आदि, सदस्यों के रजिस्टर
अध्याय VII
प्रबंधन और प्रशासन
सदस्यों का पंजीयन, आदि
88.(1) प्रत्येक कंपनी निम्नलिखित रजिस्टरों को ऐसे प्रपत्र और तरीके से रखेगी और उनका रखरखाव करेगी जैसा कि निर्धारित किया जाए। , अर्थात्ः-
| (क) | भारत में या भारत से बाहर रहने वाले प्रत्येक सदस्य द्वारा धारित इक्विटी और अधिमान्य शेयरों के प्रत्येक वर्ग को अलग-अलग दर्शाते हुए सदस्यों का पंजीयन; | |
| (ख) | डिबेंचर धारकों का पंजीयन; और | |
| (ग) | किसी अन्य प्रतिभूति धारकों का पंजीयन। |
(2) उप-धारा (1) के अधीन रखे गए प्रत्येक पंजीयन में उसमें सम्मिलित नामों की एक अनुक्रमणिका सम्मिलित होगी।
(3) डिपोजिटरी अधिनियम, 1996 (1996 का 22) की धारा 11 के अधीन डिपोजिटरी द्वारा अनुरक्षित लाभार्थी स्वामियों का रजिस्टर और सूचकांक, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए समतुल्य रजिस्टर और सूचकांक माना जाएगा।
(4) यदि कंपनी अपने अनुच्छेदों द्वारा अधिकृत है, तो वह भारत के बाहर किसी भी देश में, ऐसी रीति से, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, उप-धारा (1) में निर्दिष्ट पंजीयन का एक हिस्सा रख सकती है, जिसे "विदेशी पंजीयन" कहा जाता है, जिसमें भारत के बाहर रहने वाले सदस्यों, डिबेंचर धारकों, अन्य सुरक्षा धारकों या लाभकारी मालिकों के नाम और विवरण शामिल हैं।
[ (5) यदि कोई कंपनी उपधारा (1) या उप-धारा (2) के प्रावधानों के अनुसार सदस्यों या डिबेंचर धारकों या अन्य प्रतिभूति धारकों का पंजीयन नहीं रखती है या उन्हें बनाए रखने में असफल रहती है तो कंपनी तीन लाख रुपए के जुर्माने की दायी होगी और कंपनी का प्रत्येक अधिकारी जो चूककर्ता है, पचास हजार रुपए के जुर्माने का दायी होगा। ]

