परिपत्र सं. 41/2016 : आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों पर स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 41/2016
परिपत्र की तिथि
21/12/2016
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
21/12/2016
2016 की परिपत्र सं. 41
एफ.नं. 500/43/2012-एफटीएंडटीआर
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
(एफटीएंडटीआर-प्रभाग)
आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों पर स्पष्टीकरण
आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') की धारा 9(1)(i) में शामिल अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों के अंतर्गत भारत में किसी व्यापारिक संबंध के माध्यम से अथवा भारत में किसी संपत्ति के माध्यम से अथवा किसी परिसंपत्ति के माध्यम से अथवा भारत में आय के स्रोत अथवा भारत में स्थित पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के माध्यम से अथवा उत्पन्न अथवा अर्जित समस्त आय, चाहे प्रत्यक्ष हो अथवा अप्रत्यक्ष, भारत में उपार्जित अथवा अर्जित होना समझी जाएगी। उसका स्पष्टीकरण 5 स्पष्ट करता है कि भारत के बाहर निगमित अथवा पंजीकृत कंपनी अथवा उद्यम में किसी शेयर अथवा हित के तौर पर पूंजीगत परिसंपत्ति अथवा किसी परिसंपत्ति भारत में स्थित होना समझी जाएगी और हमेशा समझी जाएगी। यदि शेयर अथवा हित, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से भारत में स्थित परिसंपत्ति से वास्तव में इसकी राशि से प्राप्त होते है। स्पष्टीकरण 6 मुहैया कराता है कि कथित स्पष्टीकरण 5 लागू होगा यदि निर्दिष्ट तिथि पर ऐसी परिसंपत्ति की राशि रू. 10 करोड़ से अधिक हो और कंपनी/उद्यम द्वारा खरीदी गर्इ सभी संपत्तियों की राशि कम से कम 50 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती हो। हालांकि, स्पष्टीकरण 7, ऐसी कंपनी/उद्यम के प्रबंधन अथवा नियंत्रण पर अधिकार न रखने वाले छोटे निवेशकों तथा कंपनी/उद्यम जो भारत में स्थित परिसंपत्ति को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से स्वामित्व रखता है, के कुल वोटिंग अधिकार/शेयर पूंजी/हित के 5 प्रतिशत से कम के अधिग्रहण के लिए कथित स्पष्टीकरण 5 की प्रयोज्यता की कटौती उपलब्ध कराता है। अधिनियम की धारा 285क भारतीय कंपनी पर प्रतिवदेन देयता निक्षेप करता है जिनके शेयर भारत के बाहर पंजीकृत अथवा निगमित कंपनी अथवा उद्यम द्वारा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से वस्तुत: संघटित होते हैं।
2. पूछताछ को अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों के कार्यक्षेत्र के बारे में बोर्ड द्वारा प्राप्त किया गया है। इस संबंध में, बोर्ड ने हितधारकों द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच के लिए 15 जून, 216 को कार्यकारी समूह को गठित किया है। बोर्ड ने कथित मुद्दों पर कार्यकारी समूह की टिप्पणियों पर विचार किया है और निम्नलिखित स्पष्टीकरणों को जारी किया है :
