ठहरावों में वाणिज्यिक सारतत्व का न होना
ठहरावों में वाणिज्यिक सारतत्व का न होना
97. (1) किसी ठहराव के बारे में यह समझा जाएगा कि उसमें वाणिज्यिक सारतत्व नहीं हैं, यदि–
(क) ठहराव का संपूर्ण सारतत्व या प्रभाव उसके पृथक्-पृथक् उपायों या उनके किसी भाग से असंगत है या उससे महत्वपूर्ण रूप से भिन्न है; या
(ख) उसमें निम्नलिखित अंतर्वलित या सम्मिलित हैं–
(i) राउंड ट्रिप वित्तपोषण ;
(ii) कोर्इ अनुकूलक पक्षकार ;
(iii) ऐसे तत्व, जिनका प्रभाव एक-दूसरे को मुजरार्इ करने या रद्द करने का है ; या
(iv) ऐसा कोर्इ संव्यवहार, जो एक या अधिक व्यक्तियों के माध्यम से किया जाता है और उससे ऐसी निधियों के, जो ऐसे संव्यवहार की विषय-वस्तु है, मूल्य, अवस्थान, स्रोत, स्वामित्व या नियंत्रण के बारे में भ्रम होता है ; या
(ग) उसमें ऐसी किसी आस्ति या किसी संव्यवहार का अवस्थान या किसी पक्षकार का निवास-स्थान अंतर्वलित है, जिसका किसी पक्षकार के लिए कर फायदा अभिप्राप्त करने से (इस अध्याय के उपबंधों के न होने पर भी) भिन्न कोर्इ महत्वपूर्ण वाणिज्यिक प्रयोजन नहीं है ; या
(घ) इसमें किसी पक्षकार के ठहराव के प्रति कारबार जोखिमों या शुद्ध नकद प्रवाहों पर, उस कर फायदे के कारण हुए माने जा सकने वाले ऐसे किसी प्रभाव के अतिरिक्त, जो (इस अध्याय के उपबंधों के न होने पर भी) अभिप्राप्त नहीं किया जाएगा, कोर्इ महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं है।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए राउंड ट्रिप वित्तपोषण के अंतर्गत ऐसा कोर्इ ठहराव भी है, जिसमें,–
(अ) इस बात पर कि क्या राउंड ट्रिप वित्तपोषण में अंतर्वलित निधियों के ठहराव के संबंध में किसी पक्षकार को अंतरित या उसके द्वारा प्राप्त की गर्इ किन्हीं निधियों से पता लगाया जा सकता है या नहीं ;
(आ) उस समय या क्रम पर, जिसमें राउंड ट्रिप वित्तपोषण में अंतर्वलित निधियां अंतरित या प्राप्त की जाती हैं; या
(इ) उन साधनों पर, जिनके द्वारा या रीति पर, जिसमें या उस ढंग पर, जिसके माध्यम से राउंड ट्रिप वित्तपोषण में अंतर्वलित निधियां अंतरित या प्राप्त की जाती हैं,
कोर्इ ध्यान दिए बिना, श्रृंखलाबद्ध संव्यवहारों के माध्यम से–
(क) निधियां, ठहराव के पक्षकारों के बीच अंतरित की जाती हैं ; और
(ख) ऐसे संव्यवहारों का (इस अध्याय के उपबधों के न होने पर भी) कर फायदा अभिप्राप्त करने से भिन्न कोर्इ महत्वपूर्ण वाणिज्यिक प्रयोजन नहीं है।
(3) इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, किसी ठहराव का कोर्इ पक्षकार अनुकूलक पक्षकार होगा, यदि संपूर्ण ठहराव या उसके किसी भाग में उस पक्षकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहभागिता का मुख्य प्रयोजन निर्धारिती के लिए प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से कोर्इ कर फायदा (इस अध्याय के उपबंधों के न होने पर भी) अभिप्राप्त करने का है, चाहे वह पक्षकार ठहराव के किसी पक्षकार के संबंध में कोर्इ संबंधित व्यक्ति है या नहीं।
(4) शंकाओं को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि यह अवधारित करते समय कि क्या किसी ठहराव में वाणिज्यिक सारतत्व है या नहीं, निम्नलिखित सुसंगत हो सकेगा किन्तु पर्याप्त नहीं होगा, अर्थात् :–
(i) वह अवधि या समय, जिसके लिए ठहराव (जिसके अंतर्गत उसमें के प्रचालन भी हैं) विद्यमान है ;
(ii) ठहराव के अधीन, प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से, करों के संदाय का तथ्य ;
(iii) यह तथ्य कि ठहराव द्वारा कोर्इ निर्गम माध्यम (जिसके अंतर्गत किसी क्रियाकलाप या कारबार या प्रचालनों का अंतरण भी है) उपलब्ध कराया जाता है।

