संबंध में खंड 234C के मौजूदा प्रावधानों के तहत निर्धारिती प्रति माह एक फीसदी की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी ठहराया गया है और 15 मार्च, एक प्रतिशत से पहले भुगतान कर की कमी नहीं है अगर कमी की मात्रा पर. भुगतान और कर कटौती की जाती या स्रोत पर एकत्र की अनुमति दी है अग्रिम कर के लिए ब्याज, क्रेडिट की गणना करते समय. उक्त धाराओं के तहत ब्याज लगाने, जबकि खंड 115JAA तहत मेट क्रेडिट, धारा 90 और धारा 91 के तहत देय आयकर से कटौती के तहत टैक्स की राहत के खाते में नहीं ले रहे हैं. भी अनुभाग 140A के तहत, ब्याज रिटर्न प्रस्तुत करने में या किसी भी डिफ़ॉल्ट या अग्रिम कर के भुगतान में देरी के लिए किसी भी देरी के लिए भुगतान करने की आवश्यकता है.

यह खंड 115JAA के तहत अनुमति दी टैक्स क्रेडिट न्यूनतम वैकल्पिक कर का भुगतान करने के लिए अग्रिम और ऋण में भुगतान कर से अलग नहीं है कि कई तिमाहियों से प्रतिनिधित्व दिया गया है 38.2 आकलन पर निर्धारित कर देयता के खिलाफ अनुमति दी जानी चाहिए.इसी तरह की एक सादृश्य में, भारत के बाहर किसी देश में करों का भुगतान के लिए क्रेडिट भी हित भारत से बाहर करों का भुगतान करने के लिए बराबर होती है कि एक राशि पर आरोप लगाया है कि नहीं है तो अनुमति दी जानी करने के लिए सिफारिश की गई है. तदनुसार, वर्गों 234A, 234B और 234C, वित्त अधिनियम, 2006 के तहत ब्याज की गणना के लिए के लिए प्रदान की गई है

(क) कुल आय पर टैक्स से अनुभाग 115JAA तहत बंद सेट होने की अनुमति दी टैक्स क्रेडिट की कमी; और

आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने से पहले धारा 90 और भारतीय आयकर से 90A और कटौती के तहत अनुमति दी टैक्स की राहत की राशि का (बी) में कमी.

ऊपर के लिए 38.3 क्रेडिट भी आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने से पहले टैक्स और ब्याज की गणना के लिए अनुभाग 140A के तहत अनुमति दी जाएगी.

38.4 उपरोक्त संशोधन 2007/01/04 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2007-08 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

38.5 परिहार्य संदेह उप - धारा (1) धारा 143 का या कुल आय पर टैक्स पर नीचे के रूप में निर्धारित कुल आय पर टैक्स पर या तो अनुभाग 234A या 234B के तहत ब्याज चार्ज करने की निर्धारिती को उपलब्ध वहाँ एक विकल्प था कि contending द्वारा उठाए जा रहे थे नियमित मूल्यांकन के बाद निर्धारित रूप में.यह एक मिथ्या विवाद है, यह, कि ब्याज (1) धारा 143 की उपधारा के तहत निर्धारित कुल आय पर कर की राशि पर आरोप लगाया जा रहा है स्पष्ट करने के लिए आवश्यक माना गया है, और जहां एक नियमित रूप से आकलन किया जाता है नियमित मूल्यांकन के बाद निर्धारित कुल आय पर टैक्स पर. एक विकल्प निर्धारिती को उपलब्ध कभी नहीं किया गया. इस स्पष्टीकरण के उप - धारा के प्रावधानों में इनबिल्ट विधान आशय की एक पुनरावृत्ति लेकिन कुछ भी नहीं है (1) धारा 234A और उप - धारा को स्पष्टीकरण 1 (1) के द्वारा मूल रूप से डाला के रूप में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 234B की प्रत्यक्ष कर कानून (संशोधन) अधिनियम, 1987 और प्रत्यक्ष कर कानून दोनों 1989/01/04 से प्रभाव के साथ क्रमश: (संशोधन) अधिनियम, 1989, के द्वारा.वर्गों 234A और 234B के लिए ये संशोधन 2007/01/04 पर आयकर अधिनियम, 1961 में सम्मिलित किया गया है.

