आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 33कख

चाय विकास खाते

धारा

धारा संख्या

33कख

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2001

चाय विकास खाते

चाय विकास खाते

4[चाय विकास खाता

33कख. (1) जहां किसी निर्धारिती ने, जो भारत में चाय उगाने और बनाने का कारबार करता है वहां पूर्ववर्ष की समाप्ति से छह मास बीतने के पूर्व या अपनी आय की विवरणी देने के पूर्व, 5[इनमें से जो भी पहले हो ;

(क) राष्ट्रीय बैंक में निर्धारिती द्वारा रखे गए खाते में (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् विशेष खाता कहा गया है) कोर्इ रकम या रकमें, चाय बोर्ड द्वारा इस निमित्त अनुमोदित स्कीम के (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् स्कीम कहा गया है) अनुसार और उसमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए जमा की है; या

(ख) केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से चाय बोर्ड द्वारा बनार्इ गर्इ किसी स्कीम के (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् निक्षेप स्कीम कहा गया है) अनुसार और उसमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए निर्धारिती द्वारा खोले गए किसी खाते में (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् चाय निक्षेप खाता कहा गया है) कोर्इ रकम जमा की है,

वहां इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निर्धारिती को],—

(क) इस प्रकार जमा की गर्इ रकम या रकमों के योग के बराबर राशि की; या

(ख) ऐसे कारबार के लाभ के 5क[बीस] प्रतिशत के बराबर राशि की, (इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती करने के पहले "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन संगणित), कटौती (ऐसी कटौती पूर्ववत्त्र्ाी वर्षों से अग्रनीत किसी हानि के, यदि कोर्इ हो, धारा 72 के अधीन मुजरा किए जाने के पूर्व अनुज्ञात की गर्इ है),

इनमें से जो भी कम हो, अनुज्ञात की जाएगी :

परन्तु जहां ऐसा निर्धारिती कोर्इ फर्म या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय है, वहां इस धारा के अधीन कटौती, किसी भागीदार या ऐसी फर्म, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय जो भी हो के किसी सदस्य की आय की संगणना करने में अनुज्ञात नहीं की जाएगी :

परन्तु यह और कि जहां विशेष खाते में 6[या चाय निक्षेप खाते में], जमा की गर्इ किसी रकम के संबंध में कोर्इ कटौती किसी पूर्ववर्ष में इस उपधारा के अधीन अनुज्ञात की गर्इ है, वहां किसी अन्य पूर्ववर्ष में ऐसी रकम के संबंध में कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

(2) उपधारा (1) के अधीन कटौती तब तक अनुज्ञेय नहीं होगी जब तक कि जिस निर्धारण वर्ष के लिए कटौती का दावा किया गया है, उस निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए, उस निर्धारिती के कारबार के लेखाओं की, धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण में परिभाषित किसी लेखापाल द्वारा संपरीक्षा नहीं की गर्इ है, और निर्धारिती, अपनी आय की विवरणी के साथ, ऐसे लेखापाल द्वारा सम्यक्त: हस्ताक्षरित7 और सत्यापित ऐसी संपरीक्षा की विहित फार्म में रिपोर्ट नहीं देता है :

परन्तु उस दशा में जहां निर्धारिती से किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन अपने लेखाओं की संपरीक्षा कराना अपेक्षित है, वहां इस उपधारा के उपबंधों का पर्याप्त अनुपालन होगा यदि ऐसा निर्धारिती ऐसे कारबार के लेखे ऐसी विधि के अधीन संपरीक्षा कराता है और ऐसी अन्य विधि के अधीन अपेक्षित संपरीक्षा की रिपोर्ट तथा इस उपधारा के अधीन विहित प्ररूप में एक और रिपोर्ट देता है।

8[(3) विशेष खाते में या चाय निक्षेप खाते में निर्धारिती के नाम से जमा रकम, यथास्थिति, स्कीम या निक्षेप स्कीम में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए या नीचे विनिर्दिष्ट परिस्थिति के सिवाय वापस नहीं लेने दी जाएगी]:—

(क) कारबार का बंद किया जाना;

(ख) निर्धारिती की मृत्यु;

(ग) हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का विभाजन;

(घ) फर्म का विघटन;

(ड़) कंपनी का परिसमापन।

(4) उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती निम्नलिखित के क्रय के लिए उपयोग की गर्इ किसी रकम की बाबत अनुज्ञात नहीं की जाएगी अर्थात्—

(क) ऐसी मशीनरी या संयंत्र जिसे किसी कार्यालय के परिसर या किसी निवास-स्थान में, जिसके अंतर्गत अतिथि-गृह के प्रकार का कोर्इ निवास-स्थान भी है, लगाया जाना है;

(ख) कोर्इ कार्यालय साधित्र (जो संगणक नहीं हैं);

(ग) ऐसी मशीनरी या संयंत्र जिसकी सम्पूर्ण वास्तविक लागत किसी पूर्ववर्ष में "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में, कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाती है (चाहे यह अवक्षयण के रूप में हो या अन्यथा);

(घ) ऐसी नर्इ मशीनरी या संयंत्र, जिसे ग्यारहवीं अनुसूची की सूची में विनिर्दिष्ट किसी वस्तु या चीज के निर्माण, विनिर्माण या उत्पादन के कारबार के प्रयोजनों के लिए किसी औद्योगिक उपक्रम में लगाया जाना है।

(5) जहां विशेष खाते में 9[या चाय निक्षेप खाते में] निर्धारिती के नाम में जमा कोर्इ रकम, किसी पूर्ववर्ष के दौरान निर्धारिती द्वारा उपधारा (3) के खंड (क) या खंड (घ) में विनिर्दिष्ट परिस्थिति में वापस ली जाती है, वहां ऐसी संपूर्ण रकम उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में उसी प्रकार आय-कर से प्रभार्य होगी मानो कारबार बन्द न किया गया हो या फर्म का विघटन न हुआ हो।

(6) जहां विशेष खाते में 10[या चाय निक्षेप खाते में] निर्धारिती के नाम से जमा रकम का, निर्धारिती द्वारा ऐसे कारबार के संबंध में किसी व्यय के प्रयोजनों के लिए स्कीम 10[या निक्षेप स्कीम] के अनुसार उपयोग किया जाता है, वहां ऐसा व्यय "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।

(7) जहां विशेष खाते में 10[या चाय निक्षेप खाते में] निर्धारिती के नाम से जमा किसी ऐसी रकम का, जो स्कीम 10[या निक्षेप स्कीम] के अनुसार ऐसे कारबार के प्रयोजनों के लिए निर्धारिती द्वारा उपयोग किए जाने के लिए राष्ट्रीय बैंक द्वारा किसी पूर्ववर्ष के दौरान निर्मुक्त की जाती है, 10[या जो निर्धारिती द्वारा चाय निक्षेप खाते से निकाली जाती है], उस पूर्ववर्ष के भीतर पूर्णत: या भागत: उपयोग नहीं किया जाता है, कारबार का लाभ और अभिलाभ समझा जाएगा और तदनुसार उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में आय-कर से प्रभार्य होगी :

परन्तु यह उपधारा उस दशा में लागू नहीं होगी जहां ऐसी रकम खाते के उपधारा (3) के खंड (ख), खंड (ग) और खंड (ड़) में विनिर्दिष्ट परिस्थितियों में बंद किए जाने पर किसी पूर्ववर्ष के दौरान निर्मुक्त की जाती है।

(8) जहां स्कीम 10[या निक्षेप स्कीम] के अनुसार अर्जित कोर्इ आस्ति उस पूर्ववर्ष के अन्त से, जिसमें वह अर्जित की गर्इ थी, आठ वर्ष की समाप्ति के पूर्व किसी समय निर्धारिती द्वारा व्यक्ति को किसी पूर्ववर्ष में विक्रय की जाती है या अन्यथा अंतरित की जाती है, वहां ऐसी आस्ति की लागत का ऐसा भाग जो उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात कटौती से संबंधित है, उस पूर्ववर्ष के, जिसमें ऐसी आस्ति विक्रय की जाती है या अन्यथा अन्तरित की जाती है, कारबार या वृत्ति का लाभ और अभिलाभ समझा जाएगा और तदनुसार उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में आय-कर से प्रभार्य होगा :

परन्तु इस उपधारा की कोर्इ बात वहां लागू नहीं होगी जहां—

(i) वह आस्ति निर्धारिती द्वारा सरकार को, स्थानीय प्राधिकरण को, केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम को या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में परिभाषित किसी सरकारी कंपनी11 को बेची जाती है या अन्यथा अन्तरित की जाती है; या

(ii) ऐसी आस्ति का विक्रय या अन्तरण फर्म द्वारा चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति में किसी कंपनी द्वारा ऐसी फर्म के उत्तरवर्तन के संबंध में किया जाता है जिसके परिणामस्वरूप वह फर्म किसी आस्ति का उस कंपनी को विक्रय करती है या अन्यथा अन्तरण करती है और स्कीम 12[या निक्षेप स्कीम] उस कंपनी को उसी रीति से लागू बनी रहती है जिस रीति में फर्म को लागू थी।

स्पष्टीकरण.–परन्तुक के खंड (ii) के उपबंध तभी लागू होंगे जब—

(i) उत्तरवर्तन के ठीक पूर्व कारबार या वृत्ति से संबंधित फर्म की सभी सम्पत्ति कंपनी की सम्पत्ति हो जाती है;

(ii) उत्तरवर्तन के ठीक पूर्व कारबार या वृत्ति से संबंधित फर्म के सभी दायित्व कंपनी के दायित्व हो जाते हैं; और

(iii) कम्पनी के सभी शेयरधारक ऐसे उत्तरवर्तन के ठीक पूर्व फर्म के भागीदार थे।

(9) यदि केन्द्रीय सरकार ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझती है तो वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस धारा के अधीन अनुज्ञेय कटौती उस तारीख के पश्चात् जिसे उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

