आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 3

परिभाषाएं

धारा

धारा संख्या

3

अध्याय शीर्षक

अधिनियम

साधारण खंड अधिनियम , 1897

वर्ष

परिभाषाएं

परिभाषाएँ

सामान्य परिभाषाएं

[ परिभाषाएं

3.इस अधिनियम में, तथा इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात बनाए गए सभी केन्द्रीय अधिनियमों और विनियमों में, जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई प्रतिकूल बात न हो -

(1)   "दुष्प्रेरण" का, इसके व्याकरणिक रूपान्तरणों और सजातीय पदों सहित, वही अर्थ होगा जो भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) में है;
(2)   किसी अपराध या सिविल गलत कार्य के संदर्भ में प्रयुक्त "कार्य" में कार्यों की एक श्रृंखला शामिल होगी, और जो शब्द किए गए कार्यों को संदर्भित करते हैं वे अवैध चूकों तक भी विस्तारित होंगे;
(3)   "शपथ पत्र" में उन व्यक्तियों के मामले में प्रतिज्ञान और घोषणा शामिल होगी जिन्हें कानून द्वारा शपथ लेने के बजाय प्रतिज्ञान या घोषणा करने की अनुमति है;
(4)   "बैरिस्टर" का तात्पर्य होगा, इंग्लैंड या आयरलैंड का बैरिस्टर, या स्कॉटलैंड में अधिवक्ताओं के संकाय का सदस्य;
(5)   "ब्रिटिश भारत" का तात्पर्य, भारत सरकार अधिनियम, 1935 के भाग III के प्रारंभ से पहले की अवधि के संबंध में, महामहिम के अधिराज्यों के भीतर सभी क्षेत्र और स्थान होंगे जो उस समय भारत के गवर्नर-जनरल के माध्यम से या भारत के गवर्नर-जनरल के अधीनस्थ किसी गवर्नर या अधिकारी के माध्यम से महामहिम द्वारा शासित थे, और उस तारीख के बाद और भारत के प्रभुत्व की स्थापना की तारीख से पहले की किसी भी अवधि के संबंध में, गवर्नर के प्रांतों और मुख्य आयुक्तों के प्रांतों के अंतर्गत उस समय समाहित सभी क्षेत्र हैं, सिवाय इसके कि भारत सरकार अधिनियम, 1935 के भाग III के प्रारंभ से पहले पारित या बनाए गए किसी भारतीय कानून में ब्रिटिश भारत के संदर्भ में बरार का संदर्भ शामिल नहीं होगा;
(6)   "ब्रिटिश अधिकार" का तात्पर्य महारानी के अधिराज्यों के किसी भी भाग से होगा, यूनाइटेड किंगडम को छोड़कर, और जहां उन अधिराज्यों के हिस्से केंद्रीय और स्थानीय विधानमंडल दोनों के अधीन हैं, केंद्रीय विधानमंडल के अधीन सभी हिस्से, इस परिभाषा के प्रयोजनों के लिए, एक ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र माने जाएंगे;
(7)   "केन्द्रीय अधिनियम" का तात्पर्य संसद द्वारा पारित अधिनियम से होगा और इसमें निम्नलिखित शामिल होंगे -
(क)   संविधान के प्रारंभ से पहले पारित प्रभुत्व विधानमंडल या भारतीय विधानमंडल का अधिनियम; और
(ख)   ऐसे प्रारंभ से पहले सपरिषद गवर्नर-जनरल या विधायी हैसियत में कार्यरत गवर्नर-जनरल द्वारा बनाया गया अधिनियम;
(8)   केंद्र सरकार करेगा,-
(क)   संविधान के प्रारंभ से पूर्व की गई किसी बात के संबंध में, "राज्यपाल-जनरल" या "राज्यपाल-जनरल-सपरिषद्" से, जैसा भी मामला हो, अभिप्रेत है; और इसके अंतर्गत निम्नलिखित सम्मिलित होंगे, -
(झ)   भारत शासन अधिनियम, 1935 की धारा 124 की उपधारा (1) के अधीन किसी प्रांत की सरकार को सौंपे गए कार्यों के संबंध में, उस उपधारा के अधीन उसे दिए गए प्राधिकार के दायरे में कार्य करने वाली प्रांतीय सरकार; और
