कंपनी द्वारा ऋण और निवेश
कंपनी द्वारा ऋण और निवेश .
186. (1) इस अधिनियम में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कोई कंपनी, जब तक अन्यथा निर्धारित न हो, निवेश कंपनियों की दो से अधिक परतों के माध्यम से निवेश नहीं करेगी:
बशर्ते कि इस उपधारा के प्रावधान निम्नलिखित को प्रभावित नहीं करेंगे,—
| (i) | किसी कंपनी को भारत से बाहर किसी देश में निगमित किसी अन्य कंपनी का अधिग्रहण करने से रोकना, यदि ऐसी अन्य कंपनी के पास उस देश के कानूनों के अनुसार दो परतों से परे निवेश सहायक कंपनियां हैं; | |
| (ii) | किसी सहायक कंपनी को किसी कानून के तहत या किसी कानून के तहत तैयार किसी नियम या विनियमन के तहत आवश्यकताओं को पूरा करने के प्रयोजनों के लिए कोई निवेश सहायक कंपनी रखने से रोकना, जो वर्तमान में लागू है। |
(2) कोई भी कंपनी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नहीं करेगी -
| (क) | किसी व्यक्ति या अन्य निगमित निकाय को कोई ऋण नहीं देगी; | |
| (ख) | किसी अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति को ऋण के संबंध में कोई गारंटी नहीं देगी या सुरक्षा प्रदान नहीं करेगी; और | |
| (ग) | और किसी अन्य निगमित निकाय की प्रतिभूतियों को अभिदान, क्रय या अन्यथा रूप से अर्जित नहीं करेगी; |
जो उसकी चुकता शेयर पूंजी, मुक्त आरक्षित निधि और प्रतिभूति प्रीमियम खाते के साठ प्रतिशत से अधिक या उसकी मुक्त आरक्षित निधि और प्रतिभूति प्रीमियम खाते के सौ प्रतिशत से अधिक हो, जो भी अधिक हो।
[ [स्पष्टीकरण -इस उप-धारा के प्रयोजनों के लिए, "व्यक्ति" शब्द के अंतर्गत कोई ऐसा व्यष्टि नहीं है जो कंपनी के नियोजन में है। ]
[ (3) जहां अब तक किए गए ऋणों और निवेशों का योग, जिसके लिए अब तक सभी अन्य निगमित निकायों को या उनमें गारंटी या प्रतिभूति प्रदान की गई है, तथा साथ ही बोर्ड द्वारा किए जाने या दिए जाने के लिए प्रस्तावित निवेश, ऋण, गारंटी या प्रतिभूति, उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट सीमाओं से अधिक है, वहां कोई निवेश या ऋण नहीं किया जाएगा या गारंटी नहीं दी जाएगी या प्रतिभूति प्रदान नहीं की जाएगी, जब तक कि सामान्य बैठक में पारित विशेष संकल्प द्वारा पूर्व में प्राधिकृत न कर दिया जाए:
बशर्ते कि जहां किसी कंपनी द्वारा अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी या संयुक्त उद्यम कंपनी को ऋण या गारंटी दी गई हो या कोई प्रतिभूति प्रदान की गई हो, या किसी होल्डिंग कंपनी द्वारा अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी की प्रतिभूतियों का अभिदान, खरीद या अन्यथा अधिग्रहण किया गया हो, वहां इस उपधारा की अपेक्षा लागू नहीं होगी:
आगे यह भी प्रावधान है कि कंपनी उपधारा (4) के अंतर्गत दिए गए अनुसार वित्तीय विवरण में ऐसे ऋण या गारंटी या सुरक्षा या अधिग्रहण का ब्यौरा प्रकट करेगी। ]
(4) कंपनी वित्तीय विवरण में सदस्यों को दिए गए ऋण, किए गए निवेश या दी गई गारंटी या प्रदान की गई सुरक्षा का पूरा विवरण और वह उद्देश्य जिसके लिए ऋण या गारंटी या सुरक्षा का उपयोग ऋण या गारंटी या सुरक्षा के प्राप्तकर्ता द्वारा प्रस्तावित है, का खुलासा करेगी।
(5) कंपनी द्वारा तब तक कोई निवेश नहीं किया जाएगा या ऋण या गारंटी या सुरक्षा नहीं दी जाएगी जब तक कि इसे मंजूरी देने वाला प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में उपस्थित सभी निदेशकों की सहमति से पारित न हो जाए और जहां कोई सावधि ऋण विद्यमान है, संबंधित सार्वजनिक वित्तीय संस्थान की पूर्व स्वीकृति प्राप्त न हो जाए:
बशर्ते कि किसी सार्वजनिक वित्तीय संस्था का पूर्व अनुमोदन अपेक्षित नहीं होगा, जहां अब तक दिए गए ऋणों और निवेशों का योग, वह राशि जिसके लिए अब तक सभी अन्य निगमित निकायों को या उनमें गारंटी या प्रतिभूति प्रदान की गई है, तथा प्रस्तावित निवेशों, ऋणों, गारंटी या प्रतिभूति के साथ-साथ किए जाने या दिए जाने की राशि उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट सीमा से अधिक नहीं है, और सार्वजनिक वित्तीय संस्था को ऐसे ऋण की शर्तों और निबंधनों के अनुसार ऋण की किस्तों के पुनर्भुगतान या उन पर ब्याज के भुगतान में कोई चूक नहीं हुई है।
