प्रारम्भिक सूचना
64प्रारम्भिक सूचना
269घ. (1) सक्षम प्राधिकारी इस अध्याय के अधीन, धारा 269ग में उल्लिखित किसी स्थावर सम्पत्ति के अर्जन के लिए कार्यवाहियां, उस आशय की सूचना राजपत्र में प्रकाशित करके, प्रारम्भ करेगा :
परन्तु किसी स्थावर सम्पत्ति की बाबत ऐसी कार्यवाही 65[यथास्थिति,] रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) 65[या धारा 269कख] के अधीन उस सम्पत्ति के संबंध में जिस मास में अन्तरण-लिखत का रजिस्ट्रीकरण हुआ है, उसकी समाप्ति से 66[नौ] मास की अवधि बीतने के पश्चात् प्रारम्भ नहीं की जाएगी:
परन्तु यह और कि–
(क) उस मामले में, जहां उस सक्षम प्राधिकारी द्वारा, जिसने इस अध्याय के अधीन किसी स्थावर सम्पत्ति के अर्जन के लिए कार्यवाहियां प्रारम्भ की हैं, या बोर्ड द्वारा धारा 269ख की उपधारा (4) के अधीन यह अवधारित किया जाता है कि ऐसे सक्षम प्राधिकारी को ऐसी कार्यवाहियां प्रारंभ करने की अधिकारिता नहीं है, वहां अधिकारिता रखने वाला सक्षम प्राधिकारी ऐसी कार्यवाहियां–
(i) पूर्वगामी परन्तुक में निर्दिष्ट 66क[नौ] मास की अवधि के अंदर; या
(ii) ऐसे अवधारण की तारीख से तीस दिन की अवधि के अन्दर;
जो भी बाद में समाप्त हो, प्रारम्भ कर सकता है;
(ख) उस मामले में जहां इस अध्याय के अधीन किसी स्थावर सम्पत्ति के अर्जन की कार्यवाहियां, किसी अवधि के दौरान किसी न्यायालय की ऐसी कार्यवाहियां चलाने को प्रतिषिद्ध करने संबंधी या इस बात का अवधारण के प्रयोजनों के लिए कि ऐसी कार्यवाहियां प्रारम्भ की जानी चाहिएं अथवा नहीं, जांच के लिए अपेक्षित दस्तावेज या अन्य सामग्री की जांच रोकने संबंधी व्यादेश या आदेश के कारण प्रारंभ नहीं की जा सकी थीं वहां, उस अवधि की संगणना करने में, जिसके दौरान इस उपधारा के अधीन कार्यवाहियां प्रारम्भ की जा सकती हैं, व्यादेश या आदेश के जारी रहने का समय, उसके जारी किए जाने का दिन और उसके वापस लिए जाने का दिन हिसाब में नहीं लिया जाएगा।
(2) सक्षम प्राधिकारी–
(क) किसी स्थावर सम्पत्ति की बाबत उपधारा (1) के अधीन सूचना की अन्तरक पर, अंतरिती पर, यदि वह सम्पत्ति अन्तरिती के अधिभोग में नहीं है, तो उसका अधिभोग करने वाले व्यक्ति पर और ऐसे प्रत्येक व्यक्ति पर तामील कराएगा जिसके बारे में सक्षम प्राधिकारी यह जानता है कि वह उस सम्पत्ति में हितबद्ध है;
(ख) ऐसी सूचना को–
(i) अपने कार्यालय में ऐसे किसी स्थान पर जिस पर सबकी नजर पड़ सके, उसकी प्रति लगवा कर प्रकाशित कराएगा;
(ii) उस परिक्षेत्र में जिसमें उससे सम्बद्ध स्थावर सम्पत्ति स्थित है, सम्पत्ति के किसी ऐसे भाग पर जिस पर सबकी नजर पड़ सके उसकी प्रति लगवा कर और उक्त परिक्षेत्र में सुविधाजनक स्थानों पर ऐसी सूचना के सार से, ऐसी रीति में अवगत कराते हुए, जो विहित की जाए, प्रकाशित कराएगा।
67[स्पष्टीकरण.–धारा 269ख की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण के उपबंध, इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस उपधारा के प्रयोजनों के संबंध में लागू होते हैं।]
64. देखिए नियम 48ड़.
65. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 1.7.1982 से अंत:स्थापित।
66. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1973 द्वारा 15.11.1972 से भूतलक्षी प्रभाव से ''छह'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
66क. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1973 द्वारा 15.11.1972 से भूतलक्षी प्रभाव से ''छह'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
67. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 1.7.1982 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

