संपत्ति का गलत तरीके से रोक के लिए सजा
संपत्ति को गलत तरीके से रोके रखने पर सजा ।
452.(1) यदि किसी कंपनी का कोई अधिकारी या कर्मचारी-
| (क) | गलत तरीके से कंपनी की नकदी सहित; किसी भी संपत्ति का कब्जा प्राप्त करता है; या | |
| (ख) | यदि उसके कब्जे में नकदी सहित कोई ऐसी संपत्ति है, और वह उसे गलत तरीके से रोके रखता है या जानबूझकर उसे इस अधिनियम के अनुच्छेदों में व्यक्त या निर्देशित तथा इसके द्वारा प्राधिकृत उद्देश्यों के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करता है, |
वह कंपनी या उसके किसी सदस्य या ऋणदाता या अंशदाता की शिकायत पर दंड से दण्डनीय होगा, जो एक लाख रुपए से कम नहीं होगा, किन्तु पांच लाख रुपए तक हो सकेगा।
2) उपधारा (1) के अधीन अपराध का विचारण करने वाला न्यायालय ऐसे अधिकारी या कर्मचारी को आदेश भी दे सकता है कि वह किसी ऐसी संपत्ति या नकदी को, जो गलत तरीके से प्राप्त की गई हो या गलत तरीके से रोकी गई हो या जानबूझकर गलत उपयोग की गई हो, उसके द्वारा नियत समय के भीतर सौंप दे या ऐसी संपत्ति या नकदी से प्राप्त लाभों को वापस कर दे या चूक होने पर कारावास भुगतने का आदेश दे, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी:
[बशर्ते कि ऐसे अधिकारी या कर्मचारी, जैसा भी मामला हो, के कारावास का आदेश आवास इकाई पर गलत कब्जे या रोके रखने के लिए नहीं दिया जाएगा, यदि न्यायालय को यह समाधान हो जाता है कि कंपनी ने, जैसा भी मामला हो, उस अधिकारी या कर्मचारी को निम्नलिखित से संबंधित कोई राशि का भुगतान नहीं किया है-
| (क) | कंपनी द्वारा अपने अधिकारियों या कर्मचारियों के कल्याण के लिए बनाए गए भविष्य निधि, पेंशन निधि, उपदान निधि या कोई अन्य निधि; | |
| (ख) | मृत्यु या विकलांगता के संबंध में कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923 (1923 का 19) के अंतर्गत प्रतिकर या प्रतिकर के लिए दायित्व। ] |