(ii)   मुख्य आयुक्त के प्रांत के प्रशासन के संबंध में, उक्त अधिनियम की धारा 94 की उपधारा (3) के अधीन उसे दिए गए प्राधिकार के दायरे में कार्य करने वाला मुख्य आयुक्त; और
(ख)   संविधान के प्रारंभ के पश्चात की गई या की जाने वाली किसी बात के संबंध में, इसका अर्थ है, राष्ट्रपति;
  और इसमें सम्मिलित होंगे,—
(झ)   संविधान के अनुच्छेद 258 के खंड (1) के अधीन किसी राज्य सरकार को सौंपे गए कार्यों के संबंध में, राज्य सरकार उस खंड के अधीन उसे दिए गए प्राधिकार के दायरे में कार्य करेगी; [***]
(ii)   भाग सी राज्य के प्रशासन के संबंध में [संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 के प्रारंभ से पहले], मुख्य आयुक्त या उपराज्यपाल या किसी पड़ोसी राज्य की सरकार या अन्य प्राधिकारी जो संविधान के अनुच्छेद 239 या अनुच्छेद 243 के तहत उसे दिए गए अधिकार के दायरे में काम कर रहा हो, जैसा भी मामला हो; 2 [और
(iii)   किसी संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासन के संबंध में, उसका प्रशासक संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन उसे दिए गए प्राधिकार के दायरे में कार्य करेगा];
(9)   "अध्याय" का तात्पर्य अधिनियम या विनियमन के उस अध्याय से होगा जिसमें यह शब्द आता है;
(10)   "मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकरण" या "मुख्य राजस्व प्राधिकरण" का तात्पर्य होगा -
(क)   किसी राज्य में जहां राजस्व बोर्ड है, वह बोर्ड;
(ख)   किसी राज्य में जहां राजस्व आयुक्त है, वह आयुक्त;
(ग)   पंजाब में, वित्तीय आयुक्त; और
(घ)   अन्यत्र, ऐसा प्राधिकारी जिसे संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 1 में प्रगणित विषयों के संबंध में केन्द्रीय सरकार, और अन्य विषयों के संबंध में राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियुक्त करे;
(11)   "कलेक्टर" का अर्थ, किसी प्रेसिडेंसी नगर में, यथास्थिति, कलकत्ता, मद्रास या बम्बई का कलेक्टर होगा, और अन्यत्र किसी जिले के राजस्व प्रशासन का मुख्य प्रभारी अधिकारी होगा;
(12)   कॉलोनी-
(क)   भारत सरकार अधिनियम, 1935 के भाग III के प्रारम्भ के पश्चात पारित किसी केन्द्रीय अधिनियम में, "भारत" का तात्पर्य ब्रिटिश द्वीप समूह को छोड़कर महामहिम के अधिराज्यों का कोई भाग, भारत और पाकिस्तान के अधिराज्यों (और उन अधिराज्यों की स्थापना से पूर्व ब्रिटिश भारत), वेस्टमिंस्टर संविधि, 1931 में परिभाषित कोई अधिराज्यों, उक्त अधिराज्यों में से किसी का भाग बनने वाला कोई प्रांत या राज्य तथा ब्रिटिश बर्मा से होगा; तथा
(ख)   उक्त अधिनियम के भाग III के प्रारंभ से पहले पारित किसी भी केंद्रीय अधिनियम में, ब्रिटिश द्वीप समूह और ब्रिटिश भारत को छोड़कर महामहिम के अधिराज्यों का कोई भी हिस्सा;
  और किसी भी मामले में जहां उन अधिराज्यों के हिस्से केंद्रीय और स्थानीय विधानमंडल दोनों के तहत हैं, केंद्रीय विधानमंडल के तहत सभी भागों को, इस परिभाषा के उद्देश्यों के लिए, एक उपनिवेश माना जाएगा;
(13)   किसी अधिनियम या विनियमन के संदर्भ में प्रयुक्त "प्रारंभ" का तात्पर्य उस दिन से होगा जिस दिन अधिनियम या विनियमन लागू होता है;
(14)   "आयुक्त" का तात्पर्य किसी प्रभाग के राजस्व प्रशासन के मुख्य प्रभारी अधिकारी से होगा;

