आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 180

बोर्ड की शक्तियों पर प्रतिबंध

धारा

धारा संख्या

180

अध्याय शीर्षक

अध्याय XII - बोर्ड की बैठकें और उसकी शक्तियाँ

अधिनियम

कंपनी अधिनियम, 2013

वर्ष

बोर्ड की शक्तियों पर प्रतिबंध

बोर्ड की शक्तियों पर प्रतिबंध

बोर्ड की शक्तियों पर प्रतिबंध I

180. (1) किसी कंपनी का निदेशक मंडल केवल विशेष प्रस्ताव द्वारा कंपनी की सहमति से निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग करेगा, अर्थात्:—

(क)   कंपनी के संपूर्ण उपक्रम को या अधिकांशतः बेचने, पट्टे पर देने या अन्यथा निपटाने की शक्ति, या जहां कंपनी एक से अधिक उपक्रमों का स्वामी है , वहां ऐसे किसी उपक्रम को संपूर्ण या अधिकांशतः बेचने, पट्टे पर देने या अन्यथा निपटाने की शक्ति।
  स्पष्टीकरण .-इस खंड के प्रयोजनों के लिए,-
(झ)   "उपक्रम" का तात्पर्य ऐसे उपक्रम से होगा जिसमें कंपनी का निवेश पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के अंकेक्षण बैलेंस शीट के अनुसार उसके निवल मूल्य के बीस प्रतिशत से अधिक है या ऐसा उपक्रम जो पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान कंपनी की कुल आय का बीस प्रतिशत उत्पन्न करता है;
(ii)   किसी भी वित्तीय वर्ष में "मूलतः संपूर्ण उपक्रम" का तात्पर्य पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के अंकेक्षण बैलेंस शीट के अनुसार उपक्रम के मूल्य के बीस प्रतिशत या उससे अधिक से होगा;
(ख)   किसी विलयन या समामेलन के परिणामस्वरूप प्राप्त मुआवजे की राशि को ट्रस्ट प्रतिभूतियों में अन्यथा निवेश करना;
(ग)   धन उधार लेना, जहां उधार लिया जाने वाला धन, कंपनी द्वारा पहले से उधार लिए गए धन के साथ मिलकर, उसके [ भुगतान किए गए शेयर पूंजी, मुक्त भंडार और प्रतिभूति प्रीमियम ] के कुल योग से अधिक हो जाएगा, सामान्य व्यवसाय के क्रम में कंपनी के बैंकरों से प्राप्त अस्थायी ऋणों के अलावा:
  बशर्ते कि किसी बैंककारी कंपनी द्वारा अपने कारोबार के सामान्य अनुक्रम में जनता से धन जमा करना, जो मांग पर या अन्यथा प्रतिदेय हो, तथा चेक, ड्राफ्ट, आदेश या अन्यथा द्वारा आहरित किया जा सके, इस खंड के अर्थ में बैंककारी कंपनी द्वारा धन उधार लेना नहीं माना जाएगा।
  स्पष्टीकरण. - इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "अस्थायी ऋण" से मांग पर या ऋण की तारीख से छह महीने के भीतर चुकाए जाने वाले ऋण जैसे अल्पकालिक, नकद ऋण व्यवस्था, बिलों की भुनाई और मौसमी प्रकृति के अन्य अल्पकालिक ऋणों का मुद्दा अभिप्रेत है, लेकिन इसमें पूंजीगत प्रकृति के वित्तीय व्यय के प्रयोजन के लिए उठाए गए ऋण शामिल नहीं हैं;
(घ)   किसी निदेशक से बकाया किसी ऋण को माफ करना, या उसके पुनर्भुगतान के लिए समय देना।

(2) उपधारा (1) के खंड ( ग ) में निर्दिष्ट शक्तियों के प्रयोग के संबंध में कंपनी द्वारा आम बैठक में पारित प्रत्येक विशेष संकल्प में वह कुल राशि निर्दिष्ट की जाएगी जिस तक निदेशक मंडल द्वारा धन उधार लिया जा सकेगा।

(3) उपधारा (1) के खंड ( क ) में अंतर्विष्ट कोई बात निम्नलिखित पर प्रभाव नहीं डालेगी-

(क)   किसी क्रेता या अन्य व्यक्ति का हक जो उस खंड में निर्दिष्ट किसी संपत्ति, निवेश या उपक्रम को सद्भावपूर्वक खरीदता है या पट्टे पर लेता है; या
(ख)   कंपनी की किसी संपत्ति की बिक्री या पट्टे पर देना, जहां कंपनी का साधारण कारोबार ऐसी बिक्री या पट्टे पर देने से मिलकर बना है।

(4) उप-धारा (1) के खंड ( क ) में निर्दिष्ट लेनदेन के लिए सहमति देते हुए कंपनी द्वारा पारित कोई विशेष संकल्प ऐसी शर्तों को निर्धारित कर सकता है, जो ऐसे संकल्प में निर्दिष्ट की जा सकती हैं, जिनमें लेनदेन से उत्पन्न होने वाली बिक्री आय के उपयोग, निपटान या निवेश के बारे में शर्तें शामिल हैं:

बशर्ते कि यह उपधारा इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अनुसार ही कंपनी को अपनी पूंजी में कोई कटौती करने के लिए प्राधिकृत करने वाली समझी जाएगी, अन्यथा नहीं।

(5) उपधारा (1) के खंड ( ग ) द्वारा अधिरोपित सीमा से अधिक कंपनी द्वारा लिया गया कोई भी ऋण तब तक वैध या प्रभावी नहीं होगा, जब तक कि ऋणदाता यह साबित नहीं कर देता कि उसने सद्भावपूर्वक और इस ज्ञान के बिना ऋण दिया था कि उस खंड द्वारा अधिरोपित सीमा पार कर ली गई है।


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