[धारा 34, 48, 49 और 50]

प्र.39. टीडीएस और टीसीएस प्रमाण पत्र के dematerialization की मोहलत

39.1 वित्त (नं. 2) अधिनियम, 2004 के उप - धारा के प्रावधानों के तहत एक नई प्रक्रिया शुरू की (3) स्रोत पर कर कटौती के संबंध में खंड 203 की और उप - धारा को पहले परंतुक के तहत (5) में खंड 206C की स्रोत पर कर संग्रह के संबंध में मामला हो सकता है मामला, collectee हो सकता है के रूप में deductor या, कलेक्टर, deductee को टीडीएस या टीसीएस प्रमाण पत्र जारी करने की आवश्यकता है या नहीं की जाएगी कि नीचे बिछाने.प्रमाण पत्र जारी करने की आवश्यकता के साथ दूर करने का एक परिणाम के रूप में, यह खंड 199 की उपधारा (3) के तहत और (4) deductee या collectee नहीं होगा कि खंड 206C की उप - धारा के परन्तुक के तहत प्रदान किया गया काट लिया या एकत्र कर का क्रेडिट का दावा करने के लिए आय के लिए उनकी वापसी के लिए एक टीडीएस या टीसीएस प्रमाण पत्र संलग्न करने की आवश्यकता है. नई प्रक्रिया के तहत टीडीएस या टीसीएस प्रमाण पत्र जारी करने की जरूरत नहीं है, टीडीएस या टीसीएस के लिए क्रेडिट टीडीएस के संबंध में खंड 203AA के तहत शुरू प्रावधानों के अनुसार जारी किए जाने वाले करों का वार्षिक विवरण के आधार पर निर्धारण अधिकारी द्वारा दिया जाना था या टीसीएस के संबंध में (5) अनुभाग 206C की उप - धारा को दूसरे परंतुक के अनुसार. यह भी कहा कि यह कर कटौती का प्रमाण के साथ नहीं किया गया था अगर आयकर रिटर्न दोषपूर्ण नहीं समझा जाएगा कि धारा 139 की उप - धारा (9) के तहत प्रदान की गई थी.

39.2 ऊपर डीपी प्रावधानों 2005/01/04 पर या के बाद काट लिया या एकत्र कर के संबंध में 2005/01/04 से प्रभाव से लागू करने के लिए थे.काट लिया या एकत्र या 2006/01/04 पर या बाद भुगतान करों के संबंध में अस्तित्व में आने के रूप में तो वित्त अधिनियम, 2005 के माध्यम से, हालांकि, डीपी प्रावधान एक वर्ष तक टाल दिया गया.

39.3 कटौती करने और कलेक्टरों की एक बड़ी संख्या है, वे उप - धारा (3) धारा 200 की और (3) खंड 206C की उप - धारा के परन्तुक के तहत के तहत प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक हैं जो उनके त्रैमासिक बयान दाखिल करने शुरू नहीं किया है. त्रैमासिक बयान स्रोत या स्रोत पर एकत्र कर पर कर कटौती का ब्यौरा विभागीय प्रणाली में कब्जा कर रहे हैं, जहां से प्राथमिक दस्तावेज हैं.इसके अलावा, ऑन लाइन कर एकाउंटिंग सिस्टम (OLTAS) विफलता उद्धृत करने और गलत पैन और टैन के हवाले से कई मामलों में काट लिया या एकत्र या सस्पेंस खाते में जमा हो रही भुगतान किया हो रही करों में हुई है के रूप में पूरी तरह से स्थिर करने के लिए अभी तक है. डीपी प्रणाली सभी कटौती करने या लेने सही पैन और टैन के साथ सभी टीडीएस में और टीसीएस बयानों और चालान से टीडीएस या टीसीएस बयान के दाखिल होने पर निर्भर है. सभी करों, कटौती एकत्र या भुगतान OLTAS में मिलान कर रहे हैं और पूरी जानकारी देदुक्टीस 'या collectees' खाते में बसा है, जब तक डीपी में मौजूदा कागज आधारित प्रणाली के लिए विकल्प नहीं हो सकता.

