आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 124

निर्धारण अधिकारियों की अधिकारिता

धारा

धारा संख्या

124

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIII - आयकर प्राधिकरण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2016

निर्धारण अधिकारियों की अधिकारिता

निर्धारण अधिकारियों की अधिकारिता

30[निर्धारण अधिकारियों की अधिकारिता

31124. (1) जहां धारा 120 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन जारी किए गए किसी निर्देश या आदेश के आधार पर निर्धारण अधिकारी में किसी क्षेत्र की अधिकारिता निहित की गर्इ है, वहां ऐसे क्षेत्र की सीमाओं के भीतर, उसे–

(क) कारबार या वृत्ति करने वाले किसी व्यक्ति की बाबत अधिकारिता होगी, यदि वह स्थान जहां वह अपना कारबार या वृत्ति चलाता है, उस क्षेत्र के भीतर स्थित है या जहां उसका कारबार या वृत्ति एक से अधिक स्थानों में चलार्इ जाती है, वहां उसके कारबार या वृत्ति का मुख्य स्थान उस क्षेत्र के भीतर स्थित है; और

(ख) उस क्षेत्र में निवास करने वाले किसी अन्य व्यक्ति की बाबत अधिकारिता होगी।

(2) जहां इस धारा के अधीन यह प्रश्न उठता है कि क्या किसी निर्धारण अधिकारी को किसी व्यक्ति का निर्धारण करने की अधिकारिता है, वहां वह प्रश्न 31क[प्रधान महानिदेशक या] महानिदेशक या 31क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 31क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा या जहां प्रश्न उन क्षेत्रों से संबंधित है, जो भिन्न-भिन्न 31क[प्रधान महानिदेशकों या] महानिदेशकों या 31क[प्रधान मुख्य आयुक्तों या] मुख्य आयुक्तों या 31क[प्रधान आयुक्तों या] आयुक्तों की अधिकारिता के भीतर है, वहां संबंधित 31क[प्रधान महानिदेशकों या] महानिदेशकों या 31क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 31क[प्रधान आयुक्तों या] आयुक्तों द्वारा या यदि वे सहमत नहीं हैं, तो बोर्ड द्वारा 31क[प्रधान महानिदेशक या] महानिदेशक या 31क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 31क[प्रधान आयुक्तों या] आयुक्तों द्वारा अथवा यदि वे सहमत नहीं है, तो बोर्ड द्वारा या ऐसे 31क[प्रधान महानिदेशक या] महानिदेशक या 31क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 31क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा अवधारित किया जाएगा जिसे बोर्ड राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिद्रिष्ट करे।

(3) कोर्इ व्यक्ति निर्धारण प्राधिकारी की अधिकारिता को ऐसी दशाओं में प्रश्नगत करने का हकदार नहीं होगा–

(क) जहां उसने उस तारीख से जिस तारीख को उस पर धारा 142 की उपधारा (1) या 32[धारा 115बड़ की उपधारा (2) या] धारा 143 की उपधारा (2) के अधीन सूचना तामील की गर्इ थी एक मास की समाप्ति के पश्चात् या निर्धारण पूरा होने के पश्चात्, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, 32[धारा 115बघ की उपधारा (1) के अधीन या] धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन विवरणी दी है;

(ख) जहां उसने विवरणी देने के लिए 33[धारा 115बघ की उपधारा (2) या धारा 142 की उपधारा (1) या धारा 115बज की उपधारा (1) अधीन धारा 148 के अधीन सूचना द्वारा या धारा 115बच के पहले परन्तुक के अधीन धारा 144 के पहले परन्तुक के अधीन यह कारण बताने की सूचना द्वारा] कि निर्धारण अधिकारी की सर्वोत्तम विवेकबुद्धि के अनुसार निर्धारण क्यों न पूरा किया जाए अनुज्ञात समय की, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, समाप्ति के पश्चात् ऐसी कोर्इ विवरणी नहीं दी है;

33क[(ग) जहां उस तारीख से, जिस तारीख को उस पर धारा 153क की उपधारा (1) या धारा 153ग की उपधारा (2) के अधीन सूचना तामील की गर्इ थी, एक मास की समाप्ति के पश्चात् या निर्धारण पूरा होने के पश्चात्, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, धारा 132 या धारा 132क के अधीन कोर्इ कार्रवार्इ की गर्इ है।]

(4) उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां कोर्इ निर्धारिती किसी निर्धारण अधिकारी की अधिकारिता को प्रश्नगत करता है, वहां निर्धारण अधिकारी यदि उस दावे के सही होने के बारे में उसका समाधान नहीं होता है, तो निर्धारण किए जाने से पूर्व, मामले को उपधारा (2) के अधीन अवधारण के लिए निद्रिष्ट करेगा।

(5) इस धारा में या धारा 120 के अधीन जारी किए गए किसी निर्देश या आदेश में किसी बात के होते हुए भी प्रत्येक निर्धारण अधिकारी को उस क्षेत्र के भीतर, यदि कोर्इ है, जिस पर धारा 120 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन जारी किए गए निर्देशों या आदेशों के आधार पर उसमें अधिकारिता निहित की गर्इ है, प्रोद्भूत या उदभूत होने वाली अथवा प्राप्त किसी आय की बाबत ऐसी सभी शक्तियां होंगी जो किसी निर्धारण अधिकारी को इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदान की गर्इ है।]

 

30. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 124 का वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से और कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से संशोधन किया गया था।

31. सुसंगत केस लॉज़ देखिये।

31क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2013 से अंत:स्थापित।

32. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।

33. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से "धारा 142 की उपधारा (1) या धारा 148 के अधीन सूचना द्वारा या धारा 144 के पहले परन्तुक के अधीन यह कारण बताने की सूचना द्वारा" शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

33क. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.6.2016 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

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