खाते की किताबों के रखरखाव के कठिन काम से और अंकेक्षित खाते पाने से छोटे करदाताओं को राहत देने के लिये, आयकर कानून ने धाराये 44 ए डी और धारा 44 ए ई के तहत प्रकल्पित कराधान योजना बनाई। इस भाग मे आप धारा 44 ए डी और धारा 44 ए ई की प्रकल्पित कराधान योजना से सम्बन्धित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अस्वीकरण:

इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।

 

जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें।

 

 

“इस दस्तावेज़ में वित्त अधिनियम, 2026 द्वारा संशोधित आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधान शामिल हैं।”

 

 

 

निश्चित पात्र व्यापार या व्यवसायों के मामले में प्रकल्पित आधार पर कर

 

बही लेखों के रखरखाव और लेखों का अंकेक्षण कराने जैसे कठिन कार्य से छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए आयकर कानून ने धारा 44कघ और धारा 44कड़ के तहत प्रकल्पित कराधान योजना बनाई है। इस भाग में आप धारा 44कघ और धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना के विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

प्रकल्पित कराधान योजना का अर्थ

आयकर कानून के अनुसार, व्यापार या व्यवसायों में संलग्न एक व्यक्ति को नियमित रूप से लेखा बही बनाए रखने के अलावा, अपने लेखों का अंकेक्षण कराना आवश्यक है। इस कठिन कार्य से छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए, आयकर कानून ने धारा 44कघ, 44कघक और 44कड़ के तहत प्रकल्पित कराधान योजना बनाई है।

प्रकल्पित कराधान योजना अपनाने वाला एक व्यक्ति एक निर्धारित दर पर आय घोषित कर सकता है और इसके एवज में, बही लेखों के रखरखाव और लेखों का लेखापरीक्षण कराने जैसे कठिन कार्य से राहत पा सकता है।

प्रकल्पित कराधान योजना का अर्थ

छोटे करदाताओं के लिए आयकर कानून ने नीचे दिए गए अनुसार दो प्रकल्पित कराधान योजनाएं बनाई हैं:

1) धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना ।

2) धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना

3) धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना ।

धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना

धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना किसके लिए बनायी गयी है?

धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना किसी भी छोटे व्यवसाय में (धारा 44कड़ में निर्दिष्ट माल वाहनों को काम पर लगाने, काम पर रखने या पट्टे पर देने के कारोबार को छोड़कर) संलग्न करदाताओं को राहत देने के लिए बनायी गयी है।

धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना निम्न व्यक्तियों द्वारा अपनायी जा सकती है:

1) निवासी व्यक्ति

2) निवासी हिंदू अविभाजित परिवार

3) निवासी भागीदारी फर्म (लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म नहीं)

दूसरे शब्दों में, यह योजना एक अनिवासी द्वारा और एक व्यक्ति, एक एचयूएफ या पार्टनरशिप फर्म (सीमित नहीं लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म) के अलावा अन्य किसी भी व्यक्ति द्वारा नहीं अपनायी जा सकती।

यह योजना किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा नहीं अपनाई जा सकती हैं जिन्होंने प्रासंगिक वर्ष में धारा 10क/10कक/10ख/10खक के तहत या धारा 80जज से 80ददख तक के तहत किसी भी कटौती का दावा किया है।

धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना के तहत शामिल न किए जाने वाले व्यवसाय

धारा 44कघ की योजना निम्नलिखित व्यवसायों को छोड़कर किसी भी व्यवसाय में संलग्न छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए बनायी गयी है:

धारा 44कड़ में निर्दिष्ट माल वाहनों को काम पर लगाने, काम पर रखने या पट्टे पर देने का कारोबार

➢ कोई भी व्यक्ति जो एजेंसी व्यापार कर रहा है।

➢ कमीशन या दलाली की प्रकृति का आय अर्जित करने वाला एक व्यक्ति

उपरोक्त चर्चित व्यवसायों के अलावा, धारा 44कक(1) में निर्दिष्ट पेशा करने वाला एक व्यक्ति प्रकल्पित कराधान योजना के लिए पात्र नहीं है।

एक बीमा एजेंट धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना को नहीं अपना सकता है।

कमीशन या दलाली की प्रकृति में आय अर्जित करने वाला एक व्यक्ति, धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना को नहीं अपना सकता है। बीमा एजेंट, कमीशन के द्वारा आय कमाते हैं और इसलिए वे धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना को नहीं अपना सकते हैं।

धारा 44कक(1) के तहत निर्धारित पेशे में संलग्न एक व्यक्ति धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना को नहीं अपना सकता है।

धारा 44कक(1) के तहत निर्धारित किसी भी पेशे में संलग्न एक व्यक्ति धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना को नहीं अपना सकता है।

एक व्यक्ति, वर्ष के लिए जिसका कुल कारोबार या सकल प्राप्तियां 2,00,00,000 रुपए से अधिक है धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना को नहीं अपना सकता है।

धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना, पात्र व्यक्तियों द्वारा चुनी जा सकता है यदि व्यापार से कुल कारोबार या सकल प्राप्तियां 2,00,00,000 से अधिक नहीं हैं। दूसरे शब्दों में, व्यापार से कुल कारोबार या सकल प्राप्ति 2,00,00,000 रुपये से अधिक होने पर धारा 44कघ की योजना को अपनाया नहीं जा सकता।