देखने में 39.4 रखते हुए aforementioned कारकों, वित्त अधिनियम, 2006 की कटौती की या [धारा 203 की उप - धारा (3)] भुगतान किया है या एकत्र करों के संबंध में इस तरह के प्रावधानों को लागू करने के द्वारा दो साल से डीपी में प्रावधानों के प्रारंभ टाल दिया गया है [1 (5) 2008/01/04 से] अनुभाग 206C की उप - धारा के परन्तुक.

39.5 ये संशोधन 2006/01/04 से पूर्वव्यापी प्रभाव ले जाएगा और तदनुसार निर्धारण वर्ष 2006-07 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[धारा 31, 41, 43, 45 और 47]

स्रोत पर कर कटौती के लिए अनुभाग 155 क्रेडिट की उप - धारा (14) के मौजूदा प्रावधानों के तहत 39.6 अनुभाग 203 के तहत स्रोत पर कर कटौती का प्रमाणपत्र आयकर रिटर्न के साथ मूल रूप से दर्ज नहीं किया गया था अगर अनुमति दी है, लेकिन मूल्यांकन अधिकारी के समक्ष पेश किया जाता है प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से दो साल के भीतर.वित्त अधिनियम, 2006 से पहले स्रोत पर एकत्र कर के संबंध में धारा 139 की उपधारा के तहत सबूत (9) के रूप में इस तरह के प्रमाण पत्र की आवश्यकता की प्रविष्टि को ध्यान में रखते स्रोत पर कर का संग्रह के प्रमाण पत्र के संबंध में इस प्रावधान को बढ़ा दिया गया है 2008/01/04.

39.7 यह संशोधन 2007/01/04 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2007-08 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[धारा 31 और 39]

प्र 40 टीडीएस या टीसीएस के तिमाही बयान देने और इकट्ठा या डिफ़ॉल्ट में एक निर्धारिती के रूप में स्रोत पर एकत्र कर का भुगतान करने में विफल रहता है, जो व्यक्ति deeming पहले टीडीएस या टीसीएस डिफ़ॉल्ट के लिए ब्याज का भुगतान

धारा 201 की उप - धारा (1 ए) के 40.1 मौजूदा प्रावधानों प्रदान कि अगर किसी भी व्यक्ति, प्रिंसिपल अधिकारी या कंपनी, (1) कि खंड की, पूरे घटा नहीं करता है या कर के किसी भी भाग उपधारा में निर्दिष्ट के रूप में कटौती केन्द्र सरकार को कर का भुगतान करने में विफल रहता है के बाद या ऐसे व्यक्ति इस तरह के टैक्स पर तारीख को घटाया होने की दिनांक से इस तरह के कर की राशि पर प्रतिशत प्रति वर्ष बारह वर्ष की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने के लिए दोषी ठहराया गया जो इस तरह के टैक्स वास्तव में भुगतान किया जाता है.इसी तरह के प्रावधानों (7) अनुभाग 206C की उप - धारा के तहत स्रोत पर कर संग्रह के संबंध में मौजूद हैं. टीडीएस और टीसीएस के मौजूदा प्रावधानों, हालांकि, ब्याज के भुगतान के लिए एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया या विधा नहीं है.

एक आत्म मूल्यांकन के आधार पर कर की deductor द्वारा ब्याज के भुगतान की आवश्यकता के क्रम में 40.2, धारा 201 की उप - धारा (1 ए) व्यक्ति, प्रिंसिपल अधिकारी और कंपनी [उप में निर्दिष्ट है कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है धारा 201 की उप - धारा (1 ए) के तहत ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी धारा 201 की धारा (1)], उप - धारा (3) के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक तिमाही के लिए तिमाही बयान प्रस्तुत करने से पहले इस तरह के ब्याज का भुगतान करेगा अनुभाग 200.इसी तरह की एक लाइन में, उप - धारा (7) अनुभाग 206C की भी खंड 206C की उप - धारा (7) के तहत ब्याज का भुगतान करने के लिए कर और उत्तरदायी के संग्रह के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को प्रस्तुत करने से पहले इस तरह के ब्याज का भुगतान करेगा कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है उस अनुभाग के उप - धारा (3) के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक तिमाही के लिए तिमाही स्टेटमेंट.

40.3 ये संशोधन 2006/01/06 से प्रभावी होगा.

