आधार-पैन लिंकिंग पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय
रिलीज़ दिनांक
10/06/2017
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भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
नर्इ दिल्ली, 10 जून, 2017
प्रेस विज्ञप्ति
आधार-पैन लिंकिंग पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय
1. माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में आयकर अधिनियम की धारा 139कक को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है जो पैन के लिए आवदेन करने में आधार संख्या साथ ही साथ आयकर विवरणी को दाखिल करने के लिए उद्धृतीकरण की अपेक्षा करता है।
2. न्यायालय का मानना है कि "संसद अधिनियम की धारा 139कक को अधिनियमित करने के लिए पूरी तरह से सक्षम है और इस कानून को बनाने के लिए इसके अधिकार इस न्यायालय के आदेश द्वारा मंदित नहीं थे"। इसलिए प्रावधान को अभिनीत करने के लिए उच्चतम न्यायालय के पहले के आदेश इसका उल्लंघन नहीं करते।
3. न्यायालय ने संघटित किया है कि अधिनियम की धारा 139कक न तो भेदभावपूर्ण है न ही यह संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रतिष्ठापित समानता वाक्याशों का उल्लंघन करती है।
4. धारा 139कक संविधान के अनुच्छेद 19(1)(छ) का भी उल्लंघन नहीं करती अभी तक यह पैन आवदेन और आयकर विवरणी के लिए आधार नंबर देने और आधार नंबर के साथ पैन को जोड़ने को अनिवार्य करती है।
5. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा प्रस्तुत आयकर अधिनियम की धारा 139कक(1) को 1 जुलार्इ, 2017 से प्रभावी पैन के आवंटिन के लिए आवेदन करने के लिए और आय की विवरणी को दाखिल करने के लिए आधार आवेदन पत्र के आधार/नामांकन आर्इडी को अनिवार्य रूप से उद्धृत करने के लिए मुहैया कराया गया है।
6. आयकर अधिनियम की धारा 139कक(2) मुहैया कराती है कि प्रत्येक व्यक्ति जिसे 1 जुलार्इ, 2017 के अनुसार पैन आवंटित किया गया है और जो आधार को प्राप्त करने के लिए योग्य है, उसे केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किये जाने की तिथि को या उससे पहले अपने आधार को सूचित करेगा। धारा 139कक(2) के प्रावधान मुहैया कराते हैं कि आधार की गैर-सूचना की स्थिति में व्यक्ति को आवंटित पैन केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने की तिथि से अमान्य होना माना जाएगा।
7. उच्चतम न्यायालय ने धारा 139कक(1) का समर्थन किया है जो नए पैन आवेदन साथ ही साथ विवरणी को दाखिल करने के लिए आधार को उद्धृत करने का अनिवार्य करती है
8. उच्चतम न्यायालय ने धारा 139कक(2) को कायम रखा है जो आवश्यक बनाती है कि आधार नंबर को पैन के साथ जोड़ने के लिए निर्धारित प्राधिकारी को सूचित किया जाना चाहिए।
9. यह धारा 139कक(2) का एकमात्र प्रावधान है जहाँ उच्चतम न्यायालय ने, उच्चतम न्यायालय की सबसे बड़ी पीठ के सामने अन्य मामलों के लंबित समाधानों पर फिलहाल आंशिक रोक लगार्इ है। उच्चतम न्यायालय ने निम्नानुसार स्पष्ट रूप से कहा है :
"125. ऐसा कहने पर, यह उक्तकथित निर्णय से स्पष्ट हो जाता है कि पैन के लिए आवेदन करते समय जो पैनधारक नहीं है उनको आधार नंबर देना आवश्यक है। यह धारा 139कक की उप-धारा (1) की संलग्नता है जो पहले ही कायम रखी गर्इ है। इसी समय, जहाँ तक मौजूदा पैनधारकों का प्रश्न है, चूंकि विवादित प्रावधान पर संविधान के अनुच्छेद 21 के मापदंड पर विचार किया जाना है, अनुच्छेद 21 के अवयव के तौर पर निजता के अधिकार और मानवीय गरिमा अदि पर विचार-विमर्श के साथ हमारा मानना है कि जबतक अनुच्छेद 21 के उक्तकथित पहलू संवैधानिक पीठ द्वारा अधिनिर्णित नहीं होती उक्तकथित प्रावधानों पर आंशिक रोक आवश्यक है। जिन्होंने पहले से अपने आप को आधार योजना के अंतर्गत नामांकित किया है उनको अधिनियम की धारा 139कक की उप-धारा (2) की आवश्यकता का अनुपालन करना होगा। जो नामांकन करना चाहते हैं वह ऐसा करने के लिए मुक्त हैं। हालांकि जो निर्धारिती आधार कॉर्ड धारक नहीं हैं और धारा 139(2) के प्रावधानों का पालन नहीं करते उनके पैन को अमान्य के तौर पर नहीं समझा जाएगा। यह अन्य लेनदेनों को सुविधा देने के लिए है जो नियमों के नियम 114ख में निर्दिष्ट है। हम एक से अधिक कारण के लिए इस क्रियाविधि को अपना रहे हैं। हम ऐसा हर गंभीर परिणाम के कारण कह रहे हैं जो अधिनियम की धारा 139कक की उप-धारा (2) की अनिवार्यता का पालन करने में आवश्यक नहीं है। एक व्यक्ति जो पैनधारक है और यदि उसका पैन आमान्यकृत होता है तो उसे अपने दैनिक कार्यवाही में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिस स्थिति से बचना चाहिए जबतक संवैधानिक शाखा आधिकारिक रूप से संविधान के अनुच्छेद 21 के तर्क को निर्धारित न कर ले। चूंकि हम अंतर्काल में इस कार्यविधि को अपना रहे हैं इसलिए संसद द्वारा यह विचार करना संभव होगा कि परिणामों को सीमित करके कथित प्रावधानों के प्रभाव को कम करने की आवश्यकता है या नहीं।
10. अंतत: निर्णय का प्रभाव निम्नानुसार है
(i) 1 जुलार्इ, 2017 से प्रत्येक व्यक्ति जो आधार को प्राप्त करने के योग्य है उनको आयकर विवरणी को भरने साथ ही साथ पैन के लिए आवदेन करने के लिए अपने आधार नामांकन आर्इडी पर आधार संख्या को उद्धृत करना होगा।
(ii) प्रत्येक व्यक्ति जिसे 1 जुलार्इ, 2017 के अनुसार स्थार्इ खाता संख्या आंवटित की गर्इ है और जिनके पास आधार संख्या है या जो आधार नंबर को प्राप्त करने के योग्य है वह आधार के साथ पैन को जोड़ने के लिए आयकर प्राधिकारियों को अपनी आधार संख्या की सूचना देंगे।
(iii) हालांकि, उक्त बिंदु सं. (ii) के गैर-अनुपालन के लिए, न्यायालय द्वारा एक आंशिक राहत उनको दी गर्इ है जिनके पास आधार नहीं है और फिलहाल आधार को प्राप्त नहीं करना चाहते, उनका पैन निरस्त नहीं होगा जिससे पैन को उद्धृत करने के लिए आयकर अधिनियम के अंतर्गत अन्य परिणाम उत्पन्न न हो सके।
(मीनाक्षी जे गोस्वामी)
आयकर आयुक्त
(मीडिया व तकनीकी नीति)
आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी

