अवक्षयणीय आस्तियों की दशा में पूंजी अभिलाभों की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध
76[अवक्षयणीय आस्तियों की दशा में पूंजी अभिलाभों की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध
7750. धारा 2 के खंड (42क) में किसी बात के होते हुए भी, जहां पूंजी आस्ति ऐसी आस्ति है जो किसी ऐसे समूह का भागरूप है जिसकी बाबत इस अधिनियम के अधीन या भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) के अधीन अवक्षयण अनुज्ञात किया गया है वहां 48 और 49 के उपबंध निम्नलिखित उपान्तरणों के अध्यधीन होंगे :–
(1) जहां आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत प्रतिफल का पूर्ण मूल्य और पूर्ववर्ष के दौरान आस्ति समूह के अन्तर्गत आने वाली किसी अन्य पूंजी आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत प्रतिफल का पूर्ण मूल्य मिलकर निम्नलिखित रकमों के योग से अधिक है, अर्थात् :–
(i) ऐसे अंतरण या अंतरणों के संबंध में पूर्णत: और अनन्यत: उपगत व्यय;
(ii) पूर्ववर्ष के आरम्भ में उस आस्ति समूह का अवलिखित मूल्य; और
(iii) उस पूर्ववर्ष के दौरान अर्जित आस्ति समूह के अन्तर्गत आने वाली किसी आस्ति की वास्तविक लागत,
वहां ऐसे आधिक्य को अल्पकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ समझा जाएगा;
(2) जहां कोर्इ आस्ति समूह, इस कारण कि समूह की सभी आस्तियां उस पूर्ववर्ष के दौरान अन्तरित कर दी गर्इ हैं, उस रूप में विद्यमान नहीं रहता है, वहां आस्ति समूह के अर्जन की लागत उस पूर्ववर्ष के आरम्भ में आस्ति समूह का अवलिखित मूल्य होगी जिसमें पूर्ववर्ष के दौरान निर्धारिती द्वारा अर्जित आस्ति समूह के अंतर्गत आने वाली किसी आस्ति की वास्तविक लागत बढ़ा दी गर्इ और ऐसे अंतरण या अंतरणों के परिणामस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत आय को अल्पकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ समझा जाएगा।]
76. कराधान विधि (संशोधन एवं प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित।
इससे पूर्व पद "1 अप्रैल, 1974", पद "1 जनवरी, 1964", के स्थान पर वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से प्रतिस्थापित, और "1 जनवरी, 1964" के स्थान पर "1 जनवरी, 1954" वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1978 से प्रतिस्थापित किया गया था।
77. सुसंगत केस लॉज़ के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