हालांकि, यदि पिछले वर्ष के दौरान प्राप्त नगद राशि ऐसे वर्ष के कुल कारोबार या कुल प्राप्ति के 5 प्रतिशत से अधिक नही होती है तो कुल कारोबार या कुल प्राप्ति को रू. 2,00,00,000 के स्थान पर रू. 3,00,00,000 के तौर पर लिया जाएगा। चेक या बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से प्राप्तियां जो अकाउंट पेयी नही है उसे इसके लिए नगद में प्राप्ति समझा जाएगा [प्रभावी निर्धारण वर्ष रू. 2024-25 से लागू]

आयकर कानून के सामान्य प्रावधानों के तहत कर योग्य व्यापार आय की गणना की विधि, अर्थात, एक व्यक्ति द्वारा धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना न अपनाने की स्थिति में

सामान्यत, आयकर कानून के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति की कर योग्य व्यापार आय की गणना निम्नानुसार की जाती है:

विवरण राशि
व्यापार से कारोबार या सकल प्राप्तियां XXXXX
कम: आय अर्जन के संबंध में किया गया व्यय (XXXXX)
कर योग्य व्यवसाय आय XXXXX

आयकर कानून के सामान्य प्रावधानों के तहत कर योग्य व्यापार आय की गणना की विधि, अर्थात, एक व्यक्ति द्वारा धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना न अपनाने की स्थिति में

उपरोक्त तरीके से कर योग्य व्यापार आय की गणना के प्रयोजन के लिए करदाताओं को व्यापार का बही लेखा रखना होगा। आय की गणना बही लेखों से प्राप्त सूचना के आधार पर की जाएगी।

धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना अपनाने वाले एक व्यक्ति के मामले में कर योग्य व्यापार आय की गणना की विधि

धारा 44कघ के प्रावधानों को अपनाने वाले एक व्यक्ति के मामले में, आय की गणना प्रकल्पित आधार पर की जाएगी, अर्थात, वर्ष के लिए पात्र व्यवसाय के कुल कारोबार या सकल प्राप्तियों के @8% की दर से।

डिजिटल लेनदेन करने के लिए और डिजिटल भुगतान को स्वीकार कराने के लिए छोटे असंगठित व्यापारों को यह बताने के लि ए प्रोत्साहित करने के लिए धारा 44कघ को प्रभावी निर्धारण वर्ष 2017-18 से संशेाधित किया गया है कि आय 8 प्रतिशत के स्थान पर 6 प्रतिशत की दर पर आंका जाएगा यदि करोबार/सकल प्राप्ति धारा 139(1) के अंतर्गत विवरणी को दाखिल करने की देय तिथि को या उससे पहले अकाउंट में देय चेक या अकाउंट में देय बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से या पिछले वर्ष के दौरान या ऐसी अन्य इलैक्ट्रानिक विधि के माध्यम से जिसे निर्धारित किया जा सके, एक बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक क्लीयरिंग प्रणाली का प्रयोग करते हुए प्राप्त होता है।

इसलिए, धारा 44कघ को प्रावधानों को अपनाने वाले व्यक्ति की स्थिति में, आय सामान्य तरीके में नहीं आंकी जाएगी जैसा पहले चर्चा की गई (यानी कारोबार घटा व्यय) लेकिन करोबार या कुल प्राप्ति 6 या 8 प्रतिशत, जो भी स्थिति हो, पर आंका जाएगा।

हालांकि, एक व्यक्ति करोबार या कुल प्राप्ति के 8 प्रतिशत या 6 प्रतिशत, जो भी स्थिति हो, पर उसकी व्यापारिक आय को अपने आप प्रकट कर सकता है।

निर्धारित दर के अनुसार आंकी गई प्रकल्पित आय अंतिम आय है और कोई अग्रिम व्यय स्वीकृत या अस्वीकृत नहीं होंगे।

आयकर कानून के सामान्य प्रावधानों के तहत कर योग्य व्यापार आय की गणना आयकर कानून के अनुसार कटौती योग्य व्ययों के संबंध में कटौती अनुमन्य करने के बाद और आयकर कानून के अनुसार गैर कटौती योग्य व्यय की अस्वीकृति के बाद की जायेगी।

धारा 44कघ के प्रकल्पित कराधान योजना अपनाने वाले एक व्यक्ति के मामले में, आयकर कानून के तहत प्रदत्त अनुमन्य/गैर-अनुमन्य प्रावधानों को लागू नहीं किया जाएगा और 6% या 8% की प्रकल्पित दर पर परिकलित आय प्रकल्पित कराधान योजना के तहत शामिल व्यापार की अंतिम कर योग्य आय होगी। दूसरे शब्दों में, निर्धारित दर के अनुसार आंकी गई आय प्रकल्पित कराधान योजन के अंतर्गत कवर व्यापार की अंतिम करयोग्य आय होगी और कोई अग्रिम व्यय स्वीकृत या अस्वीकृत नहीं होगा।

धारा 44कघ के प्रावधानों के अनुसार आय की गणना करते समय, मूल्य ह्रास के कारण अलग कटौती उपलब्ध नहीं है। हालांकि, ऐसे व्यवसाय में प्रयुक्त किसी भी आस्ति के लिखित मूल्य की गणना इस प्रकार की जायेगी कि धारा 32 के अनुसार मूल्य ह्रास का दावा किया जा चुका है और वास्तव में अनुमन्य है।

धारा 44कक के अंतर्गत निर्धारित बही लेखा रखना आवश्यक नहीं

धारा 44कक व्यापार/पेशे में संलग्न व्यक्ति द्वारा बही लेखों के रखरखाव के प्रावधानों से संबंधित है। इस प्रकार, व्यापार/पेशे में संलग्न व्यक्ति को धारा 44कक के प्रावधानों के अनुसार अपने व्यापार/पेशे का बही लेखा रखना चाहिए।