कर संग्रह के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को यह समझा जाएगा कि धारा 201 (1), एक नई उपधारा (6A) भी प्रदान करने के लिए टीसीएस से संबंधित अनुभाग 206C में सम्मिलित किया गया है के तहत अधिनियमित के रूप में टीडीएस के बारे में विफलता के परिणाम की तर्ज पर 40.4 ऐसे व्यक्ति कर के पूरे या किसी भी हिस्से को इकट्ठा या यह स्रोत पर एकत्र होने के बाद इस तरह के कर का भुगतान करने में विफल रहता नहीं है, तो डिफ़ॉल्ट रूप में एक निर्धारिती हो.नए प्रावधानों के आगे अनुभाग 221 के तहत किसी भी जुर्माना लगाने से पहले, मूल्यांकन अधिकारी व्यक्ति और पर्याप्त कारणों टैक्स इकट्ठा करने और भुगतान करने में विफल बिना है कि खुद को संतुष्ट करेगा कि आवश्यकता होती है.

40.5 ये संशोधन 2007/01/04 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2007-08 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[धारा 42 और 47]

प्र.41. वार्षिक टीडीएस और टीसीएस रिटर्न की प्रस्तुत के साथ भाग कर

अनुभाग 206 और धारा 206C की उप - धारा (5 ए) के मौजूदा प्रावधानों के तहत 41.1, आयकर अधिनियम के तहत कर की कटौती या संग्रह के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति के लिए तैयार है और निर्धारित आयकर प्राधिकरण एक वार्षिक वापसी के लिए देने की आवश्यकता है टैक्स की कटौती की जाती है या स्रोत पर एकत्र की.

41.2 त्रैमासिक टीडीएस के बयान और टीसीएस उप - धारा के प्रावधानों के तहत शुरू की गई थी (3) धारा 200 और उप - धारा के परन्तुक (3) 1 को या उसके बाद या काट एकत्र करों के संबंध में खंड 206C की की एक प्रणाली - 4-2005.जगह में तिमाही बयान की व्यवस्था के साथ, वार्षिक टीडीएस और वार्षिक टीसीएस रिटर्न प्रस्तुत की आवश्यकता ज़रूरत से ज़्यादा प्रदान की गई है. इसलिए, कर की वार्षिक विवरणी प्रस्तुत की आवश्यकता काट लिया और साथ तिरस्कृत किया गया है पर या 2005/01/04 के बाद काट लिया या एकत्र करों के संबंध में स्रोत पर एकत्र की. 2005/01/04 आयकर अधिनियम की धारा 272A के तहत दंड आकर्षित करने के लिए जारी करेगा से पहले स्रोत पर कर कटौती या संग्रह के लिए वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने में विफलता.

41.3 तिमाही बयान सालाना रिटर्न के लिए प्रतिस्थापित किया है, त्रैमासिक बयान प्रस्तुत करने के लिए विफलता के लिए दंड प्रावधानों के उचित ढंग से प्रदान करने के लिए युक्तिसंगत बनाया गया है कि अनुभाग 272A की उप - धारा की धारा के तहत बयान (कश्मीर) (2) वितरित करने के लिए विफलता के लिए लगाया जुर्माना मामले संग्रहणीय हो सकता है, कर छूट की राशि से अधिक है या नहीं करेगा.

उप वर्गों (5 ब) और धारा 139 क के (5D) की 41.4 मौजूदा प्रावधानों को भी सभी तिमाही बयानों उप के प्रावधानों के अनुसार तैयार और वितरित या वितरित होने की वजह से में पैन के हवाले से की आवश्यकता के लिए उपलब्ध कराने में संशोधन किया गया है खंड 200 या (3) खंड 206C की उप - धारा के परन्तुक की धारा (3). सभी तिमाही बयान में "कर कटौती खाता संख्या" या "कर संग्रह खाता संख्या" या "कर कटौती और संग्रह खाता संख्या" के हवाले से की आवश्यकता अलग उप - धारा (2) के खंड (बीए) के तहत प्रदान की गई है अनुभाग 203A.

41.5 अनुभाग 206C के तहत स्रोत पर खंड 206 या संग्रह के तहत कर कटौती की वार्षिक रिटर्न के साथ दूर कर के संबंध में संशोधन वर्गों 139 क, 203A के लिए 2006/01/04 और संशोधनों से प्रभावी होगा और 272A 1 से प्रभावी होगा - 6-2006.

