परिपत्र सं. 2/2020 : परिपत्र सं. 2/2020
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 2/2020
परिपत्र की तिथि
03/01/2020
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
03/01/2020
परिपत्र सं. 2/2020 (एफ.सं. 197/55/2018-आईटीए-I), दिनांक 3-1-2020
आयकर अधिनियम (तत्पश्चात् 'अधिनियम') की धारा 12क के प्रावधान के अंतर्गत जहां धारा 11 और धारा 12 के प्रावधानों को प्रभावी किए बिना अधिनियम के अंतर्गत आंकलन के आधार पर एक न्यास या संस्थान की कुल आय, अधिकतम राशि जो किसी पिछले वर्ष में आयकर हेतु वसूलनीय नही है, से अधिक है तो उस वर्ष के लिए न्यास या संस्थान के खातों को धारा 288 की उप-धारा (2) के नीेचे स्पष्टीकरण में परिभाषित किसी अकाउंटेंट द्वारा अंकेक्षित किया जाना है और आय को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी सहित निर्धारण में ऐसे अंकेक्षण की रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आवश्यक है जिसे ऐसे अकाउंटेंट द्वारा हस्ताक्षरित और सत्यापित किया गया हो और ऐसे ब्यौरे को पृथक किया गया हो जिसे निर्धारित किया जा सके।
2. आयकर नियम, 1962 (तत्पश्चात् 'नियम') के नियम 17ख के अनुसार ऐसे एक न्यास या संस्थान के खातों की अंकेक्षण रिपोर्ट को प्रपत्र सं. 10ख में प्रस्तुत किया जाना है। नियमों के नियम 12(2) के अनुसार, ऐसी अंकेक्षण रिपोर्ट को इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुत किया जाना है। आय की विवरणी के साथ निर्धारण में ऐसी रिपोर्ट को प्रस्तुत न करने पर न्यास या संस्थान को अधिनियम की धारा 11 और 12 के अंतर्गत स्पष्टीकरण का दावा करने से अयोग्य किया जा सकता है।
3. बोर्ड/क्षेत्रीय प्राधिकारियों को यह निर्दिष्ट करते हुए प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ है कि प्रपत्र सं. 10ख को निर्धारण वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 के लिए आय की विवरणी के साथ दाखिल नहीं किया जा सका। यह अनुरोध किया गया है कि प्रपत्र 10ख को दाखिल करने में देरी को नजरअंदाज किया जा सकता है। पहले, एफ.सं. 267/482/77-आईटी(भाग) दिनांक 9-2-1978 में निर्देश के द्वारा, सीबीडीटी ने आईटीओ को उन मामलों में कारणों को दर्ज करने के बाद लंबित अंकेक्षण रिपोर्ट को प्राधिकृत किया गया था जहां कुछ देरी निर्धारिती के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण हुई थी।
4. तदनुसार, सीबीडीटी ने इस संबंध में जारी पहले परिपत्र/निर्देशों के अतिक्रमण में, एफ.सं. 197/55/2018-आईटीए-I के माध्यम से परिचालित परिपत्र सं. 10/2019 और प्रपत्र सं. 10ख को दाखिल करने में देरी को नजरअंदाज करने के लिए ऐसे न्यास या संस्थान द्वारा दाखिल आवेदनों के जल्द निपटान को देखते हुए और अधिनियम की धारा 119(2) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने परिपत्र सं. 10/2019 दिनांक 23 मई 2019 और परिपत्र सं. 28/2019 दिनांक 27 सितंबर, 2019 जिनको एफ. सं. 197/55/2018-आईटीए-I के द्वारा जारी किया गया है, के द्वारा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने निर्देश दिया है कि :-
(i) निर्धारण वर्ष 2016-17 और निर्धारण वर्ष 2017-18 को दाखिल करने में देरी, ऐसे भी मामलों में जहां पिछले वर्ष के लिए अंकेक्षण रिपोर्ट को आय की विवरणी को दाखिल करने से पहले प्राप्त किया गया है और आय की विवरणी को दाखिल करने के परिणामस्वरूप लेकिन अधिनियम की धारा 139 के अंतर्गत निर्दिष्ट तिथि से पहले प्रस्तुत की गई है, नजरअंदाज की गई है।
(ii) निर्धारण वर्ष 2018-19 से पहले के वर्षों के लिए प्रपत्र सं. 10ख को दाखिल करने में लंबित आवेदनों के अन्य सभी मामलों में आयकर आयुक्त को अधिनियम की धारा 119(2)(ख) के अंतर्गत देरी को नजरअंदाज करने के लिए ऐसे आवेदनों को 31-03-2020 तक जमा करने और निपटान करने के लिए प्राधिकृत किया गया है। प्रपत्र सं. 10ख को दाखिल करने के दौरान ऐसे लंबित आवेदनों पर विचार करने के दौरान आयुक्त अपने आप को संतुष्ट करेंगे कि निर्धारिती को नियत समय के अंदर ऐसे आवेदन को दाखिल करने से उपयुक्त कारण द्वारा रोका गया था।
5. उक्त के अलावा, सीबीडीटी जी द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि जहां निर्धारण वर्ष 2018-19 या उसके बाद के निर्धारण वर्ष के लिए प्रपत्र सं. 10ख को दाखिल करने में 365 दिनों तक की देरी हुई हो तो आयकर आयुक्त एतद् द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 119(2) के अंतर्गत देरी को नंजरअंदाज करने संबंधी लंबित आवेदनों को जमा करने और योग्यता के आधार पर निर्णय लेने के लिए प्राधिकृत है।
6. आयकर आयुक्त प्रपत्र सं. 10ख में दाखिल ऐसे लंबित आवेदनों पर विचार करते हुए खुद को संतुष्ट करेंगे कि निर्धारिती को नियत समय के अंदर ऐसे आवेदन को दाखिल करने से उपयुक्त कारण द्वारा रोका गया था।