किसी व्यापार में संलग्न व्यक्ति के मामले में, धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना अपनाने पर, बही लेखों के रखरखाव से संबंधित धारा 44कक के प्रावधान लागू नहीं होगें। दूसरे शब्दों में, यदि एक व्यक्ति धारा 44कघ के प्रावधानों को अपनाता है और कारोबार का 6% या @8% आय (जो भी स्थिति हो) घोषित करता है, तो उसके लिए धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना के तहत शामिल व्यापार के संबंध में धारा 44कक के तहत बही लेखों को बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है।

धारा 44कघ के अंतर्गत आने वाले व्यापार से आय के संबंध में अग्रिम कर का भुगतान

धारा 44कघ के अंतर्गत प्रकल्पित कराधान योजना को चुनने वाला कोई व्यक्ति पिछले वर्ष के 15 मार्च से पहले अग्रिम कर की पूरी राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है यदि वह पिछले साल के 15 मार्च तक अग्रिम कर का भुगतान करने में असफल रहता है वह धारा 234ग के अनुसार ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा

टिप्पणी : 31 मार्च को अथवा उससे पहले अग्रिम कर के रूप में दी गई कोई राशि उस दिन को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के दौरान दिए गए अग्रिम कर के तौर पर भी समझा जाएगा।

धारा 44कख के तहत कर परीक्षा लागू नहीं होती है यदि कोई व्यक्ति धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना को चुनता है

यदि एक निर्धारिती धारा 44कघ की प्रकल्पित कर योजना का विकल्प चुन रहा है, तो ऐसे निर्धारितियों के मामले में धारा 44एबी के तहत कर अंकेक्षण की आवश्यकता नहीं होगी।

क्या परिणाम होंगे यदि एक व्यक्ति धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना का चुनाव करता है

यदि एक व्यक्ति प्रकल्पित कराधान योजना का चुनाव करता है तो उसे अगले 5 वर्षों के लिए उसी योजना का अनुसरण करना आपेक्षित है। यह वह ऐसा करने में असफल होता है तो प्रकल्पित कराधान योजना अगले 5 वर्षों के लिए उपलब्ध नहीं होगी (उदाहरण के लिए, एक निर्धारिती 2024-25 के लिए धारा 44कघ के अंतर्गत प्रकल्पित आधार पर लगाए जाने वाले कर के लिए दावा कर सकता है तथा वह प्रकल्पित कराधान योजना के आधार पर आय प्रस्तुत कर सकता है। हालांकि, निर्धारण वर्ष 2024-25 के लिए, उसने प्रकल्पित कराधान योजना का चुनाव नहीं किया। इस स्थिति में, वह अगले पांच वर्ष अर्थात् निर्धारण वर्ष 2025-26 से 2029-30 के लिए प्रकल्पित कराधान योजना के लाभ का दावा करने के लिए पात्र नहीं होगा)

आगे उसे बही खातों को सुरक्षित तथा अनुरक्षित रखना आपेक्षित है तथा वह निर्धारण वर्ष जिसमें उसे प्रकल्पित कराधान योजना का चुनाव किया, से धारा 44कख के अनुसार कर अंकेक्षण के लिए भी उत्तरदायी है (यदि उसकी कुल आय अधिकतम राशि से अधिक होती है वह कर हेतु वसूलनीय नहीं है)

धारा कघक की प्रकल्पित कराधान योजना

धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना किसके लिए बनाई गई है ?

धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना निर्दिष्ट पेशे में संलग्न छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए बनाई गई है।

कौन से पात्र व्यक्ति धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना का लाभ उठा सकते है

निम्नलिखित पेशों में कार्यरत भारत के निवासी धारा 44कघक की कराधान योजना का लाभ उठा सकते हैं

1) कानून

2) चिकित्सा

3) इंजीनियरिंग अथवा वास्तुकला

4) लेखाशास्त्र

5) तकनीकी सलाह

6) आंतरिक साज सज्जा

7) केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा अधिसूचित अन्य कोई पेशा

योग्य निर्धारिती को परिभाषित करने के लिए वित्त अधिनियम, 2021 ने धारा 44कघक के प्रावधानों में संशोधन किया है।

प्रभावी निर्धारण वर्ष 2021-22, धारा 44कघक का लाभ केवल निर्धारिती के मामले में पात्र है जो:

क) व्यक्तिगत; और

ख) सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 की धारा 2 की उप-धारा (1) के खंड (एन) के तहत परिभाषित सीमित देयता भागीदारी के अलावा साझेदारी फर्म।

 

एक पात्र व्यक्ति जिसकी वर्ष के लिए कुल सकल 50,00,000 प्राप्ति रुपये से अधिक है। धारा 44कघक की अनुमानित कराधान योजना को नहीं अपना सकते हैं

धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना को पात्र व्यक्तियों द्वारा चुना जा सकता है, यदि पेशे से कुल सकल प्राप्तियां 50,00,000 रुपये से अधिक नहीं हैं। दूसरे शब्दों में, यदि पेशे की कुल सकल प्राप्ति 50,00,000 रुपये से अधिक है। तब धारा 44कघक की योजना को नहीं अपनाया जा सकता है।

हालाँकि, यदि पिछले वर्ष के दौरान प्राप्त नकदी की राशि ऐसे वर्ष की कुल सकल प्राप्ति के 5% से अधिक नहीं है, तो कुल सकल प्राप्ति की सीमा 75,00,000 रुपये के बजाय 50,00,000 रुपये के रूप में ली जाएगी। चेक या बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से प्राप्तियां, जो एक खाता प्राप्तकर्ता नहीं हैं, को इस उद्देश्य के लिए नकद में रसीद माना जाएगा। [लागू प्रभावी निर्धारण वर्ष 2024-25]

धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना को अपनाने वाले व्यक्ति की स्थिति में कराधान आय की गणना की विधि

धारा 44कघक के प्रावधानों को चुनने वाले व्यक्ति की स्थिति में, आय प्रकल्पित आधार अर्थात् पेशे की कुल सकल प्राप्ति के 50 प्रतिशत पर आंकी जाएगी। हालांकि ऐसा व्यक्ति 50 प्रतिशत से अधिक की आय की घोषणा कर सकता है।

अन्य शब्दों में धारा 44कघक के प्रावधानों को अपनाने वाले व्यक्ति की स्थिति में आय साधारण तरीके में नहीं आंकी जाएगी बल्कि कुल प्राप्तियों के 50 प्रतिशत पर आंकी जाएगी।

50 प्रतिशत पर आंकी गई प्रकल्पित आय अंतिम आय है तथा कोई अग्रिम व्यय की स्वीकृति नहीं है

एक व्यक्ति जिसने प्रकल्पित कराधान योजना को अपनाया है समस्त व्ययों का दावा करने के तौर पर समझा जाएगा। कटौती का कोई अग्रिम दावा 50 प्रतिशत की दर की घोषणा के पश्चात् स्वीकृत नहीं है।

धारा 44कघक के प्रावधानों के अनुसार आय की घोषणा करने के दौरान मूल्यह्रास के कारण पृथक कटौती उपलब्ध नहीं है। हालांकि, ऐसे व्यापार में प्रयुक्त किसी परिसंपत्ति की अधोलिखित राशि आंकी जाएगी जहां तक धारा 32 के अनुसार मूल्यह्रास का दावा है तथा वास्तविक रूप से स्वीकारा गया है।

धारा 44कघक के अंतर्गत आने वाले पेशे से आय के संबंध में अग्रिम कर का भुगतान

धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना को चुनने वाला कोई व्यक्ति भी व्यक्ति पिछले वर्ष के 15 मार्च को या उससे पहले पूरे अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। यदि वह पिछले वर्ष के 15 मार्च तक अग्रिम कर नहीं देता तो वह धारा 234ग के अनुसार ब्रूाज देने के लिए उत्तरदायी होगा।

बही खातों का अनुरक्षण यदि एक व्यक्ति धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना को चुनता है

यदि एक व्यक्ति निर्दिष्ट पेशे को चुनता है जैसा धारा 44कक(1) में संदर्भित है तथा धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना को चुनता है तो बही खाते से संबंधित धारा 44कक के प्रावधान लागू नहीं होंगे। अन्य शब्दों में यदि एक व्यक्ति धारा 44कघक के प्रावधानों का चुनाव करता है तथा कुल प्राप्तियों के 50 प्रतिशत की आय की घोषणा करता है तो उसे निर्दिष्ट पेशे के संबंध में बही खाते को अनुरक्षित रखना आपेक्षित नहीं है।

यदि कोई व्यक्ति धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना का विकल्प चुनता है तो धारा 44कख के तहत कर अंकेक्षण लागू नहीं होता है

यदि एक निर्धारिती धारा 44कघक की प्रकल्पित कर योजना का विकल्प चुन रहा है, तो ऐसे निर्धारितियों के मामले में धारा 44कख के तहत कर अंकेक्षण की आवश्यकता नहीं होगी।

प्रावधान लागू होने है यदि एक व्यक्ति धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना को नहीं चुनता तथा न्यूनतम दर (अर्थात् 50 प्रतिशत से कम) से अपनी आय की घोषणा करता है।

एक व्यक्ति न्यूनतम दर (अर्थात् 50 प्रतिशत से कम) पर अपनी आय की घोषणा कर सकता है, हालांकि यदि वह ऐसा करता है तथा उसकी आय अधिकतम आय जो कर हेतु वसूलनीय नहीं है, से अधिक होती है तो उसे धारा 44कक के प्रावधानों के अनुसार बही खातों को अनुरक्षित करना आपेक्षित है तथा धारा 44कख के अनुसार अपने खातों को प्राप्त करना होगा।

धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना

धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना की प्रयोजनीयता

धारा 44कड़ की योजना माल वाहनों को काम पर लगाने, काम पर रखने या पट्टे पर देने के कारोबार में संलग्न छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए बनायी गयी है।

धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना के प्रयोजनार्थ पात्र करदाता और पात्र व्यापार

धारा 44कड़ के प्रावधान प्रत्येक व्यक्ति (अर्थात, एक व्यक्ति, एचयूएफ, फर्म, कंपनी, आदि) पर लागू हैं।

धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना माल वाहनों को काम पर लगाने, काम पर रखने या पट्टे पर देने के कारोबार में संलग्न व्यक्तियों और जिनके स्वामित्व में वर्ष के दौरान किसी भी समय 10 से अधिक माल वाहन नहीं हैं, द्वारा अपनायी जा सकती है।

10 से अधिक माल वाहनों का मालिक व्यक्ति धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना को नहीं अपना सकता है।

धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना माल वाहनों को काम पर लगाने, काम पर रखने या पट्टे पर देने के कारोबार में संलग्न व्यक्तियों और जिनके स्वामित्व में वर्ष के दौरान किसी भी समय 10 से अधिक माल वाहन नहीं हैं, द्वारा अपनायी जा सकती है।

