आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा दसवीं अनुसूची

दसवीं अनुसूची

धारा

धारा संख्या

दसवीं अनुसूची

अध्याय शीर्षक

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2004

दसवीं अनुसूची

दसवीं अनुसूची

दसवीं अनुसूची

[धारा 3 3(5) देखिए]

91[वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से लोप किया गया।]

 

91. लोप से पूर्व, दसवीं अनुसूची, जो प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और बाद में प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से संशोधित की गर्इ थी, इस प्रकार थी :

'दसवी अनुसूची* [धारा 3(5) देखिए]

वे उपांतरण जिनके अधीन रहते हुए इस अधिनियम के उपबंध ऐसी दशाओं में

लागू होंगे जहां 1 अप्रैल, 1989 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के संबंध में

पूर्ववर्ष, जो धारा 3(2) में निर्दिष्ट है, बारह मास से अधिक हो जाता है

1. परिभाषाएं - इस अनुसूची में "संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष" से, 1 अप्रैल, 1989 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए पूर्ववर्ष के रूप में धारा 3 की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट रीति से संगणित अवधि और ऐसी दशा में जहां उस उपधारा का प्रथम परन्तुक या तृतीय परन्तुक लागू होता है, यथास्थिति, उक्त प्रथम परन्तुक या उक्त तृतीय परन्तुक में वर्णित रीति से संगणित, यथास्थिति दीर्घतर या दीर्घतम अवधियां अभिप्रेत हैं।

2. उस दशा में विशेष उपबंध जहां संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष बारह मास से दीर्घतर है–ऐसी किसी दशा में जहां संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष बारह मास से दीर्घतर है वहां इस अधिनियम और सुसंगत वर्ष के वित्त अधिनियम के उपबंध इस अनुसूची के नियम 3, नियम 4, नियम 5 और नियम 6 में विनिर्दिष्ट उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होंगे।

3. *धन संबंधी सीमाओं आदि में संबंधित उपांतरण–नीचे दी गर्इ सारणी के स्तंभ (1) में विनिर्दिष्ट इस अधिनियम के उपबंध इस उपांतरण के अधीन होंगे कि उक्त सारणी के स्तंभ (2) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट रकम या रकमों के प्रति उसमें निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उक्त रकम या रकमों के प्रति निर्देश है जिसमें ऐसे भिन्नांश द्वारा जिसका गणक, संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष में मासों की संख्या है और हर (डिनोमिनेटर) बारह है, प्रत्येक ऐसी रकम से गुणा करके वृद्धि की गर्इ हो :

परन्तु इस नियम तथा नियम 5 और नियम 6 के प्रयोजनों के लिए जहां संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष के अंतर्गत किसी मास का कोर्इ भाग है, वहां यदि ऐसा भाग पंद्रह दिन या उससे अधिक है तो उसको एक पूर्णमास तक बढ़ा दिया जाएगा और यदि ऐसा भाग पंद्रह दिन से कम हो तो उसे छोड़ दिया जाएगा :

*नियम 125 देखिए।

परन्तु यह और कि उक्त सारणी के स्तम्भ (2) में धारा 48 की उपधारा (2) के सामने विनिर्दिष्ट दस हजार रुपए की रकम संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष के दौरान केवल वहां बढ़ा दी जाएगी, जहां दीर्घकालीन पूंजी अभिलाभ दो या अधिक दीर्घकालीन पूंजी आस्तियों के अंतरण के परिणामस्वरूप होता है और उक्त अंतरणों में से कम से कम एक अंतरण संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष में समाविष्ट बारह मास की आरंभिक अवधि के दौरान किया जाता है और शेष अंतरण संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष में समाविष्ट बारह मास की उक्त अवधि के परे किसी अवधि के दौरान किया जाता है या किए जाते हैं :

परन्तु यह भी कि जहां आय के विभिन्न स्रोतों की बाबत एक से अधिक अवधि को धारा 3 की उपधारा (2) के प्रथम परन्तुक या तृतीय परन्तुक के अधीन संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष में सम्मिलित किया गया है, वहां उक्त सारणी के स्तम्भ (2) में विनिर्दिष्ट रकम या रकमों को उस सीमा तक और ऐसी रीति से बढ़ा दिया जाएगा जो बोर्ड निम्नलिखित को ध्यान में रखते हुए इस निमित्त विहित करे–

() आय के विभिन्न स्रोतों की बाबत संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष में सम्मिलित अवधि या अवधियों की लम्बार्इ;

() संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष की लम्बार्इ; और

() अन्य सुसंगत बातें।

सारणी

अधिनियम के उपबंध रकम
(1) (2)
  रुपए
धारा 10(3) 5,000
धारा 12क() 25,000
धारा 13(2)() 1,000
धारा 16(i) 12,000
धारा 16(i), परन्तुक 1,000
धारा 16(ii) 5,000 और 7,500
धारा 23(1)()(ii) 3,600
धारा 24(2), परन्तुक 5,000
धारा 33क(7), परन्तुक 40,000, 35,000 और 30,000
धारा 35क पूंजी व्यय की रकम का चौदहवां भाग
धारा 35कख एकमुश्त प्रतिफल के रूप में संदत्त रकम का छठवां या तिहार्इ भाग।
धारा 35घ कुछ प्रारंभिक व्ययों की रकम का दसवां भाग।
धारा 37(2क) 5,000 और 50,000
धारा 40क(12) 10,000
धारा 44कक(2)(i) और (ii) 25,000 और 2,50,000
धारा 44कख 40,00,000 और 10,00,000
धारा 48(2) 10,000
धारा 80ग(1) 6,000, 9,000 और 12,000
धारा 80ग(3) बीमाकृत वास्तविक पूंजी राशि का दसवां भाग।
धारा 80ग(4) 60,000 और 40,000
धारा 80ग(7)() 10,000
धारा 80गग(2) 20,000
धारा 80गगक(1) 30,000
धारा 80घ(1) 3,000
धारा 80ठ(1) 7,000 (दो स्थानों में आता है)
धारा 80ठ(1), प्रथम परन्तुक 3,000
धारा 80ठ(1), द्वितीय परन्तुक 3,000
धारा 80त(2)() 40,000 और 20,000
धारा 80त(2)() 20,000
धारा 80प 15,000
धारा 139क(2) 50,000

4. धारा 6 में उपांतरण--जहां संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष में अठारह मास या उससे अधिक की अवधि समाविष्ट है वहां धारा 6 की, †उपधारा (1) इस उपांतरण के अधीन होगी कि उसमें एक सौ बयासी दिन, नब्बे दिन और साठ दिन की अवधि के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे क्रमश: दो सौ तिहत्तर दिन, एक सौ पैंतीस दिन और नब्बे दिन की अवधियों के प्रति निर्देश है।

5. अवक्षयण मोक के बारे में उपांतरण--जहां "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन या "अन्य स्रोतों से आय" शीर्ष के अधीन निर्धारिती की तेरह मास या उससे अधिक की अवधि की आय संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष के लिए उसकी कुल आय में सम्मिलित की जाती है वहां, यथास्थिति, धारा 32 की उपधारा (1) में खंड (ii) में या धारा 57 के खंड (ii) के अधीन मोक धारा 32 की उपधारा (1) के खंड (ii) में कथित रीति से परिकलित आस्तियों के समूह पर अवक्षयण के संबंध में ऐसे भिन्नाशं द्वारा, जिसका गुणक संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष में मासों की संख्या है और हर बारह है, गुणा करके बढ़ा दिया जाएगा :

परन्तु जहां "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन अथवा "अन्य स्रोतों से आय" शीर्ष के अधीन आय के संबंध में एक से अधिक अवधियां धारा 3 की उपधारा (2) के प्रथम परन्तुक या तृतीय परन्तुक के अधीन संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष में सम्मिलित की जाती है, वहां संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष में सम्मिलित प्रत्येक ऐसी अवधि के लिए आस्तियों के समूह पर अवलषण के संबंध में मोक धारा 32 की उपधारा (1) के खंड (ii) में कथित रीति से पृथक्-पृथक् परिकलित किया जाएगा और जहां आवश्यक हों ऐसे भाग द्वारा, जिसका गुणक ऐसी अवधि में मासों की संख्या है (जो उस अवधि से संबद्ध मासों की संख्या को अपवर्जित करने के पश्चात् आए जिस अवधि के संबंध में आस्तियों के समूह पर अवक्षयण 1 अप्रैल, 1988 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में दिया गया है या दिया जा सकेगा) और हर बारह है, गुणा करके बढ़ा दिया जाएगा।

6. कर की दर की बाबत उपांतरण--संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष की कुल आय पर प्रभार्य कर ऐसे भिन्नांश द्वारा, जिसका अंश बारह है और हर संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष में मांसों की संख्या है, ऐसी कुल आय को गुणा करके अभिप्राप्त रकम पर कर की औसत दर से परिकलित किया जाएगा, मानो पारिणामिक रकम कुल आय हो :

परन्तु जहां आय के भिन्न-भिन्न स्रोतों के संबंध में एक से अधिक अवधियां धारा 3 की उपधारा (2) के प्रथम परंतुक या तृतीय परन्तुक के अधीन संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष में सम्मिलित की जाती हैं, वहां कर संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष की कुल आय पर, जो ऐसी कुल आय में से ऐसी अवधि या अवधियों से संबद्ध आय को, जो 1 अप्रैल, 1988 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष या पूर्ववर्षों की कुल आय में पहले ही सम्मिलित कर ली गर्इ है, या किए जाने योग्य है, अपवर्जित करने के पश्चात् आए, इस नियम के उपबंधों के अनुसार परिकलित कर की औसत दर पर प्रभार्य होगा।

† धारा 6 का खंड (1) होना चाहिए।

7. कठिनार्इ की दशा में राहत देने की बोर्ड की शक्ति--यदि वास्तविक कठिनार्इ से बचने के लिए बोर्ड ऐसा करना वांछनीय या समीचीन समझता है तो वह साधारण या विशेष आदेश द्वारा किसी मामले या किसी वर्ग के मामलों में जहां संक्रमणकालीन पूर्ववर्ष बारह मास से लम्बा है, समुचित राहत दे सकेगा।'

मूल दसवीं अनुसूची वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और बाद में वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से उसका लोप किया गया था।

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा संशोधित रूप में]

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