आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
सुलभता विकल्प
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 252

ट्रिब्यूनल से अपील

धारा

धारा संख्या

252

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVIII - कंपनियों के रजिस्टर से कंपनियों के नाम का निष्काषन

अधिनियम

कंपनी अधिनियम, 2013

वर्ष

ट्रिब्यूनल से अपील

न्यायाधिकरण में अपील

न्यायाधिकरण में अपील .

252.(1) पंजीयक के आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, जो किसी कंपनी को धारा 12 के तहत विघटित घोषित करता है, पंजीयक के आदेश की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर न्यायाधिकरण में अपील दायर कर सकता है और यदि न्यायाधिकरण की राय है कि पंजीयक द्वारा आदेश पारित किए गए किसी भी आधार के अभाव के मद्देनजर कंपनी के नाम को कंपनियों के पंजीयन से हटाना उचित नहीं है, तो वह कंपनी के नाम को कंपनियों के पंजीयन में बहाल करने का आदेश दे सकता है:

बशर्ते कि इस धारा के अधीन कोई आदेश पारित करने से पूर्व न्यायाधिकरण रजिस्ट्रार, कंपनी और सभी संबंधित व्यक्तियों को अभ्यावेदन करने और सुनवाई का उचित अवसर देगा:

आगे प्रदान किया गया कि यदि पंजीयक को यह विश्वास हो कि कंपनी का नाम अनजाने में या कंपनी या उसके निदेशकों द्वारा दी गई गलत सूचना के आधार पर कंपनियों के पंजीयन से हटा दिया गया है, जिसके लिए कंपनियों के पंजीयन में बहाली की आवश्यकता है, तो वह कंपनी को विघटित करने वाले आदेश के पारित होने की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर, ऐसी कंपनी का नाम बहाल करने की मांग करते हुए न्यायाधिकरण के समक्ष आवेदन दायर कर सकता है।

(2) न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश की एक प्रति कंपनी द्वारा आदेश की तारीख से तीस दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास दाखिल की जाएगी और आदेश प्राप्त होने पर रजिस्ट्रार कंपनी का नाम कंपनियों के रजिस्टर में बहाल कर देगा और निगमन का एक नया प्रमाण पत्र जारी करेगा।

(3) यदि कोई कंपनी, या उसका कोई सदस्य, ऋणदाता या कर्मकार इस बात से व्यथित है कि उसका नाम कंपनियों के पंजीयन से हटा दिया गया है, तो न्यायाधिकरण, उपधारा (5) के अधीन अधिसूचना के राजपत्र में प्रकाशन से बीस वर्ष की समाप्ति के पूर्व कंपनी, सदस्य, ऋणदाता या कर्मकार द्वारा किए गए आवेदन पर, यदि उसका समाधान हो जाता है कि कंपनी, अपने नाम के काटे जाने के समय, कारोबार कर रही थी या प्रचालन में थी या अन्यथा यह न्यायसंगत है कि कंपनी का नाम कंपनियों के पंजीयन में पुनः दर्ज किया जाए, तो कंपनी का नाम कंपनियों के पंजीयन में पुनः दर्ज करने का आदेश दे सकता है और न्यायाधिकरण, आदेश द्वारा, कंपनी और अन्य सभी व्यक्तियों को यथाशक्य उसी स्थिति में रखने के लिए ऐसे अन्य निर्देश दे सकता है और ऐसे प्रावधान कर सकता है, जो न्यायसंगत समझे जाएं, मानो कंपनी का नाम कंपनियों के पंजीयन से नहीं हटाया गया होता।


© कॉपीराइट. टैक्समैन पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड

फ़ुटनोट