योजना का महत्वपूर्ण मानदंड वर्ष के दौरान किसी भी समय 10 से अधिक माल वाहनों के स्वामित्व को सीमित रखना है। इस प्रकार, यदि एक व्यक्ति वर्ष के दौरान किसी भी समय 10 से अधिक माल वाहनों का मालिक है, तो वह इस योजना का लाभ नहीं ले सकता है।

धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना अपनाने वाले एक व्यक्ति के मामले में कर योग्य व्यापार आय की गणना की विधि

धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना चुनने की इच्छा रखने वाले एक व्यक्ति के मामले में, आय की गणना अनुमान के आधार पर की जाएगी।

भारी माल वाहक वाहनों के लिए, आय उस प्रति महीने या आंशिक महीनें के लिए कुल माल भार पर रू. 1,000 प्रति टन की दर से आंकी जाएगी जिसके दौरान भारी माल वाहन करदाता के स्वामित्व में होते हैं। माल वाहन को छोड़कर वाहन की स्थिति में, आय की गणना प्रति माह या उसके किसी हिस्से के लिए 7,500 रुपये की दर से की जाएगी जिसके दौरान भारी माल वाहन वर्ष के दौरान करदाता के स्वामित्व में है। महीने का भाग पूरे महीने के तौर पर विचारनीय होगा

नोट: 1. यदि वास्तविक आय प्रकल्पित दर से अधिक है, अर्थात रु. 1,000/ रु. 7,500 रुपये से अधिक है, तो इस प्रकार की उच्च आय घोषित की जा सकती है।

2. "भारी माल वाहन" का अर्थ कोई माल वाहक वाहन जिसका कुल वाहन भाग रू. 12,000 किग्रा से अधिक हो

बेहतर समझ के लिए उदाहरण

मि. खुश, माल वाहनों को काम पर लगाने, काम पर रखने या पट्टे पर देने के कारोबार में संलग्न हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान उनके पास 9 माल वाहनों का (भारी माल वाहनों के अलावा) स्वामित्व था। यदि वह धारा 44कड़ के प्रावधानों को अपनाते हैं, तो माल वाहनों को काम पर लगाने, काम पर रखने या पट्टे पर देने के कारोबार से कर योग्य आय क्या होगी?

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धारा 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार, माल वाहन के संबंध में आय की गणना प्रति माह या उसके किसी हिस्से के लिए @1,000 रुपये की दर से की जाएगी जिसके दौरान भारी माल वाहन वर्ष के दौरान करदाता के स्वामित्व में है। रु. 7,500 प्रति माह की दर प्रत्येक मालवाहक वाहन के लिए समान है। भारी माल वाहन के अलावा वाहनों की स्थिति में, आय उस महीने या आंशिक महीने के लिए 7,500 की दर पर आंकी जाएगी जिसके दौरान माल वाहन करदाता के स्वामित्व में होते हैं।

वर्तमान मामले में, मि. खुश के पास वर्ष दौरान 9 माल वाहनों का स्वामित्व था और इसलिए, आय गणना की जाएगी, निम्न प्रकार की जायेगी:

विवरण राशि (रु. में)
प्रति माल वाहन प्रति माह आय 7,500
भारी माल वाहनों की सं. 9
धारा 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार, 9 भारी माल वाहनों से मासिक आय 67,500
वर्ष में महीनों की संख्या जिनके दौरान वाहन स्वामित्व में था 12
धारा 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार माल वाहनों को काम पर लगाने, काम पर रखने या पट्टे पर देने के कारोबार से कुल आय 8,10,000

उदाहरण

श्री सुनील माल वाहक वाहनों को भाड़े, किराये या पट्टे पर देने के व्यापार में संलग्न है। उसके पास पिछले वर्ष 2025-26 के दौरान 13,000 किलोग्राम के 5 भारी माल वाहक वाहन और 4 अन्य मालवाहक वाहन है। धारा 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार उसकी करयोग्य क्या होगी ?

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धारा 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार, भारी माल वाहक वाहनों के लिए, आय उस प्रति महीनें या आंशिक महीनें के लिए कुल वाहन के प्रति टन रू. 1000 की दर पर आंकी जाएगी जिसके दौरान भारी वाहन करदाता द्वारा खरीदा जाता है। भारी माल वाहक वाहनों को छोड़कर अन्य वाहनों की स्थिति में आय उस प्रति महीनें या आंशिक महीनों के लिए रू. 7,500 की दर पर आंका जाएगा जिसके दौरान माल वाहक वाहन करदाता के अधिकार में है।

वर्तमान मामले में, श्री सुनील के पास 9 माल वाहक वाहन है जिसमें से 5 भारी माल वाहक वाहनों का कुल भार 13,000 किलोग्राम है। इसलिए उनकी आय निम्नानुसार आंकी जाएगी :

विवरण रू.
प्रति महीनें प्रति भारी माल वाहन (13,000 किलोग्राम यानी 13 टन) 1,000 × 13
(x) भारी माल वाहन की संख्या 5
धारा 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार हर भारी माल वाहनों की स्थिति में मासिक आय 65,000
(x) एक वर्ष में महीनों के संख्या 12
भारी माल वाहन से धारा 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार कुल आय (क) 7,80,000
प्रति महीने प्रति माल वाहन (भारी वाहन को छोड़कर) 7,500
(x) भारी माल वाहन को छोड़कर वाहनों की संख्या 4
धारा 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार भारी माल वाहनों को छोड़कर वाहनों की स्थिति में मासिक आय 30,000
(*) एक वर्ष में महीनों की संख्या 12
भारी माल वाहनों को छोड़कर वाहनों से धारा 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार कुल आय (ख) 3,60,000
धारा 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार माल वाहनों को किराये, भाड़े या पट्ट पर देने के व्यापार से कुल आय (क+ ख) 11,40,000

