केन्द्रीय सरकार में संपत्ति का निहित होना
केन्द्रीय सरकार में संपत्ति का निहित होना
269झ. किसी स्थावर सम्पत्ति की बाबत अर्जन का आदेश धारा 269च की उपधारा (6) के अधीन अंतिम हो जाने के पश्चात्, यथासंभव शीघ्र सक्षम प्राधिकारी, लिखित सूचना द्वारा, ऐसे व्यक्ति को जिसका स्थावर सम्पत्ति पर कब्जा है यह आदेश दे सकता है कि वह सक्षम प्राधिकारी को या इस निमित्त सक्षम प्राधिकारी द्वारा सम्यक्त: लिखित रूप में प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति को सूचना की तामील की तारीख से तीस दिन के अन्दर कब्जा अभ्यर्पित करे या दे।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, धारा 269च की उपधारा (6) के अधीन किया गया किसी स्थावर सम्पत्ति के अर्जन संबंधी आदेश (जिसे इसके पश्चात् इस स्पष्टीकरण में अर्जन संबंधी आदेश कहा गया है) अंतिम हो जाएगा–
(क) ऐसे मामले में जिसमें अर्जन संबंधी आदेश को धारा 269छ के अधीन अपील अधिकरण में अपील का विषय, उस अवधि के बीतने पर न बनाया जाए जिसके दौरान ऐसी अपील उस धारा के अधीन प्रस्तुत की जा सकती है;
(ख) ऐसे मामले में जिसमें अर्जन संबंधी आदेश को धारा 269छ के अधीन अपील अधिकरण में अपील का विषय बनाया जाए–
(i) यदि अर्जन संबंधी आदेश की अपील अधिकरण द्वारा पुष्टि कर दी जाती है, और अपील अधिकरण का आदेश धारा 269ज के अधीन उच्च न्यायालय से अपील का विषय नहीं बनाया जाता है तो, उस अवधि की समाप्ति पर, जिसके दौरान उस धारा के अधीन उच्च न्यायालय से ऐसी अपील की जा सकती है;
(ii) यदि अपील अधिकरण का आदेश धारा 269ज के अधीन उच्च न्यायालय में अपील का विषय बन जाता है तो उच्च न्यायालय द्वारा अर्जन के आदेश की पुष्टि पर।
(2) यदि कोर्इ व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन दी गर्इ सूचना का अनुपालन करने से इंकार करता है या करने में असफल रहता है, तो समक्ष प्राधिकारी या उस उपधारा के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा सम्यक्त: प्राधिकृत कोर्इ अन्य व्यक्ति स्थावर सम्पत्ति का कब्जा ले सकता है और इस प्रयोजन के लिए इतना बल प्रयोग कर सकता है, जो आवश्यक हो।
(3) उपधारा (2) की किसी बात के होते हुए भी, सक्षम प्राधिकारी उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी सम्पत्ति का कब्जा लेने के प्रयोजनों के लिए अपनी सहायता के लिए किसी पुलिस अधिकारी की सेवाओं की मांग कर सकता है और ऐसे पुलिस अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसी मांग का पालन करे।
(4) जब उपधारा (1) के अधीन स्थावर सम्पत्ति के कब्जे का अभ्यर्पण या परिदान सक्षम प्राधिकारी या उसके द्वारा, यथास्थिति, इस निमित्त सम्यक्त: प्राधिकृत किसी व्यक्ति को किया जाता है या जब उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन ऐसे प्राधिकारी या व्यक्ति द्वारा कब्जा लिया जाता है तब संपत्ति सभी विल्लंगमों से युक्त होकर केन्द्रीय सरकार में पूर्ण रूप से निहित होगी :
परन्तु इस उपधारा की कोर्इ बात अन्तरिती या किसी अन्य व्यक्ति को (जो केन्द्रीय सरकार नहीं है) ऐसे विलंगमों की बाबत दायित्व से उन्मोचित नहीं करेगी और किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा दायित्व नुकसानी के वाद द्वारा अन्तरिती या ऐसे अन्य व्यक्ति के विरुद्ध प्रवर्तित कराया जा सकता है।
98[(5) उपधारा (4) में या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि या किसी लिखत या किसी करार में किसी बात के होते हुए भी, जहां स्थावर सम्पत्ति के जो धारा 269कख की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति के ऐसे अधिकार हैं, जो किसी ऐसे भवन या भवन के भाग में या उसकी बाबत है, जिसका निर्माण हो चुका है या जिसका निर्माण होना है, अर्जन का आदेश अंतिम हो गया है वहां ऐसा आदेश अपने ही बल से इस प्रकार प्रभावी होगा कि–
(क) ऐसे अधिकार केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएंगे; और
(ख) केन्द्रीय सरकार ऐसे अधिकारों के संबंध में उसी स्थिति में आ जाएगी जिसमें वह व्यक्ति होता, जिसमें ऐसे अधिकार निहित बने रहते, यदि ऐसा आदेश अंतिम न हो जाता,
और सक्षम प्राधिकारी खंड (क) और खंड (ख) के उपबंधों के पालन के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए किसी संबंधित व्यक्ति को ऐसे निर्देश जारी कर सकेगा, जो वह ठीक समझे।
(6) किसी स्थावर सम्पत्ति की दशा में, जो धारा 269कख की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति के ऐसे अधिकार हैं जो किसी भवन या भवन के भाग में या उसकी बाबत है, उपधारा (1), उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो उनमें स्थावर सम्पत्ति के प्रति निर्देश, यथास्थिति, ऐसे भवन या ऐसे भवन के भाग के प्रति निर्देश हो।]
98. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 1.7.1982 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