[धारा 32, 44, 46, 47 और 53]

प्र.42. स्रोत पर कर जमा करने के लिए विफलता के लिए पेनल्टी

42.1 कोई जुर्माना नहीं अब तक, निर्दिष्ट स्रोत पर कर जमा करने के लिए विफलता के लिए आयकर अधिनियम के तहत, है.स्रोत पर कर संग्रह के प्रावधानों के विस्तार के बाद, बोर्ड कर के मामलों संग्रह की एक संख्या में कर संग्रह के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा नहीं गया था कि विभिन्न हलकों से जानकारी प्राप्त किया गया है.

42.2 एक नई धारा 271CA कर और जो अधिनियम के अध्याय XVII-बी बी के प्रावधानों के अनुसार स्रोत पर कर जमा करने में नाकाम रही है इकट्ठा करने के लिए जिम्मेदार है, जो किसी भी व्यक्ति पर जुर्माना लगाने के लिए प्रदान करने के लिए डाला गया है. इस तरह के दंड वह स्रोत पर इकट्ठा करने में विफल रहा है और आयकर के संयुक्त आयुक्त द्वारा लगाया जाएगा जो कर की राशि के बराबर राशि होगी.दंड का आदेश खंड 246A के तहत एक अपीलीय आदेश दिया गया है. धारा 273B भी संबंधित व्यक्ति अपनी विफलता के लिए एक उचित कारण नहीं था साबित होता है कि अगर कोई जुर्माना लगाया जाएगा कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है.

42.3 यह संशोधन 2007/01/04 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2007-08 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[धारा 51, 52 और 55]

प्र 43 तन के हवाले से झूठा के लिए जुर्माना

वह उसके लिए मूल्यांकन अधिकारी को लागू करने की आवश्यकता होती है जो अनुभाग 203A के प्रावधानों का अनुपालन करने में असफल रहती है तो आयकर अधिनियम की धारा 272BB के मौजूदा प्रावधानों के तहत 43.1, एक व्यक्ति को दस हजार रुपए की राशि का जुर्माना के लिए उत्तरदायी हो जाता है एक "कर कटौती और संग्रह खाता संख्या" का आवंटन."कर कटौती और संग्रह खाता संख्या", deductor या, जैसा भी मामला हो, कलेक्टर सभी चालान, प्रमाण पत्र, रिटर्न में और अन्य सभी दस्तावेजों में इस तरह के नंबर का उल्लेख करने की आवश्यकता है के आबंटन के बाद.

खंड 272BB की 43.2 मौजूदा प्रावधानों, हालांकि, धारा 272B के तहत एक झूठा "स्थायी खाता संख्या" के हवाले से या सूचना के लिए निर्दिष्ट दंड की तर्ज पर झूठे "कर कटौती और संग्रह खाता संख्या" उद्धृत के लिए एक दंड के लिए प्रदान नहीं करते हैं.

झूठी टैन के हवाले से 43.3 निहितार्थ एक गलत पैन उद्धृत के रूप में के रूप में गंभीर हैं. काट लिया या और नहीं deductee या collectee के खाते में खाता सस्पेंस को तैनात एकत्र कर प्राप्त करने में गलत पैन परिणामों के हवाले से करता है के रूप में झूठी तन के हवाले से.यह तन के लिए लागू नहीं होने के कुछ बैंक शाखाओं, टैन एक ही बैंक की अन्य शाखाओं को आवंटित उद्धृत कर रहे हैं कि सीखा गया है. इस तरह की घटनाओं में, कंप्यूटर प्रणाली आम या एक ही टैन असर दो शाखाओं से दो अलग रिटर्न स्वीकार नहीं करता है. गलत पैन के हवाले से और तन कागज आधारित प्रणाली डीपी का मंदा प्रगति के कारणों में से एक रहा है. डीपी में एक वास्तविकता बनाने के क्रम में, कटौती या कलेक्टरों द्वारा तन के हवाले से सही से लागू किया जाना चाहिए. काट लिया या एकत्र सभी करों ऑन लाइन कर एकाउंटिंग सिस्टम (OLTAS) में मिलान कर रहे हैं और पूरी जानकारी देदुक्टीस 'या collectees के खातों में बसा है, जब तक डीपी में पूरी तरह से मौजूदा कागज आधारित प्रणाली के लिए विकल्प नहीं हो सकता है. अतीत के अनुभव तन के लिए लागू करते हैं और निर्दिष्ट दस्तावेजों में एक ही बोली के लिए कटौती करने और लेने की आवश्यकता होती है किसी भी गाइड, प्रावधानों के मात्र अस्तित्व है, एक झूठी टैन उद्धृत के लिए दंड प्रावधानों के अभाव में वांछित अनुपालन नहीं निकला है.