प्रति माह प्रति माल वाहन रू. 1,000/ रू. 7500 प्रति टन या रूपये प्रति माल वाहन की दर से परिकलित आय प्रकल्पित आय अंतिम आय होगी और इसके बाद किसी भी व्यय की स्वीकृति या अस्वीकृति नहीं दी जाएगी।

आयकर कानून के सामान्य प्रावधानों के तहत, कर योग्य व्यापार आय की गणना आयकर कानून के अनुसार कटौती योग्य व्ययों के संबंध में कटौती अनुमन्य करने के बाद और आयकर कानून के अनुसार गैर कटौती योग्य व्यय की अस्वीकृति के बाद की जायेगी।

धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना अपनाने वाले एक व्यक्ति के मामले में, आयकर कानून के तहत प्रदत्त अनुमन्य/गैर-अनुमन्य प्रावधानों को लागू नहीं किया जाएगा और प्रति वाहन प्रति माह 1,000/7,500 रुपये की प्रकल्पित दर पर परिकलित आय अंतिम आय होगी। दूसरे शब्दों में, प्रति वाहन प्रति माह 1,000/7,500 रुपये की दर से परिकलित आय व्यापार की अंतिम कर योग्य आय होगी और इसके बाद किसी व्यय की स्वीकृति या अस्वीकृति नहीं दी जायेगी।

हालांकि, एक करदाता के मामले में, जो प्रकल्पित कराधान योजना का चुनने वाली एक साझेदारी फर्म है, प्रति माह प्रति माल वाहन 7,500 रुपये की दर से परिकलित आय से, भागीदारों को अदा किए गये पारिश्रमिक और ब्याज के आधार पर कटौती का दावा किया जा सकता है(आय कर कानून के अनुसार परिकलित)।

धारा 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार आय की गणना करते समय, मूल्य ह्रास के कारण अलग कटौती उपलब्ध नहीं है। हालांकि, ऐसे व्यवसाय में प्रयुक्त किसी भी आस्ति के लिखित मूल्य की गणना इस प्रकार की जायेगी कि, धारा 32 के अनुसार मूल्य ह्रास का दावा किया जा चुका है और वास्तव में अनुमन्य है।

धारा 44कक के अंतर्गत निर्धारित बही लेखा रखना आवश्यक नहीं

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44कक, में व्यापार/पेशे में संलग्न व्यक्ति द्वारा बही लेखों के रखरखाव से संबंधित प्रावधान दिये गये हैं। इस प्रकार, व्यापार/पेशे में संलग्न व्यक्ति को धारा 44कक के प्रावधानों के अनुसार अपने व्यापार/पेशे का बही लेखा रखना चाहिए।

धारा 44कक के अंतर्गत निर्धारित बही लेखा रखना आवश्यक नहीं

धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना अपनाने वाले व्यक्ति के मामले में, बही लेखों के रखरखाव से संबंधित धारा 44कक के प्रावधान लागू नहीं होगें। दूसरे शब्दों में, यदि एक व्यक्ति धारा 44कड़ के प्रावधानों को अपनाता है और प्रति माह प्रति माल वाहन 7,500 रुपये की दर से अपनी आय घोषित करता है, तो उसके लिए धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना के तहत शामिल व्यापार के संबंध में धारा 44कक के तहत बही लेखों को बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है।

अग्रिम कर के भुगतान से संबंधित प्रावधानों का लागू होना

धारा 44कड़ के तहत प्रकल्पित कराधान योजना अपनाने वाले व्यक्ति के लिए अग्रिम कर का भुगतान करने के संबंध में कोई राहत प्रदान नहीं की गयी है और, इसलिए, वह धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना अपनाने के बावजूद भी अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।

लागू होने वाले प्रावधान यदि एक व्यक्ति धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना को नहीं चुनता और कम दर पर यानी प्रति टन रू. 1,000 से कम या रू. 7,500 प्रति महीनें प्रति माल वाहन आय की घोषणा करता है

एक व्यक्ति कम दर पर आय घोषित कर सकता है (अर्थात प्रति टन रू. 1,000 से कम या प्रति माह प्रति माल वाहन 7,500 रुपये की दर से कम दर पर)। हालांकि, यदि वह ऐसा करता है, तो उसके लिए धारा 44कक के प्रावधानों के अनुसार बही लेखा रखना और धारा 44कख के तहत अपने लेखों का अंकेक्षण कराना आवश्यक होगा।

 

कुछ पात्र व्यापारों की स्थिति में प्रकल्पित आधार पर कर पर एमसीक्यू

प्रश्न 1. धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना माल ढुलाई करने, किराये अथवा पट्टेदारी के व्यापार सहित किसी व्यापार में संलग्न छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए बनाया गया है

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना धारा 44 कड में संदर्भित माल ढुलाई करने, किराये अथवा पट्टेदारी के व्यापार सहित किसी व्यापार में संलग्न छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए बनाया गया है

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 2. धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना ................................. द्वारा नही अपनाई जा सकती

(क) आवासीय व्यक्ति (ख) आवासीय एचयूएफ

(ग) आवासीय भागीदारी फर्म (घ) सीमित देयता भागीदारी फर्म

सही उत्तर : (घ)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 44कघ की योजना प्रकल्पित कराधान निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा अपनाई जाएगी