| प्रश्न सं. 1 | एक कोष को प्रसिद्ध क्षेत्राधिकार में स्थापित किया जाता है और भारतीय प्रतिभूतियों में पोर्टफोलियो निवेश के दायित्व के लिए एफपीआर्इ के तौर पर पंजीकृत है। यह भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में निवेश तथा रिटेल/संस्थागत निवेशकों से राशि को एकत्रित करता है। भारत में परिसंपत्ति की राशि अर्थात् इसकी कुल परिसंपत्तियों के 50 प्रतिशत से अधिक तथा रू. 10 करोड़ से अधिक संस्थापित कोष द्वारा संघटित कंपनियां। कोष भारतीय शेयर बाजार पर शेयर को खरीदता तथा बेचता है और अधिनियम अथवा प्रयोज्य कर संधि दरों की धारा 115कघ के अनुसार कर देता है। चालू आधार पर, कोष, इसके इकार्इ धारकों/शेयर धारकों के अनुरोध पर, अपनी इकार्इ/शेयरों को मुक्त करता है। क्या अधिनियम की धारा 9(1)(i) हेतु स्पष्टीकरण 5 कोष द्वारा दी गर्इ मुक्ति पर लागू होगा ? |
| उत्तर : | अधिनियम की धारा 9(1)(i) हेतु स्पष्टीकरण 5 कोष में निवेशकों के संबंध में प्रयोज्य होगी साथ ही, चूंकि उसका मामला कथित धारा के स्पष्टीकरण 6 के वाक्यांश (क) की सीमा में आता है। हालांकि, अधिनियम की धारा 7(क)(i) के स्पष्टीकरण के अंतर्गत आने वाले निवेशकों बाहर हैं। |
| प्रश्न सं. 2 | कोष I और कोष II देश X और देश Y में स्थापित होने वाले प्रोत्साहक कोष हैं। दोनों निवेशकों तथा प्रदाय द्वारा प्रोत्साहक कोष एकत्रित राशि जो राष्ट्र X में स्थापित प्रमुख कोष में है। किसी भी प्रदायक कोष के निवेशक के पास प्रमुख कोष में 5 प्रतिशत से अधिक के शेयर पूंजी अथवा हित के वोटिंग अधिकार को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से संघटित अथवा प्रमुख कोष में प्रबंधन अथवा नियत्रंण का अधिकार नहीं है। प्रमुख कोष भारतीय प्रतिभूतियों में पोर्टफोलियो निवेश करने के लिए एफपीआर्इ के तौर पर पंजीकृत है। भारत में परिसंपत्तियों की राशि अर्थात् प्रमुख कोष द्वारा संघटित भारतीय कंपनियों के शेयर इसकी कुल परिसंपत्ति के 50 प्रतिशत से अधिक तथा रू. 10 करोड़ से अधिक को संस्थापित करता है। क्या अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधान प्रमुख प्रदायक ढ़ांचों में निवेशकों के लिए लागू होगा, जहां प्रदायक कोष केवल निवेशकों द्वारा एकत्रित राशि के लिए ही प्रयोग होता है, जहां कोर्इ भी अंतिम निवेशक कोष में 5 प्रतिशत से अधिक शेयर पूंजी अथवा ब्याज अथवा वोटिंग अधिकार अथवा प्रबंधन अथवा नियंत्रण, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष, को संघटित करता है अथवा संघटित करेगा और इसे प्रभावी करने के लिए घोषणा एफपीआर्इ के तौर पर पंजीकृत कोष हेतु प्रदायक कोष द्वारा प्रस्तुत होता है ? |
| उत्तर : | चूंकि अधिनियम की धारा 9(1)(i) हेतु स्पष्टीकरण 7(क)(ii) की शर्तें प्रथम दृष्टव्य है, जो प्रदायक कोष I तथा II में निवेशकों द्वारा पूरी होती है, प्रदायक कोषों में उनके ब्याज के स्थानांतरण से ऐसे गैर-निवासियों की आय भारत में अर्जित अथवा उपार्जित होने के तौर पर नहीं समझी जाएगी। |
