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वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 179

बोर्ड की शक्तियां

धारा

धारा संख्या

179

अध्याय शीर्षक

अध्याय XII - बोर्ड की बैठकें और उसकी शक्तियाँ

अधिनियम

कंपनी अधिनियम, 2013

वर्ष

बोर्ड की शक्तियां

बोर्ड की शक्तियां

बोर्ड की शक्तियां I

179.(1) किसी कंपनी का निदेशक मंडल ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग करने, तथा ऐसे सभी कार्य और बातें करने का हकदार होगा, जिनका प्रयोग करने और करने के लिए कंपनी को प्राधिकृत किया गया है:

बशर्ते कि ऐसी शक्ति का प्रयोग करने या ऐसा कार्य या बात करने में, बोर्ड इस अधिनियम में या इसके ज्ञापन या अनुच्छेदों में या इसके साथ असंगत न होने वाले और इसके अधीन सम्यक् रूप से बनाए गए किसी विनियमन में, जिसके अंतर्गत कंपनी द्वारा सामान्य बैठक में बनाए गए विनियमन भी हैं, उस निमित्त अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन होगा:

आगे यह भी प्रावधान है कि बोर्ड किसी ऐसी शक्ति का प्रयोग नहीं करेगा या कोई कार्य या बात नहीं करेगा जिसे इस अधिनियम के अधीन या कंपनी के ज्ञापन या अनुच्छेदों द्वारा या अन्यथा कंपनी द्वारा सामान्य बैठक में प्रयोग या किए जाने का निर्देश या अपेक्षित हो।

(2) कंपनी द्वारा आम बैठक में बनाया गया कोई भी विनियमन बोर्ड के किसी पूर्व कार्य को अमान्य नहीं करेगा, जो उस स्थिति में वैध होता यदि वह विनियमन नहीं बनाया गया होता।

(3) किसी कंपनी का निदेशक मंडल बोर्ड की बैठकों में पारित प्रस्तावों के माध्यम से कंपनी की ओर से निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग करेगा, अर्थात्:—

(क)   शेयरधारकों से उनके शेयरों पर अदा न किए गए धन के संबंध में अपील करना;
(ख)   के तहत प्रतिभूतियों की खरीद-वापस अधिकृत करने के लिए;
(ग)   भारत में अथवा भारत के बाहर, डिबेंचर सहित प्रतिभूतियां जारी करना;
(घ)   पैसा उधार लेना;
(ड़)   कंपनी के धन का निवेश करना;
(च)   ऋण प्रदान करना या ऋण के संबंध में गारंटी देना या सुरक्षा प्रदान करना;
(छ)   वित्तीय विवरण और बोर्ड की रिपोर्ट को मंजूरी देना;
(ज)   कंपनी के व्यवसाय में विविधता लाना;
(झ)   एकीकरण, विलयन या पुनर्निर्माण को मंजूरी देना;
(ञ)   किसी कंपनी का अधिग्रहण करना या किसी अन्य कंपनी में नियंत्रणकारी या पर्याप्त हिस्सेदारी हासिल करना;
(ट)   कोई अन्य विषय जो विहित किया जा सकता है :

बशर्ते कि बोर्ड किसी बैठक में पारित प्रस्ताव द्वारा निदेशकों की किसी समिति , प्रबंध निदेशक, प्रबंधक या कंपनी के किसी अन्य प्रधान अधिकारी को या कंपनी के शाखा कार्यालय की स्थिति में शाखा कार्यालय के प्रधान अधिकारी को खंड ( डी ) से ( एफ ) में निर्दिष्ट शक्तियां ऐसी शर्तों पर, जैसा वह निर्दिष्ट करे, सौंप सकेगा:

आगे यह भी प्रावधान है कि किसी बैंककारी कंपनी द्वारा अपने कारोबार के सामान्य अनुक्रम में जनता से मांग पर या अन्यथा प्रतिदेय तथा चेक, ड्राफ्ट, आदेश या अन्यथा द्वारा आहरित किए जा सकने वाले धन को स्वीकार करना, या किसी बैंककारी कंपनी द्वारा किसी अन्य बैंककारी कंपनी के पास ऐसी शर्तों पर, जैसी बोर्ड विहित करे, धन जमा करना, इस धारा के अर्थ में बैंककारी कंपनी द्वारा, यथास्थिति, धन उधार लेना या ऋण देना नहीं समझा जाएगा।

स्पष्टीकरण I. - खंड ( घ ) की कोई बात किसी बैंककारी कंपनी द्वारा अन्य बैंककारी कंपनियों से या भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय स्टेट बैंक या किसी अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी अन्य बैंक से लिए गए उधार पर लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण II. --किसी कंपनी और उसके बैंकरों के बीच लेन-देन के संबंध में, कंपनी द्वारा खंड ( डी ) में विनिर्दिष्ट शक्ति के प्रयोग का अर्थ कंपनी द्वारा अपने बैंकरों के साथ ओवरड्राफ्ट या नकद ऋण या अन्यथा के माध्यम से धन उधार लेने के लिए की गई व्यवस्था से होगा, न कि ओवरड्राफ्ट, नकद ऋण या अन्य खातों पर वास्तविक दिन-प्रतिदिन की कार्रवाई से, जिसके माध्यम से इस प्रकार की गई व्यवस्था का वास्तव में लाभ उठाया जाता है।

(4) इस धारा की कोई भी बात कंपनी की आम बैठक में बोर्ड द्वारा इस धारा में विनिर्दिष्ट किसी भी शक्ति के प्रयोग पर प्रतिबंध और शर्तें लगाने के अधिकार पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी।


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