राज्य संशोधन

असम

खंड ( 14 ) में "प्रभाग" शब्दों के पश्चात् निम्नलिखित शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:-

"और इसमें असम राजस्व न्यायाधिकरण भी शामिल होगा, जबकि राजस्व मामलों में अपील और पुनरीक्षण में आयुक्त द्वारा अब तक प्रयोग की गई अधिकारिता का प्रयोग किया जाता है"

[असम अधिनियम 1, 1939, जिसे असम अधिनियम 4, 1940 द्वारा संशोधित किया गया]

(15)   "संविधान" का तात्पर्य भारत के संविधान से होगा;
(16)   "वाणिज्य दूतावास अधिकारी" में महावाणिज्यदूत, वाणिज्यदूत दूतावास, उप-वाणिज्यदूत, वाणिज्य दूतावास एजेंट, प्रो-वाणिज्यदूत और कोई भी व्यक्ति शामिल होगा जो महावाणिज्यदूत, वाणिज्यदूत , उप-वाणिज्यदूत या वाणिज्य दूतावास एजेंट के कर्तव्यों का पालन करने के लिए अधिकृत है;
(17)   "जिला न्यायाधीश" से तात्पर्य मूल अधिकारिता वाले किसी प्रधान सिविल न्यायालय के न्यायाधीश से होगा, किन्तु इसमें अपने साधारण या असाधारण मूल सिविल अधिकारिता के प्रयोग में आने वाला कोई उच्च न्यायालय शामिल नहीं होगा;
(18)   "दस्तावेज" में किसी सारांश पर अक्षरों, अंकों या चिह्नों के माध्यम से या इनमें से एक से अधिक माध्यमों से लिखी, व्यक्त या वर्णित कोई भी बात शामिल होगी, जिसका उपयोग उस बात को रिकॉर्ड करने के प्रयोजन के लिए किया जाना है या किया जा सकता है;
(19)   "अधिनियमित" में विनियमन (जैसा कि इसके बाद परिभाषित किया गया है) और बंगाल, मद्रास या बॉम्बे कोड का कोई विनियमन शामिल होगा, और इसमें किसी भी अधिनियम या पूर्वोक्त किसी भी विनियमन में निहित कोई प्रावधान भी शामिल होगा;

राज्य संशोधन

आंध्र प्रदेश

खंड ( 19 ) में, "बंगाल, मद्रास या बम्बई संहिता का कोई विनियमन" शब्दों के पश्चात् "और 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पूर्व आंध्र राज्य में प्रवृत्त मद्रास संहिता का कोई विनियमन" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे।

[ आंध्र प्रदेश ए.एल.ओ., 1954 और आंध्र प्रदेश ए.एल.ओ., 1957]

तमिलनाडु

आंध्र प्रदेश ए.एल.ओ 1954 और आंध्र प्रदेश ए.एल.ओ. द्वारा संशोधित खंड (19) में। 1957 में, "आंध्र प्रदेश राज्य जैसा कि वह 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पहले अस्तित्व में था" शब्दों के स्थान पर "आंध्र प्रदेश और मद्रास (सीमा परिवर्तन) अधिनियम, 1959 (1959 का केंद्रीय अधिनियम 56) की द्वितीय अनुसूची में विनिर्दिष्ट क्षेत्र" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।

[तमिलनाडु ( अतिरिक्त क्षेत्र ) ए.एल.ओ. 1961]