| प्रश्न सं. 3 | एबीसी कं. नामिती/वितरक के तौर पर कार्य करती है जो एफपीआर्इ के तौर पर पंजीकृत विदेशी कोष के लिए कोष के एकत्रीकरण में व्यस्त है। नामिती/वितरकों के माध्यम से निवेश करने वाले किसी भी निवेशक के पास विदेशी कोष में 5 प्रतिशत से अधिक के शेयर पूंजी अथवा हित अथवा वोटिंग अधिकार को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से संघटित अथवा विदेशी कोष में प्रबंधन अथवा नियत्रंण का अधिकार नहीं है। एबीसी कं. विदेशी कोष के बही खातों में पंजीकृत इकार्इ धारक/शेयरधारक के तौर पर पंजीकृत है। भारत में परिसंपत्तियों की राशि अर्थात् विदेशी कोष द्वारा संघटित भारतीय कंपनियों के शेयर इसकी कुल परिसंपत्ति के 50 प्रतिशत से अधिक तथा रू. 10 करोड़ से अधिक को संस्थापित करता है। क्या अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधान प्रत्याक्षी-वितरक प्रकार के ढ़ांचों में निवेशकों के लिए लागू होगा, जिसे केवल निवेशकों द्वारा एकत्रित राशि के लिए ही प्रयोग किया जाता है, जहां कोर्इ भी अंतिम निवेशक कोष में 5 प्रतिशत से अधिक शेयर पूंजी अथवा ब्याज अथवा वोटिंग अधिकार अथवा प्रबंधन अथवा नियंत्रण, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष, को संघटित करता है अथवा संघटित करेगा और इसे प्रभावी करने के लिए घोषणा एफपीआर्इ के तौर पर पंजीकृत कोष हेतु प्रत्याक्षी अथवा वितरक द्वारा प्रस्तुत होता है ? |
| उत्तर : | चूंकि अधिनियम की धारा 9(1)(i) हेतु स्पष्टीकरण 7(क) की शर्ते प्रथम दृष्टव्य है, जो नामिती/वितरकों में निवेशकों द्वारा पूरी होती है, नामिती/वितरकों में उनके ब्याज के स्थानांतरण से ऐसे गैर-निवासियों की आय भारत में अर्जित अथवा उपार्जित होने के तौर पर नहीं समझी जाएगी। |
| प्रश्न सं. 4 | कोष X राष्ट्र क में स्थापित एक विदेशी कोष है। यह एशिया में पोर्टफोलियो निवेश करने के लिए निवेशकों से राशि एकत्रित करता है। यह अपने कोष के 90 प्रतिशत को राष्ट्र ख की कंपनियों के शेयर में निवेश करती है। कोष X भारतीय निवेशकों के लिए इसके कोष के 10 प्रतिशत पर आवंटित किया गया है। इसके लिए उसने विशेषरूप से भारतीय प्रतिभूतियों में निवेश के लिए कर प्रभावी क्षेत्राधिकार में अधिवासित भारतीय केंद्रित उप-कोष को स्थापित किया है। क्या अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधान भारतीय निवेशों के लिए पृथक भारतीय केंद्रित उप-कोष को प्रयोग करते हुए कोष X के लिए लागू होगा, जहां कोर्इ भी अंतिम निवेशक विदेशी कोष में 5 प्रतिशत से अधिक शेयर पूंजी अथवा ब्याज अथवा वोटिंग अधिकार अथवा प्रबंधन अथवा नियंत्रण को संघटित करता है। |
