आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 115ज

निर्धारिती के निवासी हो जाने के बाद भी कुछ दशाओं में इस अध्याय के अधीन फायदों का उपलभ्य होना

धारा

धारा संख्या

115ज

अध्याय शीर्षक

अध्याय XII-क - गैर निवासियों के कुछ आय के संबंध में विशेष प्रावधान

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

1999

निर्धारिती के निवासी हो जाने के बाद भी कुछ दशाओं में इस अध्याय के अधीन फायदों का उपलभ्य होना

निर्धारिती के निवासी हो जाने के बाद भी कुछ दशाओं में इस अध्याय के अधीन फायदों का उपलभ्य होना
निर्धारिती निवासी बन जाता है, के बाद भी कुछ मामलों में उपलब्ध होने की अध्याय के तहत लाभ.
115H.  किसी भी पिछले एक साल में एक अनिवासी भारतीय है जो एक व्यक्ति, किसी भी बाद साल की कुल आय के संबंध में भारत में निवासी के रूप में कर लगाने योग्य हो जाता है, वह करने के लिए प्रस्तुत हो सकता है 74 [आकलन] अधिकारी के साथ लिखित रूप में एक घोषणापत्र उसकी वह इस अध्याय के उपबंधों किसी भी विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति प्रकृति की एक परिसंपत्ति होने से व्युत्पन्न निवेश आय के संबंध में उसे लागू करने के लिए जारी करेगा कि प्रभाव के लिए, तो निर्धारणीय है जिसके लिए आकलन वर्ष के लिए धारा 139 के तहत आयकर रिटर्न में करने के लिए भेजा उपखंड (ii) या उपखंड (iii) या उपखंड (चतुर्थ) या उपखंड (वी) खंड 115C (च) खंड के; वह ऐसा करता है, तो इस अध्याय के उपबंधों ऐसी संपत्ति के पैसे में (अन्यथा हस्तांतरण के बजाय) हस्तांतरण या रूपांतरण जब तक कि आकलन वर्ष के लिए और हर बाद आकलन वर्ष के लिए इस तरह के आय के संबंध में उसे लागू करने के लिए जारी करेगा.
  

 

74 प्रत्यक्ष कर कानून (संशोधन) अधिनियम, 1987 से प्रभावी द्वारा "आयकर" के लिए एवजी 1988/01/04.
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