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धारा 117

संकल्पों और दायर होने की समझौतों

धारा

धारा संख्या

117

अध्याय शीर्षक

अध्याय VII - प्रबंधन और प्रशासन

अधिनियम

कंपनी अधिनियम, 2013

वर्ष

संकल्पों और दायर होने की समझौतों

प्रस्तावों और अनुबंधों का दाखिल किया जाना

प्रस्तावों और अनुबंधों का दाखिल किया जाना।

117.(1) उप-धारा (3) में विनिर्दिष्ट विषयों के संबंध में प्रत्येक प्रस्ताव या किसी अनुबंध की एक प्रति, धारा 102 के अधीन स्पष्टीकरणात्मक कथन सहित, यदि कोई हो, जो उस बैठक को बुलाने की सूचना से संलग्न है जिसमें प्रस्ताव प्रस्तावित है, उसके पारित होने या बनाने के तीस दिन के भीतर पंजीयक के पास ऐसी रीति से और ऐसी फीस के साथ दाखिल की जाएगी, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है। [***]:

बशर्ते कि प्रत्येक प्रस्ताव की प्रतिलिपि, जिसका अनुच्छेदों में परिवर्तन करने का प्रभाव है, तथा उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रत्येक अनुबंध की प्रतिलिपि, प्रस्ताव पारित होने या अनुबंध किए जाने के पश्चात जारी किए गए अनुच्छेदों की प्रत्येक प्रतिलिपि में समाविष्ट या संलग्न की जाएगी।

[ (2) यदि कोई कंपनी उप-धारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पूर्व उप-धारा (1) के अधीन प्रस्ताव या अनुबंध दाखिल करने में असफल रहती है तो ऐसी कंपनी दस हजार रुपए के शास्ति के लिए दायी होगी और असफलता जारी रहने की स्थिति में, प्रथम दिन के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसी असफलता जारी रहती है, एक सौ रुपए के अतिरिक्त शास्ति के साथ, जो अधिकतम दो लाख रुपए तक की हो सकती है और कंपनी का प्रत्येक अधिकारी जो चूककर्ता है, जिसके अंतर्गत कंपनी का परिसमापक, यदि कोई हो, भी है, दस हजार रुपए के शास्ति के लिए दायी होगा और असफलता जारी रहने की स्थिति में, प्रथम दिन के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसी असफलता जारी रहती है, एक सौ रुपए के अतिरिक्त शास्ति के साथ, जो अधिकतम पचास हजार रुपए तक की हो सकती है। ]

(3) इस धारा के प्रावधान निम्नलिखित पर लागू होंगे-

(क)   विशेष प्रस्ताव;
(ख)   ऐसे प्रस्ताव जो किसी कंपनी के सभी सदस्यों द्वारा सहमत किए गए हैं, लेकिन जो, यदि इस पर सहमत नहीं होते, तो उनके उद्देश्य के लिए तब तक प्रभावी नहीं होते जब तक कि उन्हें विशेष प्रस्तावों के रूप में पारित नहीं किया जाता;
(ग)   किसी कंपनी के निदेशक मंडल का कोई भी प्रस्ताव या किसी कंपनी द्वारा निष्पादित अनुबंध, एक प्रबंध निदेशक की नियुक्ति, पुनः नियुक्ति या नियुक्ति के नवीनीकरण, या नियुक्ति की शर्तों में भिन्नता से संबंधित हो;
(घ)   ऐसे प्रस्ताव या अनुबंध जिन पर सदस्यों के किसी वर्ग द्वारा सहमति व्यक्त की गई हो, किन्तु यदि उन पर सहमति नहीं होती तो वे अपने उद्देश्य के लिए तब तक प्रभावी नहीं होते जब तक कि उन्हें निर्दिष्ट बहुमत द्वारा या किसी विशेष तरीके से पारित नहीं किया जाता; और सभी प्रस्ताव या अनुबंध जो ऐसे वर्ग के सदस्यों को प्रभावी रूप से आबद्ध करते हैं, यद्यपि उन सभी सदस्यों द्वारा उन पर सहमति व्यक्त नहीं की गई हो;
(ड़)   [***]
(च)   [दिवालियापन और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 की धारा 59] के अनुसरण में किसी कंपनी को स्वैच्छिक रूप से बंद करने की आवश्यकता वाले प्रस्ताव पारित किए गए;
(छ)   धारा 179 की उपधारा (3) के अनुसरण में पारित प्रस्ताव : [***]
  [ बशर्ते कि कोई भी व्यक्ति धारा 399 के अधीन ऐसे प्रस्तावों का निरीक्षण करने या उनकी प्रतियां प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा: [***]]
  [इसके अतिरिक्त यह भी प्रावधान है कि इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात धारा 179 की उप-धारा (3) के खंड ( च ) के अधीन ऋण देने, या गारंटी देने या ऋण के संबंध में प्रतिभूति उपलब्ध कराने के लिए अपने कारोबार के सामान्य अनुक्रम में पारित किए गए संकल्प के संबंध में लागू नहीं होगी,—
(क)   एक बैंकिंग कंपनी;
(ख)   भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अध्याय IIIB के अंतर्गत पंजीकृत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी का कोई वर्ग, जैसा कि भारतीय रिज़र्व बैंक के परामर्श से निर्धारित किया जा सकता है;
(ग)   राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) के अधीन पंजीकृत किसी वर्ग की आवास वित्त कंपनी, जैसा कि राष्ट्रीय आवास बैंक के परामर्श से निर्धारित किया जा सकता है; ]
(ज)   कोई अन्य प्रस्ताव या अनुबंध जो निर्धारित किया जा सकता है और सार्वजनिक डोमेन में रखा जा सकता है।

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