अन्य राशियां
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62195. 63[(1) 64कोर्इ व्यक्ति, जो किसी अनिवासी को, जो कंपनी नहीं है, या किसी विदेशी कंपनी को, किसी ब्याज का 64क[जो धारा 194ठख या धारा 194ठग 64ख[या धारा 194ठघ] में निर्दिष्ट ब्याज नहीं है] 65[* * *] या इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रभार्य किसी अन्य राशि का (जो "वेतन" 66[* * *] शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय नहीं है) संदाय करने के लिए दायी है, पाने वाले के खाते में ऐसी आय जमा करते समय या उसका नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से संदाय करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, प्रवृत्त दरों के अनुसार उस पर आय-कर की कटौती करेगा :
67[परन्तु सरकार या धारा 10 के खंड (23घ) के अर्थांतर्गत पब्लिक सेक्टर बैंक या उस खंड के अर्थांतर्गत लोक वित्तीय संस्था द्वारा संदेय ब्याज की दशा में कर की कटौती उसके संदाय के समय केवल नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से की जाएगी :
68[परंतु यह और कि धारा 115ण में निर्दिष्ट किन्हीं लाभांशों की बाबत ऐसी कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी।]
68क[स्पष्टीकरण 1]–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहां यथापूर्वोक्त ब्याज या अन्य राशि ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में, चाहे वह "संदेय ब्याज खाते" या "उचंत खाते" के नाम से ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है वहां ऐसी राशि के जमा किए जाने को, पाने वाले के खाते में ऐसी आय का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]
68ख[स्पष्टीकरण 2–शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि उपधारा (1) का अनुपालन करने और उसके अधीन कटौती करने की बाध्यता, निवासी या अनिवासी सभी व्यक्तियों, को लागू होगी और सदैव से लागू हुर्इ समझी जाएगी तथा विस्तारित होगी और सदैव विस्तारित की गर्इ समझी जाएगी, चाहे अनिवासी व्यक्ति का–
(i) भारत में कोर्इ निवास या कारबार का स्थान या कारोबारी संबंध; या
(ii) भारत में किसी प्रकार की किसी रीति में कोर्इ अन्य उपस्थिति, हो या नहीं]
(2) जहां किसी अनिवासी को इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य ऐसी किसी राशि के (जो 69[***] 70[***] 69[* * *] 71[* * *] 72[***] वेतन से भिन्न है) संदाय के लिए उत्तरदायी व्यक्ति यह समझता है कि ऐसी संपूर्ण राशि ऐसी आय नहीं होगी जो पाने वाले के मामले में प्रभार्य हो, वहां वह 73[निर्धारण] अधिकारी से आवेदन कर सकेगा कि वह 74[साधारण या विशेष आदेश द्वारा,] ऐसी राशि का इस प्रकार प्रभार्य समुचित अनुपात अवधारित करे और ऐसे अवधारण पर उस राशि के केवल उसी अनुपात में, जो इस प्रकार प्रभार्य है, उपधारा (1) के अधीन कर की कटौती की जाएगी।
75[* * *]
76[(3) उपधारा (5) के अधीन बनाए गए नियमों77 के अधीन रहते हुए, कोर्इ व्यक्ति जो ऐसा कोर्इ ब्याज या अन्य राशि, जिस पर आय-कर की कटौती उपधारा (1) के अधीन की जानी हो, प्राप्त करने का हकदार हो 78[निर्धारण] अधिकारी से एक ऐसा प्रमाणपत्र दिए जाने के लिए विहित फार्म में आवेदन कर सकेगा, जो ऐसा ब्याज या अन्य राशि उस उपधारा के अधीन कटौती किए बिना प्राप्त करने के लिए उसे प्राधिकृत करे और जहां ऐसा प्रमाणपत्र दिया जाए, वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो उस व्यक्ति को, जिसे प्रमाणपत्र दिया गया हो, ऐसे ब्याज या अन्य राशि के संदाय के लिए उत्तरदायी हो, जब तक वह प्रमाणपत्र प्रवृत्त बना रहे, उस ब्याज या अन्य राशि का भुगतान उस पर उपधारा (1) के अधीन कर की कटौती किए बिना करेगा।]
(4) उपधारा (3) के अधीन दिया गया प्रमाणपत्र उसमें विनिर्दिष्ट कालावधि की समाप्ति तक अथवा यदि वह उस कालावधि की समाप्ति से पूर्व ही 79[निर्धारण] अधिकारी द्वारा रद्द कर दिया जाए तो ऐसे रद्द किए जाने तक प्रवृत्त रहेगा।
(5) बोर्ड, निर्धारितियों की सुविधा और राजस्व के हितों को ध्यान में रखते हुए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे नियम बना सकेगा जिनमें वे मामले, जिनमें और वे परिस्थितियां विनिर्दिष्ट होंगी जिनके अंतर्गत उपधारा (3) के अधीन प्रमाणपत्र दिए जाने के लिए आवेदन किया जा सकेगा और वे शर्तें जिनके अधीन, ऐसा प्रमाणपत्र दिया जा सकेगा और उससे संबद्ध सभी अन्य विषयों का उपबंध होगा।]
79क[(6) उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति किसी राशि के संदाय से संबंधित जानकारी ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में देगा, जो बोर्ड द्वारा विहित की जाए।]
