आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 278ख

कंपनियों द्वारा अपराध

धारा

धारा संख्या

278ख

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXII - अपराध और मुकदमें

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

कंपनियों द्वारा अपराध

कंपनियों द्वारा अपराध

30[कंपनियों द्वारा अपराध

278ख. (1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोर्इ अपराध किसी कंपनी31 द्वारा किया गया है, वहां प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी ऐसे अपराध की दोषी समझी जाएगी और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने की भागी होगी :

परन्तु इस उपधारा की कोर्इ बात ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने को रोकने के लिए सब उचित तत्परता बरती थी।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोर्इ अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, तथा यह साबित होता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या उपमति से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा;

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए--

(क) "कंपनी" से कोर्इ निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत--

(i) फर्म; और

(ii) व्यक्तियों का संगम या व्यष्टियों का निकाय भी है, चाहे वह निगमित हो या नहीं; तथा

(ख) "निदेशक" से--

(i) फर्म के संबंध में उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है;

(ii) व्यक्तियों के संगम या व्यष्टियों के निकाय के संबंध में उसके कार्यकलापों को नियंत्रित करने वाला कोर्इ सदस्य अभिप्रेत है।]

 

30. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।

31. "कम्पनी" शब्द के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरैक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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