स्पष्टीकरण.–इस धारा में,—

(क) "राष्ट्रीय बैंक" से अभिप्रेत है राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 (1981 का 61) की धारा 3 के अधीन स्थापित राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक;

(ख) "चाय बोर्ड" से अभिप्रेत है चाय अधिनियम, 1953 (1953 का 29) की धारा 4 के अधीन स्थापित चाय बोर्ड।

 

4. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से अंत:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से संशोधित धारा 33कख इस प्रकार थी :

'33ख. चाय विकास खाता–(1) जहां भारत में चाय उगाने और बनाने का कारबार करने वाले निर्धारिती ने, पूर्ववर्ष के दौरान, चाय बोर्ड द्वारा इस निमित्त अनुमोदित स्कीम के अनुसार (इस धारा में स्कीम कहा गया है) बैंक में निर्धारिती द्वारा रखे गए खाते में (जिसे उसके पश्चात इस धारा में विशेष खाता कहा गया है) कोर्इ रकम या रकमें राष्ट्रीय बैंक में जमा की हैं; वहां निर्धारिती, इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निम्नलिखित कटौती के लिए अनुज्ञात किया जाएगा--

(क) पूर्ववर्ष के दौरान इस प्रकार जमा रकम या रकम के योग के बराबर राशि, या

(ख) ऐसे कारबार के लाभों के बीस प्रतिशत के बराबर राशि (इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती करने से पूर्व "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन संगणित),

जो भी इनमें से कम हो।

स्पष्टीकरण.–इस धारा में--

(क) "राष्ट्रीय बैंक" से कृषि और ग्रामीण विकास राष्ट्रीय बैंक अधिनियम, 1981 (1981 का 61) की धारा 3 के अधीन स्थापित कृषि और ग्रामीण विकास राष्ट्रीय बैंक अभिप्रेत है;

(ख) "चाय बोर्ड" से चाय अधिनियम, 1953 (1953 का 29) की धारा 4 के अधीन स्थापित चाय बोर्ड अभिप्रेत है।

(2) जहां पूर्ववर्ष के दौरान विशेष खाते में निर्धारिती द्वारा जमा की गर्इ रकम या रकमों का योग उपधारा (1) के अधीन कटौती के रूप में अनुज्ञेय राशि से अधिक है, वहां वह आधिक्य इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ठीक अगले पूर्ववर्ष में निर्धारिती द्वारा किया गया जमा माना जाएगा।

(3) जहां विशेष खाते में निर्धारिती की जमा राशि स्कीम के अनुसार उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारबार के प्रयोजनों के लिए निर्धारिती द्वारा निम्नलिखित के लिए प्रयुक्त की जाती है,–

(क) भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर रूपी किसी आस्ति को अर्जित करने के लिए, वहाँ धारा 43 के खंड (1) के अधीन अवधारित ऐसी आस्ति की वास्तविक लागत में से इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए इस प्रकार प्रयुक्त रकम घटा दी जाएगी;

(ख) ऐसे कारबार के प्रयोजनों के लिए कोर्इ व्यय करने के लिए, वहाँ ऐसे व्यय में से इस प्रकार प्रयुक्त रकम घटा दी जाएगी और शेष राशि को इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ हिसाब में लिया जाएगा।

(4) जहां विशेष खाते में निर्धारिती की कोर्इ जमाराशि राष्ट्रीय बैंक द्वारा किसी पूर्ववर्ष के दौरान निर्धारिती द्वारा स्कीम के अनुसार उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारबार के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किए जाने के लिए निर्मुक्त की जाए, और जिसे उस पूर्ववर्ष के दौरान पूर्णत: या भागत: इस प्रकार प्रयुक्त नहीं किया जाए, वहां यथास्थिति ऐसी पूरी राशि या उसका कोर्इ भाग जो इस प्रकार प्रयुक्त न किया जाए, कारबार के लाभ और अभिलाभ समझा जाएगा और तद्नुसार उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में आयकर लगेगा।

(5) इस धारा के उपबंध 1 अप्रैल, 1986 और 1 अप्रैल, 1987 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्षों के संबंध में लागू होंगे।'

5. "इनमें से जो भी पहले हो, राष्ट्रीय बैंक" से प्रांरभ होने वाले और "निर्धारिती को" शब्दों से समाप्त होने वाले पद के स्थान पर वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से प्रतिस्थापित किया गया।

5क. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से शब्द "बीस" के स्थान पर "चालीस" शब्द प्रतिस्थापित किया जाएगा।

6. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित।

7. धारा 33कख(2) की संपरीक्षा रिपोर्ट के लिए देखिए नियम 5कग और प्ररूप संख्या 3कग।

8. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से "विशेष खाते में निर्धारिती के नाम से जमा रकम स्कीम में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के सिवाय वापस नहीं लेने दी जाएगी" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

9. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित।

10. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित।

11. "सरकारी कम्पनी" की परिभाषा के लिए देखिए पृष्ठ 1.25 पर पाद टिप्पण 46।

12. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

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