राहत जब वेतन बकाया के रूप में दिया जाए या अग्रिम आदि के रूप में दिया जाए
21क. (1) जहां निर्धारिती के वेतन का कोर्इ भाग बकाया के रूप में या अग्रिम दिए जाने के कारण अथवा निर्धारिती द्वारा प्राप्त कुटुंब पेंशन का कोर्इ भाग बकाया के रूप में दिए जाने के कारण अथवा किसी एक वित्तीय वर्ष में बारह मास से अधिक का वेतन या ऐसा भुगतान जो धारा 17 के खंड (3) के उपबंधों के अधीन वेतन के बदले लाभ है, उसके द्वारा प्राप्त किए जाने के कारण उसकी आय का निर्धारण उस दर से, जिस पर उसका निर्धारण अन्यथा किया जाता है, उच्चतर दर किया जाता है, वहां धारा 89 की उपधारा (1) के अधीन दी जाने वाली राहत निम्न प्रकार होगी–
(क) जहां निर्धारिती के वेतन का कोर्इ भाग बकाया के रूप में या अग्रिम दिया जाता है, या निर्धारिती द्वारा कुटुंब पेंशन का कोर्इ भाग बकाया के रूप में प्राप्त किया जाता है, वहां उपनियम (2) के उपबंधों के अनुसार;
(ख) जहां भुगतान, निर्धारिती की विगत सेवा, जिसकी अवधि कम से कम पांच वर्ष की है, की बाबत उपदान की प्रकृति का है, वहां उपनियम (3) के उपबंधों के अनुसार;
(ग) जहां भुगतान कम से कम तीन वर्ष की निरंतर सेवा के पश्चात् निर्धारिती की नौकरी की समाप्ति पर या उसके संबंध में उसके नियोजक या पूर्व नियोजक से प्राप्त प्रतिकर की प्रकृति का है और जहां उसके कार्यकाल का शेष भाग तीन वर्ष से कम नहीं है, वहां उपनियम (4) के उपबंधों के अनुसार;
(घ) जहां भुगतान पेंशन के संराशिकरण में है, वहां उपनियम (5) के उपबंधों के अनुसार; और
(ड़) जहां भुगतान बकाया के रूप में या अग्रिम वेतन या विगत सेवाओं की बाबत उपदान या नौकरी समाप्त होने पर या उसके संबंध में प्राप्त प्रतिकर या पेंशन के संराशिकरण की प्रकृति का नहीं है, वहां उपनियम (6) के उपबंधों के अनुसार।
(2)(क) उपनियम (1) के खंड (क) में उल्लिखित मामले में, उस पूर्ववर्ष की कुल आय पर, जिसमें वेतन बकाया के रूप में या अग्रिम प्राप्त होता है या जिसमें कुटुंब पेंशन बकाया के रूप में प्राप्त होती है (ऐसे वेतन या कुटुंब पेंशन को इस उपनियम में इसके पश्चात् क्रमश:, यथास्थिति, अतिरिक्त वेतन या अतिरिक्त कुटुंब पेंशन कहा गया है और ऐसे पूर्ववर्ष को इस उपनियम में इसके पश्चात् सुसंगत पूर्ववर्ष कहा गया है) निर्धारिती द्वारा संदेय कर में से उतनी रकम, यदि कोर्इ हो, घटा दी जाएगी, जितनी खंड (ख) में दी गर्इ रीति से परिकलित अतिरिक्त वेतन या अतिरिक्त कुटुंब पेंशन पर कर की राशि, यथास्थिति खंड (ग) या खंड (घ) में दी गर्इ रीति से परिकलित अतिरिक्त वेतन या अतिरिक्त कुटुंब पेंशन पर कर या सकल कर से अधिक है।
(ख) कर, यथास्थिति, अतिरिक्त वेतन या अतिरिक्त कुटुंब पेंशन, घटाने पर आर्इ सुसंगत पूर्ववर्ष की कुल आय पर इस प्रकार परिकलित किया जाएगा मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय निर्धारिती की कुल आय हो, और इस प्रकार जितनी परिकलित कर की राशि ऐसे घटाए जाने से पहले कुल आय पर कर की राशि से कम है उतनी रकम खंड (क) के प्रयोजनों के लिए, इस खंड के अधीन, यथास्थिति, अतिरिक्त वेतन या अतिरिक्त कुटुंब पेंशन पर कर मानी जाएगी।
