सदोष मानसिक स्थिति के रूप में अनुमान
34[आपराधिक मन:स्थिति के बारे में उपधारणा
278ड़. (1) इस अधिनियम के अधीन किसी ऐसे अपराध के अभियोजन में, जिसमें अभियुक्त की आपराधिक मन:स्थिति होनी चाहिए, न्यायालय ऐसी मन:स्थिति होने की उपधारणा करेगा, किंतु अभियुक्त के लिए इस तथ्य को साबित करना प्रतिरक्षा होगी कि उस अभियोजन में अपराध के रूप में आरोपित कृत्य की बाबत उसकी ऐसी मन:स्थिति नहीं थी।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा में "आपराधिक मन:स्थिति" के अंतर्गत आशय, हेतु या किसी तथ्य का ज्ञान या किसी तथ्य में विश्वास होना या विश्वास करने का कारण है।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, कोर्इ तथ्य साबित हुआ तभी कहा जाएगा, जब न्यायालय को यह विश्वास हो जाए कि वह उचित संदेह से परे विद्यमान है, न कि केवल इस कारण कि उसका विद्यमान होना संभावना की प्रबलता से सिद्ध है।]
34. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 10.9.1986 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