| उत्तर : | उसके स्पष्टीकरण 5 के साथ पठित अधिनियम की धारा 9(1)(i) के अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधान कोष X की स्थिति में लागू होगा, चूंकि उप-कोष में इसके द्वारा संघटित शेयर/इकार्इयों की राशि अंतिम निवेशकों के शेयरधारकों के बावजूद भारत में स्थित परिसंपत्तियों से वस्तुत: इसकी राशि से प्राप्त होती है। |
| प्रश्न सं. 5 : | एक विदेशी सूचीबद्ध कोष भारतीय प्रतिभूतियों में पोर्टफोलियो निवेश करने के लिए एफपीआर्इ के तौर पर पंजीकृत है। भारतीय परिसंपत्तियों की राशि अर्थात् विदेशी सूचीबद्ध कोष द्वारा संघटित भारतीय कंपनियों के शेयर इसकी कुल परिसंपत्तियों के 50 प्रतिशत से अधिक तथा रू. 10 करोड़ से अधिक को संस्थापित करता है। विदेशी सूचीबद्ध कोष के इकार्इ धारक अथवा निवेशक दैनिक आधार पर बदलते रहते है और खरीदी तथा बिक्री के लिए कोष का निपटान निर्धारित निपटान तंत्र के स्टाक के आदान-प्रदान के माध्यम से होता है। क्या अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधान विदेशी सूचीबद्ध उद्यम के शेयर अथवा इकार्इयों के स्थानांतरण पर लागू होगा ? |
| उत्तर : | अधिनियम की धारा 9(1)(i) हेतु स्पष्टीकरण 5 कोष में भी निवेशकों के संबंध में लागू होगा, चूंकि उनके मामले में कथित धारा के स्पष्टीकरण 6 के वाक्यांश (क) की सीमा के भीतर आता है। हालांकि अधिनियम के स्पष्टीकरण 7(क)(i) के अंतर्गत आने वाले निवेशक इससे बाहर हैं। |
| प्रश्न सं. 6 : | कोष P तथा कोष Q को राष्ट्र क में 'निगमित उद्यम' के तौर पर बनाया गया है। भारत में परिसंपत्ति की राशि अर्थात् कोष त द्वारा संघटित भारतीय कंपनियों के शेयर इसकी कुल परिसंपत्ति से 50 प्रतिशत अधिक है। समामेलन की एक योजना के आधार पर, कोष त राष्ट्र क में कोष थ में मिला दिया जाता है। राष्ट्र क में विलय कर तटस्थ है। विलय के परिणामस्वरूप, कोष त के निवेशक कोष थ में निवेशक बन जाते हैं। क्या कोष त के निवेशक अथवा शेयरधारक कोष त के समामेलन के माध्यम से अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों के आधार पर भारत में कर के लिए उत्तरदायी है तथा कोष थ अधिनियम की धारा 47(अपकख) के अंतर्गत 'स्थानांतरण' के तौर पर संदर्भित नहीं है। |
| उत्तर : | अधिनियम की धारा 47(viकख) के अंतर्गत, विदेशी कंपनी को समामेलित विदेशी कंपनी द्वारा संघटित, एक भारतीय कंपनी के शेयरों से वस्तुत: इसकी राशि को प्राप्त करने वाली एक विदेशी कंपनी के शेयर के समामेलन की योजना में कोर्इ स्थानांतरण उसमे निर्दिष्ट शर्तों के अनुसार स्थानांतरण के तौर पर संबंधित नहीं है। मौजूदा प्रावधानों के अंतर्गत यह छूट समामेलित विदेशी कंपनी के शेयरधारकों/निवेशकों को विस्तारित नहीं की जाती। इसलिए ऐसे शेयरधारक/निवेशक अधिनियम की धारा 9(1)(i) के अंतर्गत भारत में कर हेतु उत्तरदायी होंगे। |
