धारा 68 या धारा 69 या धारा 69क या धारा 69ग या धारा 69घ में निर्दिष्ट आय पर कर
81ड़[धारा 68 या धारा 69 या धारा 69क या धारा 69ग या धारा 69घ में निर्दिष्ट आय पर कर
115खखड़. 81च[(1) जहां किसी एक निर्धारिती की कुल आय,-
(क) जिसमें धारा 68, धारा 69, धारा 69क, धारा 69ख, धारा 69ग या धारा 69घ में संदर्भित आय को शामिल किया गया है और धारा 139 के तहत आयकर विवरण में परिलक्षित किया गया है; या
(ख) निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारित किया गया है, जिसमें धारा 68, धारा 69, धारा 69क, धारा 69ख, धारा 69ग या धारा 69घ में संदर्भित आय को शामिल किया गया है, यदि उक्त आय को वाक्यांश (क) के तहत कवर नहीं किया गया है,
देय कुल आयकर निम्न का योग होगा-
(i) वाक्यांश (क) और वाक्यांश (ख) में संदर्भित आय पर आयकर की राशि, साठ प्रतिशत की दर से, और
(ii) आयकर की राशि जो निर्धारिती से प्रभार्य होगी, उसकी कुल आय में से वाक्यांश (i) में निर्दिष्ट आय की राशि को कम कर देने के बाद होगी।"
(2) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, निर्धारिती को किसी व्यय या मोक 81छ[या किसी अवधारित हानि] संबंध में उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट उसकी आय की संगणना करने में इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।]
81ड़. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से अंत:स्थापित।
81च. कराधान विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2016 द्वारा 1.4.2017 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1) निम्न प्रकार थी:
"(1) जहां किसी निर्धारिती की कुल आय में धारा 68, धारा 69, धारा 69क, धारा 69ख, धारा 69ग या धारा 69घ में निर्दिष्ट कोर्इ आय सम्मिलित है, वहां संदेय आय-कर,-
(क) धारा 68, धारा 69, धारा 69क, धारा 69ख, धारा 69ग या धारा 69घ में निर्दिष्ट आय पर तीस प्रतिशत की दर पर परिकलित आय-कर की रकम; और
(ख) आय-कर की ऐसी रकम, जिसके लिए निर्धारिती उस दशा में प्रभार्य होता, यदि उसकी कुल आय में से खंड (क) में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी जाती,
का योग होगा।"
81छ. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा संशोधित रूप में]