(ग) जहां, यथास्थिति, अतिरिक्त वेतन या अतिरिक्त कुटुंब पेंशन, केवल एक पूर्ववर्ष से संबंधित है वहां कर उक्त पूर्ववर्ष की कुल आय पर उसमें यथास्थिति, अतिरिक्त वेतन या अतिरिक्त कुटुंब पेंशन जोड़कर इस प्रकार परिकलित किया जाएगा मानो इस प्रकार बढ़ार्इ गर्इ कुल आय निर्धारिती की कुल आय हो, और इस प्रकार जितनी परिकलित कर की राशि उक्त पूर्ववर्ष की कुल आय की बाबत निर्धारिती द्वारा संदेय कर से अधिक है उतनी रकम खंड (क) के प्रयोजनों के लिए इस खंड के अधीन अतिरिक्त वेतन या अतिरिक्त कुटुंब पेंशन पर कर मानी जाएगी।
(घ) जहां, यथास्थिति, अतिरिक्त वेतन या अतिरिक्त कुटुंब पेंशन, एक पूर्ववर्ष से अधिक के संबंध में है, वहां,–
(i) वे पूर्ववर्ष जिनके संबंध में वह अतिरिक्त वेतन या अतिरिक्त कुटुंब पेंशन है और ऐसे प्रत्येक पूर्ववर्ष से संबंधित रकम सबसे पहले अभिनिश्चित की जाएगी;
(ii) इसके बाद ऐसे प्रत्येक पूर्ववर्ष की कुल आय पर कर उसमें उपखंड (i) के अधीन अभिनिश्चित ऐसे पूर्ववर्ष से संबंधित रकम जोड़कर इस प्रकार परिकलित किया जाएगा मानो इस प्रकार बढ़ार्इ गर्इ कुल आय उस पूर्व वर्ष की कुल आय हो, और जितनी उपखंड (ii) के अधीन यथा परिकलित पूर्वोक्त पूर्ववर्षों की बाबत सकल कर राशि उक्त पूर्ववर्षों की कुल आय की बाबत निर्धारिती द्वारा संदेय सकल कर राशि से अधिक है उतनी रकम, खंड (क) के प्रयोजनों के लिए इस खंड के अधीन अतिरिक्त वेतन या अतिरिक्त कुटुंब पेंशन पर सकल कर राशि मानी जाएगी।
(3) (क) उपनियम (1) के खंड (ख) में उल्लिखित किसी मामले में, निर्धारिती की उस पूर्ववर्ष की कुल आय पर, जिसमें उपदान के रूप में राशि मिली है (ऐसा पूर्ववर्ष इस उपनियम में इसके पश्चात् सुसंगत पूर्ववर्ष कहा गया है), निर्धारिती द्वारा संदेय कर में से उतनी रकम, यदि कोर्इ हो, घटा दी जाएगी जितनी, ऐसी कुल आय पर लागू कर की औसत दर से परिकलित, सुसंगत पूर्ववर्ष की कुल आय में सम्मिलित उपदान राशि पर कर की राशि, यथास्थिति खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन अवधारित कर की दर से, ऐसी उपदान राशि पर परिकलित कर-राशि से अधिक है।
(ख) जहां निर्धारिती की विगत सेवाओं की बाबत जो कम से कम पांच वर्ष किंतु 15 वर्ष से कम की अवधि तक विस्तारित है, उपदान के रूप में भुगतान किया जाता है वहां--
(i) सुसंगत पूर्ववर्ष से ठीक पहले के दो पूर्ववर्षों में से प्रत्येक वर्ष की बाबत निर्धारिती की कुल आय में सुसंगत पूर्ववर्ष की कुल आय में सम्मिलित उपदान राशि की आधी के बराबर रकम जोड़ दी जाएगी, और उक्त दो पूर्ववर्षों में से प्रत्येक वर्ष के लिए कर की औसत दर इस प्रकार परिकलित की जाएगी मानो इस प्रकार बढ़ाकर आर्इ कुल आय उस पूर्ववर्ष की कुल आय हो; और
(ii) उपखंड (i) के अनुसार सुसंगत पूर्ववर्ष के ठीक पहले के दो पूर्ववर्षों के लिए परिकलित, कर की औसत दरों का औसत खंड (क) के प्रयोजनों के लिए, इस खंड के अधीन अवधारित कर की दर होगी।
(ग) जहां निर्धारिती की विगत सेवा की बाबत, जो पंद्रह वर्ष से कम अवधि की नहीं है, उपदान के रूप में भुगतान किया जाता है, वहां--