| प्रश्न सं. 7 : | कोष X तथा कोष Y को राष्ट्र क में 'गैर-निगमति उद्यम' के तौर पर बनाया गया है। कंपनी Z एक एसपीवी है जिसे विशेष रूप से भारतीय निवेशकों के लिए कर प्रभावी क्षेत्राधिकार में गठित किया गया है। कोष X कंपनी Z के 100 प्रतिशत शेयरधारकों का संघटन रखता है। समामेलन की योजना के आधार पर, कोष X राष्ट्र क में कोष Y में समामेलित होता है। समामेलन राष्ट्र क में कर तटस्थ है। विलयन के परिणामस्वरूप, कोष X के निवेशक कोष Y में निवेशक बन जाता है। क्या अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधान विदेशी 'गैर-निगमति उद्यमों' के विदेशी मामेलन अथवा डिमर्जर के मामले में लागू होंगे ? |
| उत्तर : | अधिनियम की धारा 47 के प्रावधान निगमित उद्यमों के समामेलन के संबंध में ही लागू होंगे। परिणामस्वरूप, गैर-निगमित उद्यमों के समामेलन अधिनियम की धारा 9(1)(i) के प्रावधानों को आकर्षित करेगा। |
| प्रश्न सं. 8 : | कोष X एफपीआर्इ के तौर पर पंजीकृत है। उत्तरगामी लेखांकन अवधि के अंतिम दिन के अनुसार, भारत में परिसंपत्ति की राशि अर्थात् कोष X द्वारा संघटित भारतीय कंपनियों के शेयर इसकी कुल परिसंपत्तियों के 50 प्रतिशत से अधिक तथा रू. 10 करोड़ से अधिक को संस्थापित करता है। हालांकि, स्थानांतरण की तिथि के अनुसार, कोष X द्वारा संघटित भारत में परिसंपत्तियों की राशि कुल परिसंपत्तियों का केवल 47 प्रतिशत है। स्थानांतरण की तिथि के अनुसार परिसंपत्तियों की बही राशि स्थानांतरण की तिथि की उत्तरगामी लेखांकन अवधि के अंतिम दिन के अनुसार परिसंपत्ति की बही राशि के कम से कम 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। क्या अप्रत्यक्ष प्रावधान लागू होंगे यदि विदेशी स्थानांतरण स्थानांतरण की तिथि पर अधिनियम की धारा 9(1)(i) के स्पष्टीकरण 6 के वाक्यांश (क) के अंतर्गत प्रकल्पितानुसार वास्तविक राशि को पूरी नहीं करता ? |
| उत्तर : | अधिनियम की धारा 9(1)(i) की धारा 6 के स्पष्टीकरण के अंतर्गत, भारत में स्थित परिसंपत्ति से इसकी वस्तुत: राशि को प्राप्त करने वाले विदेशी उद्यम की परिसंपत्ति की राशि कथित स्पष्टीकरण के वाक्यांश (घ) के अनुसार निर्दिष्ट तिथि के अनुसार आंकी जाएगी। उदाहरण में, निर्दिष्ट तिथि वह तिथि होगी जिस पर ऐसे उद्यम की लेखांकन अवधि स्थानांतरण की उत्तरगामी तिथि समाप्त होती है। अप्रत्यक्ष प्रावधान भी लागू होंगे चूंकि विदेशी स्थानांतरण निर्दिष्ट तिथि के अनुसार वास्तविक राशि परीक्षा को पूरा करता है। |
| प्रश्न सं. 9 : | कंपनी क प्राधिकृत भारतीय शेयर बाजार में सूचबीद्ध भारतीय पब्लिक लिमिटेड कंपनी है। कर्इ एफपीआर्इ (विदेशी सूचीबद्ध कोष सहित) एफपीआर्इ के रास्ते कंपनी क में निवेश करते हैं। विदेशी स्तर पर एफपीआर्इ के शेयर अथवा इकार्इ दैनिक आधार पर खरीदें अथवा बेचे जाते हैं और एफपीआर्इ में निवेशक लगातार परिवर्तित होते रहते हैं। ऐसी स्थिति में कंपनी क कैसे निर्णय करेगी कि एफपीआर्इ निवेशक द्वारा संघटित भारत में परिसंपत्तियों की राशि इसकी कुल परिसंपत्तियों के 50 प्रतिशत से अधिक है? जहां एफपीआर्इ ने कर्इ भारतीय कंपनियों में निवेश किया है, क्या इस प्रावधान के अनुसार भारतीय कंपनी के लिए वास्तविक चुनौतियां है ? |