(20)   "पिता" में, ऐसे किसी व्यक्ति के मामले में जिसका व्यक्तिगत कानून दत्तक ग्रहण की अनुमति देता है, दत्तक पिता भी शामिल होगा;
(21)   "वित्तीय वर्ष" का तात्पर्य अप्रैल माह के प्रथम दिन से प्रारम्भ होने वाला वर्ष होगा;
(22)   कोई कार्य "सद्भावपूर्वक" किया गया माना जाएगा, जहां वह वास्तव में ईमानदारी से किया गया हो, चाहे वह लापरवाही से किया गया हो या नहीं;
(23)   "सरकार" या "सरकार" में केन्द्रीय सरकार और कोई राज्य सरकार दोनों शामिल होंगे;
(24)   "सरकारी प्रतिभूतियों" का तात्पर्य केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार की प्रतिभूतियों से होगा, किन्तु संविधान के प्रारंभ से पूर्व बनाए गए किसी अधिनियम या विनियमन में किसी भाग बी राज्य की सरकार की प्रतिभूतियां शामिल नहीं होंगी;
(25)   सिविल कार्यवाहियों के संदर्भ में प्रयुक्त "उच्च न्यायालय" का तात्पर्य भारत के उस भाग में उच्चतम सिविल अपील न्यायालय (सर्वोच्च न्यायालय को छोड़कर) से होगा जिसमें उक्त पद वाला अधिनियम या विनियम प्रभावी है;
(26)   "अचल संपत्ति" में भूमि, भूमि से उत्पन्न होने वाले लाभ, तथा धरती से जुड़ी हुई चीजें, या धरती से जुड़ी किसी भी चीज से स्थायी रूप से जुड़ी हुई चीजें शामिल होंगी;
(27)   "कारावास" का तात्पर्य भारतीय दंड संहिता में परिभाषित किसी भी प्रकार का कारावास होगा;
(28)   भारत का तात्पर्य होगा,-
(क)   भारत अधिराज्य की स्थापना से पहले की किसी भी अवधि के संबंध में, ब्रिटिश भारत, भारतीय शासकों के सभी क्षेत्रों सहित, जो उस समय महामहिम के आधिपत्य में थे, ऐसे भारतीय शासक के आधिपत्य में सभी क्षेत्र, और जनजातीय क्षेत्र;
(ख)   भारत अधिराज्य की स्थापना के पश्चात् तथा संविधान के प्रारंभ से पूर्व की किसी अवधि के संबंध में, उस अधिराज्य में तत्समय सम्मिलित सभी क्षेत्र; तथा
(ग)   संविधान के प्रारंभ के पश्चात् किसी अवधि के संबंध में, भारत के राज्यक्षेत्र में तत्समय समाविष्ट सभी राज्यक्षेत्र;
(29)   "भारतीय कानून" से तात्पर्य किसी अधिनियम, अध्यादेश, विनियमन, नियम, [आदेश, उप-कानून या अन्य उपकरण] से होगा, जो संविधान के प्रारंभ से पहले भारत के किसी प्रांत या उसके किसी भाग में कानून का बल रखता था, या उसके बाद किसी भाग ए राज्य या भाग सी राज्य या उसके किसी भाग में कानून का बल रखता है, लेकिन इसमें यूनाइटेड किंगडम की संसद का कोई अधिनियम या ऐसे अधिनियम के तहत बनाया गया कोई परिषद आदेश, नियम या अन्य उपकरण शामिल नहीं है;
(30)   "भारतीय राज्य" का तात्पर्य किसी ऐसे क्षेत्र से होगा जिसे केन्द्रीय सरकार ने संविधान के प्रारंभ से पूर्व राज्य के रूप में मान्यता दी हो, चाहे उसे राज्य, संपदा, जागीर या अन्यथा कहा वर्णित किया गया हो;
(31)   "स्थानीय प्राधिकरण" का तात्पर्य होगा एक नगरपालिका समिति, जिला बोर्ड, बंदरगाह आयुक्तों का निकाय या अन्य प्राधिकरण जो कानूनी रूप से हकदार है, या सरकार द्वारा नगरपालिका या स्थानीय कोष के नियंत्रण या प्रबंधन के साथ सौंपा गया है;
(32)   "मजिस्ट्रेट" में वह प्रत्येक व्यक्ति शामिल होगा जो वर्तमान में लागू दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत मजिस्ट्रेट की सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करता है;
(33)   जहाज के संदर्भ में प्रयुक्त "मास्टर" का तात्पर्य होगा, कोई भी व्यक्ति (पायलट या बंदरगाह-मास्टर को छोड़कर) जो उस समय जहाज का नियंत्रण या प्रभार संभाल रहा हो;
(34)   "विलयित क्षेत्र" से तात्पर्य वे क्षेत्र होंगे जो भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 290-क के अधीन किए गए आदेश के आधार पर संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले इस प्रकार प्रशासित हो रहे थे मानो वे राज्यपाल के प्रांत का भाग हों या मुख्य आयुक्त का प्रांत हों;
(35)   "माह" का तात्पर्य ब्रिटिश कैलेंडर के अनुसार गिना जाने वाला महीना होगा;
