देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर
50[अध्याय 12घ
देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर संबंधी विशेष उपबंध
देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर
115ण. 51[(1) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी और इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी देशी कंपनी की कुल आय की बाबत प्रभार्य आय-कर के अतिरिक्त, ऐसी कंपनी द्वारा 1 अप्रैल, 2003 को या उसके पश्चात् लाभांशों के रूप में (चाहे अंतरिम हो या अन्यथा), चाहे वे चालू लाभ या संचित लाभ हों, घोषित, वितरित या संदत्त किसी रकम पर 52[पंद्रह] प्रतिशत की दर से अतिरिक्त आय-कर (जिसे इसमें इसके पश्चात् वितरित लाभों पर कर कहा गया है) प्रभारित किया जाएगा।]
52क[(1क) उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकम को,–
52ख[(i) वित्तीय वर्ष के दौरान देशी कंपनी द्वारा प्राप्त लाभांश की रकम को, यदि कोर्इ हो, घटा दिया जाएगा, यदि ऐसा लाभांश उसकी समनुषंगी से प्राप्त होता है और,–
(क) जहां ऐसी समनुषंगी कोर्इ देशी कंपनी है, समनुषंगी ने ऐसे कर का, जो इस धारा के अधीन ऐसे लाभांश पर संदेय है, संदाय किया है; या
(ख) जहां ऐसी समनुषंगी कोर्इ विदेशी कंपनी है वहां ऐसे लाभांश पर कर धारा 115खखघ के अधीन देशी कंपनी द्वारा संदेय है :
परंतु लाभांश की वही रकम एक से अधिक बार घटाने के लिए गणना में नहीं ली जाएगी ;]
(ii) धारा 10 के खंड (44) में निर्दिष्ट नर्इ पेंशन प्रणाली न्यास के लिए या उसकी ओर से किसी व्यक्ति को संदत्त लाभांश की रकम, यदि कोर्इ हो।
स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, कोर्इ कंपनी किसी अन्य कंपनी की समनुषंगी तब समझी जाएगी यदि ऐसी अन्य कंपनी उस कंपनी की साधारण शेयर पूंजी के अभिहित मूल्य के आधे से अधिक धारण करती है।]
52ग[(1ख) इस धारा के अनुसार संदेय वितरित लाभों पर कर के अवधारण के प्रयोजनों के लिए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट लाभांशों के रूप में कोर्इ रकम, जो उपधारा (1क) में निर्दिष्ट रकम को घटाकर आए [जिसे इसके पश्चात् शुद्ध वितरित लाभ कहा गया है], उतनी रकम तक बढ़ा दी जाएगी, जो उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दर पर ऐसी बढ़ार्इ गर्इ रकम पर कर को घटाने के पश्चात् शुद्ध वितरित लाभों के बराबर हो।]
(2) इस बात के होते हुए भी कि देशी कंपनी द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित अपनी कुल आय पर कोर्इ आय-कर संदेय नहीं है, उपधारा (1) के अधीन वितरित लाभों पर कर ऐसी कंपनी द्वारा संदेय होगा।
(3) देशी कंपनी का प्रधान अधिकारी और कंपनी, केन्द्रीय सरकार के जमाखाते वितरित लाभों पर कर–
(क) किसी लाभांश की घोषणा; या
(ख) किसी लाभांश के वितरण; या
(ग) किसी लाभांश के संदाय;
की तारीख से, इनमें से जो भी पहले हो, चौदह दिन के भीतर देने के लिए दायी होगी।
(4) कंपनी द्वारा इस प्रकार संदत्त वितरित लाभों पर कर लाभांश के रूप में घोषित, वितरित या संदत्त रकम की बाबत कर का अंतिम संदाय माना जाएगा और इस प्रकार संदत्त रकम की बाबत कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसका कोर्इ और क्रेडिट नहीं मांगा जाएगा।
(5) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कोर्इ कटौती उस रकम की बाबत जिस पर उपधारा (1) के अधीन कर या उस पर कर प्रभारित किया गया है, कंपनी या शेयरधारक को अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
53[(6) इस धारा में की किसी बात के होते हुए भी विकासकर्ता या उद्यम की या 54[***] ऐसे लाभांश को प्राप्त करने वाले व्यक्ति की वर्तमान आय में से 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् लाभांश के रूप में (चाहे अंतरिम हो या अन्यथा) ऐसे विकासकर्ता या उद्यम द्वारा घोषित, वितरित या संदत्त किसी रकम पर किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी विशेष आर्थिक जोन के विकास, या विकास तथा प्रचालन या विकास, प्रचालन और अनुरक्षण में लगे किसी उपक्रम या उद्यम की कुल आय की बाबत वितरित लाभ पर कोर्इ कर प्रभार्य नहीं होगा:]
54क[परंतु इस उपधारा के उपबंध 1 जून, 2011 से प्रभावी नहीं रहेंगे।]
50. अध्याय 12घ, जिसमें धारा 115ण से 115थ हैं, वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.6.1997 से अंत:स्थापित किया गया।
51. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2003 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, उपधारा (1), जिसका वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.6.2002 से, वित्त अधिनियम 2001 द्वारा 1.6.2001 से और वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से संशोधन किया गया था, इस प्रकार थी :
"(1) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी और इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी निर्धारण वर्ष के लिए देशी कंपनी की कुल आय की बाबत प्रभार्य आय-कर के अतिरिक्त, ऐसी कंपनी द्वारा 1 जून, 1997 को या उसके पश्चात् [किन्तु 31 मार्च, 2002 को या उससे पूर्व] चाहे वर्तमान या संचित लाभों में से, लाभांशों के रूप में (अंतरिम या अन्यथा) घोषित, वितरित या संदत्त कोर्इ रकम दस प्रतिशत की दर से अतिरिक्त आय-कर से (जिसे इसमें आगे वितरित लाभों पर कर कहा गया है) प्रभारित की जाएगी।"
52. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2007 से "साढ़े बारह" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
52क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2009 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1क) वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।
52ख. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.6.2013 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम 2012 द्वारा 1.7.2012 से प्रतिस्थापित खंड (i) इस प्रकार था :
"(i) वित्तीय वर्ष के दौरान किसी देशी कंपनी द्वारा प्राप्त लाभांश की रकम, यदि कोर्इ हो, से घटा दिया जाएगा, यदि–
(क) ऐसी लाभांश उसकी समनुषंगी से प्राप्त होता है; और
(ख) समनुषंगी कंपनी ने ऐसे लाभांश पर ऐसे कर का, जो इस धारा के अधीन संदेय है, संदाय किया है:
(ग) [***]
परंतु लाभांश की उसी रकम को एक बार से अधिक बार घटाने के लिए हिसाब में नहीें लिया जाएगा;"
52ग. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.10.2014 से अंत:स्थापित।
53. विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा 10.2.2006 से अंत:स्थापित।
54. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से "धारा 10 के खंड (23छ) के अंतर्गत न आने वाले" शब्दों का लोप किया गया।
54क. वित्त अधिनियम, 2011 द्वारा 1.6.2011 से अंत:स्थापित।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

