कंपनी के गठन
अध्याय II
कंपनी का निगमन और इससे संबंधित मामले
कंपनी का गठन .
3.(1) निम्न के द्वारा किसी भी वैध उद्देश्य के लिए एक कंपनी का गठन किया जा सकता है—
| (क) | सात या अधिक व्यक्ति द्वारा, जहां गठित की जाने वाली कंपनी एक सार्वजनिक कंपनी हो; | |
| (ख) | दो या दो से अधिक व्यक्ति द्वारा, जहां गठित की जाने वाली कंपनी एक निजी कंपनी हो; या | |
| (ग) | एक व्यक्ति द्वारा, जहां गठित की जाने वाली कंपनी एक व्यक्ति की कंपनी हो अर्थात एक निजी कंपनी, |
एक ज्ञापन पर सभी व्यक्तियों के या अपने नाम के हस्ताक्षर करके और पंजीकरण के संबंध में इस अधिनियम की आवश्यकताओं का पालन करकेः
बशर्ते कि एक व्यक्ति कंपनी का ज्ञापन, निर्धारित प्रपत्र में पूर्व लिखित सहमति के साथ दूसरे व्यक्ति का नाम इंगित करेगा, जो, अभिदाता की मृत्यु या संविदा करने में उसकी असमर्थता की स्थिति में कंपनी का सदस्य बन जाएगा और एक व्यक्ति कंपनी के निगमन के समय पंजीयक के पास उसके ज्ञापन और अनुच्छेदों के साथ, ऐसे व्यक्ति की लिखित सहमति भी दाखिल की जाएगी:
बशर्ते कि आगे ऐसा अन्य व्यक्ति अपनी सहमति इस तरह से वापस ले सकता है जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है :
बशर्ते यह भी कि एक व्यक्ति कंपनी का सदस्य किसी भी समय निर्धारित तरीके से नोटिस देकर ऐसे अन्य व्यक्ति का नाम बदल सकता है:
बशर्ते यह भी कि एक व्यक्ति कंपनी के सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह कंपनी को उसके द्वारा नामित अन्य व्यक्ति के नाम में परिवर्तन, यदि कोई हो, को ज्ञापन में या अन्यथा ऐसे समय के भीतर और ऐसे तरीके से सूचित करे जो निर्धारित किया गया हो, और कंपनी ऐसे किसी भी बदलाव के बारे में पंजीयक को ऐसे समय के भीतर और ऐसे तरीके से सूचित करेगी जो निर्धारित किया गया हो:
बशर्ते यह भी कि व्यक्ति के नाम में ऐसा कोई भी परिवर्तन, ज्ञापन में परिवर्तन नहीं माना जाएगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन गठित कंपनी या तो निम्नलिखित हो सकती है-
| (क) | शेयरों द्वारा सीमित कंपनी; या | |
| (ख) | गारंटी द्वारा सीमित कंपनी; या | |
| (ग) | एक असीमित कंपनी। |