(36)   "चल संपत्ति" से तात्पर्य अचल संपत्ति को छोड़कर हर प्रकार की संपत्ति से होगा;
(37)   "शपथ" में उन व्यक्तियों के मामले में प्रतिज्ञान और घोषणा शामिल होगी जिन्हें कानून द्वारा शपथ लेने के बजाय प्रतिज्ञान या घोषणा करने की अनुमति है;
(38)   "अपराध" का तात्पर्य किसी ऐसे कार्य या चूक से होगा जो वर्तमान में लागू किसी कानून द्वारा दंडनीय हो;
(39)   "आधिकारिक राजपत्र" या "राजपत्र" का तात्पर्य भारत के राजपत्र या किसी राज्य के आधिकारिक राजपत्र से होगा;
(40)   "भाग" का तात्पर्य अधिनियम या विनियमन के उस भाग से होगा जिसमें यह शब्द आता है;
(41)   "भाग क राज्य" का तात्पर्य संविधान की अनुसूची 1 के भाग क में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य से होगा [जैसा कि संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 से पूर्व प्रवृत्त था,] "भाग ख राज्य" का तात्पर्य उस अनुसूची के भाग ख में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य से होगा और "भाग ग राज्य" का तात्पर्य उस अनुसूची के भाग ग में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य या संविधान के अनुच्छेद 243 के उपबंधों के अधीन राष्ट्रपति द्वारा तत्समय प्रशासित क्षेत्र से होगा;
(42)   "व्यक्ति" में कोई भी कंपनी या संगठन या व्यक्तियों का निकाय शामिल होगा, चाहे वह निगमित हो या नहीं;
(43)   "राजनीतिक एजेंट" का तात्पर्य होगा,-
(क)   भारत के बाहर किसी क्षेत्र के संबंध में, ऐसे क्षेत्र में केन्द्रीय सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रधान अधिकारी, चाहे उसे किसी भी नाम से जाना जाए; और
(ख)   भारत के भीतर किसी ऐसे क्षेत्र के संबंध में, जिस पर उक्त पद वाले अधिनियम या विनियमन का विस्तार नहीं है, उस अधिनियम या विनियमन के अधीन राजनीतिक एजेंट की सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त कोई अधिकारी;
(44)   "प्रेसिडेंसी नगर" का तात्पर्य, यथास्थिति, कलकत्ता, मद्रास या बम्बई उच्च न्यायालय की साधारण आरंभिक सिविल अधिकारिता की तत्समय स्थानीय सीमाओं से होगा;
(45)   "प्रांत" का तात्पर्य होगा प्रेसिडेंसी, गवर्नर का प्रांत, लेफ्टिनेंट गवर्नर का प्रांत या चीफ कमिश्नर का प्रांत;
(46)   "प्रांतीय अधिनियम" का तात्पर्य होगा किसी प्रांत के गवर्नर इन काउंसिल, लेफ्टिनेंट गवर्नर इन काउंसिल या चीफ कमिश्नर इन काउंसिल द्वारा भारतीय परिषद अधिनियम या भारत सरकार अधिनियम, 1915 के तहत बनाया गया अधिनियम, या स्थानीय विधानमंडल या प्रांत के गवर्नर द्वारा भारत सरकार अधिनियम के तहत बनाया गया अधिनियम, या प्रांतीय विधानमंडल या प्रांत के गवर्नर या कुर्ग विधान परिषद द्वारा भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत बनाया गया अधिनियम;
(47)   "प्रांतीय सरकार" का तात्पर्य संविधान के प्रारंभ से पूर्व की गई किसी भी बात के संबंध में, संबंधित प्रांत में कार्यकारी सरकार का प्रशासन करने के लिए प्रासंगिक तिथि पर अधिकृत प्राधिकारी या व्यक्ति से होगा;
(48)   "सार्वजनिक उपद्रव" का तात्पर्य भारतीय दंड संहिता में परिभाषित सार्वजनिक उपद्रव से होगा;
(49)   किसी दस्तावेज के संदर्भ में प्रयुक्त "पंजीकृत" का तात्पर्य दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए वर्तमान में लागू कानून के अंतर्गत [भारत] में पंजीकृत होगा;
(50)   "विनियमन" का तात्पर्य राष्ट्रपति द्वारा [संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत बनाए गए विनियमन से होगा और इसमें राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 243 के तहत बनाए गए विनियमन] और भारत सरकार अधिनियम, 1870 या भारत सरकार अधिनियम, 1915 या भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत केंद्रीय सरकार द्वारा बनाए गए विनियमन शामिल होंगे;
(51)   "नियम" का तात्पर्य किसी अधिनियम द्वारा प्रदत्त शक्ति के प्रयोग में बनाया गया नियम होगा, और इसमें किसी अधिनियम के तहत नियम के रूप में बनाया गया विनियमन भी शामिल होगा;