(i) सुसंगत पूर्ववर्ष से ठीक पहले के तीन पूर्ववर्षों में से प्रत्येक वर्ष की बाबत निर्धारिती की कुल आय में, सुसंगत पूर्ववर्ष की कुल आय में सम्मिलित उपदान की राशि के एक तिहार्इ के बराबर रकम जोड़ दी जाएगी, और उक्त तीन पूर्ववर्षों में से प्रत्येक वर्ष के लिए कर की औसत इस प्रकार परिकलित की जाएगी मानो इस प्रकार बढ़ी हुर्इ कुल आय उस पूर्ववर्ती वर्ष की कुल आय हो; और
(ii) उपखंड (i) के अनुसार सुसंगत पूर्ववर्ष के ठीक पहले के तीन पूर्ववर्षों के लिए कर की औसत दरों का औसत खंड (क) के प्रयोजनों के लिए, इस खंड के अधीन अवधारित कर की दर होगी।
(4) (क) उपनियम (1) के खंड (ग) में उल्लिखित किसी मामले में, निर्धारिती की उस पूर्ववर्ष की कुल आय पर जिसमें प्रतिकर के रूप में भुगतान प्राप्त किया जाता है (ऐसा पूर्ववर्ष इस उपनियम में इसके पश्चात् सुसंगत पूर्ववर्ष कहा गया है) निर्धारिती द्वारा संदेय कर में से उतनी रकम, यदि कोर्इ हो, घटा दी जाएगी जितनी, ऐसी कुल आय पर लागू कर की औसत दर से परिकलित, सुसंगत पूर्ववर्ष की कुल आय में सम्मिलित प्रतिकर पर कर-राशि खंड (ख) के अधीन अवधारित कर की दर से ऐसे प्रतिकर पर परिकलित, कर-राशि से अधिक है।
(ख) सुसंगत पूर्ववर्ष से ठीक पहले के तीन पूर्ववर्षों में से प्रत्येक वर्ष की बाबत निर्धारिती की कुल आय में, सुसंगत पूर्ववर्ष की कुल आय में सम्मिलित प्रतिकर राशि के एक-तिहार्इ के बराबर रकम जोड़ दी जाएगी और उक्त तीन पूर्ववर्षों में से प्रत्येक वर्ष के लिए कर की औसत दर इस प्रकार परिकलित की जाएगी मानो इस प्रकार बढ़ाकर आर्इ कुल आय उस पूर्ववर्ष की कुल आय हो, और तीन पूर्ववर्षों के लिए इस प्रकार परिकलित कर की औसत दरों का औसत, खंड (क) के प्रयोजनों के लिए इस खंड के अधीन अवधारित कर की दर होगा।
(5) (क) उपनियम (1) के खंड (घ) में उल्लिखित किसी मामले में, निर्धारिती की उस पूर्ववर्ष की कुल आय पर जिसमें पेंशन के संराशिकरण में भुगतान प्राप्त किया जाता है (ऐसा पूर्ववर्ष इस उपनियम में इसके पश्चात् सुसंगत पूर्ववर्ष कहा गया है) निर्धारिती द्वारा संदेय कर में से उतनी रकम, यदि कोर्इ है, घटा दी जाएगी जितनी ऐसी कुल आय पर लागू कर की औसत दर से परिकलित, सुसंगत पूर्ववर्ष की कुल आय में सम्मिलित पेंशन के संराशिकरण में भुगतान पर कर राशि खंड (ख) के अधीन अवधारित कर की दर से ऐसे भुगतान की राशि पर परिकलित, कर-राशि से अधिक है।
(ख) सुसंगत पूर्ववर्ष से ठीक पहले के तीन पूर्ववर्षों में से प्रत्येक वर्ष की बाबत निर्धारिती की कुल आय में, सुसंगत पूर्ववर्ष की कुल आय में सम्मिलित पेंशन के संराशिकरण में भुगतान की रकम के एक-तिहार्इ के बराबर रकम जोड़ दी जाएगी, और उक्त तीन पूर्ववर्षों में से प्रत्येक वर्ष के लिए कर की औसत दर इस प्रकार परिकलित की जाएगी मानो इस प्रकार बढ़ाकर आर्इ कुल आय उस पूर्ववर्ष की कुल आय हो, और उन तीन पूर्ववर्षों के लिए इस प्रकार परिकलित कर की औसत दरों का औसत, खंड (क) के प्रयोजनों के लिए, इस खंड के अधीन अवधारित कर की दर होगा।
(6) उपनियम (1) के खंड (ड़) में उल्लिखित किसी मामले में, बोर्ड, मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, ऐसी राहत प्रदान कर सकेगा जैसी वह ठीक समझे।

