आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 44घ

विदेशी कंपनियों के मामले में आदि रॉयल्टी, के माध्यम से आय की गणना के लिए विशेष प्रावधान,

धारा

धारा संख्या

44घ

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

विदेशी कंपनियों के मामले में आदि रॉयल्टी, के माध्यम से आय की गणना के लिए विशेष प्रावधान,

विदेशी कंपनियों के मामले में आदि रॉयल्टी, के माध्यम से आय की गणना के लिए विशेष प्रावधान,

36[विदेशी कंपनियों की दशा में स्वामिस्व आदि के रूप में आय की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

44घ. धारा 28 से धारा 44ग तक में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में जो विदेशी कंपनी है,--

() 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व 37[सरकार या किसी भारतीय समुत्थान के साथ विदेशी कंपनी द्वारा किए गए करार के अनुसरण में सरकार या भारतीय समुत्थान से] प्राप्त स्वामिस्व या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस के रूप में आय की संगणना करने में उक्त धाराओं के अधीन अनुज्ञेय कटौतियां कुल मिलाकर ऐसे स्वामिस्व या फीस की सकल रकम के, जिसमें से ऐसे स्वामिस्व की सकल रकम का इतना भाग कम कर दिया गया है जो किसी पेटेन्ट आविष्कार, प्रतिमान, डिजाइन, गुप्त सूत्र या प्रक्रिया या व्यापार चिÐ या समरूप संपत्ति के बारे में किसी डाटा, दस्तावेजकरण, रेखांकन या विनिर्देश के भारत के बाहर अंतरण के लिए या उनके संबंध में भारत के बाहर कोर्इ जानकारी देने के लिए एकमुश्त प्रतिफल के रूप में है, बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी;

() 31 मार्च, 1976 के पश्चात् 38[सरकार या किसी भारतीय समुत्थान के साथ विदेशी कंपनी द्वारा किए गए करार के अनुसरण में सरकार या भारतीय समुत्थान से] प्राप्त स्वामिस्व या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस के रूप में आय की संगणना करने में किसी व्यय या मोक की बाबत उक्त धाराओं में से किसी के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

() 39[* * *]

() 40[* * *]

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

() "तकनीकी सेवाओं के लिए फीस" का वही अर्थ है जो उसका धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vii) के 41[स्पष्टीकरण 2] में है;

() "विदेशी कंपनी" का वही अर्थ है जो उसका धारा 80ख में है;

() "स्वामिस्व" का वही अर्थ है जो उसका धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vi) के 42[स्पष्टीकरण (2)] में है;

() 31 मार्च, 1976 के पश्चात् 43[सरकार या किसी भारतीय समुत्थान के साथ विदेशी कंपनी द्वारा किए गए करार के अनुसरण में सरकार या भारतीय समुत्थान से] प्राप्त स्वामिस्व 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किए गए करार के अनुसरण में प्राप्त किया गया तभी समझा जाएगा, जब ऐसा करार धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vi) के परन्तुक के प्रयोजनों के लिए 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया समझा जाए।]

 

36. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.6.1976 से अंत:स्थापित।

37. "भारतीय समुत्थान" से प्रारम्भ होने वाले और "भारतीय समुत्थान से" पर खत्म होने वाले भाग के स्थान पर वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.6.1983 से प्रतिस्थापित।

38. "भारतीय समुत्थान" से प्रारम्भ होने वाले और "भारतीय समुत्थान से" पर खत्म होने वाले भाग के स्थान पर यथोक्त द्वारा प्रतिस्थापित।

39. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से लोप किया गया। लोप से पूर्व खंड (), जो वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.6.1983 से अंत:स्थापित किया गया था, इस प्रकार से था :

"() किसी व्यय या मोक की बाबत कोर्इ कटौती सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से सरकार द्वारा या विदेशी मुद्रा में भारतीय समुत्थान द्वारा उधार या ऋण राशि पर प्राप्त ब्याज के रूप में आय की संगणना में उक्त धाराओं में से किसी के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी।"

40. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से लोप किया गया। लोप से पूर्व खंड (घ) जो वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित किया गया था, इस प्रकार से था :

"() किसी व्यय या मोक की बाबत कोर्इ कटौती धारा 115क की उपधारा (1) के खंड (कख) में निर्दिष्ट आय की संगणना में उक्त धाराओं में से किसी के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी।"

41. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1977 से "स्पष्टीकरण" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

42. यथोक्त द्वारा "स्पष्टीकरण" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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