| उत्तर : | धारा 285क के अंतर्गत प्रतिवेदन अनिवार्यता तब ट्रिगर होती है जब विदेशी कंपनी के शेयर /उद्यम अपनी राशि को वास्तविक रूप से भारत में स्थित परिसंपत्तियों से प्राप्त करती है। चूंकि धारा 285क तथा नियम 114घख को हाल ही में प्रारंभ किया गया है, उनका वास्तविक कार्यान्वयन पहले देखा जाना चाहिए। |
| प्रश्न सं. 10 | एफपीआर्इ मुख्यत: पोर्टफोलियो निवेशक है और नाकि रणनीतिक निवेशक। भारतीय प्रतिभूतियों के स्थानांतरण अथवा बिक्री पर एफपीआर्इ द्वारा अर्जित प्राप्ति आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार भारत में कर के लिए उत्तरदायी है, यदि अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधान इन एफपीआर्इ के लिए प्रयोज्य बनाए जाते है तो इसी आय के दोहरे कराधान की संभावना है अर्थात् एफपीआर्इ द्वारा भारतीय प्रतिभूतियों के प्रत्यक्ष स्थानांतरण पर अर्जित प्राप्त पर कर तथा एफपीआर्इ में इकार्इयों के मोचन पर एफपीआर्इ के निवेशकों द्वारा अर्जित प्राप्ति पर कर। इसलिए, एफपीआर्इ के लिए छूट मुहैया करार्इ जानी चाहिए। |
| उत्तर : | कटौती अधिनियम की धारा 9(1)(i) हेतु स्पष्टीकरण 7 में छोटे निवेशकों के लिए पहले से उपलब्ध है। |
| प्रश्न सं. 11 | छोटे शेयरधारकों को छूट देने के लिए 5 प्रतिशत प्रारंभिक सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, एफपीआर्इ के संदर्भ में शब्द 'संबंद्ध उद्यम' का अर्थ एफपीआर्इ अर्थात् सामान्य लाभार्थी स्वामित्व के 50 प्रतिशत से अधिक, के सामान्य लाभार्थी स्वामित्व को निश्चित करने के लिए भारतीय विनिमय और प्रतिभूति बोर्ड द्वारा संगणित क्या है के आधार पर परिभाषित होना चाहिए। |
| उत्तर : | प्रारंभिक 5 प्रतिशत अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों की सीमा से छोटे शेयरधारकों के अलावा उपयुक्त है। सेबी की परिभाषा के साथ 'संबंद्ध उद्यम' की परिभाषा के संरेखण आवश्यक नहीं है चूंकि आयकर अधिनियम के अंतर्गत संबंद्ध उद्यमों की परिभाषा के अनुसार आधारित है तथा उद्यम के प्रबंधन, नियंत्रण तथा पूंजी की संकल्पना पर आधारित है। |
| प्रश्न स. 12 : | एफपीआर्इ के लिए अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों की प्रयोज्यता के ट्रिगर के लिए भारतीय निवेशक के 10 करोड़ की आर्इएनआर राशि की प्रारंभिक मौद्रिक राशि आर्इएनआर 100 करोड़ तक बढ़ार्इ जानी चाहिए। |
| उत्तर : | रू. 10 करोड़ की शुरूआती सीमा उपयुक्त है। |
| प्रश्न सं. 13 : | एफपीआर्इ की स्थिति में जो विदेशी शेयर बाजार पर सूचीबद्ध है, शेयर अथवा इकर्इयों की बारंबार ट्रेडिंग प्रतिदिन विदेशी विनिमय पर होती है। इसलिए, एफपीआर्इ जो नियोजित है तथा प्राधिकृत शेयर बाजार पर सूचीबद्ध है अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों के क्षेत्र से बाहर होना चाहिए। |