1) आवासीय व्यक्ति

2) आवासीय हिंदु अविभाजित परिवार

3) आवासीय भागीदारी फर्म (सीमित देयता भागीदारी फर्म नहीं)

इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है

प्रश्न 3. एक व्यक्ति जो किसी एजेंसी व्यापार पर तथा एक व्यक्ति दलाली अथवा कमीशन के रूप में आय अर्जित कर रहा हो धारा 44कघ के प्रावधानों को नहीं अपना सकता

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 44कड की योजना निम्नलिखित व्यापारों के अलावा किसी व्यापार में संलग्न छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए बनाई गई है

धारा 44कङ में संदर्भित माल ढुलाई करने, किराया अथवा पट्टेदारी का व्यापार

• एक व्यक्ति जो कोई ऐजेंसी व्यापार चला रहा हो

• एक व्यक्ति दलाली अथवा कमीशन के रूप में आय अर्जित कर रहा हो

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 4. व्यक्ति के धारा 44कघ के प्रावधानों को अपनाने की स्थिति में आय प्रकल्पित आधार अर्थात् वर्ष के लिए पात्र व्यापार की सकल प्राप्ति अथवा कारोबार की .................दर से, आंकी जाएगी यदि कुल बिक्री/कुल प्राप्ति धारा 139(1) के अंतर्गत विवरणी को दाखिल करने की देय तिथि से पहले या पिछले वर्ष के दौरान या ऐसी अन्य इलैक्ट्रानिक विधि के माध्यम से जिसे निर्धारित किया जा सके, अकाउंट में देय चेक या अकाउंट में देय बैंक ड्राफ्ट या बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक क्लीयरिंग प्रणाली द्वारा प्राप्त होता है

(क) 2 प्रतिशत (ख) 6 प्रतिशत

(ग) 8 प्रतिशत (घ) 10 प्रतिशत

सही उत्तर : (ग)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

व्यक्ति के धारा 44कघ के प्रावधानों को अपनाने की स्थिति में आय प्रकल्पित आधार अर्थात् वर्ष के लिए पात्र व्यापार की सकल प्राप्ति अथवा कारोबार की 8 प्रतिशत की दर से, आंकी जाएगी

हालांकि, डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने और डिजिटल भुगतानों को छोटे असंगठित व्यापारों द्वारा स्वीकार करने के लिए, प्रभावी निर्धारण वर्ष 2017-18 से धारा 44कघ को यह मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि आय 8 प्रतिशत के स्थान पर 6 प्रतिशत की दर पर आंकी जाएगी यदि कुल बिक्री/कुल प्राप्ति धारा 139(1) के अंतर्गत विवरणी को दाखिल करने की देय तिथि से पहले या पिछले वर्ष के दौरान या ऐसी अन्य इलैक्ट्रानिक विधि के माध्यम से जिसे निर्धारित किया जा सके, अकाउंट में देय चेक या अकाउंट में देय बैंक ड्राफ्ट या बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक क्लीयरिंग प्रणाली द्वारा प्राप्त होता है

इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है

प्रश्न 5. धारा 44कघ के प्रावधानों के अनुसार आय की गणना के दौरान मूल्यह्रास के कारण पृथक कटौती उपलब्ध है

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 44कघ के प्रावधानों के अनुसार आय की गणना के दौरान मूल्यह्रास के कारण पृथक कटौती उपलब्ध नहीं है। बहरहाल ऐसे व्यापार में प्रयोग की गई किसी संपत्ति की लिखी गई राशि आंकी जाएगी यदि धारा 32 के अनुसार मूल्यह्रास का दावा किया जाए तथा वास्तविक रूप से स्वीकृति दी जाए।

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत हैं इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 6. धारा 44कघ के प्रावधानों की प्रकल्पित कराधान योजना को अपनाने वाले व्यक्ति को धारा 44कघ के अंतर्गत आने वाले व्यापार से आय के संबंध में अग्रिम कर का...............करना होगा

(क) भुगतान करना होगा (ख) भुगतान नहीं करना होगा

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 44कघ के अंतर्गत प्रकल्पित कराधान योजना को चुनने वाला कोई व्यक्ति पिछले वर्ष के 15 मार्च से पहले अग्रिम कर की पूरी राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है यदि वह पिछले साल के 15 मार्च तक अग्रिम कर का भुगतान करने में असफल रहता है वह धारा 234ग के अनुसार ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा

टिप्पणी : 31 मार्च को अथवा उससे पहले अग्रिम कर के रूप में दी गई कोई राशि उस दिन को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के दौरान दिए गए अग्रिम कर के तौर पर भी समझा जाएगा।

प्रश्न सं. 7 : धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना किसी पेशे में संलग्न करदाताओं को राहत देने के लिए बनाई गई है

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना निर्दिष्ट पेशे में संलग्न छोटे करदाताओं (कानून, चिकित्सा, इंजीनियरिंग अथवा वास्तुकला, लेखाशास्त्र, तकनीकी सलाह, आंतरिक साज सज्जा,केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा अधिसूचित अन्य कोई पेशा) को राहत देने के लिए बनाई गई है।

इसलिए, प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है और इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 8 : धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना ......................... द्वारा अपनाई जा सकती है

(क) निवासी व्यक्ति (ख) निवासी एचयूएफ

(ग) निवासी सहभागी फर्म (घ) निवासी व्यक्ति

सही उत्तर : (घ)

सही उत्तर की प्रमाणिकता : धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना को भारत में किसी भी निवासी व्यक्ति द्वारा अपनाया जा सकता है।