79ख[(7) उपधारा (1) और उपधारा (2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे व्यक्तियों या मामलों का कोर्इ वर्ग विनिर्दिष्ट कर सकेगा, जहां किसी अनिवासी को, जो कंपनी नहीं है, या किसी विदेशी कंपनी को किसी राशि का, चाहे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रभार्य हो या नहीं, संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति निर्धारण अधिकारी को साधारण या विशेष आदेश द्वारा प्रभार्य राशि के समुचित अनुपात का अवधारण करने के लिए आवेदन करेगा और ऐसे अवधारण पर उपधारा (1) के अधीन कर की कटौती, राशि के उस अनुपात पर की जाएगी, जो इस प्रकार प्रभार्य है।]
62. परिपत्र सं. 370, तारीख 3.10.1983, पत्र फा.सं. 391/3/78-एफ.टी.डी., तारीख 9.7.1984, परिपत्र सं. 152, तारीख 27.11.1974, पत्र फा.सं. 12/29/6-आर्इ.टी.(बी.), तारीख 1.6.1965, परिपत्र सं. 43, तारीख 20.6.1970, परिपत्र सं. 20(प्प्-4), तारीख 3.8.1961, परिपत्र सं. 588, तारीख 2.1.1991, परिपत्र सं. 695, तारीख 28.11.1994, परिपत्र सं. 723, तारीख 19.9.1995, परिपत्र सं. 728, तारीख 30.10.1995, परिपत्र सं. 734, तारीख 24.1.1996, परिपत्र सं. 740, तारीख 17.4.1996, परिपत्र सं. 759, तारीख 18.11.1997, परिपत्र सं. 767, तारीख 22.5.1998, परिपत्र सं. 769, तारीख 6.8.1998, परिपत्र सं. 786, तारीख 7.2.2000, परिपत्र सं. 790, तारीख 20.4.2000, परिपत्र सं. 10/2002, तारीख 9.10.2002, परिपत्र सं. 7/2007, तारीख 23.10.2007, परिपत्र सं. 4/2009, तारीख 29.6.2009 परिपत्र सं. 7/2009 (परिपत्र सं. 23, तारीख 23.7.1969, परिपत्र सं. 163, तारीख 29.5.1975 और परिपत्र सं. 786, तारीख 7.2.2000 को वापस लेने संबंधी) और परिपत्र सं. 9/2009, तारीख 30.11.2009 भी देखिए।
63. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1) वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से तथा वित्त अधिनियम 1975 द्वारा 1.4.1975 से यथा संशोधित की गयी थी।
64. नियम 26, 28(1), 28कक, 28कख, 29ख, 30, 31, 31कख और 37क तथा प्ररूप सं. 13, 15ग, 15घ, 15ड़, 16क, 26कध और 27 देखिए।
64क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2012 से अंत:स्थापित।
64ख. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.6.2013 से अंत:स्थापित।
65. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से "(जो प्रतिभूतियों पर ब्याज नहीं है)" शब्दों और कोष्ठकों का लोप किया गया।
66. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से "या लाभांश" शब्दों का लोप किया गया।
67. प्रत्यक्ष कर विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.6.1987 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
68. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व द्वितीय परन्तुक वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.6.1997 से अंत:स्थापित किया गया था तथा बाद में वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से उसका लोप किया गया था।
68क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.1962 से स्पष्टीकरण को स्पष्टीकरण 1 के रूप में संख्यांकित किया गया।
68ख. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.1962 से अंत:स्थापित।
69. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.6.1976 से "ब्याज, जिसके अंतर्गत" तथा "भी है" का लोप किया गया।
70. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से "प्रतिभूतियों पर ब्याज" शब्दों का लोप किया गया।
71. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से ", लाभांश" का लोप किया गया।
72. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से "और" शब्द का लोप किया गया।
73. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
74. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.3.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से "विहित रीति में" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व, "विहित रीति में" पद को, वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से "साधारण या विशेष आदेश द्वारा" के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया था।
75. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व परन्तुक वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से यथा अंत:स्थापित किया गया था।
76. वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1970 से अंत:स्थापित।
77. नियम 29ख और प्ररूप सं. 15ग से 15घ देखिए।
78. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
79. यथोक्त द्वारा "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
79क. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।
79ख. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा संशोधित रूप में]

