आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 256

उच्च न्यायालय को मामले का विवरण

धारा

धारा संख्या

256

अध्याय शीर्षक

अध्याय XX - अपील और संशोधन

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

उच्च न्यायालय को मामले का विवरण

उच्च न्यायालय को मामले का विवरण

ग.–उच्च न्यायालय को निर्देश

उच्च न्यायालय को मामलों का कथन

256. 23(1) निर्धारिती या आयुक्त उस तारीख के साठ दिन के भीतर, जिसको 24[1अक्तूबर, 1998 से पूर्व पारित] धारा 254 के अधीन किसी आदेश की सूचना की तामील की जाती है, विहित प्ररूप में आवेदन द्वारा, जहां आवेदन निर्धारिती द्वारा किया जाता है 25[दो सौ रुपए] की फीस के साथ, अपील अधिकरण से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसे आदेश से पैदा होने वाले किसी विधि के प्रश्न26 का निर्देश उच्च न्यायालय को करे और इस धारा में अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, अपील अधिकरण ऐसे आवेदन की प्राप्ति के एक सौ बीस दिन के भीतर मामले का कथन तैयार करेगा और उसे उच्च न्यायालय को निर्दिष्ट करेगा :

परन्तु यदि अपील अधिकरण का समाधान हो जाता है कि आवेदक आवेदन को इसमें इससे पूर्व बतार्इ गर्इ अवधि के भीतर प्रस्तुत करने से पर्याप्त कारण से निवारित हो गया था तो वह उसे अधिक से अधिक तीस दिन की अतिरिक्त अवधि के भीतर पेश करने की अनुज्ञा दे सकेगा।

(2) यदि उपधारा (1) के अधीन किए गए आवेदन पर अपील अधिकरण इस आधार पर मामले का कथन तैयार करने से इनकार करता है कि कोर्इ विधि का प्रश्न उत्पन्न नहीं हुआ है तो यथास्थिति, निर्धारिती या आयुक्त, उस तारीख से छह मास के भीतर जिसको ऐसे इनकार की सूचना की तामील उस पर होती है, उच्च न्यायालय को आवेदन कर सकेगा और यदि अपील अधिकरण के विनिश्चय के सही होने के संबंध में उच्च न्यायालय का समाधान नहीं हुआ है तो वह अपील अधिकरण से उस मामले का कथन तैयार करने की और उसे निर्दिष्ट करने की अपेक्षा कर सकेगा और ऐसी किसी अध्यपेक्षा की प्राप्ति पर अपील अधिकरण तदनुसार मामले का कथन तैयार करेगा और उसे निर्दिष्ट करेगा।

(3) जहां अपील अधिकरण उपधारा (2) के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग में किसी ऐसे मामले का कथन करने से इनकार करता है जिसका कथन करने की निर्धारिती द्वारा उससे अपेक्षा की गर्इ है, वहां निर्धारिती उस तारीख से जिसको वह ऐसे इनकार की सूचना प्राप्त करता है, तीस दिन के भीतर अपना आवेदन वापस ले सकेगा और यदि वह ऐसा करता है, तो संदत्त की गर्इ फीस वापस कर दी जाएगी।

 

23. उच्च न्यायालय को निर्देश के प्ररूप के लिए प्ररूप सं. 37 और नियम 48 देखिए।

24. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से अंत:स्थापित।

25. वित्त अधिनियम, 1981 द्वारा 1.6.1981 से "एक सौ पच्चीस रुपए" के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया। इससे पूर्व "एक सौ पच्चीस रुपए" कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से "एक सौ रुपए" के स्थान पर प्रतिस्थापित किये गये थे।

26. "प्रश्न", "विधि के प्रश्न" और "उस आदेश से पैदा होने वाले विधि के प्रश्न" पदों के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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