(6) कोई भी कंपनी, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 12 के अंतर्गत पंजीकृत है और निर्धारित कंपनियों के ऐसे वर्ग या वर्गों के अंतर्गत आती है, निर्धारित सीमा से अधिक अंतर-कॉर्पोरेट ऋण या जमा नहीं लेगी और ऐसी कंपनी अपने वित्तीय विवरण में ऋण या जमा का विवरण प्रस्तुत करेगी।
(7) इस धारा के अंतर्गत कोई भी ऋण, ऋण की अवधि के निकटतम एक वर्ष, तीन वर्ष, पांच वर्ष या दस वर्ष की सरकारी प्रतिभूति की प्रचलित उपज से कम ब्याज दर पर नहीं दिया जाएगा।
(8) कोई भी कंपनी, जो इस अधिनियम के प्रारंभ से पहले या उसके बाद स्वीकार किए गए किसी भी जमा की वापसी या उस पर ब्याज के भुगतान में चूक करती है, ऐसी चूक के अस्तित्व में रहने तक कोई ऋण नहीं देगी या कोई गारंटी नहीं देगी या कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करेगी या अधिग्रहण नहीं करेगी।
(9) इस धारा के अधीन ऋण देने वाली या गारंटी देने वाली या प्रतिभूति उपलब्ध कराने वाली या अर्जन करने वाली प्रत्येक कंपनी एक रजिस्टर रखेगी जिसमें ऐसे विवरण होंगे और उसे ऐसी रीति से बनाए रखा जाएगा जैसा कि विहित किया जा सकता है।
(10) उप-धारा (9) में निर्दिष्ट पंजिका को कंपनी के पंजीकृत कार्यालय में रखा जाएगा और-
| (क) | ऐसे कार्यालय में निरीक्षण के लिए खुला रहेगा; और | |
| (ख) | किसी भी सदस्य द्वारा उसमें से उद्धरण लिए जा सकते हैं तथा उसकी प्रतियां कंपनी के किसी भी सदस्य को निर्धारित शुल्क का भुगतान करके दी जा सकती है । |
[ [(11) उप-धारा (1) को छोड़कर इस धारा में निहित कोई भी बात निम्नलिखित पर लागू नहीं होगी -
| (क) | किसी बैंकिंग कंपनी या बीमा कंपनी या आवास वित्त कंपनी द्वारा अपने कारोबार के सामान्य अनुक्रम में दिए गए किसी ऋण, दी गई किसी गारंटी या प्रदान की गई किसी सुरक्षा या किए गए किसी निवेश पर या औद्योगिक उद्यमों के वित्तपोषण या अवसंरचनात्मक सुविधाएं प्रदान करने के कारोबार में लगी किसी कंपनी पर; | |
| (ख) | किसी भी निवेश पर - |
| (i) | — किसी निवेश कंपनी द्वारा किए गए ; | |
| (ii) | धारा 62 की उप-धारा (1) के खंड ( क ) के अनुसरण में आवंटित शेयरों में या किसी निगमित निकाय द्वारा जारी अधिकार निर्गमों के अनुसरण में आवंटित शेयरों में किए गए; | |
| (iii) | भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अध्याय III-ख के अंतर्गत पंजीकृत किसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी द्वारा निवेश या उधार देने की गतिविधियों के संबंध में किए गए और जिसका मुख्य कारोबार प्रतिभूतियों का अधिग्रहण है। ] |
(12) केन्द्रीय सरकार इस धारा के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकती है ।
(13) यदि कोई कंपनी इस धारा के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, तो कंपनी को जुर्माने से दण्डित किया जाएगा, जो पच्चीस हजार रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन पांच लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है और कंपनी का प्रत्येक अधिकारी जो चूक करेगा, उसे दो वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दण्डित किया जाएगा, जो पच्चीस हजार रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन एक लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।
स्पष्टीकरण -इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
| (क) | "निवेश कंपनी" पद से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है जिसका मुख्य कारोबार शेयरों, डिबेंचर या अन्य प्रतिभूतियों का अधिग्रहण है [ और किसी कंपनी को शेयरों, डिबेंचर या अन्य प्रतिभूतियों के अधिग्रहण के कारोबार में मुख्य रूप से लगी हुई माना जाएगा, यदि शेयरों, डिबेंचर या अन्य प्रतिभूतियों में निवेश के रूप में उसकी परिसंपत्तियां उसकी कुल परिसंपत्तियों के पचास प्रतिशत से कम नहीं हैं, या यदि निवेश कारोबार से प्राप्त उसकी आय उसकी सकल आय के अनुपात के रूप में पचास प्रतिशत से कम नहीं है ] ; | |
| (i) | "अवसंरचना सुविधाएं" से तात्पर्य अनुसूची VI में निर्दिष्ट सुविधाओं से है। |

