कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति
298. (1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को लागू करने में कोर्इ कठिनार्इ पैदा होती है, तो केन्द्रीय सरकार ऐसे उपबंधों से असंगत न होने वाली कोर्इ भी ऐसी बात जो कठिनार्इ को दूर करने के प्रयोजनों के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, कर सकेगी।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे किसी आदेश में उन अनुकूलनों या उपान्तरणों के लिए उपबंध हो सकेगा जिनके अधीन रहते हुए निरसित अधिनियम 31 मार्च, 1962 को समाप्त होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वतर वर्ष के निर्धारणों के संबंध में लागू होगा।
95[(3) यदि प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा संशोधित इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोर्इ कठिनार्इ उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा ऐसी कठिनार्इ को दूर करने के प्रयोजनों के लिए कोर्इ ऐसी बात कर सकेगी जो ऐसे उपबंधों से असंगत न हो :
परन्तु ऐसा कोर्इ आदेश 1 अप्रैल, 1988 से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा।
(4) उपधारा (3) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।]
95. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