43.4 इसलिए, एक नया उप - धारा (1 ए) प्रदान करने के लिए खंड 272BB में सम्मिलित किया गया है कि अगर उनके 'कर कटौती खाता संख्या' या 'कर संग्रह खाता संख्या' या 'कर कटौती और संग्रह खाता नंबर का उल्लेख करने की आवश्यकता है जो एक व्यक्ति 'चालान या प्रमाण पत्र या (2) धारा 203A की उपधारा में निर्दिष्ट बयान या अन्य दस्तावेजों में, वह जानता है या गलत होने का मानना ​​है या सच, ऐसे व्यक्ति होने का विश्वास नहीं करता है या तो झूठी और जो है, जो एक संख्या उद्धरण जुर्माना दस हजार रुपये की राशि के माध्यम से भुगतान करेगा.

संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर दिया गया है जब तक 43.5 इसके अलावा, उप - धारा (2) में निहित मौजूदा प्रावधानों के तहत, कोई जुर्माना लगाया जा सकता है.

43.6 उप - धारा (2) भी उसमें जुर्माना कहा तहत लगाया जा उप प्रस्ताव है जिस पर व्यक्ति को सुनवाई का एक मौका देने के उद्देश्य के लिए उप - धारा की एक संदर्भ (1 ए) शामिल करने के लिए संशोधन किया गया है खंड (1 ए).मामले नव डाला उप के प्रावधानों का अनुपालन करने में विफलता के लिए उचित कारण नहीं था कि यह दिखाने के लिए किया जा सकता है के रूप में खंड 272BB की उप - धारा (1 ए) के संदर्भ में भी, निर्धारिती या व्यक्ति जो सक्षम बनाता अनुभाग 273B में किया गया है खंड (1 ए).

43.7 ये संशोधन 2006/01/06 से प्रभावी होगा.

[धारा 54 और 55]

प्र.44. भविष्य निधि को मान्यता देने से संबंधित प्रावधानों को युक्तिसंगत

आयकर अधिनियम, 1961 की अनुसूची चतुर्थ भाग एक की 44.1 नियम 4 आयकर अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त करने या बनाए रखने के लिए एक भविष्य निधि से संतुष्ट करने की आवश्यकता होती है, जो स्थितियों के लिए प्रदान करता है.

यह इस तरह के रूप में कुछ शर्तों को संतुष्ट करता है ने कहा कि अगर शासन में निहित मौजूदा प्रावधानों के तहत 44.2, एक भविष्य निधि प्राप्त और मान्यता रखने सकता

(I) सभी कर्मचारियों को भारत में नियोजित किया जाएगा, या नियोक्ता भारत में व्यवसाय का मुख्य स्थान है;

(Ii) फंड एक अटल विश्वास के तहत दो या अधिक न्यासियों में या सरकारी न्यासी में निहित होगी;

(Iii) किसी भी वर्ष में एक कर्मचारी का योगदान है कि साल के लिए अपने वेतन का एक निश्चित अनुपात में किया जाएगा और कर्मचारी के वेतन से नियोक्ता द्वारा काटा जाएगा;

(Iv) किसी भी वर्ष में एक कर्मचारी की व्यक्तिगत खाते में एक नियोक्ता के योगदान को उस वर्ष में कर्मचारी के योगदान की राशि से अधिक नहीं होगी; आदि

आयकर अधिनियम और कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, मान्यता प्राप्त प्रॉविडेंट फंड में छोटे निवेशकों द्वारा सामना की जा रही समस्याओं से निपटने के लिए 1952 के बीच विधायी तालमेल प्रदान करने की दृष्टि से 44.3, एक नया खंड (ईए) कर दिया गया है फंड उप - धारा (3) या उपधारा के प्रावधानों (4) कर्मचारी भविष्य निधि की धारा 1 और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 लागू कर रहे हैं जिसे एक प्रतिष्ठान की जाएगी प्रदान करने के लिए कहा शासन में डाला और इस तरह स्थापना कि खंड में निर्दिष्ट किसी योजना के प्रावधानों के सभी या किसी के संचालन से उक्त अधिनियम की धारा 17 के तहत छूट दी गई है.