| उत्तर : | अप्रत्यक्ष स्थानांतरण के अंतर्गत कराधान को निर्धारित करने के लिए परिस्थितियां अधिनियम की धारा 9(1)(i) के स्पष्टीकरण 6 तथा स्पष्टीकरण 7 में मुहैया कराया जाता है। इसे देखते हुए, अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों की सीमा से विदेशी शेयर बाजार पर सूचीबद्ध तथा नियमित एफपीआर्इ को विशेषरूप से छोड़कर कटौती संभव नहीं है। |
| प्रश्न सं. 14 : | आंतरिक पुनर्गठन में लेनदेन के लिए मुहैया करार्इ गर्इ छूट का लाभ वर्तमान में 'कंपनियों' के तौर पर वर्गीकृत एफपीआर्इ तक ही सीमित है। क्या यह लाभ सभी एफपीआर्इ के इकार्इ धारकों अथवा शेयरधारकों तथा गैर-निगमित एफपीआर्इ को विस्तारित किए जा सकते हैं ? |
| उत्तर : | अधिनियम की धारा 47 के अंतर्गत लाभ समामेलनी विदेशी कंपनी के शेयरधारकों/निवेशकों को विस्तारित नहीं किए जाते। ऐसे शेयरधारक/निवेशक अधिनियम की धारा 9(1)(i) के अंतर्गत भारत में कर के लिए उत्तरदायी होंगे। आगे, अधिनियम की धारा 47 के प्रावधान निगमित उद्यमों के समामेलन के संबंध में ही लागू होंगे, उसमें निर्दिष्ट कुछ शर्तों के अनुसार। जैसे कि गैर-निगमित उद्यमों का समामेलन अधिनियम की धारा 9(1)(i) के प्रावधानों को आकर्षित करेगा। |
| प्रश्न सं. 15 : | भारतीय परिसंपित्तयों की उचित बाजार कीमत को निर्धारित करने के नियम के सामने वैश्विक परिसंपित्तयों को निर्धारित किया जाना चाहिए ? |
| उत्तर : | अधिसूचना एस.ओ. 2226(र्इ) दिनांक 28 जून, 2016 के अनुसार, नियम 11पख और नियम 11पग को अधिनियम की धारा 9(1)(i) के लिए आय के विभाजन तथा परिसंपत्ति की उचित बाजार कीमत के निर्धारण की विधि के लिए मुहैया कराने के लिए आयकर नियमों को शामिल किया गया है। |
| प्रश्न सं 16 : | अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधान लागू होने हैं यदि निर्दिष्ट तिथि पर, भारतीय परिसंपत्तियों की उचित बाजार कीमत निर्दिष्ट प्रारंभिक सीमा से अधिक होती है। इसके लिए निर्दिष्ट तिथि का सामान्य अर्थ वह तिथि है जिस पर कंपनी अथवा उद्यम की लेखांकन अवधि समाप्त होती है शेयर अथवा हित के स्थानांतरण की तिथि के पश्चात्। निर्दिष्ट तिथि स्थानांतरण की तिथि होनी चाहिए। |
| उत्तर : | अधिनियम की धारा 9(1)(i) हेतु स्पष्टीकरण 6 के वाक्यांश (घ) को निर्दिष्ट तिथि के निर्धारण के लिए दो स्थितियों हेतु मुहैया कराया गया है अर्थात् तिथि जिस पर स्थानांतरण की तिथि के तत्पश्चात् ऐसे उद्यम की लेखांकन अवधि समाप्त होती है और जहां स्थानांतरण की तिथि पर उद्यम की परिसंपत्तियों की बही राशि 15 प्रतिशत द्वारा तिथि की उक्त निर्दिष्ट लेखांकन समाप्ति पर परिसंपत्ति की बही राशि से अधिक होती है, स्थानांतरण की तिथि निर्दिष्ट तिथि के अनुसार ली जाएगी। स्थानांतरण की तिथि के अनुसार अकेली निर्दिष्ट तिथि को लेने का परिणाम प्रावधान का उल्लंघन हो सकता है। |