इसलिए, विकल्प (घ) सही विकल्प है

प्रश्न 9 : धारा 44कघक के प्रावधानों को अपनाने वाले व्यक्ति की स्थिति में, आय प्रकल्पित आधार, अर्थात वर्ष के लिए निर्दिष्ट पेशे की कुल प्राप्ति के................... प्रतिशत, पर आंकी जाएगी।

(क) 2 प्रतिशत (ख) 5 प्रतिशत

(ग) 50 प्रतिशत (घ) 10 प्रतिशत

सही उत्तर : (ग)

धारा 44कघक के प्रावधानों को अपनाने वाले व्यक्ति की स्थिति में, आय प्रकल्पित आधार पर आंकी जाएगी अर्थात् पेशे की कुल प्राप्ति का 50 प्रतिशत। हालांकि ऐसा व्यक्ति 50 प्रतिशत से अधिक की आय की घोषणा कर सकता है।

अन्य शब्दों में, व्यक्ति के धारा 44कघक के प्रावधानों को चुनने पर, आय सामान्य तरीके में नहीं आंकी जाएगी किंतु सकल प्राप्ति के 50 प्रतिशत पर आंकी जाएगी।

इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है

प्रश्न 10 : धारा 44कघक के प्रावधानों के अनुसार आय की गणना के दौरान, मूल्यह्रास के कारण पृथक कटौती उपलब्ध है

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

एक व्यक्ति जो प्रकल्पित कराधान योजना को चुनता है व्यय की समस्त कटौती का दावा करने के तौर पर समझा जाएगा। कटौती का कोई अग्रिम दावा 50 प्रतिशत की दर की घोषणा के पश्चात् स्वीकृत नहीं है।

धारा 44कघक के प्रावधानों के अनुसार आय की घोषणा करने के दौरान मूल्यहस के कारण पृथक कटौती उपलब्ध नहीं है। हालांकि, ऐसे व्यापार में प्रयुक्त किसी परिसंपत्ति की अधोलिखित राशि आंकी जाएगी जहां तक धारा 32 के अनुसार मूल्यहस का दावा है तथा वास्तविक रूप से स्वीकार गया है।

इसलिए, प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है और इसलिए, विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 11 धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना को चुनने वाला व्यक्ति धारा 44कघक के अंतर्गत आने वाले व्यापारों से आय के संबंध में अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए................... होगा

(क) उत्तरदायी (ख) उत्तरदायी नहीं

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 44कघक की प्रकल्पित कराधान योजना को चुनने वाला व्यक्ति अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा

इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 12. धारा 44कङ की प्रकल्पित योजना ............................के व्यापार में संलग्न छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए बनाई गई है

(क) माल ढुलाई करने, किराये अथवा पट्टेदारी (ख) सामग्री दुकान

(ग) दवाई की दुकान (ख) डिपार्टमेंटल स्टोर

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 44कङ की योजना माल ढुलाई करने, किराये अथवा पट्टेदारी के व्यापार में संलग्न छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए बनाई गई है

इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 13. धारा 44कङ की प्रकल्पित कराधान योजना उस व्यक्ति द्वारा अपनाई जा सकती है जो माल ढुलाई करने, किराये अथवा पट्टेदारी के व्यापार में संलग्न है तथा जो वर्ष के दौरान किसी समय ..............से अधिक मालवाहक वाहनों का मालिक न हो

(क) 50 (ख) 30

(ग) 10 (ख) 5

सही उत्तर : (ग)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 44कङ की प्रकल्पित कराधान योजना उस व्यक्ति द्वारा अपनाई जा सकती है जो माल ढुलाई करने, किराये अथवा पट्टेदारी के व्यापार में संलग्न हैं तथा जो वर्ष के दौरान किसी समय 10 से अधिक मालवाहक वाहनों का मालिक न हो

इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है

प्रश्न 14. धारा 44कड की प्रकल्पित कराधान योजना को अपनाने के इच्छुक व्यक्ति की आय की गणना @रू. 5,000 प्रति माह पर आंकी जाएगी जिस वर्ष में उसने मालवाहक वाहन खरीदा था तथा ऐसे महीने का भाग नजरअंदाज किया जाएगा

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

एक व्यक्ति जो धारा 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना को चुनने का इच्छुक हो, की स्थिति में भारी वाहन की के लिए, आय उस प्रति महीने या आंशिक महीने के लिए कुल माल वाहन के रू. 1,000 प्रति टन की दर पर आंकी जाएगी जिसके दौरान करदाता के पास भारी माल वाहन थे। भारी माल वाहक वाहनों को छोड़कर अन्य वाहनों की स्थिति में आय उस प्रति महीनें या आंशिक महीनों के लिए रू. 7,500 की दर पर आंका जाएगा जिसके दौरान माल वाहक वाहन करदाता के पास है। आंशिक महीने को पूरे महीनें के तौर पर समझा जाएगा।

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 15. धारा 44कड के प्रावधानों को अपनाने वाली साझेदारी फर्म प्रकल्पित दर पर आंकी गई आय से सांझेदारों (आयकर अधिनियम के अनुसार आंका गया) को दिए गए पारिश्रमिक और ब्याज के कारण अग्रिम कटौती का दावा कर सकता है

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

प्रकल्पित कराधान योजना को चुनने वाले एक करदाता,सांझेदार फर्म होने के नाते, की स्थिति में वह प्रकल्पित दर पर आकी गई आय से सहभागियों (आयकर अधिनियम के अनुसार आंके गए) को दिए गए पारिश्रमिक और ब्याज के कारण अग्रिम कटौती का दावा कर सकती है।

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है