44.4 इसके अलावा, चतुर्थ अनुसूची के भाग क के नियम 3 के मुख्य आयुक्त या आयकर आयुक्त नियम 4 में निर्धारित शर्तों और इस संबंध में बोर्ड द्वारा बनाए गए नियमों को संतुष्ट करता है, जो किसी भी भविष्य निधि को मान्यता देने के हो सकता है कि प्रदान करता है.भविष्य निधि इस तरह की स्थितियों में से किसी का उल्लंघन अगर वह किसी भी समय, ऐसी मान्यता वापस ले सकते हैं. नियम 4 के प्रस्तावित खंड (ईए) में निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करते जो कहा नियम के तहत मान्यता प्राप्त भविष्य निधि के एक नंबर हो सकता है.आयकर अधिनियम के प्रावधानों और कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध के बीच एक तालमेल के बाद अधिनियम की स्थापना की जानी है, नियम 3 के उपनियम (1) में एक परंतुक एक मामले में जहां मान्यता में है कि उपलब्ध कराने के लिए डाला गया है 31-3-2006 और ऐसे भविष्य निधि नियम 4 के खंड (ईए) में निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता है या उससे पहले किसी भी भविष्य निधि के लिए दी, और बोर्ड के नियमों द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट कर सकता है जो किसी भी अन्य शर्तों की गई है इस तरह के फंड 31-3-2007 को या इससे पहले इस तरह की शर्तों को पूरा नहीं करता है, तो इस तरह के फंड को मान्यता वापस ले लिए किया जाएगा.

44.5 प्रयोज्यता - बाद निर्धारण वर्ष 2007-08 से.

[धारा 56]

प्र.45. सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स

वित्त (नं. 2) अधिनियम, 2004 के अध्याय VII के 45.1 मौजूदा प्रावधानों निर्दिष्ट प्रतिभूतियों के संबंध में लेनदेन के मूल्य पर एक प्रतिभूति लेनदेन कर की वसूली के लिए प्रदान करते हैं.

अतिरिक्त संसाधन जुटाने और राजस्व लीकेज प्लग करने की दृष्टि से 45.2, अधिनियम 2006/01/06 से प्रभाव के साथ प्रतिभूति लेनदेन कर की वसूली के लिए दरों में वृद्धि हुई है.के रूप में निम्नानुसार नई दरें इस प्रकार हैं: -

    

क्रम सं. बेच
कर योग्य प्रतिभूति लेनदेन
(2006/01/06 से पहले) पुरानी दर
(2006/01/06 को या उसके बाद) नई दर
1
एक कंपनी या एक इक्विटी ओरिएंटेड फंड की एक इकाई में एक इक्विटी शेयर की खरीद, एक मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में में प्रवेश किया और इस तरह के शेयर या यूनिट की वास्तविक सुपुर्दगी या अंतरण द्वारा तय
0.1%
0.125%
प्र.20.
एक कंपनी या एक इक्विटी ओरिएंटेड फंड की एक इकाई में एक इक्विटी शेयर की बिक्री, एक मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में में प्रवेश किया और इस तरह के शेयर या यूनिट की वास्तविक सुपुर्दगी या अंतरण द्वारा तय
0.1%
0.125%
(3)
एक कंपनी या एक इक्विटी ओरिएंटेड फंड की एक इकाई में एक इक्विटी शेयर दिये जाने के आधार पर बिक्री, एक मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में में प्रवेश
0.02%
0.025%
(4)
एक विकल्प या भविष्य जा रहा है एक व्युत्पन्न की बिक्री, एक मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में में प्रवेश
0.0133%
0.017%
प्र.5.
म्युचुअल फंड के लिए एक इक्विटी ओरिएंटेड फंड की यूनिटों की बिक्री.
0.2 %
छ. 0.25%

 [धारा 76]