| प्रश्न सं. 17 : | भारतीय परिसंपत्तियों की उचित बाजारी कीमत को निर्धारित करने के नियम के साथ-साथ वैश्विक परिसंपत्ति को नियत अवधि में निर्धारित किया जाना है। इन नियमों को अधिसूचित करने के समय, यह सुझाया जाता है कि गैर-निवासी स्थानांतरणकर्ता (विदेशी विनिमय अस्थिरता के लाभ तथा सूचकांक लाभ के फायदा उठाने पर स्पष्टता) के हाथों अधिग्रहण की लागत को निर्धारित करने का तरीका किसी विवाद से बचने के लिए भी विशेषरूप से मुहैया कराया जाना चाहिए। |
| उत्तर : | अधिसूचना एस.ओ. 2226(र्इ) दिनांक 28 जून, 2016 के द्वारा नियम 11पख तथा नियम 11पग को आयकर नियम 1961 में अधिनियम की धारा 9(1)(i) के लिए आय की उपयुक्तता तथा परिसंपत्तियों की राशि को निर्धारित करने के लिए विधि हेतु मुहैया कराने के लिए शामिल किया गया है। अस्थिरता के कराधान लाभ/विदेशी विनिमय अधिनियम के अनुसार होंगे। |
| प्रश्न सं. 18 : | अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधान सरकार द्वारा निर्धारित आवश्यक नियमों के उपयुक्त समय के बाद ही संचालित होना चाहिए। |
| उत्तर : | अप्रत्यक्ष स्थानांतरण कानून तथा नियम पहले से ही प्रचालित किए गए हैं। |
| प्रश्न सं. 19 : | अप्रत्यक्ष स्थानांतरण कर के प्रावधानों का अनुपालन करने के लिए चुनौतियां तथा एफपीआर्इ संचालनात्मक ढ़ांचे में विशिष्टता देते हुए, यह सुझाया जाता है कि एफपीआर्इ प्रारंभिक कर अनिवार्यता से कार्य मुक्त होनी चाहिए। वैकल्पिक रूप से, एफपीआर्इ पर ऐसी अनिवार्यता को प्रवर्तित करने के लिए प्रारंभिक सीमा को बढ़ाया जा सकता है। आगे, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि स्रोत पर करों की कटौती की विफलता के लिए जुर्माना अथवा कोर्इ ब्याज नहीं लगाया जाएगा तथा एफपीआर्इ को अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों के पूर्वप्रभावी प्रयोग के कारण 'प्रतिनिधि निर्धारिती' अथवा 'त्रुटिपूर्ण निर्धारिती' के तौर पर नहीं समझा जाएगा। |
| उत्तर : | प्रारंभिक कर, ब्याज तथा जुर्माने के प्रावधान कानून के अनुसार लागू होंगे। |
(सुप्रिया राव)
अवर सचिव (एफटी & टीआर-IV(2))
1. अध्यक्ष, सदस्य और सीबीडीटी के अवर सचिव तथा उससे ऊपर के अधिकारी
2. राजस्व सचिव का निजी सचिव
3. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त व समस्त आयकर महानिदेशक समस्त अधिकारियों के ध्यान में लाने के अनुरोध के साथ
4. प्रधान आयकर महानिदेशक, एनएडीटी, नागपुर
5. प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति), एआरए सेंटर, झंडेवालान एक्सटेंशन, नर्इ दिल्ली
6. प्रधान आयकर महानिदेशक (सतर्कता), नर्इ दिल्ली
7. एडीजी(पीआर, पीपी व ओएल), मयूर भवन, नर्इ दिल्ली मेलिंग लिस्ट के अनुसार वितरण तथा त्रैमासिक कर बुलेटिन के मुद्रण के लिए (100 प्रतियां)
8. सीएंडएजी, नर्इ दिल्ली
9. पब्लिक डोमेन पर चस्पा करने के लिए व incometaxindia.gov.in पर अपलोडिंग के लिए वेब मैनेजर
10. irsofficersonline पर अपलोडिंग के लिए डाटा बेस प्रकोष्ठ
11. गार्ड फाइल