(52)   "अनुसूची" से तात्पर्य उस अधिनियम या विनियमन की अनुसूची से होगा जिसमें यह शब्द आता है;
(53)   "अनुसूचित जिला" का तात्पर्य अनुसूचित जिला अधिनियम, 1874 में परिभाषित "अनुसूचित जिला" से होगा;
(54)   "धारा" से तात्पर्य अधिनियम या विनियमन की उस धारा से होगा जिसमें यह शब्द आता है;
(55)   "जहाज" में नौवहन में प्रयुक्त प्रत्येक प्रकार का जलयान सम्मिलित होगा जो केवल पतवारों द्वारा संचालित नहीं होता है;
(56)   "चिह्न", इसके व्याकरणिक रूपांतरों और सजातीय अभिव्यक्तियों सहित, ऐसे व्यक्ति के संदर्भ में जो अपना नाम लिखने में असमर्थ है, इसमें "चिह्न", इसके व्याकरणिक रूपांतरों और सजातीय अभिव्यक्तियों सहित सम्मिलित होगा;
(57)   "पुत्र" में, ऐसे किसी व्यक्ति के मामले में, जिसका व्यक्तिगत कानून दत्तक ग्रहण की अनुमति देता है, दत्तक पुत्र भी शामिल होगा;
[(58)   "राज्य"-
(क)   संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 के प्रारंभ से पूर्व की किसी अवधि के संबंध में, इसका तात्पर्य भाग ए राज्य, भाग बी राज्य या भाग सी राज्य होगा; और
(ख)   ऐसे प्रारंभ के पश्चात् किसी अवधि के संबंध में, इसका तात्पर्य संविधान की अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट राज्य से होगा और इसके अंतर्गत संघ राज्यक्षेत्र होगा;]
(59)   "राज्य अधिनियम" का तात्पर्य संविधान द्वारा स्थापित या जारी रखे गए राज्य के विधानमंडल द्वारा पारित अधिनियम से होगा;
(60)   राज्य सरकार-
(क)   संविधान के प्रारंभ से पहले की गई किसी बात के संबंध में, इसका तार्त्पर्य भाग ए राज्य में, संबंधित प्रांत की प्रांतीय सरकार, भाग बी राज्य में, संबंधित सम्मिलित राज्य में कार्यकारी सरकार का प्रयोग करने के लिए प्रासंगिक तारीख को अधिकृत प्राधिकारी या व्यक्ति, और भाग सी राज्य में, केंद्रीय सरकार होगी; [***]
(ख)   [संविधान के प्रारंभ के पश्चात् और संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 के प्रारंभ से पूर्व] की गई किसी बात के संबंध में, इसका तात्पर्य भाग ए राज्य में राज्यपाल, भाग बी राज्य में राजप्रमुख और भाग सी राज्य में केन्द्रीय सरकार होगी;
[( ग )   संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 के प्रारंभ के पश्चात् की गई या की जाने वाली किसी बात के संबंध में, इसका तात्पर्य किसी राज्य में राज्यपाल और किसी संघ राज्यक्षेत्र में केन्द्रीय सरकार से होगा ;
  और संविधान के अनुच्छेद 258क के अधीन भारत सरकार को सौंपे गए कृत्यों के संबंध में, उस अनुच्छेद के अधीन उसे दिए गए प्राधिकार के दायरे में कार्य करने वाली केन्द्रीय सरकार भी इसके अंतर्गत होगी;
(61)   "उप-धारा" से तात्पर्य उस धारा की उप-धारा होगी जिसमें वह शब्द आता है;
(62)   "शपथ" में, इसके व्याकरणिक रूपांतरों और सजातीय अभिव्यक्तियों के साथ, शपथ लेने के स्थान पर प्रतिज्ञान करना और घोषणा करना शामिल होगा, यदि कानून द्वारा ऐसे व्यक्तियों को प्रतिज्ञान करने या घोषणा करने की अनुमति दी गई हो;
[( 62क )   "संघ राज्य क्षेत्र" का तात्पर्य संविधान की अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट किसी संघ राज्य क्षेत्र से होगा और इसमें भारत के राज्यक्षेत्र में समाविष्ट किन्तु उस अनुसूची में विनिर्दिष्ट न किया गया कोई अन्य क्षेत्र भी शामिल होगा;]
(63)   "पोत" में नौवहन में प्रयुक्त कोई भी जहाज या नाव या किसी अन्य प्रकार का पोत का विवरण शामिल होगा;
(64)   "वसीयत" में एक कोडपत्र और संपत्ति का स्वैच्छिक मरणोपरांत निपटान करने वाला प्रत्येक लेख शामिल होगा;
(65)   "लेखन" से संबंधित अभिव्यक्ति में मुद्रण, लिथोग्राफी, फोटोग्राफी और शब्दों को दृश्य रूप में प्रस्तुत करने या पुनरुत्पादित करने के अन्य तरीकों के संदर्भ शामिल होंगे; तथा
(66)   "वर्ष" का तात्पर्य ब्रिटिश कैलेंडर के अनुसार गणना किया गया वर्ष होगा।]

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